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पीपलखूंट के अरण्य में महाशिवरात्रि पर शिव शिला और शेषनाग आकर्षण
HUHITESH UPADHYAY
Feb 15, 2026 02:00:19
Pratapgarh, Rajasthan
पीपलखूंट के अरण्य में आस्था का अद्भुत धाम: शेषनाग शिला, पांडवों की पदचिह्न और पाँच शताब्दी पुराना किला
घने जंगल, पथरीली चढ़ाई, रहस्यमयी शांति और प्रकृति की गोद में स्वयंभू शिवलिंग… यह दृश्य किसी पौराणिक कथा का नहीं, बल्कि प्रतापगढ़ जिले के पीपलखूंट का है। यहां आस्था, इतिहास और लोकविश्वास ऐसे गुंथे हुए हैं कि हर कदम पर एक नई कहानी जन्म लेती है। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर यह स्थल शिवभक्तों और रोमांच प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बन जाता है।
राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में नेशनल हाईवे-56 के समीप स्थित पीपलखूंट का वन क्षेत्र अपने भीतर अनगिनत रहस्यों को समेटे हुए है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, महाभारत काल में पांडवों ने अपने अज्ञातवास का कुछ समय यहीं व्यतीत किया था। आज भी पत्थरों पर दिखाई देने वाले निशानों को ग्रामीण पांडवों की पदचिह्न मानते हैं।
जंगल की कठिन चढ़ाई के बीच स्थित पूर्ण शिला महादेव मंदिर यहां की आस्था का केंद्र है। बताया जाता है कि लगभग 39 वर्ष पूर्व यह शिवलिंग प्रकट हुआ था। शिला में स्वयं उकेरे हुए इस शिवलिंग की बनावट उत्तराखंड के पवित्र धाम केदारनाथ धाम के शिवलिंग से मिलती-जुलती मानी जाती है। महाशिवरात्रि पर यहां विशेष पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता है।
इस स्थल की सबसे अनोखी पहचान है शेषनाग के आकार में दिखाई देने वाला प्राकृतिक शिलाखंड। घने जंगल के बीच यह अद्भुत आकृति श्रद्धालुओं और पर्यटकों दोनों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। मान्यता है कि यह स्थान स्वयं भगवान शिव की दिव्य उपस्थिति का प्रतीक है। पूर्ण शिला महादेव तक पहुंचने से पहले श्रद्धालु ‘बाबाजी की धूनी’ नामक स्थान पर रुकते हैं, जहां साधना और तप की परंपरा आज भी जीवित है। आगे ऊंचाई पर स्थित मौलक माता और हनुमान मंदिर लगभग पांच शतक पुराने बताए जाते हैं। इनके समीप प्राचीन किले के खंडहर मौजूद हैं, जिनके बारे में कोई लिखित प्रमाण नहीं मिलता, लेकिन लोककथाएं आज भी उनके इतिहास को जीवित रखे हुए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि कभी-कभी यहां आकाशवाणी जैसी रहस्यमयी ध्वनियां सुनाई देती हैं, जिससे इस स्थान की रहस्यमयता और भी बढ़ जाती है। वहीं वन विभाग ने क्षेत्र में पैंथर सहित जंगली जानवरों की आवाजाही को देखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी है।
महाशिवरात्रि के इस पावन अवसर पर पीपलखूंट का पूर्ण शिला महादेव धाम केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति, लोकविश्वास और प्रकृति की अनुपम धरोहर के रूप में सामने आता है। यहां की हर शिला, हर पगडंडी और हर लोककथा मानो सदियों पुरानी गाथा सुनाती है—जिसे सुनने और महसूस करने के लिए बस श्रद्धा और साहस की जरूरत है।
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