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झारखंड मंत्रिमंडल ने केंद्र से छात्रवृत्ति राशि बढ़ाने की मांग की, मोदी को पत्र

Noida, Uttar Pradesh:रांची- झारखंड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने पीएम मोदी को लिख कर कहा है , केंद्र सरकार से राज्य के मांग के अनुरुप छात्रों के छात्रवृत्ति की राशि नहीं मिल रही है। जिसके कारण राज्य के ओबीसी , एससी, एसटी के लाखों छात्रों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। इसको लेकर बयानबाजी भी होने लगी है। पीएम को पत्र लिख कर झारखंड के मुख्यमत्री हेमंत सोरम ने, झारखंड को केंद्र से मिलने वाली प्री और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति की राशि को अपर्याप्त बताते हुए केंद्र से मांग के अनुरुप नहीं बताया है। छात्रवृत्ति की राशि अपर्याप्त होने के कारण सुयोग्य छात्रों पर समय पर उपलब्ध कराने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा। पत्र में लिखा है 2024 में प्री मेट्रिक 66.14 करोड़ की मांग की है थी पर 12.61 करोड़ ही झारखंड को मिला। 2025 में प्री मेट्रिक 45.91 करोड़ की मांग की गई मिला 3.95 करोड़। 2024 में पोस्ट मैट्रिक 353.21 करोड़ की मांग किया गया मिला 33.57 करोड़ 2025 में पोस्ट मैट्रिक 340.87 करोड़ की मांग किया गया मिला 58.22 करोड़。 इसको लेकर झामुमो महासचिव विनोद पांडेय ने बताया ये राज्य के लिए बहुत महत्वपूर्ण विषय और मुद्दा है।बार बार केंद्र सरकार का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया गया है। मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्री के द्वारा केंद्र सरकार को लिखित मौखिक सभी तरह की सूचना दी गई उसके बावजूद जो राशि केंद्र से राज्य को छात्रवृत्ति से संबंधित मिलना चाहिए जिससे एससी, एसटी और अल्पसंख्यक बच्चों को मिलती है वो राशि केंद्र सरकार के द्वारा उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। निश्चित रुप से जो लाभ छात्रों को मिलना चाहिए वो नहीं दे पाती है। राज्य सरकार के पास सीमित संसाधन है ,राज्य सरकार अपने पैसे से देने का प्रयास करती है पर कुछ मिलता उससे छात्रों का काम नहीं चलेगा। केंद्र सरकार का रवैया छात्रों के प्रति सही नहीं है इस लिए सीएम ने फिर से केंद्र सरकार और पीएम को पत्र लिखा है ताकि राशि तत्काल उपलब्ध करवाया जाए。 बाइट ...विनोद पांडेय, महासचिव, झामुमो कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता राकेश सिंहा ने कहा, सीएम ने ये पत्र नहीं लिखा है बल्कि झारखंड के छात्र की भावनाओं को कलमबद्ध किया है। पीएम के संज्ञान में देने का काम किया है। छात्रवृत्ति वर्षों से यहां लंबित है और उसका मूल कारण है कि केंद्र सरकार के द्वारा छात्रवृत्ति के मद में जो अंशदान मिलता है वो आज तक अंशदान केंद्र सरकार ने नहीं दिया है। राज्य सरकार ने अपना हिस्सा दिया ,पर जब तक केंद्र से राशि नहीं मिलेगी छात्रवृत्ति रिलीज नहीं होती। लगातार राज्य सरकार पीएम से मांग कर रही है कि राज्य के बच्चों के भविष्य के लिए छात्रवृत्ति का भुगतान करें। पीएम को पत्र लिखा गया है पीएम संज्ञान लेंगें बाइट ...राकेश सिंहा, प्रदेश प्रवक्ता, कांग्रेस बीजेपी विधायक सीपी सिंह ने कहा, सीएम ने पीएम को क्या पत्र लिखा जानकारी नहीं, पर कोई भी राज्य सरकार अपने यहां से कुछ कुछ डिमांड करती रहती है।स्वाभाविक है, वैसी स्थिति में सीएम ने जो पत्र लिखा है यदि केंद्र सरकार के अंदर की बात होगी और नियमानुकूल होगी तो केंद्र सरकार, राज्य सरकार को राशि दिया करती है। पर झारखंड सरकार की बात पर इस लिए विश्वास नहीं होता है कि ये एजेंडा फैलाते हैं। पिछले इलेक्शन में भी एक लाख 36 हजार करोड़ के बकाए की बात आती थी , अब उसकी डिमांड नहीं हो रही। जनता को बरगलाने और मूर्खो बनाने के लिए नैरेटिव और एजेंडा सेट होता है। केंद्र सरकार , कोई भी राशि का मामला हो किसी राज्य के साथ भेद भाव नहीं करती है。 बाइट ...सीपी सिंह, विधायक बीजेपी बाइट ...नबीन जायसवाल, विधायक, बीजेपी
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झारखंड कांग्रेस ने के एन त्रिपाठी के बयान पर शोक जताकर जवाब मांगा

