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Rajan KushwahaRajan KushwahaFollow25 Dec 2024, 02:04 pm
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महाराष्ट्र सरकार लिविंग विल के लिए दो मेडिकल बोर्ड गठित करेगी, मार्गदर्शक निर्णय जारी

Mumbai, Maharashtra:लिविंग विल’ पर महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला, सरकारी और निजी अस्पतालों में गठित होंगी दो मेडिकल समितियां  महाराष्ट्र सरकार ने गंभीर और असाध्य रोगों से जूझ रहे मरीजों के उपचार से जुड़े ‘लिविंग विल (Advance Directives)’ मामलों के निपटारे के लिए महत्वपूर्ण शासन निर्णय जारी किया है। इस फैसले के तहत राज्य के सरकारी और निजी अस्पतालों में प्राथमिक (Primary) और द्वितीय (Secondary) मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाएगा, ताकि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप जीवनरक्षक उपचार (Life Support) हटाने या बंद करने जैसे संवेदनशील मामलों पर समयबद्ध और पारदर्शी निर्णय लिया जा सके। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के ‘हरीश राणा बनाम यूनियन ऑफ इंडिया एवं अन्य’ मामले में दिए गए निर्देशों के आधार पर लिया गया है। इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय ने कॉमन कॉज मामले में भी स्पष्ट किया था कि यदि कोई मरीज असाध्य स्थिति में है और उसने पहले से ‘लिविंग विल’ तैयार की है, तो उसकी इच्छा के अनुरूप उपचार वापस लेने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत पूरी की जा सकती है। सरकार ने अपने आदेश में 13 वर्षों तक गंभीर बीमारी से पीड़ित रहे हरीश राणा का भी उल्लेख किया है। सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए उन्हें कृत्रिम भोजन, पानी और लाइफ सपोर्ट हटाने की अनुमति दी थी। इसके बाद 24 मार्च 2026 को दिल्ली एम्स में उनका शांतिपूर्वक निधन हो गया। इसी निर्णय के बाद राज्यों को मेडिकल बोर्ड गठित करने के निर्देश दिए गए थे। सरकारी अस्पतालों में ایسی होगी समिति सरकारी अस्पतालों में प्राथमिक मेडिकल बोर्ड की अध्यक्षता अतिरिक्त जिला शल्य चिकित्सक करेंगे। इसमें एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, शल्य चिकित्सक और फिजिशियन सदस्य होंगे, जबकि संबंधित चिकित्सा अधिकारी सदस्य सचिव की भूमिका निभाएंगे। वहीं द्वितीय मेडिकल बोर्ड की अध्यक्षता जिला शल्य चिकित्सक करेंगे। इसमें एनेस्थीसिया विशेषज्ञ, शल्य चिकित्सक, फिजिशियन और सदस्य सचिव के रूप में चिकित्सा अधिकारी शामिल होंगे。 निजी अस्पतालों के लिए भी अलग व्यवस्था निजी अस्पतालों में प्राथमिक मेडिकल बोर्ड का गठन अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) या मेडिकल सुपरिंटेंडेंट करेंगे। इस समिति में उपचार करने वाले चिकित्सक, क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ और वरिष्ठ फिजिशियन या सर्जन शामिल होंगे。 