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DSDevesh Sharma PatrkarFollow28 Dec 2024, 12:12 pm

Bakewar - यमुना नदी में डूबा युवक दूसरे दिन भी नहीं मिला

Bakewar, Uttar Pradesh:

यमुना तलहटी की ग्राम पंचायत नंदगवा में मां की अन्त्येष्टि के समय फिसल कर यमुना में डूबा युवक दूसरे दिन भी नहीं मिला। शनिवार को एनडीआरएफ के गोताखोरों ने करीब पांच किलोमीटर से अधिक यमुना को खंगालते हुए उसकी तलाश की, मगर वह नहीं मिला। वहीं यमुना में डूबकर लापता हुए युवक के स्वजन वहीं यमुना के किनारे रोते बिलखते नजर आए। लवेदी थाना क्षेत्र के ग्राम नंदगवा के मजरा नगला मरदान निवासी 42 वर्षीय अनिल बाथम की मां बैकुंठी देवी का निधन गुरुवार को हो गया था। शुक्रवार की दोपहर वह अपने स्वजनों के साथ मां की अन्त्येष्टि के लिए यमुना घाट पर गया हुआ था जहां कि अंत्येष्टि के दौरान उसका पैर फिसलने से वह यमुना नदी में गिरकर लापता हो गया था।

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JNPT बंदर में आयात-निर्यात प्रभावित, ट्रांसपोर्टर्स ने लोडिंग- unloadिंग फीस के खिलाफ आंदोलन

SNSWATI NAIKJust now
Navi Mumbai, Maharashtra:Anchor -: उरण येथील जेएनपीए बंदरातील आयात निर्यातवर परिणाम होण्याची शक्यता आहे. परदेशातून माल घेऊन आलेला कंटेनर ट्रेलर वर लोड करण्यासाठी दीड हजार रूपये आकारले जात असून कंटेनर मधील माल खाली करून परत आलेला कंटेनर MT yard मध्ये ठेवून घेण्यास 5 हजार ते 10 हजार रूपये आकारले जात आहेत. लोडिंग आणि अनलोडिंग करण्यासाठी एका कंटेनर मागे पाच ते आठ हजारोंचा भुर्दंड बसत असून हा पैसा वाहतूकदारांकडून वसूल केला जात आहे. यात भ्रष्टाचार होत असल्याचा आरोप देखील ट्रान्सपोर्ट र/shipping कंपन्यांनी हा पैसा भरणे गरजेचे असताना ट्रेलर वाहतूकदारांच्या माथी हे पैसे मारले जात असल्याने याविरोधात न्हावा शेवा कंटेनर ॲापरेशन असोसिएशन तर्फे कामबंद आंदोलन पुकारण्यात आलेय. यामाध्यमातून मोठा भ्रष्टाचार होत असल्याचा इशारा वाहतूकदरांनी दिलाय.
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संभल में बाग के पास बकरीद नमाज को लेकर ईदगाह बनाम निजी खेत विवाद

Sambhal, Uttar Pradesh:संभल। संभल में निजी आम के बाग में बकरीद की नमाज पढ़े जाने पर बखेड़ा... संभल में ईदगाह से सटे आम के बाग में बकरीद की नमाज पर विवाद... बाग मालिक हाजी मोहम्मद हफीज ने बाग में नमाज अदा किए जाने पर जताया कसार एतराज। बाग उनकी निजी संपत्ति, बिना उनकी अनुमति के बाग में नमाज गलत... ईदगाह के चबूतरे पर ही हो नमाज। हाजी मोहम्मद हफीज ने बाग में नमाज पढ़े जाने पर नाराजगी जताते हुए उलेमा और ईदगाह कमेटी आने वक्त में नमाज के लिए जगह का खुद इंतजाम करे। हाजी मोहम्मद हफीज ने प्रशासन से दखल की मांग की... मुस्लिम उलेमाओं से भी शिकायत करने की बात कही। बाग मालिक हाजी मोहम्मद हफीज ने उलेमाओं पर चंदा इकट्ठा करने के ईद और अन्य मौकों पर अधिक भीड़ जुटाने का भी आरोप लगाया। ईद और अन्य मौकों पर नमाजियों की संख्या अधिक होने की वजह से नमाजी वर्षों से ईदगाह से सटे बाग में नमाज पढ़ते आ रहे हैं। ईद के मौके पर हजारों की संख्या में संभल शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों से लोग पहुंचकर ईदगाह से सटे बाग में नमाज पढ़ते हैं। संभल के हयातनगर थाना इलाके की बड़ी ईदगाह का मामला।
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104 वर्षीय सहीराम बिश्नोई का निधन, बिश्नोई समाज ने रत्न सम्मान की घोषणा की

