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Kanpur Dehat209115

Kanpur dehat - पैसे वापस मांगने गए मां और बेटे को जमकर पीटा

Feb 05, 2025 09:50:30
Rajpur, Uttar Pradesh

कानपुर देहात, सिकंदरा थाना क्षेत्र के करीमनगर गांव निवासी सुशील कुमार ने बताया कि गांव की पंचायत सहायक ने आवास व शौचालय के नाम पर 10 हजार रुपए लिए थे. लेकिन जब वो रुपए मांगने गए तो गाली गलौज व मारपीट करने लगे, मना करने पर जाति सूचक गालियां देकर भगा दिया, पुलिस से शिकायत की तो फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी, पीड़ित ने पुलिस को सूचना दी मुकदमा दर्ज ना होने पर सीओ व एसपी कार्यालय में शिकायत की. लेकिन अभी तक आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है. सिकंदरा थाना प्रभारी महेश कुमार ने बताया कि जांच पड़ताल के बाद मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।

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VVvirendra vasinde
Mar 02, 2026 12:02:25
Noida, Uttar Pradesh:बड़वानी-बड़वानी भोंगर्या हॉट में जुलवानिया पंहुचे सीएम ने कहा मैं तो हूँ अनाड़ी लेकिन भगोर्या की ताड़ी का आनंद ही अलग है। सीएम ने नागलवाड़ी में आयोजित कृषि कैबिनेट की बैठक में जिले को दी कई सौगात साथ ही कहा भगोर्या राष्ट्रीय पर्व के रूप में मनाया जाएगा। सीएम डॉ मोहन यादव आज जिले के नागलवाड़ी आये थे जहां कृषि कैबिनेट की बैठक का आयोजन किया गया जिसमें जिले को कई सौगात भी दी गई वंही बैठक के बाद जुलवानिया भोंगर्या हॉट में पंहुचे सीएम ने आदिवासी समाजजनों के साथ नृत्य कर दी गई सौगातों का उल्लेख करते हुए बताया के हमारा देश विभिन्न परम्पराओं से जुड़ा है है अलग अलग समय अलग अलग त्योहार आते है उन्होंने कहा के ज्वार, बाजरा कटे तो दिवाली गन्ना कटे तो देव दिवाली और गेंहू कटे तो होली सीएम बोले भगोर्या पर्व आनंद का पर्व है मैं तो अनाड़ी हूँ लेकिन जो ताड़ी का आनंद है रोम रोम थिरकता है। सीएम ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा कहा पहले नर्मदा जी के जल के लिए लोग टुकुर टुकुर देखते थे आज पूरा निमाड़ हर जगह नर्मदा जी का पानी मिल रहा है उन्होंने कहा के आज जिले का केला विदेश जा रहा है यहां की फसल की हर जगह डिमांड हो रही है उद्धानिक फसलों को बढ़ावा देने के लिए बड़वानी में आधुनिक सब्जी मंडी बनाई जाएगी वहीं खेतिया को आदर्श मंडी बनाया जाएगा
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OTOP TIWARI
Mar 02, 2026 12:01:26
Surajpur, Chhattisgarh:ब्रेकिंग सूरजपुर भूमि पूजन बना रणक्षेत्र, मंच पर भिड़े भाजपा नेता प्रतापपुर विधानसभा क्षेत्र के धोंधा गांव में कृषि महाविद्यालय के भूमि पूजन कार्यक्रम में बड़ा बवाल。 कार्यक्रम के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच जमकर चले लात-घूंसे。 मंच पर ही खुलकर सामने आई गुटबाजी, नेताओं के सामने बढ़ा विवाद。 मंडल अध्यक्ष मुकेश तायल और प्रदेश पदाधिकारी अनुप गुप्ता के बीच तीखी नोकझोंक के बाद मारपीट。 कृषि मंत्री रामविचार नेताम और विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते के सामने हुआ पूरा घटनाक्रम。 मौके पर अफरा-तफरी, समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की。 राजनीतिक कार्यक्रम में बवाल से क्षेत्र की सियासत गरमाई。 सरकारी कार्यक्रम में हुई इस मारपीट ने पार्टी की अंदरूनी खींचतान को सार्वजनिक कर दिया है।
