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अंग्रेजी शराब की दुकान का ताला तोड़कर शराब और नगदी समेत लाखों की चोरी, जांच पड़ताल में जुटी पुलिस
Kunda, Uttar Pradesh:कुंडा कोतवाली क्षेत्र के खेमीपुर चौराहा स्थित अंग्रेजी शराब की दुकान में अज्ञात चोरों ने शटर का ताला तोड़कर लाखों रुपये की चोरी की घटना को अंजाम दिया है।इस घटना के बारे में जानकारी देते हुए, दुकान के मालिक सुशीला सिंह निवासी सराय सैयद खां हथिगवां ने बताया कि रात में अज्ञात चोरों ने दुकान के शटर का ताला तोड़ दिया और दुकान से लाखों रुपये की शराब और अन्य सामान चोरी कर लिया। मामले की लिखित शिकायत कुंडा पुलिस से की है।
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गाय ने आदमी को चोर से बचा लिया
Noida, Uttar Pradesh:COW SAVED THE MAN FROM THIEF0
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गुरुग्राम में मनोहर लाल के साथ किसान यूनियन की बैठक, विरोध पर फैसला संभव
Gurugram, Haryana:गुरूग्राम - भारतीय किसान यूनियन (गैर राजनीतिक )के जगजीत डल्लेवाल समेत प्रतिनिधिमंडल और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के बीच बैठक शुरू गुरूग्राम के पीडब्ल्यूयुडी रेस्ट हॉउस में हो रही हैं बैठक बैठक में खानौरी बॉर्डर पर चल रहे विरोध प्रदर्शन से जुडी हुई मांगों को लेकर बैठक में हो रही हैं चर्चा इस बैठक में किसानों कि मांगों को लेकर लिया जा सकता हैं कोई बड़ा फैसला केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के साथ किसान संगठन कि हो रही बैठक से फिलहाल मीडिया को रखा हुआ दूर0
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बक्सर में शिक्षकों के दुष्कर्म मामले में पुलिस तेज कार्रवाई, दबिश जारी
Buxar, Bihar:बक्सर में शिक्षक और छात्रा से जुड़े दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। दोनों आरोपी शिक्षकों की गिरफ्तारी को लेकर पुलिस की अलग-अलग टीमें लगातार कई संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। पुलिस की इस कार्रवाई से जिले में हड़कंप मचा हुआ है। मामला हाई प्रोफाइल होने के बाद पुलिस भी आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर पूरी तरह सक्रिय है। बताया जा रहा है कि नथुनी अहीर डेरा मध्य विद्यालय में तैनात दो शिक्षकों पर अपने ही विद्यालय की पूर्व छात्राओं के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगा है। आरोप सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने दोनों शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है। वहीं, पुलिस अब आरोपियों की तलाश में लगातार दबिश दे रही है। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार करने की दिशा में कार्रवाई तेज कर दिया है0
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हजारीबाग के बरकट्ठा में गिद्धों की वापसी, पर्यावरण संतुलन के लिए बड़ी खबर
