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अजमेर दरगाह में बसंत महोत्सव: सूफी प्रेम से हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रदर्शन
ADAbhijeet Dave
Jan 25, 2026 07:03:20
Ajmer, Rajasthan
अजमेर शरीफ में ख्वाजा गरीब नवाज हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती (र.अ.) की पावन दरगाह शरीफ में सिलसिला-ए-चिश्तीयां की खानकाहों की सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार 'बसंत' अकीदत के साथ मनाया गया। हर साल की तरह इस वर्ष भी दरगाह शरीफ में बसंत पेश की गई, जिसमें सूफी कव्वाली और फूलों की सजावट ने वातावरण को रंगीन और खुशबूदार बना दिया। यह उत्सव हिंदू-मुस्लिम एकता की जीवंत मिसाल पेश करता है, जहां संप्रदायों की दीवारें मिट जाती हैं और प्रेम व भक्ति का मेल होता है।
परंपरा के अनुसार, दरगाह के निजाम गेट से शाही कव्वालों ने सरसों के पीले फूलों और गुलाब से सजे खूबसूरत बसंत के गुलदस्तों को खानकाही अंदाज में मजार शरीफ पर पेश किया। शाही कव्वालों ने हज़रत अमीर खुसरो और हज़रत नियाज बे नियाज के लिखे बसंत गीतों को राग बसंत में गाकर मंत्रमुग्ध कर दिया। इन गीतों में बसंत की ऋतु की सुंदरता के साथ-साथ सूफी प्रेम और ईश्वर भक्ति की गहराई झलकती है।
कार्यक्रम में दरगाह कमेटी के सदस्यों ने पूर्ण व्यवस्था संभाली। दरगाह दीवान साहब के पुत्र सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती सहित कई खुद्दाम हजरात और आशिकाने ख्वाजा ने भी बसंत में शिरकत की। इस उत्सव की सांस्कृतिक गहराई को दर्शाता है।
बसंत पेश करने की यह परंपरा हज़रत अमीर खुसरो से शुरू हुई तब से चिश्तिया सिलसिले की खानकाहों में बसंत को त्योहार के रूप में मनाया जाने लगा। अजमेर शरीफ में यह परंपरा ख्वाजा गरीब नवाज के चिश्ती सिलसिले से जुड़ी हुई है, जहां बसंत सूफी संगीत और भक्ति का अनुपम संगम बन जाता है।
यह उत्सव सिर्फ मौसमी नहीं, बल्कि सामाजिक सद्भाव का प्रतीक है। आज के समय में जब समाज में विभाजन की बातें होती हैं, अजमेर दरगाह शरीफ में बसंत का जश्न हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल पेश करता है। यहां हर धर्म के लोग बिना किसी भेदभाव के आते हैं और बसंत की खुशी साझा करते हैं।
शाही कव्वालों द्वारा पेश किए जाने वाले कलाम जैसे "आज बसंत मनाले सुहागन" आदि सदियों से गाए जाते हैं, जो अमीर खुसरो की रचनाओं से प्रेरित हैं।
दरगाह शरीफ में बसंत का यह आयोजन न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक महत्व भी रखता है। यह बताता है कि भारतीय संस्कृति में सूफी संतों ने स्थानीय परंपराओं को अपनाकर उन्हें और समृद्ध किया। ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह जहां लाखों जायरीन रोज आते हैं, वहां बसंत जैसे उत्सव सद्भाव और प्रेम की मिसाल बने रहते हैं।
बाइट - अख्तर हुसैन, शाही कव्वाल
बाइट - सैय्यद नसीरुद्दीन चिश्ती, दऱगाह दीवान प्रतिनिधि
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