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SBShowket Beigh
Mar 02, 2026 12:01:11
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ASABHISHEK SHARMA1
Mar 02, 2026 12:00:51
Chittorgarh, Rajasthan:चित्तौड़गढ़ शहर के बसंत नगर स्थित अंबेश्वर महादेव मंदिर परिसर में बसंत नगर महिला मंडल की ओर से भव्य फाग महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और पारंपरिक वेशभूषा में फाग गीत प्रस्तुत किए। महिलाओं ने फूलों से होली खेलकर पूरे मंदिर परिसर को भक्तिमय और उत्सवी माहौल में बदल दिया। ढोलक की थाप पर गाए गए भजन और लोकगीतों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। महिला मंडल की पदाधिकारियों ने बताया कि यह आयोजन पिछले पांच वर्षों से लगातार किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य आपसी सौहार्द, भाईचारा और सांस्कृतिक परंपराओं को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम के अंत में प्रसाद वितरण किया गया।
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DIDamodar Inaniya
Mar 02, 2026 12:00:33
Nagaur, Rajasthan:नागौर के ईनाणा की होली क्यों है अनूठी भारत वर्ष में मनाया जाने वाला होली का पर्व आज के लोगों के लिए भी आकर्षण का केन्द्र बना रहता है। होलीकोत्सव आसूरी शक्तियों के विनाश एवं सात्विक गुणों की स्थापना का पर्व है। इस रंगीले त्योहार को लोग अपने-अपने अंदाज में मनाते हैं। उत्साह एवं उमंग का यह पर्व गांवों में आज भी परम्परागत तरीके से मनाया जाता है। मूण्डवा पंचायत समिति के ईनाणा गांव में होली के उत्सव को देखने के लिए आज भी हजारों की संख्या में दर्शक आते हैं। यह गांव राष्ट्रीय राजमार्ग-89 पर जिला मुख्यालय नागौर से 13 किमी की दूरी पर आबाद है। जहां होली का त्योहार अपने अनूठे अंदाज के लिए ख्यातनाम है। यहां होली से पूर्व होने वाला डांडिया नृत्य एवं होलिका दहन एवं होली उखाडने का अंदाज इस पर्व का मुख्य आकर्षण हैं। इस पर्व को मनाने के लिए पूरे गांव के लोग एकत्र आते हैं अनोखी होली गांव में होली का पर्व मनाने की परम्परा सदीयों से चली आ रही है। इसके लिए होली बनाने के लिए गांव की कांकड़ में सबसे बड़ी खेजड़ी को पूजा करके विधिपूर्वक काट कर लाया जाता है। चार बासो में आबाद इस गांव के जोधावतों के बास के लोग होली लाकर रोपने एवं दहन करने का कार्य करते हैं। होली लाने के लिए युवकों की टोली गाजे-बाजे के साथ जाती है तथा जयकारे करते हुए होली लेकर गांव में पहुंचते हैं। इस दौरान गांव की महिलाएं एवं कन्याएं होली पर जंवार उछालकर सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। होली के दहन से एक दिन पूर्व ही होली लाई जाती है। होली के दिन इसे जमीन में 6-7 फिट गहरा गड्डा खोदकर उसमें रोप दिया जाता है। इसे रोपने से पहले बालक-बालिकाएं अपने द्वारा बनाए गए गोबर के जिरमोटिए इसमें टांग देते हैं। होली आसानी से उखाड़ी नहीं जा सके इसके लिए खड्डे में झाडिय़ां व पत्थर डालकर उसे भर दिया जाता है होली के दिन गांव के रूपावतों के बास, गोगामंड एवं चंवरी के बास के लोग होली उखाडने के लिए दो छोटी खेजडिय़ों को विधिपूर्वक पूजन करके ले आते है। इन्हें स्थानिय बोली में सांगड़ा कहा जाता है। इन सांगड़ों को गांव के बीचों-बीच में लाकर डाल दिया जाता