Noida, Uttar Pradesh:HazariBagh district के बरकट्ठा वन क्षेत्र से एक बेहद उत्साहित करने वाली खबर सामने आई है. एक समय भारत के जंगलों से लगभग खत्म होने की कगार पर पहुंच चुके दुर्लभ भारतीय गिद्ध (इंडियन वल्चर) अब बरकट्ठा की वादियों में बड़ी संख्या में नजर आ रहे हैं. बरकट्ठा के प्रसिद्ध महावर पहाड़ और कपका-कुरचुनोबेडो पुल के पास इन पक्षियों को झुंड में देखा गया है. वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए यह किसी बड़ी उपलब्धि से कम नहीं है. क्योंकि यह इलाका एक बार फिर प्राकृतिक रूप से इन पक्षियों का सुरक्षित घर बनता दिख रहा है. डिस्ट्रिक्ट फारेस्ट ऑफिसर मौन प्रकाश ने जानकारी दी है कि पिछले कुछ दिनों से जंगल के अलग-अलग हिस्सों में गिद्धों की हलचल काफी बढ़ गई है. सबसे खुशी की बात यह है कि इस झुंड में एडल्ट गिद्धों के साथ-साथ छोटे और कम उम्र के गिद्ध भी दिखाई दिए हैं. यह इस बात का साफ सबूत है कि महावर पहाड़ और आसपास का वातावरण इन दुर्लभ पक्षियों के लिए पूरी तरह अनुकूल है और वे यहां बिना किसी डर के अपना परिवार बढ़ा रहे हैं. महावर पहाड़ लंबे समय से इनका पसंदीदा ठिकाना रहा है और इनकी वापसी से क्षेत्र की हरियाली और जैव विविधता और समृद्ध हुई है. वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, 1980 के दशक तक भारत के आसमान में करोड़ों की संख्या में उड़ने वाले गिद्ध अचानक गायब होने लगे थे. जानवरों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली डाइक्लोफेनाक नाम की दर्द निवारक दवा, जंगलों की कटाई और भोजन की कमी के कारण इनकी आबादी में 99 प्रतिशत तक की रिकॉर्ड गिरावट आई. स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि पूरे देश में इनकी संख्या महज कुछ हजारों में सिमट कर रह गई. भारत में पाई जाने वाली गिद्धों की नौ प्रजातियों में से भारतीय गिद्ध, सफेद पीठ वाला गिद्ध, पतली चोंच वाला और लाल सिर वाला गिद्ध सबसे ज्यादा खतरे (क्रिटिकली एनडेंजर्ड) में हैं. गिद्धों की इस तरह वापसी पर्यावरण के संतुलन के लिए बेहद जरूरी और ऐतिहासिक मानी जा रही है. क्योंकि गिद्ध कुदरत के सफाईकर्मी होते हैं. इस बीच वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार पारिस्थितिक तंत्र और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए गिद्ध रोगरहित शवों को साफ करते हैं, जिससे रोगों के प्रसार को रोकने में मदद मिलती है. समुदाय आधारित संरक्षण से स्थानीय ग्रामीणों, चरवाहों और मवेशी पालकों को संरक्षण अभियानों से जोड़कर शवों में विष मिलाने जैसी घटनाओं को रोकने में भी सफलता मिल रही है. प्रतिबंधित दवाओं की सख्त निगरानी के साथ वन विभाग क्षेत्र में एक समर्पित संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र स्थापित करने की योजना बना रहा है. इस केंद्र के माध्यम से गिद्धों की संख्या में तेज़ी से वृद्धि की जाएगी, जिससे प्राकृतिक पर्यावरण संतुलन को सदैव बनाए रखा जा सके।0
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आँखों पर पट्टी बांधकर वह चित्र बनाती है
Noida, Uttar Pradesh:with blindfolded she paints0
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पूल में आदमी का मजेदार गिरना वीडियो
Noida, Uttar Pradesh:MAN FALL IN A POOL IN FUNNY WAY0
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चाय के गिलास को आधे में काटना: सच क्या है?
Noida, Uttar Pradesh:cut a glass of tea in half0
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मध्यप्रदेश में गिद्धों की संख्या 11,233 पर पहुंची: संरक्षण की नई बहार
