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जयपुर जिला प्रशासन ने योजनाओं की गति बढ़ाने के लिए 15 दिन का अल्टीमेटम दिया

Jaipur, Rajasthan:एंकर- सरकारी योजनाएं कागजों पर तेज रफ्तार से दौड़ती नजर आती हैं, लेकिन जमीन पर उनकी चाल अक्सर सुस्त पड़ जाती है। जयपुर में भी कुछ ऐसा ही फीडबैक सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने अब रफ्तार बढ़ाओ मोड ऑन कर दिया है। जिला कलक्टर संदेश नायक ने फ्लैगशिप योजनाओं की समीक्षा बैठक में साफ संदेश दिया अब आंकड़ों का खेल नहीं चलेगा, असली प्रगति दिखनी चाहिए। जिन विभागों की रैंकिंग नीचे है, उन्हें 15 दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा गया है कि सुधार नजर आना चाहिए। बैठक में सामने आया कि कई योजनाओं में आवेदन तो हो रहे हैं, लेकिन प्रक्रियाओं में अटक रहे हैं। खासतौर पर एनएफएसए से जुड़ी फाइलें और ई-मित्रों पर लंबित आवेदन प्रशासन के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं। कलेक्टर ने साफ कहा जहां दस्तावेजों की कमी के कारण आवेदन अटक रहे हैं, वहां जिम्मेदारी तय होगी। ऊर्जा विभाग की कुसुम योजना हो या लाडो प्रोत्साहन योजना कई योजनाओं में रफ्तार बढ़ाने की जरूरत बताई गई। वहीं स्वच्छ भारत मिशन, स्वामित्व योजना, मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान और प्रधानमंत्री आवास योजनाओं में भी सुधार के निर्देश दिए गए। शहरी क्षेत्र में प्रधानमंत्री आवास योजना की धीमी प्रगति पर भी नाराजगी जताते हुए विभागों के बीच बेहतर तालमेल बनाने को कहा गया है। साथ ही ‘मिशन हरियालो राजस्थान’ में लक्ष्य के अनुसार काम नहीं होने पर भी सख्ती दिखाई गई।
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कान्हा टाइगर रिजर्व में शावक बाघ की मौत, फोरेंसिक रिपोर्ट से खुलेंगे असली कारण

Mandla, Madhya Pradesh:मध्यप्रदेश के मण्डला से इस वक्त की एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां कान्हा टाइगर रिजर्व में एक बाघ शावक की मौत ने वन विभाग और पार्क प्रबंधन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आखिर कैसे हुई शावक की मौत… कान्हा टाइगर रिजर्व के जंगल से एक दुखद खबर सामने आई है। यहां करीब 15 से 16 महीने के एक नर बाघ शावक का शव जंगल के भीतर एक नाले के किनारे मिला है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक शावक पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रहा था और उसने खाना-पीना भी लगभग बंद कर दिया था। वन विभाग की टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही थी, लेकिन बीते दो दिनों से शावक का कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था। जिसके बाद सर्च ऑपरेशन के दौरान आज उसका शव बरामद किया गया। घटना की सूचना मिलते ही टाइगर रिजर्व के अधिकारी और वन्यजीव चिकित्सकों की टीम मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू की गई। तय प्रोटोकॉल के तहत शावक का पोस्टमार्टम किया गया और मौके का बारीकी से निरीक्षण किया गया। शव परीक्षण के बाद शावक का अंतिम संस्कार कर दिया गया है, वहीं बिसरा फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, ताकि मौत के असली कारणों का खुलासा हो सके। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि पिछले करीब 8 महीनों में कान्हा टाइगर रिजर्व में 8 बाघ और 5 तेंदुओं की मौत हो चुकी है, जो पार्क प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। पार्क की डीएफओ अमिता केबी बताती है कि फिलहाल शावक की मौत की असली वजह फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगी, लेकिन लगातार हो रही वन्यजीवों की मौतें कहीं न कहीं सिस्टम पर बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर रही हैं।
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फर्जी मेडिकल रिपोर्ट से बाला जी सेंटर सील, जिले में हड़कंप

