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Gonda271502

Gonda: कर्नलगंज अधिवक्ता संघ चुनाव, श्यामधर शुक्ला बने अध्यक्ष

Feb 03, 2025 11:48:02
Colonelganj, Uttar Pradesh

अधिवक्ता संघ चुनाव में सोमवार को मतदान के बाद मतगणना कर विजयी प्रत्याशियों की घोषणा की गई। अध्यक्ष पद के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता श्यामधर शुक्ला ने 57 मत पाकर बड़ी जीत दर्ज की। उनकी जीत की घोषणा एल्डर कमेटी ने की। इसके बाद तहसील में श्यामधर शुक्ला की जीत का जश्न मनाया गया। जीत से भावुक हुए शुक्ला ने सभी अधिवक्ताओं का आभार व्यक्त किया।

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AKAshok Kumar1
Jan 26, 2026 02:17:38
Noida, Uttar Pradesh:गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ。 गणतंत्र दिवस हमारे संवैधानिक मूल्यों के प्रति अटूट आस्था, सामाजिक समानता के संकल्प और लोकतांत्रिक आदर्शों के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इस पावन अवसर पर मैं राष्ट्र की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष करने वाले वीर स्वतंत्रता सेनानियों तथा सशक्त गणतंत्र की आधारशिला रखने वाले संविधान निर्माताओं को नमन एवं श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ。 आइए, इस गणतंत्र दिवस पर माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय सहभागिता का संकल्प लें और राष्ट्रहित में एकजुट होकर कार्य करें।
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RMRam Mehta
Jan 26, 2026 02:15:57
Baran, Rajasthan:खबर-समरानियां (बारां) शिक्षा मंत्री के गृह जिले में नियमों की उड़ी धज्जियां पीएम श्री स्कूल में बच्चों से लगवाई जा रही झाड़ू बारां राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर और आधुनिक' बनाने के दावों के बीच शिक्षा मंत्री के गृह जिलें के समरानियां कस्बे से एक बेहद शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। यहाँ के पीएय श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में छात्रों के हाथों में किताबों की जगह झाड़ू थमा दी गई, जिससे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ​एक तरफ जहाँ सुप्रीम कोर्ट और मानवाधिकार आयोग ने सरकारी स्कूलों में बच्चों से मजदूरी या साफ-सफाई करवाने पर कड़ा प्रतिबंध लगा रखा है, वहीं समरानियां के इस प्रतिष्ठित पीएम श्री स्कूल के शिक्षकों ने इन नियमों को ताक पर रख दिया। शनिवार को स्कूल परिसर में बच्चे पढ़ाई करने के बजाय मैदान और कमरों में झाड़ू लगाते नजर आए। ​हैरानी की बात यह है कि केंद्र सरकार की 'पीएम श्री' योजना के तहत जिन स्कूलों को 'मॉडल स्कूल' के रूप में विकसित किया जा रहा है, वहाँ का यह आलम है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों में इस घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि: ​"जिन बच्चों के हाथों में अपना भविष्य संवारने के लिए कलम और किताबें होनी चाहिए थी, स्कूल प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए उनके हाथों में झाड़ू पकड़ा दी। ​यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि बारां शिक्षा मंत्री का गृह जिला है। ऐसे में मंत्री के अपने क्षेत्र के स्कूलों में इस तरह की लापरवाही प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत को बयां कर रही है। तस्वीर वायरल होने के बाद अब शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी उंगलियां उठ रही हैं।
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Jan 26, 2026 02:01:22
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SKSantosh Kumar
Jan 26, 2026 02:01:09