Sirsa, Haryana:एंकर रीड सिरसा जिले के गांव सक्ताखेड़ा निवासी सही राम बिश्नोई का पिछले दिनों निधन हो गया। सही राम बिश्नोई 104 साल के थे। सही राम बिश्नोई 1957 में सिरसा जिला के साथ लगते पंजाब के अबोहर से पहली बार में चुनाव लड़कर विधायक बने थे। सही राम बिश्नोई पूर्व सीएम भजन लाल के समधी थे। सही राम बिश्नोई पिछले काफी समय से लंबी बीमारी से ग्रसित थे। अब 29 मई को अखिल भारतीय बिश्नोई समाज की तरफ से बिश्नोई रत्न का सम्मान दिया जाएगा। 29 मई को सही राम बिश्नोई की श्रद्धांजलि समारोह और रस्म क्रिया होगी जिसमें काफी संख्या में राजनेताओं और गणमान्य लोगों के आने की संभावनाएं है। बताना दे कि इससे पहले अब तक बिश्नोई समाज के तीन ही लोगों को ही बिश्नोई रत्न सम्मान मिल चुका है । इससे पहले पूर्व सीएम भजन लाल , पूर्व सांसद और पूर्व विधायक कुलदीप बिश्नोई को बिश्नोई रत्न सम्मान मिल चुका है । सही राम बिश्नोई के पोते सोम प्रकाश बिश्नोई ने जानकारी देते हुए कहा कि सन् 1957 में उन्होंने भारतीय जनसंघ के टिकट पर अबोहर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और विधायक निर्वाचित हुए। सादगी, संघर्ष, कृषि नवाचार और समाज सेवा की जीवित मिसाल थे। वोल 1 बताया जाता है कि हरियाणा के डबवाली क्षेत्र के गांव सकताखेड़ा की धरती से जुड़ा एक ऐसा व्यक्तित्व, जिसने एक सदी से अधिक समय तक समाज सेवा, राष्ट्रभक्ति, कृषि विकास, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय मूल्यों की अलख जगाई थी। 104 वर्ष 4 माह 10 दिन की लंबी आयु पूर्ण कर 22 मई 2026 को उन्होंने इस संसार को अलविदा कह गए है। सही राम बिश्नोई अपने पीछे संघर्ष, सादगी, सेवा और प्रेरणा की ऐसी विरासत छोड़ गए, जो आने वाली पीढ़ियों को सदैव मार्ग दिखाती रहेगी। अखंड भारतवर्ष के कोहिनूर, बिश्नोई समाज के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, सेवक दल के संस्थापक, हिंदी आंदोलन सेनानी, जनसंघ के पूर्व विधायक, कृषि नवाचार के समर्थक और पर्यावरण प्रेमी एडवोकट सहीराम बिश्नोई केवल एक नेता नहीं थे, बल्कि एक विचारधारा, एक संस्कार और एक युग की पहचान थे। सोम प्रकाश बिश्नोई ने बताया कि दादाजी सही राम बिश्नोई का जन्म उस दौर में हुआ था जब भारत अंग्रेजी शासन के अधीन था। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन की चेतना, देश विभाजन की पीड़ा, संयुक्त पंजाब का दौर और हरियाणा निर्माण तक का इतिहास अपनी आंखों से देखा। ग्रामीण परिवेश में जन्म लेने के बावजूद उन्होंने शिक्षा को महत्व दिया और आगे चलकर कानून की पढ़ाई कर वकालत के क्षेत्र में कदम रखा। वे गरीबों और जरूरतमंदों की सहायता को अपना कर्तव्य मानते थे। उनका मानना था कि समाज की असली ताकत गांव, किसान और आम जनता होती है। यही कारण था कि उनका जीवन हमेशा जमीन से जुड़ा रहा। 1946-47 में सेवक दल की स्थापना देश विभाजन से पहले ही उन्होंने समाज सेवा को संगठित रूप देने का संकल्प लिया। वर्ष 1946-47 में संयुक्त भारत में “सेवक दल” की स्थापना की गई, जिसका पंजीकरण फरवरी 1947 में लाहौर में हुआ। उस समय देश अशांति और विभाजन की परिस्थितियों से गुजर रहा था, लेकिन दादाजी समाज में भाईचारा, अनुशासन और सेवा भावना को मजबूत करने में जुटे रहे। उन्होंने युवाओं को यह संदेश दिया कि सच्चा जीवन वही है जो समाज और मानवता के काम आए। विभाजन के दौर में मानवता की मिसाल 1947 का विभाजन मानव इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक था। लाखों लोग उजड़ गए, परिवार बिछड़ गए और चारों ओर भय का माहौल था। ऐसे कठिन समय में सहीराम बिश्नोई मानवता के साथ खड़े रहे। उन्होंने अनेक परिवारों और 36 बिरादरी के लोगों को सुरक्षित भारत पहुंचाने और बसाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे जाति, धर्म और राजनीति से ऊपर उठकर इंसानियत को सबसे बड़ा धर्म मानते थे। राजनीति में सेवा और सिद्धांतों की पहचान सन् 1957 में उन्होंने भारतीय जनसंघ के टिकट पर अबोहर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और विधायक निर्वाचित हुए। उस दौर में राजनीति सेवा और विश्वास का माध्यम मानी जाती थी। विधायक बनने के बाद भी उन्होंने सादगी नहीं छोड़ी। वे हमेशा सामान्य Rural व्यक्ति की तरह रहे। न कोई दिखावा, न सत्ता का अहंकार और न विशेष सुविधाओं की चाह रखी थी। वे हर व्यक्ति से आत्मीयता और सम्मान के साथ मिलते थे। चाहे गरीब किसान हो, मजदूर हो या बड़ा अधिकारी सबको समान सम्मान देना उनका संस्कार था。 