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जैतसागर झील में विशेष सफाई, बूंदी पर्यटन में नया जोश
KRKishore Roy
Jan 06, 2026 03:50:28
Noida, Uttar Pradesh
बून्दी की ऐतिहासिक जैतसागर झील में लौटी उम्मीद, नावों के सहारे चल रहा विशेष सफाई अभियान
बून्दी।
पर्यटन नगरी बूंदी की पहचान रही ऐतिहासिक जैतसागर झील, जो बीते महीनों में उपेक्षा और गंदगी के कारण बदहाली का शिकार हो गई थी, अब एक बार फिर संवरने की राह पर है। जिला प्रशासन और वन विभाग की संयुक्त पहल से झील में विशेष सफाई अभियान शुरू किया गया है, जिससे झील की सुंदरता और जल गुणवत्ता में सुधार के संकेत मिलने लगे हैं।
लंबे समय तक सफाई व्यवस्था ठप रहने के कारण झील में कमल की जड़ें, जलकुंभी, प्लास्टिक कचरा और गंदगी फैल गई थी। हालात इतने खराब हो गए थे कि झील से दुर्गंध आने लगी और मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया। इससे पर्यटकों के साथ-साथ स्थानीय लोगों में भी गहरी नाराजगी थी।
करीब चार माह पूर्व कमल जड़ों की सफाई के लिए लगाई गई हार्वेस्टर मशीन तकनीकी खराबी के चलते झील में डूब गई थी, जिसके बाद सफाई कार्य पूरी तरह बंद हो गया। लेकिन हालात बिगड़ते देख अब प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत हस्तचालित लकड़ी की नावों के जरिए सफाई अभियान दोबारा शुरू किया है।
फिलहाल प्रतिदिन करीब एक दर्जन मजदूर नावों के सहारे झील में उतरकर तैरता कचरा, प्लास्टिक और जलकुंभी बाहर निकाल रहे हैं। भले ही यह प्रक्रिया धीमी है, लेकिन इसके सकारात्मक परिणाम अब साफ नजर आने लगे हैं। झील का पानी पहले کی तुलना में साफ दिखने लगा है।
यह अभियान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के बूंदी दौरे के दौरान दिए गए निर्देशों की अनुपालना में शुरू किया गया। जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा और वन विभाग के डीएफओ अरुण कुमार डी के संयुक्त निर्देशन में सफाई कार्य को अंजाम दिया जा रहा है।
प्रशासन का दावा है कि एक से दो माह में झील के घाटों, किनारों और कमल जड़ों की व्यापक सफाई पूरी कर ली जाएगी। इसके बाद झील में बोटिंग गतिविधियों को भी दोबारा शुरू करने की योजना है, जिससे पर्यटन को नया संबल मिलेगा।
सफाई कार्य में जुटे मजदूर सुरेश केवट बताते हैं कि ठंड के कारण फिलहाल मजदूरों की संख्या कम है, लेकिन मौसम सामान्य होते ही कार्य में तेजी लाई जाएगी। प्रतिदिन बड़ी मात्रा में कचरा झील से बाहर निकाला जा रहा है।
इतिहासकारों के अनुसार जैतसागर झील का नाम जैता मीणा के नाम पर पड़ा। 1568 ईस्वी में महाराव सूरजमल की माताजी जयवती ने झील के सौंदर्यीकरण का कार्य करवाया था। झील के मध्य स्थित तोरण द्वार, हाथियों की मूर्तियां, दशावतार, नवग्रह और छतरियां आज भी बूंदी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की गवाही देते हैं।
प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि झीलों और जल स्रोतों में कचरा न डालें और स्वच्छता अभियान में सहयोग करें। यदि यह प्रयास निरंतर जारी रहा और जनभागीदारी मिली, तो जल्द ही जैतसागर झील एक बार फिर अपने ऐतिहासिक वैभव और पर्यटन पहचान को हासिल कर सकती है।
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