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Anil KumarAnil KumarFollow18 Nov 2024, 01:34 am
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जयपुर स्वच्छ सर्वेक्षण: दिखने वाली सफाई पर जोर, असल चुनौती कायम

Jaipur, Rajasthan:जयपुर में स्वच्छ सर्वेक्षण का काउंटडाउन शुरू हो चुका है... सर्वे टीम के आने से पहले नगर निगम शहर को चमकाने में जुट गया है... कहीं सड़कें धुल रही हैं, कहीं दीवारों पर रंग चढ़ रहा है तो कहीं बाजारों में टाइल्स लगाई जा रही है...तो कही अभियान चलाकर शहर को साफ-सुथरा बनाने की कोशिश की जा रही है...लेकिन सवाल ये है कि क्या सिर्फ मेकअप से शहर नंबर-1 बन पाएगा... क्योंकि जमीन पर अब भी कई जगह गंदगी, टूटे डस्टबिन और खुले नाले हकीकत बयां कर रहे हैं... इस बार स्वच्छ सर्वेक्षण में विजिबल क्लीनलीनेस यानी दिखाई देने वाली सफाई पर सबसे ज्यादा नंबर मिलेंगे... ऐसे में असली चुनौती सिर्फ सफाई करना नहीं, बल्कि उसे लगातार बनाए रखना है... स्वच्छ सर्वेक्षण की उल्टी गिनती शुरू होते ही शहर फास्ट क्लीनिंग मोड में आ गया है। नगर निगम ने सड़कों से लेकर बाजारों और बैक लेन तक सफाई अभियान तेज कर दिया है। कहीं रातों-रात टाइल्स लग रही हैं....तो कहीं दीवारों पर पेंटिंग कर शहर को चमकाने की कोशिश हो रही है। वजह साफ है स्वच्छ भारत मिशन की सर्वे टीम जयपुर पहुंच सकती है। इस बार चुनौती पहले से बड़ी है, क्योंकि अब केवल फाइलों और दावों से काम नहीं चलेगा। नई गाइडलाइंस में विजिबल क्लीनलीनेस यानी जमीन पर दिखने वाली सफाई को सबसे ज्यादा महत्व दिया गया है। इसके लिए अकेले 1500 अंक तय किए गए हैं। ऐसे में शहर की हर सड़क, हर नाला और हर सार्वजनिक शौचालय सीधे नंबरों से जुड़ गया है। नगर निगम ने मुख्य बाजारों, वीआईपी रोड और प्रमुख चौराहों पर सफाई तेज कर दी है। बैक लेन में रंगाई-पुताई हो रही है और सार्वजनिक शौचालयों को नया लुक दिया जा रहा है। लेकिन दूसरी तरफ कई इलाकों में अब भी कचरे के ढेर, टूटे डस्टबिन, उखड़ी सड़कें और खुले नाले तस्वीर बिगाड़ रहे हैं। स्थानीय लोग भी मानते हैं कि सर्वे से पहले सफाई अब शहर की पुरानी परंपरा बन चुकी है。 ऐसे तय होगी रैंकिंग पैरामीटर::::::::::::::::::::::::अंक ऑन-ग्राउंड असेसमेंट और सिटीजन फीडबैक-10,500 अंक विजिबल क्लीनलीनेस-1500 अंक ओडीएफ-ओडीएफ डबल प्लस-वाटर प्लस-1000 अंक कचरा मुक्त शहर स्टार रेटिंग-1000 अंक ::::::::::::::::::: 250 अंक : स्लम-स्कूल में गंदी...स्लम क्षेत्रों और ढके नालों के लिए 150 अंक, स्कूल परिसरों को कचरा मुक्त रखने के लिए 100 अंक तय किए गए हैं। नालों के आसपास कचरा पड़ा हुआ है। सुझाव-नालों और स्कूलों के आसपास कचरा न फेंकें ::::::::::::::::::: 200 अंक फिर बन रहे कचरा पॉइंट... सेकेंडरी कचरा बर्तन को हटाने और दो डस्ट बिन लगाने के लिए 100-100 अंक हैं। कई इलाकों में हटाए गए ओपन कचरा डिपो फिर से लौट आए। प्लास्टिक की लीटर-बिन टूटे हैं। सुझाव-निर्धारित जगह कचरा डालें, नए पॉइंट न बनने दें। ::::::::::::::::::: 200 अंक : नालों की गंदगी चुनौती...नालों को मलबे से मुक्त रखने और तालाबों-झीलों को प्रदूषण व ठोस कचरे से बचाने के लिए 200 अंक तय हैं। सुझाव-नालों, तालाबों में कचरा व मलबा फेंकने से बचें। ::::::::::::::::::: 300 अंक : मार्केट में कचरा चुनौती... आवासीय क्षेत्रों और पाकों में रोज एक बार, जबकि व्यावसायिक स्थलों, बस-रेलवे स्टेशनों, पर्यटन स्थलों और स्ट्रीट फूड जोन में दिन में दो बार सफाई जरूरी। इस पैरामीटर के लिए 300 अंक तय हैं। कई मार्केट में अब भी गंदगी बड़ी समस्या है। सुझाव-कचरा डस्टबिन में डालें, सड़क-नालियों में नहीं। ::::::::::::::::::: 200 अंक : बैंक लेन में ज्यादा गंदगी...