इसके अलावा द्वितीय मेडिकल बोर्ड की अध्यक्षता संबंधित अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर करेंगे। इसमें उपचाररत चिकित्सक, संबंधित विषय के कम से कम पांच वर्ष के अनुभव वाले विशेषज्ञ, जिला शल्य चिकित्सक द्वारा नामित बाहरी विशेषज्ञ और जिला शल्य चिकित्सक सदस्य के रूप में शामिल होंगे। मुंबई और मुंबई उपनगर में जिला शल्य चिकित्सक के स्थान पर संबंधित सरकारी अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक समिति का हिस्सा होंगे। सरकार ने सभी जिला शल्य चिकित्सकों को अपने-अपने जिलों में पंजीकृत चिकित्सा विशेषज्ञों का पैनल तैयार करने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर स्वतंत्र विशेषज्ञों की नियुक्ति तुरंत की जा सके। इस शासन निर्णय के लागू होने से राज्य में ‘लिविंग विल’ से जुड़े मामलों के निपटारे की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट, पारदर्शी और कानूनी रूप से मजबूत होने की उम्मीद है।
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आजमगढ़ के सपा सांसद दरोगा प्रसाद सरोज पर तालाब कब्ज़े के आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग

Azamgarh, Uttar Pradesh:सपा सांसद दरोगा प्रसाद सरोज पर तालाब और गांव के गरीबों की जमीन कब्जाने का आरोप, पीड़िता ने मंडलायुक्त से निष्पक्ष जांच की मांग, सपा सांसद ने आरोपों को बताया निराधार, किसी भी जांच के लिए तैयार। जनपद आजमगढ़ के लालगंज तहसील के मोहनपुर पटवास गांव के कुछ ग्रामीणों ने मंडलायुक्त, आजमगढ़ को शिकायत पत्र देकर लालगंज लोकसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के सांसद दरोगा प्रसाद सरोज एवं उनके परिजनों पर सार्वजनिक तालाब की भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया है। शिकायत में निष्पक्ष जांच कर तालाब की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की गई है। न्याय ना मिलने पर मुख्यमंत्री आवास के सामने जाकर आत्महत्या की दी चेतावनी है। वहीं इस मामले में सांसद दरोगा प्रसाद ने इन आरोपों को निराधार बताया। शिकायतकर्ता का आरोप है कि गांव की आराजी संख्या 137, रकबा 7.798 हेक्टेयर, जो तालाब खाते में दर्ज है, उस पर कथित तौर पर फार्म हाउस बना लिया गया है। साथ ही कुछ हिस्से में खेती और मछली पालन किये जाने का भी मामला बताया गया। ग्रामीणों का दावा है कि पहले इस तालाब का उपयोग पशुओं के नहलाने, ग्रामीणों के दैनिक उपयोग और सार्वजनिक हित के कार्यों के लिए होता था, लेकिन अब आम लोगों का उपयोग बंद हो गया है। इस मामले की शिकायत पहले मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से भी की गई थी, जिसके बाद जिलाधिकारी आजमगढ़ को जांच के निर्देश दिए गए थे। लेकिन अबतक जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है तथा मामले को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। शिकायतकर्ता ने मंडलायुक्त से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराकर यदि सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जा पाया जाए तो उसे हटाकर तालाब को पुनः जन उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जाए। पीड़िता गीता सरोज का आरोप है कि उनके गाँव के सपा सांसद दरोगा प्रसाद सरोज ने गाँव के लगभग 50 बीघे के तालाब ग्राम सभा की संपत्ति पर कब्ज़ा कर लिया है और वहाँ एक बड़ा फार्म हाउस बना लिया है। इसके अलावा, उन्होंने आस-पास के कई गरीब ग्रामीणों की ज़मीनें भी हड़प ली हैं। जहां फार्म हाउस के चारों तरफ ज़मीन पर बिजली के तार बिछाए गए हैं, 5-6 बोरिंग की गई है और वहाँ अवैध रूप से मछली पालन व पेड़ों की कटाई करके लकड़ी बेची जा रही है। आरोप लगाया कि सांसद के परिवार के सदस्य बेटे मनोज सरोज, प्रमोद सरोज और पोता/महाप्रधान अभिषेक सरोज शराब पीकर उनके घर के आस-पास गाड़ियाँ दौड़ाते हैं, हुड़दंग मचाते हैं और विरोध करने पर जान से मारने व तालाब में गाड़ देने की धमकी देते हैं। गीता सरोज ने बताया कि एक महीने पहले उनकी खुद की लगभग 1 बीघा ज़मीन जिसमें पोखरा था उस पर भी रात में इंजन लगाकर पानी सुखाया गया, मछलियाँ मार ली गईं और आधे पोखरे को पाटकर कब्ज़ा कर लिया गया। उन्होंने इस मामले की शिकायत एसडीएम, तहसीलदार, कानूनगो और लेखपाल से की थी, लेकिन सांसद के प्रभाव के कारण स्थानीय प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। 112 नंबर या अन्य हेल्पलाइन पर कॉल करने के बाद जब पुलिस आती है, तो उनके सामने भी ये लोग दबंगई और मारपीट करने की धमकी देते हैं। अगर प्रशासन उनकी सुनवाई नहीं करता और जाँच पूरी करके कार्रवाई नहीं की जाती, तो वे सांसद और उनके परिवार के हाथों मरने के बजाय मुख्यमंत्री आवास के सामने जाकर आत्महत्या कर लेंगी।
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टोंक दौरे पर सचिन पायलट का सरकार पर शिक्षा-स्वास्थ्य और तबादलों को लेकर सवाल

Tonk, Rajasthan:टोंक शिक्षा, स्वास्थ्य और तबादलों को लेकर सरकार पर विपक्ष के निशाने, सचिन पायलेट ने कई मुद्दों पर उठाए सवाल देश और प्रदेश के विभिन्न मुद्दों को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक के लंबे समय से चल रहे अनशन और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्ष सरकार पर गंभीर नहीं होने का आरोप लगा रहा है। साथ ही, राजस्थान में प्रसूताओं की मौतों को लेकर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं और निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। वहीं, शिक्षा विभाग में हाल ही में हुए तबादलों को लेकर भी विरोध के स्वर सुनाई दे रहे हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि तबादले निष्पक्ष तरीके से नहीं किए गए। इसके अलावा, इथेनॉल नीति को लेकर भी सरकार की आलोचना की जा रही है और कहा जा रहा है कि इसे पर्याप्त तैयारी के बिना लागू किया गया। विपक्ष का कहना है कि शिक्षा, स्वास्थ्य और जनहित से जुड़े मुद्दों पर सरकार को जवाबदेही के साथ काम करना चाहिए, जबकि सरकार इन आरोपों से अलग अपना पक्ष रखती रही है।
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बलरामपुर में समय पर भुगतान से गन्ना किसानों की आय बढ़ी; समृद्धि लौटी

Balrampur, Uttar Pradesh:बलरामपुर में समय पर भुगतान और सरकारी योजनाओं से बदली गन्ना किसानों की तस्वीर, बढ़ी आय तो लौटी समृद्धि बलरामपुर में कभी गन्ना मूल्य भुगतान के लिए महीनों इंतजार करने वाले किसानों की तस्वीर अब बदलती नजर आ रही है। समय पर भुगतान, कृषि यंत्रों पर अनुदान और खेती से जुड़ी सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने से जिले के गन्ना उत्पादक किसानों की आय में बढ़ोतरी हुई है। सदर विकासखंड के सिरसिया फार्म के दो किसानों ने बताया कि समय पर भुगतान मिलने से न