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PANKAJ YADAVPANKAJ YADAVFollow5 Jan 2025, 05:46 pm

बलियाः आवास पर प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत के मामले में जेल गई नर्स, चोरी-चुपके चला रही थी क्लिनिक

Jharkatahan, Uttar Pradesh:

सीएचसी रेवती पर तैनात स्टाफ नर्स मंजू सिंह के घर में संचालित क्लीनिक बांसडीह में आवास पर प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत मामले में जेल गईं। स्टाफ नर्स को महानिदेशक (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. रतनपाल सिंह सुमन ने निलंबित कर दिया है। जानकारी के मुताबिक, 4 दिसम्बर को बांसडीह कोतवाली क्षेत्र के रुकूनपुरा निवासी लालसाहब की पत्नी सुधा देवी (34) को प्रसव पीड़ा होनेपर आशा बहू मीना ने पिंडहरा-बांसडीह गांव की रहने वाली सीएचसी रेवती पर तैनात स्टाफ नर्स मंजू सिंह के घर में संचालित क्लिनिक पर ले गयी थी l

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अंबाला में प्रेम प्रसंग के शक पर महिला की हत्या, लाश कार में मिली

Ambala, Haryana:हरियाणा के अंबाला के गोबिंदगढ़ गांव में एक घर के बाहर खड़ी कार में एक महिला की लहूलुहान लाश मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस ने शव कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। बताये अनुसार, महिला मनिंदर कल से लापता थी और उसकी एफआईआर मॉडल टाउन चौकी में दर्ज कराई गई थी। सुबह उसकी मौत की खबर मिली, शव उसकी ही कार के पीछे की सीट पर मिला गया; गلے पर चाकू के निशान थे। मृतका शादीशुदा थी और अंबाला के सेक्टर-8 में रहती थी। आशंका है कि यह हत्या का मामला है। 3 टीमें बनाई गई हैं ताकि आरोपी मनिंदर को पकड़ कर खुलासा किया जा सके। पोस्टमॉर्टम के लिए शव पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिया है और जांच गहनता से जारी है।
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अनिल विज का विपक्ष पर तीखा हमला: राम मंदिर और पेपर लीक पर तीखी बहस

Ambala, Haryana:आज देश भर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मशहूर रेडियो कार्यक्रम मन की बात को सुना गया। इसी कड़ी में हरियाणा के अंबाला कैंट में कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों के साथ बैठकर इस कार्यक्रम को सुना। कार्यक्रम के समापन के बाद अनिल विज ने मीडिया से औपचारिक बातचीत की और विभिन्न समसामयिक मुद्दों व पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए। इस दौरान उन्होंने राम मंदिर चोरी के मुद्दे पर आप नेता मनीष सिसोदिया के बयान पर भी तीखा प्रहार करते हुए पूरे विपक्ष को लपेटा। Aap नेता मनीष सिसोदिया ने कहा, हमारे देश में एक ऐसी सरकार काम कर रही है जिससे न NEET की लूट संभल रही है, न राम मंदिर में चंदे की लूट संभल रही है, न किसानों की सब्सिडी की लूट संभल रही है। चारों तरफ लूट ही लूट चली जा रही है। इस लूट वाली सरकार को हटाना पड़ेगा। इन आरोपों पर हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि इनके पास राम मंदिर का विरोध करने के अलावा और कोई मुद्दा नहीं बचा है। उन्होंने कांग्रेस के कार्यकाल में हुए पेपर लीक और मंदिरों में चोरियों का मुद्दा उठाते हुए विपक्ष की मंशा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि मनीष सिसोदिया का जन्म शायद एक-दो दिनों में ही हुआ होगा, या पहले से कभी सरकारें नहीं रही होंगी। जरा गिनकर तो बताओ, कांग्रेस की सरकार में कितनी बार पेपर लीक हुए? कांग्रेस के राज में कितने मंदिरों में चोरियां हुईं, मूर्तियां तक चुराकर ले गए। तब मनीष सिसोदिया पैदा नहीं हुए थे क्या? इनको तो सिर्फ एक मुद्दा चाहिए राम मंदिर का विरोध करना। अगर राम मंदिर में कुछ हुआ है, तो उसकी जांच हो रही है। एसआईटी बनाई गई है, लोग गिरफ्तार किए गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी गंभीर हैं और मुख्यमंत्री योगी भी गंभीर हैं, और फिर लोगों को एक सत्य को और मानना चाहिए, कि जो चोरी हुआ है, वो राम जी का हुआ है। राम जी के यहाँ एक बार चोरी पहले भी हुई थी। लंकापति रावण, सीता जी को चुराकर ले गया था। रावण का वो हाल किया था कि उसके घर कोई दीया जलाने वाला नहीं रहा था। तो ये जिन लोगों ने किया है, उनको कानून की सजा भी मिलेगी और भगवान राम की सजा भी मिलेगी।
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50 हजार के इनामी दो हिस्ट्रीशीटर पुलिस मुठभेड़ में घायल

