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RSRajiv SharmaFollow15 Jun 2024, 12:25 pm
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मरघट की बदहाली: दो गांवों में खुले आसमान में अंतिम संस्कार, क्यों व्यवस्था मौन?

Damoh, Madhya Pradesh:बहुत कठिन है डगर मरघट की, दलदल से गुजरती अंतिम यात्रा, कहीं खुले आसमान के नीच तो कहीं पालीथीन लगाकर हो रहा अंतिम संस्कार.. एंकर/ एमपी के दमोह में जीते जी आदमी बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहा है तो मरने के बाद लोगों को सुकून वाली अंतिम यात्रा नसीब नहीं होती तो अंतिम संस्कार भी ऐसा कि जो कड़ी मशक्कत के बाद ही हो पाता है। जिले में विकास के दावों की पोल खोलती दो तस्वीरें सामने आई है जो अंतिम संस्कार को लेकर ही है और सिस्टम के सामने ये हालात मुंह चिड़ा रहे है। अब पहली तस्वीर देखिए ये जिले के पटेरा ब्लाक के तहत आने वाले रमपुरा गांव से सामने आई है। इस गांव में एक बुजुर्ग महिला का निधन हो गया, बारिश तेज थी और रुकने का नाम नहीं ले रही थी और लोगों ने घंटों तक इंतजार क्या और जरा सा पानी थमा तो अंतिम यात्रा शुरू हुई और जब लोग मरघट तक जानें के चले तो जैसे उन्हें किसी ने सजा दे दी हो। पूरा रास्ता कीचड़ से सना हुआ , जिन लोगों ने जूते चप्पल पहने थे उन्होंने उतार दिए और दलदल से होती हुई अंतिम यात्रा ş्मशान घाट तक पहुंच गई, इस यात्रा में शामिल हर एक सिस्टम को कोस रहा था, जो लोग इस गांव के थे उन्हें शायद अचम्भा नहीं हो रहा था क्योंकि उनकी कई पीढ़ियां ये दंश झेलती चली आ रही है लेकिन जो नाते रिश्तेदार और बाहर के लोग थे उन्हें ये देखकर बेहद तकलीफ हुई और लोग खुद को रोक नहीं पाए और मामला इतना ही कष्ट देने वाला नहीं था बल्कि शव जल पाता है या नहीं इसकी गारंटी नहीं क्योंकि अंतिम संस्कार खुले आसमान के नीचे ही होना था और यहां एक टीन शेड तक नहीं और बारिश के मौसम में खुले में संस्कार करना मतलब मुर्दे के जलने की कोई गारंटी नहीं फिर भी लोग मजबूर है क्योंकि अंतिम संस्कार किए बगैर रह नहीं पाते और सरकार नेताओं अफसरों की कोसते हुए लोगों ने अंतिम संस्कार कर ही दिया लेकिन मरघट के हालातों को कैमरों में कैद करने के बाद लोगों ये वीडियो जिम्मेदार अफसरों तक भी भेजे और गुहार लगाई कि कुछ मत करिए लेकिन लोगों के मरने के बाद सुकून से अंतिम यात्रा और अंतिम संस्कार की सुविधा तो दे दीजिये। अब जरा दूसरी तस्वीर जो सोशल मीडिया पर वायरल हुई और जो भी इसे देख रहा है वो सोचने मजबूर है। ये तस्वीर जिले के हटा ब्लाक के तहत आने वाले पाँजी गांव की है जहां बारिश के दिनों में शवों को पालीथीन के नीचे जलाया गया। सालों से यहां मरघट में व्यवस्थाओं की मांग उठती चली आ रही लेकिन कुछ नहीं हुआ, बारिश के दिनों में यदि किसी की मृत्यु होती हे तो अंतिम संस्कार ऐसे ही तिरपाल या पालीथीन बांधकर ही होता हे। सरकार यहां एक टीन शेड तक नहीं लगा पाई। बहरहाल हालात सही नहीं हे। तश्वीर सब कुछ कह रही हे जो आसानी से समझी जा सकतीं हे बस कोई नहीं समझ पा रहा तो वो जिम्मेदार हे बाइट / आक्रोशित लोग
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*पेड़ से टकराकर खाई में गिरी बोलेरो, एक की मौत अन्य घायल*

NAGESHWER NATH SINGHNAGESHWER NATH SINGHFollowJust now
