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Narendra Kr. BhatiNarendra Kr. BhatiFollow29 Aug 2024, 12:19 pm
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तूफानी बारिश से किसानों पर आफत, गेहूं की फसल बर्बाद

Baheri, Uttar Pradesh:बरेली। जनपद के बहेड़ी थाना क्षेत्र में अचानक आई तूफानी बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। बुधवार को बदले मौसम के मिजाज ने जहां आम जनजीवन को प्रभावित किया, वहीं खेतों में तैयार खड़ी गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया। तेज हवाओं के साथ हुई बारिश के कारण खेतों में खड़ी गेहूं की फसल जमीन पर बिछ गई। कई किसानों की फसल पूरी तरह से गिरकर पानी में डूब गई, जिससे दाने काले पड़ने और सड़ने की आशंका बढ़ गई है। किसान, जो कटाई की तैयारी में लगे थे, अब अपनी बर्बाद होती फसल को देखकर मायूस नजर आ रहे हैं। स्थानीय किसानों का कहना है कि इस बार फसल अच्छी हुई थी और उन्हें बेहतर पैदावार की उम्मीद थी, लेकिन अचानक आए इस तूफान ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। खेतों में जलभराव होने से स्थिति और भी गंभीर हो गई है, जिससे कटाई कार्य में भी देरी होने की संभावना है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई जगह पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति बाधित होने की भी खबरें सामने आई हैं। मौसम के इस बदलते रुख ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि अगर जल्द ही मौसम साफ नहीं हुआ तो नुकसान और बढ़ सकता है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि फसल के नुकसान का सर्वे कराकर उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि उनकी आर्थिक स्थिति को संभाला जा सके। वहीं कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्थिति का आकलन किया जा रहा है और प्रभावित किसानों की हर संभव मदद की जाएगी। इस अचानक आई प्राकृतिक आपदा ने एक बार फिर किसानों की निर्भरता मौसम पर उजागर कर दी है, जहां एक झोंके में महीनों की मेहनत बर्बाद हो जाती है।
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कानपुर में साइबर ठगी गैंग 19 गिरफ्तार, ड्रोन से घेराबंदी पूरी

Kanpur, Uttar Pradesh:एक्सक्लूसिव कानपुर बिग ब्रेकिंग कानपुर पुलिस की बहुत बड़ी कार्यवाही। फिल्मी स्टाइल में किया गया एक्शन。 अंतर्राज्यीय साइबर ठगी गिरोह की तलाश घेरा बंदी और सर्च अभियान。 कुल 19 साइबर अपराधी दबोचे गए मोबाइल ड्रोन कैमरे की मदद से पहले पूरी की प्लानिंग फिर की घेराबंदी。 वार्निंग देने के बाद 19 लोगों को किया गिरफ्तार。 सरकारी योजनाओं के डिटेल्स लेकर सैकड़ो लोगो का लगाया था चुना。 पकड़े गए लोगों से पूछताछ जारी। पूरे गांव के लोग जामताड़ा स्टाइल में साइबर ठगी को दे रहे थे अंजाम。 पूछताछ जारी आज पुलिस कर सकती है बड़ा खुलासा。
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होवरिट के दिव्यास्त्र ड्रोन: भारत की सेना के लिए नए खतरे और अवसर