सिर्फ खेती आसान हुई है, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति भी पहले से बेहतर हुई है। सिरसिया फार्म निवासी बृजेश कुमार वर्मा, पुत्र स्वर्गीय राजकुमार वर्मा, ने ग्रेजुएशन के बाद खेती को ही अपना पेशा बनाया। पिछले करीब 20 वर्षों से वह लगभग 100 बीघा भूमि पर गन्ने की खेती कर रहे हैं। बृजेश बताते हैं कि पहले गन्ने की खेती तो होती थी, लेकिन भुगतान समय पर नहीं मिलने से अगली फसल की तैयारी प्रभावित होती थी। खेती में लगाया गया पैसा लंबे समय तक फंसा रहता था, जिससे आर्थिक दबाव बना रहता था। वह बताते हैं कि अब गन्ने का भुगतान समय से मिलने लगा है। इसके साथ ही कृषि यंत्रों पर सरकारी अनुदान और अन्य योजनाओं का लाभ मिलने से खेती की लागत कम हुई है। आधुनिक कृषि उपकरणों के इस्तेमाल से उत्पादन में भी सुधार आया है। उनका कहना है कि आय बढ़ने से परिवार की जरूरतें आसानी से पूरी हो रही हैं और आर्थिक स्थिरता आई है। इसी गांव के किसान शिवकुमार वर्मा, पुत्र स्वर्गीय छोटेलाल वर्मा, पिछले लगभग 35 वर्षें से करीब 70 बीघा भूमि पर गन्ने की खेती कर रहे हैं। उनका कहना है कि पहले भुगतान में देरी होने के कारण अगली फसल की बुवाई और अन्य कृषि कार्य समय पर नहीं हो पाते थे। पूंजी फंस जाने से किसानों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। शिवकुमार बताते हैं कि अब समय पर भुगतान मिलने से खेती की पूरी योजना व्यवस्थित ढंग से बन जाती है। गन्ना खेती से जुड़े अनुदान, कृषि यंत्रों पर मिलने वाली सहायता और अन्य सुविधाओं का लाभ भी आसानी से मिल रहा है। इससे खेती लाभ का सौदा बन रही है और किसानों का आत्मविश्वास बढ़ा है। दोनों किसानों का कहना है कि समय पर गन्ना मूल्य भुगतान, सरकारी योजनाओं की आसान उपलब्धता और खेती के लिए मिल रही सहायता ने उनकी आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनका कहना है कि आर्थिक स्थिति मजबूत होने से परिवार के जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव आया है। किसानों ने केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
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बिहार में AI आधारित सुशासन के लिए MoU; सम्राट चौधरी ने किया समझौता

Patna, Bihar:बिहार सरकार ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सुशासन, नवाचार और डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग और सर्वम एआई-भारत जीपीटी के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं इस साझेदारी के जरिए राज्य में एआई आधारित तकनीकों के विकास, अनुसंधान और जनसेवाओं को नई दिशा मिलेगी अब इसको लेकर राजनीति भी शुरू हो गई कांग्रेस नेता और पूर्व विधायक ऋषि मिश्रा ने कहा की एआई का क्षेत्र हो, आईटी का क्षेत्र हो, काम होना चाहिए और युवा जो हैं उनको उसका फायदा होना चाहिए आईवॉश (Eye-wash/छलावा) नहीं होना चाहिए ,आप एमओयू की बात कर रहे हैं, इसी सरकार ने कुछ महीनों पहले 50 हजार करोड़ का एमओयू किया था कि हमारे राज्य में 50,000 करोड़ का इन्वेस्टमेंट आ रहा है क्या स्थिति है उसकी? कौन सा एमओयू एग्रीमेंट में चेंज हुआ, इसलिए युवाओं के साथ सरकार को बिल्कुल खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। युवाओं