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Vikas ChaudharyVikas ChaudharyFollow24 Jan 2025, 12:56 pm

Basti: युवा कांग्रेस और NSUI की बैठक, पंचायत चुनाव में युवाओं की भूमिका पर चर्चा

Basti, Uttar Pradesh:

बस्ती में युवा कांग्रेस और NSUI की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई जिसमें आगामी पंचायत चुनाव में युवाओं की भूमिका पर चर्चा की गई। जिला प्रभारी सीपी राय ने कहा कि युवा कांग्रेस पंचायत चुनाव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेगी। NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष ऋषि यादव ने बताया कि छात्र संघ चुनाव के लिए नए सत्र से भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन चरणबद्ध तरीके से आंदोलन करेगा। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ज्ञानेंद्र पांडे ने कहा कि कांग्रेस पार्टी पूरी मजबूती के साथ अपने युवा नेताओं के साथ खड़ी है। युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुधीर यादव ने कहा कि युवा कांग्रेस जनपद में युवाओं के मुद्दों पर संघर्ष कर रही है और जुल्म व अत्याचार के खिलाफ डटकर खड़ी रहेगी।

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कश्मीर के दिव्यांग नागरिकों को मुफ्त कृत्रिम अंग, सेना की सामुदायिक सहायता पहल

Chaka, भारतीय सेना ने उत्तरी कश्मीर में दिव्यांग नागरिकों के लिए मुफ्त कृत्रिम अंग (artificial limb) लगाने के अभियान चलाए हैं, जिससे उन्हें फिर से चलने-फिरने की क्षमता और सम्मानजनक जीवन जीने کا अवसर मिला है। सुरक्षा और सामाजिक कल्याण के प्रति अपनी دوहरी प्रतिबद्धता को निभाते हुए, भारतीय सेना ने कश्मीर में दिव्यांग नागरिकों को मुफ्त कृत्रिम अंग उपलब्ध कराने और पुनर्वास (rehabilitation) में मदद करने के लिए विशेष सामुदायिक सहायता कार्यक्रम आयोजित किए। लोगों से जुड़ने की अपनी व्यापक पहल के तहत, सेना ने दूर-दराज और सुविधाओं से वंचित इलाकों तक उन्नत कृत्रिम अंग (prosthetic) सेवाएं पहुंचाई हैं। इससे उन लोगों को, जिन्होंने अपने अंग खो दिए हैं, फिर से चलने-फिरने की आजादी, आत्मनिर्भरता और जीवन जीने का एक नया मकसद मिला है। कश्मीर के कुछ हिस्सों में आतंकवाद-विरोधी अभियानों के लिए जिम्मेदार भारतीय सेना ने हमेशा अपने सैन्य कार्यों के साथ-साथ स्थानीय समुदायों का भरोसा जीतने और उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने के प्रयासों के बीच संतुलन बनाए रखा है। इन प्रयासों में, कृत्रिम अंग लगाने वाले शिविर (camps) विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इनका लोगों के जीवन पर गहरा और सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। विशेषज्ञ चिकित्सा टीमों, प्रोस्थेटिस्ट (कृत्रिम अंग विशेषज्ञ) और सहयोगी संस्थाओं के साथ मिलकर आयोजित इन शिविरों में, लाभार्थियों को पूरी तरह से मुफ्त सेवाएं दी जाती हैं। चिकित्सा कर्मियों की टीमें लाभार्थियों की जांच करती हैं, जिसमें उनके बचे हुए अंगों की स्थिति, सामान्य स्वास्थ्य और उनकी जरूरतों का आकलन किया जाता है। दुर्घटनाओं, मधुमेह (diabetes) जैसी बीमारियों या अन्य कारणों से अंग खोने वाले पात्र व्यक्तियों के अंगों की विस्तृत माप ली जाती है और उनके लिए सांचे (casting) तैयार किए जाते हैं। घुटने के नीचे या ऊपर के कृत्रिम अंग, और कुछ मामलों में हाथों के कृत्रिम अंग भी, मौके पर या सहयोगी केंद्रों के माध्यम से तैयार या समायोजित (adjust) किए जाते हैं। इन्हें उसी शिविर में या बाद के सत्रों में लाभार्थियों को लगा दिया जाता है। केवल कृत्रिम अंग लगाने के अलावा, इन कार्यक्रमों में अन्य जरूरी सहायता भी शामिल है। लाभार्थियों को अपने नए अंगों के सही इस्तेमाल और उनकी देखभाल का प्रशिक्षण दिया जाता है। साथ ही, बचे हुए अंगों को मजबूत बनाने और चलने के तरीके में सुधार के लिए फिजियोथेपि की सलाह दी जाती है। इसके अलावा, उन्हें मानसिक और सामाजिक रूप से नई स्थिति के अनुकूल ढलने में मदद करने के लिए काउंसलिंग भी दी जाती है। इन कार्यक्रमों में फॉलो-अप की व्यवस्था भी है, ताकि समय के साथ अंगों में होने वाले बदलावों या बच्चों के बड़े होने पर, कृत्रिम अंगों में जरूरी सुधार, मरम्मत या उन्हें बदलने का काम किया जा सके। ये मुफ्त सेवा अभियान उन इलाकों में विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहे हैं, जहां भौगोलिक स्थिति, अधिक खर्च या बुनियादी ढांचे की कमी के कारण लोगों को आर्थोपेडिक (हड्डी रोग) और कृत्रिम अंग संबंधी विशेष सेवाएं आसानी से नहीं मिल पाती थीं। दूर-दराज के अस्पतालों ή निजी क्लीनिकों तक जाने के लिए लंबी और महंगी यात्रा करने के बजाय, लोगों के पास ही सेवाएँ पहुँचाकर, भारतीय सेना ने कई परिवारों के सामने आने वाली बड़ी बाधाओं को दूर किया है। इन शिविरों में किसान, मजदूर, छात्र, गृहिणियाँ और बुजुर्ग शामिल हुए हैं, जिन्हें पहले आने-जाने, रोजगार, शिक्षा और रोजमर्रा के कामों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। शिबिरों में काम करने वाले सेना के जवान अक्सर बताते हैं कि यह काम उनकी सेवा के सबसे संतोषजनक हिस्सों में से एक है। अधिकारी और सैनिक लॉजिस्टिक्स, भीड़ प्रबंधन, उपकरणों और लाभार्थियों को लाने-ले जाने, तथा शिविर के बाद फॉलो-अप में मदद करते हैं, जबकि विशेषज्ञ प्रोस्थेटिक तकनीशियन क्लिनिकल और तकनीकी काम संभालते हैं। सालों तक बैसाखियों, परिवार के सहारे या घर तक सीमित रहने के बाद, किसी व्यक्ति को बिना किसी सहारे के अपने पहले कदम उठाते देखना एक बड़ा बदलाव है। यह इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे सेना सामुदायिक विकास में एक साझेदार की भूमिका निभाती है। ये कार्यक्रम सेना की व्यापक नागरिक सहायता पहल का हिस्सा हैं, जिसमें मेडिकल कैंप, शैक्षिक सहायता, युवाओं को जोड़ना और बुनियादी ढांचे में मदद करना शामिल है। सेना के अधिकारियों ने हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि ऐसी पहल सुरक्षा बलों और स्थानीय लोगों के बीच के रिश्ते को मजबूत करती है, जिससे एक अधिक स्थिर और प्रगतिशील माहौल बनता है। लाभार्थी और उनके परिवार अक्सर गहरा आभार व्यक्त करते हैं। वे इन मुफ्त कृत्रिम अंगों (artificial limbs) को केवल मेडिकल उपकरण नहीं मानते, बल्कि इन्हें एक ऐसा साधन मानते हैं जो लोगों को उनका सम्मान और आत्मनिर्भरता वापस दिलाता है, जिससे वे अपने घर और समाज के जीवन में योगदान दे पाते हैं। इन विशेष सामुदायिक सहायता पहलों के जरिए, भारतीय सेना लगातार यह दिखा रही है कि इस क्षेत्र में उसकी मौजूदगी केवल ऑपरेशनल ड्यूटी तक ही सीमित नहीं है।
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अग्निवीरों को महाराष्ट्र पुलिस में भर्ती, तटीय सुरक्षा मजबूत करने का मुख्यमंत्री का दावा

