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KAILASH NATH VERMAKAILASH NATH VERMAFollow12 Mar 2025, 03:14 pm

Gonda: नमो - नमो क्रांति फाउंडेशन द्वारा आयोजित होली मिलन समारोह

Gonda, Uttar Pradesh:

गोंडा के कर्नलगंज सकरौरा के सरयू घाट पर एक दूसरे को गुलाल लगाकर होली का त्योहार मनाया गया. इस समारोह की अध्यक्षता महिला जिला अध्यक्ष सविता मिश्रा जी ने की, जबकि नगर अध्यक्ष पिंटू बाबा ने इसकी जानकारी दी. यह समारोह होली के त्योहार को मनाने और समुदाय के बीच एकता और सौहार्द को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया गया था. दीपक तिवारी प्रदेश अध्यक्ष अवध क्षेत्र अध्यक्ष संजय पांडेय अनिल शुक्ला अवध क्षेत्र सलाहकार मोहित मिश्रा जिला सलाहकार सविता मिश्रा जिला अध्यक्ष गोंडा किरण सिंह जिला मंत्री ललिता ब्लॉक मंत्री कर्नलगंज विधानसभा अध्यक्ष गिरीश शुक्ला ब्लॉक मंत्री सुधांशु शुक्ला प्रियंका अरती गोस्वामी बबली सुमन अन्य लोग उपस्थित रहे।

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शाहजहांपुर में दवा लेने गई युवती शारदा नहर में गिरी, तलाश जारी

SKSHIV KUMARJust now
Piprola Ahmedpur, Uttar Pradesh:शाहजहांपुर में मां के साथ दवा लेने जा रही 18 साल की सीमा ने शारदा नहर में छलांग लगा दी। लापता युवती की तलाश में गोताखोर जुटे हुए हैं। युवती बीमार चल रही थी और ई-रिक्शा पर बैठकर दवा लेने जा रही थी। घटना थाना बंडा क्षेत्र के मकसूदापुर शारदा नहर के पुल की है। पड़ोसी जिले पीलीभीत के बिलसंडा निवासी सीमा अपनी मां गुड्डी देवी के साथ ई-रिक्शा पर बैठकर दवा लेने जा रही थी। स्थानीय लोगों के अनुसार पुल पर पहुंचते ही उसने ई-रिक्शा रुकवा दिया और पानी में पूजा का सिक्का डालने के बहाने नीचे उतर गई। इसके बाद युवती ने नहर में छलांग लगा दी। लोगों की चीख पुकार सुनकर मौके पर पुलिस पहुंची और स्थानीय गोताखोरों की मदद से युवती की तलाश शुरू की गई लेकिन पानी के बहाव के तेज होने के कारण उसका कुछ पता नहीं चल पाया। फिलहाल नहर में कूदी युवती का पता लगाने के लिए पुलिस डटे हैं।
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गया जेल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट सस्पेंड: अपराधियों से सांठगांठ के आरोप सामने

Gaya, Bihar:गया सेंट्रल जेल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट सस्पेंड; अपराधियों से सांठगांठ, ड्यूटी में लापरवाही के लगे आरोप बिहार के गया जेल से एक अहम खबर सामने आ रही है. गया सेंट्रल जेल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट को सस्पेंड कर दिया गया है. गृह विभाग की ओर से उनके निलंबन का आधिकारिक आदेश जारी किया गया है. मिली जानकारी अनुसार गया सेंट्रल जेल के डिप्टी सुपरिटेंडेंट सुदर्शन प्रसाद सिंह को अपराधियों से सांठगांठ और ड्यूटी में भारी लापरवाही के आरोप में सस्पेंड कर दिया गया है. गृह विभाग (कारा) ने उनके निलंबन का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है. सुदर्शन पर जेल में गांजा मिलने के बावजूद एफआईआर न कराने, बिना इंट्री बाहरी लोगों की कैदियों से मुलाकात कराने और