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नवरात्र के चौथे दिन कुश्माण्डा स्वरूप की विशेष आराधना, विंध्याचल में भक्तों की भीड़
RMRAJESH MISHRA
Mar 22, 2026 07:34:50
Danti, Uttar Pradesh
न्यूज़ (नवरात्र विशेष)
Date :- 22.03.2026
Place :- मीरजापुर
Anchor :- “या देवी सर्वभूतेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः。”
Cha iत्र नवरात्र के चौथे दिन आदिशक्ति के कूष्माण्डा स्वरूप की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब इसी देवी ने ब्रह्मांड की रचना की थी, इसलिए इन्हें आदिशक्ति और सृष्टि की मूल स्वरूपा माना जाता है। विंध्याचल धाम में विराजमान माता विंध्यवासिनी के दरबार में आज भक्त माँ के इसी दिव्य कूष्माण्डा रूप की आराधना कर रहे हैं। एक रिपोर्ट—
VO-1 :-अनादिकाल से आस्था के केंद्र रहे विंध्याचल में विंध्य पर्वत और पावन गंगा नदी के संगम तट पर श्रीयंत्र पर विराजमान माँ विंध्यवासिनी का आज कूष्माण्डा स्वरूप में विधि-विधान से पूजन किया जा रहा है। मान्यता है कि माँ ने अपनी हल्की मुस्कान से ही इस सृष्टि की रचना की थी।
आठ भुजाओं वाली माँ कूष्माण्डा को अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। उनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र, गदा और जपमाला सुशोभित हैं, जबकि उनका वाहन सिंह है। माँ का तेज सूर्य के समान दैदीप्यमान बताया गया है, जिससे संपूर्ण ब्रह्मांड आलोकित होता है।
विद्वान आचार्य पं. राजन मिश्र के अनुसार, माँ कूष्माण्डा की उपासना से भक्तों के समस्त रोग-शोक दूर होते हैं और आयु, यश, बल तथा आरोग्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने बताया कि सच्चे मन से की गई भक्ति से माँ अत्यंत शीघ्र प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।
Bite 1 :- पं. राजन मिश्र (विद्वान पुरोहित, मीरजापुर)
VO-2 :- नवरात्र के चौथे दिन माँ विंध्यवासिनी धाम में श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर है। देश के कोने-कोने से आए भक्त माँ के दर्शन के लिए लंबी कतारों में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं।
भक्तों का कहना है कि माँ के दरबार में आने से उन्हें असीम शांति की अनुभूति होती है और माँ किसी भी भक्त को खाली हाथ नहीं लौटातीं। उनकी आस्था है कि माँ कूष्माण्डा की कृपा से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है。
Bite 2 :- भक्त (श्रद्धालु)
FVO :- नवरात्र के नौ दिनों में माँ के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा कर भक्त अपने समस्त कष्टों से मुक्ति पाते हैं। माँ कूष्माण्डा के दर्शन मात्र से ही जीवन में नई ऊर्जा, उत्साह और सकारात्मकता का संचार होता है। विंध्य धाम में माँ के दिव्य दर्शन कर श्रद्धालु आध्यात्मिक शांति का अनुभव कर रहे हैं और “जय माँ विंध्यवासिनी” के जयकारों के साथ अपनी आस्था प्रकट कर रहे
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