Itia Thok, Uttar Pradesh:इटियाथोक। थाना क्षेत्र अंतर्गत इटियाथोक-खरगूपुर मार्ग स्थित बेंदुली मोड के पास शुक्रवार की रात बोलेरो अन‍ियंत्र‍ित होकर सड़क किनारे लगे पेड़ से टकराकर खाई में गिर गई। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई।वहीं बोलेरो चालक सहित कई अन्य घायल हो गए।घटना से मृतक के घर में कोहराम मच गया। मिली जानकारी के अनुसार, शुक्रवार की देर रात खरगूपुर थाना क्षेत्र के बालपुर पिपरा भोदर गांव निवासी कृष्णा प्रसाद वर्मा (39) पुत्र शोभाराम गांव के ही बोलेरो चालक हरिश्चंद्र वर्मा व मिथिलेश वर्मा (24) पत्नी हेमराज वर्मा, उर्मिला (50) पत्नी हरिश्चंद्र वर्मा, किशन (11) पुत्र हरिश्चंद्र वर्मा, शिवा(08) पुत्र हरिश्चंद्र वर्मा के साथ बोलोरो गाड़ी में सवार होकर इटियाथोक डॉक्टर अरुण मिश्रा के यहां आ रहे थे।रास्ते में ही बेंदुली गांव के पास मोड पर वाहन अनियन्त्रित होकर पेड़ से जा टकराई, उसके बाद गढ्ढे में गिर गई।वाहन में सवार सभी लोगों को डायल एम्बुलेंस की मदद से उपचार के लिए इटियाथोक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने कृष्णा प्रसाद को मृत घोषित कर दिया।जबकि हादसे में चोटिल हुए अन्य लोगों का इलाज चल रहा है।
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गया के आर्मी अकादमी से 253 अधिकारी कमीशन्ड, टेक्निकल बैच का शानदार पासिंग आउट

Gaya, Bihar:ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी, गया में शॉर्ट सर्विस कमीशन (टेक्निकल) पुरुष और महिला बैच की चौथी पासिंग आउट परेड के दौरान देश को मिले 253 अधिकारी ज्ञान और मोक्ष की नगरी गयाजी में स्थापित ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी में पासिंग आउट परेड कार्यक्रम को आयोजित किया गया। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए वियतनाम पीपुल्स आर्मी के डिप्टी चीफ ऑफ जनरल स्टाफ, लेफ्टिनेंट जनरल ले वान हुआंग ने परेड ग्राउंड और कैडेट्स का निरीक्षण किया। कुशल, सटीक और तालमेल भरी ड्रिल गतिविधियों ने सभी दर्शकों में गर्व की गहरी भावना जगाई। इस गरिमापूर्ण समारोह में शॉर्ट सर्विस कमीशन, टेक्निकल एंट्री (पुरुष और महिला) के चौथे बैच को अधिकारी के तौर पर कमीशन किया गया। इस परेड में 253 ऑफिसर कैडेट्स की पासिंग आउट हुई, जिन्होंने भारतीय सेना के कमीशन प्राप्त अधिकारी बनने के लिए 'अंतिम पग' (अंतिम कदम) पार किया। इसमें SSC (टेक्निकल) पुरुष-65 कोर्स के 218 ऑफिसर कैडेट्स और SSC (टेक्निकल) महिला-36 कोर्स के 35 ऑफिसर कैडेट्स शामिल थे। पासिंग आउट परेड के लिए एकेडमी अंडर ऑफिसर पी. शशि कुमार परेड कमांडर थे। रिव्यूइंग ऑफिसर ने उन ऑफिसर कैडेट्स को मेडल प्रदान किए जिन्होंने अपनी ट्रेनिंग के दौरान बेहतरीन प्रदर्शन किया। एकेडमी अंडर ऑफिसर पी. शशि कुमार ने 'बेस्ट ऑल-राउंडर' चुने जाने पर प्रतिष्ठित 'स्वोर्ड ऑफ ऑनर' जीता। उन्हें गोरखा राइफल्स में कमीशन किया गया है। एकेडमी अंडर ऑफिसर पी. शशि कुमार ने ओवरऑल ऑर्डर ऑफ मेरिट में पहला स्थान हासिल करने पर गोल्ड मेडल जीता। उन्हें गोरखा राइफल्स में कमीशन किया गया है। बटालियन अंडर ऑफिसर दीपक सिंह रावत ने ओवरऑल ऑर्डर ऑफ मेरिट में दूसरा स्थान हासिल करने पर सिल्वर मेडल जीता। उन्हें राजपूत रेजिमेंट में कमीशन किया गया। एकेडमी कैडेट एडजुटेंट नवनीत सिंह ने ओवरऑल ऑर्डर ऑफ मेरिट में तीसरा स्थान हासिल करने पर ब्रॉन्ज मेडल जीता। उन्हें पैरा स्पेशल फोर्सेज में कमीशन किया गया है। कालीधर कंपनी ने ओवरऑल चैंपियन कंपनी बनने पर 'चीफ ऑफ़ आर्मी स्टाफ़ बैनर' जीता। पासिंग आउट परेड के बाद पिप्पिंग सेरेमनी ऑफ़िसर कैडेट्स और उनके परिवारों के लिए संतुष्टि और गर्व का एक शानदार पल था। महीनों की अटूट लगन और कड़ी मेहनत के नतीजे के तौर पर, यह उनकी यात्रा का एक अहम पड़ाव था। बिगुल बजते ही उनके कंधों पर स्टार लगाए गए, जो उनके कमीशंड ऑफ़िसर बनने