है। जिनकी कुछ हिस्से की छाल उतारकर ऊपर ध्वजाएं बांध दी जाती हैं। यह स्थान होली का दहन के स्थान से लगभग 1 किलोमीटर की दूरी पर है। होली के दहन के समय से कुछ समय पहले ही ग्रामीण इन सांगड़ों को लाठियों व हाथों के बल पर उठाकर दौड़ते हुए होली के दहन के स्थान पर पहुंचते हैं सांगड़े ले जाते समय दोनों दलों में आगे निकलने की होड़ लगी रहती है। होली स्थान पर पहुंचने से पहले गांव के बीच में चार स्थानों पर इन सांगड़ों को खड़ा किया जाता है। निचे गिरने पर फिर इन्हें लेकर लोग दौडऩे लगते हैं। इस दौरान हलकारा गांव में होlsi देखते चालो की आवाज देता हुआ जाता है होली का दहन के समय पंडित लूणकरण दाधिच यज्ञ सम्पन्न करवाते हैं तथा होली का दहन की रस्म की जाती है। होली के चारों तरफ लगाई हुई पाईयों के जलने से जिरमोटिए भी जलने लगते हैं। होली उखाडने वाले दल के लोग आग बुझाने का प्रयास करते हैं। जबकि होली का दहन करने वाले लोग घेरा बनाकर इन्हें रोकने का प्रसास करते हैं जलते अंगारों की परवाह नहीं होली उखाडने वाले दल के लोग होली को बुझाने के लिए जलती हुई होली पर चढ़ जाते है। इस दौरान उन्हें अंगारों से जलने का भय भी नहीं रहता है। यह लोग होली बुझाने के बाद उसे उखाडने का जतन करने में लग जाते हैं दोनों दलों द्वारा लाए गए सांगड़ों को जमीन के बराबर से लाव या बड़ी सांकल से होली को बांधा जाता है। इसके बाद लोग हाथों एवं लाठियों के सहारे इन्हें ऊपर उठाते हैं। इस दौरान सकारात्मक शक्ति प्रदर्शन का बड़ा रोचक दृश्य उत्पन्न होता है। लोगों को उत्साहित करने के लिए ढोल-नंगाड़े व बाजे बजाए जाते हैं। लोग होइश....होइश...... की आवाज करते हुए देखते ही देखते जमीन में गहरी गड्डी हुई होली को उखाड़ देते हैं। होली उखडने के बाद सांगड़ों को पुन: उसी स्थान पर पहुंचाया जाता है। तथा होली को वहीं गिरा दिया जाता है। इस होली को खेत का मालिक अपने घर नहीं ले जाता है। इसका उपयोग मंदिर में पूजा करने वाले परिवार ही करते हैं मनाते हैं शकुन होली का दहन के समय ग्रामीण होली पर टकटकी लगाए देखते रहते हैं। गांव में ऐसी मान्यता है कि होली के आग की लपटें जिस दिशा में जाती है उसी दिशा में अच्छी वर्षा होती है तथा सुकाल होता है। दक्षिण में आग की लपटें जाना लोगों के मन में चिंता का कारण बन जाती है। क्योंकि दक्षिण में आग की लपटें जाना अकाल का प्रतीक होती है। लोगों का यह विश्वास काफी हद तक सिद्ध भी होता आया है लेते हैं ढूंढ होली का दहन के बाद युवकों की टोलियां अपने-अपने मोहल्लों में हाथों में लाठियां लेकर निकल पड़ती है। इनका उद्देश्य पिछली होली के बाद जन्म लेने वाले बालकों को ढूंढना होता है। इस दौरान प्रत्येक घर पर यह टोलियां आडा दिज्यो पाडा दिज्यो....की बात कहते हुए दरवाजे पर लाठियों से दस्तक देती है। जिस घर में नवजात शिशु होता है वहां ढूंढ की जाती है। इस दौरान एक युवक उस बालक को अपनी गोद में लेकर बैठता है तथा अन्य लोग उसके सिर पर लाठियां टकराकर बालक के निडर, साहसी, सुखी एवं समृद्ध होने की कामना करते हैं। बालक के परिजनों द्वारा दी गई मिठाई को यह लोग छिना-झपटी करके खाते हैं। जबकि बधाई में दी गई राशि का उपयोग गर्मी के दिनों में प्याऊ लगाने में किया जाता है एक मंच पर रामा-श्यामा धुलण्डी के दिन सुबह-सुबह एक-दूसरे के घर जाकर रामा-श्यामा करने एवं आशीर्वाद लेने की परम्परा के अलावा गांव में एक साथ रामा सामा की परम्परा भी है। इस दौरान गांव के बड़े बुजुर्ग गंवाड़ में चौपाल पर एकत्र होते हैं तथा होली के रामा-श्यामा करने के बाद गांव के विकास के सम्बन्धित चर्चाएं करते है। इस दिन गांव से सम्बन्धित अहम् फैसले भी लिए जाते हैं होली से 10 दिन पहले से ही गांव के प्रमुख चौकों में डांडिया नृत्य शुरू हो जाता है। यह आयोजन रात्री में होता है। इस दौरान डांडिया नृत्य के जानकार आदमी विभिन्न प्रकार की पौशाकें पहनकर नृत्य करते हैं। डांडिया नृत्य का उत्साह इतना होता है कि बुजुर्ग भी नंगाड़े की थाप पर नाचने को मजबूर हो जाते हैं। नाचने वाले लोग सैनिक, किसान, दुल्हा, दुल्हन, बणजारी समेत कई प्रकार के रूप धारण करके पैरों में घूंघरू बांधकर नाचते है तो दर्शक टकटकी लगाए देखते ही रह जाते हैं। दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए कुछ लोग विभिन्न प्रकार के स्वांग रचते हैं तथा हंसी ठिठौली करते हुए दर्शकों का मनोरंजन करते हैं। स्वांग रचने वाले इन लोगों की कोई निश्चित वेशभुषा नहीं होती। अलबता लोगों को हंसा देने के लिए वे स्त्री-पुरूषों की पौषाकें एक साथ ही पहन लेते हैं। नोट - विजुअल वोट्शप पर भेजे गये है टूसी हो नही रहे है.
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DBDEVENDRA BISHT
Mar 02, 2026 11:55:57
Almora, Uttarakhand:उत्तराखंड के इस गांव में 20 साल से नशामुक्त होली शराब-बीड़ी पर पूर्ण प्रतिबंध, उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई चीर बंधन से शुरू होती परंपरा, अनुशासन और संस्कृति बना पहचान उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट विकासखंड का मल्यााल गांव पिछले करीब दो दशकों से नशामुक्त होली मना रहा है। यहां होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि संस्कृति, अनुशासन और सामाजिक एकता का पर्व बन चुकी है। बड़े-बुजुर्गों ने वर्षों पहले जो मर्यादा तय की थी, युवा पीढ़ी आज भी उसी दायरे में बंधी है。 दो दशक पहले लिया गया ऐतिहासिक फैसला करीब 20 से 25 वर्ष पूर्व होली के दौरान शराब के कारण गांव में अराजकता, लड़ाई-झगड़े और गाली-गलौज की घटनाएं बढ़ने लगी थीं। सदियों से चली आ रही परंपरा प्रभावित होने लगी। तब ग्राम सभा ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि होली में शराब और किसी भी प्रकार का नशा पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। फैसला हुआ कि नशे में पाए जाने वाले व्यक्ति को परिजनों को बुलाकर घर भेजा जाएगा। यदि फिर भी बात न बने तो उसे गांव के गोठ में बंद किया जाएगा। फैसले के बाद हुड़दंग करने वालों को समर्थन नहीं मिला और धीरे-धीरे मल्यााल गांव की होली पूरी तरह नशामुक्त हो गई। एकादशी से चीर बंधन के साथ होती है शुरुआत मल्यााल गांव में होली की विधिवत शुरुआत एकादशी से होती है। इस दिन रंग पड़ने के साथ गांव के पधान के घर चीर बंधन किया जाता है। पधान उस कुल का सबसे बड़ा बेटा होता है, जो प्राचीन काल में चंद राजाओं के लिए राजस्व वसूलने का कार्य करता था। सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार हर घर से अबीर, गुलाल, रोली, अक्षत, फूल, बतासे, दक्षिणा और दो लाल व दो पीले रंग के दो-दो मीटर लंबे, चार इंच चौड़े कपड़े लाए जाते हैं। पधान के आंगन में सामूहिक रूप से चीर बांधी जाती है। गणेश पूजा के साथ होलिका को देवी का प्रतीक मानकर जागृत