स्टाफ से बदसलूकी करने जैसे गंभीर आरोप हैं. निलंबन की अवधि के दौरान उनका मुख्यालय खुदीराम बोस सेंट्रल जेल, मुजफ्फरपुर तय किया गया है. गृह विभाग अब उनके खिलाफ इन सभी आरोपों की विस्तृत विभागीय जांच करेगा. जांच में आरोप सही साबित होने पर उन्हें सेवा से बर्खास्त भी किया जा सकता है. दरअसल पूरे मामले की जड़ 16 जुलाई की एक घटना है. इस दिन जेल के एक वार्ड की तलाशी ली जा रही थी. चेकिंग के दौरान बंदी रमेश यादव उर्फ सुमन यादव के पास से गांजा बरामद हुआ. जेल सुपरिटेंडेंट ने तुरंत सुदर्शन प्रसाद सिंह को निर्देश दिया कि वे इस मामले में आरोपित कैदी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराएं, लेकिन सुदर्शन ने वरिष्ठ अधिकारी का आदेश दरकिनार करते हुए एफआईआर दर्ज कराने से साफ इनकार कर दिया, उनकी इस हरकत से साफ हो गया कि उनकी सहानुभूति अपराधियों के साथ है. गृह विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, सुदर्शन सिंह जेल के सुरक्षा नियमों की भी सरेआम धज्जियां उड़ा रहे थे. वे कैदियों के परिजनों और बाहरी लोगों को अपना दोस्त बताकर सीधे अपने ऑफिस में बुलाते थे और बिना किसी रोक-टोक के कैदियों से उनकी मुलाकात कराते थे. इसके लिए जेल के गेट रजिस्टर में कोई इंट्री भी नहीं की जाती थी. सुपरिटेंडेंट ने उन्हें ऐसा करने से कई बार मौखिक रूप से मना किया था, लेकिन उन पर कोई असर नहीं हुआ. सुदर्शन के इस रवैये से जेल के कक्षपाल (गार्ड्स) और अन्य अधिकारी भी भारी दहशत में थे. अगर कोई जेल कर्मी नियमों का पालन करते हुए बिना चेकिंग के किसी को अंदर जाने से रोकता, तो सुदर्शन उसी कर्मी पर भड़क जाते थे और गाली-गलौज पर उतर आते थे. इतना ही नहीं, उन पर बिना किसी कारण के कैदियों के साथ मारपीट करने का भी आरोप है.
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राजस्थान जल जीवन मिशन को 1578 करोड मंजूर, 15000 करोड के प्रोजेक्ट फिर शुरू

Jaipur, Rajasthan:बजेट में 3 साल बाद सूखा खत्म,15000 करोड के प्रोजेक्ट्स एक बार फिर पकडेंगे रफ्तार,1578 करोड के बजट की मंजूरी आशीष चौहान, जयपुर-जल जीवन मिशन में भजनलाल सरकार ने राजस्थान को बड़ी राहत दी है. राज्य सरकार ने हर घर नल योजना के लिए 1578 करोड की मंजूरी दी है. राज्य सरकार और ठेकेदारों के बीच हुए समझौते के बाद बजट की स्वीकृति दी है. आखिरकार कितने प्रोजेक्ट एक बार फिर से रनिंग में आएंगे..देखे इस खास रिपोर्ट में! जल जीवन मिशन को रफ्तार मिलेगी- घोटालों और गढ़बड़ियों के बाद एक बार से राजस्थान के जल जीवन मिशन को रफ्तार मिलेगी. क्योंकि 3 साल से बजट के सूखे पर अब लगाम लग गई. जल जीवन मिशन में राज्य सरकार ने बजट की मंजूरी दे दी. जिसके बाद राजस्थान में लगभग 15000 करोड के प्रोजेक्ट्स एक बार फिर से शुरू हो गए. जेेजेएम में शुरुआती तौर पर सरकार ने 1578 करोड के बजट की स्वीकृति दी है. जिसमें मेजर प्रोजेक्ट मल्टी विलेज स्कीम के लिए 1,000 करोड और OTMP के क्वालिटी, क्वांटिटी प्रभावित योजनाओं के लंबित काम के लिए 578 करोड स्वीकृत किए है. OTMP में राज्य और केंद्र सरकार की 50,50 प्रतिशत तक की हिस्सेदारी है. जबकि मेजर प्रोजेक्ट्स के लिए राज्य सरकार ने बजट की मंजूरी दी है. जल्द ही जलदाय विभाग बजट आवंटित करेगा. सरकार जुलाई में 1 हजार करोड और जारी करेगी. राजस्थान में जेजेएम का हाल- राजस्थान में हर घर नल योजना के जरिए 1,07,66,907 कनेक्शन होने है,लेकिन अब तक सिर्फ 63,56,761 यानि 59 फीसदी ही कनेक्शन हो गए.