घरों और दुकानों के पीछे की बैक लेन की सफाई और रखरखाव के 200 अंक हैं। कई इलाकों में बैक लेन में रंगीन पेंटिंग और सफाई अभियान जारी है। सुझाव-बैंक लेन में कचरा न फेंकें, बैंक लेन साफ रखें। ::::::::::::::::::: 150 अंक : पीकदान बने बैरिकेड्स...पान-गुटखे के धब्बों और खुले में पेशाब के निशानों से मुक्त रखने पर 150 अंक मिलेंगे। निर्माण कार्यों के बैरिकेड्स पीकदान बन चुके हैं। निगम ने एजेंसियों को इन्हें साफ करने की चेतावनी दी, लेकिन हालात नहीं सुधरे। सुझाव-सार्वजनिक जगहों पर थूकने, पेशाब करने से बचें। ::::::::::::::::::: 200 अंक : सड़कें अब भी उखड़ी...म्यूराल्स, वेस्ट-टू-आर्ट, गड्ढामुक्त सड़कें और हरियाली बढ़ाने के लिए 200 अंक तय हैं। शहर में रंग के गुलाबी अभियान चलाकर वॉल पेंटिंग हो रही है। सुझाव-दीवारों और सार्वजनिक संपत्ति को गंदा न करें。 ::::::::::::::::::: स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 में आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि रैंकिंग का आधार अब केवल दस्तावेज नहीं होंगे। शहरों का मूल्यांकन 10 बड़े इंडिकेटर्स पर होगा, जिनमें सबसे ज्यादा फोकस विजिबल क्लीनलीनेस पर रहेगा। यानी सड़क पर पड़ा कचरा, गंदे नाले, बदबूदार शौचालय और टूटी व्यवस्थाएं सीधे रैंकिंग गिरा सकती हैं। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि केवल मशीनों और कर्मचारियों के भरोसे शहर नंबर-1 नहीं बन सकता। यदि लोग कचरा सड़क पर फेंकने से बचें, डस्टबिन का उपयोग करें और सार्वजनिक जगहों को साफ रखें, तो जयपुर अच्छी जगह बना सकता है। स्वच्छ सर्वेक्षण हर साल शहरों को चमकाने का मौका देता है, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सफाई सिर्फ सर्वे टीम आने तक रहेगी या शहर की आदत बनेगी....फिलहाल भोपाल में सफाई का इमरजेंसी मोड ऑन है और आने वाले कुछ दिन तय करेंगे कि शहर की मेहनत रैंकिंग में कितनी चमक लाती है।
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Satna: रेलवे इंजन से टकराकर युवक की हालत गंभीर, अस्पताल रेफर

Satna, Madhya Pradesh:सतना। रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर मंगलवार की दोपहर एक हादसा हो गया। पटरी क्रॉस कर रहा एक युवक जनता एक्सप्रेस के इंजन की चपेट में आ गया। गंभीर हालत में युवक को जिला अस्पताल ले जाया गया जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसे रीवा के संजय गांधी अस्पताल रेफर कर दिया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार ट्रेन नंबर 13201 जनता एक्सप्रेस दोपहर 12 बजे प्लेटफार्म नंबर एक पर लग रही थी उसी दौरान बर्दाडीह निवासी ललित कुशवाहा पिता सौखीलाल कुशवाहा 40 वर्ष प्लेटफार्म से पटरियों में उतरकर प्लेटफार्म नंबर दो में जा रहा था तभी वह इंजन की चपेट में आ गया। आनन फानन ब्रेक डाउन कर ट्रेन रोकी गई और जीआरपी एवं आरपीएफ स्टाफ की मदद से गंभीर हालत में ललित को जिला अस्पताल ले जाया गया। ललित का पेट एवं पैर बुरी तरह जख्मी है। फिलहाल उसका इलाज रीवा में चल रहा है। डाक्टरों ने उसकी हालत नाजुक बताई है।
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जयपुर स्वच्छ सर्वेक्षण 2025: विज़िबल क्लीनलीनेस से रैंकिंग क्या बोलेगी?

