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Amit ShuklaAmit ShuklaFollow4 Feb 2025, 04:49 pm

औरैयाः ऐरवा कटरा पुलिस ने चोरी करने वाले गिरोह के पांचवे सदस्य को किया गिरफ्तार

Airwa Katra, Uttar Pradesh:

ऐरवा कटरा थानाक्षेत्र के दोबामाफी स्थित दुर्वासा ऋषि की तपोभूमि पर लगने वाले एक माह के मेले के प्रथम दिन पर मंदिर में दर्शन करने उमड़ी भीड़ के बीच सक्रिय गिरोह द्वारा एक महिला की चेन स्केचिंग और युवक का मोबाइल फोन चोरी करने के मामले में ऐरवा कटरा पुलिस द्वारा चोरी करने वाले गैंग के चार लोगों को पूर्व में जेल भेज चुकी है। उमरैन चौकी इंचार्ज हरिकेश कुमार द्वारा गिरोह के पांचवे सदस्य को आगरा लखनऊ एक्सप्रेस वे से गिरफ्तार किया। थाना प्रभारी जीतमल चौधरी ने बताया कि दोबामाफी मंदिर में चैन स्केचिंग और मोबाइल चोरी के मामले में वांछित चल रहे गिरोह के पांचवे सदस्य को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

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हाथरस: केंद्रीय विद्यालय के बच्चों की सुरक्षा नियमों की धज्जियाँ, कार्रवाई कब?

Hathras, Uttar Pradesh:हाथरस: केंद्रीय विद्यालय के बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे, नियमों की उड़ रही धज्जियां हाथरस में स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रशासन की ओर से ई-रिक्शा संचालन के लिए एरिया निर्धारित किए जाने और स्कूली बच्चों को ई-रिक्शा से लाने-ले जाने पर रोक के बावजूद कुछ चालक नियमों की खुलेआम अनदेखी करते नजर आ रहे हैं। मामला केंद्रीय विद्यालय से जुड़े स्कूली बच्चों का है, जहां स्कूल की छुट्टी के बाद बच्चों को घर पहुंचाने के लिए ई-रिक्शा और अन्य वाहनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। आरोप है कि क्षमता से अधिक बच्चों को वाहनों में बैठाकर ले जाया जा रहा है। हालात यह हैं कि बच्चों को वाहन में भूसे की तरह भरकर सड़क पर दौड़ाया जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल बच्चों की सुरक्षा को लेकर है। यदि किसी वाहन के अचानक ब्रेक लगाने, पलटने या सड़क हादसे का शिकार होने की स्थिति बनती है तो क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाने के कारण बड़ा हादसा हो सकता है। प्रशासन ने ई-रिक्शा के संचालन के लिए अलग-अलग क्षेत्र निर्धारित किए हैं, ताकि यातायात व्यवस्था बेहतर रहे और नियमों का पालन हो सके। इसके बावजूद कुछ ई-रिक्शा चालक निर्धारित क्षेत्र से बाहर जाकर स्कूली बच्चों को ढोते दिखाई दे रहे हैं। वहीं, स्कूलों के बाहर बच्चों को ले जाने वाले वाहनों की फिटनेस, क्षमता, चालक का लाइसेंस और सुरक्षा मानकों की जांच भी अहम सवाल है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को स्कूल भेजने के बाद उनकी सुरक्षित घर वापसी की जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। अब सवाल यह है कि नियमों के बावजूद बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ कब तक चलता रहेगा? क्या जिम्मेदार अधिकारी ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे या फिर केंद्रीय विद्यालय के बच्चों की सुरक्षा इसी तरह भगवान भरोसे रहेगी?
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आंगन का मिलन: रेखा आर्य की समीक्षा बैठक से योजना की तेज़ शुरुआत

