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शहडोल के सरकारी स्कूल बदहाल: जर्जर भवन, खराब सड़क से बच्चों की पढ़ाई खतरे में

Shahdol, Madhya Pradesh:शहडोल में सरकारी स्कूलों की बदहाल तस्वीर सामने आई है। कहीं जर्जर भवन में बच्चों की जान का खतरा है, तो कहीं स्कूल तक पहुंचने के लिए सड़क तक नहीं है। हालात ऐसे हैं कि कई जगह बच्चे और शिक्षक कीचड़ भरी सड़क के कारण स्कूल नहीं पहुंच पाते और मजबूरी में विद्यालय किसी दूसरे भवन में संचालित करना पड़ रहा है। जैतपुर के मौहरटोला में 24 बच्चों की कक्षा एक ग्रामीण के घर के बरामदे में लग रही है। जिले में 117 स्कूल ऐसे हैं जो जर्जर हालत में हैं और विद्यालयों को निजी मकान, सामुदायिक भवन एवं आंगनबाड़ियों में लगाए जा रहे हैं। तस्वीर शहडोल के जैतपुर क्षेत्र के गलहथा पंचायत के मौहरटोला की है, जहां शासकीय प्राथमिक विद्यालय का भवन जर्जर हो चुका है। बारिश में छत से पानी टपकता है और बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए स्कूल भवन में कक्षाएं लगाना मुश्किल है। ग्रामीण प्रहलाद सिंह ने बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए अपने घर का बरामदा निशुल्क स्कूल के लिए दे दिया। पिछले एक महीने से अधिक समय से करीब 24 बच्चे इसी बरामदे में पढ़ाई कर रहे हैं। लेकिन शहडोल में समस्या सिर्फ जर्जर स्कूल भवनों तक सीमित नहीं है। जिले में 117 ऐसे स्कूल बताए जा रहे हैं, जहां किसी न किसी तरह की समस्या के चलते विद्यालय निजी भवन, आंगनबाड़ी या सामुदायिक भवनों में संचालित हो रहे हैं। कुछ स्कूलों की स्थिति इतनी है कि विद्यालय तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क तक नहीं है। बारिश में रास्ते कीचड़ से सन जाते हैं, जिससे बच्चों और शिक्षकों को स्कूल पहुंचने में भारी परेशानी होती है। कई बार बच्चे और शिक्षक स्कूल तक नहीं पहुंच पाते और इसी वजह से वैकल्पिक भवन में विद्यालय संचालित करना पड़ता है। आदिवासी बहुल शहडोल जिले में शिक्षा और मूलभूत सुविधाओं के लिए बड़े बजट और योजनाएं होने के बावजूद ये तस्वीर कई सवाल खड़े करती है—आखिर स्कूल भवनों की समय पर मरम्मत क्यों नहीं हुई? स्कूलों तक सड़क क्यों नहीं पहुंची? और जिम्मेदारों की निगरानी के बावजूद बच्चों को ऐसी परिस्थितियों में पढ़ने के लिए मजबूर क्यों होना पड़ रहा है?
