230204फरियाद से दहशत तक:साहूमई गांव की एक रात ने भरोसा तोड़ दिया, 9महिला,5 बच्चों समेत 23 गिरफ्तार
Kunda, Uttar Pradesh:मानिकपुर थाना क्षेत्र के साहूमई गांव में जो कुछ हुआ, वह अब सिर्फ एक पुलिस कार्रवाई का मामला नहीं रह गया है। यह घटना एक ऐसे गांव की कहानी बन चुकी है, जहां न्याय की गुहार डर में बदल गई और जहां आज भी लोग अपने ही घरों में सहमे हुए हैं।
घटना की शुरुआत उस समय हुई, जब गांव के कुछ लोग अपनी शिकायत लेकर थाने की चौखट तक पहुंचे। गांव का कहना है कि उनकी फरियाद नहीं सुनी गई और मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। समय रहते सुनवाई होती तो हालात शायद यहां तक न पहुंचते—यह सवाल अब पूरे इलाके में उठ रहा है।
इसके बाद आई वह रात, जिसने साहूमई को भीतर से तोड़ दिया।
रात के अंधेरे में पुलिस की दबिश हुई। गांव के लोग बताते हैं कि उस समय घरों में बच्चे सो रहे थे, बुजुर्ग चारपाइयों पर थे और महिलाएं घर के काम समेट रही थीं। अचानक हुई कार्रवाई में महिलाओं, पुरुषों और यहां तक कि छोटे बच्चों को भी उठाया गया। किसी को कपड़े बदलने का मौका नहीं मिला, किसी को बच्चों को संभालने का।
सुबह जब गांव जागा तो हालात बदले हुए थे।
गलियों में सन्नाटा था।
चूल्हे नहीं जले।
स्कूल जाने वाले बच्चे घरों से नहीं निकले।
सबसे ज्यादा पीड़ा उस समय सामने आई जब महिलाओं और बच्चों पर भी थाना जलाने जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज होने की बात सामने आई। गांव के बुजुर्ग आज भी यह कहते नहीं थकते कि उन्होंने अपने जीवन में बहुत कुछ देखा, लेकिन ऐसा आरोप और ऐसा डर कभी नहीं देखा।
घटना के बाद से साहूमई में भय का माहौल है। बच्चे अब खेलते नहीं, हर आवाज पर चौंक जाते हैं। मांएं उन्हें घर से बाहर भेजने से डरती हैं। कई परिवारों ने अपने बच्चों को रिश्तेदारों के यहां भेज दिया है। गांव के बुजुर्ग दरवाजों पर बैठकर सूनी गलियों को देखते रहते हैं—उनकी आंखें बहुत कुछ कहती हैं, लेकिन जुबान खामोश है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की इस कार्यशैली ने भरोसे को गहरा आघात पहुंचाया है। जिस पुलिस को सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है, उसी से आज लोग डरने लगे हैं। गांव में लोग खुलकर बोलने से कतराते हैं और रात होते ही घरों के दरवाजे जल्दी बंद हो जाते हैं।
साहूमई की यह कहानी सिर्फ एक गांव की नहीं है। यह उस सवाल को जन्म देती है कि क्या फरियाद करना अब भी सुरक्षित है?
और क्या कानून का डर, अपराध से बड़ा हो सकता है?
आज साहूमई शांत है—लेकिन यह शांति सामान्य नहीं।
यह एक ऐसे गांव की खामोशी है,
जो अब भी अंदर-ही-अंदर रो रहा है।
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230204ज़हर से युवक की मौत के बाद उबाल, हाईवे जाम से पहले पुलिस ने किया लाठीचार्ज, मृतक के चाचा का फटा सिर
Kunda, Uttar Pradesh:प्रतापगढ़ जनपद के थाना मानिकपुर क्षेत्र अंतर्गत साहूमई विचलहला गांव में ज़हर से युवक सूरज की मौत के मामले ने उग्र रूप ले लिया। न्याय की मांग को लेकर शव के साथ हाईवे जाम करने जा रहे परिजनों और ग्रामीणों पर पुलिस ने अचानक लाठीचार्ज शुरू कर दिया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। इस कार्रवाई में मृतक सूरज के चाचा संतोष कुमार का सिर फट गया, वहीं कई ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए।
जानकारी के अनुसार, दो दिन पूर्व युवक सूरज का शव गांव के पास संदिग्ध परिस्थितियों में पड़ा मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ज़हर से मौत की पुष्टि हुई, लेकिन परिजनों का आरोप है कि यह मामला आत्महत्या नहीं बल्कि साजिशन हत्या का है। कार्रवाई में देरी और आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से नाराज़ परिजनों ने शव का अंतिम संस्कार रोक दिया और लगातार दो दिनों तक शव घर के पास रखा रहा। रविवार को परिजन और ग्रामीण शव को लेकर हाईवे की ओर बढ़े ताकि प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया जा सके। इसी दौरान पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। आरोप है कि बिना किसी उकसावे के पुलिस ने लाठियां भांजनी शुरू कर दीं, जिससे भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। लाठीचार्ज में कई ग्रामीण जमीन पर गिर पड़े और गंभीर चोटें आईं।
लाठीचार्ज के दौरान मृतक के चाचा संतोष कुमार के सिर में गंभीर चोट आई, जिससे खून बहने लगा। इसके अलावा कई ग्रामीणों को हाथ, पैर और पीठ में गंभीर चोटें आई हैं। घायलों को स्थानीय स्तर पर उपचार दिलाया गया, जबकि कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। स्थिति बिगड़ते देख मौके पर थाना हथिगवां, थाना कुंडा, थाना मानिकपुर और थाना नवाबगंज की पुलिस फोर्स तैनात की गई। कुंडा क्षेत्राधिकारी भी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। घंटों चली तनातनी और समझाइश के बाद हालात काबू में आए।पुलिस अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष जांच और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद परिजन शांत हुए, जिसके बाद मृतक सूरज का अंतिम संस्कार कराया गया। हालांकि लाठीचार्ज को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश बना हुआ है।इस मामले में परिजनों ने पहले ही तीन लोगों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराई है। वहीं अब ग्रामीण पुलिस की कार्रवाई की भी उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। गांव में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात कर दिया गया है और प्रशासन हालात पर नजर बनाए हुए है।
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