Haldwani, Uttarakhand:हल्द्वानी में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य ने ‘आंगन का मिलन’ कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम का उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों को समुदाय से जोड़ने के साथ ही पोषण, स्वास्थ्य, स्वच्छता और शिक्षा को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। मंत्री ने अधिकारियों को कार्यक्रम में अधिक से अधिक आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, सहायिकाओं, महिलाओं और बच्चों की सहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में मंत्री रेखा आर्य ने कार्यक्रम की रूपरेखा, व्यवस्थाओं और विभागीय तैयारियों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि ‘आंगन का मिलन’ का उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों को समुदाय से जोड़ना और पोषण, स्वच्छता, पौष्टिक आहार, स्वास्थ्य एवं शिक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करना है,मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी विकासखंडों में कार्यक्रम का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों, सहायिकाओं, लाभार्थी महिलाओं और बच्चों की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित की जाए। साथ ही क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को भी कार्यक्रम में आमंत्रित करने के निर्देश दिए गए। मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों को सशक्त, सुविधायुक्त और आदर्श केंद्र बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। बैठक में पोषण किट वितरण, आंगनबाड़ी केंद्रों के सुदृढ़ीकरण और विभागीय योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई, मंत्री ने यह भी निर्देश दिए कि ‘आंगन का मिलन’ कार्यक्रम सुबह 9 बजे से 11 बजे के बीच आयोजित किया जाए, ताकि आमजन को किसी तरह की असुविधा न हो।
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छतारी में संदिग्ध परिस्थितियों में मिला अधेड़ का शव,डेढ़ घंटे की देरी से पहुंची पुलिस

Narendra KumarNarendra KumarFollow1m ago
Teyor Bujurag, Uttar Pradesh:थाना छतारी क्षेत्र के अंतर्गत शुक्रवार शाम से अचानक लापता हुए एक 45 वर्षीय अधेड़ का शव शनिवार सुबह संदिग्ध परिस्थितियों में गांव के बाहर सड़क किनारे मिलने से समूचे इलाके में सनसनी फैल गई। मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं दूसरी ओर घटनास्थल महज दो किलोमीटर दूर होने के बावजूद सूचना मिलने के करीब डेढ़ घंटे बाद मौके पर पहुंची पुलिस की कार्यशैली को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और परिजनों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। जानकारी के मुताबिक, छतारी निवासी अशोक (45 वर्ष) पुत्र देवेंद्र शुक्रवार शाम करीब 6 बजे परिजनों से किसी काम से बाहर जाने की बात कहकर घर से निकले थे। जब देर रात तक अशोक वापस नहीं लौटे, तो परिजनों को किसी अनहोनी की आशंका हुई और उन्होंने आसपास के क्षेत्रों में उनकी खोजबीन शुरू कर दी। काफी तलाश करने के बावजूद रात भर उनका कोई सुराग नहीं मिल सका। मृतक अशोक अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं, जिसमें उनका 25 वर्षीय बेटा अभिषेक तथा तीन बेटियां रोशनी (26 वर्ष), तनु (24 वर्ष) और मनु (19 वर्ष) शामिल हैं। अचानक हुई इस दुखद घटना से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। शनिवार सुबह करीब 6 बजे जब ग्रामीण खेतों की तरफ गए, तो उन्होंने अशोक को अचेत अवस्था में पड़ा देखा। घटना की जानकारी तुरंत आग की तरह फैल गई और परिजनों सहित भारी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए। ग्रामीणों ने तत्काल घटना की सूचना छतारी पुलिस को दी। ताज्जुब की बात यह रही कि घटनास्थल थाना छतारी से मात्र 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित था, फिर भी पुलिस को मौके पर पहुंचने में लगभग डेढ़ घंटे का समय लग गया। पुलिस की इस ढुलमुल कार्यशैली और लापरवाही से ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। पुलिस ने शुरू की जांच मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को संभाला और शव को अपने कब्जे में लेकर पंचनामा भरते हुए पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि मौत के सही कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चलेगा। फिलहाल पुलिस विभिन्न पहलुओं से मामले की जांच में जुटी हुई है। इस मामले में सीओ डिबाई मधुप कुमार सिंह ने बताया कि मामले में जांच पड़ताल की जा रही तहरीर मिलने पर अग्रिम कार्यवाही की जाएगी।
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हांसी रेलवे स्टेशन रोड पर जलभराव, बारिश के तीन दिन बाद भी समाधान नहीं