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सूरजपुर के शासकीय स्कूलों की जर्जर स्थिति से बच्चों की पढ़ाई खतरे में

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Surajpur, Chhattisgarh:नौनिहालों के सुनहरे भविष्य की नींव जिस पाठशाला की चौखट पर रखी जाती है, वही पाठशालाएं आज उनकी ज़िंदगी के लिए ख़ौफ़नाक बन चुकी हैं, सूरजपुर से आई तस्वीर किसी व्यवस्था की लाचारी नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता का स्याह दस्तावेज़ है, जहाँ छतों से झरता प्लास्टर, दीवारों में समाई गहरी दरारें और आसमान से टपकती हर एक बूँद बच्चों के हौसलों को तार-तार कर रही है, जिन हाथों में बेफ़िक्री की कलम होनी चाहिए थी, वे हाथ आज हर पल मौत के साए में काँप रहे हैं, जर्जर इमारतों में क़ैद इन मासूमों की पढ़ाई अब महज़ तालीम नहीं, बल्कि हर रोज़ ज़िंदगी से किया जाने वाला एक ख़तरनाक समझौता बन चुकी है, सूरजपुर के लगभग 100 से ज्यादा शासकीय स्कूलों का मंज़र किसी खंडहर से कम नहीं है, छतों का सीमेंट उखड़ चुका है और लोहे की जंग खाई सरिया साफ़ नज़र आ रही है, ज़रा सी बारिश होते ही क्लासरूम पानी से भर जाते हैं, फर्श टूट-फूट कर दलदल बन चुका है और खिड़कियाँ उजड़ चुकी हैं, आलम यह है कि छात्र - छात्राओं के मन में किताबों के सबक़ से ज़्यादा यह डर हावी रहता है कि कहीं पढ़ते-पढ़ते उनके सिर पर छत ही न गिर जाए, कई स्कूल में तो मासूम बच्चे जान जोखिम में डालकर ज़मीन पर बैठे अक्षर ज्ञान ले रहे हैं, सहमे हुए शिक्षक और ख़ौफ़ज़दा बच्चे सिर्फ़ एक ही गुहार लगा रहे हैं कि किसी बड़े हादसे से पहले इन शालाओं की मरम्मत कराई जाए, ताकि वे बिना किसी डर के अपनी पढ़ाई जारी रख सकें, ज़िले के स्कूल भवनों की बदहाली को लेकर जिला प्रशासन भी यह मान रहा है कि जिले में कई स्कूल भवन जर्जर स्थिति में हैं और उसके सुधार के लिए प्रयास किये जा रहे हैं, सूरजपुर के 105 स्कूलों को खुद शिक्षा विभाग ने अपने दस्तावेज़ों में जर्जर घोषित किया हुआ है, वहीं कलेक्टर सूरजपुर के अनुसार बैठकों के ज़रिये ऐसे जर्जर स्कूलों की सूची तैयार कराई जा रही है, उन्होंने दावा किया कि कई जगहों पर अतिरिक्त कमरों का निर्माण कराया गया है जहाँ कक्षाएं सुरक्षित रूप से संचालित की जा रही हैं, जिन शालाओं में छात्रों की संख्या अधिक है और कमरे नाकाफ़ी हैं, उनके लिए अतिरिक्त भवनों के नए प्रस्ताव मँगवाए जा रहे हैं, कलेक्टर के मुताबिक ज़िला स्तर पर जो संसाधन संभव हैं उनके ज़रिये काम कराया जा रहा है और शेष प्रस्तावों को मंज़ूरी के लिए शासन स्तर पर प्रेषित किया जाएगा, साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बीईओ स्तर से अब तक किसी ऐसे भवन की सूचना नहीं आई है जो बिल्कुल ढहने की कगार पर हो और सभी ज़िम्मेदारों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि अत्यधिक जर्जर कक्षों में बच्चों को कतई न बैठाया जाए, रेना जमाल, कलेक्टर सूरजपुर हैरत की बात यह है कि ज़मीनी हक़ीक़त और सरकारी दावों के बीच का फ़ासला बहुत ज्यादा है, एक तरफ़ प्रशासनिक फाइलों में काग़ज़ी प्रक्रियाएं, प्रस्ताव और रिपोर्टों का इंतज़ार चल रहा है, तो दूसरी ओर ज़मीनी धरातल पर मासूम छात्र रोज़ाना मौत के साए में बैठने को मजबूर हैं, सवाल यह है कि क्या शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन किसी बड़े हादसे के इंतजार में है, ज़रूरत है काग़ज़ों पर दौड़ती योजनाओं को तत्काल ज़मीन पर उतारा जाए, ताकि इन नौनिहालों के जीवन और उनके भविष्य को सुरक्षित किया जा सके,