बाकी 41 फीसदी कनेक्शन मार्च 2028 तक पूरे करने होंगे.जलदाय विभाग के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा. जेजेएम में किस साल कितने कनेक्शन- साल कनेक्शन 1. 2019-20 1,02,169 2. 2020-21 6,80,883 3. 2021-22 5,38,030 4. 2022-23 13,88,472 5. 2023-24 12,17,862 6. 2024-25 9,44,618 7 2025-26 2,71,691 8. 2026-27 38,905 क्या अब होगा सपना पूरा? साथ ही रेट्रोफिटिंग योजनाएं, जिन्हें राष्ट्रीय जल जीवन मिशन द्वारा जल जीवन मिशन JJM से बाहर कर दिया गया था,उनके शेष कार्यों को भी राज्य निधि से पूरा करने की अनुमति दी गई है.इन फैसलों से राजस्थान में पेयजल परियोजनाओं को नई गति मिलेगी और लाखों ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित और नियमित पेयजल उपलब्ध कराने का रास्ता साफ होगा.अब राजस्थान में ‘हर घर जल’ का सपना साकार होने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ रहे हैं.
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राजस्थान में ट्रैक्टर-ट्रॉली से व्यावसायिक माल परिवहन पर सख्त नियम, पंजीयन अनिवार

Jaipur, Rajasthan:हैडर- - व्यावसायिक कराएं ट्रैक्टर-ट्रॉली, नहीं तो होंगे जब्त! - ट्रैक्टर-ट्रॉली वाले किसानों से परिवहन विभाग की अपील - व्यावसायिक माल परिवहन करने पर होगी सख्ती - परिवहन आयुक्त पुरुषोत्तम शर्मा ने जारी किए आदेश - अफसरों को निर्देश, कृषि कार्य वालों को परेशान न करें - लेकिन खनिज, निर्माण सामग्री परिवहन पर करें सख्ती एंकर राजस्थान में अब ट्रैक्टर-ट्रॉली के जरिए व्यावसायिक माल सामग्री का परिवहन नहीं किया जा सकेगा। व्यावसायिक माल परिवहन करने वाले ट्रैक्टर-ट्रॉली संचालकों से परिवहन विभाग ने ट्रॉली का व्यावसायिक पंजीयन करवाने की अपील की है। ऐसा नहीं करने पर आगामी दिनों में ऐसे ट्रैक्टर-ट्रॉली को जब्त किया जाएगा। क्यों जरूरी है ट्रैक्टर-ट्रॉली का व्यावसायिक पंजीयन, यह रिपोर्ट देखिए- वीओ- 1 सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनुपालना में परिवहन विभाग ने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों चलाने वाले किसानों से अपील की है। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का व्यावसायिक उपयोग करने की स्थिति में परिवहन विभाग ने अपील की है कि ऐसे ट्रैक्टर-ट्रॉली का कृषकों को व्यावसायिक पंजीयन करवाना होगा। दरअसल राज्य में बड़ी संख्या में कृषि प्रयोजन की ट्रैक्टर-ट्रॉली का उपयोग हो रहा है। लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे ट्रैक्टर-ट्रॉली का उपयोग ईंट, बजरी, पत्थर, रेत, खनिज, निर्माण सामग्री, औद्योगिक उत्पादन और अन्य व्यावसायिक माल परिवहन के रूप में भी किया जा रहा है। मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 2 में ऐसे वाहन गुड्स कैरिज की श्रेणी में