Noida, Uttar Pradesh:इस वक़्त दुनियाभर के देश अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने की ज़द्दोज़हद में लगे हुए हैं। भारत में सेना के साथ साथ कई प्राइवेट कंपनीज़ भी कुछ नए एक्सपेरिमेंट्स करती दिखाई दे रही हैं। ऐसी ही एक कंपनी है होवरिट, जो लखनऊ में स्थित है। इस कंपनी ने “दिव्यास्त्र” तैयार किया है। मात्र 24 साल के युवा और उसके साथियों के शौक ने प्रयोग के ऐसे पंख दिए कि आज उसने देश की सुरक्षा के लिए ये “दिव्यास्त्र” तैयार कर दिया है। “दिव्यास्त्र” नाम का ये ड्रोन/यूएवी दुश्मन देश को परेशान करने के लिए काफ़ी है। इसकी रेंज 500 किलोमीटर की है, वहीं पेलोड 15 किलो है। यानी आसान भाषा में ये 500 किलोमीटर दूर जाकर किसी टारगेट को 15 किलो के विस्फोटक से तहस नहस कर सकता है। ये दिव्यास्त्र 10 हज़ार फीट की ऊंचाई पर जाकर आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस के ज़रिए दिए गए टारगेट को लोकेट कर उस पर मार करता है। होवरिट के तीन फ़ाउंडर्स हैं। इनमें से पवन मात्र 24 साल के हैं। पवन बताते हैं कि उनकी कंपनी ने सबसे पहले “बाज़” नाम के एक ड्रोन तैयार किया था। बाज़ लगभग दस किलोमीटर की रेंज के साथ जाकर सर्विलांस और अटैक, दोनों काम कर सकता है। इसके बाद जब ऑपरेशन सिंदूर शुरू हुआ तब तीनों फ़ाउंडर्स ने दिव्यास्त्र बनाने की तैयारी शुरू की। दिव्यास्त्र के दो अलग अलग वर्जन हैं। दोनों पर लगातार काम हो रहा है। दिव्यास्त्र नाम के इस ड्रोन/यूएवी को लेकर पवन बताते हैं कि 1.7 मीटर चौड़े इस ड्रोन के नोज़ को बदलकर इससे सर्विलांस और अटैक दोनों का काम लिया जा सकता है। दस हज़ार फीट की ऊंचाई पर ये लगभग 140 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से उड़कर अपने टारगेट को चेज़ करता है। टारगेट लॉक होने के बाद ये 15 किलो विस्फोटक वाले मिसाइल को लगभग 550-600 किलोमीटर की स्पीड से मारता है। हॉवरिट के फाउंडिंग मेम्बर पवन ने दिव्यास्त्र माक-2 के बारे में बताया कि इसकी चौड़ाई 3 मीटर से ज़्यादा है। ये 2000 किलो मीटर की दूरी तक जाकर मार सकता है। उसकी पेलोड भी 80 किलो तक की है। फ़िलहाल होवरिट नाम की इस कंपनी की कोशिश है कि वो ज़्यादा पेलोड और स्पीड वाले ड्रोन्स तैयार करके भारतीय सेना को मुहैया करायें। पवन बताते हैं कि उनके ड्रोन बाज का इस्तेमाल इससे पहले डिफेंड फ़ोर्स ने सफलतापूर्वक किया है। पवन अपने दिव्यास्त्र की क़ीमत नहीं बताना चाहते। हालांकि वो कहते हैं कि मार्केट में इस तरह के ड्रोन/यूएवी की क़ीमत से उनके दिव्यास्त्र की क़ीमत एक तिहाई ही है। यानी कम लागत में ज़्यादा मारक क्षमता वाला ये प्रयोग भारतीय सैन्य बलों के लिये मुनाफ़े का सौदा बन सकती हैं। फ़िलहाल होवरिट ने दिव्यास्त्र के प्रयोग किए हैं और सरकार ने उनकी काम को देखते हुए डिफेंड कॉरिडोर में 55 हज़ार स्क्वायर फीट की ज़मीन लीज़ पर दे दी है। दुनिया के अन्य देशों की तुलना में भारत में बनने वाले इस तरह के ड्रोन्स/यूएवी को लेकर पवन पांडे ने कहा कि भारत की क्षमता बढ़ ज़रूर रही है लेकिन प्रोडक्शन के लिहाज़ से ईरान जैसे देश से हम काफ़ी पीछे हैं। पवन कहते हैं कि उनकी कंपनी फ़िलहाल एक महीने में 20 ड्रोन तक बनाने की क्षमता रखती है। फंड्स बेहतर मिलें तो शायद इसको काफ़ी हद तक बढ़ाया जा सकता है। पवन का मानना है कि युवाओं को डिफेंड एक्सपेरिमेंट के फील्ड में आना बेहद ज़रूरी है। टिकटैक - पवन पांडे, फ़ाउंडिंग मेम्बर, होवरिट
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उज्जैन के महाकाल मंदिर भस्म आरती में उल्का गुप्ता भावुक