हिंदी आंदोलन में सक्रिय भूमिका और जेल यात्रा सोम प्रकाश बिश्नोई ने बताया कि दादाजी हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति के प्रबल समर्थक थे। 1958 के हिंदी आंदोलन में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई और संघर्ष करते हुए जेल यात्रा भी की। वे मानते थे कि मातृभाषा और राष्ट्रभाषा समाज की आत्मा होती है। उन्होंने जीवनभर हिंदी, भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों के संरक्षण की आवाज उठाई। दादाजी केवल सामाजिक और राजनीतिक व्यक्ति ही नहीं थे, बल्कि कृषि क्षेत्र की गहरी समझ रखने वाले प्रगतिशील किसान भी थे। उन्होंने खेती में नवाचार, आधुनिक सोच और किसानों को नई तकनीकों की ओर प्रेरित करने का कार्य किया। उस दौर में जब पारंपरिक खेती ही सामान्य मानी जाती थी, तब वे कृषि सुधार और उत्पादकता बढ़ाने की बात करते थे। वे किसानों को आत्मनिर्भर बनने, जल संरक्षण और खेती में वैज्ञानिक सोच अपनाने के लिए प्रेरित करते थे। ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि विकास को वे राष्ट्र निर्माण का आधार मानते थे। दादाजी सही राम बिश्नोई ने क्षेत्र में नहर परियोजनाओं और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे अच्छी तरह समझते थे कि किसान की समृद्धि पानी से जुड़ी है। इसलिए उन्होंने क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था मजबूत करने और किसानों तक नहरी पानी पहुंचाने के प्रयासों में सक्रिय योगदान दिया। ग्रामीण विकास और खेती की मजबूती के लिए उनका यह योगदान आज भी लोगों द्वारा सम्मान के साथ याद किया जाता है。 पर्यावरण और पौधारोपण के प्रति समर्पण सोम प्रकाश बिश्नोई ने बताया कि दादाजी सही राम बिश्नोई प्रकृति प्रेमी और पर्यावरण संरक्षण के समर्थक थे। उन्होंने जीवनभर पौधारोपण और हरियाली को बढ़ावा देने का संदेश दिया। वे मानते थे कि पेड़ केवल प्रकृति की शोभा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य हैं। गांवों में वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने में उनकी विशेष रुचि रहती थी। उनका जीवन बिश्नोई समाज की प्रकृति संरक्षण की परंपरा का भी सुंदर उदाहरण था। दादाजी की सबसे बड़ी पहचान थी — सादगी, ईमानदारी और अपना कार्य स्वयं करना। उन्होंने जीवनभर कभी पद, प्रतिष्ठा या सत्ता का प्रदर्शन नहीं किया। वे स्वयं अनुशासित जीवन जीते थे और दूसरों को भी मेहनत, ईमानदारी और आत्मनिर्भरता की प्रेरणा देते थे। उनकी आत्मीयता ऐसी थी कि जो भी उनसे मिलता, उन्हें परिवार के बुजुर्ग की तरह सम्मान देता था। नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा 104 वर्षों से अधिक का उनका जीवन केवल लंबी आयु का उदाहरण नहीं, बल्कि आदर्श जीवन का प्रतीक था। उन्होंने अपने जीवन से यह संदेश दिया कि सेवा सबसे बड़ा धर्म है। सादगी सबसे बड़ा आभूषण है .ईमानदारी सबसे बड़ी पूंजी है। समाज के लिए जिया गया जीवन ही सबसे सफल जीवन होता है。 श्रद्धांजलि सभा दादाजी की पावन स्मृति में 29 मई 2026, शुक्रवार को उनके निवास स्थान गांव सकताखेड़ा (डबवाली), हरियाणा में श्रद्धांजलि सभा एवं स्मृति समारोह आयोजित किया जाएगा। समाज, राजनीति और विभिन्न संगठनों से जुड़े लोग उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे。 दादाजी सहीराम बिश्नोई का निधन केवल एक व्यक्ति का निधन नहीं, बल्कि एक ऐसे युग का अंत है जिसमें राजनीति सेवा थी, समाज परिवार था और चरित्र सबसे बड़ी पहचान माना जाता था। वे भले आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, संस्कार, संघर्ष और प्रेरणाएं सदैव जीवित रहेंगी। “एक युग का अंत नहीं… प्रेरणाओं की अमर शुरुआत है।” बाइट सोम प्रकाश बिश्न्नोई , पोता।
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दिल्ली के द्वारका में पानी किल्लत, लोगों ने प्रदर्शन कर मांगी राहत