Khairgarh, Uttar Pradesh:खैरागढ़। जिले के स्वास्थ्य तंत्र को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है, जहां वर्षों से कथित तौर पर फर्जी मेडिकल रिपोर्ट के सहारे संचालित हो रहे बाला जी डायग्नोस्टिक सेंटर पर आखिरकार प्रशासन ने सख्त कार्रवाई करते हुए उसे सील कर दिया। इस कार्रवाई के बाद स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप की स्थिति बन गई है। कलेक्टर के निर्देश पर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने जांच के बाद यह कार्रवाई की। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि सेंटर में बड़ी संख्या में संदिग्ध और फर्जी रिपोर्ट तैयार की जा रही थीं, जिससे मरीजों के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ किया जा रहा था। जाँच में एक अहम खुलासा यह भी हुआ कि डॉ प्रदीप कुमार ने 30 जून 2023 को ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, बावजूद इसके उनके नाम का उपयोग कर लगातार रिपोर्ट जारी की जा रही थीं। इस तथ्य ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है और निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों की मानें तो यह गड़बड़ी केवल एक केंद्र तक सीमित नहीं हो सकती। गंडई और सालेवारा क्षेत्र में भी इसी तरह की गतिविधियों की आशंका जताई जा रही है, जिससे पूरे जिले में फर्जी मेडिकल नेटवर्क के सक्रिय होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कार्रवाई के बाद जहां आम लोगों में प्रशासन के प्रति भरोसा बढ़ा है, वहीं यह मांग भी तेज हो गई है कि मामले की गहन जांच कर दोषियों के खिलाफ पीसीपीएनडीटी एक्ट सहित अन्य प्रासंगिक कानूनों के तहत सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। अब यह देखना अहम होगा कि यह कार्रवाई केवल एक केंद्र तक सीमित रहती है या फिर पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचकर व्यापक स्तर पर कार्रवाई की जाती है।
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अमित गोयल ने सोशल मीडिया पोस्ट से पार्टी के भीतर नाराजगी जताई