आते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी एक फैसले में स्पष्ट उल्लेख किया था कि वाहन का वर्गीकरण उसके वास्तविक उपयाेग के आधार पर किया जाएगा। चम्बल घड़ियाल सेंचुरी से जुड़ी सुओ मोटो रिट पिटीशन में भी सुप्रीम कोर्ट ने अवैध खनन और अवैध परिवहन के विरुद्ध सख्ती से कार्रवाई के आदेश दिए हैं। इसे देखते हुए ट्रैक्टर ट्रॉलियों के सम्बंध में अब कड़ाई से पालना कराई जाएगी। परिवहन आयुक्त पुरुषोत्तम शर्मा ने यह भी निर्देश दिए हैं कि वास्तविक कृषि कार्य करने वाले ट्रैक्टर-ट्रॉली मालिक किसानों को परेशान नहीं किया जाए Gfx In ट्रैक्टर-ट्रॉली को लेकर नए नियम - ट्रैक्टर-ट्रॉली का व्यावसायिक पंजीयन नहीं होगा, एग्रीकल्चर श्रेणी में ही रहेगा - वाहन मालिक यदि ट्रॉली का करवाना चाहता है व्यावसायिक पंजीयन - तो ट्रॉली का प्रारूप 27 में श्रेणी परिवर्तन का आवेदन लिया जाएगा - ऐसी ट्रॉलियों का EV, EW, EX, EY, EZ सीरीज में पंजीयन किया जाएगा - हालांकि कृषि ट्रॉली का पंजीयन पूवर्वत सीरीज के तहत होगा - ट्रॉली पर चूंकि चैसिस नम्बर नहीं होते, ऐसे में अधिकारी खुद क्रिएट करेंगे - इसमें ट्रॉली के साथ लगने वाले ट्रैक्टर का नम्बर के साथ TT लिखा जाएगा - इसे ट्रॉली के चैसिस फ्रेम पर पेंट से मौके पर ही लिखवाया जाएगा - ट्रॉली पर ट्रैक्टर का पंजीयन क्रमांक भी दर्ज किया जाएगा - ट्रॉली का GVW वजन 3.5 टन से अधिक होने पर प्रोटोटाइप प्रमाण पत्र लगेगा Gfx Out वीओ- 2 व्यावसायिक पंजीयन करवाने वाली ट्रॉली के लिए परिवहन विभाग ने परमिट, फिटनेस, बीमा और टैक्स से जुड़े नियम भी जारी किए हैं। ऐसे ट्रैक्टर-ट्रॉली संचालकों को परमिट नहीं लेना होगा। लेकिन व्यावसायिक ट्रॉली को फिटनेस प्रमाण पत्र लेना जरूरी होगा। एलएमवी ड्राइविंग लाइसेंस धारक चालक ऐसे ट्रैक्टर-ट्रॉली का संचालन कर सकेंगे। ट्रैक्टर-ट्रॉली का बीमा नहीं लगेगा। व्यासायिक उपयोग की ट्रैक्टर-ट्रॉली पर एमवी टैक्स और ग्रीन टैक्स भी लगेगा。 परिवहन अधिकारियों को निर्देश - परिवहन आयुक्त ने चम्बल घड़ियाल सेंचुरी क्षेत्र में सख्ती के दिए निर्देश - धौलपुर, करौली, कोटा, सवाईमाधोपुर, बूंदी में प्रवर्तन अभियान चलाएं - परिवहन अधिकारी डीलर, व्यापार संघ, मंडी सचिव, खान विभाग से वार्ता करें - समझाइश बैठकें कर ट्रॉली के व्सावसायिक पंजीकरण के प्रति जागरूक करें - परामर्श अवधि समाप्त होने के बाद 15 दिन का अभियान चलाने के निर्देश - बिना HSRP, पंजीयन, अस्पष्ट नम्बर लिखे वाहनों पर कार्रवाई की जाए - व्यावसायिक ट्रैक्टर-ट्रॉली की फिटनेस, बीमा, पीयूसी की sख्ती से जांच हो क्लोजिंग पीटीसी- काशीराम चौधरी
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राजस्थान जल जीवन मिशन को 1578 करोड़ की मंजूरी, 15000 करोड़ प्रोजेक्ट फिर तेज

