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Mainpuri
AKAvanish KumarFollow14 Jan 2025, 01:52 pm

Mainpuri: मकर संक्रांति पर कंबल और खिचड़ी वितरण कार्यक्रम आयोजित

Bichhawan, Uttar Pradesh:

मकर संक्रांति के पावन पर्व पर सुल्तानगंज विकासखंड परिसर में कंबल और खिचड़ी वितरण कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम में जिलाधिकारी मैनपुरी अंजनी सिंह, पूर्व मंत्री एवं क्षेत्रीय विधायक रामनरेश अग्निहोत्री, उप जिलाधिकारी भोगांव, ब्लॉक प्रमुख कश्मीर सिंह और अन्य प्रमुख लोग मौजूद रहे। जिलाधिकारी अंजनी सिंह ने कहा कि मकर संक्रांति हमारी संस्कृति का पवित्र त्योहार है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि विकसित होना ही काफी नहीं बल्कि दूसरों की मदद करना हमारा दैनिक दायित्व होना चाहिए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

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बारिश थमी, लेकिन नहीं थमा जलभराव; बुलेट से लाजपत नगर पहुंचे नगर आयुक्त

Bareilly, Uttar Pradesh:बरेली शहर में दो दिन पहले शुरू हुई तेज बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। लगातार बारिश के चलते शहर के कई इलाकों में जलभराव हो गया, जबकि कई रिहायशी कॉलोनियां जलमग्न हो गईं। बीते दिन बारिश थमने के बावजूद शहर की कई कॉलोनियों और प्रमुख सड़कों पर अब भी पानी भरा हुआ है। जलभराव के कारण क्षेत्रीय लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच बारिश से प्रभावित इज्जतनगर क्षेत्र के लाजपत नगर की स्थिति का जायजा लेने नगर आयुक्त संजीव मौर्य बुलेट से मौके पर पहुंचे। उन्होंने क्षेत्र में घूमकर जलभराव और जल निकासी की स्थिति देखी और स्थानीय लोगों से भी समस्याओं की जानकारी ली।नगर आयुक्त ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को जलभराव वाले क्षेत्रों से पानी की निकासी जल्द कराने और प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के लिए आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने नालियों की सफाई और जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त रखने पर जोर दिया।निरीक्षण के दौरान लाजपत नगर में नाली के पानी की निकासी को लेकर भी शिकायत सामने आई। स्थानीय लोगों पर नाली के ऊपर अवैध रूप से स्लैब बनाए जाने का आरोप लगाया गया, जिससे पानी की निकासी प्रभावित होने की बात कही गई। नगर आयुक्त ने अधिकारियों को मौके की स्थिति की जांच कर जल निकासी में आ रही बाधाओं को दूर कराने के निर्देश दिए। बारिश थमने के बाद भी कई इलाकों में जलभराव बरकरार रहने से लोगों में नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी की निकासी नहीं होने से उन्हें घरों से निकलने, वाहन चलाने और रोजमर्रा के कामों में परेशानी उठानी पड़ रही है। नगर निगम की टीमें जलभराव वाले इलाकों में पानी निकालने के प्रयास में जुटी हैं।
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बिलासपुर रेलवे मंडल के रनिंग स्टाफ का अनिश्चितकालीन धरना जारी

