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VKVishal Kumar RauniyarFollow20 Dec 2024, 07:53 am
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सक्ति में 9वीं के छात्र का खेत में शव, हत्या की आशंका; संदिग्ध हिरासत

Sakti, 3 दिन से लापता 9वीं के छात्र का खेत में दफन मिला शव, हत्या की आशंका; एक संदिग्ध हिरासत में सacktī। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। सक्ती थाना क्षेत्र में तीन दिन से लापता 9वीं कक्षा के छात्र का शव खेत में दफन मिला है। इस घटना के सामने आने के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। मृतक की पहचान कपिल कुमार केवट के रूप में हुई है, जो पिछले तीन दिनों से अपने घर से लापता था। परिजन लगातार उसकी तलाश कर रहे थे, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिल रहा था। सूचना मिलने पर पुलिस टीम तत्काल मौके पर पहुंची। पुलिस ने खेत की खुदाई कर छात्र के शव को बाहर निकलवाया। शव मिलने के बाद क्षेत्र में लोगों की भीड़ जुट गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा कार्रवाई पूरी की और पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। प्रारम्भिक जांच में पुलिस हत्या की आशंका जता रही है। आशंका है कि छात्र की हत्या करने के बाद शव को साक्ष्य छिपाने की नीयत से खेत में दफना दिया गया। हालांकि हत्या के पीछे की वजह अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखकर मामले की जांच कर रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और एफएसएल टीम भी घटनास्थल पहुंची। घटनास्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए गए हैं, जिनके आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। पुलिस ने मामले में एक संदिग्ध को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। उससे मिली जानकारी के आधार पर अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक जांच और पूछताछ के आधार पर हत्या के कारणों का खुलासा होगा। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और पुलिस जल्द ही इस सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा करने का दावा कर रही है.
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सूरत विहार कालोनी में जलभराव: 18 में 23 गलियां डूबी, बच्चों की पढ़ाई प्रभावित

New Delhi, Delhi:किराड़ी की सूरत विहार कालोनी में बाढ़ जैसे हालात बने हुए है। जलभराव के कारण लोगों ने पलायन शुरू कर दिया है। कालोनी की 23 गलियों में से 18 गलियां जलमग्न है। इन गलियों में लगभग 700 मकानों में से 300-400 मकानों में एक से तीन तक पानी भरा हुआ है। घर में पानी घुसने के कारण 30-40 परिवार पलायन कर अन्य क्षेत्रों में चले गए। मंगलवार को हुई वर्षा के बाद सूरत विहार पूरी तरह से जलमग्न हो चुका है। कालोनी की मुख्य सड़कों से लेकर गलियों व घरों तक पानी ही पानी दिखाई दे रहा है। पांच दिनों से कालोनीवासियों का रहना मुश्किल हो चुका है। जलभराव के कारण कालोनी में प्रवेश व निकास के सभी रास्ते बंद हो चुके है। स्कूल न जा पाने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। जो लोग घरों से निकल रहे है, उन्हें दो से ढाई फीट पानी की बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है।कालोनी में जलनिकासी की व्यवस्था पूरी तरह से ठप पड़ी हुई है। जिसके कारण कालोनी में पानी का स्तर कम नहीं हो रहा। लंबे समय से जलभराव के कारण बदबू व मच्छरों की भरमार के कारण बीमारी की खतरा भी बढ़ गई है。 - कालोनी नीचे होने के कारण ठप पड़ी जलनिकासी मुबारकपुर रोड के निर्माण के बाद कालोनी का लेवल लगभग एक फीट से अधिक नीचे होने के कारण जलनिकासी ठप पड़ चुकी है। दूसरी ओर कालोनी के साथ खाली मैदान घरों का पानी निकल जाया करता था। लेकिन डीडीए (दिल्ली विकास प्राधिकरण) के खाली जमीन पर लैंडफिल साइट के कचरे से भराव के दिया गया। ऐसे में कालोनी का पानी निकलने का कोई रास्ता नहीं है। जिसके कारण कालोनी में पानी नहीं निकल रहा।
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रामपुर में पीडब्ल्यूडी की जमीन पर मजार-मस्जिद हटाने का नोटिस, सात दिन में जवाब