का प्रतीक था। एकेडमी एडजुटेंट लेफ्टिनेंट कर्नल प्रखर धागत द्वारा देश की सेवा करने की गंभीर शपथ दिलाने के साथ ही जश्न की शुरुआत हुई, क्योंकि कैडेट्स ने भारतीय सेना के भविष्य के लीडर्स के तौर पर अपनी नई भूमिकाओं को अपनाया। गर्व से सिर उठाकर और मकसद से भरे दिलों के साथ, नए कमीशंड ऑफ़िसर्स सम्मान और कर्तव्य से भरी ज़िंदगी की ओर अपना 'पहला कदम' बढ़ाने के लिए गर्व से आगे बढ़े। बाइट:- लेफ्टिनेंट राघवेंद्र झा, दरभंगा बिहार बाइट:- देवेंद्र कुमार झा, लेफ्टिनेंट राघवेंद्र झा के पिता बाइट:- लेफ्टिनेंट कैडेट्स, बाइट:- लेफ्टिनेंट कैडेट्स, के पिता
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मुंगेर के औड़ाबगीचा में घर का ताला तोड़कर साढ़े नौ लाख की चोरी

Munger, Bihar:बंद घर का ताला तोड़कर साढ़े नौ लाख से अधिक की चोरी। दिल्ली गए परिवार के पीछे चोरों ने खंगाले ऊपर-नीचे के सभी कमरे, डेढ़ लाख नकद समेत सोने-चांदी के जेवरात ले गए\n\nमुंगेर : धरहरा थाना क्षेत्र के औड़ाबगीचा गांव में बंद घर का ताला तोड़कर चोरों ने नकदी और जेवरात समेत साढ़े नौ लाख रुपये से अधिक की संपत्ति चोरी कर ली। घटना की जानकारी शनिवार की सुबह उस समय हुई, जब घर के बाहर की लाइट बंद करने पहुंचे गृहस्वामी के पिता ने मुख्य दरवाजे का दोनों ताला टूटा देखा। घर के अंदर सामान बिखरा पड़ा था। औड़ाबगीचा निवासी कृष्णनंदन सिंह की पुत्री बबीता सिंह अपने मायके में ही घर बनाकर कई वर्षों से रह रही हैं। उनके पति और पुत्र दिल्ली में काम करते हैं। बबीता सिंह ने फोन पर बताया कि पुत्र रितिक के बीमार पड़ने की सूचना मिलने पर वह अपनी बहु के साथ 21 August को दिल्ली चली गई थीं। घर में ताला लगा हुआ था। शनिवार की सुबह करीब छह बजे उनके पिता घर के बाहर की लाइट बंद करने पहुंचे। मुख्य द्वार का ताला टूटा देखकर उन्होंने तत्काल इसकी सूचना बबीता सिंह को फोन पर दी। इसके बाद स्थानीय थाना को भी जानकारी दी गई। सूचना मिलते ही पुलिस घटनास्थल पहुंचकर मामले की छानबीन मे जुट गई।\n\nपीड़िता के अनुसार, चोरों ने घर के ऊपर और नीचे स्थित सभी कमरों को खंगाला। तीन कमरों में रखे गोदरेज और ट्रंक का ताला तोड़कर करीब डेढ़ लाख रुपये नकद तथा लगभग आठ लाख रुपये मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण चुरा लिए। चोरी गए सामान में मंगलसूत्र, टीका, पांच अंगूठियां, कान और गले के आभूषण, पायल, मछली समेत अन्य जेवरात शामिल हैं।\n\nधरहरा थानाध्यक्ष सोनू कुमार ने बताया कि सूचना मिलने पर पुलिस को घटनास्थल पर भेजा गया है। अभी आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। आवेदन मिलने के बाद जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि घर को लंबे समय तक बंद कर कहीं बाहर जाने की स्थिति में इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को अवश्य दें।\n\nबाइट :कृष्णनंदन सिंह पीड़ित का पिता
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पटना गांधी मैदान में वित्तरहित शिक्षकों का प्रदर्शन, वेतन-अनुदान के लिए आमरण अनशन चेतावनी