New Delhi, Delhi:गिद्दों की एमपी में बड़ी आबादी पर्यावरण और इंसानों के लिए अच्छी खबर, डाइक्लो फैनिक दवा के चलते घटी थी आबादी,वाइल्ड लाइफ आईएफएस अधिकारी बोले सबसे बड़े सफाई कर्मी गिद्ध - एमपी गिद्दों की आबादी में अव्वल... - गिद्दों की बड़ी आबादी पर्यावरण सफाई और संरक्षण के लिए अहम... - आईएफएस अधिकारी बोले सबसे बड़े सफाई कर्मी गिद्द... - पशुओ के मरने में बढ़ मांश सड़ने के बाद सिर्फ गिद्ध खाता है... - गिद्ध के पेट मे एक ऐसा एसिड होता है जो बीमार जानवर के सढ़े मांश को पचा लेता है... - गिद्दों की गणना साल में दोबारा होती है एमपी में... - पहली सर्दियों जनवरी फरवरी में - पहली गर्मी में अप्रैल-मई - एक बार गणना में 15642 - जबकि दूसरी गणना में 11120 गिद्द मिले... - गिद्दों के मरने का कारण पशुओं को दर्द निवारक दी जाने वाली डाइक्लो फैनिक दवा से गिद्दों की मौत हुई... - साल 2000 के आसपास गिद्दों गायब हुए... - साल 2006 में डिक्स्लो फैनिक दवा प्रतिबंधित की गई - आईएफएस अधिकारी विजय कुमार ने जानकारी दी - पॉइंट काउंट मेथड से गद्दों की गणना की जाती है...ये गणना तीन दिन चलती है... - सुबह 6-9 बजे तक गणना होती है.. - गिद्दों की 7 प्रजाति एमपी में पाई जाती है जिनमे 4 लोकल है 3 बाहरी है... - मध्यप्रदेश में गिद्ध संरक्षण की दिशा में भोपाल स्थित केरवा गिद्ध प्रजनन केन्द्र से 6 गिद्धों को कल पहली बार प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा गया। उक्त गिद्धों पर GPS ट्रैकर लगाए गए हैं, जिससे उनके आवागमन, व्यवहार एवं सुरक्षा की सतत निगरानी सुनिश्चित की सके। - गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनका संरक्षण न केवल जैव विविधता की रक्षा हेतु आवश्यक है, अपितु पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की दृष्टि से भी अनिवार्य है। राज्य शासन द्वारा गिद्धों सहित अन्य संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण हेतु सतत प्रयास किए जा रहे हैं। गिद्धों को पसंद आया 'अपना मध्यप्रदेश'...अत्यंत हर्ष का विषय है कि मध्यप्रदेश विलुप्त होती प्रजातियों के लिए उम्मीदों का नया बसेरा बन रहा है। मध्यप्रदेश सरकार के प्रयासों से प्रदेश में गिद्धों की संख्या में उत्साहजनक वृद्धि देखने को मिली है। प्रदेश में गिद्धों की संख्या 11,233 होना एक सुखद संकेत है। बाघ, चीता और तेंदुआ स्टेट मध्यप्रदेश 'जीव चराचर जंतु समाना' की भावना को चरितार्थ करता है। हम जैव-विविधता संरक्षण हेतु प्रतिबद्ध हैं और अपने प्रयासों से प्रदेश को विभिन्न prाणियों की अठखेलियों का सुरक्षित आंगन बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाते रहेंगे। मघ्यप्रदेश को इस उपलब्धि पर पुनः बधाई।0
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खबर उपलब्ध नहीं: सामग्री में स्पष्ट समाचार नहीं मिला
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मोहनिया में 682 लीटर अवैध शराब बरामद, दो हरियाणा के तस्कर गिरफ्तार
Khajuria Khurd, Bihar:मोहनिया में 11 लाख का अवैध शराब बरामद, दो तस्कर गिरफ्तार गुप्त सूचना पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने दो कारों से 682 लीटर शराब जब्त की, आरोपी हरियाणा के रहने वाले हैं。 