New Delhi, Delhi: राजधानी दिल्ली के निशांत पार्क और ककरोला हाउसिंग कॉम्प्लेक्स में पिछले करीब दो महीनों से पानी की भारी किल्लत बनी हुई है। इलाके के लोगों का आरोप है कि घरों में नियमित रूप से पानी नहीं पहुंच रहा, जिससे रोजमर्रा की जिंदगी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। लगातार बढ़ती गर्मी के बीच पानी की समस्या ने लोगों की परेशानियां और बढ़ा दी हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया। लोगों के अनुसार पानी के टैंकर तो भेजे जा रहे हैं, लेकिन अधिकांश घरों में बुजुर्ग लोग रहते हैं, जो टैंकरों से पानी भर पाने में असमर्थ हैं। ऐसे में कई परिवारों को पीने और घरेलू उपयोग के लिए भी पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। समस्या से नाराज लोगों ने आज इलाके में विरोध प्रदर्शन किया और “पानी दो, पानी दो” के नारे लगाकर प्रशासन के खिलाफ अपना रोष जताया। प्रदर्शन में महिलाओं और बुजुर्गों ने भी हिस्सा लिया।
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बेनीवाल के जयपुर कूच से रीको रोक, एक माह में कमेटी रिपोर्ट सौंपेगी