PPFollow2m ago
Bahraich, Uttar Pradesh:बहराइच जिले से सबसे बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। जिले में बेखौफ घूम रहे अपराधियों और शातिर चोरों के खिलाफ पुलिस कप्तान के सख्त तेवरों का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। बीती रात दो अलग-अलग थाना क्षेत्रों में दो पेशेवर अपराधियों को पुलिस ने हाफ एनकाउन्टर में लंगड़ा कर दबोच लिया। क्राइम ब्रांच की स्वॉट टीम और रामगांव व कैसरगंज थाने की पुलिस ने एक संयुक्त और बेहद साहसिक ऑपरेशन में ₹50,000 के इनामी और कुख्यात हिस्ट्रीशीटर बदमाश फिरोज और मुल्कराज को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस की जवाबी फायरिंग में दोनों बदमाशों के पैर में गोली लगी है, जिसे लहूलुहान हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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गांव लगुन कार्यक्रम में गोलीकांड: आरोपी गिरफ्तार, कट्टा बरामद

Morena, Madhya Pradesh:एंकर- ग्वालियर के दुहिया गांव में लगुन कार्यक्रम के दौरान फायरिंग कर युवक को गोली मारने वाला आरोपी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी के पास से वारदात में इस्तेमाल हुआ कट्टा भी बरामद कर लिया गया है। गोली मारने के बाद अजीत गांव के बाहर मददगारों के पास छिप गया था। पुलिस ने उसे दबोचकर गांव में पैदल परेड कराई और क्राइम सीन रिक्रिएशन कराया। पूछताछ में आरोपी ने हर्ष फायरिंग को टोकने पर गुस्से में गोली चलाने की बात कबूल की है। वीओ- दअरसल शनिवार रात बिजौली1 थाना क्षेत्र के दुहिया गांव में आशू राणा के घर लगुन का कार्यक्रम चल रहा था। इसी कार्यक्रम में आशू के रिश्ते के जीजा धीरेन्द्र सिंह राणा, निवासी भगवती कॉलोनी मुरार भी शामिल हुए थे। उसी गांव के अजीत सिंह राणा भी लगुन में बुलाया गया था। हनक दिखाने के लिए अजीत कट्टा लेकर आया था और कार्यक्रम के दौरान उसने हर्ष फायर भी किए। जब अजीत फायरिंग कर रहा था तो धीरेन्द्र ने उसे रोक-टोक दिया। गांव के और लोग भी वहां मौजूद थे उनके सामने धीरेन्द्र का टोकना अजीत को नागवार गुजरा उसने गुस्से में आकर अजीत ने कट्टा तान दिया और धीरेन्द्र पर फायर कर दिया। गोली धीरेन्द्र को लग गई और वह घायल होकर गिर पड़ा। गोली चलाने के बाद अजीत मौके से फरार हो गया और गांव के बाहर अपने मददगारों के पास जाकर छिप गया। इस सूचना पर पहुंची बिजौली पुलिस ने घायल धीरेन्द्र को अस्पताल पहुंचाया और आरोपी की तलाश शुरू कर दी। पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर अजीत सिंह राणा को दबोच लिया। उसके पास से वारदात में इस्तेमाल हुआ कट्टा भी बरामद कर लिया गया। घटना की पहचान और सीन ऑफ क्राइम की जानकारी लेने के लिए आरोपी को गांव में लाया गया। उसकी पैदल परेड गांव में कराई गई। जहां बदमाश सिर झुकाकर चलते हुए नजर आया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि हर्ष फायरिंग रोकने पर गुस्से में आकर उसने गोली मार दी थी। फिलहाल पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला दर्ज कर पूछताछ कर रही है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि कट्टा उसने कहां से खरीदा था। घायल धीरेन्द्र का इलाज जारी है और उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। बाइट- मनीष यादव -SDOP ग्वालियर
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जयपुर में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से शहर की सफाई ठप, बीमारी का खतरा