Rampur, Uttar Pradesh:रामपुर में पीडब्ल्यूडी की जमीन पर बनी कथित मजार-मस्जिद को हटाने का नोटिस, 7 दिन में जवाब और दस्तावेज पेश करने के निर्देश, कार्रवाई की चेतावनी, मुतवल्ली बोले मजार और मस्जिद 150 साल से अधिक पुरानी, सभी कागजात मौजूद, एंकर:रामपुर में लोक निर्माण विभाग यानी पीडब्ल्यूडी ने अपनी ही सरकारी जमीन पर बने एक कथित अवैध मजार और मस्जिद को लेकर बड़ा कदम उठाया है, विभाग ने मुतवल्ली को सात दिन के भीतर निर्माण हटाने या फिर उससे जुड़े वैध दस्तावेज पेश करने का नोटिस जारी किया है, वहीं मुतवल्ली ने विभाग के दावे को खारिज करते हुए कहा है कि मस्जिद और मजार करीब डेढ़ सौ साल से भी ज्यादा पुराने हैं और उनके पास सभी आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं, V/O:मामला रामपुर शहर के मोहल्ला चिरान स्थित लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड परिसर का है,पीडब्ल्यूडी की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि विभाग की सरकारी भूमि पर बिना अनुमति के मजार और मस्जिद का निर्माण किया गया है, विभाग का कहना है कि इस कब्जे की वजह से निर्माण सामग्री के रखरखाव, सरकारी वाहनों की आवाजाही और अन्य विभागीय कार्यों में दिक्कतें आ रही हैं, नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि मजार और मस्जिद में बाहरी लोगों के आने-जाने से परिसर में बने सरकारी आवासों में रहने वाले कर्मचारियों और उनके परिवारों की सुरक्षा, निजता और शांति व्यवस्था प्रभावित हो रही है, विभाग ने मुतवल्ली को निर्देश दिया है कि यदि उनके पास भूमि और निर्माण से जुड़े कोई वैध दस्तावेज हैं तो वे नोटिस मिलने के सात दिन के भीतर कार्यालय में उपस्थित होकर उनकी प्रमाणित प्रतियां प्रस्तुत करें, पीडब्ल्यूडी ने स्पष्ट किया है कि तय समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब या दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए तो नियमानुसार कार्रवाई करते हुए कथित अवैध निर्माण को हटा दिया जाएगा, साथ ही बाद में किसी भी प्रकार के दावे पर विचार नहीं किया जाएगा, इस नोटिस की प्रतिलिपि जिलाधिकारी पुलिस अधीक्षक और सदर एसडीएम को भी भेजी गई है, V/O:वहीं इस कार्रवाई का मुतवल्ली शकील अहमद ने विरोध किया है, उनका कहना है कि शाहीन शाह मियां के नाम से बनी मस्जिद वर्ष 1860 से भी पहले की है, जबकि मजार इससे भी अधिक पुरानी है, उनके अनुसार पीडब्ल्यूडी का स्टोर बाद में बना, लेकिन अब प्रशासन धार्मिक स्थल को अवैध बताकर हटाने की कोशिश कर रहा है, हमारे पास मस्जिद और मजार से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज मौजूद हैं, प्रशासन ने सात दिन में जवाब मांगा है और हम सभी कागजात पेश करेंगे, बिना वजह इस पुराने धार्मिक स्थल को अवैध बताया जा रहा है, विसुअल्स:1,2,3,4,5,6, BYTE:शक़ील अहमद (मुतवल्ली,मस्ज़िद मज़ार)
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गोपालपुर पुल के कठडे टूटे, आषाढी वारी में सुरक्षा पर सवाल

Pandharpur, Maharashtra:आषाढी वारीची सांगता ज्या गोपाळपूर मध्ये होते तेथे जाणाऱ्या नदीवरील पुलाचे संरक्षक कठडे तुटलेले आहेत. त्यामुळे भाविकांच्या जीवाला धोका निर्माण होण्याची शक्यता झाली आहे. गोपाळपूर मध्ये पुष्पावती नदीवर असणारा पूल धोकादायक बनला आहे. जुना पूल कमकुवत झाल्याने नवीन पूल बांधण्यात आला होता. या पुलाचे कठडे तुटलेले आहेत. येथून मोठ्या प्रमाणात चार चाकी वाहनांची भाविकांच्या वाहनांची रहदारी होत असते. आषाढी एकादशीच्या सोहळ्यानंतर गोपाळपूर येथे गोपाळकाला होतो. यासाठी सर्व संतांच्या पालख्या आणि भाविक या ठिकाणी येत असतात. कोणताही अनुचित प्रकार घडू नये. त्यामुळे आषाढीच्या़पूर्वी या पुलाची दुरुस्ती करण्याची मागणी होत आहे.
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फर्रुखाबाद में 40.77 लाख पौधे लगाने के लक्ष्य के साथ बड़ा वृक्षारोपण अभियान शुरू

