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खैरागढ़ में बिना वैध दस्तावेज क्लिनिक-पैथोलॉजी लैब पर विभाग का सख्त अभियान

Khairgarh, Uttar Pradesh:खैरागढ़ जिले में बिना वैध दस्तावेज संचालित क्लिनिकों और पैथोलॉजी लैब के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई तेज कर दी है। नवपदस्थ सीएमएचओ डॉ. अनिल शुक्ला के निर्देश के बाद विभागीय टीम लगातार ऐसे संस्थानों की जांच कर रही है। अभियान से अवैध रूप से क्लिनिक और पैथोलॉजी संचालित करने वालों में हड़कंप है। इसी कड़ी में नोडल अधिकारी नर्सिंग होम एक्ट के नेतृत्व में गठित जांच दल ने विकासखंड खैरागढ़ के बाजार अतरिया क्षेत्र में संचालित क्लिनिकों और पैथोलॉजी लैब का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान संबंधित संस्थानों के संचालन से जुड़े वैध दस्तावेज उपलब्ध नहीं पाए गए। इसके बाद विभाग ने संचालकों को नोटिस जारी कर तीन दिवस के भीतर आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए। जांच में जितेंद्र वर्मा की दिशा पैथोलॉजी और हिमलेश वर्मा के श्रेया क्लिनिक सहित तीन क्लिनिक-पैथोलॉजी संचालकों को नोटिस दिया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया कि तय अवधि में दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए तो नर्सिंग होम एक्ट के तहत कठोर कार्रवाई होगी। अभियान आगे भी जारी रहेगा.
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अमरोहा में अचानक बदला मौसम, तेज बारिश-ओलों से किसान चिंतित

Amroha, Uttar Pradesh:अमरोहा में मौसम का अचानक बदला मिजाज, आसमान में छाया अंधेरा; तेज बारिश के साथ जमकर हुई ओलावृष्टि, किसानों की बढ़ी चिंता अमरोहा में शुक्रवार दोपहर करीब एक बजे के बाद अचानक मौसम ने करवट ले ली। देखते ही देखते आसमान में काले बादल छा गए और दिन में ही अंधेरा जैसा नजारा दिखाई देने लगा। कुछ ही देर बाद बारिश शुरू हो गई। बारिश के साथ हुई तेज ओलावृष्टि ने शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक लोगों को चौंका दिया। अचानक बदले मौसम के चलते जनजीवन और आवागमन प्रभावित हुआ है। इस बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में खड़ी फसलों पर ओलों की मार पड़ने से नुकसान की आशंका जताई जा रही है। खासकर जिन खेतों में धान, सब्जियां और अन्य मौसमी फसलें तैयार हो रही हैं, वहां फसल की स्थिति का आकलन करना जरूरी होगा।
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अमरपुर के अल्ट्रासाउंड सेंटर बंद, जिलाधिकारी के निरीक्षण के बाद जांच जारी

Banka, Bihar:अमरपुर में जिलाधिकारी के निर्देश पर शुक्रवार को अमरपुर शहर में संचालित अल्ट्रासाउंड सेंटरों की जांच के लिए वरिष्ठ उपसमाहर्ता परमानंद शाह और प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रभात रंजन पहुंचे. जांच के दौरान शहर के सभी अल्ट्रासाउंड सेंटर बंद पाए गए. ऐसे में अधिकारियों की मौके पर पड़ताल नहीं हो सकी. स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार कुछ समय पहले तक कुछ अल्ट्रासाउंड सेंटर खुले हुए थे, लेकिन अधिकारियों के पहुँचने की भनक लगते ही सेंटर बंद कर दिए जाने की बात सामने आई है. सेंटर संचालकों को पहले से जांच की जानकारी मिलने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. इसके बाद अधिकारी बंगाली टोला स्थित राधा रानी हॉस्पिटल भी पहुंचे. अस्पताल परिसर में हलचल देखी गई. बताया जा रहा है कि इस अस्पताल में मरीजों को भर्ती करने के तरीके को लेकर भी शिकायत मिली थी, हालांकि अस्पताल में कथित अनियमितता या फर्जी तरीके से मरीजों को भर्ती किए जाने के आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. जिलाधिकारी के निर्देश पर की गई इस जांच के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि यदि शहर में अल्ट्रासाउंड सेंटरों का नियमित संचालन हो रहा है, तो जांच के समय सभी सेंटर बंद क्यों मिले? वहीं, राधा रानी हॉस्पिटल में मरीजों को भर्ती करने की प्रक्रिया को लेकर सामने आई शिकायतों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी. अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करता है और अल्ट्रासाउंड सेंटरों के बंद मिलने के पीछे की वास्तविक वजह क्या सामने आती है.