Bilaspur, Chhattisgarh:बिलासपुर रेल मंडल में ट्रेनों के सुरक्षित संचालन की जिम्मेदारी संभालने वाले लोको पायलट और रनिंग स्टाफ ने अपनी समस्याओं को लेकर मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों का आरोप है कि स्टाफ की कमी के कारण लंबे समय तक ड्यूटी करनी पड़ रही है और पर्याप्त आराम भी नहीं मिल रहा है। सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर भी कर्मचारियों ने सवाल उठाए हैं। बिजुरी में पिछले पांच दिनों से धरना चल रहा था, वहीं अब बिलासपुर समेत मंडल की अलग-अलग क्रू लॉबी के सामने रनिंग स्टाफ ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। बिलासपुर रेल मंडल देशभर में अपने बड़े माल लदान के लिए जाना जाता है और ट्रेनों के संचालन में लोको रनिंग स्टाफ की अहम भूमिका रहती है। कर्मचारियों का कहना है कि स्टाफ की कमी के चलते कई बार 12 से 16 घंटे तक ड्यूटी करनी पड़ती है। उनका आरोप है कि लंबे समय तक काम करने के बाद पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता, इसके बावजूद ट्रेनों का संचालन करना पड़ता है। रनिंग स्टाफ ने रनिंग रूम में खाने की व्यवस्था को लेकर भी शिकायत की है। कर्मचारियों का कहना है कि कई बार खाना खराब या कच्चा मिलने की शिकायत करने पर भी कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा शंटिंग और सुरक्षा नियमों को लेकर भी कर्मचारियों ने चिंता जताई है। उनका आरोप है कि कई स्टेशनों और साइडिंग में पर्याप्त शंटिंग स्टाफ नहीं होने के कारण काम का दबाव बढ़ रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि वे सुरक्षा नियमों के मुताबिक काम करते हैं, लेकिन ट्रेन में देरी होने पर जिम्मेदारी उन्हीं पर डाल दी जाती है। रनिंग स्टाफ ने कुछ कर्मचारियों के ट्रांसफर और कार्रवाई का भी मुद्दा उठाया है। कर्मचारियों ने बिजुरी के लोको पायलट एम.के. विभूति के ट्रांसफर का हवाला देते हुए कहा कि शंटिंग के दौरान सुरक्षा नियमों का पालन करने के बावजूद उनका स्थानांतरण कर दिया गया। वहीं शहडोल के लोको पायलट ए.के. पाल के ट्रांसफर को भी रनिंग रूम में खाने की शिकायत से जोड़कर देखा जा रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि एक तरफ किसी घटना के बाद लोको पायलटों पर सुरक्षा नियमों की अनदेखी का आरोप लगाकर कार्रवाई की जाती है, तो दूसरी तरफ नियमों के मुताबिक काम करने पर भी ट्रांसफर और दंड का सामना करना पड़ता है। रनिंग स्टाफ ने अधिकारियों के साथ बातचीत नहीं होने का भी आरोप लगाया है। कर्मचारियों का दावा है कि अपनी समस्याएं बताने के लिए अधिकारियों से संपर्क करने पर भी उन्हें कार्रवाई की चेतावनी मिलने की बात कही जाती है।कर्मचारियों ने काम के बढ़ते दबाव और तनाव को लेकर भी चिंता जताई है। उनका दावा है कि पिछले एक महीने में उनके तीन लोको पायलटों को हार्ट अटैक की घटना हुई है। हालांकि इन घटनाओं का कारण काम का दबाव ही है, इसे लेकर आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। बिजури में पांच दिन से चल रहे धरने के बाद अब बिलासपुर, शहडोल, सूरजपुर, रायगढ़, ब्रजराजनगर, पेंड्रा और उसलापुर समेत मंडल की अलग-अलग क्रू लॉबियों के सामने रनिंग स्टाफ अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गया है। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं पर बातचीत कर समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक धरना जारी रहेगा।
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सीधी की राजनीति में केदारनाथ शुक्ला का चार बार विधायक बनने वाला संघर्षपूर्ण सफर