Jaipur, Rajasthan:बजट का सूखा खत्म,15000 करोड के प्रोजेक्ट्स एक बार फिर पकडेंगे रफ्तार,1578 करोड के बजट की मंजूरी जल जीवन मिशन में राजस्थान को बड़ी राहत दी है. राज्य सरकार ने हर घर नल योजना के लिए 1578 करोड की मंजूरी दी है. राज्य सरकार और ठेकेदारों के बीच हुए समझौते के बाद बजट की स्वीकृति दी गई है. जल जीवन मिशन को रफ्तार मिलेगी- घोटालों और गड़बड़ियों के बाद एक बार राजस्थान के जल जीवन मिशन को रफ्तार मिलेगी. तीन साल से बजट के सूखे पर अब लगाम लग गई. जल जीवन मिशन में राज्य सरकार ने बजट की मंजूरी दी है. इसके बाद राजस्थान में लगभग 15000 करोड के प्रोजेक्ट्स एक बार फिर शुरू हो गए. जेजेएम में शुरुआती तौर पर सरकार ने 1578 करोड के बजट की स्वीकृति दी है, जिसमें मेजर प्रोजेक्ट मल्टी विलेज स्कीम के लिए 1000 करोड और OTMP के गुणवत्ता, मात्रा प्रभावित योजनाओं के लंबित काम के लिए 578 करोड स्वीकृत किए हैं. OTMP में राज्य और केंद्र सरकार की 50-50 हिस्सेदारी है. जबकि मेजर प्रोजेक्ट्स के लिए राज्य सरकार ने बजट की मंजूरी दी है. जल्द ही जलदाय विभाग बजट आवंटित करेगा. सरकार जुलाई में 1000 करोड जारी करेगी. राजस्थान में हर घर नल योजना के जरिए 1,07,66,907 कनेक्शन होने हैं, पर अब तक सिर्फ 63,56,761 यानि 59 फीसदी हो चुके हैं; बाकी 41 फीसदी कनेक्शन मार्च 2028 तक पूरे करने होंगे. जलदाय विभाग के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा. जेजेएम में वर्षार्ह कनेक्शन वर्ष—2019-20 से 2026-27 तक के क्रम में दिए गए हैं. क्या अब होगा सपना पूरा? साथ ही रेट्रोफिटिंग योजनाएं, जिनें NJJM द्वारा जल जीवन मिशन से बाहर किया गया था, उनके शेष कार्य राज्य निधि से पूरा करने की अनुमति दी गई है. इन फैसलों से राजस्थान में पेयजल परियोजनाओं को नई गति मिलेगी और लाखों ग्रामीण परिवारों को सुरक्षित और नियमित पेयजल उपलब्ध कराने का रास्ता साफ होगा. अब राजस्थान में ‘हर घर जल’ का सपना साकार होने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ रहे हैं.
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राजस्थान में ट्रैक्टर-ट्रॉली के व्यावसायिक इस्तेमाल पर कानून लागू — अब सख्ती

Jaipur, Rajasthan:काशीराम चौधरी किसानों से अपील, या तो व्यावसायिक कराएं ट्रैक्टर-ट्रॉली, नहीं तो होंगे जब्त! - ट्रैक्टर-ट्रॉली में निर्माण सामग्री, खनिज, औद्योगिक उत्पाद ले जाने वाले कृषकों पर अब परिवहन विभाग करेगा सख्ती - परिवहन आयुक्त पुरुषोत्तम शर्मा ने परिवहन अधिकारियों को निर्देश दिए, कृषि कार्य वाले ट्रैक्टर-ट्रॉली को परेशान न करें, लेकिन अन्य को करें जब्त जयपुर。 राजस्थान में अब ट्रैक्टर-ट्रॉली के जरिए व्यावसायिक माल सामग्री का परिवहन नहीं किया जा सकेगा। व्यावसायिक माल परिवहन करने वाले ट्रैक्टर-ट्रॉली संचालकों से परिवहन विभाग ने ट्रॉली का व्यावसायिक पंजीयन करवाने की अपील की है। ऐसा नहीं करने पर आगामी दिनों में ऐसे ट्रैक्टर-ट्रॉली को जब्त किया जाएगा। दरअसल सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अनुपालना में परिवहन विभाग ने ट्रैक्टर-ट्रॉली चलाने वाले किसानों से यह अपील की है। ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का व्यावसायिक उपयोग करने की स्थिति में परिवहन विभाग ने अपील की है कि ऐसे ट्रैक्टर-ट्रॉली का कृषकों को व्यावसायिक पंजीयन करवाना होगा। दरअसल राज्य में बड़ी संख्या में कृषि प्रयोजन की ट्रैक्टर-ट्रॉली का उपयोग हो रहा है। लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे ट्रैक्टर-ट्रॉली का उपयोग ईंट, बजरी, पत्थर, रेत, खनिज, निर्माण सामग्री, औद्योगिक उत्पादन और अन्य व्यावसायिक माल परिवहन के रूप में भी किया जा रहा है। मोटर वाहन अधिनियम 1988 की धारा 2 में ऐसे वाहन गुड्स कैरिज की श्रेणी में आते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी एक फैसले में स्पष्ट उल्लेख किया था कि वाहन का वर्गीकरण उसके वास्तविक उपयाेग के आधार पर किया जाएगा। चम्बल घड़ियाल सेंचुरी से जुड़ी सुओ मोटो रिट पिटीशन में भी सुप्रीम कोर्ट ने अवैध खनन और अवैध परिवहन के विरुद्ध सख्ती से कार्रवाई के आदेश दिए हैं। इसे देखते हुए ट्रैक्टर ट्रॉलियों के सम्बंध में अब कड़ाई से पालना कराई जाएगी। परिवहन आयुक्त पुरुषोत्तम शर्मा ने यह भी निर्देश दिए हैं कि वास्तविक कृषि कार्य करने वाले ट्रैक्टर-ट्रॉली मालिक किसानों को परेशान नहीं किया जाए। ट्रैक्टर-ट्रॉली को लेकर नए नियम - ट्रैक्टर का व्यावसायिक पंजीयन नहीं होगा, एग्रीकल्चर श्रेणी में ही रहेगा - वाहन मालिक यदि ट्रॉली का करवाना चाहता है व्यावसायिक पंजीयन - तो ट्रॉली का प्रारूप 27 में श्रेणी परिवर्तन का आवेदन लिया जाएगा - ऐसी ट्रॉलियों का EV, EW, EX, EY, EZ सीरीज में पंजीयन किया जाएगा - हालांकि कृषि ट्रॉली का पंजीयन पूर्ववत सीरीज के तहत होगा - ट्रॉली पर चूंकि चैसिस नम्बर नहीं होते, ऐसे में अधिकारी खुद क्रिएट करेंगे - इसमें ट्रॉली के साथ लगने वाले ट्रैक्टर का नम्बर के साथ TT लिखा जाएगा - इसे ट्रॉली के चैसिस फ्रेम पर पेंट से मौके पर ही लिखवाया जाएगा - ट्रॉली पर ट्रैक्टर का पंजीयन क्रमांक भी दर्ज किया जाएगा - ट्रॉली का GVW वजन 3.5 टन से अधिक होने पर प्रोटोटाइप प्रमाण पत्र लगेगा परमिट नहीं लगेगा, लेकिन टैक्स देना होगा व्यावसायिक पंजीयन करवाने वाली ट्रॉली के लिए परिवहन विभाग ने परमिट, फिटनेस, बीमा और टैक्स से जुड़े नियम भी जारी किए हैं। ऐसे ट्रैक्टर-ट्रॉली संचालकों को परमिट नहीं लेना होगा। लेकिन व्यावसायिक ट्रॉली को फिटनेस प्रमाण पत्र लेना जरूरी होगा। एलएमवी ड्राइविंग लाइसेंस धारक चालक ऐसे ट्रैक्टर-ट्रॉली का संचालन कर सकेंगे। ट्रैक्टर-ट्रॉली का बीमा नहीं लगेगा। व्यासायिक उपयोग की ट्रैक्टर-ट्रॉली पर एमवी टैक्स और ग्रीन टैक्स भी लगेगा। आयुक्त ने परिवहन अधिकारियों को दिए निर्देश - परिवहन आयुक्त ने चंबल घड़ियाल सेंचुरी क्षेत्र में सख्ती के दिए निर्देश - धौलपुर, करौली, कोटा, सवाईमाधोपुर, बूंदी में प्रवर्तन अभियान चलाएं - परिवहन अधिकारी डीलर, व्यापार संघ, मंडी सचिव, खान विभाग से वार्ता करें - समझाइश बैठकें कर ट्रॉली के व्सावसायिक पंजीकरण के प्रति जागरूक करें - परामर्श अवधि समाप्त होने के बाद 15 दिन का अभियान चलाने के निर्देश - बिना HSRP, पंजीयन, अस्पष्ट नम्बर लिखे वाहनों पर कार्रवाई की जाए - व्यावसायिक ट्रैक्टर-ट्रॉली की फिटनेस, बीमा, पीयूसी की सख्ती से जांच हो
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13 वर्षीय आराध्य ने 7 किमी बरसाना परिक्रमा कर रिकॉर्ड का सपना दिखाया