Patna, Bihar:पटना के गांधी मैदान स्थित जेपी गोलंबर पर वित्तरहित शिक्षकों ने वेतनमान और वर्षों से लंबित अनुदान की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया ,शिक्षक कफन पदयात्रा निकालते हुए जेपी गोलंबर पहुंचे और अपनी मांगों के समर्थन में या तो वेतन देदो, या कफन देदो के नारे लगाए प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बिहार के माध्यमिक विद्यालय, इंटर विद्यालय और डिग्री विद्यालयों में कार्यरत सभी वित्वरहित शिक्षक-कर्मचारियों को वेतनमान दिया जाए, शिक्षकों का दावा है कि सरकार की अनुदान नीति के तहत उनका 8, 9 और 10 साल तक का अनुदान बकाया है, लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण शिक्षक आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं शिक्षकों का कहना है कि शिक्षा समिति की ओर से वेतनमान देने की अनुशंसा की गई है और हाईकोर्ट की तरफ से भी उनके पक्ष में आदेश आया है, शिक्षकों का आरोप है कि बिहार सरकार बार-बार कोर्ट में अपील और रिव्यू पिटिशन के जरिए मामले को आगे बढ़ा रही है प्रदर्शनकारियों ने अब सरकार को आमरण अनशन की चेतावनी दी है, शिक्षकों का कहना है कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे आमरण अनशन पर बैठेंगे और जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मानती, तब तक आंदोलन जारी रखेंगे इधर, कफन पदयात्रा को देखते हुए प्रशासन ने जेपी गोलंबर की चारों तरफ से घेराबंदी कर दी, सभी प्रमुख रास्तों पर बैरिकेडिंग की गई और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया गया, मौके पर पुलिस और प्रशासन की टीम मौजूद रही प्रशासन की रोक के बाद वित्तरहित शिक्षक जेपी गोलंबर पर ही धरने पर बैठ गए, प्रदर्शन के चलते यातायात प्रभावित हुआ, जिसके बाद ट्रैफिक पुलिस जेपी गोलंबर और आसपास के रास्तों पर यातायात को दोबारा सुचारू कराने में जुटी है। स्थिति पर प्रशासन लगातार नजर बनाए हुए है।
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भाजपा सरकार का वह नारा यहां बेकार साबित हो रहा है जिसमें कहा गया हैसबका साथ सबका विकास सबका विश्वास

KAILASH NATH VERMAKAILASH NATH VERMAFollow2m ago
Gonda, Uttar Pradesh:भाजपा सरकार का वह नारा यहां बेकार साबित हो रहा है जिसमें कहा गया है ,सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास, गोण्डा जिले के विधान सभा कटरा बाजार के विकास खंड रुपईडीह के ग्राम वीरपुर भोज को जाने वाली सड़क कोआप यह देख सकते हैं कि सड़क पर विसूही नदी का तेज धार पानी बह रहा है,यहां के सपा नेता विनोद कुमार शुक्ला का आरोप है कि इसके पास नदी पर करीब 25 वर्ष पूर्व एक पुल का निर्माण किया गया था जिसका आज तक मरम्मत तक नहीं किया गया। यहां थोड़ा आगे विसूही नदी का तेज धार सड़क को पार कर रहा है जिसपर आने जाने वालों को खतरा बना हुआ है, कुछ वर्ष पूर्व यहां एक बच्चे की डूब कर मौत भी हो गई थी, लेकिन इसके बावजूद भी ना तो प्रशासन ने कुछ किया और ना यहां के 15 वर्षों से विधायक होते आ रहे विधायक बावन सिंह ने ही कुछ किया। आज भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। सड़क पर आप देख सकते हैं तेज धार में पानी बह रहा है इसमें आने-जाने में असुविधा हो रही है। इस सड़क के दाहिने और बाएं आप नहीं जा सकते हैं काफी गहराई है और कहां से सड़क है। अपरिचित तो अगर थोड़ा सा दाएं और बाएं हुआ तो सीधे नदी में चला जाएगा और उसकी डूब कर मौत निश्चित है। विनोद शुक्ला ने इस सड़क के निर्माण और ऐसे स्थल पर दोनों तरफ एंगल लगाने की मांग की है। जिससे यह जानकारी हो जाए कि यहां के बाद गहराई है। और यहां सड़क है फिर हाल सपा नेता के इस कदम को लेकर स्थानीय लोगों द्वारा और वीरपुर भोज के गांव वासियों द्वारा सरहाना की है।
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कांग्रेस राहुल गांधी मुकदमे और रामलीला मैदान शुद्धिकरण मामले पर राष्ट्रपति से मिलने की धमकी