चेकपोस्ट प्रभारी संतोष कुमार श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस को क्षेत्र में अवैध शराब की तस्करी की गुप्त सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही एक विशेष टीम का गठन कर छापेमारी के लिए भेजा गया। कार्रवाई के दौरान 'कुलहड़िया मोड़' के पास से पुलिस ने दो संदिग्ध कारों को रोका। इस दौरान एक कार चालक, जिसकी पहचान दीपक कुमार के नाम से हुई, वाहन लेकर भागने का प्रयास करने लगा। उसकी गाड़ी अनियंत्रित होकर गड्ढे में जा गिरी, जिससे कार क्षतिग्रस्त हो गई। पुलिस ने घेराबंदी कर दीपक कुमार को धर दबोचा। वहीं दूसरी कार के चालक सोमबीर कुमार को भी मौके से गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों कारों की गहन तलाशी लेने पर उनमें से कुल 682 लीटर अवैध शराब बरामद हुई। पुलिस के अनुसार जब्त की गई शराब का अनुमानित बाजार मूल्य लगभग 9 से 11 लाख रुपये है। प्राथमिक पूछताछ में पता चला है कि गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपी हरियाणा के निवासी हैं। वे शराब की इस बड़ी खेप को मोहनिया के रास्ते सासाराम की ओर ले जाने की फिराक में थे। पुलिस ने दोनों आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और तस्करी के इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों का पता लगाने के लिए आगे की जांच और पूछताछ जारी है。0
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आचार संहिता के बीच मकराना में फ्लैग मार्च से शांति और सुरक्षा का संदेश
Didwana, Rajasthan:मकराना में नगर निकाय चुनाव को लेकर आचार संहिता लागू होने के बीच पुलिस प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आमजन में सुरक्षा का संदेश देने के उद्देश्य से गुरुवार को मकराना शहर में फ्लैग मार्च निकाला। पुलिस अधीक्षक प्यारेलाल शिवरान के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र शर्मा, मकराना सीओ विक्की नागपाल, मकराना थानाधिकारी पंकज मांझु, बडू थानाधिकारी जगदीश मीणा एवं परबतसर थानाधिकारी सुमन गूंदेला के नेतृत्व में पुलिस के संयुक्त स्टाफ ने शहर के प्रमुख मार्गों से फ्लैग मार्च किया। फ्लैग मार्च की शुरुआत मकराना पुलिस थाने से हुई। पुलिस टीम बाईपास तिराया, गौड़ाबास, रेलवे स्टेशन और सदर बाजार सहित शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए वापस मकराना पुलिस थाने पहुंची। इस दौरान पुलिस अधिकारियों एवं जवानों ने पैदल व वाहनों के माध्यम से शहर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने का संदेश दिया। आगामी नगर निकाय चुनाव को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष एवं भयमुक्त वातावरण में संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। फ्लैग मार्च के माध्यम से पुलिस ने असामाजिक तत्वों को भी कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ नहीं करने का संदेश दिया। पुलिस अधिकारियों ने आमजन से चुनाव के दौरान शांति एवं सौहार्द बनाए रखने तथा लागू आचार संहिता की पूर्ण पालना करने की अपील की। साथ ही कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली किसी भी गतिविधि के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। फ्लैग मार्च में पुलिस का संयुक्त स्टाफ मौजूद रहा।0
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शिक्षक की वापसी विवाद: धरने पर बैठे छात्र, शिक्षा महकमे पर सवाल