Jaipur, Rajasthan:राजधानी जयपुर में इन दिनों एक अलग ही तस्वीर देखने को मिल रही है…जिस हाथ में रोज शहर को साफ रखने की जिम्मेदारी होती है, वही हाथ अब झाड़ू छोड़कर आंदोलन की राह पर हैं। सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से शहर की रफ्तार पर असर पड़ा है… सड़कों पर कचरे के ढेर हैं, गलियों में गंदगी है और बारिश के मौसम में बीमारी का खतरा भी बढ़ गया है। मांग है सफाई भर्ती में प्राथमिकता की…लेकिन सवाल ये है कि आंदोलन और प्रशासन के बीच फंसे इस शहर की सफाई कब लौटेगी... एक तरफ भर्ती में हक की लड़ाई, दूसरी तरफ शहर की सांसों पर संकट…सफाई कर्मचारियों की झाड़ू डाउन हड़ताल ने राजधानी की साफ-सुथरा रखने की जिम्मेदारी पर असर डाला है। दो दिन से सफाईकर्मियों की हडताल का असर अब जयपुर की सड़कों, गलियों और बाजारों में साफ दिख रहा है। सड़कों पर जमा कचरे के ढेर, गलियों में फैली गंदगी और बदबू के बीच आम लोग परेशान हैं। बारिश के मौसम में यह गंदगी अब बीमारी का खतरा भी बढ़ा रही है। सफाई कर्मचारी भर्ती में वाल्मीकि समाज को प्राथमिकता समेत मांगों को लेकर चल रही झाड़ू डाउन हड़ताल का असर राजधानी की सड़कों पर साफ दिखाई दे रहा है। दो दिन से न झाड़ू चल रही है, न डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था पटरी पर लौट पाई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि शहर की सफाई व्यवस्था को संभालने वाले जिम्मेदार अधिकारी कहां हैं......जिन अफसरों के कंधों पर जयपुर को साफ-सुथरा रखने की जिम्मेदारी है, वे संकट के इस दौर में सड़कों पर नजर नहीं आ रहे। कमिश्नर, एडिशनल कमिश्नर और जोन उपायुक्तों की फील्ड मॉनिटरिंग पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्मार्ट सिटी, स्वच्छ शहर और बेहतर सुविधाओं के दावों के बीच अब हकीकत यह है कि कई इलाकों में कचरा उठने का इंतजार कर रहा है। कई जगह डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण नहीं होने से लोगों ने सड़कों के किनारे कचरा डालना शुरू कर दिया। सीवर ब्लॉक और सफाई से जुड़ी शिकायतों के निस्तारण पर भी असर पड़ा है। आंदोलन कर रहे संयुक्त वाल्मीकि एवं सफाई श्रमिक संघ की मुख्य मांग है कि सफाई कर्मचारी भर्ती में परंपरागत सफाई कार्य से जुड़े परिवारों और वर्तमान में काम कर रहे कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाए। इसके अलावा कोर्ट मामलों से जुड़े पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति, ठेका प्रथा और आउटसोर्सिंग खत्म करने, निकाय कोष से नियमित वेतन भुगतान, तीन गुना लॉटरी प्रणाली लागू करने और चयनित कर्मचारियों को दो साल बाद स्थायी करने की मांग की जा रही है। संयुक्त वाल्मीकि एवं सफाई श्रमिक संघ के अध्यक्ष नंदकिशोर डंडोरिया ने कहा कि कर्मचारी कई दिनों से शांतिपूर्ण धरना, प्रदर्शन और भूख हड़ताल के जरिए सरकार तक अपनी बात पहुंचा रहे थे, लेकिन समाधान नहीं होने पर आंदोलन को आगे बढ़ाया गया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ भर्ती का मुद्दा नहीं, बल्कि सफाई कर्मचारियों के भविष्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा मामला है। जहां एक गुट कर्मचारी आंदोलन को आगे बढ़ा रहा है, वहीं दूसरे गुट ने हड़ताल से दूरी बनाते हुए निगम के साथ मिलकर सफाई व्यवस्था संभालने की बात कही है। ऐसे में सफाई कर्मचारियों के बीच भी मतभेद सामने आ रहे हैं। सफाई कर्मचारी नेता पवन चौधरी ने हड़ताल का विरोध करते हुए कहा कि उनके साथ जुड़े कर्मचारी आंदोलन में शामिल नहीं होंगे और निगम प्रशासन के साथ मिलकर सफाई व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास करेंगे। संयुक्त वाल्मिकी सफाई श्रमिक संघ की दो दिन से चल रहीं हड़ताल के तीन बड़े असर शहर में देखने को मिल रहे है....पहला सड़कों और गलियों में सफाई नहीं होना, दूसरा डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण प्रभावित हुआ और तीसरा सीवर और सफाई संबंधी शिकायतों का समाधान अटक गया है.....आंदोलनकारियों ने आज किशनगढ़-अजमेर में प्रदेश स्तरीय बैठक की, जिसमें आगे की रणनीति तय हुई। इसके बाद कल यानि की सोमवार को सांगानेर विधानसभा क्षेत्र में कर्मचारियों द्वारा जनता और जनप्रतिनिधियों से संपर्क अभियान चलाने की तैयारी है। बहरहाल, कभी स्वच्छता की मिसाल बनाने का दावा करने वाला जयपुर आज कचरे के ढेरों के बीच खड़ा है…झाड़ू रुकी तो स्मार्ट सिटी की चमक भी धुंधली पड़ गई। सवाल सिर्फ हड़ताल का नहीं, सवाल उस व्यवस्था का है जो एक आंदोलन के सामने ही चरमरा गई है। अब देखना होगा कि प्रशासन कागजों से निकलकर कब सड़कों पर उतरता है और राजधानी को फिर से साफ-सुथरी पहचान कब मिलती है। मांगें कब पूरी होंगी, इसका जवाब सरकार और आंदोलनकारियों की बातचीत से मिलेगा, लेकिन फिलहाल जयपुर की सड़कों पर कचरे के ढेर यह जरूर बता रहे हैं कि सफाई व्यवस्था और शहर दोनों ही इस टकराव की कीमत चुका रहे हैं.
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BDK अस्पताल में उपकरणों की कमी, परिजनों को मरीजों के लिए स्ट्रेचर ढूंढ़ना पड़ा