Noida, Uttar Pradesh:नागपुर: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, 'अग्निवीरों ने गहन प्रशिक्षण लिया है और वे शॉर्ट-सर्विस कमीशन के तहत सेवा दे रहे हैं। महाराष्ट्र सरकार ने फैसला किया है कि जो भी अग्निवीर महाराष्ट्र पुलिस में शामिल होना चाहेंगे, उन्हें बल में भर्ती कर लिया जाएगा। हमें जो पहला बैच मिला, वह नौसेना (नेवी) से था, और हमने उन सभी को अपने तटीय सुरक्षा विंग में शामिल कर लिया है। इससे हमारी तटीय सुरक्षा मजबूत होगी, क्योंकि उन्हें गहन प्रशिक्षण मिला है; उन्होंने सीमाओं पर और कठिन इलाकों में सेवा दी है। उनके बेहतरीन प्रशिक्षण को देखते हुए, मुझे लगता है कि यह दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद रहा है, और हमने इन सभी अग्निवीरों को सफलतापर्व अपनी फोर्स में शामिल कर लिया है। आगे चलकर, हम सेना (आर्मी) और वायु सेना (एयर फोर्स) के अग्निवीरों को भी अपनी पुलिस फोर्स में शामिल होने के अवसर जरूर देंगे।
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मध्यप्रदेश कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर घमासान, जीतू पटवारी पर नया टकराव

Bhopal, Madhya Pradesh:भोपाल मध्यप्रदेश कांग्रेस में मुख्यमंत्री की दावेदारी को लेकर आपस में खींचतान मीडिया विभाग अध्यक्ष मुकेश नायक के बयान पर केदार सिरोही ने जताई आपत्ति कांग्रेस किसान प्रकोष्ठ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष केदार सिरोही ने सोशल मीडिया पर लिखा बिना किसी संगठनात्मक प्रक्रिया या आधिकारिक फैसले के जीतू पटवारी जी को 2028 के लिए मुख्यमंत्री पद का दावेदार प्रोजेक्ट कर दिया गया बिना किसी विधायक दल की बैठक या शीर्ष नेतृत्व के निर्देश के इस तरह की बयानबाजी करना पार्टी के आंतरिक लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं जीतू पटवारी वर्तमान में हमारे प्रदेश अध्यक्ष हैं और संगठन के लिए मेहनत कर रहे हैं, इसमें कोई दो राय नहीं जीतू पटवारी से केदार सिरोही ने की मांग एक जिम्मेदार नेतृत्व का तकाजा ये भी है कि इस तरह के असंवैधानिक और समय से पहले उछाले गए बयानों का वे स्वयं आगे आकर खंडन करें अगर इस प्रकार के बयानों पर चुप्पी साधी तो कार्यकर्ता इसे केवल एक प्रायोजित प्रचार लगेगा व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को पार्टी के संविधान और रीति-नीति से ऊपर रखने का यह तरीका पूरी तरह से गलत इस तरह के बयानों का विरोध होना चाहिए मुकेश नायक ने मीडिया में कहा था सरकार ने जो प्लेन लिया है वो जीतू पटवारी के लिए है सरकार को धन्यवाद....क्योंकि एक साल सरकार प्लेन चला पाएगी उसके बाद मुख्यमंत्री जीतू पटवारी बनेंगे फिर उसमें वो बैठेंगे
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बस्ती में शिक्षकों के वोटिंग से पुरानी पेंशन बहाली और अधिकारों पर सियासत तेज

Basti, Uttar Pradesh:बस्ती में स्नातक एमएलसी चुनाव को लेकर शिक्षक मतदाताओं में उत्साह देखने को मिल रहा है। लोकतंत्र के इस पर्व में शिक्षक अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं, लेकिन इस चुनाव में सिर्फ प्रत्याशी का चयन ही नहीं, बल्कि शिक्षकों के भविष्य और उनके अधिकारों से जुड़े मुद्दे भी अहम बने हुए हैं। पुरानी पेंशन योजना, शिक्षकों की समस्याएं और उनके हितों की रक्षा जैसे मुद्दों को लेकर शिक्षक मतदाता अपनी प्राथमिकताएं तय कर रहे हैं। बस्ती नगर पालिका परिषद स्थित मतदान केंद्र पर सुबह से ही मतदान के लिए शिक्षकों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। 14 ब्लॉकों में एमएलसी का चुनाव जारी।12 बजे तक 57.2 प्रतिशत मतदान हुआ, जनपद में कुल मतदाताओं की संख्या 2045 है जिनमें से 1643 पुरुष और 402 महिला मतदाता अपने मताधिकार का करेंगे प्रयोग। 