icon-pinewzicon-zee
PINEWZ
become creator
न्यूज़ क्रिएटर बनें

आपकी स्थानीय कहानियाँ, आपकी आवाज़

Follow us on
Download App fromplay-storeapp-store
Advertisement
Back
Pinewz
273303
VivekVivekFollow7 Jan 2025, 04:46 pm

MAHARAJGANJ-एचएमपी वायरस को लेकर रहें एलर्ट , बरतें सावधानी

Maharajganj, Uttar Pradesh:

महाराजगंज।चाइना के बाद भारत के बैंगलुरू में मिले एचएमपी वायरस के केस को लेकर स्वास्थ्य विभाग एलर्ट हो गया है। इसे लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ श्रीकांत शुक्ला ने जनपद वासियों से अपील की है कि एचएमपी वायरस को लेकर सभी लोग भी एलर्ट रहें। बचाव के लिए विशेष सावधानी बरतें।सीएमओ ने कहा कि एचएमपी ( ह्युमन मेटानिमो) एक वायरस है, जो खाॅसी, जुकाम, और गला खराब होने जैसी समस्याएं पैदा करता है। यह सर्दियों और बसंत में फैलता है। यह वायरस फेफड़ों तक पहुंच कर निमोनिया का कारण बन सकता है। इस वायरस के चपेट में आने पर सामान्य सर्दी जैसा महसूस होता है।

0
0
Report

हमें फेसबुक पर लाइक करें, ट्विटर पर फॉलो और यूट्यूब पर सब्सक्राइब्ड करें ताकि आप ताजा खबरें और लाइव अपडेट्स प्राप्त कर सकें| और यदि आप विस्तार से पढ़ना चाहते हैं तो https://pinewz.com/hindi से जुड़े और पाए अपने इलाके की हर छोटी सी छोटी खबर|

व्यापमं घोटाले के लिए जीआरएमसी में MBBS डिग्री बिना प्रक्रिया के देने के आरोप

Morena, Madhya Pradesh:व्यापमं घोटाले की परतें एक बार फिर खुलती नजर आ रही हैं। ग्वालियर की जीवाजी विश्वविद्यालय और गजराराजा मेडिकल कॉलेज यानी जीआरएमसी में बड़ा आरोप सामने आया है। आरोप है कि व्यापमं कांड में बर्खास्त किए गए कुछ छात्रों को बिना बहाली, बिना अटेंडेंस और बिना परीक्षा दिए ही MBBS की डिग्री दे दी गई। इतना ही नहीं, 16-16 लाख रुपये लेकर डिग्री देने के आरोपों वाला एक ऑडियो भी सामने आया है। शिकायत के बाद अब कॉलेज प्रशासन और जीवाजी यूनिवर्सिटी मामले की जांच की बात कह रहे हैं। ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस डिग्री वितरण को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। व्यापमं कांड में बर्खास्त पूर्व छात्र संदीप लहारिया ने राज्यपाल, जीवाजी यूनिवर्सिटी और जीआरएमसी प्रबंधन को लिखित शिकायत देकर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत में कहा गया है कि व्यापमं फर्जीवाड़े में बर्खास्त किए गए कुछ छात्रों को नियमों को ताक पर रखकर एमबीबीएस की डिग्री जारी कर दी गई। गौरतलब है कि साल 2006 से 2010 के बीच व्यापमं फर्जीवाड़े से जुड़े करीब 150 छात्रों पर एफआईआर दर्ज की गई थी। इनमें 30 से 35 एमबीबीएस छात्रों को संदिग्ध मानते हुए जांच के दायरे में लिया गया था। बाद में वर्ष 2017 में गठित न्यू हाई पावर एक्शन कमेटी ने जांच के आधार पर 30 से अधिक छात्रों को बर्खास्त कर दिया था। उस समिति के अध्यक्ष डॉ. एस.एन. आयंगर थे, जिनका अब निधन हो चुका है। वहीं पूरा मामला अभी भी सीबीआई कोर्ट में लंबित है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि छात्र शाखा यूजी के प्रभारी प्रशांत चतुर्वेदी और उनके सहायक पंकज कुशवाह ने नियमों की अनदेखी करते हुए बर्खास्त छात्रों को डिग्री दिलाने में भूमिका निभाई। मामले से जुड़ा एक ऑडियो भी सामने आया है, जिसमें कथित तौर पर 16-16 लाख रुपये लेकर डिग्री दिलाने के आरोपों की चर्चा सुनाई दे रही है। संदीप लहारिया का दावा है कि उनके पास कई ऑडियो और वीडियो सबूत मौजूद हैं, जो पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा कर सकते हैं। शिकायत में जीवाजी यूनिवर्सिटी के कुछ अधिकारियों और गोपनीय शाखा के कर्मचारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों के सामने आने के बाद जीआरएमसी के डीन डॉ. आरकेएस धाकड़ और जीवाजी यूनिवर्सिटी प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू करने की बात कही है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर व्यापमं कांड में बर्खास्त छात्र वास्तव में बिना वैधानिक प्रक्रिया पूरी किए डॉक्टर बन गए, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है? क्या मेडिकल शिक्षा व्यवस्था में फिर कोई बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है? इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे, लेकिन फिलहाल इस मामले ने मेडिकल शिक्षा व्यवस्था और यूनिवर्सिटी प्रशासन दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। व्यापमं घोटाले की गूंज एक बार फिर सुनाई देने लगी है। आरोप बेहद गंभीर हैं और यदि इनमें सच्चाई पाई जाती है तो यह सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि लोगों की जिंदगी से जुड़ा बड़ा मामला होगा। अब सभी की नजर जांच पर टिकी है कि आखिर बिना परीक्षा और बिना वैधानिक प्रक्रिया के डिग्री देने के आरोपों में कितनी सच्चाई है.
0
0
Report
Advertisement
Advertisement
Advertisement