Noida, Uttar Pradesh:उत्तराखंड से पानीपत तक कला का सफर पानीपत हैंडलूम के साइलेंट हीरो को मिला पद्मश्री, खेमराज सुंडरियाल की 60 साल की साधना को सम्मान जामदानी से पद्मश्री तक: खेमराज सुंडरियाल ने पानीपत को दिलाई वैश्विक पहचान जिस कला को असंभव माना गया, उसी से इतिहास रचा: पद्मश्री विजेता खेमराज सुंडरियाल पानीपत。 पिछले 60 वर्षों से पानीपत की हैंडलूम इंडस्ट्री को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने वाले मशहूर बुनकर व हस्तशिल्प कलाकार खेमराज सुंडरियाल को भारत सरकार ने पद्मश्री सम्मान से नवाजा है। उत्तराखंड मूल के खेमराज ने अपनी कला, नवाचार और अथक मेहनत से पानीपत के हैंडलूम उद्योग को देश ही नहीं, बल्कि दुनिया में भी अलग पहचान दिलाई। जामदानी कला में ऐतिहासिक प्रयोग, ऊन पर रचा नया अध्याय जामदानी कला, जो परंपरागत रूप से मलमल (कॉटन) कपड़े पर की जाती थी, खेमराज ने उसे ऊन (Wool) की शॉल पर आजमाकर एक नया प्रयोग किया। यह नवाचार हैंडलूम इंडस्ट्री के लिए क्रांतिकारी साबित हुआ। उनके इसी योगदान के लिए उन्हें कई राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार भी मिल चुके हैं। एम. एफ. हुसैन की पेंटिंग्स को हूबहू वुवन टेपेस्ट्री के रूप में तैयार किया खेमराज सुंडरियाल ने केवल परंपरागत डिज़ाइनों तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने प्रसिद्ध कलाकार एम. एफ. हुसैन की पेंटिंग्स को हूबहू वुवन टेपेस्ट्री के रूप में तैयार किया। यह कलाकृतियाँ इतनी जीवंत होती थीं कि पहचानना मुश्किल हो जाता था कि ये काग़ज़ पर बनी हैं या कपड़े पर। 1966 में पानीपत आगमन, यहीं से बदली हैंडलूम की तस्वीर खेमराज वर्ष 1966 में बनारस से ट्रांसफर होकर पानीपत आए। उस समय वे भारत सरकार के एक विभाग से जुड़े थे। पानीपत में आकर उन्होंने पारंपरिक खेस बुनाई में नए प्रयोग किए और खेस को बेडशीट, बेड कवर व अन्य उत्पादों में बदलकर उद्योग को नया बाज़ार दिया。 टेपेस्ट्री और वॉल हैंगिंग में किया ऐतिहासिक विकास उन्होंने टेपेस्ट्री (वॉल हैंगिंग) को इतना विकसित किया कि बड़े-बड़े कलाकारों की पेंटिंग्स को लूम पर उसी तरह तैयार कर दिया जाता था, जैसे वे कैनवास पर हों। यह काम पानीपत की हैंडलूम इंडस्ट्री के लिए मील का पत्थर साबित हुआ। कच्ची रंगाई से पक्की रंगाई तक का सफर खेमराज ने पानीपत उद्योग में पक्की रंगाई को बढ़ावा दिया। जब शुरुआत में लोग इसके लिए तैयार नहीं थे, तब उन्होंने प्रशिक्षण दिलवाया। आज स्थिति यह है कि पूरी पानीपत इंडस्ट्री पक्की रंगाई अपना चुकी है और गुणवत्ता के मामले में टॉप क्लास मानी जाती है。 संघर्षों से भरा जीवन, किसान परिवार से पद्मश्री तक उत्तराखंड के सुमाड़ी गांव में जन्मे खेमराज एक किसान परिवार से आते हैं। बुनाई का उन्हें कोई पारिवारिक अनुभव नहीं था। पढ़ाई के दिनों में उन्हें रोज़ 6 किलोमीटर पैदल चलकर संस्थान जाना पड़ता था। समाज की उपेक्षा और तानों के बावजूद उन्होंने बुनाई को जीवन का लक्ष्य बना लिया。 “ब्राह्मण-क्षत्रिय कुछ नहीं होता, काम ही सबसे बड़ा धर्म है” – खेमराज सुंडरियाल बुनकर सेवा केंद्र से जुड़कर बदली हजारों ज़िंदगियाँ खेमराज Weavers’ Service Centre से जुड़े, जिसकी स्थापना प्रसिद्ध कला विशेषज्ञ पूपुल जयकर ने नेहरू जी के सहयोग से की थी। इस केंद्र ने पाकिस्तान से आए बुनकरों को रोज़गार और नई दिशा दी。 मोदी सरकार की पहल से मिला गुमनाम कलाकार को सम्मान खेमराज ने कहा कि मोदी सरकार का यह प्रयास सराहनीय है कि वह उन लोगों को सम्मान दे रही है जो वर्षों तक गुमनाम रहे。 “अब पुरस्कारों के लिए सिफारिश नहीं, काबिलियत देखी जाती है” – खेमराज पद्मश्री की सूचना ने परिवार को दिया गर्व का पल पिछले वर्ष पद्मश्री के लिए आवेदन करने वाले खेमराज को इस वर्ष फोन कॉल के माध्यम से सम्मान की जानकारी मिली। परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। उनकी पुत्रवधू ने कहा, “यह हमारे परिवार के लिए सपने जैसा पल है। पापा ने बहुत पहले जो कला अपनाई थी, आज वह दुनिया पहचान रही है।” युवाओं के लिए संदेश: मेहनत रंग लाती है खेमराज का मानना है कि यह सम्मान युवाओं को प्रेरित करेगा कि वे पारंपरिक कला और हैंडलूम को अपनाएं और ईमानदारी से मेहनत करें। पानीपत की पहचान बने खेमराज सुंडरियाल आज खेमराज सुंडरियाल का नाम सिर्फ एक कलाकार का नहीं, बल्कि पानीपत की हैंडलूम पहचान का पर्याय बन चुका है। उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत रहेगा。 बाइट खेमराज पद्मश्री अवार्डी बाइट कनक पुत्रवधु
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Jan 26, 2026 01:50:27
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Jan 26, 2026 01:40:35