12 बजे तक 1170 मतदाताओं ने किया अपने मताधिकार का प्रयोग। स्नातक एमएलसी चुनाव को लेकर बस्ती में शिक्षक मतदाताओं के बीच खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। शिक्षक अपने मताधिकार के प्रयोग कर अपनी पसंद के प्रत्याशी के पक्ष में मतदान कर रहे हैं। इसी क्रम में नगर पालिका परिषद स्थित मतदान केंद्र पर भी सुबह से शिक्षक मतदाताओं की आवाजाही जारी रही। मतदान के दौरान शिक्षकों में अपने प्रतिनिधि को चुनने को लेकर उत्साह नजर आया। नगर पालिका परिषद स्थित मतदान केंद्र पर कुल 328 मतदाताओं को अपने मताधिकार का प्रयोग करना है। सुबह 11 बजे तक यहां 106 शिक्षक मतदाता मतदान कर चुके थे। वहीं, पूरे बस्ती जिले में कुल 2,045 मतदाता हैं, जिनके लिए 14 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। मतदान के दौरान शिक्षक मतदाता अपनी पसंद के प्रत्याशी को चुनने के लिए मतदान केंद्र पहुंचते रहे। इस चुनाव में पुरानी पेंशन योजना का मुद्दा शिक्षकों के बीच प्रमुखता से चर्चा में रहा। शिक्षकों का कहना है कि प्रत्याशी का चयन करते समय केवल राजनीतिकसमीकरण नहीं, बल्कि शिक्षकों के हितों और भविष्य से जुड़े मुद्दों को भी ध्यान में रखा जा रहा है। पुरानी पेंशन की बहाली, शिक्षकों की समस्याओं का समाधान, अधिकारों की रक्षा और शिक्षा जगत से जुड़े विषय उनके लिए अहम हैं। शिक्षक मतदाताओं की उम्मीद है कि वे ऐसे प्रत्याशी का चुनाव करें, जो उनकी समस्याओं को मजबूती से उठाए और सदन में उनके अधिकारों की आवाज बने। अब देखना होगा कि शिक्षकों के मुद्दे और उनकी प्राथमिकताएं चुनाव में किस तरह प्रभाव डालती हैं।
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विदेशी निवेश से आर्थिक संप्रभुता प्रभावित, स्थानीय कारोबार और घरेलू निवेश को मिले बढ़ावा: सतीश कुमार

Durg, Chhattisgarh:भिलाई में स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संगठक सतीश कुमार ने देश की आर्थिक संप्रभुता और आत्मनिर्भरता के लिए स्थानीय उद्योगों और घरेलू निवेश को बढ़ावा देने पर बल दिया। उन्होंने अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे खुदरा व्यापारी प्रभावित हो रहे हैं। विदेशी निवेश (FDI) की अस्थिरता पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) जैसे महत्वपूर्ण उपक्रमों में भारतीय निवेशकों को ही प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने नागरिकों से स्थानीय उत्पादों को अपनाने का आह्वान किया।
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झारखंड के दुमका-पालामू मेडिकल कॉलेज के 1000 बिस्तर, MBBS से PG तक सीटें बढ़ें

Ranchi, Jharkhand:रांची दुमका और पलामू मेडिकल कॉलेज होंगे एक हजार बिस्तरों के, एमबीबीएस और पीजी की सीटें बढ़ाने की तैयारी अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने स्वास्थ्य आधारभूत संरचना के विकास की समीक्षा की मेडिकल कॉलेजों में विद्युत बसें उपलब्ध कराने का निर्देश झारखंड में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में दुमका और पलामू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों का विस्तार किया जाएगा। दोनों संस्थानों में सदर अस्पताल को सम्मिलित करते हुए कुल 1,000-1,000 बिस्तरों की व्यवस्था करने तथा एमबीएसबीएस की सीटें बढ़ाने और स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रमों के विस्तार की योजना है। दुमका मेडिकल कॉलेज के विकास पर लगभग 375 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इस संबंध में शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में आधारभूत संरचना के विकास से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की गई। बैठक अपर मुख्य सचिव के कार्यालय कक्ष में हुई। इसमें विभाग की विशेष सचिव डॉ. नेहा अरोड़ा, संयुक्त सचिव श्री ललित कुमार शुक्ला सहित विभाग के कई पदाधिकारी उपस्थित थे। बैठक में दुमका के पीजे मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, पलामू के एमआर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, हजारीबाग के शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल सहित देवघर, रांची, लोहरदगा, चाईबासा, जमशेदपुर तथा अन्य मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य आधारभूत संरचना के विकास और मरीजों की सुविधाओं को बेहतर बनाने से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर चर्चा की गई। बैठक में दुमका स्थित पीजे मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के विकास की विस्तृत योजना पर चर्चा हुई। बताया गया कि लगभग 100 एकड़ भूमि पर विकसित होने वाले इस संस्थान में वर्तमान में उपलब्ध 500 बिस्तरों के साथ सदर अस्पताल को सम्मिलित करते हुए कुल 1,000 बिस्तरों की व्यवस्था की जाएगी। मेडिकल कॉलेज में वर्तमान में स्नातक चिकित्सा शिक्षा (एमबीबीएस) की 100 सीटें हैं, जिन्हें बढ़ाकर 200 करने का प्रस्ताव है। इसके अतिरिक्त स्नातकोत्तर (पीजी) की 150 सीटों की व्यवस्था करने की योजना है। परियोजना पर लगभग 375 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। अपर मुख्य सचिव ने मेडिकल कॉलेज परिसर में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) के आधार पर स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए छात्रावास बनाने तथा अतिथिगृह के निर्माण का निर्देश दिया, ताकि विद्यार्थियों और संस्थान में आने वाले अतिथियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। पलामू स्थित एमआर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के विकास पर भी बैठक में चर्चा की गई। यह संस्थान लगभग 75 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा। बैठक में बताया गया कि दुमका और पलामू, दोनों मेडिकल कॉलेजों के लिए भूमि उपलब्ध हो गई है。 पलामू मेडिकल कॉलेज में भी सदर अस्पताल को सम्मिलित करते हुए कुल 1,000 बिस्तरों की व्यवस्था करने की योजना है। साथ ही स्नातक और स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा की सीटों में वृद्धि के प्रस्ताव पर चर्चा की गई। स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए 150 सीटों की व्यवस्था करने की योजना भी बैठक में रखी गई। बैठक में हजारीबाग स्थित शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के विकास पर भी विचार-विमर्श किया गया। इसके अंतर्गत लगभग 75 से 100 एकड़ भूमि में अस्पताल और संबंधित आधारभूत संरचनाओं के विकास की योजना पर चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त देवघर, रांची, लोहरदगा और चाईबासा के मेडिकल कॉलेजों में उपलब्ध सुविधाओं तथा आधारभूत संरचना के विकास से संबंधित विषयों की भी समीक्षा की गई। बैठक में अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने सभी मेडिकल कॉलेजों में विद्युत बसें उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। इसका उद्देश्य अस्पताल परिसर में मरीजों और उनके परिजनों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक आवागमन में सुविधा प्रदान करना है। उन्होंने जमशेदपुर