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खूँटी में गौ तस्करी: 10 गौवंश पकड़े गए, आरोपी गिरफ्तार

Khunti, Jharkhand:क्षेत्र - खूँटी। स्लग - मवेशियों के साथ पकड़ा गया एक मवेशी तस्कर। खूँटी जिले में कुछ वर्षों से पशु तस्करी का मामला बढ़ गया है। यही कारण है कि खूँटी जिले में लगातार गौवंशीय पशु तस्करी धड़ल्ले से हो रही है। जिसपर प्रशासन द्वारा कार्रवाई किये जाता तो है पर अवैध तस्करी पर लगाम नहीं लगाया जा पा रहा है। बीती रात गौ तस्कर मवेशियों को खदेड़ कर ले जा रहे थे जिसमें एक व्यक्ति को ग्रामीणों ने पकड़कर थाना को सुपुर्द कर दिया। घटना तोरपा थाना क्षेत्र का है। बोतलो गांव के समीप छाता नदी के किनारे झाड़ियों में तस्करी के लिए ले जाए जा रहे 10 गौवंश को ग्रामीणों ने पकड़ लिया। घटना की सूचना बोतलो एवं कुदरी गाँव के ग्रामीणों ने बजरंग दल के जिला संयोजक कर्मवीर महतो को दी। फिर पुलिस को इसकी जानकारी दी गयी तो तोरपा पुलिस घटनास्थल पर आकर आरोपी तस्कर के साथ सभी गायों को थाना ले गयी। जिसमें 10 से अधिक गाय भी पकड़े गये हैं। साथ ही कार्रवाई की जा रही है। तस्कर ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है और बताया कि वो पोकला से मवेशियों को ला रहा था और रोड़ो गाँव सभी मवेशी को ले जा रहा था ।
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घर बैठे पेलिएटिव केयर से बुजुर्गों व गंभीर रोगियों को राहत

Jaipur, Rajasthan:बुजुर्गों और गंभीर रोगियों की देखभाल अब घर की चौखट पर’ ’मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की संवेदनशील पहल से पेलिएटिव केयर को मिला विस्तार’ ’सवा साल में तीन लाख से अधिक रोगियों को मिली बड़ी राहत’ एंकर राजस्थान सरकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘सेवा ही संकल्प’ के विजन को धरातल पर साकार कर रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ किया गया है, बल्कि मानवीय एवं संवेदनशील पहल के तहत गंभीर एवं असाध्य रोगों से ग्रसित रोगियों को घर बैठे उपचार उपलब्ध करवाया जा रहा है। गंभीर एवं असाध्य रोगों से पीड़ित मरीजों, बेड-रिडन बुजुर्गों और ऐसे रोगियों, जिनके लिए अस्पताल तक पहुंचना कठिन है, उनके लिए होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर राज्य सरकार की जनकल्याणकारी सोच का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई है। इस पहल से करीब सवा साल के समय में ही तीन लाख से अधिक रोगियों को लाभान्वित किया गया है। वीओ गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए भजनलाल सरकार मददगार बनकर सामने आई है सीएम भजनलाल शर्मा की पहल पर गंभीर बीमार मरीजों को घर पर ही उपचार और देखभाल की सुविधा सरकार की ओर से शुरू की गई है इससे केवल उपचार ही नहीं, बल्कि दर्द से राहत, मानसिक सहयोग, सम्मानजनक देखभाल और बेहतर जीवन-गुणवत्ता भी मिलेगी । सरकार की स्वास्थ्य नीति का फोकस केवल बीमारी के उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार का प्रयास है कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज और उनके परिवार को कठिन परिस्थितियों में अधिकतम सहारा मिले। इसी सोच के तहत कैंसर, पार्किंसन, स्ट्रोक, रीढ़ की चोट, अल्जाइमर सहित अन्य असाध्य रोगों से पीड़ित मरीजों को आवश्यक पेलिएटिव केयर सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। ’2.51 लाख मरीजों को ओपीडी एवं 41 हजार को आईपीडी में सेवाएं’ राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि गंभीर मरीजों को इलाज के लिए बार-बार अस्पताल जाने की परेशानी