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अमरबाग में बलाईचे नदी पर लकड़ी का पुल बनकर तैयार, विधायक ने निरीक्षण किया

Arambag, West Bengal:আরামবাগ: 31 আগস্ট ভোটের আগে গ্রাম বাসীদের কথা দিয়েছিলl আর এবার সেই প্রতিশ্রুতি মতো কথা রাখলেন আরামবাগের বিধায়কl সাধারণ মানুষের দীর্ঘদিনের দাবি মেনে আরামবাগের আরাণ্ডি-১ পঞ্চায়েতের বলাইচকে তৈরি হচ্ছে কাঠের সেতুl ভোটের প্রচারের সময় কথা দিয়েছিলেন, ভোটে জিতলে বলাইচকে সেতু নির্মাণ করে দেবেনl সেই কথা রেখেছেন বিধায়ক হেমন্ত বাগl বলাইচকে মুণ্ডেশ্বরীর খালের উপর কাঠের সেতু তৈরির কাজ প্রায় শেষের পথেl সেই কাজ পরিদর্শনও করেন বিধায়কl দীর্ঘদিনের দাবি মিটতে চলায় খুশি এলাকার সাধারণ মানুষl ব্রিজটির দীর্ঘদিন ধরে ভগ্নদশা ছিলl ফলে এলাকার মানুষ থেকে স্কুল-কলেজের ছাত্র-ছাত্রীদের অনেকটা ঘুরপথে যাতায়াত করতে হতোl সাধারণ মানুষের যাতায়াতে নাভিশ্বাস উঠতl বিধায়ক সেই সমস্যার সমাধান করায় স্বাভাবিকভাবেই খুশি এলাকার বাসিন্দারাl তাঁরা এই উদ্যোগের প্রশংসা করেছেনl সেতুর কাজ দ্রুত শেষ হবে বলে জানিয়েছেন আরামবাগের বিধায়কl উল্লেখ্য যে, আরান্ডি ১ গ্রাম পঞ্চায়েত এলাকার এই সেতুটির গুরুত্ব অপরিসীমl কারণ এই সেতু না থাকায় তারা একি প্রকার দ্বীপে বন্দীর অবস্থা হয়ে গিয়েছিলl তাই ব্রিজ টি হওয়ায় তাদের খুশির সীমা নেইl
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जलपाईगुड़ी की जमुना नदी के किनारे भूस्खलन से खेती-बागानी पर भारी संकट

Jalpaiguri, West Bengal:ভাঙন পরিস্থিতি ভয়ঙ্কর রূপ ধারণ করেছে জলপাইগুড়ির যমুনা নদীতে‌। জলপাইগুড়ির গড়ালবাড়ি‌ গ্রাম পঞ্চায়েতের স্থানীয় বাসিন্দারা বলেন, নদীর পাড় প্রতিনিয়ত ধসে যাওয়ায় নদীর নাব্যতা ধীরে ধীরে কমে যাচ্ছে। এর ফলে গতিপথ‌ও বদলে যাচ্ছে যমুনা নদীর। ইতিমধ্যেই ক্ষতিগ্রস্ত হয়েছে নদীর পাড়ের ধানের জমি, চা-বাগান‌ ও বাঁশঝাড়।‌ বিঘার পর বিঘা কৃষিজমি চলে গেছে নদী‌ গহ্বরে।‌ জলপাইগুড়ি সদর ব্লকের বাহাদুর গ্রাম পঞ্চায়েতের চরকডাঙি, গড়ালবাড়ি ও খারিজা বেরুবাড়ি‌ সহ বিভিন্ন এলাকার মানুষ আতঙ্কগ্রস্ত রয়েছেন। অবিলম্বে নদীর পাড়ে বাঁধ দেওয়ার দাবি তুলেছেন স্থানীয় বাসিন্দারা। এক‌ই কথা বলেন স্থানীয় পঞ্চায়েত সদস্য শ্যামলী‌ রায়।‌ তিনি বলেন, যমুনা নদীর ভাঙন ক্রমশ বেড়ে চলেছে। গ্রামের মানুষ চাইছেনযমুনা নদীর পাড় বাঁধাই করে‌ জনবসতি, চা-বাগান‌ ও কৃষি জমি রক্ষা করা‌ হোক। বিষয়টি খোঁজ নিয়ে প্রয়োজনীয় পদক্ষেপ নেওয়ার আশ্বাস প্রশাসনের। রিপোর্ট :- প্রদ্যুত দাস ( জলপাইগুড়ি )
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बरानगर के नपाड़ा में मालगाड़ी की टक्कर से रेलवे हाई-बार टूटा, छात्राएं घायल

Barrackpore, West Bengal:বরানগর নপাড়ায় মাল বোঝাই লরির ধাক্কায় ভেঙ্গে পড়ল রেলের হাইট বার,স্কুল রিক্সার ওপর ভেঙ্গে পড়ল,আহত ২ বরানগর পৌরসভার ১৮ নম্বর ওয়ার্ডের অন্তর্গত নপাড়া সাবওয়ের সামনে মাল বোঝাই লরির ধাক্কায় ভেঙে পড়ল রেলের হাইট বার। সেই সময় স্কুল ছাত্রীদের নিয়ে একটি রিকশা ভ্যান তার নিচ দিয়ে যাচ্ছিল। রেলের হাইট বার ভেঙ্গে রিক্সার ওপর পড়ে। সেই সময় রিকশায় ছিল দুজন স্কুল ছাত্রী ও তার অভিভাবক। ঘটনার মধ্যে অভিভাবকসহ একজন ছাত্রী আহত হয়েছে। ঘটনা স্থলে রেলের আধিকারিকা সহ বরানগর থানার পুলিশ। রেলের তরফ থেকে মাল বোঝাই ঘাতক গাড়িটিকে আটক করা হয়েছে