Mathura, Uttar Pradesh:13 वर्षीय आराध्य ने हाथों के बल शुरू की बरसाना धाम की 7 किलोमीटर कठिन परिक्रमा, वर्ल्ड रिकॉर्ड पर है नजर** **मथुरा।** कान्हा की नगरी ब्रज में श्रद्धा और संकल्प का एक ऐसा अद्भुत नजारा देखने को मिल रहा है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। आगरा के रहने वाले महज़ 13 वर्षीय बालक आराध्य गुप्ता ने राधा रानी धाम (बरसाना) की लगभग 7 किलोमीटर लंबी पक्की परिक्रमा को अपने हाथों के बल चलकर पूरा करने का एक बेहद कठिन संकल्प लिया है। आराध्य अपनी इस कठिन साधना और यात्रा को अपनी स्वर्गीय दादी की पावन स्मृति को समर्पित कर रहा है。 ### बचपन से ही है धार्मिक प्रवृत्ति मूल रूप से आगरा के प्रतीक विहार (फेस-2) निवासी कमलेश गुप्ता और सीमा गुप्ता का पुत्र आराध्य अपनी जुड़वां बहन आराध्या गुप्ता के साथ बचपन से ही धार्मिक और आध्यात्मिक प्रवृत्ति का है। परिवार के अनुसार, आराध्य में बचपन से ही गहरे आध्यात्मिक संस्कार रहे हैं और वह हमेशा से ही प्रभु भक्ति और धार्मिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेता रहा है。 ### 8 वर्षों के कड़े अभ्यास का परिणाम हाथों के बल इतनी लंबी और कठिन परिक्रमा करना कोई मामूली बात नहीं है। इसके लिए आराध्य पिछले 8 वर्षों से लगातार कड़ा अभ्यास कर रहा है। इस कठिन साधना के मार्ग में आराध्य की मां सीमा गुप्ता_saae साए की तरह उसके साथ हैं, जो हर कदम पर उसका हौसला बढ़ाती हैं और इस बेहद मुश्किल अभ्यास के दौरान उसका उत्साह बनाए रखती हैं। ### वर्ल्ड रिकॉर्ड्स बनाने का है लक्ष्य आराध्य का संकल्प सिर्फ परिक्रमा पूरी करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह इस अनूठी उपलब्धि के माध्यम से वैश्विक स्तर पर देश का नाम रोशन करना चाहता है। उसका मुख्य सपना अपना नाम 'गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' (Guinness World Records) में दर्ज कराना है। इसके लिए वह 'इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स', 'लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' और 'एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' में भी अपना नाम दर्ज कराने के लिए आधिकारिक रूप से आवेदन कर चुका है। बरसाना के पक्के परिक्रमा मार्ग पर जब यह 13 साल का बच्चा हाथों के बल चलते हुए राधारानी के जयकारे लगाता है, तो वहां मौजूद हर श्रद्धालु दांतों तले उंगली दबा लेता है। स्थानीय लोग और देश-विदेश से आए श्रद्धालु आराध्य की इस अटूट श्रद्धा, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति की जमकर सराहना कर रहे हैं और उसके विश्व रिकॉर्ड के सपने को सफल होने का आशीर्वाद दे रहे हैं。 बाइट-- आराध्य बाइट-सीमा,मां
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खारुन ओवरब्रिज: दो महीने में उखड़ी सड़क, करोड़ों रुपये पर सवाल