Jaipur, Rajasthan:जयपुर में स्वच्छ सर्वेक्षण का काउंटडाउन शुरू हो चुका है... सर्वे टीम के आने से पहले नगर निगम शहर को चमकाने में जुट गया है...कहीं दीवारों पर रंग चढ़ रहा है तो कहीं बाजारों में टाइल्स लगाई जा रही हैं...तो कही अभियान चलाकर शहर को साफ-सुथरा बनाने की कोशिश हो रही है...लेकिन सवाल ये है कि क्या सिर्फ मेकअप से शहर नंबर-1 बन पाएगा... क्योंकि जमीन पर अब भी कई जगह गंदगी, टूटे डस्टबिन और खुले नाले हकीकत बयां कर रहे हैं... इस बार स्वच्छ सर्वेक्षण में विजिबल क्लीनलीनेस यानी दिखाई देने वाली सफाई पर सबसे ज्यादा नंबर मिलेंगे... ऐसे में असली चुनौती सिर्फ सफाई करना नहीं, बल्कि उसे लगातार बनाए रखना है... जयपुर में स्वच्छ सर्वेक्षण की उल्टी गिनती शुरू होते ही शहर फास्ट क्लीनिंग मोड में आ गया है। नगर निगम ने सड़कों से लेकर बाजारों और बैक लेन तक सफाई अभियान तेज कर दिया है। कहीं रातों-रात टाइल्स लग रहे हैं....तो कहीं दीवारों पर पेंटिंग कर शहर को चमकाने की कोशिश हो रही है। वजह साफ है स्वच्छ भारत मिशन की सर्वे टीम जयपुर पहुंच सकती है। इस बार चुनौती पहले से बड़ी है, क्योंकि अब केवल फाइलों और दावों से काम नहीं चलेगा। नई गाइडलाइंस में विजिबल क्लीनलीनेस यानी जमीन पर दिखने वाली सफाई को सबसे ज्यादा महत्व दिया गया है। इसके लिए अकेले 1500 अंक तय किए गए हैं। ऐसे में शहर की हर सड़क, हर नाला और हर सार्वजनिक शौचालय सीधे नंबरों से जुड़ गया है। नगर निगम ने मुख्य बाजारों, वीआईपी रोड और प्रमुख चौराहों पर सफाई तेज कर दी है। बैक लेन में रंगाई-पुताई हो रही है और सार्वजनिक शौचालयों को नया लुक दिया जा रहा है। लेकिन दूसरी तरफ कई इलाकों में अब भी कचरे के ढेर, टूटे डस्टबिन, उखड़ी सड़कें और खुले नाले तस्वीर बिगाड़ रहे हैं। स्थानीय लोग भी मानते हैं कि सर्वेक्षण से पहले सफाई अब शहर की पुरानी परंपरा बन चुकी है。 ऐसे तय होगी रैंकिंग पैरामीटर ऑन-ग्राउंड असेसमेंट और सिटीजन फीडबैक-10,500 अंक विजिबल क्लीनलीनेस-1500 अंक ओडीएफ-ओडीएफ डबल प्लस-वाटर प्लस-1000 अंक कचरा मुक्त शहर स्टार रेटिंग-1000 अंक 250 अंक : स्लम-स्कूल में गंदगी...स्लम क्षेत्रों और ढके नालों के लिए 150 अंक, स्कूल परिसरों को कचरा मुक्त रखने के लिए 100 अंक तय किए गए हैं। नालों के आसपास कचरा पड़ा हुआ है। सुझाव-नालों और स्कूलों के आसपास कचरा न फेंकें 200 अंक फिर बन रहे कचरा पॉइंट... सेकेंडरी कचरा बर्तनों को हटाने और दो डस्टBin लगाने के लिए 100-100 अंक हैं। कई इलाकों में हटाए गए ओपन कचरा डिपो फिर से लौट आए। प्लास्टिक की लीटर-बिन टूटे हैं।  सुझाव-निर्धारित जगह कचरा डालें, नए पॉइंट न बनने दें 200 अंक : नालों की गंदगी चुनौती...नालों को मलबे से मुक्त रखने और तालाबों-झीलों को प्रदूषण व ठोस कचरे से बचाने के लिए 200 अंक तय हैं। सुझाव-नालों, तालाबों में कचरा व मलबा फेंकने से बचें。 