Balrampur, Uttar Pradesh:बलरामपुर शिक्षक की वापसी को लेकर सड़क पर उतरे छात्र करीब 15 दिन पहले शिक्षक मनोज गुप्ता को संयुक्त संचालक सरगुजा ने किया था निलंबित स्कूल की दो महिला शिक्षकों ने मनोज गुप्ता पर लगाये थे गंभीर आरोप इसके बाद अब शिक्षक मनोज गुप्ता की वापसी और मामले की दुबारा जांच की मांग को लेकर टेंट लगाकर धरने पर बैठे स्कूल के बच्चे इसके पहले भी बच्चों ने शिक्षक मनोज गुप्ता की वापसी में लिए गांव में निकाले थे रैली राजनीति का अखाड़ा बनता जा रहा है शिक्षा का मंदिर तहसीलदार और ABO की समझाइश के बाद स्कूल वापस लौटे छात्र वाड्रफनगर विकासखंड के भरुही बांस माध्यमिक स्कूल का मामला DEO मनी राम यादव ने वाड्रफनगर विकासखंड शिक्षा अधिकारी के ऊपर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है वाड्रफनगर विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने बिना कोई आदेश के स्कूल में पदस्थ दो महिला शिक्षकों को अन्य जगहों पर अटैच कर दिए जो नियम के विरुद्ध है ।0
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इकबालगढ़ हाईवे पर हिट-एंड-रन: पति-पत्नी घायल, चालक भाग निकला; CCTV में कैद
Palanpur, Gujarat:બનાસકાંઠા .... અમીરગઢના ઈકბાલગઢમાં હાઇવે ઉપર હિટ એન્ડ રનની ઘટના... ઈકબાલગઢ હાઇવે પર બાઈક ચાલક પતિ-પત્નીનેં પાછળથી આવી કાર ચાલકે મારી ટક્કર.. અકાત્મસ્મતા કારના આગલા ભાગમાં બાઈક ફસાઈ જતા 500મીટર કરતા વધારે દૂર બાઈક ઘસેડાયું અકાત્મસતામાં પત્નીનેં પગ અને કમરના ભાગે ઈજાઓ તો પતિનેં માથામાં ગંભીર ઈજાઓ પહોંચી.. કાર ચાલક બાઈકને અડફેટે લઈને થયો ફરાર અકાત્મસ્મતાના પગલે લોકોના ટોળા એકઠા થયા તેમજ ઘાયલોને સારવાર અર્થે ખસેડ્યા પાલનપુર હોસ્પિટલમાં અકાત્મસત્યની સમગ્ર હાઈવેની હોટલમાં લગાવેલ CCTV કેમેરામાં થઈ કેદ ...0
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इंदापुर में पापा पर बेटों का काठी से हमला, FIR दर्ज
Rui, Maharashtra:इंदापूर - पोटच्या पोरांकडून बापाला बेदम मारहाण, FIR दाखल\n\nज्या बापाने बोट धरून चालायला शिकवलं, पोटाला चिमटा काढून पोरांना वाढवलं, त्याच बापाला पोटच्या दोन पोरांनी काठीने बेदम मारहाण केली. काळीज पिळवटून टाकणारी ही घटना घडलीय पुण्याच्या इंदापूरमध्ये घडलीय त्याठिकानाहून आढावा घेतला आहे आमचे प्रतिनिधी जावेद मुलाणी याने0
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कश्मीर के इंटर्न डॉक्टर 30,000 रुपये स्टाइपेंड मांगते, भूख हड़ताल की चेतावनी
Chaka, पिछले कुछ दिनों में, पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती और उनकी बेटी व पार्टी नेता इल्तिजा मुफ़्ती ने श्रीनगर के अलग-अलग हेल्थकेयर सेंटर्स पर जाकर विरोध कर रहे मेडिकल इंटर्न के साथ एकजुटता दिखाई है। इल्तिजा मुफ़्ती ने पहले गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (GMC) श्रीनगर में हड़ताल कर रहे MBBS और BDS इंटर्न से मुलाक़ात की, जबकि महबूबा मुफ़्ती ने बाद में SKIMS बेमिना में कैंडललाइट प्रदर्शन के दौरान विरोध कर रहे मेडिकल इंटर्न से मुलाक़ात की। इन मुलाक़ातों के दौरान, PDP नेताओं ने हेल्थकेयर ट्रेनीज़ से सीधे बात की, उनके मासिक स्टाइपेंड को ₹12,300 से बढ़ाकर ₹30,000 करने की लंबे समय से लंबित मांग के बारे में उनकी शिकायतें सुनीं और इस मुद्दे को हल करने में प्रशासन की देरी की कड़ी आलोचना की। इल्तिजा मुफ़्ती ने कहा “ये मेडिकल इंटर्न चार दिनों से हड़ताल पर हैं और उनकी मांग बिल्कुल सही है। उन्हें अभी महीने में सिर्फ़ 12,300 रुपये मिलते हैं—यानी रोज़ाना लगभग 400 रुपये। आज तो एक मज़दूर को भी रोज़ाना 800 रुपये मिलते हैं। तो आप ही बताइए, इन बच्चों की क्या गलती है? सरकार बार-बार—वही सरकार, जब किसी मंत्री या MLA की सैलरी 1.5 से 3 लाख रुपये तक बढ़ानी होती है—तो उस बिल को तेज़ी से पास कर देती है। मंत्रियों के खर्च, सुविधाओं