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Kuldeep ChauhanKuldeep ChauhanFollow20 Jul 2024, 05:21 pm
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SIR के तहत 6.5 करोड़ नाम हटाने पर बहस, अवैध प्रवासियों पहचान के लिए समिति

Noida, Uttar Pradesh:केंद्र सरकार ने सबसे पहले एक दस्तावेज़-आधारित SIR (विशेष पहचान प्रक्रिया) लागू की, जिसके तहत 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मतदाता सूचियों से लगभग 6.5 करोड़ नाम हटा दिए गए। अब वह एक ऐसी समिति बनाना चाहती है जो इन हटाए गए नामों की जाँच करे और अवैध प्रवासियों की पहचान, हिरासत और देश-निकाले के लिए एक स्थायी व्यवस्था तैयार करे। #SIR का इस्तेमाल उन भारतीयों का एक स्थायी वर्ग बनाने के लिए किया जाएगा जिन्हें इस व्यवस्था से बाहर कर दिया गया है। वोट देने का अधिकार ही गरीबों के पास ताकतवर लोगों के खिलाफ एकमात्र हथियार है। इसके बिना, सरकार उनके साथ मनमानी करेगी। हम पहले से ही ऐसी खबरें देख रहे हैं कि लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ देने से मना किया जा रहा है। कानून के अनुसार, SIR के तहत किसी का नाम हटाए जाने का मतलब यह नहीं है कि वह व्यक्ति देश का नागरिक नहीं है। अभी भी 27 लाख लोगों के मामलों पर सुनवाई चल रही है, और उनमें से कई लोग 'फॉर्म 6' के ज़रिए मतदाता के तौर पर अपना नाम दर्ज करवाने के लिए दोबारा आवेदन कर सकते हैं। खुद ECI (चुनाव आयोग) ने भी इस बारे में कोई आँकड़ा जारी नहीं किया है कि उसने कितने लोगों को इस आधार पर सूची से बाहर किया है कि वे विदेशी थे। उपलब्ध आँकड़ों से पता चलता है कि SIR के ज़रिए सूची से बाहर किए गए ज़्यादातर लोग मुसलमान, महिलाएँ, गरीब और प्रवासी हैं। सरकार के अपने आँकड़े दिखाते हैं कि हमारी जनसांख्यिकी और जनसंख्या अब स्थिर हो चुकी है, और हमारा TFR (कुल प्रजनन दर) 2.0 है। तो फिर हमें इस समिति की ज़रूरत क्यों है? इसलिए, ताकि मुसलमानों के खिलाफ लगातार शक और डर का माहौल बनाए रखा जा सके। इस सरकार को भारतीयों का समय दस्तावेज़ों की जाँच-पड़ताल में बर्बाद करवाना बहुत पसंद है। कभी यह KYC या SIR के नाम पर होता है, तो कभी किसी पोर्टल पर कोई दस्तावेज़ अपलोड करने के नाम पर। लेकिन, यह सरकार एक साधारण सी परीक्षा भी ठीक से आयोजित नहीं कर पाती। सरकार आम लोगों की जाँच-पड़ताल करती है, लेकिन हम आम लोग सरकार की जाँच-पड़ताल नहीं कर सकते।
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कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में बिरला ने व्यवस्थाओं में सुधार निर्देश दिए

Kota, Rajasthan:कोटा। लोकसभा अध्यक्ष Om Birla बुधवार को कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे। उन्होंने अस्पताल की व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर मरीजों और उनके परिजनों को हो रही परेशानियों का जायजा लिया। इस दौरान केडीए आयुक्त, नगर निगम आयुक्त सहित विभिन्न विभागों के प्रशासनिक अधिकारी भी उनके साथ मौजूद रहे। निरीक्षण के दौरान ओम बिरला ने अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार पर लगने वाले जाम को लेकर नाराजगी जताई और अधिकारियों को तत्काल समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने अस्पताल के एंट्रेंस गेट को चौड़ा करने, सड़क के बीच डिवाइडर बनाने तथा डबल स्टोरी पार्किंग की व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए, ताकि अस्पताल आने वाले मरीजों और परिजनों को यातायात संबंधी परेशानियों से राहत मिल सके। लोकसभा अध्यक्ष ने अस्पताल की इमरजेंसी सेवाओं का भी निरीक्षण किया और व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने पर जोर दिया। उन्होंने अस्पताल के विभिन्न वार्डों में जाकर भर्ती मरीजों से मुलाकात की तथा उपलब्ध सुविधाओं और उपचार व्यवस्था को लेकर फीडबैक लिया। मरीजों द्वारा बताई गई कमियों को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने अस्पताल प्रशासन को आवश्यक सुधार जल्द करने के निर्देश दिए। ओम बिरला ने कहा कि हाड़ौती के सबसे बड़े अस्पताल न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। उन्होंने अस्पताल परिसर के सौंदर्यीकरण, स्वच्छता, यातायात प्रबंधन और मरीजों की सुविधा से जुड़े कार्यों को शीघ्र पूरा करने के निर्देश देते हुए कहा कि अस्पताल की व्यवस्थाओं में लगातार सुधार किया जाए, ताकि आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
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जोधपुर में नकली बीज रोकने को कृषि विभाग ने बड़ा अभियान चलाकर 27,178 बैग रोके