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बाड़मेर नगर निकाय चुनाव: कांग्रेस-भाजपा के बीच निर्दलीयों की त्रिकोणीय चुनौती

Barmer, Rajasthan:बाड़मेर नगर निकाय चुनाव को लेकर बाड़मेर में सियासी सरगर्मियां अब अपने चरम पर पहुंच गई हैं। नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन सोमवार को निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के बाहर प्रत्याशी, समर्थकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की जबरदस्त भीड़ देखने को मिल रही है। सुबह से ही अलग-अलग वार्डों से प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ नामांकन दाखिल करने पहुंच रहे हैं। इसके चलते निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के आसपास का माहौल पूरी तरह चुनावी रंग में नजर आ रहा है। बाड़मेर नगर निकाय चुनाव में इस बार मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भाजपा के बीच माना जा रहा है, लेकिन राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) की मौजूदगी और बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशियों के मैदान में उतरने से कई वार्डों में मुकाबला त्रिकोणीय या बहुकोणीय होने के आसार हैं। नामांकन के अंतिम दिन राजनीतिक दलों के अधिकृत प्रत्याशियों के साथ ऐसे कई चेहरे भी सामने आ रहे हैं, जो टिकट नहीं मिलने या पार्टी की पसंद से असहमति के बाद निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं। यही निर्दलीय प्रत्याशी कई वार्डों में स्थापित राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं। बाड़मेर की स्थानीय राजनीति में कांग्रेस का दबदबा भी इस चुनाव को खास बनाता है। बीते तीन बोर्ड कांग्रेस बनाने में कामयाब रही है। ऐसे में कांग्रेस के सामने अपने पुराने प्रदर्शन को दोहराने की चुनौती है, जबकि भाजपा लंबे समय से नगर निकाय की सत्ता में बदलाव की कोशिश में जुटी दिखाई दे रही है। भाजपा के लिए यह चुनाव केवल पार्षदों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि नगर निकाय में अपना बोर्ड बनाने की बड़ी राजनीतिक लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है। दूसरी ओर आरएलपी की सक्रियता और निर्दलीय प्रत्याशियों की मौजूदगी ने दोनों प्रमुख दलों की चिंता बढ़ा दी है। कई वार्डों में व्यक्तिगत प्रभाव, स्थानीय समीकरण, जातीय गणित और प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़ चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकती है। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी। अब सबकी नजरें नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी पर रहेंगी। इसके बाद मैदान में बचे प्रत्याशियों की वास्तविक संख्या सामने आएगी और चुनावी मुकाबले की दिशा भी स्पष्ट होने लगेगी। फिलहाल बाड़मेर में अंतिम दिन उमड़ी भीड़ ने इतना जरूर संकेत दे दिया है कि इस बार का नगर निकाय चुनाव काफी रोचक, प्रतिष्ठापूर्ण और कांटे का मुकाबला बनने जा रहा है। कांग्रेस के सामने जहां लगातार चौथी बार बोर्ड बनाने की चुनौती है, वहीं भाजपा सत्ता परिवर्तन के लिए पूरी ताकत झोंकती नजर आ रही है। आरएलपी और निर्दलीय प्रत्याशी इस मुकाबले में कितना असर डालते हैं, इसका फैसला मतदाता करेंगे।