न उठानी पड़े। जरूरत के अनुसार स्वास्थ्य सेवा मरीज के घर तक पहुंचे, इसी उद्देश्य से होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर को व्यापक रूप दिया जा रहा है। पेलिएटिव केयर कार्यक्रम के तहत राज्य में 98 जिला चिकित्सालयों, उप जिला चिकित्सालयों एवं सेटेलाइट चिकित्सालयों में पेलिएटिव केयर क्लिनिक स्थापित किए जा चुके हैं। बड़ी संख्या में रोगियों को इनका लाभ मिल रहा है। अप्रैल 2025 से अगस्त 2026 तक पेलिएटिव केयर ओपीडी में करीब 2 लाख 51 हजार मरीजों को सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। इसी अवधि में 41 हजार से अधिक मरीजों को आईपीडी में भर्ती कर उपचार एवं देखभाल प्रदान की गई। विशेषज्ञ चिकित्सा परामर्श को मरीजों तक पहुंचाने के लिए टेली-कंसल्टेशन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे गंभीर रोगियों को आवश्यक विशेषज्ञ सलाह प्राप्त करने के लिए अनावश्यक रूप से लंबी दूरी तय नहीं करनी पड़ती। ’4 माह में 43 हजार मरीजों को होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर’ राज्य सरकार बुजुर्गों को परिवार और समाज की अमूल्य धरोहर मानते हुए उनकी स्वास्थ्य सुरक्षा को विशेष प्राथमिकता दे रही है। इसी भावना के अनुरूप जुलाई 2025 से प्रदेश में होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर के माध्यम से बेड-रिडन मरीजों और बुजुर्गों को उनके घर पर ही आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। घर पर उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं में नर्सिंग केयर, फिजियोथेरेपी, आवश्यक दवाइयां तथा मानसिक, सामाजिक एवं आध्यात्मिक परामर्श शामिल हैं। इससे मरीजों को अस्पताल आने-जाने की कठिनाई से राहत मिल रही है और परिवार के सदस्यों को भी अपने प्रियजनों की देखभाल में आवश्यक चिकित्सकीय सहयोग प्राप्त हो रहा है। होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2026-27 में अगस्त माह तक करीब 43 हजार मरीजों को होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर की सुविधा प्रदान की जा चुकी है। इनमें करीब 20 हजार बुजुर्ग मरीज शामिल हैं। ’मरीजों के द्वार ‘राहत की किरण’’ मुख्यमंत्री की पहल पर स्वास्थ्य सेवा को मरीज के करीब ले जाने के लिए ‘राहत की किरण’ वाहन के माध्यम से होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर को और प्रभावी बनाया है। इस वाहन में आवश्यक दवाइयों के साथ प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी मरीजों के घर पहुंचते हैं। टीम में नर्सिंग ऑफिसर, फिजियोथेरेपिस्ट और संबंधित क्षेत्र की एएनएम या आशा कार्यकर्ता शामिल रहती हैं। टीम द्वारा घर पर ही मरीज को आवश्यक पेलिएटिव केयर प्रदान की जाती है। जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ चिकित्सकों से टेली-परामर्श की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है। ’57 हजार केयर गिवर्स प्रशिक्षित, एएनएम, आशा एवं सीएचओ को भी प्रशिक्षण’ सरकार ने केवल सेवा का विस्तार ही नहीं किया है, बल्कि इसके लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने पर भी जोर दिया है। अब तक लगभग 57 हजार केयर गिवर्स को होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर के लिए प्रशिक्षित किया जा चुका है। इसके अलावा 10 हजार एएनएम, 21 हजार से ज्यादा आशा कार्यकर्ताओं और करीब 10 हजार सीएचओ को भी होम-बेस्ड पेलिएटिव केयर के लिए प्रशिक्षण दिया गया है। चरणबद्ध रूप से सभी आशा, एएनएम और सीएचओ को प्रशिक्षित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है, ताकि