Jhunjhunu, Rajasthan:— जिस जनाना विंग का वीडियो है। वहां पर आज भी गेट पर ना तो कोई कर्मचारी है और ना ही कोई व्हील चेयर और ना ही कोई स्ट्रेचर है। इस तरह के वीडियो भेजे गए है। — वहीं बीडीके अस्पताल में भारी भरकम स्टाफ होने के बावजूद मरीजों को दिखाने के लिए उनके परिजन खुद स्ट्रेचर लेकर इधर—उधर चक्कर लगाते दिखाई दे रहे है। वो वीडियो भेजे गए है। — दो बाइट्स है। इनमें एक तो बता रहा है कि वह मरीज दिखाने आया था। व्हील चेयर का एक ​पहिया ही नहीं था। तो दूसरा बोल रहा है बीडीके अस्पताल में प्रसव करवाने से अच्छा है पुरानी परंपरा अनुसार घर पर ही करवा देना चाहिए। वो ज्यादा सुरक्षित है। बाकि और भी अव्यवस्थाओं के बारे में बताया जा रहा है।
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मुज़फ्फरपुर में छोटे भाई ने बड़े भाई की हत्या कर दी, प्रेम-प्रसंग विवाद

Muzaffarpur, Bihar:मुज़फ्फरपुर के मुसहरी थाना क्षेत्र में बड़े भाई की हत्या की घटना हुई है। घटना नवादा चौक के पास मनसाही गाँव की है, जहां घरेलू विवाद के बीच छोटे भाई अशोक महतो ने अपने बड़े भाई संतोष महतो पर मशाला पीसने वाले पत्थर से हमला कर उसकी हत्या कर दी। मौके पर शोर मचने पर परिवारजन और आस-पड़ोस के लोग जुटे, लेकिन तब तक संतोष की मौत हो चुकी थी। आरोपी को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले की छानबीन जारी है। मृतक संतोष महतो कुक की प्रस्तुति करते थे और कुछ समय पहले उनका एक्सीडेंट हुआ था जिससे वह घर पर ही रहते थे। परिवार के अनुसार जमीन विवाद भी इसके पीछे एक कारण बताया गया है, वहीं कुछ सदस्यों ने कहा कि आरोपी अशोक का अपनी दूसरी भाभी के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था जिसे बड़े भाई को पहले ही पता चल गया था, जिस कारण हत्या की बात सामने आ रही है। पुलिस ने भाभी के साथ प्रेम प्रसंग जैसी बातें भी जांच के दायरे में रखी हैं। मौके पर SDPO पूर्वी मनोज कुमार सिंह और FSL की टीम ने जांच शुरू की है। फिलहाल घटना जमीन विवाद के कारण बताई जा रही है और आरोपी से पूछताछ जारी है।
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टिहरी गढ़वाल जन अधिकार मोर्चे का अनशन जारी: सीएम से वार्ता की मांग पर अड़े

New Tehri, Uttarakhand:टिहरी गढ़वाल जन अधिकार संघर्ष मोर्चे का अनशन जारी,सीएम से वार्ता की मांग पर अड़े। टिहरी बाँध से मिलने वाली रायलटी का लाभ बाँड प्रभावित क्षेत्र को दिए जाने, बाँड प्रभावित परिवारों को निशुल्क बिजली पानी दिए जाने सहित अन्य मांगो को लेकर टिहरी गढ़वाल जन अधिकार संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारियो का खेट पर्वत पर आमरण अनशन जारी है, वही 4 अनशनकारियों में से 2 की हालात गंभीर होने पर उन्हें अस्पताल रेफर कर दिया है जबकि 2 अन्य आमरण अनशनकारी अभी डटे है वही उनके समर्थन में 2 अन्य आंदोलनकारी भी खेट पर्वत पहुंच चुके है,अनशनकारियों से सीएम से वार्ता की मांग की है और कहा तभी वो अपना अनशन खत्म करेंगे और नीचे उतरेंगे।
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मोर्बी के जेतपर गांव में निजी बिजली कंपनी के काम के खिलाफ किसानों का विरोध जारी

Morbi, Gujarat:ബ്രેકിംഗ് મોરબીના જેતપર ગામે ખાનગી વીજ કંપનીના કામ સામે ખેડૂતના વિરોધનો મામલો હાલમાં જેતપર ગામે ખેડૂત આંદોલન ચાલી રહ્યું હોવા છતાં ખાનગી વીજ કંપનીનું કામ ચાલુ અગાઉ કૃષિ મંત્રી અને સરકારી અધિકારીઓએ કામ બંધ રાખવા માટે આપે ખાતરીનું સુરસુરિયું ઉપવાસી છાવણીમાં બેઠેલા નેહુલભાઈ અમૃતિયા ના ખેતરની અંદર હાલમાં પોલ Uphા કરવાનું કામ ચાલુ પોલ Uphા કરવા માટે આખા ખેતરની અંદર મેટલ નાખીને રોડ બનાવ્યા ! ખેડૂતોના ખેતરની અંદર વધારાની જમીનનો જે ઉપયોગ થાય છે ? હાલમાં ખેડૂતોના પાક અને ખેતીને نقصان થાય છે તેનું વળતર કોણ આપશે ?
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यूनियन बैंक के पास जमीन विवाद में दो पक्षों की मारपीट, CCTV फुटेज सामने