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बेतिया के दियारे में बाढ़ से सिसवनिया सरकारी विद्यालय बंद, छात्रों की पढ़ाई बाधित

Bettiah, Bihar:बेतिया से खबर है जहां दियारे इलाके में बाढ़ कटाव का दंश झेलने को ग्रामीण मजबूर है गंडक नदी के जलस्तर में उतार चढ़ाव से जन जीवन अस्त व्यस्त हो गया है स्कूली बच्चों की 15 जुलाई से पढ़ाई बाधित हो गई है मामला योगापट्टी के सिसवा मंगलपुर का है राजकीय मध्य विद्यालय सिसवनिया 15 जुलाई से बंद है बाढ़ के पानी से स्कूल भर गया है 15 जुलाई से स्कूल अभी तक बंद है स्कूल के सभी साजो समान पानी में खराब हो रहे है स्कूल से समान निकालने के लिए नाव की जरूरत है लेकिन नाव नहीं होने से स्कूल के समान खराब हो रहे है स्कूल के प्रधानाध्यापक और शिक्षक बताते है आज तक स्कूल का भवन नहीं बन पाया सरकारी जमीन है उस पर सरकार को स्कूल बनाने की जरूरत है ग्रामीणों के सहयोग से यह स्कूल चल रहा था लेकिन 15 जुलाई से सैकड़ो छात्रों का पढ़ाई बाधित हो गई है शिक्षकों ने अंचलाधिकारी को पत्र लिख स्कूल को कही और शिफ्ट करने की मांग की है।
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झारखंड में एसआईआर को लेकर सियासत तेज, आरोप-प्रत्यारोप जारी

Ranchi, Jharkhand:झारखंड में एसआईआर की प्रक्रिया पर अब भी सियासी खींचतान जारी है।सवाल और सियासत के बीच सत्ता पक्ष के निशाने पर बीजेपी है तो बीजेपी भी आक्रामक है।बीजेपी की मानें तो महागठबंधन बौखला गई है। एसआईआर को लेकर कांग्रेस नेता राजेश ठाकुर ने कहा, पूरे देश में जिस तरह की परिस्थिति देखने को मिली है, अगर उस तरह की बात झारखंड में भी आई है तो शंका तो जायज है हम लोग चाहते हैं , गलत तरीके से काम करने की आवश्यकता नहीं है। जो लोग भी शामिल हैं उस पर करवाई हो और उसकी को लेकर निर्वाचन आयोग के सामने भी बात रखी है। बाइट ...राजेश ठाकुर, नेता कांग्रेस झामुमो महासचिव विनोद पांडे ने कहा, हम लोग किसी को टारगेट नहीं कर रहे हैं, जिस तरह की बातें आई है, जो साक्ष्य है, बीजेपी का थैला जो चुनाव के समय प्रयोग में लाया जाता है उस थैले में फॉर्म 7 वाले 259 भर कर बीएलओ को दवाब दिया जा रहा था स्वीकृति दिया जाए , झामुमो के कार्यकर्ताओं को जानकारी मिली तो विरोध हुआ कानूनी कार्रवाई के लिए केस भी किया गया, जांच चल रही है। इस तरह के मामले बीजेपी के तरफ से ही करने का काम किया जा रहा है। इसको लेकर अवगत कराया है। बाइट...विनोद पांडेय, महासचिव, झामुमो झामुमो विधायक एमटी राजा ने बताया, गड़बड़ियों से जुड़ी जानकारी निर्वाचन आयोग के सामने रखी गई है।अधिकारियों ने बताया है ,जो शिकायतें आई है ,क्षेत्र में जाकर उन सभी शिकायतों की जांच कर समाधान करेगें। किसी भी तरह की गलती नहीं होने देने का भरोसा दिलाया गया है बाइट ...एमटी राजा, विधायक, झामुमो बाइट .. डॉ मनोज कुमार, राजद प्रदेश प्रवक्ता बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता दीनदयाल वर्णवाल ने कहा, महागठबंधन बौखला गई है ,उनको लगने लगा है कि एसआईआर के बाद साफ हो जायेगें, अगले बार सरकार जाना तय हो जाएगा। गलत और विशेष वर्ग के लोगों, बंग्लादेशी घुसपैठियों के वोट से सरकार चल रही है। जैसे ही शुद्धिकरण चालू हुआ ,बौखला गए हैं। अब उनके वोट और वोट का खेल करना उनके लिए संभव नहीं है। बाइट ...दीनदयाल वर्णवाल, प्रदेश प्रवक्ता, बीजेपी झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार ने बताया, महागठबंधन के प्रतिनिधि मंडल ने मुलाकात किया था उनको प्रक्रिया की पूरी जानकारी दी गई है। बीएलए 2 बल्क में आवेदन दे सकते हैं । फॉर्म 6,7 और 8 तीनों में एक साथ प्रतिदिन 10 आवेदन दे सकते हैं। कितना आवेदन आ रहा हर सप्ताह लिस्ट बीएलओ 1 को भेजा जाता है। ये भी सुनिश्चित किया जा रहा कि हर दिन जानकारी साझा किया जायेगा कि कितना फॉर्म आया है बाइट ...के रवि कुमार, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी
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गयाजी में असिरा सаба ने विष्णु की कलाकृति से तहज़ीब को कैनवास दिया

Gaya, Bihar:गयाजी- रंगों की कोई ज़ात नहीं होती, और हुनर का कोई मज़हब नहीं होता। मिलिए असिरा सबा से, जो गयाजी के रहनेवाले है और अल्पसंख्यक समुदाय से ताल्लुक रखती हैं, लेकिन इनकी तूलिका (ब्रेश) पर किसी एक धर्म का पहरा नहीं है। जब असिरा सबा ने भगवान विष्णु की यह भव्य कलाकृति बनानी शुरू की, तो मकसद सिर्फ एक पेंटिंग बनाना नहीं था—बल्कि सदियों पुरानी गंगा-जमुनी तहज़ीब को एक कैनवास देना था। गयाजी मे आयोजित विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला के अवसर पर देश-विदेश से आने वाले लाखों तीर्थयात्रियों और श्रद्धालुओं के स्वागत तथा नगर के सौंदर्यीकरण हेतु जिला प्रशासन द्वारा पेंट द पेंट द सिटी अभियान चलाया जा रहा है। इस पहल के तहत फल्गू नदी के विभिन्न प्रमुख घाटों, मेला क्षेत्र की दीवारों, प्रमुख वेदी स्थलों तथा संपर्क मार्गों को आकर्षक वॉल पेंटिंग्स से सजाया जा रहा है। घाटों एवं प्रमुख पथों की दीवारों पर पितृपक्श के महत्व, भगवान विष्णु के चरण, गया तीर्थ का पौराणिक इतिहास, रामायण प्रसंग तथा बिहार की पारंपरिक लोककला (मधुबनी व मंजूषा कला) का सुंदर अंकन किया जा रहा है। कलाकृतियों के जरिए केवल धार्मिक स्वरूप ही नहीं इससे जुड़े जागरूकता संदेश भी प्रदर्शित किए जा रहे हैं। इस संबंध में भगवान विष्णु की कलाकृति बना रही अल्पसंख्यक युवती असिरा सबा ने बताया कि ये विष्णु भगवान है और ये गयासुर की पेंटिंग बना रहे है। ये तो सोमवार से शुरू हुआ था आज चौथा दिन है। पेंट द सिटी अभियान से आया था तो मेरा मन था कि ये बना है। बाइट:- असिरा सबा, पेंटिंग छात्रा सद्भाव और भाईचारे की यह खूबसूरत मिसाल साबित करती है कि आस्था दिल में होती है और कला हर दीवार को गिरा देती है।
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प्रतापगढ़ में अवैध पिस्टल-कारतूस मामले में फरार आरोपी गिरफ्तार

Pratapgarh, Rajasthan:प्रतापगढ़ जिले के अरनोद थाना पुलिस ने अवैध हथियार की खरीद-फरोख्त के मामले में फरार चल रहे आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मीर अफजल उर्फ इमरान खान को दबोचा है। आरोपी पर अवैध देशी पिस्टल और जिंदा कारतूस उपलब्ध कराने का आरोप है। मामले में पुलिस ने पहले एक आरोपी को हथियार के साथ गिरफ्तार किया था, जिसके बाद पूछताछ और अनुसंधान में हथियार उपलब्ध कराने वाले आरोपी का नाम सामने आया। पुलिस के अनुसार 22 अगस्त 2026 को अरनोद थाना पुलिस की टीम रतलाम रोड पर माताजी का सिंहपुरिया स्थित घोड़ा घाटा तिराहे पर नाकाबंदी कर रही थी। इसी दौरान देवल्दी की तरफ से एक स्कॉर्पियो गाड़ी आती दिखाई दी। पुलिस ने गाड़ी को रुकवाकर तलाशी ली तो चालक मोसिन खान निवासी डोराना के कब्जे से एक अवैध देशी पिस्तौल और एक जिंदा कारतूस बरामद हुआ। पुलिस ने हथियार जब्त कर मोसिन खान को गिरफ्तार किया और स्कॉर्पियो भी जब्त कर ली। इस संबंध में अरनोद थाने में आर्म्स एक्ट की धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि बरामद देशी पिस्तल और कारतूस मीर अफजल उर्फ इमरान खान निवासी कोटड़ी ने मोसिन खान को उपलब्ध कराया था। इसके बाद से पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। इसी बीच 2 सितंबर को पुलिस को सूचना मिली कि मीर अफजल उर्फ इमरान खान देवल्दी गांव में अपने ससुर मीर आजम खान के घर आया हुआ है। सूचना पर पुलिस टीम ने मौके पर दबिश दी। पुलिस की भनक लगते ही आरोपी वहां से भागने लगा, लेकिन पुलिस टीम ने पीछा कर उसे पकड़ लिया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान मीर अफजल उर्फ इमरान खान पिता डेरान खान, निवासी कोटड़ी, थाना कोटड़ी, जिला प्रतापगढ़ के रूप में हुई है। पुलिस आरोपी से हथियार की खरीद-फरोख्त और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं को लेकर पूछताछ कर रही है।
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पेट्रोल पंप डिस्पेंसर सत्यापन अब दो साल में: जनता को क्या लाभ?

Noida, Uttar Pradesh:पेट्रोल पंप डिस्पेंसर की सत्यापन व्यवस्था में बदलाव किया गया है. अब सत्यापन का अंतराल एक साल से बढ़ाकर दो साल किया जा रहा है. इसके साथ ही पेट्रोल-डीजल, CNG, LNG, LPG और हाइड्रोजन डिस्पेंसर के सत्यापन के लिए मान्यता प्राप्त परीक्षण केंद्रों की व्यवस्था की गई है. लेकिन बड़ा सवाल—इस बदलाव से आम जनता को सीधा फायदा क्या मिलेगा? पेट्रोल पंप पर डिस्पेंसर की सटीकता सीधे ग्राहक की जेब से जुड़ी है. मशीन में गड़बड़ी होने पर ग्राहक को तय कीमत में कम ईंधन मिल सकता है. इसी को रोकने के लिए डिस्पेंसर का सत्यापन किया जाता है. नए प्रावधान के तहत पेट्रोल-डीजल डिस्पेंसर के सत्यापन के लिए 5 हजार रुपये प्रति नोजल, जबकि CNG, LNG, LPG और हाइड्रोजन डिस्पेंसर के लिए 10 हजार रुपये प्रति नोजल शुल्क तय किया गया है. सरकार ने सत्यापन किए जाने वाले माप उपकरणों की श्रेणियां भी 18 से बढ़ाकर 23 कर दी हैं. लेकिन यहां सबसे अहम बदलाव जांच की अवधि को लेकर है. अगर सालाना सत्यापन की जगह अब दो साल में सत्यापन होगा, तो इसका मतलब है कि नियमित सरकारी सत्यापन के बीच का अंतर दोगुना हो जाएगा. सरकार का उद्देश्य सत्यापन प्रक्रिया को ज्यादा व्यवस्थित और मानकीकृत करना है. मान्यता प्राप्त परीक्षण केंद्रों के जरिए तकनीकी जांच को मजबूत किया जाएगा. लेकिन सवाल जनता के फायदे का है. सिर्फ जांच का अंतराल दो साल होने से पेट्रोल-डीजल सस्ता नहीं होगा और ग्राहक को अतिरिक्त ईंधन भी नहीं मिलेगा. जनता को वास्तविक फायदा तभी होगा, जब दो सत्यापनों के बीच भी डिस्पेंसर की निगरानी, सील की जांच, अचानक निरीक्षण और शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई जारी रहे. यानी जांच दो साल में हो, लेकिन निगरानी लगातार हो—तभी ग्राहक के हित सुरक्षित रहेंगे. डिस्पेंसर वेरिफिकेशन : अब 2 साल में ₹5,000 प्रति नोजल — पेट्रोल/डीजल; ₹10,000 प्रति नोजल — CNG/LNG/LPG/HYDROGEN. माप उपकरणों की श्रेणियां: 18 से बढ़कर 23
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प्रतापगढ़ में बालिका से छेड़छाड़: दो आरोपी गिरफ्तार, एक बाल अपचारी डिटेन