Dudu, Rajasthan:दूदू (जयपुर) भैराणा धाम बचाओ को लेकर आरएलपी सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल के जयपुर कूच के काफिले को पुलिस ने जयपुर अजमेर हाईवे से पहले मौखमपुरा में रोका। रात 1:30 बजे प्रशासन और बेनीवाल के बीच बनी सहमति। कलेक्टर संदेश नायक ने की समझाइश, रीको निरस्त को लेकर साधू संत और अधिकारियों की बनेगी संयुक्त कमेटी। कमेटी सरकार को सौंपेगी रिपोर्ट, साधू संतों की मौजूदगी में बनी सहमति। कलेक्टर ने एक माह तक का मांगा समय, कमेटी की रिपोर्ट आने तक रीको का कार्य रहेगा बंद। सांसद हनुमान बेनीवाल निकले थे के लिए, हजारों की भीड़ पहुंच गईं थीं हाईवे पर। भैराणा धाम के पास रीको को निरस्त करने की मांग को लेकर बेनीवाल ने आर पार की लड़ाई की दी थी चेतावनी。 बाइट - हनुमान बेनीवाल, सांसद
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बांसवाड़ा में जमीन विवाद के चलते पति ने पत्नी की हत्या कर दी

Banswara, Rajasthan:एंकर - बांसवाड़ा शहर के कोतवाली थाना क्षेत्र में रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली सनसनीखेज वारदात सामने आई है। जमीन विवाद के चलते एक पति ने अपनी ही पत्नी की लोहे के कोह से हमला कर निर्मम हत्या कर दी। घटनाक्रम के बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया। जानकारी के अनुसार मृतका इतरी के नाम पर पीहर पक्ष की जमीन थी। आरोपी पति सूरज मईड़ा लंबे समय से जमीन अपने नाम करवाने का दबाव बना रहा था। इसी बात को लेकर दोनों के बीच लगातार विवाद चल रहा था। बताया जा रहा है कि आधी रात को विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपी ने गुस्से में आकर पत्नी पर लोहे के कोह से ताबड़तोड़ हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। सुबह परिजन घायल महिला को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद महिला के शव को अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया है। सूचना मिलते ही कोतवाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस ने हत्या के आरोपी पति सूरज मईड़ा को डिटेन कर पूछताछ शुरू कर दी है।
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उत्तराखंड जंगल आग के विवाद में विभाग बनाम ग्रामीण: मुकदमे की धमकी से राजनीतिक उथल-पुथल