सहारनपुर SDA ने कोर्ट रोड पर कई कोचिंग सेंटर और लाइब्रेरी सील

Saharanpur, Uttar Pradesh:सहारनपुर में पार्श्वनाथ प्लाजा समेत कोर्ट रोड पर SDA का बड़ा एक्शन, कई कोचिंग सेंटर सील लखनऊ अग्निकांड के बाद सहारनपुर विकास प्राधिकरण (SDA) ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले संस्थानों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। मंगलवार को कोर्ट रोड स्थित पार्श्वनाथ प्लाजा समेत कई स्थानों पर कार्रवाई करते हुए कोचिंग सेंटरों और लाइब्रेरी को सील कर दिया गया। SDA की जांच में कई संस्थान बिना फायर एनओसी, बिना मानचित्र स्वीकृति और आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाओं के संचालित पाए गए। कार्रवाई के दौरान संबंधित संचालकों को नोटिस भी जारी किए गए हैं।
0
0
Report
Advertisement

भरत तिवारी मुठभेड़ के मामले पर सहारनपुर में प्रदर्शन, शहीद दर्जे की मांग

Saharanpur, Uttar Pradesh:सहारनपुर। बिहार के चर्चित भरत तिवारी मुठभेड़ मामले की गूंज अब उत्तर प्रदेश तक पहुंच गई है। आज सहारनपुर में अखिल ब्राह्मण महासभा और विभिन्न समाजों के लोगों ने प्रदर्शन कर भरत तिवारी की मुठभेड़ में हुई मौत को हत्या बताते हुए न्याय की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने भरत तिवारी को शहीद का दर्जा देने तथा मामले में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। रामलीला मैदान के समीप आयोजित प्रदर्शन में वक्ताओं ने कहा कि भरत तिवारी की मौत को मुठभेड़ बताना गलत है और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि यदि यह हत्या साबित होती है तो दोषियों को फांसी या उम्रकैद जैसी सख्त सजा मिलनी चाहिए। अखिल ब्राह्मण महासभा के जिला अध्यक्ष केके शर्मा ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि देश में प्रबुद्ध वर्ग और ब्राह्मण समाज को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भरत तिवारी प्रकरण केवल बिहार का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे देश के लोगों से जुड़ा मामला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारें वोट बैंक की राजनीति में व्यस्त हैं और प्रतिभा व बुद्धिजीवियों का सम्मान नहीं हो रहा है। केके शर्मा ने बिहार सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अगर राज्य सरकार के मंत्री स्वयं इस घटना को हत्या बता रहे हैं तो इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से मामले का संज्ञान लेने और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान लोगों ने नारेबाजी कर भरत तिवारी को न्याय दिलाने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई।
0
0
Report
Advertisement
Advertisement
Back to top