300 अंक : मार्केट में कचरा चुनौती... आवासीय क्षेत्रों और पाकों में रोज एक बार, जबकि व्यावसायिक स्थलों, बस-रेलवे स्टेशनों, पर्यटन स्थलों और स्ट्रीट फूड जोन में दिन में दो बार सफाई जरूरी। इस पैरामीटर के लिए 300 अंक तय हैं। कई मार्केट में अब भी गंदगी बड़ी समस्या है। सुझाव-कचरा डस्टबिन में डालें, सड़क-नालियों में नहीं。 200 अंक : बैंक लेन में ज्यादा गंदगी...घरों और दुकानों के पीछे की बैक लेन की सफाई और रखरखाव के 200 अंक हैं। कई इलाकों में बैक लेन में रंगीन पेंटिंग और सफाई अभियान जारी है। सुझाव-बैंक लेन में कचरा न फेंकें, बैंक लेन साफ रखें。 150 अंक : पीकदान बने बैरिकेड्स...पान-गुटखे के धब्बों और खुले में पेशाब के निशानों से मुक्त रखने पर 150 अंक मिलेंगे। निर्माण कार्यों के बैरिकेड्स पीकदान बन चुके हैं। निगम ने एजेंसियों को इन्हें साफ करने की चेतावनी दी, लेकिन हालात नहीं सुधरे। सुझाव-सार्वजनिक जगहों पर थूकने, पेशाब करने से बचें。 200 अंक : सड़कें अब भी उखड़ी...म्यूराल्स, वेस्ट-टू-आर्ट, गड्ढामुक्त सड़कें और हरियाली बढ़ाने के लिए 200 अंक तय हैं। शहर में रंग के गुलाबी अभियान चलाकर वॉल पेंटिंग हो रही है। सुझाव-दीवारों और सार्वजनिक संपत्ति को गंदा न करें。 वीओ-2-स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 में आवास और शहरी कार्य मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि रैंकिंग का आधार अब केवल दस्तावेज नहीं होंगे। शहरों का मूल्यांकन 10 बड़े इंडिकेटर्स पर होगा, जिनमें सबसे ज्यादा फोकस विजिबल क्लीनलीनेस पर रहेगा। यानी सड़क पर पड़ा कचरा, गंदे नाले, बदबूदार शौचालय और टूटी व्यवस्थाएं सीधे रैंकिंग गिरा सकती हैं। नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि केवल मशीनों और कर्मचारियों के भरोसे शहर नंबर-1 नहीं बन सकता। यदि लोग कचरा सड़क पर फेंकने से बचें, डस्टबिन का उपयोग करें और सार्वजनिक जगहों को साफ रखें, तो जयपुर अच्छी जगह बना सकता है। स्वच्छ सर्वेक्षण हर साल शहरों को चमकाने का मौका देता है, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सफाई सिर्फ सर्वे टीम आने तक रहेगी या शहर की आदत बनेगी....फिलहाल भोपाल में सफाई का इमरजेंसी मोड ऑन है और आने वाले कुछ दिन तय करेंगे कि शहर की मेहनत रैंकिंग में कितनी चमक लाती है। बहरहाल, जयपुर में इन दिनों सफाई नहीं रैंकिंग की रिहर्सल चल रही है। सवाल सिर्फ इतना नहीं कि शहर कितना चमक रहा है, बल्कि यह है कि चमक कितने दिन टिकेगी। स्वच्छ सर्वेक्षण की टीम कुछ घंटे शहर देखेगी, लेकिन जयपुरवासी हर दिन इसी शहर में रहेंगे। अगर सफाई सिर्फ सर्वे तक सीमित रही, तो रैंकिंग भले सुधर जाए, शहर नहीं। इस बार असली मुकाबला कागजों का नहीं, सड़कों पर दिखने वाली सफाई का है। जयपुर को रैकिंग में अच्छे पायदान पर लाने के लिए सफाई अभियान नहीं, सफाई संस्कृति बनानी होगी.
