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Shakti KishorShakti KishorFollow9 Oct 2024, 11:34 am
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देवघर लूटकांड: चार गिरफ्तार, घायल बदमाश की मौत

Deoghar, Jharkhand:देवघर पुलिस को लूट को लेकर बड़ी सफलता हाथ लगी है जिसमें चार अपराधियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है साथ ही देसी पिस्तौल के साथ कई अन्य सामग्री भी बरामद किए हैं मामला देवघर के मोहनपुर थाना क्षेत्र में बीते गुरुवार देर रात लूट की एक बड़ी वारदात सामने आई, जहां अपराधियों की ही गोली से उनके एक साथी की मौत हो गई। घटना 23 अप्रैल 2026 की रात करीब 11:15 बजे की है, जब जयपुर मोड़ के पास एक मालवाहक मिनी ट्रक को निशाना बनाया गया। जानकारी के अनुसार, कोका-कोला कंपनी का माल लेकर चालक बड़हाई चौक से जसीडीह की ओर जा रहा था। इसी दौरान रिखिया गांव के पास एक उजले रंग की फॉर्च्यूनर कार और एक बिना नंबर की मोटरसाइकिल पर सवार कुल छह अपराधियों ने ट्रक को ओवरटेक कर रोक लिया। बदमाशों ने पिस्तौल के बल पर चालक से करीब 2000 रुपये नकद और उसका सैमसंग गैलेक्सी मोबाइल फोन लूट लिया। इसके बाद वे चालक को जबरन अपनी कार में बैठाने का प्रयास करने लगे। घटना के दौरान एक अपराधी चालक पर पिस्तौल ताने हुए था, तभी अचानक गोली चल गई, जिससे उनके ही एक साथी को गोली लग गई। इस अफरातफरी में चालक किसी तरह जान बचाकर मौके से भागने में सफल रहा। वहीं घायल अपराधी को उसके साथी देवघर सदर अस्पताल ले गए, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, सारठ के नेतृत्व में विशेष टीम गठित कर कार्रवाई शुरू की गई। त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने भाग रहे अपराधियों को फॉर्च्यूनर वाहन के साथ गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने मौके से एक देसी पिस्तौल, एक मैगजीन, तीन जिंदा कारतूस, एक खोखा, फॉर्च्यूनर कार, एक बिना नंबर की R15 बाइक तथा वाहन का टूटा नंबर प्लेट बरामद किया है। मृतक अपराधी की पहचान राजन लाल (25 वर्ष), निवासी रिखिया, के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार उसका आपराधिक इतिहास शून्य बताया गया है। इस मामले में मोहनपुर थाना कांड संख्या 58/2026 के तहत बीएनएस 2023 एवं आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। फरार अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी जारी है।
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बेगूं के राघव सोनी का पार्थिव शव कनाडा से पहुंचा, शोक लेकिन श्रद्धांजलि

Begun, Rajasthan:चित्तौड़गढ़ जिले के बेगूं निवासी प्रकाश सोनी के पुत्र और कंप्यूटर इंजीनियर राघव सोनी की पार्थिव देह 14 दिन बाद कनाडा से उनके गृह नगर पहुंची। राघव की 11 अप्रैल को बोटिंग के दौरान डूबने से मृत्यु हो गई थी। पार्थिव देह को भारत लाने में चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी और विधायक डॉ. सुरेश धाकड़ सहित जनप्रतिनिधियों के प्रयास अहम रहे। जैसे ही पार्थिव देह बेगूं पहुंची, पूरे नगर में शोक की लहर दौड़ गई। अंतिम विदाई के दौरान बहनों ने राघव की कलाई पर राखी बांधकर भावुक श्रद्धांजलि दी। बड़ी संख्या में लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी。
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जमुई: एंबुलेंस में ईंधन नहीं, मरीज की मौत; चालक निलंबित, कार्रवाई की मांग

Jamui, Bihar:जमुई जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है,जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर सरकार बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर एंबुलेंस में ईंधन नहीं होने के कारण एक मरीज की तड़प-तड़प कर मौत हो जाती है। मृतक धीरज रविदास के पुत्र अजीत कुमार रविदास ने सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार सिंह को दिए आवेदन में साफ तौर पर एंबुलेंस कर्मियों की घोर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि एंबुलेंस में तेल नहीं था, तो मरीज को जमुई से रेफर ही क्यों किया गया? क्या मरीज की जान की कोई कीमत नहीं थी?परिजनों के मुताबिक,जमुई से सिकंदरा के बीच कई पेट्रोल पंप मौजूद हैं, लेकिन चालक ने कहीं भी गाड़ी में ईंधन नहीं भरवाया। करीब 25 किलोमीटर चलने के बाद एंबुलेंस बीच रास्ते में बंद हो गई। चिलचिलाती धूप में मरीज एंबुलेंस के अंदर तड़पता रहा और आखिरकार उसने दम तोड़ दिया। यह सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि सिस्टम की असंवेदनशीलता का जीता-जागता उदाहरण है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एंबुलेंस जैसी जीवन रक्षक सेवा बिना बुनियादी तैयारी के चलाई जा रही है? क्या मरीजों की जान भगवान भरोसे छोड़ दी गई है? मामले की गंभीरता को देखते हुए सिविल सर्जन डॉ. Ashok कुमार सिंह ने जांच का भरोसा दिया है और चालक को निलंबित कर दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि एंबुलेंस का संचालन पटना स्तर से होता है और इसकी सूचना संबंधित विभाग को दे दी गई है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या सिर्फ निलंबन इस मौत का जवाब है? इतनी बड़ी घटना के बावजूद अब तक एंबुलेंस चालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होना और गिरफ्तारी नहीं होना प्रशासनिक ढिलाई को दर्शाता है। क्या किसी की जान जाने के बाद भी सिस्टम इसी तरह सुस्त रहेगा? इस मामले ने सामाजिक और प्रशासनिक दोनों ही स्तर पर आक्रोश पैदा कर दिया है। मृतक दलित समाज से थे, ऐसे में यह मुद्दा और भी संवेदनशील हो गया है। परिजनों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सदर अस्पताल में आंदोलन करेंगे। अब नजरें प्रशासन और सरकार पर टिकी हैं—क्या दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी अन्य घटनाओं की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा?
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