Farrukhabad, Uttar Pradesh:फर्रुखाबाद अरुण सिंह हरियाली बढ़ाने के संकल्प को ज़मीन पर उतारने के लिए प्रदेश सरकार का वृक्षारोपण अभियान लगातार आगे बढ़ रहा है। इसी कड़ी में समाज कल्याण राज्य मंत्री असीम अरुण फर्रुखाबाद पहुंचे, जहां उन्होंने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। फर्रुखाबाद के पेपर गांव में आयोजित वृक्षारोपण अभियान के दौरान प्रदेश सरकार के समाज कल्याण राज्य मंत्री असीम अरुण ने पौधा लगाकर अभियान की शुरुआत की। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी मौजूद रहे। सभी ने अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का संकल्प लिया। फर्रुखाबाद में 12 जुलाई 2026 को आयोजित वृहद वृक्षारोपण अभियान के तहत एक ही दिन में 40 लाख 77 हजार (40.77 लाख) पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए जिले में 121 स्थानों को चिन्हित किया गया है, जहां विभिन्न विभागों, जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं और आम नागरिकों की भागीदारी से पौधारोपण किया जा रहा है। मंत्री असीम अरुण ने कहा कि वृक्ष केवल पर्यावरण की रक्षा ही नहीं करते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की भी नींव हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि हर व्यक्ति कम से कम एक पौधा अवश्य लगावे और उसे पेड़ बनने तक संरक्षित रखे। उनका कहना था कि जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए जनभागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने भी प्रदेश सरकार के वृहद वृक्षारोपण अभियान की जानकारी दी और बताया कि जनसहभागिता के माध्यम से जिले में बड़ी संख्या में पौधे लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों ने भी उत्साह के साथ अभियान में हिस्सा लिया और पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली। पेड़ सिर्फ़ धरती की हरियाली नहीं बढ़ाते, बल्कि स्वच्छ हवा, बेहतर जल संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के जीवन की सुरक्षा का आधार भी हैं। फर्रुखाबाद के पेपर गांव से प्रदेश सरकार का यह संदेश साफ़ है कि यदि हर नागरिक एक पौधा लगाए और उसकी जिम्मेदारी निभाए, तो पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य कहीं अधिक प्रभावी ढंग से हासिल किया जा सकता है।
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बलिया: दलित युवक की पिटाई से मौत, परिजनों ने पुलिस पर हत्या का आरोप लगाया

Ballia, Uttar Pradesh:बलिया में मृतक के परिजनों ने पुलिस पर मारती कर हत्या करने का आरोप, गुस्साए ग्रामीणों ने लगाया जाम। दलित व्यक्ति कांम जी शाह की मौत के मामले ने हड़कंप मचा दिया है। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि दो दिन पहले रेवती थाने की पुलिस कांन जी को उसके घर से पत्नी व परिजन के सामने उठाकर थाने ले गई थी और ग्राम प्रधान लाल यादव के कहने पर थाने पर बेरहमी से पिटाई की, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई। परिजनों के अनुसार, police ने कांन जी को गांव स्थित एक बंधा पर छोड़कर फरार हो गए। कांन जी को गंभीर हालत में रेवती सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी हालत देखकर जिला अस्पताल रेफर कर दिया। बाद में उसे वाराणसी रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान कांन शाह की मौत हो गई। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि वे शव बलिया ला रहे थे तब गाजीपुर बॉर्डर पर पुलिस ने शव छीनकर दफन करवाने का प्रयास किया। मृतक के पिता विशाल ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है और उन्होंने कहा कि पुलिस कल/graphql? नहीं; स्पष्ट बयान गलत है और थाने में पिटाई से हालत बिगड़ने पर ही पिता को गांव के बंधा पर छोड़कर फरार हो गई थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तुरंत हत्या का मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी की मांग की है। क्षेत्राधिकार आलोक गुप्ता ने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में 7 जुलाई को गायघाट में दो पक्षों के बीच विवाद के बाद 8 जुलाई को पूछताछ की गई और कांमजी गौड़ को थाने में लाकर मनीष यादव के साथ सुपुर्द किया गया था, जिसका सीसीटीवी फुटेज मौजूद है। वाराणसी में कांम जी शाह की मौत के बाद शव को बलिया बॉर्डर से सुरक्षित घर तक लाया गया है; परिजनों ने कहा कि शव का अंतिम संस्कार कल होना है। सूरज रजक के द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र की जाँच में यह तथ्य सामने आया कि विशाल गौड़ के विरुद्ध हत्या व मारपीट के मुकदमे दर्ज हैं।
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धनुषी गांव में एक रात में 33 लाख की चोरी, चोर फरार