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परिवहन विभाग के 600 करोड़ घोटाले पर बहस: जांच रिपोर्ट में विरोधाभास

Jaipur, Rajasthan:परिवहन विभाग का ये कैसा 600 करोड़ का घोटाला, एक साल में राजस्व वसूली जीरो! - परिवहन विभाग में घोटाला हुआ भी या नहीं ?, मुख्यालय की जांच रिपोर्ट में भारी खामियां, क्योंकि पुराने नम्बरों के ऑक्शन का प्रावधान ही नहीं। - एक जगह नम्बर 6 लाख कीमत का लिखा, दूसरी जगह बताया 1 लाख का, घोटाला 600 करोड़ का हुआ या 100 करोड़ का? जयपुर। परिवहन विभाग में जिस 7 डिजिट सीरीज के नम्बरों के बैकलाॅग और पुन: आवंटन मामले में 500 से 600 करोड़ का घोटाला बताया जा रहा है, उसमें कई तरह की खामियां सामने आई हैं। अंतिम जांच रिपोर्ट में कमेटी ही इस बात पर एकमत नहीं है कि घोटाला 600 करोड़ का हुआ या 100 करोड़ का ? क्या है पूरा मामला, क्या हैं जांच रिपोर्ट में खामियां, पढ़िए, जी मीडिया की यह एक्सक्लूसिव रिपोर्ट- दरअसल राजस्थान का परिवहन विभाग का मुख्यालय पिछले एक साल से 7 डिजिट पंजीयन सीरीज के बैकलाॅग और नए वाहनों पर पुन: आवंटन मामले में 500 से 600 करोड़ रुपए का घोटाला बता रहा है। घोटाला मामले में मुख्यालय के आदेश पर राज्य के आधा दर्जन प्रादेशिक और जिला परिवहन कार्यालयों ने घोटाला मानते हुए कार्मिकों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज करवा दी हैं। लेकिन बड़ी बात यह है कि 500 से 600 करोड़ के इस घोटाले में परिवहन मुख्यालय पिछले एक साल में एक रुपए की भी राजस्व वसूली नहीं कर सका है। नियमानुसार परिवहन विभाग को घाोटाला सामने आते ही राजस्व हानि की वसूली के प्रयास शुरू कर देने चाहिए थे। लेकिन रोचक बात यह है कि विभाग ने न तो राजस्व हानि की वसूली की दिशा में कोई प्रयास किए हैं। न ही एक भी रुपए की राजस्व वसूली हो सकी है। इसके विपरीत विभाग ने केवल दोषी कार्मिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराईं है। साथ ही सम्बंधितों को चार्जशीट जारी की हैं। यह जांच अपर परिवहन आयुक्त रेणु खंडेलवाल के नेतृत्व में 4 सदस्यों ने तैयार की थी, जो 17 अक्टूबर 2025 को सब्मिट की गई थी। जी मीडिया को मिली अंतिम जांच रिपोर्ट में कई खामियां सामने आई हैं। घोटाला 600 करोड़ का या 100 करोड़ का ? - परिवहन मुख्यालय की इस जांच रिपोर्ट में खामियों की भरमार - राजस्व की हानि के बिन्दु में समिति ने लिखा, अनुमानत: लगभग 10 हजार VIP नम्बरों का बैकलॉग किया गया - वीआईपी नम्बर की नीलामी उसके क्रमांकों के अनुरूप की जाती है - एक नम्बर की नीलामी 2 से 15 लाख के बीच की जाती है - इस प्रकार 10 हजार नम्बरों की नीलामी से राज्य सरकार को हुआ नुकसान - राज्य सरकार को 500 से 600 करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ - यानी कमेटी ने प्रत्येक नम्बर की नीलामी कीमत 5 से 6 लाख रुपए मानी - हालांकि वास्तविकता में केवल 0001, 0009 या 9999 की रहती डिमांड - ऐसे नम्बर ही बिकते हैं 2 से 10 लाख रुपए मूल्य के बीच - अन्य नम्बर तो महज 11 हजार से 51 हजार के बीच होते हैं नीलाम - रोचक यह कि इसी रिपोर्ट में कमेटी सदस्यों ने लिखी विरोधाभासी बात - वित्तीय प्रतिकूल प्रभाव के प्रकरण-2 में अलग तथ्य