Ranchi, Jharkhand:झारखंड कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री के एन त्रिपाठी को कांग्रेस पार्टी ने शोकॉज किया। राज्य सरकार के खिलाफ बयान देने के कारण पार्टी ने शोकॉज किया है। पार्टी ने के एन त्रिपाठी के बयान को गंभीरता से लेते हुए 7 दिनों के अंदर जवाब मांगा है। के एन त्रिपाठी को कहा गया राज्य में गठबन्धन की सरकार चल रही ऐसे में आपके बयान से सरकार की छवि धूमिल हुई। वहीं इसको लेकर बयानबाजी भी सुनाई देने लगा है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा लोकप्रिय मुख्यमंत्री के बारे में इस तरह का बयान ठीक नहीं है। बाइट ...राकेश सिंहा, प्रदेश प्रवक्ता बाइट ...इरफान अंसारी, मंत्री बाइट ...सी पी सिंह, विधायक, बीजेपी
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झारखंड आंदोलनकारी बेसरा ने JPSC-JSSC में भ्रष्टाचार की CBI जांच की मांग की

Ranchi, Jharkhand:झारखंड आंदोलनकारी सूर्य सिंह बेसरा ने प्रेस वार्ता में JPSC-JSSC में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने JPSC मामले की CBI जांच की मांग करते हुए कहा कि छात्रों के उलगुलान आंदोलन को उनका नैतिक समर्थन है और सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए。 बेसरा ने आरोप लगाया कि JPSC में कथित तौर पर नौकरी बेचने का खेल हुआ है और इसकी निष्पक्ष जांच केवल CBI ही कर सकती है। उन्होंने JPSC अध्यक्ष के साथ अन्य सदस्यों के इस्तीफे, मामले की निष्पक्ष जांच और प्रभावित छात्रों को मुआवजा देने की मांग की。 उन्होंने छात्रों से आंदोलन को पूरी तरह गैर-राजनीतिक रखने की अपील करते हुए कहा कि राजनीतिक हस्तक्षेप से आंदोलन कमजोर होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि झारखंड में व्यवस्था परिवर्तन की जरूरत है और भविष्य में युवाओं को नेतृत्व संभालना चाहिए।
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गाजियाबाद में कांवड़ यात्रा के दौरान तनाव के बाद पुलिस ने शांति बनायी

Ghaziabad, Uttar Pradesh:गाजियाबाद के मधुबन बापूधाम थाना क्षेत्र में गुलधर के पास हरिद्वार से गंगाजल लेकर राजस्थान के भरतपुर स्थित अपने गांव जा रहे एक कांवड़िए की कांवड़ कथित तौर पर इमरान नामक व्यक्ति के संपर्क में आकर छू गई। इस घटना के बाद मौके पर कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बन गई। सूचना मिलते ही पुलिस की पैदल गश्तटीम और मधुबन बापूधाम थाना प्रभारी तत्काल मौके पर पहुंचे। पुलिस ने दोनों पक्षों को शांत कराया और कांवड़िए की धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए उसकी कांवड़ को दोबारा विधि-विधान से तैयार कराने में सहयोग किया। पुलिस की त्वरित कार्रवाई और समझदारी से मामला शांतिपूर्ण ढंग से सुलझ गया। इसके बाद कांवड़िया अपनी यात्रा दोबारा शुरू कर सुरक्षित अपने गंतव्य की ओर रवाना हो गया। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पुलिस के अनुसार कावड़िए को गंगा जल और नई कावड़ की व्यवस्था पुलिस द्वारा करवा दी गई और समझ बुझाकर आगे रवाना किया गया । पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी वायरल वीडियो या अपुष्ट जानकारी के आधार पर अफवाह न फैलाएं और शांति एवं सौहार्द बनाए रखें।
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भागलपुर बाढ़: नाव बनाकर लोग खुद बचाव की योजना बनाते हैं

