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β2m से बैक्टीरिया की बायोफिल्म रोकने में IIT जोधपुर की नई खोज
RKRakesh Kumar Bhardwaj
Feb 24, 2026 04:46:49
Jodhpur, Rajasthan
जोधपुर आईआईटी जोधपुर के वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि हासिल की है। संस्थान के शोधकर्ताओं ने मानव शरीर में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले एक प्रोटीन की ऐसी नई भूमिका खोजी है, जो खतरनाक बैक्टीरिया द्वारा बनाई जाने वाली बायोफिल्म को बनने से रोक सकता है। यह शोध विश्व की प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका Proceedings of the National Academy of Sciences (PNAS) में प्रकाशित हुआ है। शोध के अनुसार, मानव शरीर में मौजूद β2-माइक्रोग्लोब्यूलिन (β2m) नामक प्रोटीन Escherichia coli (ई.कोलाई) जैसे बैक्टीरिया द्वारा बनाई जाने वाली बायोफिल्म के निर्माण को प्रारंभिक चरण में ही अवरुद्ध कर देता है। बायोफिल्म बैक्टीरिया की एक मजबूत सुरक्षात्मक परत होती है, जो उन्हें एंटीबायोटिक दवाओं और शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली से बचाती है। यही कारण है कि बायोफिल्म से जुड़े संक्रमण लंबे समय तक बने रहते हैं और उनका उपचार कठिन हो जाता है। वैज्ञानिकों ने बताया कि ई.कोलाई में बायोफिल्म बनने की प्रक्रिया में “कर्ली” (Curli) नामक प्रोटीन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह एक ढांचे की तरह कार्य करता है, जिससे बैक्टीरिया आपस में जुड़कर सतह पर चिपक जाते हैं। शोध में पाया गया कि β2-माइक्रोग्लोब्यूलिन कर्ली के निर्माण को चयनात्मक रूप से रोक देता है। खास बात यह है कि यह प्रोटीन बैक्टीरिया को मारता नहीं है, बल्कि उनकी सुरक्षात्मक संरचना बनने से रोकता है। इससे एंटीबायोटिक प्रतिरोध (AMR) विकसित होने की संभावना कम हो सकती है। इस शोध का नेतृत्व आईआईटी जोधपुर के बायोसाइंस एवं बायोइंजीनियरिंग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. नेहा जैन ने किया। उनके अनुसार, बायोफिल्म लंबे समय तक चलने वाले संक्रमणों के उपचार में सबसे बड़ी चुनौती है। यदि बायोफिल्म बनने से रोका जा सके तो संक्रमण को नियंत्रित करना कहीं अधिक आसान हो सकता है। बायोफिल्म अक्सर कैथेटर, कृत्रिम हृदय वाल्व, हड्डी के इम्प्लांट और पुराने घावों पर विकसित होती है। इनमें मौजूद बैक्टीरिया सामान्य बैक्टीरिया की तुलना में हजार गुना तक अधिक एंटीबायोटिक प्रतिरोधी हो सकते हैं। ऐसे में यह खोज वैश्विक स्वास्थ्य के लिए नई दिशा प्रदान करती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि मानव शरीर में पहले से मौजूद अणुओं के आधार पर नई और सुरक्षित उपचार पद्धतियों के विकास का रास्ता खुल सकता है। आईआईटी जोधपुर की यह खोज एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस जैसी वैश्विक चुनौती से निपटने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.
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