Ujjain, Madhya Pradesh:उज्जैन.. ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर में इन दिनों देशभर से श्रद्धालुओं का आगमन जारी है। इसी क्रम में टीवी एवं फिल्म अभिनेत्री उल्का गुप्ता उज्जैन पहुंचीं, जहां उन्होंने प्रातःकालीन भस्म आरती में शामिल होकर भगवान महाकाल के दर्शन किए。 दर्शन के बाद चर्चा करते हुए उन्होंने अपने अनुभव को अत्यंत भावुक बताते हुए कहा कि भस्म आरती का वातावरण इतना दिव्य था कि उसे शब्दों में व्यक्त करना संभव नहीं है। लगभग दो घंटे तक चले इस अनुष्ठान में उन्हें समय का आभास ही नहीं हुआ。 अभिनेत्री ने बताया कि उन्हें बहुत समीप से भगवान महाकाल के शिवलिंग का श्रृंगार होते हुए देखने का अवसर मिला। साथ ही जल अर्पण और आरती की भव्यता ने उन्हें भाव-विभोर कर दिया। उन्होंने कहा कि आरती के दौरान का वातावरण इतना ऊर्जावान था कि उनके रोंगटे खड़े हो गए और उनकी आंखों में आंसू तक आ गए。 ‘द केरल स्टोरी 2’ में अभिनय कर रहीं अभिनेत्री ने सभी शिव भक्तों से आग्रह करते हुए कहा कि प्रत्येक श्रद्धालु को जीवन में एक बार महाकाल की भस्म आरती का अनुभव अवश्य करना चाहिए。 उन्होंने मंदिर की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए बताया कि वे वर्ष 2013 में भी महाकाल आई थीं, लेकिन अब वर्ष 2026 में व्यवस्थाओं में काफी सुधार हुआ है। सुरक्षा व्यवस्था, कतार प्रणाली और नियमों का पालन बहुत व्यवस्थित और सख्त है, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होती。 बाइट -अभिनेता उल्का गुप्ता
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रोशनदान तोड़कर चोर लाखों के गहने लेकर फरार, 24 घंटे बाद भी सुराग नहीं

Jaunpur, Uttar Pradesh:रोशनदान तोड़कर घर में घुसे चोर, नगदी और लाखों के गहनों पर किया हाथ साफ, 24 घंटे बाद भी सुराग नहीं जौनपुर के शाहगंज कोतवाली क्षेत्र में चोरी की एक बड़ी घटना से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। सिधाई गांव में बीती रात अज्ञात चोरों ने एक मकान को निशाना बनाते हुए रोशनदान तोड़कर घर के अंदर प्रवेश किया और आलमारी में रखी नगदी समेत लाखों रुपये के गहनों पर हाथ साफ कर दिया। घटना की जानकारी सुबह उस समय हुई जब परिवार के लोगों ने घर का सामान बिखरा देखा। चोरी की इस वारदात के बाद गांव में हड़कंप मच गया और मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। पीड़ित ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। सूचना पर पहुंची पुलिस ने मौके का निरीक्षण कर साक्ष्य जुटाए और पीड़ित की तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है। हालांकि घटना के 24 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ अभी तक कोई ठोस सुराग नहीं लग सका है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है और आसपास के लोगों से पूछताछ कर चोरों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। ग्रामीणों ने जल्द खुलासे की मांग की है, ताकि क्षेत्र में फैली दहशत कम हो सके।
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बिहार के सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर, दवा और उपकरणों की भारी कमी, मरीज बेहाल

Patna, Bihar:बिहार के अस्पतालों में कहीं डॉक्टर नहीं, कहीं रूई नहीं-रूई है तो सुई नहीं, कहीं दवा नहीं, कहीं बेड नहीं… और अब हालत यह है कि अस्पताल में मरीज के लिए व्हील चेयर तक उपलब्ध नहीं है। मजबूरी में मरीज को कभी साईकिल, कभी चारपाई, कभी स्कूटर पर बैठाकर ले जाना पड़ रहा है। अमंगल सरकार में समूचे बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था चौपट हो चुकी है। भाजपा-जदयू की सरकार बताए, जब अस्पताल में डॉक्टर नहीं, व्हील चेयर नहीं, दवा नहीं, इलाज की व्यवस्था नहीं, स्वास्थ्य कर्मी नहीं तो इसे अस्पताल कहा ही क्यों जाए? ईंट-गारे का ढांचा खड़ा कर फिर उसे मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल कह देने से स्वास्थ्य सेवा, सुविधा और व्यवस्था सुदृढ़ नहीं होती है? ये बिल्डिंग इसलिए बनाते और बनवाये है? कि इसमें मोटा कमीशन खा सके अन्यथा बिना चिकित्सकों, नर्सों, ड्रेसर, लैब टेक्निशियन इत्यादि की भर्ती के बिना अस्पतालों के इन भवनों में कबूतर ही रहेंगे। सत्ता के अहंकार में डूबी इस एनडीए सरकार को शायद गरीबों का यह दर्द दिखाई नहीं देता? क्योंकि इन्हें कुर्सी से मतलब है, भ्रष्टाचार से मतलब है, बिहार से नहीं। बिहार के सरकारी अस्पताल मरीजों के लिए रेफरल पॉइंट बन गए है, जहां से मरीजों को निजी अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है। स्वास्थ्य मंत्री रहते हमने 17 महीनों में स्वास्थ्य विभाग में जो सकारात्मक कार्य किए थे उन सभी को इन भ्रष्ट लोगों ने दरकिनार कर फिर से दलालों और मेडिकल माफियाओं को बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को सौंप दिया है।
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जयपुर में आयुर्वेद अधिवेशन: उपमुख्यमंत्री बैरवा ने सम्मानित व्यक्तित्वों पर बल दिया