Pratapgarh, Rajasthan:प्रतापगढ़ जिले में बालिका से छेड़छाड़ के मामले में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को बापर्दा गिरफ्तार किया है, जबकि उनके एक साथी बाल अपचारी को भी बापर्दा डिटेन किया गया है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, स्थानीय लोगों से पूछताछ और मुखबिर तंत्र की मदद से आरोपियों तक पहुंचकर कार्रवाई की। पुलिस के अनुसार 25 अगस्त 2026 को बालिका के परिजनों ने थाने में रिपोर्ट दी थी कि उनकी पुत्री 23 अगस्त को बाजार से घर लौट रही थी। इसी दौरान मोटरसाइकिल पर सवार तीन अज्ञात युवक उसके पास पहुंचे और उसके साथ छेड़छाड़ करते हुए उसे खींचने का प्रयास किया। बालिका के शोर मचाने पर तीनों युवक मोटरसाइकिल लेकर मौके से फरार हो गए। रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आसपास के लोगों से पूछताछ की। साथ ही बाजार और आसपास के गांवों में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले गए। संदिग्ध युवकों के हुलिए के आधार पर पुलिस ने उनकी तलाश शुरू की और थाना क्षेत्र के संदिग्धों पर निगरानी रखी गई। पुलिस को मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर संदिग्धों से पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान घटना में शामिल होना सामने आने पर पुलिस ने दो आरोपियों को बापर्दा गिरफ्तार कर लिया। वहीं, उनके एक अन्य साथी बाल अपचारी को भी बापर्दा डिटेन किया गया है। पुलिस अब मामले में आरोपियों से पूछताछ कर घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच कर रही है।
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बांसवाड़ा के कलिंजरा में दबंगों ने रास्ता रोककर मारपीट, घायल

Banswara, Rajasthan:जिला - बांसवाड़ा विधानसभा- बांसवाड़ा लोकेशन - बांसवाड़ा एंकर - बांसवाड़ा जिले के कलिंजरा थाना क्षेत्र में रास्ता रोककर एक व्यक्ति के साथ मारपीट करने का मामला सामने आया है। पीड़ित का आरोप है कि दबंगों ने एकजुट होकर पत्थर और डंडों से उन पर हमला कर दिया। अचानक हुए हमले में घायल के शरीर पर गंभीर चोटें आने की बात सामने आई है। घायल ने आरोप लगाया कि दबंगों ने उनका रास्ता रोककर मारपीट शुरू कर दी। हमले के दौरान पत्थर और डंडों का इस्तेमाल किया गया, जिससे चोटें आईं। मामले में भरत, मोहन और महेंद्र सहित अन्य लोगों पर मारपीट में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। पीड़ितों के अनुसार, मारपीट में एक महिला के भी शामिल होने का आरोप है। घटना के बाद घायलों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। पुलिस मामले की जांच कर रही है और आरोपों की पुष्टि जांच के बाद होगी।
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हजारीबाग के ऐतिहासिक राजकीय विद्यालय जर्जर इमारत से सुरक्षा संकट

Hazaribagh, Jharkhand:जिस विद्यालय ने कभी हजारीबाग की पीढ़ियों को शिक्षा की रोशनी दिखाई, आज वही विद्यालय खुद बदहाली के अंधेरे में डूबा हुआ है। नगर निगम क्षेत्र के रुक्मिणी भवन के समीप स्थित बाड़ा बाजार का ऐतिहासिक राजकीय मध्य विद्यालय, बजरिया स्कूल, इन दिनों अपने अस्तित्व के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। वर्ष 1883 में स्थापित यह विद्यालय हजारीबाग जिले और तत्कालीन नगर पालिका के शुरुआती सरकारी विद्यालयों में अपनी ऐतिहासिक पहचान रखता है। कभी यहां से पढ़कर निकले विद्यार्थियों ने देश-विदेश में विभिन्न प्रतिष्ठित पदों पर पहुंचकर नाम कमाया, लेकिन आज विद्यालय भवन की हालत ऐसी है कि यहां पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा ही सबसे बड़ा सवाल बन गई है। विद्यालय भवन की जर्जर हालत किसी बड़े हादसे की आशंका को जन्म दे रही है। दीवारों की पपड़ियां उखड़ चुकी हैं और कई हिस्सों में सीमेंट-बालू लगातार झड़ रहा है। छत की स्थिति भी