Karnaprayag, Uttarakhand:एंकर उत्तराखंड में लगातार धधक रहे जंगलों के बीच अब वन विभाग के एक आदेश ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। आग बुझाने में सहयोग न करने पर ग्रामीणों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की चेतावनी के बाद उत्तराखंड में सियासत भी गरमा गई है। उत्तराखंड क्रांति दल खुलकर वन विभाग के खिलाफ उतर गया है। यूकेडी युवा प्रकोष्ठ के केंद्रीय अध्यक्ष आशीष नेगी ने कहा कि जो विभाग खुद जंगलों की रक्षा नहीं कर पा रहा, वह अब ग्रामीणों को डराने और मुकदमे की धमकी देने में जुटा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ग्रामीणों का उत्पीड़न बंद नहीं हुआ तो यूकेडी डीएफओ कार्यालय का घेराव करेगी。 प्रदेश में वनाग्नि की घटनाओं से पहाड़ धुएं की चादर में ढके हुए हैं। जंगलों में लगी आग से जहां वन संपदा को भारी नुकसान हो रहा है, वहीं पर्यावरण और लोगों की सेहत पर भी असर पड़ रहा है। इस बीच केदारनाथ वन्य प्रभाग के डीएफओ के उस बयान पर विवाद खड़ा हो गया है जिसमें आग बुझाने में सहयोग न करने वाले ग्रामीणों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की बात कही गई। कर्णप्रयाग में आयोजित कार्यक्रम के दौरान यूकेडी युवा प्रकोष्ठ के केंद्रीय अध्यक्ष आशीष नेगी ने वन विभाग पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मोटी तनख्वाह लेने वाले अधिकारी और कर्मचारी जंगलों को बचाने में नाकाम साबित हो रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारी तय करने के बजाय ग्रामीणों को डराया जा रहा है। नेगी ने कहा कि पहाड़ के लोग सदियों से जंगलों की रक्षा करते आए हैं और यदि वन विभाग से जंगल नहीं संभल रहे तो उन्हें ग्रामीणों के हवाले कर देना चाहिए। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि यदि वन विभाग ने ग्रामीणों को मुकदमों और धमकियों से परेशान किया तो उत्तराखंड क्रांति दल सड़कों पर उतरकर डीएफओ कार्यालय का घेराव करेगा।
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बीच रास्ते में खराब हुई रोडवेज बस, यात्रियों ने धक्का देकर सफर बचाया

Gohara Marufpur, Uttar Pradesh:बीच रास्ते में खराब हुई रोडवेज बस, यात्रियों ने लगाया धक्का कौशांबी जिले में रोडवेज बस खराब होने से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। फतेहपुर डिपो की बस बीच रास्ते में बंद हो गई, जिसके बाद यात्रियों को खुद बस में धक्का लगाना पड़ा। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है。 बताया जा रहा है कि फतेहपुर डिपो की रोडवेज बस फतेहपुर से प्रयागराज जा रही थी। जैसे ही बस सैनी बस स्टॉप के पास पहुंची, अचानक खराब होकर बीच सड़क पर खड़ी हो गई। बस खराब होते ही यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। काफी देर तक चालक और परिचालक बस को चालू करने की कोशिश करते रहे, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद यात्रियों ने खुद बस में धक्का लगाया。 घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें यात्री बस को धक्का लगाते दिखाई दे रहे हैं। बस खराब होने से यात्रियों को भीषण गर्मी में काफी देर तक परेशान होना पड़ा。
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राहुल गांधी के अल्मोड़ा दौरे से 14aid0 कांग्रेस का उत्साह बढ़ेगा

Almora, Uttarakhand:लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आगामी 4 जून के अल्मोड़ा दौरे की तैयारियों को लेकर कांग्रेस ने बैठक आयोजित की। बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, उत्तराखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा, विधायक, पूर्व विधायक, पूर्व सांसद और ब्लॉक स्तर के पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में राहुल गांधी की जनसभा को ऐतिहासिक बनाने के लिए दिशा-निर्देश दिए गए। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर जनसभा को सफल बनाने की अपील की। मीडिया से बातचीत में नेताओं ने कहा कि राहुल गांधी का अल्मोड़ा दौरा 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाएगा। नेताओं ने कहा कि प्रदेश की जनता स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान है। साथ ही भाजपा सरकार के 10 साल के कार्यकाल का मुद्दा भी जनता के बीच रखा जाएगा। नेताओं ने कहा कि राहुल गांधी के दौरे के साथ ही उत्तराखंड में 2027 विधानसभा चुनाव का बिगुल फूंक दिया गया है
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उत्तराधिकार प्रमाण पत्र के बिना भी दिवंगत किसानों के क्लेम तुरंत मिलेंगे