Jodhpur, Rajasthan:एंकर राजस्थान में किसानों को नकली और अमानक बीजों से बचाने के लिए कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के निर्देश पर कृषि विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। जोधपुर संभाग के चार जिलों में एक साथ चलाए गए विशेष अभियान के दौरान विभाग ने हजारों बैग संदिग्ध मूंगफली बीज की बिक्री पर रोक लगा दी है। कृषि विभाग ने गोदामों और बीज विक्रेताओं पर छापेमारी करते हुए नमूने भी जांच के लिए भेजे हैं। देखिए यह खास रिपोर्ट। वीओ-1 कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा के निर्देश के बाद जोधपुर, फलोदी, बाड़मेर और बालोतरा जिलों में कृषि विभाग की टीमों ने एक साथ छापेमारी अभियान चलाया। अभियान के दौरान कुल 68 बीज विक्रेताओं और कृषि आदान प्रतिष्ठानों की जांच की गई। जोधपुर के रीको मण्डोर स्थित विनायक कोल्ड स्टोरेज और वेयरहाउस में बड़ी मात्रा में मूंगफली बीज का भंडारण मिला। जांच के दौरान बीज उत्पादन, प्रसंस्करण और प्रमाणन से जुड़े जरूरी दस्तावेज नहीं मिलने पर विभाग को मामला संदिग्ध लगा। इसके बाद अधिकारियों ने मौके पर ही कार्रवाई करते हुए 32 अलग-अलग लॉट के नमूने लिए और 27 हजार 178 बैग मूंगफली बीज की बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी। कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. जी.आर. मटोरिया के अनुसार किसानों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। यदि जांच में अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती तो संबंधित कंपनियों और कारोबारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बाइट – डॉ. जी.आर. मटोरिया, अतिरिक्त निदेशक, कृषि विभाग वीओ-2 छापेमारी के दौरान बोरानाड़ा स्थित बालाजी एग्रो इंडस्ट्रीज का भी निरीक्षण किया गया। यहां मूंगफली पॉड्स और पैकिंग सामग्री मिली, लेकिन जांच में यह स्पष्ट हुआ कि ट्रक में भरी मूंगफली का बीज विक्रय से कोई संबंध नहीं था। इसके बाद संबंधित सामग्री को मुक्त कर दिया गया, जबकि अन्य सामग्री के संबंध में वैधानिक प्रक्रिया अपनाई गई। बाइट – डॉ. जी.आर. मटोरिया, अतिरिक्त निदेशक, कृषि विभाग वीओ-3 कृषि विभाग का कहना है कि किसानों को केवल प्रमाणित और गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। यही कारण है कि प्रदेशभर में नकली और अमानक बीज कारोबारियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी। बाइट – डॉ. जी.आर. मटोरिया, अतिरिक्त निदेशक, कृषि विभाग फाइनल वीओ किसानों की खरीफ सीजन की तैयारियों के बीच कृषि विभाग की यह कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विभाग का दावा है कि नकली और अमानक बीजों पर लगाम लगाने के लिए आगे भी ऐसे औचक निरीक्षण और छापेमारी अभियान जारी रहेंगे। फिलहाल कृषि विभाग द्वारा लिए गए नमूनों की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा कि जब्त किए गए बीज गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं。 लोकेश ओला ज़ी मीडिया जोधपुर。 not -
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बाड़ी नगरपालिका पर सवाल: करोड़ों खर्च के बावजूद शहर की सड़कें कचरे से अटीं