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बलरामपुर जरवा तेंदुए की दहशत : नेवलगढ़ मार्ग झाड़ियों से पटा, राहगीर परेशान

MADAN LAL JAISWALMADAN LAL JAISWALFollow4m ago
Newal Garh, Uttar Pradesh:विकासखंड गैसड़ी के ग्राम पंचायत नेवलगढ़ को जोड़ने वाला संपर्क मार्ग इन दिनों जंगल में तब्दील हो गया है। जुगनभरिया से नेवलगढ़ तक करीब एक किलोमीटर लंबा रास्ता घने जंगल से होकर गुजरता है। सड़क के दोनों तरफ घनी झाड़ियां व बड़े-बड़े खरपतवार उग आए हैं, जिससे यह मार्ग राहगीरों के लिए मौत का सबक बनता जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार शाम होते ही इस रास्ते पर सन्नाटा पसर जाता है। ग्रामीणों में सबसे ज्यादा दहशत तेंदुए को लेकर है। पूर्व प्रधान रामबचन थारू ने बताया कि अक्सर घनी झाड़ियों के बीच तेंदुआ छिपा रहता है, जिसे कई बार बाइक और पैदल आते-जाते लोगों ने देखा है। किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। स्कूली बच्चों और महिलाओं को आने-जाने में सबसे ज्यादा परेशानी होती है। ग्रामीणों ने बताया कि इस मार्ग से नेवलगढ़ सहित कई गांवों के लोगों का प्रतिदिन आना-जाना लगा रहता है, लेकिन झाड़ियों के कारण सड़क पर दूर तक दिखाई नहीं देता।। इस समस्या को लेकर ग्राम प्रधान घनश्याम यादव, दिलीप चौधरी, कृष्ण कुमार थारू, राधेश्याम थारू, विनती राम थारू, कमलेश थारू, बजरंग थारू, विजय चौधरी, सत्य प्रकाश थारू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने वन विभाग के अधिकारियों से झाड़ियों को साफ कराने की मांग की है। महाराणा प्रताप जनजातीय सेवा संस्थान के अध्यक्ष मदन लाल जायसवाल ने जिलाधिकारी महोदय से जनहित में संज्ञान में लेते हुए झाड़ियां साफ कर जाने की मांग की है।। इस संबंध में वन क्षेत्राधिकारी, जनकपुर रेंज अमरजीत ने बताया कि मामला संज्ञान में है, संबंधित टीम को भेजकर जल्द ही सड़क किनारे की झाड़ियों को साफ कराया जाएगा।
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NGT clamps down on Bahadurgarh industry; joint committee to inspect 2,500 units

Jhajjar, Haryana:बहादुरगढ़ इंडस्ट्री पर एनजीटी की सख्ती प्रदूषण की जांच के लिए बनाई संयुक्त कमेटी करीब 2,500 औद्योगिक इकाइयों की होगी जांच 26 अक्टूबर से एक सप्ताह पहले एनजीटी में सबमिट करनी है रिपोर्ट 26 अक्टूबर को एनजीटी में मामले की अगली सुनवाई मैन्युफैक्चरिंग, ईंधन और उत्सर्जन की होगी जांच बहादुरगढ़ के औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल यानी एनजीटी ने सख्त रुख अपनाया है। औद्योगिक इकाइयों में पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन और प्रदूषण फैलाने के आरोपों की जांच के लिए एक चार सदस्यीय संयुक्त कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी को 26 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई से पहले सभी औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपनी होगी। बहादुरगढ़ के एचएसआईआईडिसी औद्योगिक क्षेत्र में करीब 2,500 उद्योग संचालित हो रहे हैं। इन इकाइयों पर वायु और जल प्रदूषण से जुड़े पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं। एनजीटी की प्रधान पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को संयुक्त कमेटी बनाने के निर्देश दिए हैं, ताकि औद्योगिक क्षेत्र में प्रदूषण की वास्तविक स्थिति और नियमों के अनुपालन की जांच की जा सके। कमेटी में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय, चंडीगढ़ और जिला प्रशासन के अधिकारी शामिल होंगे। जिला कलेक्टर इस कमेटी के नोडल अधिकारी के तौर पर काम करेंगे। एनजीटी ने कमेटी को आठ सप्ताह के भीतर निरीक्षण पूरा करने और अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पहले अपनी रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। बहादुरगढ़ के सैक्टर 2 में रहने वाले याचिकाकर्ता हरिन्द्र कुमार ने आरोप लगाया गया है कि बहादुरगढ़ के औद्योगिक क्षेत्र में कुछ इकाइयां वायु अधिनियम 1981 और जल अधिनियम 1974 के प्रावधानों का पालन नहीं कर रही हैं। कुछ इकाइयां पर पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी करने और जीपीएस से लैस तस्वीरों के जरिए निरीक्षण प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप भी लगाए गए हैं। इसके अलावा रात के समय इकाइयों में निरीक्षण नहीं होने का फायदा उठाकर औद्योगिक कचरे के खुले में जमा होने और उसके प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। एनजीटी ने संयुक्त कमेटी को औद्योगिक इकाइयों की मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रिया, ईंधन का इस्तेमाल, प्रदूषण नियंत्रण उपकरण, चिमनियों से निकलने वाला उत्सर्जन, फ्यूजिटिव एमिशन और सहमति से जुड़ी शर्तों की मौके पर जाकर जांच करने के निर्देश दिए हैं। दरअसल, दिल्ली एनसीआर में सितंबर-अक्टूबर के दौरान हवा की गुणवत्ता खराब होने और स्मॉग का खतरा बढ़ने के बीच औद्योगिक प्रदूषण पर भी सवाल उठते रहे हैं। एनजीटी ने इससे पहले भी प्रदूषण के सभी स्रोतों को लेकर विस्तृत एक्शन टेकन रिपोर्ट तैयार करने पर जोर दिया था। अब बहादुरगढ़ के औद्योगिक क्षेत्र की इकाइयों की जांच के बाद सामने आने वाली रिपोर्ट से यह साफ हो सकेगा कि यहां प्रदूषण के लिए जिम्मेदार स्रोत कौन-कौन से हैं और कितनी औद्योगिक इकाइयां पर्यावरणीय मानकों का पालन कर रही हैं। यानी आने वाले दिनों में बहादुरगढ़ की औद्योगिक इकाइयों पर जांच का शिकंजा और कस सकता है। अब सबकी नजरें संयुक्त कमेटी की रिपोर्ट और 26 अक्टूबर को होने वाली एनजीटी की अगली सुनवाई पर रहेंगी। हालांकि अभी तक कमेटी ने जांच आरम्भ नही की है जबकि 14 अगस्त को एनजीटी ने आदेश दिए थे।
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