Jaipur, Rajasthan:प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में लंबित बीमा क्लेम मामलों को लेकर राहत की खबर है। दिवंगत किसानों के लंबित क्लेम अब बिना उत्तराधिकार प्रमाण पत्र के भी जारी किए जा सकेंगे। कृषि विभाग ने इसे लेकर एक परिपत्र जारी किया है। साथ ही कृषि आयुक्त ने केन्द्र सरकार को भी इस सम्बन्ध में पत्र लिखा है। यह रिपोर्ट देखिए- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत दिवंगत बीमित किसानों के लंबित फसल बीमा दावों के निस्तारण को लेकर राजस्थान सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। कृषि आयुक्तालय ने परिपत्र जारी कर बीमा कंपनियों और कृषि विभाग के अधिकारियों को लंबित मामलों के निस्तारण के निर्देश दिए हैं। इसमें कहा है कि दिवंगत किसानों के लंबित क्लेम मामलों का शीघ्र निस्तारण किया जाए, ताकि किसान परिवारों को राहत मिल सके। कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने परिपत्र में कहा है कि राज्य में बड़ी संख्या में ऐसे मामले लंबित हैं, जिनमें बीमित किसान की मृत्यु हो चुकी है और उत्तराधिकार प्रमाण पत्र के अभाव में बीमा राशि का भुगतान अटका हुआ है। विभाग के अनुसार उत्तराधिकार प्रमाण पत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया लंबी, खर्चीली और समय लेने वाली होती है। कई मामलों में फसल बीमा क्लेम की राशि इतनी कम होती है कि किसान परिवार उत्तराधिकार प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया में नहीं पड़ते। इससे वर्षों तक दावे लंबित रह जाते हैं। इसलिए कृषि विभाग ने प्रक्रिया को सरल बनाते हुए नई व्यवस्था लागू की है। विभाग ने सभी बीमा कंपनियों को निर्देशित किया है कि यदि राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल पर किसान द्वारा नामांकन यानी नॉमिनी दर्ज किया गया है तो उसी के आधार पर क्लेम राशि का भुगतान तुरंत किया जाए। पारिवारिक सहमति के आधार पर होगा भुगतान - यदि नॉमिनी दर्ज नहीं है, तब भी क्लेम भुगतान रोका नहीं जाएगा, ऐसे मामलों में संबंधित तहसीलदार या पटवारी द्वारा जारी वारिसनामा, न्यायालय द्वारा जारी वैध उत्तराधिकार प्रमाण पत्र अथवा पारिवारिक सहमति के आधार पर बीमा राशि का भुगतान किया जा सकेगा। यदि परिवार के सभी सदस्य किसी एक को क्लेम लेने के लिए अधिकृत कर देते हैं तो उस सदस्य के बैंक खाते में बीमा राशि जमा की जा सकेगी। 50 रुपए के स्टांप पारिवारिक सहमति शपथ पत्र प्रस्तुत करना होगा। दिवंगत बीमित किसान का मृत्यु प्रमाण पत्र देना होगा। उत्तराधिकार प्रमाण पत्र अथवा तहसीलदार/पटवारी द्वारा जारी वारिसनामा, भुगतान प्राप्त करने वाले सदस्य के बैंक खाते की प्रति या रद्द चेक, संबंधित सदस्य के आधार कार्ड की प्रति। विभागीय सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत राज्य में हजारों किसानों के दावे विभिन्न तकनीकी और दस्तावेजी कारणों से लंबित चल रहे थे। इनमें बड़ी संख्या दिवंगत किसानों से जुड़े मामलों की है। किसान संगठनों और जनप्रतिनिधियों द्वारा लगातार यह मांग उठाई जा रही थी कि छोटे क्लेम मामलों में उत्तराधिकार प्रमाण पत्र की अनिवार्यता समाप्त की जाए। कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने इसे लेकर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को भी पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने बीमा कंपनियों को निर्देशित करने का आग्रह किया है कि आगामी मौसम सत्रों में किसानों के बीमा के समय राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल पर नॉमिनी दर्ज करना अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए। विभाग का मानना है कि इससे भविष्य में इस प्रकार की समस्याओं से बचा जा सकेगा और दिवंगत किसानों के परिवारों को समय पर बीमा लाभ मिल सकेगा।
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उच्च स्तरीय कमिटी गठित, घुसपैठियों की पहचान कर मतदाता सूची से हटाने पर जोर