Dholpur, Rajasthan:कूड़े के ढेर पर बैठी बाड़ी नगरपालिका, करोड़ों खर्च के बाद भी बदहाल हैं शहर की सड़कें कार्यवाहकों के भरोसे लचर सफाई व्यवस्था, रेलवे फाटक बना कचराघर, गोवंश की जान पर बन आई बाड़ी नगरपालिका इन दिनों कार्यवाहकों के भरोसे संचालित हो रही है, और इसका खामियाजा शहर की जनता को भुगतना पड़ रहा है। चौराहों, तिराहों और मुख्य मार्गों पर कूड़े-कचरे के अंबार लगे हैं। सफाई के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद धरातल पर कोई सुधार नजर नहीं आ रहा। सफाईकर्मियों ने तो रेलवे फाटक के मार्ग को ही कचराघर बना दिया है। गंदगी और दुर्गंध से नागरिकों का जीना दूभर हो गया है, वहीं कचरे के ढेर पर चारा तलाशते गोवंश काल का ग्रास बन रहे हैं। दिन और रात के अलग-अलग ठेके होने के बावजूद मुख्य सड़कों से कचरा नहीं उठ रहा। कार्यवाहक सफाई निरीक्षक तक शहर की स्थिति देखने की जहमत नहीं उठा रहे। राजनीतिक और प्रशासनिक आशीर्वाद प्राप्त इन कार्यवाहकों को जनता की पीड़ा से कोई सरोकार नहीं है।* *चौराहों पर कचरे के अंबार, व्यवस्था ध्वस्त* बाड़ी नगरपालिका का संचालन वर्तमान में कार्यवाहकों के जिम्मे है, लेकिन शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। शहर के प्रमुख चौराहों, तिराहों और मुख्य रास्तों पर जगह-जगह कूड़े-कचरे के ढेर लगे हुए हैं। इन ढेरों से निकलने वाली दुर्गंध और फैल रही गंदगी ने आमजन का जीवन कठिन कर दिया है। पैदल चलना तक दूभर हो गया है, फिर भी जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है। * *करोड़ों खर्च, धरातल पर शून्य परिणाम* नगरपालिका द्वारा सफाई व्यवस्था के नाम पर प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये का व्यय किया जा रहा है। इसके बावजूद शहर की स्वच्छता की स्थिति में कोई सकारात्मक परिवर्तन दिखाई नहीं दे रहा। सफाई के नाम पर होने वाला यह विशाल खर्च केवल कागजों तक सीमित प्रतीत होता है। जनता का सवाल है कि जब इतना धन खर्च हो रहा है, तो शहर की सड़कें और गलियां कचरे से क्यों अटी पड़ी हैं। * *रेलवे फाटक बना अनधिकृत कचराघर* सफाई व्यवस्था की सबसे बड़ी लापरवाही रेलवे फाटक मार्ग पर देखने को मिल रही है। सफाईकर्मियों ने इस सार्वजनिक मार्ग को ही कचराघर में तब्दील कर दिया है। यहां प्रतिदिन कचरा एकत्रित किया जाता है, लेकिन उसका समय पर निस्तारण नहीं होता। परिणामस्वरूप यह क्षेत्र दुर्गंध और बीमारियों का केंद्र बन गया है। रेलवे मार्ग होने के कारण यहां से गुजरने वाले यात्रियों और स्थानीय निवासियों को सर्वाधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। * *गोवंश की जान पर संकट* कचरे के इन विशाल ढेरों पर दिन-रात चारा तलाशने वाले गोवंश की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। प्लास्टिक, पॉलीथिन और अन्य हानिकारक पदार्थों को निगलने के कारण प्रतिदिन गोवंश काल का ग्रास बन रहे हैं। पशुप्रेमियों का आरोप है कि नगरपालिका की लापरवाही के कारण बेजुबान जानवरों की जान खतरे में है, लेकिन प्रशासन मौन धारण किए हुए है। *दिन-रात के ठेके बेनतीजा* नगरपालिका द्वारा शहर की सफाई के लिए दिन और रात के लिए अलग-अलग ठेके दिए गए हैं। अनुबंध के अनुसार दोनों समय में कचरा उठान होना चाहिए। इसके बावजूद मुख्य मार्गों और बाजारों से कचरे के ढेर नहीं हट रहे। ठेकेदारों की मनमानी और निगरानी के अभाव में अनुबंध केवल औपचारिकता बनकर रह गया है। * *कार्यवाहक निरीक्षक भी उदासीन* सबसे आश्चर्यजनक स्थिति यह है कि कार्यवाहक सफाई निरीक्षक स्वयं शहर की सफाई व्यवस्था का निरीक्षण करने तक नहीं पहुंचते। उनके कार्यालय से लेकर मैदान तक की दूरी तय करने में आनाकानी की जा रही है। राजनीतिक और प्रशासनिक आशीर्वाद प्राप्त इन कार्यवाहकों को जनता की मूलभूत समस्याओं से कोई लेना-देना नहीं है। शहर बदबू और बीमारी की चपेट में है, पर जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग कुर्सी की गरिमा तक नहीं बचा पा रहे। बाइट 1 स्थानीय
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मुकुंदगढ़ में उत्पाती बंदर ने तीन लोगों को घायल, नगरपालिका कार्रवाई अभी लंबित