Jaipur, Rajasthan:जयपुर में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान में आरोहण – आयुर्वेद अधिवेशन एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री प्रेम चंद बैरवा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि विधायक बालमुकुन्दाचार्य विशिष्ट अतिथि रहे। कार्यक्रम में आयुर्वेद के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई और क्षेत्र में योगदान देने वाले विशिष्ट व्यक्तित्वों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विशेषज्ञों ने आयुर्वेद को आधुनिक जीवनशैली में अपनाने और उसके महत्व पर जोर दिया। एनआईए के कुलपति प्रो संजीव शर्मा ने कहा आयोजन का उद्देश्य आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ लोगों को स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना रहा। बाइट- प्रेमचन्द बैरवा, उपमुख्यमंत्री बाइट- प्रो. संजीव शर्मा, NIA कुलपति
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मुज़फ्फरपुर की शाही लीची इस साल महंगी, फसल मंदी से आम आदमी को झटका

Muzaffarpur, Bihar:विश्व प्रसिद्ध मुजफ्फरपुर की शाही लीची की लाली और मिठास का आंनद लेने के लिए इस वर्ष आम लोगों को करनी पड़ेगी जेब ढीली, 60% पौधा में मंजर नहीं आये, लीची के पौधों में मंजर के बदले पत्ते, आम लोगों के साथ लीची किसान को भी लगा झटका. विश्व प्रसिद्ध मुजफ्फरपुर की शाही लीची अपनी रशीली मिठास को लेकर विश्व भर मे प्रसिद्ध है, लेकिन इस वर्ष आम लोगों को लीची का मिठास पाने के लिए पिछले वर्ष के अपेक्षा ज्यादा खर्च करनी पड़ेगी, क्योंकि इस वर्ष 60% पौधा में मंजर नहीं आये और मंजर के बदले पत्ते निकल गए. इस कारण किसान भी मंजर देखकर मायूस हैं. इस वर्ष लीची फसल अन्य वर्षों की अपेक्षा कम पैदावार है. लीची अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ विकाश कुमार दास ने कहा लीची के पौधा में कम मंजर आने का सबसे बड़ा कारण दिसंबर महीने का मौसम ठीक नहीं था, इसलिए मंजर के जगह नए पत्ते निकल गए हैं. पूरे बिहार का 33-36% लीची उत्पादन मुजफ्फरपुर में होता है और यहां के शाही लीची विश्व प्रसिद्ध है और मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन की ओर प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रपति तक भेजी जाती है. मुजफ्फरपुर की शाही लीची देश से लेकर विदेशों तक मांग रहती है. लेकिन इस बार इस शाही लीची के मिठास को चखने के लिए लोगों को अपनी जैव ढीली करनी पड़ेगी. मुजफ्फरपुर की बात करें तो लगभग 10 हजार हैक्टेयर में लीची का उत्पादन होता है जो बिहार के कुल उत्पादन का 33 - 36% हिस्सा है. पर इस बार पौधे में कम मंजर आना और फिर पौधे में मंजर आने के बाद बारिश और ओलावृष्टि यानी बेमौसम की मार से इस बार लीची की फसल अन्य वर्षों की अपेक्षा काफी कम होगी. लीची के पौधा में कम मंजर आने को लेकर लीची अनुसंधान केंद्र के निदेशक विकास कुमार दास ने बताया दिसंबर माह में लीची का पौधा का मंज़र तैयार करने का समय होता है, लेकिन उस समय सामान्य से 2 डिग्री तापमान ज्यादा रहने के कारण इस बार लीची के पौधा में मंज़र के बदले नए पत्ते निकल आए हैं. उन्होंने बताया कि अन्य वर्षो की अपेक्षा इस वर्ष 50% कम पैदावार आकी जा रही है और जब पौधे में मंजर आए तब अचानक बारिश और ओलावृष्टि के कारण 10% फसल को नुकसान पहुंचा है यानी कुल फसल की अगर बात कर ली जाए तो अन्य वर्षो की अपेक्षा इस वर्ष 60% कम पैदावार लीची की आकी जा रही है.
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