Patna, Bihar:Anchor केन्द्र सरकार के गृह मंत्रालय ने अवैध घुसपैठियों को लेकर एक उच्च स्तरीय कमिटी का गठन किया है.. सत्तापक्ष के लोग इसे एक बेहतर कदम करार देते हुए इसकी सराहना कर रहे हैं जबकि विपक्ष इसको लेकर कई सवाल खड़ा कर रहा है  ओपनिंग पीटीसी वी/ओ 1 हाई लेवल कमिटी ऑन डेमोग्राफिक चेंज का गठन 26 मई को आधिकारिक तौर पर किया गया है.. कमिटी एक महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट देगी और यदि जरूरत पड़ी तो कमिटी के कार्यकाल को छह महीने के लिए बढ़ाया जा सकता है.. इस कमिटी के गठन का स्वागत करते हुए बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी ने कहा कि इससे अपने देश के लोगों को यहां के संसाधन का उपयोग करने का लाभ मिलेगा और घुसपैठियों को डेढ़ से बाहर किया जाएगा यह बेहतर कदम है।बीजेपी ने भी इसकी सराहना की और कहा कि यह बेहद जरूरी था। बाइट 1 अशोक चौधरी,मंत्री बिहार सरकार  बाइट 2 रत्नेश कुशवाहा,बीजेपी विधायक वी/ओ 2 सत्ता पक्ष का कहना है कि घुसपैठ की वजह से कृत्रिम डेमोग्राफिक बदलाव एक बहुत बड़ी चुनौती है और इसे समय रहते दुरुस्त किया जाना बेहद जरूरी है वही विपक्ष का कहना है कि यह एक शगूफा है .. इससे पहले एसआईआर हुआ उसमें कितने घुसपैठिए मिले ? कांग्रेस और आरजेडी का कहना है कि देश के सामने जो चुनौतियां है रोजी रोटी की और आर्थिक स्थिति को इसको छोड़कर सरकार नए नए शगूफा और हिन्दू मुस्लिम में लगी रहती है बाइट 3 ऋषि मिश्रा, कांग्रेस नेता  बाइट 4 शक्ति यादव,आरजेडी प्रवक्ता बाइट अटैच है वी/ओ 3 सत्ता पक्ष का कहना है कि यह घुसपैठियों के खिलाफ कारगर पहल है इससे घुसपैठियों को चिन्हित कर उन्हें मतदाता सूची से हटाया जाएगा और उन्हें उनके देश वापस भेजा जाएगा वही विपक्ष सरकार के इस कमिटी गठन और सत्तापक्ष द्वारा दिए जा रहे बयान को लेकर कहा कि जब जब ये किसी बात का तर्क देते हैं कोई बड़ा निर्णय लेते है बाद में वह ढाक के तीन पात साबित होता है,विपक्ष ने कहा कि नोटबंदी समेत कई बड़े निर्णय इसके उदाहरण है लेकिन सरकार मूल समस्या से बचने के लिए शगूफा लाती है।
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