Hansi, Haryana:हांसी में बारिश ने खोली जल निकासी व्यवस्था की पोल, रेलवे स्टेशन रोड पर फिर जमा पानी कुल चार नियमित कर्मचारियों और एक एचकेआरएन जारी किए कारण बताओ नोटिस तीन दिन बाद भी सड़क पर जलभराव, राहगीर और वाहन चालक परेशान; स्थानीय लोगों का आरोप-बार-बार आश्वासन के बावजूद नहीं हुआ स्थायी समाधान बिजली फाल्ट और जनरेटर चलाने में देरी बनी वजह : संजीव त्यागी हांसी। हांसी में तीन दिन पहले हुई बारिश ने एक बार फिर शहर की जल निकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बारिश के तीन दिन बाद भी रेलवे स्टेशन रोड पर फ्लाईओवर के नीचे और आसपास सड़क पर पानी जमा है। जलभराव के कारण वाहन चालकों के साथ-साथ पैदल राहगीरों को भी पानी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है। इसको लेकर जनस्वास्थ्य विभाग के चार रेलवे स्टेशन रोड पर जलभराव की समस्या कोई नई नहीं है। स्थानीय लोग लंबे समय से इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग करते आ रहे हैं। कई बार प्रदर्शन और प्रशासन को शिकायतें देने के बावजूद समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई। स्थानीय विधायक की ओर से भी अधिकारियों को जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। राहगीर सुरेंद्र ने बताया कि सड़क पर पानी जमा होने के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। राहगीरों और वाहन चालकों को पानी के बीच से निकलना पड़ रहा है। वहीं जनस्वास्थ्य विभाग के कार्यकारी अभियंता संजीव त्यागी ने बताया कि सितंबर के तीसरे सप्ताह में इतनी बारिश की उम्मीद कम थी, हालांकि विभाग की ओर से पानी निकासी की तैयारियां की गई थीं। उन्होंने कहा कि पानी निकालने के प्रयास किए गए और कई स्थानों से पानी निकाल भी दिया गया है. संजीव त्यागी के अनुसार, कुछ स्थानों पर पानी निकासी में देरी के पीछे बिजली व्यवस्था प्रभावित होना भी एक कारण रहा। आंधी के दौरान पेड़ और बिजली के खंभे टूटने से करीब आठ घंटे तक बिजली का फॉल्ट रहा। इस दौरान कुछ स्थानों पर जनरेटर समय पर नहीं चल पाया, जिससे पानी निकालने में देरी हुई। उन्होंने बताया कि एक अन्य डिस्पोजल पर भी कर्मचारी की ओर से जनरेटर चलाने में करीब एक से सवा घंटे की देरी हुई। विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। कुल चार नियमित कर्मचारियों और एक एचकेआरएन कर्मचारी को नोटिस जारी किए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, जवाब मिलने के बाद विभागीय नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। संजीव त्यागी ने बताया कि वे खुद शहर के विभिन्न क्षेत्रों का निरीक्षण कर रहे हैं। प्रेमनगर सहित कुछ स्थानों पर नालों से आए कचरे के कारण सीवर लाइन प्रभावित हुई, जिसकी सफाई करवाई जा रही है। उन्होंने दावा किया कि शहर में फिलहाल कोई बड़ी गंभीर समस्या नहीं है और अधिकांश स्थानों से पानी निकाल दिया गया है। उन्होंने बताया कि जल निकासी व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए नए प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार की जा चुकी है। विधायक और जिला प्रशासन भी इस प्रोजेक्ट को लेकर रुचि ले रहे हैं। विभाग को उम्मीद है कि आगामी समय में इस परियोजना के जरिए शहर की जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करने की दिशा में काम होगा। फिलहाल रेलवे स्टेशन रोड पर जमा पानी शहर की जल निकासी व्यवस्था के दावों पर सवाल जरूर खड़े कर रहा है। अब देखना होगा कि बार-बार सामने आ रही इस समस्या का स्थायी समाधान कब तक हो पाता है।
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ग्रेटर नोएडा पुलिस ने किसान चोर गिरफतार, भारी चोरी का सामान बरामद

Greater Noida, Uttar Pradesh:ग्रेटर नोएडा पुलिस ने किसानों के लिए परेशानी का सबब बने एक चोर को गिरफ्तार किया है। आरोपी के पास से चोरी किए गए कई उपकरण बरामद हुए हैं। इनमें 17 समरसेबल मोटर, 21 पानी के पंप, 20 एल्युमिनियम आर्मेचर, एक चोरी की हीरो स्प्लेंडर मोटरसाइकिल, एक अवैध तमंचा और एक जिंदा कारतूस शामिल है। इन चोरियों के कारण किसानों को सिंचाई में दिक्कत होती थी और उनकी फसलें सूखने लगती थीं। जारचा थाना क्षेत्र में लगातार खेतों से मोटर चोरी की शिकायतें मिल रही थीं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की। शुक्रवार रात चेकिंग के दौरान जारचा पुलिस ने एक मोटरसाइकिल सवार व्यक्ति को रोका। उसकी पहचान रोशनपुर (दनकौर) निवासी दीपांशु के रूप में हुई। पुलिस ने उसके पास से चोरी का सामान भी बरामद किया। शनिवार को डीसीपी ग्रेटर नोएडा रवि शंकर निम ने एक प्रेस वार्ता में आरोपी की गिरफ्तारी और बरामदगी की जानकारी दी। डीसीपी ने बताया कि जांच में सामने आया है कि आरोपी अपने साथियों के साथ मिलकर दिन में गांवों और आसपास के इलाकों में घूमते थे। वे खेतों और अन्य जगहों पर लगी पानी की मोटर और ट्यूबवेल को देखते थे। रात में औजारों के साथ खेतों पर पहुंचकर मोटर खोलकर चोरी कर लेते थे। चोरी की मोटरों को छिपाने के बाद, वे इनमें से एल्युमिनियम और तांबे के पुर्जे निकालकर कबाड़ी को बेच देते थे। यह चोर कई वारदातों को अंजाम दे चुका है।
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कुरुक्षेत्र में गुरप्रीत सिंह की मौत पर परिजनों ने सड़क पर जाम लगा दिया