सहित अन्य तीन मेडिकल कॉलेजों में भी बसें उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। इस पहल से बड़े अस्पताल परिसरों में मरीजों, विशेषकर बुजुर्गों और चलने-फिरने में कठिनाई का सामना करने वाले लोगों को एक विभाग से दूसरे विभाग तक पहुंचने में सहूलियत मिलने की उम्मीद है। बैठक में राज्य के मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सा शिक्षा की क्षमता बढ़ाने, अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या का विस्तार करने, छात्रावास एवं अतिथिगृह जैसी सुविधाएं विकसित करने और मरीजों के आवागमन को सुगम बनाने पर जोर दिया गया। इन प्रयासों का उद्देश्य झारखंड में चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के आधारभूत ढांचे को अधिक सुदृढ़ बनाना है。
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राजस्थान ने 34 माह में बिजली उत्पादन और सौर ऊर्जा में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की

Noida, Uttar Pradesh:राजस्थान ने बिजली उत्पादन से लेकर पावर ट्रांसमिशन में हासिल की नई रफ्तार सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता में 28,303 मेगावाट की वृद्धि 26 जिलों में दिन के समय में अन्नदाताओं को मिल रही बिजली प्रधानमंत्री कौशलं योजना (कुसुम) योजना में राजस्थान देश में अग्रणी पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल की तुलना में भाजपा सरकार ने बिजली उत्पादन क्षमता के क्षेत्र मे 5 गुना तक उपलब्धि हासिल की कांग्रेस सरकार में विद्युत तंत्र रहा कुप्रबंधन का शिकार, उपभोक्ता बिजली को तरसे जयपुर, 23 अक्टूबर। राजस्थान को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार निरंतर कार्य कर रही है। योजनाओं और नीतियों के समयबद्ध क्रियान्वयन से भाजपा सरकार ने 34 माह के कार्यकाल में पूर्ववर्ती सरकार के पहले 34 माह के साथ-साथ पूरे 5 वर्ष के कार्यकाल के कार्यों को कई गुना पीछे छोड़ बड़े कीर्तिमान स्थापित किए हैं। 26 जिलों में अन्नदाताओं को दिन के दो ब्लॉक मे बिजली मिल रही है। कस्बों से लेकर गांव-ढाणी तक गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। जबकि पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार के समय में विद्युत तंत्र कुप्रबंधन का शिकार रहा, डिस्कॉम्स घाटे में ही रहे और उपभोक्ता बिजली को तरसे। बिजली उत्पादन में 10 हजार 920 मेगावाट की रिकॉर्ड वृद्धि प्रदेश में भाजपा की सरकार ने रोडमैप के तहत बिजली, पानी जैसी बुनियादी आवश्यकताओं पर प्रतिबद्ध होकर कार्य किया है। परिणामस्वरूप गत 34 माह के कार्यकाल में राज्य के उपयोग के लिए बिजली उत्पादन क्षमता में 10 हजार 920 मेगावाट की वृद्धि दर्ज की गई है। जबकि पूर्ववर्ती कांग्रेस के पूरे 5 वर्ष के कार्यकाल में यह आंकड़ा 3 हजार 958 मेगावाट तक ही पहुंचा था। इस प्रकार भाजपा सरकार के कार्यकाल में कांग्रेस की तुलना में पौने तीन गुना बिजली उत्पादन की वृद्धि दर्ज की गई है। अगर कांग्रेस सरकार के पहले 34 महीनों की तुलना की जाए तो भाजपा सरकार का आंकड़ा लगभग 5 गुना से अधिक है। राजस्थान में स्वच्छ ऊर्जा का हो रहा तेजी से विस्तार राजस्थान में सौर ऊर्जा की व्यापक संभावनाएं हैं। इन्हीं संभावनाओं पर कार्य करते हुए भाजपा सरकार स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा दे रही है और प्रदेशवासियों की ऊर्जा संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए मजबूत आधार तैयार कर रही है। जिसके परिणामस्वरूप 34 माह के कार्यकाल में सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता में 28 हजार 303 मेगावाट की वृद्धि दर्ज हुई है। वहीं, पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के पहले 34 माह में यह वृद्धि मात्र 3 हजार 985 मेगावाट और पूरे पांच वर्ष में 14,878 मेगावाट तक ही सीमित रही। उच्च क्षमता वाले सब-स्टेशनों की हो रही तेजी से स्थापना बिजली उत्पादन में वृद्धि के साथ सुचारु प्रसारण भी महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में प्रदेशभर में उच्च क्षमता वाले विद्युत सब-स्टेशनों की स्थापना की जा रही है। ऊर्जा उत्पादन क्षमता बढ़ाने, विद्युत प्रसारण नेटवर्क के विस्तार और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए आवश्यक आधारभूत सुविधाएं विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। भाजपा सरकार के 34 माह के कार्यकाल में ही 400 केवी क्षमता के 2 ग्रिड सब-स्टेशन, 220 केवी क्षमता के 9 ग्रिड सब-स्टेशन, 132 केवी क्षमता के 51 ग्रिड सब-स्टेशन स्थापित हो चुके हैं। जबकि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के पांच वर्ष के पूरे कार्यकाल में 400 केवी क्षमता का एक, 220 केवी के पांच तथा 132 केवी 38 ग्रिड सब-स्टेशन ही स्थापित हुए थे। इसी प्रकार भाजपा सरकार के शासन में 33 केवी के 532 सब-स्टेशन स्थापित किए जा चुके है जबकि पूर्ववर्ती सरकार के 34 माह मे 33 केवी के मात्र 477 सब-स्टेशन ही स्थापित हो पाये थे। राजस्थान के विद्युत उत्पादन, सौर ऊर्जा क्षमता, विद्युत सब-स्टेशनों के विस्तार से जुड़े ये आंकड़े राज्य के ऊर्जा क्षेत्र की दिशा और विकास की संभावनाओं को सामने रखते हैं। डिस्कॉम्स अब लाभ की स्थिति में पीएम कौसुम योजना में राजस्थान देश का अग्रणी राज्य है। पीएम कौसुम योजना के अंतर्गत राज्य में अब तक 5.57 गीगावॉट विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित की जा चुकी है जो कि देश में सर्वाधिक है। इस योजना से 3 लाख 78 हजार से अधिक किसान लाभान्वित हो चुके हैं। राजस्थान डिस्कॉम्स की वित्तीय स्थिति इस सरकार के कार्यकाल में उल्लेखनीय रूप से बेहतर हुई है। अजमेर डिस्कॉम ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में 825 करोड रूपये एवं वर्ष 2025-26 में जयपुर डिस्कॉम ने 931 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया है।
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जम्मू-कश्मीर में आतंक के खिलाफ बड़ा सुरक्षा अभियान शुरू, घाटी में चाक चौबंद निगरानी

Chaka, आतंक पर अंतिम प्रहार: घाटी से आतंकवाद का अखरी निशान का सफाया करने के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने बड़े पैमाने पर अभियान छेड़ा। एक कड़े और निर्णायक कदम के तहत, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर पूरे केंद्र शासित प्रदेश में आतंकवाद के खिलाफ एक व्यापक और बहुआयामी अभियान छेड़ दिया है। सीमावर्ती इलाकों के घने जंगलों से लेकर श्रीनगर के व्यस्त व्यावसायिक केंद्रों और सभी दस जिलों के भीतरी इलाकों तक, सुरक्षा बलों ने सक्रिय आतंकवादियों, उनके मददगारों (OGWs), फंडिंग करने वालों और उनके समर्थकों पर अपना शिकंजा कस दिया है। यह बड़ा अभियान, पुलिस शहीद दिवस के मौके पर पुलिस महानिदेशक (DGP) नलिन प्रभात द्वारा दिए गए एक सख्त और स्पष्ट बयान के बाद शुरू किया गया है। आतंकवाद और अलगाववाद के गठजोड़ के खात्मे का ऐलान करते हुए, DGP प्रभात ने कहा कि प्रशासन तब तक चैन से नहीं बैठेगा, जब तक कि चरमपंथ से जुड़े