Ujjain, Madhya Pradesh:उज्जैन के चिमनगंज मंडी थाना क्षेत्र में स्थित यूनियन बैंक के पास, आगर नाका स्थित मारवाड़ी ट्रॉली कारखाने पर जमीन को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हो गया। घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें दोनों पक्षों के लोग आपस में मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं。 जानकारी के अनुसार शहजाद मारवाड़ी अपने घर पर था। इसी दौरान उसके पिता मुंशी खां की आवाज सुनकर वह कारखाने के बाहर पहुंचा। वहां उसके बड़े पापा का बेटा मोहम्मद शरीफ, बड़े पापा नसरुद्दीन तथा परिवार के अन्य सदस्य मौजूद थे। आरोप है कि शादिक, समीर, सिकंदर, जुवैदा बी और लड्डू वहां पहुंचे और जमीन को अपनी बताते हुए गाली-गलौज करने लगे। आरोप है कि आरोपियों ने जान से मारने की धमकी दी, वीडियो बनाकर डराने ka प्रयास किया और कहा कि उन्होंने उनकी जमीन पर कब्जा कर लिया है。 आरोप है कि विरोध करने पर शादिक ने डंडे से हमला कर उसके पिता मुंशी खां के साथ मारपीट की, जिससे उनकी कमर, अंगूठे और भौंह पर चोट आई। मारपीट के दौरान बैट और पत्थर का भी इस्तेमाल हुआ, जिससे फरियादी सहित अन्य लोगों को चोटें आईं। इस मामले में चिमनगंज मंडी थाना प्रभारी विवेक कनोडिया ने बताया कि यह जमीन को लेकर चल रहा पारिवारिक विवाद है। इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से एफआईआर दर्ज की गई है और पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। फिलहाल, घटना का सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है, जिसमें दोनों पक्षों के लोग आपस में विवाद और मारपीट करते नजर आ रहे हैं। पुलिस वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की जांच कर रही है。
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जयपुर में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से शहर बदहाल, कचरे के ढेर बढ़े