Sidhi, Madhya Pradesh:सीधी की सियासत में पंडित केदारनाथ शुक्ला का नाम लंबे राजनीतिक सफर और संघर्षों से जुड़ा रहा है। छात्र राजनीति से सार्वजनिक जीवन की शुरुआत, पत्रकारिता से लेकर संगठन की जिम्मेदारियां और फिर विधानसभा तक का सफर—उनकी राजनीतिक यात्रा कई उतार-चढ़ावों से होकर गुजरी। चार बार विधायक रहे केदारनाथ शुक्ला ने संगठन और जन आंदोलनों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सीधी। मध्यप्रदेश के सीधी जिले की राजनीति में पंडित केदारनाथ शुक्ला एक ऐसा नाम रहे हैं, जिसकी पहचान किसी एक चुनाव या एक कार्यकाल तक सीमित नहीं रही। छात्र राजनीति, journalisticism, संगठनात्मक जिम्मेदारियों, जन आंदोलनों और फिर विधानसभा तक पहुंचने वाली उनकी राजनीतिक यात्रा संघर्षों और उपलब्धियों से भरी रही है। 9 सितंबर 1954 को सीधी जिले में जन्मे केदारनाथ शुक्ला ने विधि की शिक्षा हासिल की। वकालत और कृषि से जुड़े रहने के साथ ही उनका झुकाव सामाजिक सरोकारों और सार्वजनिक जीवन की ओर बढ़ा। साहित्य में रुचि और समाज के कमजोर एवं पिछड़े वर्गों के उत्थान की भावना भी उनके सार्वजनिक व्यक्तित्व का हिस्सा रही। छात्र राजनीति और पत्रकारिता से शुरू हुआ सफर केदारनाथ शुक्ला का राजनीतिक सफर सीधे चुनावी मैदान से शुरू नहीं हुआ। छात्र राजनीति और पत्रकारिता से जुड़े अनुभवों ने उन्हें समाज और राजनीति को करीब से समझने का अवसर दिया। इसके बाद संगठन की राजनीति में सक्रिय होते हुए उन्होंने जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच अपनी पहचान बनाई। वर्ष 1994 से 1997 तक भाजपा के सीधी जिला अध्यक्ष के रूप में उन्होंने संगठन की जिम्मेदारी संभाली। यह दौर उनके राजनीतिक जीवन में महत्वपूर्ण रहा। संगठन को मजबूत करने के साथ उन्होंने स्थानीय राजनीति और कार्यकर्ताओं के बीच अपनी पकड़ को मजबूत किया। आंदोलनों में सक्रियता, जेल यात्राओं से भी नहीं पीछे हटे केदारनाथ शुक्ला के राजनीतिक सफर में जन आंदोलनों का भी अहम स्थान रहा। विभिन्न आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाने के दौरान उन्हें जेल यात्राएं भी करनी पड़ीं। संघर्ष का यह दौर उनके राजनीतिक व्यक्तित्व को आकार देने वाला माना जाता है। संगठनात्मक अनुभव, छात्र राजनीति और पत्रकारिता की पृष्ठभूमि के बाद लंबे संघर्ष के बीच वर्ष 1998 में पहली बार विधानसभा पहुंचने का अवसर मिला। 1998 में पहली बार विधानसभा पहुंचे विधानसभा पहुंचने के बाद क्षेत्र की समस्याओं को सदन में उठाना उनके राजनीतिक सफर का महत्वपूर्ण हिस्सा बना। हालांकि इसके बाद उनके राजनीतिक जीवन में एक अंतराल भी आया, लेकिन उन्होंने वापसी की और 2008 में दोबारा विधानसभा पहुंचे। इसके बाद 2013 और 2018 के विधानसभा चुनावों में लगातार जीत ने उन्हें सीधी की राजनीति में एक मजबूत और स्थापित चेहरा बना दिया। चार बार विधायक के रूप में उन्होंने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। विधानसभा की समितियों में भी निभाई जिम्मेदारी केदारनाथ शुक्ला का राजनीतिक अनुभव केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रहा। विधायक रहते हुए उन्होंने विधानसभा की विभिन्न समितियों में भी जिम्मेदारियां निभाईं। वे विधानसभा की कई समितियों के सदस्य रहे। 