Haldwani, Uttarakhand:हल्द्वानी में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर दर्ज मुकदमे को लेकर कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को राज्यसभा सांसद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चंद्रकांत हंडोरे कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ एसएसपी कार्यालय पहुंचे। यहाँ उन्होंने मामले के जांच अधिकारी सीओ अमित सैनी से मुलाकात कर पूरे प्रकरण को लेकर बातचीत की। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सीओ हल्द्वानी को ज्ञापन सौंपते हुए राहुल गांधी पर दर्ज मुकदमा वापस लेने की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने मामले में निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है, कांग्रेस नेताओं ने हल्द्वानी रामलीला मैदान के शुद्धिकरण के मामले को भी प्रमुखता से उठाया। राज्यसभा सांसद चंद्रकांत हंडोरे ने शुद्धिकरण करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाओं को किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, हंडोरे ने कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाती रहेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं हुई तो पार्टी बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाएगी। कांग्रेस नेताओं ने पुलिस से दोनों मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है। कांग्रेस के सभी SC सांसद जल्द ही इस मामले पर राष्ट्रपति से भी मिलेंगे,
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Shahpura waterlogged funeral procession exposes administrative claims

Jaipur, Rajasthan:जिला - JAIPUR विधानसभा - शाहपुरा(जयपुर ग्रामीण) कस्बा - शाहपुरा देवन रोड पर जलभराव के बीच निकली शव यात्रा, बारिश के गंदे पानी से होकर अंतिम यात्रा को गुजरना पड़ा, फिसलने के खतरे के बीच लोगों ने दी अंतिम विदाई। जलनिकासी की बदहाल व्यवस्था ने खोली प्रशासन के विकास के दावों की पोल; जिम्मेदारों की अनदेखी पर लोगों में नाराजगी। शाहपुरा(जयपुर ग्रामीण)- किसी अपने को अंतिम विदाई देने निकली शव यात्रा के सामने जब रास्ता नहीं, बल्कि गंदे बरसाती पानी का सैलाब खड़ा हो जाए, तो यह महज जलभराव की समस्या नहीं रह जाती, बल्कि पूरी व्यवस्था की संवेदनशीलता पर सवाल बन जाती है। शाहपुरा के देवन रोड पर शनिवार को कुछ ऐसा दृश्य सामने आया, जहां जलभराव के बीच से शव यात्रा को गुजरना पड़ा। शव यात्रा में शामिल लोगों को पानी के बीच से संभल-संभलकर गुजरना पड़ा। हर कदम पर फिसलने और हादसे का खतरा बना रहा। यह दृश्य देखकर वहां मौजूद लोगों के मन में एक ही सवाल था, क्या किसी इंसान की अंतिम यात्रा के लिए भी प्रशासन एक साफ और सुरक्षित रास्ता उपलब्ध नहीं करा सकता? बारिश ने शहर की सड़कों पर पानी क्या भरा, प्रशासन के जलनिकासी और विकास के दावों की परतें भी बह गईं। कागजों में व्यवस्थाएं दुरुस्त नजर आती हैं, लेकिन जमीन पर हालात यह हैं कि आम राहगीर तो दूर, शव यात्रा तक को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। देवन रोड का यह दृश्य सिर्फ जलभराव की तस्वीर नहीं है, बल्कि व्यवस्थाओं की उस संवेदनहीनता का आईना है, जहां समस्या का समाधान बारिश आने के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले होना चाहिए था। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण बारिश के बाद सड़क पर पानी भर जाता है, लेकिन जिम्मेदारों की ओर से स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। विकास के दावों के बीच देवन रोड का यह दृश्य प्रशासन से सवाल पूछ रहा है—जब शहर की एक अंतिम यात्रा को भी गंदे पानी में रास्ता तलाशना पड़े, तो आखिर इन विकास के दावों का फायदा किसे मिला?
