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DSDigvijay SinghFollow28 Nov 2024, 09:50 am

अंबेडकर नगर -खुद को ज़िंदा साबित करने के लिए जिला कोषागार पहुँच रहे बुजुर्ग

Akbarpur, Uttar Pradesh:जनपद अंबेडकर नगर के जिला कोषागार में इन दिनों अपने आप को जिंदा साबित करने के लिए बुजुर्गों को लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है वहीं प्रशासन द्वारा बैंकों को जिम्मेदारी भी दी गई है कि वह अपने अपने निकट के बैंक जिसमें उनका पेंशन जाता है वहां से अपना फार्म जमा कर सकते हैं जीवित प्रमाण पत्र दे सकते हैं लेकिन बैंकों द्वारा समय से नहीं भेजा जाता है जीवित प्रमाण पत्र लोगों को जलालपुर आलापुर सहित विभिन्न स्थानों से सैकड़ो किलोमीटर की दूरी तय कर आना पड़ता है जनपद में 10400 पेंशनर है जिसमें अभी तक 7000 लोगों ने जमा किया है
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फतेहगढ़ में बीएससी छात्रा ने लाइसेंसी राइफल से गोली मारकर आत्महत्या की आशंका, जांच जारी

ASARUN SINGHJust now
Farrukhabad, Uttar Pradesh:बीएससी छात्रा ने पिता की लाइसेंसी राइफल से खुद को गोली मारी, मौके पर फर्रुखाबाद, फतेहगढ़ कोतवाली क्षेत्र के धन्सुआ गांव में शनिवार को 20 वर्षीय बीएससी छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में गोली लगने से मौत हो गई। पुलिस की प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, हालांकि घटना के वास्तविक कारणों का अभी तक पता नहीं चल सका है। पुलिस ने मौके से छात्रा के पिता की लाइसेंसी राइफल बरामद कर कब्जे में ले ली है और मामले की गहन जांच शुरू कर दी है। मृतका की पहचान अंजलि पाल (20) के रूप में हुई है। वह बीएससी की छात्रा थीं। उनके पिता राजेश कुमार पाल भारतीय सेना में तैनात हैं और वर्तमान में पंजाब में अपनी ड्यूटी पर हैं। परिवार में मां, अंजलि और छोटा भाई ललित रहते हैं। बताया गया कि घटना के समय अंजलि घर में अकेली थीं। उनकी मां किसी जरूरी काम से बाहर गई थीं, जबकि भाई ललित अपनी दुकान पर था। रात करीब नौ बजे जब ललित घर लौटा तो काफी देर तक दरवाजा खटखटाने के बावजूद अंदर से कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद वह पड़ोसी के मकान की छत के रास्ते घर के अंदर पहुंचा, जहां कमरे में अंजलि खून से लथपथ पड़ी मिलीं। पास में पिता की लाइसेंसी राइफल भी पड़ी थी। घटना की सूचना मिलते ही फतेहगढ़ कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। अपर पुलिस अधीक्षक गिरीश कुमार सिंह, कोतवाली प्रभारी तेज सिंह तथा फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाए गए और घटना में प्रयुक्त लाइसेंसी राइफल को कब्जे में लेकर जांच के लिए भेज दिया गया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत होता है, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चल सकेगा। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच कर रही है। घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है। परिजन इस घटना से गहरे सदमे में हैं और फिलहाल किसी भी संभावित कारण के बारे में कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हैं। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी।
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Varanasi में बुलडोजर रोक पर सवाल, प्रशासनिक दबाव से फैसले पर बहस तेज

