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त्रिकोण यात्रा: विन्ध्याचल में माता विंध्यवासिनी के दर्शन से भक्तों के कष्ट दूर
RMRAJESH MISHRA
Mar 18, 2026 13:31:58
Danti, Uttar Pradesh
सिद्धपीठ विन्ध्याचल में तीन रूपों के साथ विराजमान माता विंध्यवासिनी के धाम में त्रिकोण करने से भक्तो को सब कुछ मिल जाता है जो उसकी कामना होती है । भक्त नंगे पांव व लेट - लेटकर दंडवत करते हुए चौदह किलोमीटर की परिक्रमा कर धाम में हाजिरी लगाते है । जगत जननी माता विंध्यवासिनी अपने भक्तो का कष्ट हरण करने के लिए विन्ध्य पर्वत के ऐशान्य कोण में लक्ष्मी के रूप में विराजमान है । दक्षिण में माता काली व पश्चिम दिशा में ज्ञान की देवी सरस्वती माता अष्टभुजा के रूप में विद्यमान है । जब भक्त करुणामयी माता विंध्यवासिनी का दर्शन करके निकलते है तो मंदिर से कुछ दूर काली खोह में विराजमान माता काली का दर्शन मिलता है । माता के दरबार में उनके दूत लंगूर व जंगल में विचरने वाले पशु पक्षियों का पहरा रहता है । माता काली का मुख आकाश की ओर है । माता के इस दिव्य स्वरूप का दर्शन रक्तासुर संग्राम के दौरान देवताओं को मिला था । माता उसी रूप में आज भी अपने भक्तो को दर्शन देकर अभय प्रदान करती है । माता के दर्शन पाकर अपने आप को धन्य मानते है । मंदिर से निकलकर विन्ध्य पर्वत की उचाई चढने के लिए भक्त सीढियों के रास्ते आगे बढ़ते है । भक्त रोप वे के सहारे भी दर्शन कर रहे हैं। पर्वत पर निवास करने वाली माता अष्टभुजा ज्ञान की देवी सरस्वती के रूप में भक्तो को दर्शन देती है । माता का भव्य श्रृंगार उनके रूप को ओर मनोहारी बना देता है । माता के दरबार में हाजिरी लगाने के लिए पहुचे भक्त माला -फूल , नारियल व चुनरी के साथ ही प्रसाद अर्पण कर मत्था टेकते है । शक्ति पीठ विन्ध्याचल धाम में नवरात्र के दौरान माता के दर पर हाजिरी लगाने वालो की तादात प्रतिदिन लाखो में पहुच जाती है । औसनस पुराण के विन्ध्य खंड में विन्ध्य क्षेत्र के त्रिकोण का वर्णन किया गया है । विन्ध्य धाम के त्रिकोण का अनंत महात्म्य बताया गया है । भक्तो पर दया बरसाने वाली माता के दरबार में पहुचने वाले भक्तो के सारे कष्ट मिट जाते है । त्रिकोण पथ पर निकले भक्तो को माता के दरबार में आदिशक्ति के तीनो रूपों का दर्शन एक ही परिक्रमा में मिल जाता है । विन्ध्य क्षेत्र में दर्शन पूजन व त्रिकोण करने से अनंत गुना फल की प्राप्ति होती है । माता के दरबार में पहुचे भक्त परम आनन्द के साथ ही शांति प्राप्त करते है । जगत का पालन करने वाली माता के धाम में भक्त परम आनंद पाकर विभोर हो जाते है । उनकी सारी मनोकामना माता रानी पूरा करती है । पतित पावनी गंगा में स्नान के बाद माता के दर्शन करने से परम आनंद व सुख की अनुभूति होती है । त्रिकोण की महिमा अपरम्पार हैं।
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