Jhunjhunu, Rajasthan:मुकुंदगढ़, झुंझुनूं मुकुंदगढ़ कस्बे में उत्पाती बंदर का खौफ! तीन दिन में तीन जनों पर कर चुका हमला कस्बे के वार्ड नंबर 16 में खौफ का माहौल नगरपालिका में शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं घर में घुसकर तोड़फोड़ भी मचाता है यह बंदर झुंझुनूं जिले के मुकुंदगढ़ कस्बे के वार्ड संख्या 16 में एक उत्पाती बंदर का आतंक फैल गया है। पिछले 72 घंटों में बंदर ने तीन लोगों को काटकर घायल कर दिया। जिन्हें उपचार के लिए राजकीय अस्पताल ले जाना पड़ा। वार्डवासियों का आरोप है कि नगरपालिका को शिकायत के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। बंदर के हमलों का शिकार हुए लोगों में वार्ड 16 के दिलीप टेलर, वार्ड 1 की ज्योति टेलर तथा वार्ड 16 की आयशा शामिल हैं। तीनों घायलों का मुकुंदगढ़ के राजकीय अस्पताल में प्राथमिक उपचार किया गया तथा एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगाए गए। मोहल्लावासी रमेश टेलर ने बताया कि यह बंदर पूरे दिन वार्ड में उत्पात मचाता रहता है। वह घरों की छतों पर तोड़फोड़ करता है, कपड़े फाड़ देता है तथा खाने-पीने का सामान उठा ले जाता है। इसके कारण बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग घर से बाहर निकलने में डर महसूस कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि पिछले 10 दिनों से बंदर का आतंक फैला हुआ है। नगरपालिका को कई बार लिखित और मौखिक शिकायत दी। लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। बंदर को पकड़ने के लिए भी कोई टीम मौके पर नहीं पहुंची है। लोगों ने नगरपालिका प्रशासन से मांग की है कि वन विभाग की टीम बुलाकर उत्पाती बंदर को शीघ्र पकड़ा जाए। साथ ही घायलों को उचित मुआवजा दिलाने और अस्पताल में एंटी-रेबीज वैक्सीन का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध रखने की मांग भी की है।
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नीतीश कुमार जदयू कार्यालय पहुंचकर जनसुनवाई में लोगों की समस्याएं सुनते नजर आये

Patna, Bihar:पटना ब्रेकिंग पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अचानक आज जदयू कार्यालय पहुंचे। जदयू कार्यालय में जनसुनवाई कार्यक्रम चल रहा था। इस कार्यक्रम के दौरान जेडीयू कोटे के मंत्री बिहार के आए हुए तमाम जनता का समस्या सुन रहे थे। और का उसका समाधान कर रहे थे। लेकिन इस जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान अचानक बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जदयू कार्यालय पहुंच जाते हैं और जहां पर जनसुनवाई कार्यक्रम चल रहा होता है और जहां पर मंत्री आम जनता और कार्यकर्ताओं की जो समस्या है उसका निदान कर रहे होते हैं। वहां पर नीतीश कुमार जाकर वहां बैठ जाते हैं। और जनसुनवाई में आए हुए लोगों की समस्या को सुनने लगते हैं। अपने मंत्री रत्नेश सदा से लोगों से जुड़ी हुई समस्या पर क्या करवाई हुई इसकी जानकारी लेते है। वही जेडीयू कार्यालय में जनसुनवाई कार्यक्रम का समय 11:30 बजे होता है। लेकिन नीतीश कुमार 11:30 पहुंचते है तो उनके बेटे स्वस्थ मंत्री निशांत कुमार गायब मिले वही परिवहन मंत्री दामोदर रावत भी गायब मिले। नीतीश कुमार के इस एक्शन से जदयू कोटे के मंत्री और नेताओं में खलबली मच गई है विजुअल — नीतीश कुमार, पूर्व मुख्यमंत्री
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हरिद्वार कुंभ की तैयारी तेज, सुरक्षित व हरित कुंभ: मॉनसून में पौधारोपण फैसला