Kurukshetra, Haryana:कुरुक्षेत्र -गुरप्रीत सिंह की मौत के बाद परिजनों का हंगामा, पेहवा में सड़क पर शव रख लगाया जाम। कुरुक्षेत्र में इलाज के दौरान हुई युवक की मौत के बाद परिजनों ने सड़क पर सब रखकर जाम लगा दिया है परिजनों का कहना है कि जब तक आरोपियों को सजा नहीं मिलती तब तक वह अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। हम आपको बता दें कि 14 सितंबर की रात को गुरप्रीत सिंह वह उसके चचेरे भाई पर फॉर्च्यूनर सवारियों को ने तेज धार हथियारों से हमला बोला था इसके बाद घायल गुरप्रीत का इलाज कुरुक्षेत्र के एक निजी अस्पताल में चल रहा था जहाँ आज गुरप्रीत सिंह की मौत हो जाती है। फिलहाल परिजन सड़क पर शव रख कर प्रदर्शन कर रहे हैं वहीं पुलिस परिजनों को समझ कर जाम खुलवाने की कोशिश में लगी है।
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Bareilly, Uttar Pradesh:
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देवगढ़ में जीरण ग्राम पंचायत के करोड़ों के विकास कार्यों का शिलान्यास-लोकार्पण

Rajsamand, Rajasthan:देवगढ़ क्षेत्र के जीरण ग्राम पंचायत को ₹5 करोड़ के विकास कार्यों की बड़ी सौगात, जीरण में नए उपस्वास्थ्य केंद्र की सौगात, विद्यालय में 7 नए कक्षा-कक्ष और चारदीवारी का निर्माण, सहित करोड़ों के विकास कार्यों کا हुआ शिलान्यास-लोकार्पण देवगढ़, राजसमंद एंकर - राजसमंद जिले के देवगढ़ विधानसभा क्षेत्र की जीरण ग्राम पंचायत में ग्रामीण विकास को गति देने के लिए करीब ₹5 करोड़ की लागत के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया। इन परियोजनाओं से जीरण सहित आसपास के कई गांवों को शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं का सीधा लाभ मिलेगा। कार्यक्रम में भीम-देवगढ़ विधायक हरिसिंह रावत, जीरण ग्राम पंचायत के प्रशासक चंद्रभानसिंह की मौजूदगी में कार्यकम का आयोजन हुआ। इन विकास कार्यों के होने से ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और सामुदायिक विकास से जुड़ी कई महत्वपूर्ण सुविधाएं अपने ही क्षेत्र में उपलब्ध होंगी। वियो 01- कार्यक्रम के दौरान जीरण गांव में निर्मित नए उपस्वास्थ्य केंद्र तथा टोकरा स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में 7 नए कक्षा-कक्षों व चारदीवारी निर्माण कार्य का शुभारंभ किया गया। इसके साथ ही मोयना और सोलंकियों का गुड़ा में विद्यालय भवनों के जीर्णोद्धार एवं विस्तार से संबंधित कार्यों की भी सौगात दी गई। ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में जीरण, मोयना, संसारिया और दोलाजी का खेड़ा सहित विभिन्न स्थानों पर सार्वजनिक सराय, सामुदायिक भवन, टीनशेड, चबूतरा निर्माण और श्मशान घाट विकास कार्यों का लोकार्पण व शिलान्यास किया गया। इन कार्यों से पंचायत क्षेत्र की वर्षों पुरानी मूलभूत आवश्यकताएं पूरी होंगी।
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कश्मीर में OGW नेटवर्क से जंग: सुरक्षा बलों ने मानव घेरे से आतंकियों की हर चाल रोकी