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वाराणसी में बाढ़ से संक्रमण खतरा बढ़ा; अस्पताल ने डेंगू-स्वाइन फ्लू के लिए तैयारियां पूरी कर लीं

JPJai Pal14m ago
Varanasi, Uttar Pradesh:वाराणसी में बाढ़ से बढ़ा संक्रमण का खतरा गंगा का पानी धीरे-धीरे कम होने के साथ ही बाढ़ प्रभावित इलाकों में जलजमाव से बीमारियों का खतरा तेजी से मंडराने लगा है। • शिवप्रसाद गुप्त अस्पताल प्रशासन पूरी तरह अलर्ट, मंडलीय चिकित्सालय ने संभावित मरीज बढ़ने की आशंका को देखते हुए सभी तैयारियां पूरी कर ली है। • डेंगू, मलेरिया और स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीजों के लिए विशेष वार्ड बनाए गए हैं और बेड रिजर्व रखे गए हैं। • वाराणसी के तटीय व निचले इलाके पानी में डूबे हुए हैं, जिससे स्वच्छता और कीटनाशक छिड़काव की चुनौती बढ़ गई है। • जलभराव से मच्छरों का प्रकोप बढ़ने और मौसम बदलने से डेंगू व स्वाइन फ्लू के फैलने की आशंका जताई जा रही है। • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर राहत कार्यों और तैयारियों का जायजा लेंगे। • मुख्यमंत्री बाढ़ पीड़ितों के लिए बने राहत कैंपों का निरीक्षण करने के साथ स्वास्थ्य अधिकारियों को जरूरी निर्देश देंगे। • ओपीडी और इमरजेंसी में आने वाले मरीजों के लिए सभी आवश्यक एंटीबायोटिक्स, सिरप व टेस्टिंग किट उपलब्ध कराई गई हैं। • अस्पताल प्रबंधन ने डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की छुट्टियां रद्द कर उन्हें अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। • प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित इलाकों के निवासियों से उबला हुआ पानी पीने, आसपास पानी न जमा होने देने और लक्षण दिखने पर तुरंत अस्पताल पहुंचने का आग्रह किया है।
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आगरा में जलभराव ने प्रसव के लिए एंबुलेंस नहीं पहुँचाई

Agra, Uttar Pradesh:प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला तक नहीं पहुंची एंबुलेंस। जलभराव बना दीवार, एंबुलेंस के पहिए थमे। बारिश में गांव के रास्ते पर जलभराव बना मुसीबत। प्रसव पीड़ा से तड़पती महिला को चारपाई पर लिटाया। चारपाई को कंधों पर उठाकर जलभराव से गुजरे परिजन। करीब आधा किलोमीटर तक जलभराव में चले परिजन। मजबूर परिजन महिला को एंबुलेंस तक लेकर पहुंचे। गर्भवती महिला को चारपाई पर ले जाते हुए वीडियो वायरल। सिस्टम की नाकामी की तस्वीर आई सामने। सवाल - जब एंबुलेंस नहीं पहुंची तो विकास के दावे कितने सच। ग्रामीण बोले बीमारी में वाहन नहीं चारपाई ही सहारा। फतेहाबाद क्षेत्र के गांव राम दास ठार चाची पुरा खड़ेर का मामला।
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कुलगाम के मेन टाउन में वाइल्ड भंग खत्म, पुलिस ने शुरू किया सख्त अभियान