Jaipur, Rajasthan:बीजेपी जयपुर शहर अध्यक्ष की पीड़ा ? सोशल मीडिया पर लिखा- किसका करूं एतबार, किससे करें गिला ! बीजेपी जयपुर शहर अध्यक्ष का दिल आखिर किसने तोड़ा ? शहर अध्यक्ष अमित गोयल ने सोशल मीडिया पर अपनी पीड़ा उजागर की है ! उसने लिखा कि करें किसका एतबार, किससे करें गिला ! सोशल मीडिया पर डाली यह पोस्ट चर्चा का विषय बनी हुई है । महिला आरक्षण बिल गिरने के बाद बीजेपी की ओर से महिला जन आक्रोश रैली निकाली गई। इस रैली में भीड़ जुटाने के लिए बीजेपी महिला मोर्चा अध्यक्ष राखी राठौड़, मोर्चा उपाध्यक्ष और पदाधिकारियों के साथ बीजेपी जयपुर शहर अध्यक्ष अमित गोयल को भी जिम्मेदारी दी गई। रैली में भीड़ जुटाने के लिए बड़े बड़े दावे किए गए… लेकिन ज़मीनी हकीकत ने कई सवाल खड़े कर दिए। इस रैली के बाद बीजेपी शहर अध्यक्ष अमित गोयल ने सोशल मीडिया पर एक भावनात्मक पोस्ट डाल दी। गोयल ने पोस्ट में लिखा कि “करें किसका एतबार यहां सब अदाकार ही तो हैं… और गिला भी किससे करें सब अपने यार ही तो हैं…” इस पोस्ट के बाद बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ ही पार्टी हल्कों में भी चर्चा शुरू हो गई। लोग आपस में पूछने लगे कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि सत्ता में बैठी पार्टी के शहर अध्यक्ष को अपने ही “यारों” पर तंज कसना पड़ा ? गोयल ने पार्टी में सबको ही कलाकार बता दिया और किसी पर भी भरोसा नहीं करने की की बात कही, वहीं यह भी लिख दिया कि गिला यानी शिकायत किससे करें, सब अपने ही हमदर्द हैं। सोशल मीडिया के साथ ही पार्टी कार्यालय में तरह तरह की चर्चा चल पड़ी। लोग इसे जन आक्रोश महिला सम्मेलन से जोड़कर देख रहे हैं। दरअसल इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, उप मुख्यमंत्री दिया कुमारी सहित कई बड़े नेता मौजूद रहे। तैयारीयां बड़े स्तर पर की गईं, बैठकों का दौर चला और जिम्मेदारियां भी सौंपी गईं। सूत्रों के अनुसार बीजेपी महिला मोर्चा की प्रदेशाध्यक्ष और पदाधिकारी ने हजारों महिलाओं को लाने का भरोसा दिलाया था। वहीं शहर अध्यक्ष अमित गोयल ने भी करीब 70 बसें लाने का दावा किया था। जयपुर सहित आसपास की 10 विधानसभाओं में हर मंडल, वार्ड और बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई थी। लेकिन जब पदयात्रा शुरू हुई, तो तस्वीर दावों से बिल्कुल उलट नजर आई। यहीं से सवाल खड़े होने लगे कि भीड़ जुटाने का दावा करने वाले कार्यकर्ता आखिर कहां गायब हो गए ?क्या कागज़ों में मजबूत दिखने वाला संगठन ज़मीन पर कमजोर पड़ गया? इसके बाद अमित गोयल की सोशल मीडिया पोस्ट ने इन सवालों को और हवा दे दी। उनके शब्द साफ इशारा करते हैं कि नाराजगी विपक्ष से नहीं, बल्कि अपने ही संगठन के लोगों से है। राजनीतिक गलियारों में सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या कार्यक्रम जल्दबाजी में किया गया, या फिर जिन कार्यकर्ताओं की लंबी सूची तैयार की गई थी, उनमें जमीनी पकड़ का अभाव था। राजनीतिक कार्यक्रमों में भीड़ सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि संगठन की ताकत का आईना होती है.
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बाराबंकी: गैस सिलेंडर रिसाव से घर में आग, दो बच्चे गंभीर झुलसे

Barabanki, Uttar Pradesh:Barabanki Story: रसोई में काल बना सिलेंडर, भाई-बहन गंभीर रूप से झुलसे, दो घरों की गृहस्थी जलकर राख बाराबंकी जिले में जैदपुर थाना क्षेत्र के सेवकी पुरवा गांव में मंगलवार सुबह उस समय चीख-पुकार मच गई, जब एक घर में खाना बनाते समय गैस सिलेंडर से हुए रिसाव ने विकराल रूप ले लिया। इस भीषण अग्निकांड में दो मासूम जिंदगियां आग की लपटों में घिरकर गंभीर रूप से झुलस गईं, वहीं मेहनत की कमाई से जुटाया गया लाखों का अनाज और सामान पल भर में खाक हो गया। जानकारी के मुताबिक रामदेव के घर में उनकी बेटी प्रिया खाना तैयार कर रही थी तभी अचानक गैस लीक होने से आग भड़क उठी। प्रिया को बचाने की कोशिश में उसका भाई आकाश भी बुरी तरह झुलस गया। आग की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि लपटों ने पक्की दीवार तक को चपेट में ले लिया और पड़ोसी कंधई लाल के घर तक जा पहुंचीं। इस हादसे में कंधई लाल के घर रखा 12 बोरी सरसों, पोस्ता दाना और भारी मात्रा में अनाज जल गया है। दमकल विभाग के पहुंचने से पहले ही ग्रामीणों ने सूझबूझ दिखाते हुए निजी इंजन और पानी की मदद से आग पर काबू पाया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। घटना के बाद राजस्व विभाग की टीम और नायब तहसीलदार ने मौके पर पहुंचकर क्षति का जायजा लिया। प्रशासन ने पीड़ित परिवारों को जल्द आर्थिक सहायता दिलाने का आश्वासन दिया है।
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अवैध रेत उत्खनन के विरोध में ग्रामीणों का प्रदर्शन, 11 हाइवा-पोकलेन जप्त