2015 से 2018 तक कृषि विकास समिति के सभापति के रूप में भी उन्होंने जिम्मेदारी संभाली। इसके अलावा भाजपा प्रदेश कार्यसमिति और विधायक दल सहित संगठन के विभिन्न स्तरों पर भी उन्हें जिम्मेदारियां मिलीं। 2023 में बदले राजनीतिक समीकरण केदारनाथ शुक्ला के लंबे राजनीतिक सफर में 2023 का विधानसभा चुनाव एक बड़ा मोड़ लेकर आया। लंबे समय तक भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतने वाले केदारनाथ शुक्ला को इस बार पार्टी ने उम्मीदवार नहीं बनाया। टिकट नहीं मिलने के बाद राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदलीं और उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया। यह चुनाव उनके लिए वर्षों के राजनीतिक सफर के बाद सामने आई एक नई चुनौती थी。 हालांकि चुनाव परिणाम उनके पक्ष में नहीं रहा, लेकिन यह चुनाव उनके राजनीतिक जीवन का एक अहम अध्याय जरूर बन गया। हार के बाद भी खत्म नहीं होती राजनीतिक कहानी राजनीति में चुनावी हार को किसी लंबे राजनीतिक सफर का अंत नहीं माना जाता। समय के साथ राजनीतिक परिस्थितियां बदलती हैं, समीकरण बदलते रहते हैं और नेताओं की भूमिकाएं भी बदलती रहती हैं। चार बार विधानसभा का प्रतिनिधित्व कर चुके पंडित केदारनाथ शुक्ला भले ही आज विधानसभा में सक्रिय भूमिका में नहीं हैं, लेकिन सीधी की राजनीति के एक लंबे दौर के साथ उनका नाम जुड़ा हुआ है। सीधी की सियासत में दर्ज है एक लंबा अध्याय छात्र राजनीति से लेकर पत्रकारिता, संगठन, जन आंदोलन और विधानसभा तक का सफर तय करने वाले केदारनाथ शुक्ला की राजनीतिक कहानी में जीत भी है, संघर्ष भी, उतार-चढ़ाव भी और बदलते राजनीतिक समीकरण भी। उनकी पहचान केवल एक पूर्व विधायक के तौर पर नहीं, बल्कि ऐसे राजनेता के रूप में रही, जिसने लंबे समय तक सीधी की राजनीति में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। राजनीति में पद और परिस्थितियां बदलती रहती हैं, लेकिन लंबे सार्वजनिक जीवन से जुड़ी स्मृतियां आसानी से खत्म नहीं होतीं। पंडित केदारनाथ शुक्ला का राजनीतिक सफर भी सीधी की सियासत के इतिहास का ऐसा ही एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसमें संघर्ष, संगठन, चुनावी जीत और राजनीतिक उतार-चढ़ाव की कई कहानियां छिपी हैं。
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गहलोत का एयरपोर्ट-हाईकोर्ट निर्माण पर तगड़ा निशाना: स्थानीय चुनाव पर भी बड़ा हमला