और गाड़ियों के काफिले के लिए तो आपके पास पैसे हैं, लेकिन इनके मामले के लिए आपके पास पैसे नहीं हैं; आपके हाथ बंधे हुए हैं। तो आप ही बताइए, समस्या क्या है? और इन बच्चों की मांग बिल्कुल साफ़ है—जब स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री कहते हैं कि फ़ाइल वित्त विभाग के पास है, तो यह बहाना काम नहीं आएगा। वित्त विभाग तो आपके ही अधीन है, मुख्यमंत्री जी। क्या आपको उनका दर्द दिखाई नहीं देता? क्या आप उनकी परेशानियां और चिंता नहीं समझ सकते? यह सब साफ़-साफ़ दिख रहा है। और जम्मू-कश्मीर के सभी अस्पतालों का कामकाज प्रभावित हो रहा है क्योंकि वे एक जायज़ हड़ताल पर हैं। 36 घंटे की शिफ्ट के लिए रोज़ाना दिहाड़ी ₹400: कश्मीर में इंटर्न डॉक्टर सम्मान की लड़ाई लड़ रहे हैं, विरोध-प्रदर्शन का चौथा दिन सरकार ने अब भी सुध नही ली। थके-हारे डॉक्टरों ने अब 5 सितंबर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने का फ़ैसला किया है। जम्मू-कश्मीर के सरकारी अस्पतालों के धुंधले गलियारों में, युवा डॉक्टर अपनी पूरी ऊर्जा खपाकर काम कर रहे हैं। वे लगातार 36 घंटे की शिफ्ट में काम करते हैं, जिसमें भीड़-भाड़ वाली OPD, इमरजेंसी वार्ड और नाइट ड्यूटी संभालना शामिल है; इस दौरान उन्हें आराम करने या अपनी बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करने का भी समय नहीं मिल पाता। इस इलाके में पब्लिक हेल्थकेयर सिस्टम की रीढ़ माने जाने वाले इन डॉक्टरों को इस कड़ी मेहनत के लिए रोज़ाना लगभग ₹400 मिलते हैं। यानी महीने का स्टाइपेंड सिर्फ़ ₹12,300। डॉ. तस्सदुक ने कहा, "यह तो आम समझ की बात है कि जिस तरह से हम काम करते हैं, उसमें हमारा हफ्ते का वर्कलोड लगभग 80 से 90 घंटे का होता है। कभी-कभी तो हम खाना भी नहीं खा पाते, हमारी शिफ़्ट 30 से 35 घंटे से ज़्यादा की होती है, और हमें क्या मिलता है? दिन के 400 रुपये, 410 रुपये। यह सही नहीं है, मेरा मतलब है कि हमारी सरकार को सोचना चाहिए कि हम उन्हीं के डॉक्टर हैं; यह अच्छा नहीं लगता कि हमारे डॉक्टर सड़कों पर उतर रहे हैं। हमारी सेहत और हमारी स्थिति पर ध्यान न देना अधिकारियों के लिए बहुत शर्मनाक बात है। और इससे भी ज़्यादा शर्मनाक बात यह है कि हम चार दिनों से हड़ताल पर हैं और कोई भी हमसे बात करने नहीं आया है। अभी कोई हमारी बात नहीं सुन रहा है। अगर हम यूपी की बात करें, तो हाल ही में कुछ ही दिनों में वहां स्टाइपेंड लगभग 12,000 से बढ़ाकर 25,000 कर दिया गया, तो यहां की सरकार भी ऐसा कर सकती है, लेकिन पता नहीं वे ऐसा क्यों कर रहे हैं, हमें वजह नहीं पता। इसलिए हम अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं; हम तब तक यह हड़ताल खत्म नहीं करेंगे जब तक हमें तुरंत लागू होने वाला ऐसा आदेश नहीं मिल जाता जिसमें यह लिखा हो कि हमारा स्टाइपेंड लगभग 12,300 से बढ़ाकर 30,000 रुपये कर दिया गया है। हम झूठे आश्वासनों और झूठी उम्मीदों पर भरोसा नहीं कर रहे हैं। हम सिर्फ़ एक ही चीज़ पर भरोसा करेंगे: कि आदेश हमारे सामने आए और हम अपनी ड्यूटी पर वापस लौटें।" जो शुरुआत एक शांत मांग के तौर पर हुई थी, वह अब एक पक्के इरादे वाले, शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन में बदल गई है जो लगातार चौथे दिन भी जारी है। जम्मू-कश्मीर के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों और SKIMS बेमिना के MBBS और BDS इंटर्न सड़कों और