Chaka, आतंकवादियों ने कम-तकनीक वाले तरीके अपनाए; सुरक्षाबलों ने घाटी में आतंकियों के मंसूबों को नाकाम करने के लिए अभेद्य मानवीय घेरा बनाया। आतंकी नेटवर्क द्वारा डिजिटल कम्युनिकेशन छोड़ने की रणनीतिक चाल के बाद, कश्मीर घाटी में सुरक्षा तंत्र ने अपने ऑपरेशनल ग्रिड को पूरी तरह से बदल दिया है। तकनीकी इंटरसेप्ट के कम होने के कारण, आतंकी संगठन अब पुराने ज़माने के तरीकों पर लौट आए हैं, जिसमें 'ओवर ग्राउंड वर्कर्स' (OGW) का इस्तेमाल फिजिकल कूरियर के तौर पर किया जाता है। इसके जवाब में, शीर्ष सुरक्षा कमांडरों ने ज़मीनी स्तर पर एक आक्रामक सुरक्षा ग्रिड बनाने का आदेश दिया है, ताकि इन आतंकियों की मदद करने वालों की हर हरकत को मानवीय घेरे से रोका जा सके। सालों तक, आतंकवाद-विरोधी ग्रिड आतंकी हमलों को रोकने के लिए सिग्नल इंटेलिजेंस (SIGINT), मोबाइल कम्युनिकेशन की ट्रैकिंग और डिजिटल फुटप्रिंट पर बहुत ज़्यादा निर्भर रहे। लेकिन अब सक्रिय आतंकवादियों ने अपने कम्युनिकेशन के तरीकों में भारी बदलाव किया है। होडियाउट से काम करने वाले आतंकी कमांडर अब मोबाइल नेटवर्क या स्मार्टफोन का इस्तेमाल बिल्कुल नहीं करते हैं। इसके बजाय, वे निर्देश, ऑपरेशनल ब्लूप्रिंट और प्रोपेगैंडा को एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाने के लिए OGW नेटवर्क को सकरी किया हैं। सिर्फ मैसेजिंग ही नहीं, OGWs गुप्त रूप से हथियार और अन्य सामान पहुँचाने की मुख्य कड़ी बन गए हैं। हथियार, गोला-बारूद, विस्फोटक और देश-विरोधी लिटरेचर अब आम नागरिकों की आवाजाही की आड़ में ज़िलों की सीमाओं के पार तस्करी करके ले जाने की ख़बर हैं। भीड़-भाड़ वाले बाज़ारों, सार्वजनिक परिवहन आम लोगों की आवाजाही के दौरान आसानी से घुल-मिलकर, ये कूरियर आम लोगों के बीच की खुली जगह का फ़ायदा उठाकर पारंपरिक चेकपॉइंट से बच निकलते हैं। यह समझते हुए कि किसी गुप्त नेटवर्क को ट्रैक करने के लिए अब सिर्फ़ डिजिटल निगरानी काफ़ी नहीं है, जम्मू-कश्मीर पुलिस (JKP) और केंद्रीय रिज़र्व पुलिस बल (CRPF) के शीर्ष नेतृत्व ने तैनाती की रणनीतियों में बड़ा बदलाव किया है। सभी ज़िलों के सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस (SSP) को साफ़ निर्देश दिए गए हैं कि वे देश-विरोधी तत्वों को कोई जगह न दें। अब नाका चेकपॉइंट्स को और मज़बूत किया गया है; शहर के संवेदनशील चौराहों, हाईवे के अहम रास्तों और भीड़-भाड़ वाले कमर्शियल हब पर अचानक और सघन नाका चेकिंग की जा रही है। संभावित कूरियर की गतिविधियों को रोकने के लिए सुरक्षाकर्मी सघन फिजिकल और डिजिटल ID वेरिफिकेशन कर रहे हैं। यह समझते हुए कि आतंकी मॉड्यूल दक्षिण और उत्तर क Kashmir के बीच आवाजाही पर निर्भर करते हैं, सुरक्षा बलों ने छोटे और वैकल्पिक रास्तों को बंद कर दिया है। हर ट्रांज़िट कॉरिडोर पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है ताकि यह पक्का किया जा सके कि कूरियर बिना जांच के एक ज़िले से दूसरे ज़िले में न जा सकें। खुफ़िया जानकारी का इंतज़ार करने के बजाय, फ़ील्ड यूनिट्स ने खास इलाकों में नाकाबँधी बनाने के लिए पेट्रोलिंग बढ़ा दी है। ये पेट्रोलिंग टीमें एक चलती-फिरती इंसानी दीवार की तरह काम करती हैं, जिससे छिपकर एक जगह से दूसरी जगह जाना लगभग नामुमकिन हो जाता है। मौजूदा सुरक्षा रणनीति का मुख्य मकसद OGW नेटवर्क को व्यवस्थित तरीके से खत्म करना है। खुफ़िया एजेंसियों का मानना ​​है कि भले ही सक्रिय आतंकवादियों को पकड़ना या खत्म करना ज़रूरी है, लेकिन उनके इंसानी कूरियर नेटवर्क को तोड़ने से आतंकवादियों तक हथियार, गोला-बारूद और कमांड-एंड-कंट्रोल का संपर्क नहीं पहुँच पाता। दक्षिण से उत्तर कश्मीर तक ज़बरदस्त और साफ़ तौर पर दिखने वाली फ़िज़िकल मौजूदगी के साथ ह्यूमन इंटेलिजेंस (HUMINT) को मिलाकर, सुरक्षा बलों ने बचे-खुचे टेरर मॉड्यूल को पूरी तरह से अंधेरे में डाल दिया है। यह मज़बूत ह्यूमन ग्रिड यह पक्का करता है कि जब आतंकवादी लो-टेक कम्युनिकेशन के ज़रिये पुराने दौर में लौटने की कोशिश करते हैं, तो वे सीधे सुरक्षा की एक आधुनिक और अभेद्य दीवार से टकराते हैं।
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कैंट सीट का इतिहास: 2012 के बाद भाजपा की लगातार जीत की कहानी