किया जाता है। मंदिरों में गूंजती है पारंपरिक होली एकादशी की शाम ग्रामीण कालिका और भूमिया देवी मंदिर पहुंचते हैं। यहां पहले महिलाओं की होली गाई जाती है, उसके बाद पुरुष होली गायन करते हैं। हर परिवार से दक्षिणा और गुड़ चढ़ाया जाता है, जिससे बाद में हलवा बनाया जाता है। धुंधेश्वरी देवी का आह्वान किया जाता है। मान्यता है कि इससे गांव के दुख दूर होते हैं और देवी रक्षा करती हैं। घर-घर पहुंचती है होली, बाखली में तय क्रम चीर बंधन के बाद होली गांव के हर घर तक पहुंचती है। बाखली के एक तिहाई घरों में पहले दिन, एक तिहाई में दूसरे दिन और शेष घरों में तीसरे दिन होल्यार पहुंचते हैं। होल्यार पारंपरिक रागों में होली गीत गाते हैं, आशीर्वाद देते हैं और हर घर से गुड़ की भेली अनिवार्य रूप से ली जाती है। संपन्न परिवार होल्यारों को गुजिया, आलू और अन्य पकवान खिलाते हैं। चतुर्दशी और पूर्णिमा की विशेष परंपराएं चतुर्दशी के दिन शिव मंदिर में विशेष होली गायन होता है। पूर्णिमा को होलिका दहन के साथ चीर को ले जाया जाता है और परंपरा अनुसार सुरक्षित रख दिया जाता है। छलड़ी के दिन होली को पूरे गांव में घुमाया जाता है। इस दौरान बुजुर्ग सामाजिक समरसता का संदेश देते हुए आशीर्वाद प्रदान करते हैं। चीर सबसे आगे, पीछे चलते हैं होल्यार ग्राम सभा के निर्णय के अनुसार जुलूस में सबसे आगे चीर चलती है और उसके पीछे होल्यार। इस दौरान अनुशासन का कड़ाई से पालन किया जाता है। किसी भी प्रकार का हुड़दंग या नशा बर्दाश्त नहीं किया जाता। कभी होती थी चीर लूट, अब परंपरा सुरक्षित ग्रामीण बताते हैं कि कालीगाड़ पट्टी के करीब दो दर्जन गांवों में पहले केवल चार-पांच स्थानों पर ही चीर बंधन होता था। जिन गांवों में चीर नहीं होती थी, वहां के लोग अन्य गांवों की चीर छीनने का प्रयास करते थे। इससे मारपीट और यहां तक कि हथियारों के इस्तेमाल की घटनाएं भी होती थीं। कानून व्यवस्था प्रभावित होने के बाद इस परंपरा को बंद कर दिया गया। पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बना गांव ग्रामीण प्रमोद जोशी और राम जोशी बताते हैं कि मल्यााल गांव की नशामुक्त होली अब पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन रही है। आज जब कई स्थानों पर होली में नशे का चलन बढ़ रहा है, ऐसे में मल्यााल गांव संयम, संस्कृति और सामाजिक एकता का संदेश दे रहा है। यहां होली सच मायनों में रंग, राग और मर्यादा का पर्व बन चुकी है बाइट - प्रमोद जोशी, सदस्य होली समिति
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KJKamran Jalili
Mar 02, 2026 11:55:07
Ranchi, Jharkhand:रारांची के विधानसभा थाना क्षेत्र में जमीन विवाद में हुई चाकूबाजी, जमीन के खेल में अपराधियों की एंट्री ने बढ़ाई पुलिस की चुनौती。 जमीन के मामले में विवाद को लेकर विधानसभा थाना क्षेत्र में हुई मारपीट के मामले का खुलासा, हत्या का आरोपी अपने सहयोगियों के साथ कर रहा था जमीन का कब्जा, जिसे लेकर हुई थी मारपीट। मारपीट के दौरान लहराए गए थे हथियार, मामले में पुलिस के द्वारा कार्रवाई, एक दर्जन आरोपियों को किया गया गिरफ्तार। जाकिर अंसारी के द्वारा की गई शिकायत पर की गई कार्रवाई। 30 नामजद के साथ 15 अज्ञात पर दर्ज की गई एफआईआर। पुलिस ने एक फोल्डेबल रायफल एक देशी पिस्टल, 5 जिंदा कारतूस और एक खाली मैगजीन सहित कई गाड़ियों को जब्त किया गया है....