Jodhpur, Rajasthan:JOdhpur। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत आज जोधपुर पहुंचे। जोधपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने एयरपोर्ट को लेकर एयरफोर्स क्षेत्र से जुड़े पुराने मामले, नई हाईकोर्ट भवन की निर्माण गुणवत्ता और नगर निकाय चुनाव को लेकर सरकार पर जमकर निशाना साधा। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि एयरपोर्ट को लेकर एयरफोर्स से जुड़े मामले में करीब दो साल से चल रहा था। उन्होंने कहा कि सरकार का काम निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करना और ठेकेदारों की जिम्मेदारी तय करना है। उन्होंने एयरपोर्ट भवन में पहली बारिश में पानी आने और जोधपुर में नई हाईकोर्ट भवन में सामने आई समस्याओं का उल्लेख करते हुए कहा कि नई इमारतों में इस तरह की स्थिति बनना चिंता का विषय है। गहलोत ने सुझाव दिया कि हाईकोर्ट, निचली अदालत और अन्य न्यायालयों की इमारतों के निर्माण में जिम्मेदारी स्पष्ट होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले सरकार भवन बनाकर न्यायपालिका को सौंपती थी, जिससे निर्माण और गुणवत्ता को लेकर जिम्मेदारी तय होती थी। यदि वर्तमान व्यवस्था में न्यायपालिका स्वयं निर्माण कर रही है तो वह भी ठीक है, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर जो काम सरकार के विभागों के जिम्मे हैं, उनकी जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय होनी चाहिए। नगर निकाय चुनाव को लेकर अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री के रोड शो पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकाय चुनाव स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के नेतृत्व में होने चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके कार्यकाल में मुख्यमंत्री के तौर पर उन्होंने स्थानीय चुनावों में इस तरह प्रचार नहीं किया। गहलोत ने दावा किया कि पूरे राजस्थान सहित जोधपुर में कांग्रेस के पक्ष में माहौल बन चुका है। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं में उत्साह है और आम जनता कांग्रेस के साथ जुड़ रही है। गहलोत ने यह भी दावा किया कि जिन वर्गों को सरकार अपना पारंपरिक वोट बैंक मानती थी, उनमें भी इस बार नाराजगी देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि जनता के सामने स्थानीय मुद्दे सबसे महत्वपूर्ण हैं। उनके अनुसार, उनके कार्यकाल में पट्टे जारी करने, सड़क निर्माण और अन्य विकास कार्यों पर काम हुआ, जबकि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में इन मामलों में अपेक्षित गति नहीं दिखाई दे रही है। पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार पर भ्रष्टाचार बढ़ने का आरोप लगाते हुए कहा कि राजस्थान में भ्रष्टाचार पहले की तुलना में कई गुना बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार की कई योजनाओं को बंद या कमजोर कर दिया गया है। गहलोत ने कहा कि राजस्थान के विभिन्न हिस्सों में स्कूल, खेल सुविधाएं, पुस्तकालय और छात्रावास जैसी कई इमारतें बनी हुई हैं, लेकिन उनका अपेक्षित उपयोग नहीं हो रहा है। उन्होंने सरकार से जनता के हित में इन सुविधाओं को प्रभावी रूप से संचालित करने की मांग की। अशोक गहलोत ने कहा कि विपक्ष के रूप में कांग्रेस लगातार आम जनता के मुद्दों को लेकर चिंता कर रही है। उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा कि वह बिना किसी संकोच के अपने मत का इस्तेमाल करे और कांग्रेस को मजबूत बनाए। गहलोत ने दावा किया कि इस बार स्थानीय निकाय चुनाव में कांग्रेस को जनता का समर्थन मिलेगा और सत्तारूढ़ दल को करारी हार का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि जनता के हाथ में सबसे बड़ा अधिकार मतदान का है और जनता अपने वोट के माध्यम से सरकार को जवाब दे सकती है।
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रतलाम मेडिकल कॉलेज में इंटर्न हड़ताल जारी, PG छात्र भी शामिल हो सकते हैं