Naya Chak, Bihar:एंकर- भागलपुर में बाढ़ अब सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की हर साल दोहराई जाने वाली मजबूरी बन चुकी है। गंगा और कोसी का बढ़ता जलस्तर जैसे ही खतरे का संकेत देता है, वैसे ही नदी किनारे बसे गांवों में डर और चिंता का माहौल पसर जाता है। जिन लोगों के लिए बारिश खुशहाली लेकर आती है, उन्हीं के लिए यहां मानसून अपने साथ तबाही का संदेश लेकर आता है। प्रशासन अपनी ओर से बाढ़ पूर्व तैयारियों का दावा जरूर करता है, लेकिन नदी किनारे बसे कई गांवों तक राहत और संसाधन समय पर नहीं पहुंच पाते। ऐसे में इन गांवों के लोगों ने हालात से लड़ना सीख लिया है। वे जानते हैं कि बाढ़ आएगी, घर डूबेंगे, रास्ते कटेंगे और कई दिनों तक दुनिया से संपर्क टूट जाएगा। इसलिए वे किसी मदद का इंतजार नहीं करते, बल्कि अपनी जिंदगी बचाने की तैयारी खुद शुरू कर देते हैं। हम पहुंचे सबौर प्रखंड के बाढ़ प्रभावित इलाके रजंदीपुर, जहां इन दिनों हथौड़ों की आवाज और लकड़ी की खुशबू के बीच जीवन बचाने की उम्मीद तैयार हो रही है। यहाँ लोग नाव बना रहे हैं। यही नाव बाढ़ के दिनों में बच्चों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाती है, बुजुर्गों का सहारा बनती है, बीमारों को अस्पताल तक ले जाती है और परिवारों को जिंदगी से जोड़े रखती है। बाबूपुर से ममलखा और घोघा तक दर्जनों गांव हर साल जलमग्न हो जाते हैं। इसलिए यहां के लोग बाढ़ आने से पहले ही जरूरी सामान समेट लेते हैं, मवेशियों की व्यवस्था करते हैं और परिवार को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की योजना बना लेते हैं। लेकिन इन सारी तैयारियों के बीच सबसे बड़ी जरूरत होती है एक मजबूत नाव की। रजंदीपुर में एक नाव तैयार करने में लगभग एक महीने का समय लगता है और इसकी लागत एक से दो लाख रुपये तक पहुंच जाती है। आर्थिक बोझ होने के बावजूद लोग इसे खर्च नहीं, बल्कि अपने परिवार की सुरक्षा में किया गया निवेश मानते हैं। बाढ़ के दौरान प्रशासन की ओर से भी नाव उपलब्ध कराई जाती है, लेकिन प्रभावित गांवों और लोगों की संख्या इतनी अधिक होती है कि हर जरूरतमंद तक समय पर मदद पहुंच पाना संभव नहीं हो पाता। यही कारण है कि यहां के लोग अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी जिम्मेदारी खुद उठाते हैं।
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केंदुआडीह धंसान के लिए 30 मीटर गहरी वैज्ञानिक खुदाई; SOP पूरी

Dhanbad, Jharkhand:धंनबाद-बोकारो की लाइफलाइन मानी जाने वाली केंदुआडीह की धंसान प्रभावित सड़क की वास्तविक स्थिति जानने के लिए अब लगभग 30 मीटर गहराई तक वैज्ञानिक तरीके से खुदाई की जाएगी। खुदाई के बाद ही यह तय होगा कि सड़क भविष्य में आम लोगों और वाहनों की आवाजाही के लिए पूरी तरह सुरक्षित है या नहीं। इस पूरी प्रक्रिया के लिए IIT-ISM, CSIR-CIMFR, DGMS और BCCL के विशेषज्ञों ने विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार कर ली है। SOP के अनुसार पुराने भूमिगत खनन के नक्शों के अध्ययन से पता चला है कि राष्ट्रीयकरण से पहले केंदुआडीह क्षेत्र के नीचे 13वें कोयला सीम में खनन किया गया था। यह खनन क्षेत्र सड़क के नीचे लगभग 30 मीटर की गहराई और लगभग 45 मीटर के दायरे में फैला हुआ है। इसी वजह से वैज्ञानिक तरीके से खुदाई कर पूरी स्थिति का आकलन किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर खुदाई के दौरान नियंत्रित ब्लास्टिंग भी की जाएगी। ब्लास्टिंग से पहले 500 मीटर तक सुरक्षा घेरा बनाया जाएगा और इस दायरे में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाएगा। सुरक्षा सुनिश्चित होने के बाद ही विस्फोट की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। उपायुक्त आदित्य रंजन ने बताया कि SOP के आधार पर खुदाई के निर्देश दे दिए गए हैं। खुदाई पूरी होने के बाद BCCL विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत जांच की जाएगी। यदि भविष्य में किसी प्रकार के खतरे की संभावना नहीं पाई गई, तो उसके बाद ही सड़क निर्माण एजेंसी RCD को सड़क पुनर्निर्माण का कार्य शुरू करने की अनुमति दी जाएगी।
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