Lucknow, Uttar Pradesh:लखनऊ की कैंट विधानसभा सीट से धुरंधर लखनऊ की कैंट विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास काफी दिलचस्प है। यह सीट लंबे समय तक कांग्रेस और भाजपा के बीच बदलती रही, जबकि पिछले डेढ़ दशक में भाजपा का प्रभाव मजबूत हुआ है。 पुराने चुनावों के उपलब्ध रिकॉर्ड में 1991 के बाद भाजपा का प्रभाव लगातार दिखाई देता है, हालांकि 2012 में कांग्रेस की रीता बहुगुणा जोशी ने भाजपा के सुरेश चंद्र तिवारी को हराकर सीट वापस कांग्रेस के खाते में ला दी थी। 2012 का बड़ा राजनीतिक मोड़ 2012 में रीता बहुगुणा जोशी कांग्रेस के टिकट पर जीतीं। उन्हें 63,052 वोट मिले और भाजपा के सुरेश चंद्र तिवारी को 41,299 वोट मिले। जीत का अंतर 21,753 वोट था। इसके बाद 2017 में राजनीतिक समीकरण फिर बदला। रीता बहुगुणा जोशी भाजपा में शामिल होकर इसी सीट से भाजपा प्रत्याशी बनीं और उन्होंने 95,402 वोट हासिल किए। sपा की अपर्णा यादव दूसरे स्थान पर रहीं। जीत का अंतर 33,796 वोट रहा। 2019 का उपचुनाव 2017 के बाद रीता बहुगुणा जोशी के लोकसभा चुनाव जीतने के कारण कैंट सीट खाली हुई और 2019 में उपचुनाव हुआ। इसमें भाजपा के सुरेश चंद्र तिवारी जीते। उन्हें 56,684 वोट मिले और सपा के मेजर आशीष चतुर्वेदी 21,256 वोट के साथ दूसरे स्थान पर रहे। अंतर 35,428 वोट रहा। 2022 में ब्रजेश पाठक 2022 में भाजपा ने यहां ब्रजेश पाठक को उम्मीदवार बनाया। वे विजयी हुए। उपलब्ध चुनावी रिकॉर्ड के अनुसार उन्हें 1,08,147 वोट मिले और जीत का अंतर 39,512 वोट रहा। राजनीतिक तौर पर कैंट सीट की खासियत कैंट को सिर्फ एक "भाजपा की सीट" कहना पूरे इतिहास को नहीं बताता। 1950–80 के दशक में कांग्रेस का प्रभाव, 1990 के दशक से भाजपा का उभार, 2012 में कांग्रेस की वापसी, और फिर 2017 के बाद भाजपा की लगातार जीत इसका मुख्य चुनावी पैटर्न रहा है。
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