Ratlam, Madhya Pradesh:रतलाम के शासकीय डॉ. लक्ष्मीनारायण पांडे मेडिकल कॉलेज में इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल आज भी जारी रही। हड़ताल के चलते सभी इंट्र्न डॉक्टर ओपीडी में सेवाएं देने नहीं पहुंचे। वहीं, कुछ इंटर्न डॉक्टर अपनी मांगों को लेकर भोपाल भी पहुंच चुके हैं। बताया जा रहा है कि अब गुरुवार से पीजी स्टूडेंट्स भी हड़ताल में शामिल हो सकते हैं। इधर, इंटर्न डॉक्टरों की हड़ताल के चलते मेडिकल कॉलेज में آنے वाले मरीजों को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। हालांकि, फिलहाल ओपीडी में अन्य डॉक्टर मौजूद हैं और मरीजों की संख्या भी अपेक्षाकृत कम होने के कारण हड़ताल का ज्यादा असर दिखाई नहीं दे रहा है। लेकिन अगर पीजी स्टूडेंट्स भी हड़ताल में शामिल होते हैं, तो आने वाले दिनों में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के सामने स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी।
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अलवर के सर्राफा बाजार में स्कूटी हटाने के कारण दुकानदार-पुलिस विवाद, जाम

Alwar, Rajasthan:अलवर के अखेपुरा थाना क्षेत्र के सर्राफा बाजार में दुकान के बाहर खड़ी स्कूटी हटाने को लेकर दुकानदार और पुलिस के बीच विवाद हो गया। सर्राफा व्यापार कमेटी के व्यापारियों ने पुलिस पर दुकानदार को थप्पड़ मारने का आरोप लगाते हुए त्रिपोलिया में जाम लगा दिया। पीड़ित दुकानदार दिनेश चंद गुप्ता के अनुसार, उनकी स्कूटी दुकान के बाहर खड़ी थी। इसी दौरान बाजार से गुजर रही पुलिस की गाड़ी रुकी और पुलिसकर्मियों ने स्कूटी हटाने को कहा। आरोप है कि इसी दौरान पुलिसकर्मी ने उनके साथ मारपीट करते हुए थप्पड़ मारा। पॉलिस मौके से दुकान के बाहर खड़ी दोनों स्कूटियां थाने ले गईं। इसके बाद आक्रोशित व्यापारियों ने त्रिपोलिया पर जाम लगा दिया। सूचना पर डीएसपी अंगद शर्मा, शहर कोतवाल दिनेश मीणा सहित पुलिस जाप्ता मौके पर पहुंचा और व्यापारियों से समझाइश कर जाम खुलवाया। मामले को लेकर व्यापारियों और पुलिस के बीच बातचीत जारी रही।
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हमीरपुर में किसान ने फांसी लगाकर आत्महत्या; बारिश से फसल बर्बाद बताई गई वजह

Chanwal, Himachal Pradesh:हमीरपुर में किसान ने फांसी लगाकर आत्महत्या; परिजनों के मुताबिक अतिवृष्टि से फसल बर्बाद होने के कारण किसान ने उठाया खौफनाक कदम; खेत में बने पशु बाड़े में फंदे से लटका मिला किसान का शव; परिजनों के मुताबिक बारिश से फसल खराब होना बताई जा रही आत्महत्या की वजह; किसान ने करीब 40 बीघा जमीन बलकट लेकर बोई थी फसल; एसडीएम राठ के मुताबिक फिलहाल किसान की मौत का स्पष्ट नहीं, किसान की मौत के कारण की जाँच जारी; सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने किसान के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा; राठ कोतवाली क्षेत्र के करगवा गांव का मामला
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रायबरेली में जमीन नाम पर पत्नी-बेटों ने पति की पीट-पीटकर हत्या कर दी

Raebareli, Uttar Pradesh:रायबरेली में रिश्तों को शर्मसार कर देने वाला सनसनीखेज मामला सामने आया है। जहां जमीन अपने नाम न करने को लेकर पत्नी और बेटों पर पति की पीट-पीटकर हत्या करने का आरोप लगा है। मामला खीरों थाना क्षेत्र के कान्हामऊ गांव का है। बताया जा रहा है कि 54 वर्षीय आशाराम पाल अपनी पैतृक जमीन बेचने की तैयारी में थे, जबकि पत्नी और बेटे जमीन अपने नाम कराने का दबाव बना रहे थे। आरोप है कि इसी बात को लेकर पत्नी और बेटों ने आशाराम पाल के साथ मारपीट की, जिसमें उनकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि मृतक के बेटे और उनकी मां अपने ताऊ के साथ बाहर रहते हैं। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है और आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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