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Jan 26, 2026 01:38:26
Kodawahi, Chhattisgarh:छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के रानीझाप गांव (खोडरी चौकी अंतर्गत) में एक अमानवीय घटना हुई। 35 वर्षीय विधवा संगीता यादव का गांव के ही शादीशुदा हरि प्रसाद राठौर से प्रेम प्रसंग चल रहा था। दिसंबर में दोनों गांव से भाग गए थे। 23 जनवरी 2026 को उन्हें ढूंढ निकाला गया। वापस लौटने पर हरि प्रसाद की पत्नी सरोज राठौर, साले मनोज राठौर और यशोदा राठौर ने महिला पर हमला किया, कपड़े फाड़े, निर्वस्त्र कर 300-400 मीटर गांव में घुमाया और मुंह-शरीर पर गोबर पोता। गौरेला थाना प्रभारी सौरभ सिंह के अनुसार, पुलिस ने हस्तक्षेप कर पीड़िता को बचाया और तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। मामला दर्ज, जांच जारी। यह महिलाओं के सम्मान पर हमले का क्रूर उदाहरण है।
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Jan 26, 2026 01:33:25
Saraiya, Uttar Pradesh:उत्तर प्रदेश यातायात के ‘रक्षक’ बनेंगे युवा परिवहन विभाग ने स्काउट्स और NCC कैडेट्स को सिखाए सड़क सुरक्षा के गुर - दयाशंकर सिंह लखनऊ: 25 जनवरी, 2026 परिवहन विभाग द्वारा प्रदेश भर के जिलों और संभाग स्तर पर यातायात नियमों की जागरूकता के लिए प्रशिक्षण कार्यशाला, आपदा प्रबंधन विभाग, एनसीसी और स्वयंसेवी संस्थाओं के समन्वय से अभियान चलाया जा रहा है। यह जानकारी देते हुए परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और ‘कैशलेस उपचार’ जैसी योजनाओं के प्रति जनता को जागरूक किया जा रहा है। प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और जनहानि को न्यूनतम करने के उद्देश्य से परिवहन विभाग द्वारा सड़क सुरक्षा माह (01 जनवरी-31 जनवरी) के अंतर्गत व्यापक जन-जागरूकता अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत प्रदेशभर के विभिन्न जिलों और संभाग स्तर पर प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में आपदा मित्र, सिविल डिफेंस, एनसीसी कैडेट्स, स्वयंसेवी संस्था CIA, डीलर्स एसोसिएशन और स्काउट्स एंड गाइड्स के साथ-साथ यातायात पुलिस के साथी शामिल हुए। जिसमें सभी को यातायात नियमों के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया और नियमों के संबंध में जानकारी दी गई। सुरक्षित सफर के लिए जरूरी जागरुकता परिवहन मंत्री ने बताया कि कार्यशाला में नियमों के बारे में जानकारी दी गई,कि दुपहिया वाहनों पर चालक और पीछे बैठी सवारी, दोनों के लिए BIS मानक वाले हेलमेट अनिवार्य हैं। चौपहिया वाहनों में सभी यात्रियों के लिए सीट बेल्ट लगाना आवश्यक है। परिवहन मंत्री ने अपील की कि वाहन चलाते समय मोबाइल का प्रयोग न करें और नशे की स्थिति में ड्राइविंग से बचें। स्टंट, रैश ड्राइविंग और ओवरस्पीडिंग के बजाय धैर्यपूर्वक वाहन चलाएं। कोहरे में फॉग लाइट का प्रयोग करें और वाहनों पर रिफ्लेक्टर जरूर लगवाएं। आपकी मदद से बच सकती घायल की जान परिवहन मंत्री ने बताया कि कार्यशाला के दौरान शामिल सहभागियों को सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्तियों के लिए उपलब्ध ‘कैशलेस उपचार सुविधा’ और ‘राहवीर योजना’ (Good Samaritan Law) के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी जा रही है, ताकि समय पर मदद पहुंचाकर जान बचाई जा सके। नियम तोड़ने वालों के विरुद्ध जारी कार्रवाई परिवहन आयुक्त श्रीमती किंजल सिंह ने बताया कि प्रदेशभर में सड़क सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर परिवहन विभाग द्वारा निरंतर प्रवर्तन कार्रवाई की जा रही है। 01 जनवरी से लेकर 21 जनवरी तक हेलमेट न पहनने पर 49,500, सीट बेल्ट का प्रयोग न करने पर 11,740, ओवर स्पीडिंग पर 15,180, वाहन चलाते समय मोबाइल फ़ोन उपयोग पर 4,164, नशे की अवस्था में वाहन चलाने पर 304 तथा गलत दिशा में वाहन चलाने पर 5,546 चालान किए गए हैं। नो हेलमेट नो फ्यूल परिवहन आयुक्त ने बताया कि अभियान के तहत हेलमेट के बिना ईंधन न देने की व्यवस्था तथा अवैध पार्किंग एवं अनफ़िट वाहनों के विरुद्ध कार्रवाई भी निरंतर जारी है। अब तक 89,992 से अधिक चालानी कार्रवाई की जा चुकी है।
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