Hajipur, Bihar:वैशाली के धनुसी गांव में शनिवार देर रात बेखौफ चोरों ने ऐसा तांडव मचाया कि सुबह होते ही पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई। एक नहीं... दो नहीं... बल्कि चार घरों के ताले तोड़कर चोरों ने लाखों की संपत्ति पर हाथ साफ कर दिया और आराम से फरार हो गए। पीड़ित परिवारों का दावा है कि चोर 9 लाख रुपये नकद और करीब 24 लाख रुपये के सोने-चांदी के जेवरात लेकर भाग निकले। यानी एक ही रात में करीब 33 लाख रुपये की बड़ी चोरी की वारदात को अंजाम दिया गया। घरों में बिखरा सामान और टूटे ताले इस बात की गवाही दे रहे हैं कि चोर पूरी तैयारी के साथ आए थे। सुबह जब लोगों को घटना की जानकारी मिली तो पूरे गांव में हड़कंप मच गया। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए। लोगों में दहशत के साथ-साथ पुलिस की रात्रि गश्ती व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे। ग्रामीणों का कहना है कि अगर रात में प्रभावी पुलिस गश्त होती तो शायद इतनी बड़ी वारदात नहीं होती। घटना की सूचना मिलते ही लालगंज एसडीपीओ गोपाल मंडल भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया, पीड़ित परिवारों से पूछताछ की और साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए। आसपास के संदिग्धों और संभावित सुरागों के आधार पर जांच तेज कर दी गई है। अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती लाखों की चोरी का खुलासा कर चोरों को गिरफ्तार करने की है। वहीं पीड़ित परिवार अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी वापस मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
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रामनगर जंगल में 12 साल बाद दुर्लभ इंडियन जायंट फ्लाइंग स्क्विरल दिखी, रेस्क्यू सफल

Noida, Uttar Pradesh:क्या आपने कभी ऐसी गिलहरी देखी है जो उड़ती हुई नजर आती हो? उत्तराखंड के कॉर्बेट से सटे रामनगर वन क्षेत्र में 12 साल बाद एक बार फिर दुर्लभ इंडियन जायंट फ्लाइंग स्क्विरल दिखाई दी है,यह अनोखी रात्रिचर गिलहरी ग्रामीण के घर में पहुंच गई, जिसके बाद वन विभाग की टीम ने सफलतापूर्वक इसका रेस्क्यू किया, विशेषज्ञ इसे क्षेत्र की जैव विविधता के लिए बेहद सकारात्मक संकेत मान रहे हैं. रामनगर वन प्रभाग के कोसी रेंज अंतर्गत टेड़ा गांव में शुक्रवार को उस समय लोगों की भीड़ जुट गई, जब एक बड़े आकार की दुर्लभ गिलहरी एक ग्रामीण के घर में दिखाई दी,पहली नजर में यह सामान्य गिलहरी से बिल्कुल अलग लगी, जिससे ग्रामीण हैरान रह गए। सूचना मिलते ही वन विभाग के रेस्क्यू एक्सपर्ट आशीष कश्यप और राजेश कश्यप मौके पर पहुंचे और सावधानीपूर्वक इस दुर्लभ जीव का सफल रेस्क्यू किया. जांच के दौरान वन कर्मियों ने पुष्टि की कि यह इंडियन जायंट फ्लाइंग स्क्विरल है, जिसे उड़ने वाली गिलहरी भी कहा जाता है,हालांकि यह पक्षियों की तरह उड़ती नहीं, बल्कि अपने आगे और पीछे के पैरों के बीच मौजूद पेटागियम नामक त्वचा की झिल्ली की मदद से एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक लगभग 60 से 80 मीटर तक हवा में ग्लाइड करती है. यही इसकी सबसे अनोखी विशेषता है. वन विभाग के अनुसार रामनगर क्षेत्र में इस दुर्लभ प्रजाति की आखिरी रिकॉर्डिंग वर्ष 2014 में ढिकुली-गार्जिया वन क्षेत्र में हुई थी, लगभग 12 साल बाद इसका दोबारा दिखाई देना वन्यजीव संरक्षण और क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है. वन्यजीव जानकार संजय छिम्वाल बताते हैं कि इस प्रजाति को मलाबार जायंट फ्लाइंग स्क्विरल भी कहा जाता है, क्योंकि यह पश्चिमी घाट के मलाबार क्षेत्र में भी पाई जाती है,उत्तराखंड में इसके दर्शन मुख्य रूप से रानीखेत, लैंसडाउन, पिथौरागढ़, चकराता और मसूरी के घने जंगलों में होते हैं,रामनगर और कॉर्बेट की शिवालिक तलहटी में इसका दोबारा मिलना बेहद दुर्लभ और उत्साहजनक घटना है. उप प्रभागीय वनाधिकारी अंकित बडोला ने बताया कि यह पूरी तरह रात्रिचर प्रजाति है और दिन के समय कम ही दिखाई देती है। रेस्क्यू के बाद गिलहरी का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया है और जल्द ही इसे सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया जाएगा,साथ ही इस रिकॉर्ड को विभागीय दस्तावेजों में भी दर्ज किया जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि इस दुर्लभ गिलहरी की वापसी इस बात का संकेत है कि रामनगर के जंगल आज भी कई अनमोल और कम दिखाई देने वाले वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आवास बने हुए हैं,यह घटना संरक्षण प्रयासों की सफलता और प्रकृति की समृद्ध विरासत का एक प्रेरक उदाहरण है.
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