हर एक व्यक्ति को कानून के दायरे में लाकर सजा नहीं दिला दी जाती। DGP नलिन प्रभात ने कहा, "हमारा लक्ष्य एकदम साफ है: जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और चरमपंथ से जुड़े हर व्यक्ति की पहचान करना और उसे पूरी तरह से जड़ से खत्म करना।" उन्होंने आगे कहा, "आज हमें यह संकल्प लेना होगा कि जब तक हम इस धरती को अलगाववादी और आतंकवादी तत्वों से मुक्त नहीं कर देते, तब तक हम रुकेंगे नहीं। मैं जम्मू-कश्मीर के उन लोगों को भी चेतावनी देना चाहता हूं जो आतंकवाद का समर्थन करते हैं—अब आपके दिन गिने-चुने हैं। अगर आप पाताल में भी छिपने की कोशिश करेंगे, तो भी हम आपको ढूंढ निकालेंगे और कानून के तहत कड़ी सजा दिलाएंगे।" DGP के निर्देशों का पालन करते हुए, सुरक्षा तंत्र पूरी तरह से सक्रिय हो गया है। पूरी कश्मीर घाटी और संवेदनशील सीमावर्ती जिलों में सुरक्षा का एक मजबूत घेरा तैयार किया गया है: अचानक लगने वाले मोबाइल चेक-पोस्ट (नाके): श्रीनगर और घाटी के अन्य नौ जिलों में कई जगह अस्थायी चेक-पोस्ट बनाए गए हैं। हर वाहन, कमर्शियल गाड़ी और संदिग्ध पैदल चलने वालों की पहचान की जांच की जा रही है। अलग-अलग जिलों को जोड़ने वाली सड़कों और दोपहिया वाहनों की आवाजाही पर चौबीसों घंटे हाई-डेफिनिशन ऑप्टिकल और थर्मल सर्विलांस (निगरानी) के जरिए नजर रखी जा रही है। महत्वपूर्ण वन मार्गों और पहाड़ी श्रृंखलाओं की ओर जाने वाले रास्तों को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। घुसपैठ करने वाले समूहों या बचे हुए आतंकवादियों को सुरक्षित ठिकाने न मिल सकें—जो आम नागरिकों के बीच छिपने की कोशिश कर रहे हैं—इसके लिए व्यापक तलाशी और 'सर्च एंड डिस्ट्रॉय' अभियान (CASO) चलाए जा रहे हैं। पूरी घाटी में चलाया जा रहा यह आक्रामक अभियान, हाल ही में सुरक्षा बलों द्वारा नियंत्रण रेखा (LoC) और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में हासिल की गई आतंकवाद-विरोधी सफलताओं की एक कड़ी है। सुरक्षा बलों ने पीर पंजाल और उत्तरी सेक्टरों में पाकिस्तान स्थित लॉन्चपैड से की गई घुसपैठ की कई कोशिशों को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया है। स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) और सेना के संयुक्त खुफिया अभियानों ने जंगलों में सक्रिय आतंकी ठिकानों को बेअसर कर दिया है। इस दौरान भारी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री बरामद की गई है, जिनका इस्तेमाल बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाने और सार्वजनिक शांति बिगाड़ने के लिए किया जाना था। सक्रिय आतंकवादियों के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई के साथ-साथ, पुलिस प्रशासन ने UAPA (यूएपीए) के तहत आतंकी फंडिंग और नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़ी संपत्तियों, वाहनों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को जब्त करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इससे उन राष्ट्र-विरोधी तत्वों की आर्थिक कमर टूट रही है, जो इसी पैसे के दम पर पलते-बढ़ते हैं। घाटी के भीतरी इलाकों में तैनात विशेष सामरिक इकाइयों, रियल-टाइम में काम कर रहे खुफिया नेटवर्क और उच्च कमान द्वारा लागू 'जीरो-टॉलरेंस' नीति के जरिए सुरक्षा तंत्र ने घाटी के हर कस्बे में एक स्पष्ट संदेश भेज दिया है: "घेरा कसता जा रहा है, अब छिपने की कोई जगह नहीं बची है। तुम भाग तो सकते हो, लेकिन छिप नहीं सकते।"
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