Begun, Rajasthan:दो महीने पहले करोड़ों रुपये खर्च कर जिस खारुन ओवरब्रिज की सड़क को नया बनाया गया था, वह पहली ही बारिश में उखड़ने लगी है.. जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं, बारिश का पानी भर रहा है और रोजाना डेढ़ लाख से ज्यादा वाहन चालक परेशान हो रहे हैं.. सवाल यह है कि क्या निर्माण में लापरवाही हुई या फिर मॉनिटरिंग में चूक? इन تصويرों में रायपुर के खारुन ओवरब्रिज की स्थिति है, जहां करीब 16 करोड़ रुपये की लागत से हुई मरम्मत के महज दो महीने बाद ही सड़क उखड़ने लगी है.. कई जगह गड्ढे बन गए हैं और वाहन चालकों को धीमी रफ्तार से गुजरना पड़ रहा है.. अब सवाल उठ रहा है कि आखिर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद गुणवत्ता पर निगरानी क्यों नहीं रखी गई? जानकारी के मुताबिक, मरम्मत के बाद ओवरब्रिज के ड्रेनेज सिस्टम की समय पर सफाई नहीं हुई.. बारिश का पानी सड़क पर जमा होता रहा और सड़क कई जगह से खराब हो गई.. रोजाना करीब 1.5 लाख वाहन इस मार्ग से गुजरते हैं, जिन्हें अब परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.. ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि करोड़ों रुपये की सड़क अगर पहली ही बारिश नहीं झेल पाई, तो निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?
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कटघोरा के सलिहाभाठा में हाथियों का दल दिखा; ग्रामीणों में सुरक्षा को लेकर चिंता

Korba, Chhattisgarh:एंकर- कोरबा जिले के कटघोरा वनमंडल अंतर्गत सलिहाभाठा क्षेत्र में हाथियों के दल का मनमोहक नजारा देखने को मिला। करीब 15 हाथियों का दल, जिसमें नर, मादा और शावक शामिल हैं, जंगल में अपने ऊपर मिट्टी उड़ाते और जलक्रीड़ा करते हुए दिखाई दिये. हालांकि यह नजारा जितना आकर्षक है, उतनी ही चिंताजनक भी है क्योंकि यही दल समय-समय पर रिहायशी इलाकों की ओर भी पहुंच जाते है, जिससे ग्रामीणों में जान-माल की सुरक्षा को लेकर डर बना रहता है। दरअसल कटघोरा वन मंडल मे हाथि अलग अलग झुंड मे विचरण कर रहे हैँ, क्षेत्र में भोजन और पानी की पर्याप्त उपलब्धता होने के कारण हाथियों ने यहीं डेरा जमा रखे है। वैसे वन विभाग लगातार हाथियों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है और लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रहा है।
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निहंग सिखों के जत्थे से उत्तराखंड-हिमाचल बॉर्डर सील, बातचीत जारी

Dehradun, Uttarakhand:उत्तराखंड में दाखिल होने की जिद कर रहे निहंग सिखों के जत्थे के बारे में प्रशासन लगातार बातचीत कर रहा है। इस वक्त बड़ी संख्या में निहंग सिखो का जत्था पांवटा साहिब गुरुद्वारे में मौजूद है, जिसके साथ हिमाचल प्रदेश का प्रशासन और उत्तराखंड का प्रशासन बातचीत में जुटे हैं। सिख इस बात पर अड़े हैं कि उन्हें उनकी यात्रा के लिए बिना रोकटोक जाने दिया जाए, जबकि Chamoli के कर्णप्रयाग में हुई घटना के बाद प्रशासन को आशंका है कि उत्तराखंड आने से कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है। कल देर रात निहंग सिखो ने बॉर्डर पर तलवारे लहराते हुए बैरिकेडिंग तोड़ दी थी और जबरन प्रदेश में दाखिल होकर वाहनों में तोड़फोड़ की थी। देखते हुए अब पुलिस ने कुलहाल बॉर्डर को सील कर दिया है। बॉर्डर के सील होने से रोजाना आवाजाही करने वाले लोगों को भी बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। फिलहाल प्रशासन बातचीत के जरिए मामले को सुलझाने की कोशिश में जुड़ा हुआ है।
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