का आईवॉश ना करें अगर एआई और आईटी क्षेत्र में बिहार में काम हो रहा है, अच्छी बात है, लेकिन जमीन पर उसको उतारें जेडीयू के पूर्व MLC भीष्म सहनी ने कहा कि बिहार सरकार पहले से ही सजग थी और इससे कृषि हो, रोजगार हो, इन सब क्षेत्रों में जो है इससे बहुत लाभ मिलेगा। और यह सरकार जो है, एनडीए (NDA) की जो सरकार है, सम्राट चौधरी जी के नेतृत्व में अच्छा काम कर रही है और बिहार का विकास जो है निरंतर हो रहा है। बीजेपी के पूर्व विधायक और प्रदेश उपाध्यक्ष पवन जायसवाल ने कहा 12 साल मोदी सरकार के बेमिसाल रहा, उसी प्रकार 100 दिन सम्राट भैया के सरकार का भी बेमिसाल है AI के क्षेत्र में बेहतर काम हो ही रहा है, बिहार में कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है जिस क्षेत्र में बेहतर काम नहीं हुआ है। एक बार 213 डिग्री कॉलेजों का संचालन शुरू हुआ है, एक साथ शुरू हुआ। उसके साथ-साथ बहुत से काम हुए, कितना चर्चा किया जाएगा, काफी काम हो रहा है। यही तो इसका प्रतिफल है कि पूरे देश के साथ-साथ बिहार के लोगों की निष्ठा एनडीए के प्रति, मोदी जी के प्रति और हमारे घटक दलों के प्रति लगातार दिख रही है। आरजेडी के प्रवक्ता आरजू खान ने कहा की मैं कहता हूं कि यह दिखावापन क्यों है? आज यह दो दशकों की सरकार दिखावापन से ऊपर क्यों नहीं उठती है? और इस प्रदेश के मुख्यमंत्री जब AI का सबमिट होता है, तो वह हरे गमछे की बात क्यों करते हैं? क्या उनको नहीं पता कि मुख्यमंत्री की गरिमा क्या है? और मैं तो कहता हूं कि जब केंद्र ने आपको इतने पैसे दिए, इतना सहयोग दिया, तो बिहार पिछड़ेपन में नंबर एक क्यों है हर क्षेत्रों में? सवाल सबसे बड़ा यह होता है कि यह देश के प्रधानमंत्री आते हैं, कभी 156 हजार करोड़ का पैकेज देते हैं, कभी 56 हजार करोड़ का पैकेज देते हैं, कभी 46 हजार करोड़ का पैकेज देते हैं, लेकिन इस डबल इंजन की सरकार में, दो दशकों की सरकार में, यह दिखावापन से ऊपर क्यों नहीं निकलते हैं?बिहार पिछड़ेपन में नंबर एक क्यों है? हेल्थ में और स्ट्रक्चर में... हेल्थ के अलावा आपको एजुकेशन में सबसे पिछड़े पायदान पे क्यों है? तो मैं यह कहना चाहूंगा कि सिर्फ और सिर्फ यह सरकार दिखावा करती है
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पानीपत साइबर सेल ने 50 गुम हुए मोबाइल लौटाए; मालिकों को सौंपे

Panipat, Haryana:पानीपत पुलिस का सराहनीय कदम एसपी भूपेंद्र सिंह के नेतृत्व में साइबर सेल का कमाल 50 मोबाइल ट्रेस कर किए हैंडओवर पानीपत। पुलिस अधीक्षक भूपेंद्र सिंह के कुशल नेतृत्व में पानीपत पुलिस की साइबर सेल ने एक बार फिर सराहनीय कार्य करते हुए गुम हुए 50 मोबाइल फोन बरामद कर उनके वास्तविक मालिकों को सौंप दिए। डीएसपी सुरेश सैनी ने आयोजित कार्यक्रम के दौरान शिकायतकर्ताओं को उनके मोबाइल हैंडओवर किए। अपने मोबाइल वापस मिलने पर लोगों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी और उन्होंने पानीपत पुलिस का आभार व्यक्त किया。 