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हरदोई दरगाह पानी-भभूत से कैंसर के इलाज के दावे पर बहस
ADASHISH DWIVEDI
Feb 03, 2026 03:18:10
Hardoi, Uttar Pradesh
हरदोई में टूमुर्की की दरगाह पर दुआ, पानी और भभूत से कैंसर ठीक होने के दावे
हरदोई जिले के विकासखंड शाहाबाद अंतर्गत टूमुर्की गांव स्थित दरगाह हजरत किबला अतीउल्लाह शाह साबरी इन दिनों आस्था से ज्यादा तेज बहस और विवाद का केंद्र बनी हुई है। अजमेर निवासी बताए जाने वाले बाबा ने करीब 40 वर्ष पहले यहीं पर्दा किया था, जिसके बाद से यह दरगाह श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र बन गई। हर गुरुवार यहां हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं। खास बात यह है कि भीड़ में हर धर्म के लोग शामिल होते हैं
दरगाह पर आने वाले श्रद्धालु दावा करते हैं कि वे भूत-प्रेत, ऊपरी साया, मानसिक बीमारी और गंभीर रोगों से पीड़ित थे, लेकिन यहां आने के बाद उन्हें राहत मिली। दरगाह पर लोग परिक्रमा करते हैं, चादर चढ़ाते हैं, बोतलों में पानी भरकर लाते हैं उसे दरगाह के पास रखते हैं और फिर घर ले जाते हैं। दावा किया जाता है कि इस पानी को पीने से बीमारी दूर हो जाती है। बाबा के नाम की अगरबत्ती जलाकर उसकी राख, जिसे भभूत कहा जाता है, श्रद्धालु घर ले जाते हैं और शरीर में दर्द या तकलीफ होने पर उसे लगाने से आराम मिलने का दावा करते हैं। इतना ही नहीं, दरगाह पर चढ़ाए गए गुलाब के फूल को खाने से भी बीमारी में लाभ होने की बात कही जाती है
सबसे चौंकाने वाला दावा यह है कि यहां कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी तक के ठीक होने की बात कही जा रही है। दरगाह के खादिम चांद साबरी का कहना है कि यहां गंभीर और असाध्य रोगों में भी शिफा मिलती है। उनके अनुसार श्रद्धालु बाबा से दुआ मांगते हैं, पेशी पड़ती है, पानी रखा जाता है और घर ले जाकर वही पानी पीने से उनकी समस्याएं खत्म हो जाती हैं। खादिम का दावा है कि पेशी के दौरान भूत-प्रेत भी भाग जाते हैं और भभूत लगाने से शारीरिक दर्द समाप्त हो जाता है
लेकिन इन दावों ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। क्या केवल दुआ और पानी पीने से कैंसर का इलाज संभव है? क्या फूल खाने और राख लगाने से गंभीर बीमारियां ठीक हो सकती हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बिना किसी वैज्ञानिक प्रमाण ऐसे दावे न सिर्फ भ्रामक हैं, बल्कि गंभीर रोगों से जूझ रहे मरीजों के लिए खतरनाक भी हो सकते हैं, क्योंकि इससे वे समय पर मेडिकल इलाज से दूर हो सकते हैं। वहीं, आस्था रखने वाले लोग इसे बाबा का करिश्मा बताते हैं और विज्ञान से परे मानते हैं
फिलहाल टूमुर्की गांव की यह दरगाह आस्था और अंधविश्वास के बीच की लकीर पर खड़ी नजर आ रही है। सवाल यह नहीं कि लोग मानते हैं या नहीं, सवाल यह है कि इलाज के नाम पर किए जा रहे इन दावों की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा। इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म है और बहस लगातार तीखी होती जा रही है।
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