अस्पताल परिसर में उतर आए हैं। उनकी मांग सीधी, ज़रूरी और लंबे समय से लंबित है: इंटर्नशिप स्टाइपेंड को तुरंत बढ़ाकर ₹30,000 प्रति माह किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर सरकार और देरी करती है, तो वे 5 सितंबर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर देंगे। डॉ. तानिया ने कहा, "सर, इंटर्नशिप के लिए हमें जो स्टाइपेंड मिलता है, उसे 2019 में बदला गया था। तब हमारे लिए यह 12,300 रुपये तय किया गया था। लेकिन महंगाई और बढ़ती कीमतों को देखते हुए, 2025 में हमारे लिए एक कमेटी बनाई गई। उस कमेटी ने कहा कि हमें 25,000 रुपये से ज़yada का इंटर्नशिप स्टाइपेंड दिया जाएगा। इसी सिलसिले में हमने अपनी फ़ाइल फ़ाइनेंस डिपार्टमेंट को सौंपी। इन तीन सालों में हम कई बार सकीना मैडम से मिले हैं। हमारे CIS, हमारे बैच के सभी लोग चले गए हैं। लेकिन ज़मीनी स्तर पर हमें कोई काम नहीं मिल रहा है। हमें बस यही भरोसा दिलाया गया है कि हमारी फ़ाइल प्रोसेस हो रही है। इसलिए, सर, अब हम मजबूर हैं क्योंकि हमारी बात नहीं सुनी जा रही है। अभी तक कोई सरकारी अधिकारी हमसे मिलने नहीं आया है। इसी वजह से हम हड़ताल पर हैं। अब, यह हड़ताल अनिश्चितकालीन है। जब तक हमें हमारा हक़ नहीं मिल जाता, जब तक हमें 30,000 रुपये नहीं मिल जाते, तब तक हम यहां से नहीं हटेंगे।" देश के दूसरे हिस्सों में मेडिकल इंटर्न को आम तौर पर महीने में 45,000 रुपये तक मिलते हैं, लेकिन कश्मीर में, जो युवा प्रोफ़ेशनल दिन-रात इमरजेंसी डिपार्टमेंट चलाते हैं, उनसे उम्मीद की जाती है कि वे उस रकम के आधे से भी कम में गुज़ारा करें। यह कोई नया मामला नहीं है। 27 जून 2023 को, हेल्थ एंड मेडिकल एजुकेशन डिपार्टमेंट ने सरकारी आदेश संख्या 538-JK(HME) (2023) के ज़रिये स्टाइपेंड की समीक्षा के लिए एक कमेटी बनाई। उस कमेटी ने इसे बढ़ाकर 25,000 रुपये करने की सिफ़ारिश की। लेजिस्लेटिव असेंबली में इस सिफ़ारिश को माना गया। हेल्थ डिपार्टमेंट ने प्रस्ताव पर काम किया और उसे फ़ाइनेंस डिपार्टमेंट को भेज दिया। वहाँ यह फ़ाइल सवालों, और जानकारी की माँग और अफ़सरशाही की देरी में फंसी रही। अक्टूबर 2024 में, इंटर्न मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मिले और अपनी बात रखी। फिर भी, कोई प्रगति नहीं हुई। जम्मू-कश्मीर की स्वास्थ्य मंत्री सकीना इत्तू का कहना है कि मामले की समीक्षा की जा रही है और वित्त विभाग इसके वित्तीय असर की जांच कर रहा है। उन्होंने बढ़ती महंगाई और वेतन बढ़ाने की ज़रूरत को माना, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि हड़ताल पर जाने की कोई ज़रूरत नहीं है, क्योंकि इससे मरीज़ों की देखभाल पर असर पड़ता है। इंटर्न मरीज़ों की चिंता को समझते हैं। वे इसे दूसरों से ज़्यादा गहराई से महसूस करते हैं। विरोध-प्रदर्शन के दौरान भी, उन्होंने अपनी ज़रूरी ड्यूटी जारी रखी है, खासकर इमरजेंसी विभागों में। वे नहीं चाहते कि मरीज़ों को कोई परेशानी हो। लेकिन वे यह मानने से भी इनकार करते हैं कि उनकी अपनी थकान, कम वेतन और सालों की अनदेखी को सिस्टम की एक स्वीकार्य कीमत माना जाए। अब उन्हें खोखले वादे नहीं चाहिए, उन्हें एक पक्का आदेश चाहिए, तभी वे ड्यूटी पर लौटेंगे; वरना उन्होंने 5 सितंबर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर जाने का कड़ा फ़ैसला किया है।0
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