डीएसपी सुरेश सैनी ने बताया कि एसपी भूपेंद्र सिंह के निर्देश पर गुम हुए मोबाइल फोन की शिकायतों पर साइबर सेल लगातार कार्रवाई कर रही है। जिन लोगों ने अपने मोबाइल गुम होने की शिकायत दर्ज कराई थी, उनकी शिकायतों पर तकनीकी माध्यमों से कार्रवाई करते हुए करीब 50 मोबाइल फोन ट्रेस किए गए और उन्हें उनके असली मालिकों को सौंप दिया गया। उन्होंने बताया कि बरामद किए गए मोबाइलों की कुल कीमत लगभग 10.50 लाख रुपये है। इनमें सैमसंग, वीवो सहित विभिन्न कंपनियों के मोबाइल शामिल हैं। कुछ मोबाइल एक-दो महीने पहले गुम हुए थे, जबकि कुछ अन्य उससे पहले खोए थे। डीएसपी ने कहा कि यह धारणा गलत है कि गुम हुए मोबाइल की शिकायत पर कार्रवाई नहीं होती। पुलिस के पास आने वाली प्रत्येक लॉस्ट मोबाइल शिकायत पर साइबर सेल गंभीरता से काम करती है। उन्होंने बताया कि पिछले महीने भी करीब 50 मोबाइल उनके मालिकों को लौटाए गए थे, जबकि इससे पहले भी लगभग 100 मोबाइल ट्रेस कर सौंपे जा चुके हैं。 उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि किसी का मोबाइल गुम हो जाए तो तुरंत संबंधित थाना में शिकायत दर्ज कराएं या ऑनलाइन डीडीआर दर्ज करें। शिकायत मिलने के बाद साइबर सेल मोबाइल को ट्रेस करने का हरसंभव प्रयास करती है。 डीएसपी सुरेश सैनी ने बताया कि बरामद मोबाइल अलग-अलग स्थानों से प्राप्त हुए हैं और सभी को विधिवत सत्यापन के बाद उनके वास्तविक मालिकों को सौंपा गया। अधिकांश लाभार्थी पानीपत जिले के निवासी हैं。 बाइट सुरेश सैनी डीएसपी
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कैबिनेट मंत्री रणवीर गंगवार ने गोयन्का सेवा सदन में श्रद्धांजलि दी

Chandigarh, Chandigarh:स्वर्गीय श्री नंद किशोर गोयन्का जी को श्रद्धांजलि देने कैबिनेट मंत्री रणवीर गंगवार हिसार स्थित गोयन्का सेवा सदन पहुंचे। इस मौके पर उन्होंने श्री नंद किशोर गोयन्का जी को याद करते हुए कहा कि वे एक महान समाज सेवी और गौभक्त थे, वे सामाजिक कार्यों में भी बढ़ चढ़कर शामिल होते थे। वे राष्ट्र प्रथम को आगे रखकर काम करते थे। उनकी इन बातों के लिए उन्हें हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने हिसार के लिए भी बहुत काम किया है। वे हमेशा मानवता भलाई के लिए काम करते थे। आम आदमी की उन तक पहुंच थी। कोई भी आकर उनसे मिल सकता था। उनके जाने से एक खालीपन हुआ है जिसे भरा नहीं जा सकता। वे महान आत्मा थे। वे परमात्मा के चरणों में गए हैं।
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गंगा घाट पर 16 वर्षीय शिवम का शव मिलने से परिजनों ने हत्या का आरोप लगाया

Munger, Bihar:प्रेम प्रसंग में दो दिनों से लापता 16 वर्षीय किशोर का शव गंगा घाट में मिला, परिजनों ने हत्या का लगाया आरोप, सदर अस्पताल के पास सड़क जाम कर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग। मुंगेर : दो दिनों से लापता जमालपुर थाना क्षेत्र खलासी मोहल्ला निवासी बीरेंद्र बिन्द का 16 वर्षीय पुत्र शिवम कुमार का शव शुक्रवार को मनिया चौराहा गंगा घाट में मिला है। शव मिलने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। मृतक दसवीं कक्षा का छात्र था। वही घटना की सूचना मिलने के बाद जमालपुर थानाध्यक्ष पंकज पासवान दल -बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे जहां घटना स्थल पर एफएसएल की टीम को बुलाया गया और कई साक्ष्य को एकत्रित कर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए मुंगेर सदर अस्पताल लाया गया। वही