लिखे - कमेटी ने लिखा, नम्बरों की नीलामी होती तो 1 से 2 लाख रुपए मिलते - इस तरह तो 10 हजार नम्बरों से 100 से 200 करोड़ रुपए ही मिलते - फिर कैसे कमेटी ने इसे बना दिया 500 से 600 करोड़ का घोटाला? कहीं लिखा, 5-6 लाख, कहीं 1-2 लाख का बताया मूल्य कमेटी की इस रिपोर्ट में विरोधाभासी बातें लिखने से जांच रिपोर्ट पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। एक तरफ कमेटी एक नम्बर की औसत कीमत 5 से 6 लाख रुपए मान रही है। जबकि दूसरी तरफ एक नम्बर की औसत कीमत 1 से 2 लाख रुपए मान रही है। सही नुकसान कितना हुआ, इस बारे में सटीक तथ्य नहीं लिखे गए हैं। जबकि रोचक बात यह है कि पुराने नम्बरों को पुन: नीलाम करने का परिवहन विभाग के पास कोई अधिकार नहीं है। केन्द्रीय मोटर व्हीकल रूल्स या एमवी एक्ट में किसी भी पंजीकृत हो चुके नम्बर की नए सिरे से नीलामी नहीं की जा सकती। ऐसे में राजस्व हानि के इस पूरे प्रकरण पर ही सवाल खड़े होते हैं। जाँच कमेटी को नियमों का ही ज्ञान नहीं ? - जांच कमेटी ने बिन्दु संख्या 18 पर लिखे गलत तथ्य - लिखा, ऐसे VIP नम्बर, जिनका फर्जी रीति से पंजीयन किया गया, उन्हें निरस्त करते हुए VIP नम्बरों की पोर्टल से खुली नीलामी करें - लिखा, जिन वाहन स्वामियों को फर्जी VIP नम्बर आवंटित हुए हैं, उन्हें वर्तमान प्रक्रिया अनुसार निर्धारित फीस पर नम्बर दिए जाएं - चालू नम्बरों में से पंजीयन हेतु नम्बर उपलब्ध कराए जा सकते हैं - जबकि MV एक्ट में है स्पष्ट प्रावधान - एक बार वाहन की RC निरस्त होने के बाद नहीं लिया जा सकता दूसरा नंबर - न ही निरस्त नम्बरों को नीलाम करने का अधिकार विभाग के पास घाेटाला हुआ, लेकिन सही जांच जरूरी जी मीडिया इस पूरे प्रकरण में घोटाले की बात से इनकार नहीं करता। क्योंकि जिस तरह कई वाहनों की श्रेणियां बदल दी गई। या कई वाहन मालिकों के नष्ट हो चुके वाहनों को एजेंटों की मदद से गुपचुप तरीके से पुन: नए वाहन मालिकों को आवंटित कर दिया गया, यह सभी गड़बड़ियां हुई हैं। इसमें एजेंटों और विभाग के कर्मचारियों ने मिलीभगत से नम्बरों का आवंटन किया है। रिटेंशन शुल्क नहीं लेने में भी वित्तीय नुकसान हुआ है। लेकिन इस पूरे प्रकरण की सही जांच किया जाना जरूरी है। क्योंकि बगैर नियमों के सही ज्ञान के काल्पनिक रूप से 600 करोड़ का घोटाला बता देना जांच अधिकारियों की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े करता है。
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कपिल मुनि सरोवर डूबने से बहनें मरीं, एक ने बचाते हुए जान गंवाई

Kaithal, Haryana:कैथल के कलायत के कपिल मुनि सरोवर की सुबह आज गम में डूबी रहीं जब दो युवतियाँ नहर किनारे सैर के बाद वापस नहीं लौटीं। स्थानीय लोगों ने बताया कि पानी के किनारे से एक लड़की फिसल गई थी और उसे बचाने की कोशिश में उसकी बहन भी पानी में समा गई। परिजन जब दौड़े हुए तालाब के पास पहुंचे तो दोनों लड़कियों का डूबा हुआ हाल दिखाई पड़ा। मौके पर लोगों और परिजनों ने तत्काल तालाब में छलांग लगाकर करीब डेढ़ घंटे तक बचाने की कोशिशें कीं। कड़ी मशक्कत और हाहाकार के बीच दोनों बेहोश शरीर पानी से बाहर निकाले गए और उन्हें तुरंत नागरिक अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने घटना की जानकारी दी है और शुरुआती पहचान के अनुसार मृतकाएँ लगभग 18 वर्ष की परमजीत और लगभग 20 वर्षीय पलक हैं। यह दुर्घटना न केवल परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति है, बल्कि समुदाय के लिए भी गहरी मर्म अंतर्दाह छोड़ गई। स्थानीय प्रशासन और पुलिस मामले की तफ्तीश कर रही है।