बेहद खराब बताई जा रही है। स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हीरा राम के अनुसार, कई बार छत से पत्थर और मलबा टूटकर नीचे गिर जाता है। ऐसे में बच्चों को कक्षाओं के अंदर बैठाना जोखिम भरा हो गया है। बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए शिक्षकों ने उन्हें जर्जर कमरों में बैठाने के बजाय बरामदे में पढ़ाना शुरू कर दिया है। लेकिन अब बरामदे की स्थिति भी धीरे-धीरे खराब होती जा रही है। ऐसे में सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर इन मासूम बच्चों को सुरक्षित तरीके से पढ़ाया जाए तो कहां? बरसात के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है। बारिश के दौरान जर्जर भवन के अंदर और आसपास पानी पहुंचने से बच्चों और शिक्षकों की चिंता बढ़ जाती है। हर तेज बारिश के साथ भवन की कमजोर संरचना को लेकर डर बना रहता है। विद्यालय प्रबंधन और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते भवन की मरम्मत या नए भवन का निर्माण नहीं कराया गया तो किसी दिन बड़ी दुर्घटना हो सकती है। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा मामला होने के बावजूद कार्रवाई में हो रही देरी चिंता बढ़ा रही है। मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारियों की टीम ने विद्यालय का निरीक्षण किया था। बताया गया कि जिला योजना से जुड़े इंजीनियरों ने भी भवन की स्थिति का जायजा लिया और जर्जर भवन के लिए एस्टीमेट तैयार कर डीसी फंड के लिए भेजा गया। स्कूल प्रबंधन के अनुसार निरीक्षण और एस्टीमेट तैयार किए जाने के करीब 15 से 20 दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक धरातल पर निर्माण या मरम्मत का काम शुरू नहीं हुआ है। विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि कागजी प्रक्रिया अपनी जगह है, लेकिन बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए कार्रवाई में तेजी जरूरी है। जर्जर भवन का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। विद्यालय में पहले करीब 65 से 70 बच्चे पढ़ते थे, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों के कारण छात्र संख्या घटकर करीब 51 रह गई है। कुछ अभिभावकों ने सुरक्षा को लेकर अपने बच्चों का नाम दूसरे विद्यालयों में करा दिया है। जो बच्चे अभी विद्यालय में पढ़ रहे हैं, उनके अभिभावक भी हर दिन चिंता के साथ उन्हें स्कूल भेज रहे हैं। शिक्षकों के लिए भी बच्चों को पढ़ाने के साथ उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती बन गया है।
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रत्नागिरी के गणपतीपुळे समुद्रकिनारा फिर बंद, खतरनाक स्थितियों कारण प्रशासन ने सतर्कता जारी की

Ratnagiri, Maharashtra:रत्नागिरी.. गणपतीपुळे समुद्रकिनारा पुन्हा झाला बंद.. रत्नागिरी तालुक्यातील श्रीक्षेत्र गणपतीपुळे येथील समुद्राचे धोकादायक स्थिती अद्याप कायम असल्याने जिल्हाधिकारी मनुज जिंदल यांच्या सूचनेनुसार पुन्हा बंद करण्यात आला आहे.. त्यामुळे पर्यटकांनी समुद्रकिनाऱ्यावर जाऊ नये असे आवाहन करण्यात आले आहे.. गणपतीपुळे समुद्रकिनारा मागील दोन महिने समुद्राच्या धोकादायक स्थितीमुळे बंद ठेवण्यात आला होता.. गेल्या आठवड्यापूर्वीच समुद्रकिनारा पुन्हा पर्यटकांसाठी खुला करण्यात आला.. परंतु समुद्राची धोकादायक स्थिती कायम असल्याने जिल्हाधिकारी यांच्या सूचनेनुसार समुद्रकिनारा पुन्हा बंद करण्यात आला आहे..
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