Kulgam, کولگام: مین ٹاؤن میں وائلڈ بھنگ کے خاتمے کے لیے پولیس کی کارروائی اینکر: کولگام میں منشیات کے خلاف جاری مہم کے تحت پولیس نے مین ٹاؤن کے مختلف علاقوں میں وائلڈ بھنگ کے خاتمے کے لیے کارروائی شروع کر دی ہے۔ پولیس اہلکاروں کی جانب سے سڑکوں کے کناروں، کھلے مقامات اور دیگر جگہوں پر اُگی بھنگ کو تلف کیا جا رہا ہے۔ مقامی لوگوں نے پولیس کی اس کارروائی کو خوش آئند قرار دیتے ہوئے کہا ہے کہ وائلڈ بھنگ منشیات کے پھیلاؤ کا ایک بڑا ذریعہ بن سکتی ہے، اس لیے اس کے خاتمے کے لیے انتظامیہ اور پولیس کی جانب سے مزید مؤثر اقدامات کیے جانے چاہیں۔ مقامی شہریوں کا کہنا ہے کہ نوجوان نسل کو منشیات سے دور رکھنے کے لیے صرف کارروائی ہی نہیں بلکہ عوامی بیداری اور والدین و سماج کے تعاون کو بھی یقینی بنانا ضروری ہے۔ واضح رہے کہ جموں و کشمیر کو منشیات سے پاک بنانے کے مقصد سے رواں سال ایل جی منوج سنہا کی جانب سے 100 روزہ اینٹی ڈرگ مہم بھی چلائی گئی تھی، جس کے تحت منشیات کے خلاف کارروائیوں کے ساتھ ساتھ عوامی بیداری پر بھی زور دیا گیا۔ کولگام میں پولیس کی جانب سے وائلڈ بھنگ کے خاتمے کی اس مہم کو اسی سلسلے کی ایک اہم کڑی قرار دیا جا رہا ہے۔ مقامی لوگوں نے امید ظاہر کی ہے کہ یہ کارروائی شہر اور گردونواح میں منشیات کے خلاف جنگ کو مزید مضبوط بنانے میں مددگار ثابت ہوگی۔
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लखनऊ में निशान-ए-मीर बदहाल, शायर की कब्र की तलाश ने इतिहास को चुभा

Lucknow, Uttar Pradesh:लखनऊ जिसे अदब, तहज़ीब और शायरी का शहर कहा जाता है लेकिन इसी शहर में उर्दू शायरी के “ख़ुदाए-सुख़न” मीर तक़ी मीर की यादगार खुद बदहाली का शिकार है सिटी स्टेशन के पास स्थित “निशान-ए-मीर” स्मारक आज उपेक्षा की कहानी बयां कर रहा है जिस महान शायर ने सदियों तक उर्दू अदब को अपनी शायरी से रोशन किया, उनकी असली कब्र वक्त के साथ इतिहास में खो गई और अब उनकी याद में बनाया गया स्मारक भी बदहाल होता जा रहा है आने वाले 20 सितंबर को उनकी वफात है ऐसे में उनके स्मारक की क्या हाल है देखिए हमारी ये खास रिपोर्ट में सलाम टीवी पर आज बात उस शायर की, जिसे उर्दू शायरी की दुनिया में “ख़ुदाए-सुख़न” कहा जाता है नाम है मीर तक़ी मीर मोहम्मद तक़ी जिन्हें दुनिया मीर तक़ी मीर के नाम से जानती है, उर्दू के महानतम शायरों में शुमार किए जाते हैं उनका जन्म 18वीं सदी में आगरा में हुआ और 20 सितंबर 1810 को लखनऊ में उनका निधन हुआ मीर की शायरी में दर्द है ग़म है, मोहब्बत है, और उजड़ते हुए शहरों का दर्द भी मीर का जीवन आसान नहीं था कम उम्र में पिता का साया सिर से उठ गया। इसके बाद जिंदगी की मुश्किलों ने उन्हें बहुत कुछ सिखाया रोज़गार और बेहतर जिंदगी की तलाश में मीर दिल्ली पहुंचे लेकिन दिल्ली भी उस दौर में लगातार हमलों और तबाही का सामना कर रही थी नादिर शाह का हमला फिर अहमद शाह अब्दाली के आक्रमण उजड़ती दिल्ली और बिखरती जिंदगी का दर्द मीर के दिल में उतरता गया शायद यही वजह रही कि मीर की शायरी में दर्द इतना गहरा दिखाई देता है कि पढ़ने वाला उसे अपना दर्द महसूस करने लगता है बता दे कि मीर ने उर्दू शायरी को नई ऊंचाइयां दीं उनके छह दीवान उर्दू शायरी की अमूल्य धरोहर माने जाते हैं ज़िक्र-ए-मीर,कुल्लियात-ए-मीर,कुल्लियात-ए-फ़ारसी और नुकत-उस-शुअरा जैसी रचनाओं ने उन्हें अदब की दुनिया में अमर कर दिया मीर की महानता को बाद के बड़े-बड़े शायरों ने भी स्वीकार किया।