New Delhi, Delhi:उत्तर प्रदेश के वाराणसी में जिस तरीके से कोर्ट का आर्डर आया है जिसमें कोर्ट ने बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगाने से मना किया है उसे पर सवालिया निशान खड़ा होता है सभी सबूत होने के बावजूद भी डालते हैं दबाव में काम कर रही हैं लेकिन लोकतंत्र में सबसे बड़ी चीज यह है कि हमें लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का पूरा हक है अगर निश्चली आधारितों से ऐसे फैसले आ रहे हैं तो इसका मतलब साफ है कि राज्य सरकार के दबाव में डालते भी काम कर रही हैं। गाजियाबाद की लोनी मुस्तफाबाद में 29 जून को ज़ैद नाम के लड़के की पीट पीट कर हत्या के मामले में भी सरकार की कार्यशैली पर सवाल है अगर आरोपी मुसलमान होता तो अब तक बुलडोजर की कार्रवाई भी हो चुकी होती है एनकाउंटर भी हो चुका होता आज की तारीख में यह देखा जा रहा है कि पब्लिक की डिमांड पर एनकाउंटर किया जा रहा है जो सरासर गलत है कानून का मजाक बनाया जा रहा है सलाम टीवी से खास बातचीत में जमात इस्लामी हिंद के नेशनल सेक्रेट्री शफी मदनी ने बताया कि हमारी एक साथ मेंबर टीम का डेलिगेशन राजस्थान के कई इलाकों में दौरा किया हमने वहां के स्थानीय लोगों से बात की हमने मुसलमान से बात की हिंदू भाइयों से बात की एडमिनिस्ट्रेशन के कुछ अधिकारियों से बात की ग्राउंड पर जो हमको तस्वीर देखने को मिली सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक 15 दिन का समय डिमोलिशन से पहले देना चाहिए यहां पर 18 तारीख को शाम में नोटिस दिया जाता है और 19 तारीख को सुबह बुलडोजर कार्रवाई हो जाती है सबसे पहले उल्लंघन तो सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का ही है उसके अलावा यह कहा जा रहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुताबिक यह डिमोलिशन किया जा रहा है लेकिन उन नोटिस में कहीं भी राष्ट्रीय सुरक्षा का जिक्र नहीं है ऐसे 1000 से ज्यादा मस्जिद मदरसे दरगाह हैं जिनको नोटिस दिया गया है राजस्थान के आपसी भाईचारे की तस्वीर भी हमने देखी जहां हिंदू और मुस्लिम सब एक साथ खड़े हैं प्रशासन के बुलडोजर की हकीकत यह है कि एक ही जमीन पर एक ही खसरा नंबर पर मस्जिद है दरगाह है और मंदिर है लेकिन बुलडोजर सिर्फ मस्जिद और दरगाह पर चल मंदिर पर नहीं चला यह दौरा रवैया क्यों।
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कानून लागू करने में भेदभाव का आरोप, धार्मिक स्थलों पर बुलडोजर विवाद तेज

New Delhi, Delhi:लेकिन कानून का जो इंप्लीमेंटेशन है वह सब के साथ एक जैसा नहीं होता अगर अपराधी आरोपी प्रभावशाली हैं किसी खास राजनीतिक दल से जुड़े हुए हैं या किसी खास धर्म के से संबंधित लोग हैं तो आप देखेंगे कि प्रशासन का रवैया और कानून नफीस करने वाली एजेंसियों का रवैया अलग-अलग होता है और अब तो यह सामने आ रहा है कि जो हमारे धार्मिक स्थल है उन स्थलों पर भी जिस तरह से बड़े पैमाने पर जिस तरह से चोरी हुई है और भ्रष्टाचार हुआ है उसमें कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है और पूरे देश में इस वक्त एक चर्चा का विषय बना हुआ है तो इससे हमारे देश की का नाम और हमारे देश की जनता का जो विश्वास है वह विश्वास धीरे-धीरे कमजोर पड़ता जा रहा है और यह भी लग रहा है यह हमारी जो जांच एजेंसियां उनका जो रवैया है वह एक जैसा नहीं है सब मामलों में लोग ही नोट कर रहे हैं की किस तरह से अयोध्या के मामले में जो भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है जिस तरह का तरीका और भैया अपनाया जा रहा है ऐसा लगता है कि वास्तविक अपराधियों को पकड़ने या सजा देने की कोशिश की बजाय कुछ प्रभावशाली लोगों को बचाने का प्रयास हो रहा है कि यही मामला अगर दूसरे धर्म के लोगों के किसी धर्म स्थल का होता है या कुछ होता तो क्या सरकार का यही रवैया होता तो यह सवाल उठ रहे हैं और इससे हमारे देश की जो व्यवस्था है और जो हमारे कानून