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KSKartar Singh Rajput
Mar 02, 2026 11:54:14
Morena, Madhya Pradesh:मुरैना जिले के अंबाह में इन दिनों भगवान भोलेनाथ के नाम पर आयोजित जयेश्वर महादेव मेला चर्चा में है… लेकिन इस बार वजह आस्था नहीं, अश्लीलता बन गई है। दरअसल, अंबाह में चल रहे इस मेले का आयोजन नगर पालिका परिषद अंबाह द्वारा किया जा रहा है। महादेव बाबा के नाम पर लगने वाला यह मेला वर्षों से श्रद्धा और संस्कृति का प्रतीक माना जाता रहा है। लेकिन इस बार मेले में रंगारंग कार्यक्रमों के नाम पर मंच से अश्लील डांस प्रस्तुत किए जाने के आरोप लग रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां धार्मिक मेले में भजन, कीर्तन, लोकगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां होनी चाहिए थीं, वहां फूहड़ता परोसी जा रही है。 परिवार और बच्चों के साथ मेले में पहुंचे लोगों ने भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि महादेव के नाम पर आयोजित कार्यक्रमों में इस तरह की प्रस्तुतियां धार्मिक भावनाओं को आहत करती हैं और समाज पर गलत संदेश छोड़ती हैं。 अब सवाल यह उठता है कि जब मेला धार्मिक आस्था से जुड़ा है, तो क्या आयोजकों की जिम्मेदारी नहीं बनती कि कार्यक्रमों की मर्यादा और स्तर का ध्यान रखा जाए? स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे कार्यक्रमों पर तत्काल रोक लगाई जाए और मेले को उसकी मूल पहचान — संस्कृति और श्रद्धा — के अनुरूप आयोजित किया जाए.
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MGManoj Goswami
Mar 02, 2026 11:53:55
Datia, Madhya Pradesh:दतिया जिले के भांडेर में 121वें वार्षिक मेले के दौरान रामलीला मंच की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला मामला सामने आया है. नगर परिषद द्वारा आयोजित कार्यक्रम में रामलीला मंच पर ही फूहड़ और अश्लील डांस कराए जाने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं. भांडेर नगर परिषद द्वारा हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी मेले में आर्केस्ट्रा कार्यक्रम आयोजित किया गया था. लेकिन धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के लिए स्थापित रामलीला मंच पर ही कथित रूप से अश्लील और फूहड़ डांस प्रस्तुत किया गया. मंच पर पर्दे पर “श्री रामलीला” लिखा हुआ था, उसी मंच पर इस तरह का डांस चलता रहा. कार्यक्रम स्थल थाना परिसर के समीप होने के बावजूद देर रात तक यह प्रस्तुति जारी रही. बताया जा रहा है कि कार्यक्रम के दौरान नगर परिषद के कर्मचारी तथा नगर के कई गणमान्य नागरिक भी मौजूद थे और आर्केस्ट्रा पार्टी का आनंद लेते दिखाई दिए. अब इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो जाने के बाद लोगों में नाराजगी देखी जा रही है और धार्मिक मंच की मर्यादा भंग करने पर सवाल उठ रहे हैं. फिलहाल इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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VSVIPIN SHARMA
Mar 02, 2026 11:53:07
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SRSANDEEP RATHORE
Mar 02, 2026 11:52:08
Pali, Rajasthan:होली पर सुमेरपुर पुलिस अलर्ट फ्लैग मार्च,नाकाबंदी और साइबर निगरानी से सुरक्षा कड़ी होली पर्व को लेकर सुमेरपुर पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड पर है सीओ जितेंद्रसिंह राठौड़ ने सुमेरपुर सिटी, सदर थाना, सांडेराव व तखतगढ़ थाना अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि त्योहार के दौरान कानून व्यवस्था को माकूल रखा जाए, होलिका दहन के समय प्रमुख स्थानों पर पुलिस जाब्ता तैनात रहेगा। शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर विशेष नाकाबंदी व सघन चेकिंग अभियान के जरिए सख्त कार्रवाई की जाएगी।सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाली भ्रामक या आपत्तिजनक पोस्ट पर कड़ी साइबर निगरानी रखी जा रही है। ग्रामीण व शहरी बाजारों में फ्लैग मार्च निकालकर शांति और सुरक्षा का संदेश दिया जा रहा है, जिससे आमजन में विश्वास कायम रहे। सीओ राठौड़ ने नागरिकों से अपील की है कि वे होली का त्योहार आपसी भाईचारे, शांति और कानून का पालन करते हुए मनाएं। बाइट 1: जितेंद्रसिंह राठौर सीओ सुमेरपुर
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