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शाहदरा में ऑटो लिफ्टर गिरफ्तार, तीन मोटरसाइकिलें बरामद

Delhi, Delhi:शाहदरा जिला फर्श बाजार थाना पुलिस ने वाहन चोरी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक शातिर ऑटो लिफ्टर को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे और निशानदेखी पर चोरी की तीन मोटरसाइकिलें बरामद की हैं। गिरफ्तार आरोपी की पहचान 19 वर्षीय लवियांशु बेदी निवासी शाहदरा के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार आरोपी पहली बार अपराध में शामिल पाया गया है। डीसीपी शाहदरा राजेंद्र प्रसाद मीणा के अनुसार, वाहन चोरी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए फर्श बाजार थाना पुलिस को संदिग्ध गतिविधियों पर विशेष नजर रखने के निर्देश दिए गए थे। इसी क्रम में इंस्पेक्टर अजय करण शर्मा के नेतृत्व में पुलिस टीम लगातार इलाके में गश्त कर रही थी। 18 मई 2026 को गश्त के दौरान ASI अमित कुमार और कांस्टेबल जितेंद्र ने एक युवक को बिना नंबर प्लेट लगी टीवीएस अपाचे बाइक पर बैठे देखा। शक होने पर पुलिस ने युवक से बाइक के दस्तावेज मांगे, लेकिन वह कोई वैध कागजात नहीं दिखा सका। जांच करने पर पता चला कि बाइक का असल नंबर DL7SCGXXXX है और इसे कृष्णा नगर थाना क्षेत्र से चोरी किया गया था। पूछताछ में आरोपी ने वाहन चोरी की वारदातों में शामिल होने की बात कबूल की। उसकी निशानदेही पर दो और चोरी की मोटरसाइकिलें बरामद की गईं। इनमें आनंद विहार थाना क्षेत्र से चोरी हुई हीरो HF डीलक्स और विवेक विहार थाना क्षेत्र से चोरी हुई हीरो होंडा स्प्लेंडर शामिल हैं। पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसने 10वीं तक पढ़ाई की है। बेरोजगारी और शराब की लत के कारण वह बाइक चोरी करने लगा था। आरोपी चोरी की मोटरसाइकिलों को सस्ते दामों में बेचने की फिराक में था। फिलहाल पुलिस आरोपी से गहन पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वह अन्य वाहन चोरी की घटनाओं में भी शामिल रहा है या नहीं। साथ ही चोरी के वाहनों को खरीदने वाले लोगों की पहचान के लिए भी जांच जारी है।
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भाकियू के कार्यकर्ताओं ने डीजल ,पेट्रोल और रसोई गैस किल्लत और बढ़े कीमतों को लेकर प्रदर्शन किया

Subhas ChandraSubhas ChandraFollow4m ago