उनकी शायरी की सबसे बड़ी खासियत थी सादगी में गहराई उर्दू साहित्यकार/इतिहासकार जनरल सेक्रेटरी रॉयल फैमिली अवध नवाब शिकोह आज़ाद बताते है कि “मीर तक़ी मीर उर्दू शायरी के बहुत बड़े नाम हैं उनकी शायरी में इंसानी जज्बात, दर्द, मोहब्बत और जिंदगी की सच्चाई बहुत गहराई से दिखाई देती है दिल्ली की तबाही के बाद मीर अपनी जिंदगी के आखिरी दौर में लखनऊ आए उस समय लखनऊ नवाबी तहज़ीब और अदब का बड़ा केंद्र था मीर यहां नवाब आसिफ़-उद्दौला के दौर की अदबी फिज़ा का हिस्सा बने कहा जाता है कि उन्होंने अपने जीवन के आखिरी साल लखनऊ में ही गुजारे और उनके कई महत्वपूर्ण साहित्यिक काम भी इसी दौर से जुड़े रहे लेकिन आज सवाल यह है कि जिस लखनऊ ने मीर को अपना बनाया क्या आज वही शहर उनकी विरासत को संभाल पा रहा है सरकार को नवाबों के लिए कोई संग्रहालय या कोई ऐसा पार्क बनाना चाहिए जिससे उनका नाम जीवित रहे मैं सलाम टीवी का बेहद शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने उर्दू के बड़े शायर मीर ताकि मीर के लिए आवाज उठाई सिटी स्टेशन के आसपास बना “निशान-ए-मीर” आज मीर की खोई हुई कब्र की याद दिलाता है एक छोटा सा स्मारक जिस पर लिखा गया निशान-ए-मीर कलम और दवात की आकृति के जरिए उस महान शायर को याद करने की कोशिश की गई लेकिन अब इस ऐतिहासिक निशानी के आसपास बदहाली नजर आती है कहीं झाड़ियां कहीं गंदगी और कहीं उपेक्षा के निशान जिस स्मारक को उर्दू अदब की एक बड़ी विरासत के तौर पर संभाला जाना चाहिए था, उसकी हालत आज सवाल खड़े करती है इतिहासकार और नवाब मसूद अब्दुल्ला के बताते हैं कि,मीर तक़ी मीर को अवध के नवाब आसफुद्दौला ने दिल्ली से लखनऊ बुलाया वह उनकी शायरी सुनते थे ने उन्होंने एक किस्सा उनका सुनाया की जब मीर लखनऊ आए तो नवाब आसिफुद्दौला के दरबार में शरीक हुए दरबार की महफिलों में मीर अपने अशआर सुनाया करते थे और नवाब के उस्ताद भी रहे कहा जाता है कि एक बार शीश महल के तालाब में नवाब आसिफुद्दौला मछलियों का शिकार कर रहे थे उसी दौरान मीर ने कई अशआर सुनाए. इस दौरान नवाब ने उनकी शायरी पर ध्यान नहीं और वाह वाह नही कहा क्योंकि वह मछलियां के शिकार में व्यस्त थे इस पर मीर बेहद मायूस हुए और महफिल से चले आए इस वाकये का सदमा इतना गहरा था कि मीर बीमार पड़ गए. बाद में नवाब मीर के घर पहुंचे और उपहार स्वरूप कीमती पत्थर की नाग वाली अंगूठी भेंट की आगे उन्होंने बताया का मीर का निधन लखनऊ में हुआ था और उन्हें सिटी स्टेशन के पास दफनाया गया था कहा जाता है कि समय के साथ रेलवे लाइन बिछने और इलाके के बदलते स्वरूप के कारण उनकी असली कब्र का निशान मिट गया आज जहां कभी उनकी कब्र होने की बात कही जाती है, वहां इतिहास की पहचान ढूंढना भी मुश्किल हैऐसे में “निशान-ए-मीर” ही उस महान शायर की मौजूदगी की आखिरी बड़ी यादों में से एक है
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