प्रदेश के दूरस्थ एवं ग्रामीण क्षेत्रों तक भी इस संवेदनशील स्वास्थ्य सेवा का लाभ पहुंचाया जा सके। ’बड़े अस्पतालों से गांव के स्वास्थ्य केंद्रों तक विस्तार’ राज्य सरकार का लक्ष्य पेलिएटिव केयर सेवाओं को केवल बड़े अस्पतालों तक सीमित रखना नहीं, बल्कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचाना है। सरकार का संकल्प है कि गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को उसकी स्थिति के अनुरूप समय पर उपचार, राहत और देखभाल मिले तथा उसे गरिमापूर्ण जीवन जीने का अवसर प्राप्त हो।
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झारखंड कोयले पर वैट अधिकार GST से अलग करने की मांग तेज

Ranchi, Jharkhand:झारखंड के वित्त मंत्री ने जीएसटी काउंसिल की बैठक में कोयले पर से जीएसटी के बजाए राज्यों को वैट लगाने के अधिकार देने की मांग किया, झारखंड के लंबित बकाए और राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए वैकल्पिक व्यवस्था का आग्रह किया तो चर्चाओं का बाजार तेज हो गया। झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडेय ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, झारखंड के वित्त मंत्री ने बहुत ही प्रासंगिक सवाल उठाया है। मजबूती से राज्य का पक्ष रखा, जो सवाल उठाए और मांग किया उससे अन्य कोयला उत्पादक राज्यों को भी फायदा होगा, पर दुर्भाग्य से उन राज्यों में बीजेपी का शासन है, वहां की सरकार चुप रहती है। ये मांग जायज है संघीय ढांचे में मानना चाहिए केंद्र को। कोयला को वैट के अंदर लाया जाए, राज्यो के नुकसान की भरपाई हो। बाइट ... मनोज पांडेय, झामुमो प्रवक्ता कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता कमल ठाकुर ने कहा, राज्य के वित्त मंत्री के जीएसटी काउंसिल में कोयले पर वैट लगाने के अधिकार देने की मांग किया तो उसका एक मात्र उद्देश्य है, राज्य का विकास कैसे होगा। केंद्र सेस का अधिकार देना नहीं चाहता, जीएसटी देना नहीं चाहता तो राज्य को वैट का अधिकार मिले ताकि उससे राज्य का विकास कार्य हो। पीएचडी चेंबर ऑफ कॉमर्स का स्पष्ट मानना है राज्य के विकास के लिए राज्य सरकार को पैसा चाहिए और देश की सुरक्षा व्यवस्था के लिए और अन्य विकास कार्यों के लिए केंद्र को भी राशि चाहिए। झारखंड देश का नम्बर वन खनिज संपदा वाला राज्य है पर पिछड़ा राज्य है और राज्य के कोयले के राजस्व का लाभ यहां से कोयला खरीदने वाले राज्यों को मिल रहा है। खनन का दंश झारखंड खेल रहा है, राज्य को राजस्व चाहिए ताकि यहां का विकास हो पाए। इसके लिए बीच का रास्ता निकालना होगा,इसके लिए सुप्रीम कोर्ट में भी तन आपस में मिल बैठ कर समाधान निकाला जा सकता है। विकसित भारत 2047 की बात करते हैं तो बिना झारखंड को विकसित किए 2047 तक भारत का विकास कैसे कर सकते हैं। इसको लेकर जो अनिश्चितता फैली है उसका समाधान निकाला होगा。 झारखंड चेंबर ऑफ कॉमर्स का भी स्पष्ट कहना है प्राकृतिक संसाधन वाले राज्य हैं और जीएसटी को लेकर जो नया रुल है सिस्टम अच्छा हुआ है लेकिन इससे झारखंड को बहुत नुकसान हो रहा है। केंद्र से अनुरोध होगा कि कोई वैकल्पिक व्यवस्था हो जिससे राज्य को जो राजस्व का नुकसान हो रहा है वो न हो। हम वैट को वापस लाने की बात तो नहीं कहेंगे पर केंद्र सरलत को कुछ न कुछ करना चाहिए कि देश का विकास हो पर खनन वाले राज्यों का भी विकास हो उन राज्यों को राजस्व नहीं आएगा तो उसका विकास कैसे होगा। नए जीएसटी से झारखंड के राजस्व की जो कटौती हुई है तुरंत केंद्र सरकार को कुछ करना चाहिए ।
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