Haridwar, Uttarakhand:आगामी कुंभ मेले को भव्य और सुरक्षित बनाने के लिए मेला प्रशासन तैयारी में जुटा हुआ है। कुंभ की तैयारी के बीच सभी वर्गों से सुझाव लेकर काम को आगे बढ़ाया जा रहा है। हरिद्वार स्थित मेला नियंत्रण भवन में मेला अधिकारी की अध्यक्षता में परामर्श दात्री समिति की मीटिंग हुई। जिसमें हरिद्वार और ऋषिकेश के तमाम सामाजिक, व्यापारिक और अन्य वर्गों के लोग शामिल हुए। मीटिंग में कुंभ मेले के पूर्व के अनुभवों और आगे की चुनौतियों से निपटने को लेकर चर्चा हुई। साथ ही कुंभ को ग्रीन कुंभ बनाने के लिए मॉनसून सीजन में विशेष पौधारोपण अभियान चलाने की सहमति भी बनी। मेला अधिकारी ने कहा कि सभी स्टेकहोल्डर्स के सुझावों को लिया जा रहा है। ताकि मेले के आयोजन को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जा सके।
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नवादा में किशोर हत्या: शव ईट भट्टे के पास मिला, इलाके में सनसनी

Nawada, Bihar:नवादा में एक किशोर की निर्मम तरीके से हत्या कर शव को ईट भट्टे के पास फेंक दिया गया है जिसके बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गयी। हिसुआ थाना क्षेत्र अंतर्गत धमौल बेलदारी गांव की यह घटना है जहाँ आज सुबह ईट भट्टे पर एक 14 वर्षीय किशोर का शव बरामद हुआ। मृतक की पहचान धमौल बेलदारी गांव निवासी सुबोध यादव के 14 वर्षीय पुत्र हिमांशु कुमार के रूप में हुई है। ईट भट्टे पर काम करने वाले मजदूर ने सबसे पहले शव को देखा। भट्टे से बदबू आ रही थी। पास जाने पर जब प्लास्टिक को हटाया गया तो उसमें एक बालक का शव मिला। इसकी तत्काल सूचना मजदूरों ने अपने मालिक को दी और ईट मालिक ने इसकी सूचना स्थानीय थाने को दी। जहां पुलिस मौके पर पहुंचकर शव को अपने कब्जे में लिया। मृत बालक के घर से दो सौ मीटर की दूरी पर ही उसका शव बरामद हुआ है। वह गोविंदपुर के कुतरुचक में हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करता था और इसी रविवार को वह घर पहुंचा था। घर आने के बाद उसका कोई अता-पता नहीं चला। परिजनों ने इसकी तत्काल सूचना थाने को दी और आज उसका शव बरामद किया गया है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि किसी ने उसकी हत्या कर दी है। घटनास्थल पर सदर एसडीपीओ पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी ली। वही फॉरेंसिक एवं स्थानीय पुलिस ने जरूरी जानकारियां मौके से इकट्ठा किया। फिलहाल पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया है। वहीं इस मामले में पुलिस आगे की कार्रवाई में जुड़ गई है।
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बारिश के बाद नालियों की कमी से घरों में पानी घुसा, ग्रामीण परेशान

Pratapgarh, Rajasthan:प्रतापगढ़ जिले के छोटीसादड़ी उपखंड क्षेत्र के हड़मतिया जागीर गांव में अचानक मौसम बदलने के बाद आई तेज आंधी और जोरदार बारिश ने ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी. बारिश का पानी निकासी व्यवस्था नहीं होने के कारण कई घरों में घुस गया, जिससे लोगों को रातभर परेशानियों का सामना करना पड़ा. ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा नई सड़क का निर्माण कर दिया गया, लेकिन सड़क के साथ जल निकासी के लिए नालियों का निर्माण नहीं किया गया. इसके अलावा कई स्थानों पर पुरानी नालियां भी बंद पड़ी हैं, जिससे बारिश का पानी जमा होकर रिहायशी क्षेत्रों में पहुंच रहा है. ग्रामीणों ने बताया कि तेज बारिश के दौरान पानी की निकासी नहीं होने से अनेक घरों में पानी भर गया. इससे घरेलू सामान को नुकसान पहुंचा और लोगों को पानी निकालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी. ग्रामीणों ने पंचायत और संबंधित विभाग पर समस्या की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि कई बार जल निकासी की व्यवस्था सुधारने की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र नालियों का निर्माण करवाकर जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है.
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