शिवम का शव पोस्टमार्टम हॉउस पहुंचते ही परिजन आक्रोश हो गए और सदर अस्पताल- लाल दरवाजा मुख्य सड़क जाम कर दिया, सड़क जाम होने से कई घंटे आवागमन प्रभावित हुई। जाम की सूचना मिलते ही प्रभारी डीएसपी राकेश रंजन कोतवाली थाना की पुलिस सदर अस्तपताल पहुंचे। वही जाम कर रहे परिजनों ने आरोपी की गिरफ्तारी की मांग कर रहे थे। पुलिस द्वारा काफी समझाने व आश्वासन मिलने के बाद परिजनों ने सड़क जाम को हटाया। परिजनों ने पहले ही आशंका जताई थी कि किशोर का अपहरण कर हत्या कर दी गई है। मृतक के पिता का आरोप है कि पुत्र के साथ पढ़ने वाली लड़की और उसके परिवार ने मिलकर उनके बेटे की हत्या कर शव को गंगा में फेंक दिया। जानकारी के अनुसार बुधवार को ट्यूशन पढ़कर जब शाम सात बजे शिवम घर लौटा तो परिजनों को कहकर यह निकला कि वह बाहर से आ रहा है, जिसके बाद देर रात जब वह घर नहीं लौटा, परिजनों ने उसकी खोजबीन शुरू कर दी, वही देर रात उसका कुछ पता नहीं चला. गुरुवार की सुबह शिवम का चप्पल और मोबाईल श्री कृष्ण सेतु पुल के पाया संख्या 9 पर मिला, जिसके बाद परिजनों को आशंका हुई कि शिवम की किसी ने अपहरण कर उसकी हत्या कर दी है। जिसके बाद परिजनों ने अपने बेटे की हत्या और अपहरण की आशंका को लेकर शिवम के सहपाठी युवती और उसके पिता पर जमालपुर थाना में मामला दर्ज किया, मामला दर्ज होते ही पुलिस ने शिवम की बरामदगी को लेकर काफी खोज बीन की और आज उसका शव गंगा किनारे मिला।
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खूंटी के कटहल ने ग्रामीण आय बढ़ाने की नई राह बनाई

Khunti, Jharkhand:क्षेत्र - खूँटी । खूँटी में कटहल बना ग्रामीणों की आजीविका का सहारा, भोजन से लेकर मवेशियों के चारे तक बढ़ी उपयोगिता। झारखंड के खूँटी जिले में कटहल अब सिर्फ एक मौसमी फल नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत कड़ी बन गया है। कच्चे कटहल की दूसरे राज्यों में भारी मांग है, जबकि पका कटहल ग्रामीण परिवारों के भोजन और मवेशियों के चारे के रूप में भी उपयोग किया जा रहा है। खूँटी के ग्रामीण और सुदूरवर्ती इलाकों में कटहल किसानों के लिए अतिरिक्त आय का प्रमुख स्रोत बन चुका है। कच्चे कटहल की अच्छी कीमत मिलने से किसानों को आर्थिक लाभ हो रहा है और व्यापारी बड़ी मात्रा में इसे बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल सहित अन्य राज्यों में भेज रहे हैं। घास की कमी होने पर बड़े और पके कटहल को मवेशियों के चारे के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है। वहीं कच्चे कटहल की सब्जी ग्रामीण परिवारों के भोजन का अहम हिस्सा है, जिससे यह पोषण का भी महत्वपूर्ण स्रोत बना हुआ है। कटहल के बढ़ते महत्व को देखते हुए खूंटी में प्रसंस्करण इकाई स्थापित की गई है, जहाँ कटहल से विभिन्न खाद्य उत्पाद तैयार किए जाते हैं। हालांकि इन उत्पादों का उत्पादन और बाजार में उपलब्धता अभी भी सीमित है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कटहल उत्पादन और विपणन फैलाया जाए, तो किसानों की आय बढ़ेगी, स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और खूंटी का कटहल देशभर में अपनी अलग पहचान बना सकेगा। बाइट - ग्रामीण।
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