Paniyara, Uttar Pradesh:पनियरा-महराजगंज जनपद में डीजल, पेट्रोल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों को लेकर भारतीय किसान यूनियन ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। संगठन के जिला अध्यक्ष राम आशीष के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने मुजुरी चौराहे से विरोध प्रदर्शन करते हुए जिला मुख्यालय की तरफ कूच किया। इस दौरान ठेले पर बाइक और एलपीजी सिलेंडर रखकर जिला मुख्यालय तक मार्च निकाला गया। प्रदर्शन के दौरान किसान नेताओं ने केंद्र सरकार पर महंगाई बढ़ाने का आरोप लगाते हुए कहा कि लगातार बढ़ रही डीजल, पेट्रोल और रसोई गैस की कीमतों ने किसानों और आम लोगों की कमर तोड़ दी है। उन्होंने कहा कि खेती-किसानी का खर्च लगातार बढ़ रहा है, जिससे किसान आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। जिला अध्यक्ष राम आशीष ने बातचीत में बताया कि किसानों को उचित दर पर डीजल और रसोई गैस उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने मांग की कि कृषि कार्यों में उपयोग होने वाले डीजल पर विशेष राहत दी जाए तथा घरेलू गैस सिलेंडर के दाम कम किए जाएं। भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने अपनी विभिन्न मांगों से संबंधित ज्ञापन जिला अधिकारी महराजगंज के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजने की बात कही। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसान और संगठन के कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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टोडाभीम में महिला से मारपीट का वीडियो वायरल; पुलिस जांच में जुटी

Karauli, Rajasthan:महिला से मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल जिला करौली एक गांव का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में कुछ लोग एक महिला से मारपीट कर उसे खींचकर जमीन पर पटकते नजर आ रहे हैं। आरोप है कि महिला जब खेत में लकड़ियां तोड़ रही थी तब गांव के ही कुछ लोगों ने उसे मारपीट कर घायल कर दिया। साथ ही कपड़े फाड़ कर उसे बेइज्जत किया है। महिला का आरोप है कि उसके चीखने चिल्लाने की आवाज सुनकर घर के अन्य परिजनों ने बचाया है। महिला का आरोप है की मारपीट के दौरान आरोपी कुछ आभूषण भी छीन कर ले गए। पीड़ित महिला ने Todabhim थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। पुलिस मामला दर्ज कर जांच में जुटी है। ज़ी मीडिया नहीं करता है वायरल वीडियो की पुष्टि
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फरसगांव थाने के साइबर ठगी केस में सातों आरोपी जेल भेजे गए

Kondagaon, Chhattisgarh:फरसगांव थाने में प्रार्थी ने शिकायत की थी कि अलग-अलग नंबरों से उन्हें कॉल आया था और उनके अकाउंट में 71 लाख रुपया फ्रिज किया गया है बताया गया जिसे निकालने के लिए कुछ राशि खर्च करनी होगी यह कहकर फ्राड किया गया। आरोपियों ने इसके लिए कुछ लोगों को अलग बैंकों में एड्रेस बदल कर खाते खुलवाए गए और ठगी के ठगों के पैसे इन खातों में डाले गए इसके एवज में इन खाताधारकों को कुछ रुपये दिए जाते थे। प्रार्थी से साइबर अपराधियों ने 29 लाख रुपये ठगी कर खातों में डलवाया पुलिस ने পুরো मामले पर ठगों को गिरफ्तार करने के लिए जाल बिछाया इसके लिए विशेष टीम गठन कर 15 दिनों तक दिल्ली में डटे रहे और आखिरकार सभी 7 आरोपी को अलग-अलग जगह से गिरफ्तार कर लिया गया। सभी आरोपी आदतन अपराधी हैं कुछ आरपी पूर्व में भी जेल जा चुके हैं फिलहाल सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेजा गया।
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