व्यवस्था लागू करने वाले जो संस्थान एजेंसियां हैं उनकी विश्वसनीयता पर भी सवाल पैदा होता है उम्मीद करते हैं कि कानून सबके लिए जैसे काम करना चाहिए और निष्पक्ष का नजर आनी चाहिए कि कानून सिर्फ कानून के माध्यम से भ्रष्टाचार को रोक नहीं जा सकता जब तक के समाज में व्यक्ति में हम अकाउंटेबिलिटी पैदा ना करें एक जवाब देही का विश्वास ना हो और खास तौर से जमाते इस्लामी हिंदी मानती है कि ईश्वर पर विश्वास ईश्वर के सामने जवाब देही का जो विश्वास है उसके बिना इंसान अपने आप को रोकना मुश्किल है सिर्फ कानून के जरिए से रोक नहीं जा सकता जब तक की समझ में और ईश्वर का डर और ईश्वर से आगे जवाब देने का विश्वास लोगों में होगा तो समझ में इस तरह की बुराइयां कम होगी। 5 राज्यों SIR की प्रक्रिया शुरू हो गई है हमने पिछले दिनों देखा है। बंगाल में उत्तर प्रदेश में बिहार में तो वहां जिस तरह से बड़ी संख्या में वोटर को लिस्ट वोटर लिस्ट से हटाया गया है और उसका जो पैटर्न है उसे बहुत सारी चिंताएं और आशंकाएं पैदा हुई और जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं वह अपने वोट के अधिकार से वंचित कर दिए गए हम यह समझते हैं कि जिन लोगों के नाम हटे हैं उनमें बहुत बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जो वास्तव में वोटर हैं लेकिन जो प्रशासनिक कारण है या जो टाइमलाइन दिया गया है या जो समय सीमा दी गई है उसकी वजह से बहुत सारे लोग फिर में आने से रह गए और दूसरी जो आशंका पहले भी थी वह यह थी कि ऐसा यार की आड़ में और ऐसा यार के जरिए से लोगों की नागरिकता पर सवाल उठाए जा रहे हैं और लोगों की नागरिकता का सुबोध मांगा जा रहा है तो इलेक्शन कमीशन का काम यह नहीं है कि वह नागरिकता की परीक्षा करें या नागरिकता स्थापित करने का काम करें एक और बड़ा एतराज जो हम शुरू से करते आए ऐसा यार के बारे में वह यह है कि ऐसा यार का मतलब यह होना चाहिए कि कोई भी नागरिक चाहे उसका घर हो या ना हो वह अपने वोट के अधिकार से वंचित न हो और उसका रजिस्ट्रेशन वोटर लिस्ट में जरूर होना चाहिए इसकी कोशिश इलेक्शन कमीशन करें यहां जो बात हो रही है वह ज्यादा से ज्यादा लोगों को हटाने की कोशिश हो रही और लोगों से साबित करने का जो बार है वह लोगों पर डाला गया है कि लोग साबित करें कि वह वैलिड वोटर हैं इससे पहले कभी नहीं हुआ कि लोगों को यह कहा गया हो कि वह साबित करें इलेक्शन कमीशन और उसके लोग जो है वह जाकर अपने तरीके से जांच करते थे और लोगों के वोटर लिस्ट में नाम ऐड करते थे तो यह जो चेंज आया है कि आप लोगों को साबित करना है कि वह वैलिड पोर्टल हुआ है और इलेक्शन कमीशन का जो रवैया है इलेक्शन कमीशन का जो रोल है उसकी जो निष्पक्षता है उसे पर सवाल उठे हैं तो हम उम्मीद करते हैं कि इलेक्शन कमीशन इस बात पर निशुल्क विचार करेगा बल्कि अपने रवैया में तब्दीली लेगा की इलेक्शन कमिशन किसी राजनीतिक एजेंडा को आगे बढ़ने का टोल ना बने और जो पैटर्न सामने आया है ऐसा यार मैं वोटर लिस्ट नाम हटाने का उसमें आदिवासी लोग हैं गांव के लोग हैं कम पढ़े लिखे लोग हैं और विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय के लोग अगर आप पैटर्न देखें कि मुस्लिम समुदाय का किसी राज्य में कितना पर्सेंट है उनकी आबादी का और जो नाम हटे हैं उसे नाम में जो परसेंटेज है वह उनकी आबादी से बहुत ज्यादा है शफी मदनी। आप सब लोग विश्वास से वाकिफ है पिछले कुछ महीनो से देश के कुछ खास विस्तार में मस्जिद दरगाहों और मद्रास को उठाया जा रहा है और एक पूरा प्लेनेट एक एजेंडा है जिस पर अमल किया जा रहा है और खासतौर से जो सर्दी इलाके हैं वहां पर यह काम ज्यादा तौर पर किया जाए इसके अलावा भी