Sakti, एंकर सक्ती जिले के मरघट्टी ग्राम में अवैध रेत उत्खनन के लिए ग्रामीणों ने चैन माउंटेन एवं 11 हाइवा को रोका विभाग को सूचना देने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचे इसके लिए भाजपा के जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि को 10 घंटा प्रदर्शन करना पड़ा मामला में पट्टा धारक दानी सिंह ठाकुर द्वारा निर्धारित रकबा से अन्यत्र उत्खनन एवं पोकलेन एवं हाइवा से उत्खनन किया जा रहा था जो कि पूरी तरीके अवैधानिक था ग्रामीणों ने इसकी सूचना पूर्व में भी अधिकारियों को दी थी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी आखिरकार 10 घंटे के प्रदर्शन के बाद मौके पर अनुविभागीय दंडाधिकारी एवं खनिज अधिकारी के पहुंचने के बाद 11 हाइवा एवं पोकलेन को जप्त कर खनिज अधिनियम की तहत कार्रवाई किया गया है
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दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में हंगामे के बीच सीनेट बैठक टली; राज्यपाल आगमन पर बवाल तेज

Darbhanga, Bihar:दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में दिनभर हंगामा, सीनेट बैठक टली; राज्यपाल के आगमन से पहले बवाल तेज.,कर्मचारियों का प्रदर्शन उग्र, आत्मदाह का प्रयास; कुलपति पर भ्रष्टाचार और वेतन-पेंशन रोकने के आरोप दरभंगा स्थित कामेश्वर सिंह संस्कृत विश्वविद्यालय में मंगलवार को पूरे दिन हंगामा और विरोध प्रदर्शन का माहौल बना रहा। विश्वविद्यालय की प्रस्तावित सीनेट बैठक से पहले कर्मचारियों ने मुख्य द्वार पर धरना देकर जमकर विरोध किया, जिसके कारण बैठक को अंततः स्थगित करना पड़ा। प्रदर्शन के दौरान स्थिति उस वक्त गंभीर हो गई जब एक पेंशनधारी ने आत्मदाह करने का प्रयास किया। मौके पर मौजूद लोगों ने किसी तरह स्थिति को संभाला। कर्मचारियों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा वेतन और पेंशन का भुगतान रोका जा रहा है, जबकि संस्थान के पास पर्याप्त फंड उपलब्ध है। सीनेट की बैठक में शामिल होने पहुंचे सीनेट सदस्य बेनीपुर से जदयू विधायक विनय कुमार चौधरी, पूर्व एमएलसी दिलीप झा सहित सीनेट के कई सदस्य भी मुख्य गेट पर बैठक में जाने से कर्मियों ने रोक दिया जिसके बाद सभी सीनेट सदस्य कर्मियों के साथ ही धरने में शामिल हो गए। इस दौरान कुलपति लक्ष्मी निवास पांडेय से तीखे सवाल-जवाब किए गए। प्रदर्शनकारियों ने कुलपति पर भ्रष्टाचार और जातिवाद के गंभीर आरोप लगाए। कई बार स्थिति उग्र हो गई, जिससे सीनेट की बैठक बाधित रही और अंततः उसे टाल दिया गया। गौरत है कि बुधवार को बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन सीनेट की बैठक में शामिल होने के लिए दरभंगा आने वाले हैं। ऐसे में विश्वविद्यालय परिसर की मौजूदा स्थिति को देखते हुए प्रशासन के सामने व्यवस्था बनाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है。 अब सबकी नजरें राज्यपाल के दौरे पर टिकी हैं कि उनके आगमन के दौरान हालात कैसे रहते हैं और विवाद का क्या समाधान निकलता है। बाइट 1,विनय कुमार चौधरी ,सीनेट सदय सह जदयू विधायक 2,दिलीप चौधरी ,पूर्व एमएलसी सह सीनेट सदस्य 3,लक्ष्मी निवास पांडेय,कुलपति संस्कृत विश्विद्यालय
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