Jaipur, Rajasthan:एंकर-राजधानी जयपुर में इन दिनों एक अलग ही तस्वीर देखने को मिल रही है…जिस हाथ में रोज शहर को साफ रखने की जिम्मेदारी होती है, वही हाथ अब झाड़ू छोड़कर आंदोलन की राह पर हैं। सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से शहर की रफ्तार पर असर पड़ा है… सड़कों पर कचरे के ढेर हैं, गलियों में गंदगी है और बारिश के मौसम में बीमारी का खतरा भी बढ़ गया है। मांग है सफाई भर्ती में प्राथमिकता की…लेकिन सवाल ये है कि आंदोलन और प्रशासन के बीच फंसे इस शहर की सफाई कब लौटेगी.....देखिए ये रिपोर्ट…झाड़ू रुकी तो कैसे बिगड़ी राजधानी की तस्वीर। ::::::::::::::::::::::::: वीओ-1- एक तरफ भर्ती में हक की लड़ाई, दूसरी तरफ शहर की सांसों पर संकट…सफाई कर्मचारियों की झाड़ू डाउन हड़ताल ने राजधानी की सफाई व्यवस्था को पटरी से उतार दिया है। दो दिन से सफाईकर्मियों की हडताल का असर अब जयपुर की सड़कों, गलियों और बाजारों में साफ दिखाई देने लगा है। जिस जयपुर को स्मार्ट सिटी की पहचान दिलाने के दावे किए गए, वही शहर अब सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के चलते डर्टी सिटी की तस्वीर दिखा रहा है। सड़कों पर जमा कचरे के ढेर, गलियों में फैली गंदगी और बदबू के बीच आम लोग परेशान हैं। बारिश के मौसम में यह गंदगी अब बीमारी का खतरा भी बढ़ा रही है। सफाई कर्मचारी भर्ती में वाल्मीकि समाज को प्राथमिकता समेत मांगों को लेकर चल रही झाड़ू डाउन हड़ताल का असर राजधानी की सड़कों पर साफ दिखाई दे रहा है। दो दिन से न झाड़ू चल रही है, न डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण व्यवस्था पटरी पर लौट पाई है۔ सबसे बड़ा सवाल यह है कि शहर की सफाई व्यवस्था को संभालने वाले जिम्मेदार अधिकारी कहां हैं......जिन अफसरों के कंधों पर जयपुर को साफ-सुथरा रखने की जिम्मेदारी है, वे संकट के इस दौर में सड़कों पर नजर नहीं आ रहे। कमिश्नर, एडिशनल कमिश्नर और जोन उपायुक्तों की फील्ड मॉनिटरिंग पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्मार्ट सिटी, स्वच्छ शहर और बेहतर सुविधाओं के दावों के बीच अब हकीकत यह है कि कई इलाकों में कचरा उठने का इंतजार कर रहा है। कई जगह डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण नहीं होने से लोगों ने सड़कों के किनारे कचरा डालना शुरू कर दिया। सीवर ब्लॉक और सफाई से जुड़ी शिकायतों के निस्तारण पर भी असर पड़ा है। आंदोलन कर रहे संयुक्त वाल्मीकि एवं सफाई श्रमिक संघ की मुख्य मांग है कि सफाई कर्मचारी भर्ती में परंपरागत सफाई कार्य से जुड़े परिवारों और वर्तमान में काम कर रहे कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाए। इसके अलावा कोर्ट मामलों से जुड़े पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति, ठेका प्रथा और आउटसोर्सिंग खत्म करने, निकाय कोष से नियमित वेतन भुगतान, तीन गुना लॉटरी प्रणाली लागू करने और चयनित कर्मचारियों को दो साल बाद स्थायी करने की मांग की जा रही है。 ::::::::::::::::::::::::: बाइट-शहरवासी बाइट-शहरवासी ::::::::::::::::::::::::: वीओ-2-संयुक्त वाल्मीकि एवं सफाई श्रमिक संघ के अध्यक्ष नंदकिशोर डंडोरिया ने कहा कि कर्मचारी कई दिनों से शांतिपूर्ण धरना, प्रदर्शन और भूख हड़ताल के जरिए सरकार तक अपनी बात पहुंचा रहे थे, लेकिन समाधान नहीं होने पर आंदोलन को आगे बढ़ाया गया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ भर्ती का मुद्दा नहीं, बल्कि सफाई कर्मचारियों के भविष्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा मामला है। जहां एक गुट कर्मचारी आंदोलन को आगे बढ़ा रहा है, वहीं दूसरे गुट ने हड़ताल से दूरी बनाते हुए निगम के साथ मिलकर सफाई व्यवस्था संभालने की बात कही है। ऐसे में सफाई कर्मचारियों के बीच भी मतभेद सामने आ रहे हैं। सफाई कर्मचारी नेता पवन चौधरी ने हड़ताल का विरोध करते हुए कहा कि उनके साथ जुड़े कर्मचारी आंदोलन में शामिल नहीं होंगे और निगम प्रशासन के साथ मिलकर सफाई व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास करेंगे। संयुक्त वाल्मिकी सफाई श्रमिक संघ की दो दिन से चल रहीं हड़ताल के तीन बड़े असर शहर में देखने को मिल रहे है....पहला सड़कों और गलियों में सफाई नहीं होना, दूसरा डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण प्रभावित हुआ और तीसरा सीवर और सफाई संबंधी शिकायतों का समाधान अटक गया है.....आंदोलनकारियों ने आज किशनगढ़-अजमेर में प्रदेश स्तरीय बैठक की, जिसमें आगे की रणनीति तय हुई। इसके बाद कल यानि की सोमवार को सांगानेर विधानसभा क्षेत्र में कर्मचारियों द्वारा जनता और जनप्रतिनिधियों से संपर्क अभियान चलाने की तैयारी है。 ::::::::::::::::::::::::: वॉक थ्रू--दीपक गोयल, जी मीडिया जयपुर ::::::::::::::::::::::::: बहरहाल, कभी स्वच्छता की मिसाल बनने का दावा करने वाला जयपुर आज कचरे के ढेरों के बीच खड़ा है…झाड़ू रुकी तो स्मार्ट सिटी की चमक भी धुंधली पड़ गई। सवाल सिर्फ हड़ताल का नहीं, सवाल उस व्यवस्था का है जो एक आंदोलन के सामने ही चरमरा गई। अब देखना होगा कि प्रशासन कागजों से निकलकर कब सड़कों पर उतरता है और राजधानी को फिर से साफ-सुथरी पहचान कब मिलती है। मांगें कब पूरी होंगी, इसका जवाब सरकार और आंदोलनकारियों की बातचीत से मिलेगा, लेकिन फिलहाल जयपुर की सड़कों पर कचरे के ढेर यह जरूर बता रहे हैं कि सफाई व्यवस्था और शहर दोनों ही इस टकराव की कीमत चुका रहे हैं। दीपक गोयल जी मीडिया जयपुर
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