हुआ है जैसे की वाराणसी के 5:00 को तोड़ा गया और इसकी वजह यह बताई गई कि यह अधिकरण इसलिए किया जा रहा है कि मंदिर के कॉरिडोर का निर्माण करना है यह बात हमारी समझ में नहीं आती है कि यह तो हो सकता है की प्रजाति विकास के कामों के लिए तो कभी यह जरूर हो सकती है कि कुछ चीजों को हटाया जाए लेकिन एक धार्मिक स्थल के विकास के लिए दूसरी दूसरे धार्मिक स्थलों को इस तरह से तोड़ना यह कहां का न्याय है और यह कैसी सिस्टम है वह हमें समझ में नहीं आती है इसके अलावा भी जैसे कि हम अपने प्रवास की बात करेंगे इसके पहले बहुत सारे और इलाकों में भी एक काम हो रहा है जयपुर की नूरानी मस्जिद को तोड़ा गया वह तकरीबन 50 साल पुरानी मस्जिद और सारे कानूनी इसके पास आजाद मौजूद होने के बावजूद भी इसको तोड़ दिया गया इसी तरह से आज के इलाके में गुजरात के दरगाहों को और दो मस्जिदों को तोड़ दिया गया और कोई कार्रवाई नोटिस की उनको पहले से इतना करने तक कि नहीं हुई है जहां पर हम दौरा करके आए हैं वह बाड़मेर और जैसलमेर और बीकानेर के तरफ का इलाका है जो सर्दी इलाका है और वहां पर तकरीबन 1000 से ज्यादा मस्जिदों दरगाहों को यानी निशाना बनाते हुए उनको नोटिस जारी की और बहुत सारी मस्जिदों को अभी तोड़ भी दिया गया है बारे में कुछ मस्जिदों को मद्रास को तोड़ा यहां तक के कुछ लोगों के मकानों को भी तोड़ दिया गया है और इसके साथ जैसलमेर में भी कुछ मस्जिदों को वहां पर और मद्रास को दरगाहों को तोड़ा गया तो यह काम जो हो रहा है यह कोई कानून के मुताबिक नहीं हो रहा है ऐसा लग रहा है कि जैसे यहां जंगल का कानून है की नेशनल सिक्योरिटी का मसला है इसलिए पहले यह जो बॉर्डरिंग इलाका था वह 15 किलोमीटर के एरिया के लिए अब इसको 50 किलोमीटर तक बढ़ा दिया है और 50 किलोमीटर के एरिया में इस तरह की यदि जो चीज होगी इस पर नजर रखी जाएगी और इसके बारे में फैसला होगा वह किया जाएगा लेकिन हम देखते हैं कि यह पूरा इनाम की जो कार्रवाई हुई है एक ही जमीन का टुकड़ा है जिसके बारे में यह कहा जाता है कि यह एंक्रोचमेंट है या गवर्नमेंट की जगह है उसी जमीन में मस्जिद भी है या दरगाह भी है और मंदिर भी है तो आप मंदिर को बाकी रखते हैं और मस्जिद और दरगाह को आप तोड़ने की कार्रवाई करते हैं ऐसी कोई नोटिस में नेशनल सिक्योरिटी का मसला उठाया ही नहीं रहा नोटिस में नहीं बताया गया कि नेशनल सिक्योरिटी का मसला है इसलिए यह काम हो रहा है इसलिए हमने जो दौरा किया और यहां पर गए जहां पर लोगों को हम मिले जहां पर हमने उनकी कार्यवाहियों का खुद यानी और यह बताना है कि हम चाहे वह कर सकते हैं कोई हमको रोक नहीं सकता 17 तारीख की शाम को नोटिस दी जा रही है 18 तारीख की सुबह वह लोग जिनका नोटिस दी गई है वह अपने साथ लेकर वहां सरकारी कचहरी में पहुंचते हैं और वह मौजूद है और यहां शुरू हो जाती है तो आपने तो यह तय कर दिया था कल जोधपुर हाई कोर्ट में भी इसकी पेशी हुई है और अच्छी पहल हुई है और ऐसा लगता है कि शायद इसको कुछ वक्त के लिए रोका जाए जैसे कि आप इनाम करना चाहते हैं आप नोटिस जारी कर रहे हैं तो इसका एक वक्त देना पड़ता है पहले तो यह कोशिश की जाती है कि अगर यह मामला है कि गलत तरीके पर गलत जमीन पर बनाया भी गया है कि उनको रेगुलराइज किया जाए Syed_tt_jamat सलाम टीवी से खास बातचीत में जमात इस्लामी हिंद के नेशनल सेक्रेट्री शफी मदनी ने बताया कि हमारी एक साथ मेंबर टीम का डेलिगेशन राजस्थान के कई इलाकों में दौरा किया हमने वहां के स्थानीय लोगों से बात की हमने मुसलमान से बात की हिंदू भाइयों से बात की एडमिनिस्ट्रेशन के कुछ अधिकारियों से बात की ग्राउंड पर जो हमको तस्वीर देखने को मिली सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के मुताबिक 15 दिन का समय डिमोलिशन से पहले देना चाहिए यहां पर 18 तारीख को शाम में नोटिस दिया जाता है और 19 तारीख को सुबह बुलडोजर कार्रवाई हो जाती है सबसे पहले उल्लंघन तो सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन का ही है उसके अलावा यह कहा जा रहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मुताबिक यह डिमोलिशन किया जा रहा है लेकिन उन नोटिस में कहीं भी राष्ट्रीय सुरक्षा का जिक्र नहीं है ऐसे 1000 से ज्यादा मस्जिद मदरसे दरगाह हैं जिनको नोटिस दिया गया है राजस्थान के आपसी भाईचारे की तस्वीर भी हमने देखी जहां हिंदू और मुस्लिम सब एक साथ खड़े हैं प्रशासन के बुलडोजर की हकीकत यह है कि एक ही जमीन पर एक ही खसरा नंबर पर मस्जिद है दरगाह है और मंदिर है लेकिन बुलडोजर सिर्फ मस्जिद और दरगाह पर चला मंदिर पर नहीं चला यह दौरा रवैया क्यों।
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PM Modi का रायसिंहनगर में पचपदरा रिफाइनरी लोकार्पण, विकास की नई दिशा

Sri Ganganagar, Rajasthan:रायसिंहनगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पचपदरा में रिफाइनरी के लोकार्पण कार्यक्रम का सीधा प्रसारण आज रायसिंहनगर के अंबेडकर भवन में बड़ी स्क्रीन के माध्यम से किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक और सरकार की विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों ने प्रधानमंत्री के संबोधन को सुना। कार्यक्रम में नगर पालिका अध्यक्ष मनीष कौशल, भाजपा नेता मदन जोशी और भाजपा जिला महामंत्री कंचन नायक विशेष रूप से उपस्थित रही। इनके साथ ही नगर पालिका के सहायक अभियंता देवेंद्र सिंह सहित पालिका के अन्य अधिकारी और कर्मचारी के विभिन्न योजनाओं के लाभार्थी भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
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सिरोही हॉस्टल मामले में बच्चों के सुरक्षा सवालों पर जांच तेज

Sirohi, Rajasthan:सिरोही से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। एक ईमेल शिकायत के बाद शुरू हुई जांच में एक हॉस्टल से जुड़े गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। जांच के दौरान कई कथित अनियमितताओं और बच्चों से यौन शोषण का दावा किया गया है। जी राजस्थान की टीम मौके पर पहुंची और ग्राउंड जीरो से इस पूरे मामले की पड़ताल कर हॉस्टल की व्यवस्थाओं को जांचा। सबसे गंभीर सवाल सिर्फ हॉस्टल की अवव्यवस्थाओं के साथ साथ सिस्टम की संवेदनशीलता पर भी उठ रहे हैं। शिकायत के अनुसार, बच्चों के मेडिकल परीक्षण के दौरान जिला अस्पताल में रात्रि ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने कथित रूप से पुलिस से शराब के कैन की मांग की। इस मामले की शिकायत सीडब्ल्यूसी सदस्य ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से की, जिसके बाद सचिव सावित्री आनंद निर्भीक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद शिकायत मिलने के बाद पुलिस, महिला एवं बाल विकास विभाग, सीडब्ल्यूसी और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सहित कई एजेंसियां सक्रिय हो गईं। जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, डीएलएसए और सीडब्ल्यूसी की जांच में हॉस्टल के पंजीकरण न होने सहित कई कथित अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच के दौरान दो कंप्यूटर जब्त किए गए, जबकि सीसीटीवी फुटेज की जांच भी जारी है। अधिकारियों का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। सावित्री आनंद निर्भीक सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने कहा कि पूरा मामला संवेदनशील है। एक और पहलू जिला अस्पताल से जुड़ा है: शिकायत के अनुसार, पीड़ित बच्चों के मेडिकल परीक्षण के दौरान रात्री ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर द्वारा पुलिस से शराब के कैन की मांग के आरोप लगाए गए। सीडब्ल्यूसी सदस्य ने प्रशासन को शिकायत दी। शिकायत मिलने के बाद सचिव ने मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। महिला एवं बाल कल्याण समिति की रिपोर्ट के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव द्वारा एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए। अब सभी एजेंसियां पूरे मामले की हर पहलू की पड़ताल कर रही हैं। यह सिर्फ एक हॉस्टल का मामला नहीं है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित संस्थाओं की जवाबदेही पर भी सवाल खुलेगा। अब सभी की नजर जांच और कानूनी प्रक्रिया के अगले कदम पर है। सभी अभिभावकों से अपील है कि बच्चों को किसी भी हॉस्टल में प्रवेश दिलाने से पहले उसकी मान्यता, पंजीकरण, सुरक्षा व्यवस्था, स्टाफ का सत्यापन और पिछले रिकॉर्ड की पूरी जानकारी अवश्य लें। बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
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ग्वालियर में विवाहरात्रि दुल्हन फरार, पति पर नपुंसकता के आरोप; मेडिकल टेस्ट की मांग

Morena, Madhya Pradesh:ग्वालियर सलग - पहली रात छज्जा लांघकर भागी दुल्हन; अब पति पर लगाया नपुंसकता का आरोप, डरे पति ने कहा- 'कराएं मेडिकल टेस्ट' ग्वालियर शहर में एक हैरान करने वाला वैवाहिक विवाद सामने आया है। शादी की पहली ही रात दुल्हन के भागने और उसके बाद पति पर लगे संगीन आरोपों ने पुलिस को भी हैरत में डाल दिया है। देश के चर्चित 'नीले ड्रम' हत्याकांड के खौफ से डरे पीड़ित पति जितेन्द्र जोशी ने एसपी को आवेदन देकर सुरक्षा की मांग की है। पहली रात छज्जे से भागी दुल्हन, CCTV में कैद पीड़ित जितेन्द्र जोशी की शादी 28 जून को नम्रता (बदला हुआ नाम) से हुई थी। 29 जून की रात दोनों अपने कमरे में सोने गए, लेकिन अगली सुबह दुल्हन गायब मिली। जब घर के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए, तो पता चला कि मुख्य गेट पर ताला होने के कारण दुल्हन छत पर गई और छज्जे के रास्ते पड़ोसी के घर से होते हुए भाग निकली। इसके बाद पति ने विश्वविद्यालय थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। थाने पहुंचते ही बदला रंग; लगाए गंभीर आरोप परिजनों के दबाव के बाद दुल्हन का भाई उसे लेकर विश्वविद्यालय थाने पहुंचा और जितेन्द्र पर उसे साथ रखने का दबाव बनाया। जब जितेन्द्र ने इस अजीबोगरीब घटना के बाद उसे रखने से इनकार कर दिया, तो पत्नी ने नया मोर्चा खोल दिया। पत्नी ने पति और उसके परिवार पर मारपीट, दहेज प्रताड़ना और पति पर नपुंसकता (Impotency) के गंभीर आरोप लगा दिए। पति का पलटवार: 'कराएं मेडिकल टेस्ट, 6 दिन से पुलिस शांत क्यों?' इन आरोपों पर पति जितेन्द्र ने मीडिया के सामने आकर कहा: 'मुझ पर लगाए गए आरोप पूरी तरह झूठे और निराधार हैं। मेरी छवि खराब की जा रही है। अगर इन आरोपों में थोड़ी भी सच्चाई है, तो प्रशासन मेरा मेडिकल टेस्ट (Medical Exam) करवा ले, मैं तैयार हूँ। मुझे 'नीले ड्रम' वाली घटना जैसा खौफ सता रहा है और अपनी जान का खतरा है।' जितेन्द्र ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उसका आरोप है कि घटना के 6 दिन बीत जाने और सीसीटीवी फुटेज मौजूद होने के बावजूद पुलिस ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। पीड़ित ने निष्पक्ष जांच की मांग की है।
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