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चिल्हारी में झोलाछाप डॉक्टर की क्लीनिक सील, 156 तरह की दवाएं जब्त
Manpur, Madhya Pradesh:मानपुर SDM कमलेश राम नीरज और बीएमओ डॉक्टर निशांत सिंह परिहार की संयुक्त टीम ने चिल्हारी में झोलाछाप डॉक्टर सुब्रतो राय की क्लीनिक पर छापा मारा। इस कार्रवाई में भारी मात्रा में दवाइयां जब्त की गईं और डिस्पेंसरी संचालन के लिए कोई वैध दस्तावेज न मिलने पर क्लीनिक को सील कर दिया गया। बीएमओ डॉक्टर परिहार ने बताया कि सुब्रतो राय की क्लीनिक से 156 प्रकार की दवाएं जब्त की गईं हैं। मौके पर पंचनामा बनाकर क्लीनिक को सील कर कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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अम्बेडकरनगर में शॉर्ट सर्किट से गेहूं जलकर राख, ग्रामीणों ने आग पर काबू पाया
Ambad, Maharashtra:अम्बेडकरनगर- शॉर्ट सर्किट से गेंहू के खेत मे लगी आग, 4 बीघा गेंह की खड़ी फसल जलकर राख, ग्रामीणों ने कड़ी मसक्कत के बाद आग पर पाया काबू, अकबरपुर कोतवाली क्षेत्र के रतनपुर बाईपास की घटना0
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AI से रंगदारी: कौशांबी में साले-बहनोई गिरफ्तार
Gohara Marufpur, Uttar Pradesh:कौशांबी जिले में अपराध का एक नया और हैरान करने वाला तरीका सामने आया है, जहां साले-बहनोई की जोड़ी ने AI तकनीक का इस्तेमाल कर गैंगस्टर स्टाइल में रंगदारी मांगने की साजिश रची। आरोपियों ने पहले अवैध असलहों के साथ अपनी फर्जी फोटो तैयार की और फिर एक कपड़ा व्यापारी से 5 लाख रुपये की रंगदारी मांग डाली। इतना ही नहीं, पैसे न देने पर सीने पर गोली मारने की धमकी भी दी गई। पीड़ित की तहरीर पर पुलिस ने मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। मामला कोखराज थाना क्षेत्र के भरवारी कस्बे का है, जहां 31 मार्च को कपड़ा व्यापारी प्रज्ज्वल के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से व्हाट्सएप मैसेज आया। मैसेज में भेजी गई फोटो में युवक खुद को अवैध असलहों के साथ दिखा रहा था और 5 लाख रुपये की रंगदारी की मांग कर रहा था। साथ ही रकम न देने पर जान से मारने की धमकी दी गई। धमकी से घबराए व्यापारी ने तुरंत कोखराज थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की और तकनीकी सर्विलांस व मुखबिर की मदद से आरोपी की पहचान समदा गांव निवासी आबिद के रूप में की। पुलिस ने आबिद को गिरफ्तार कर पूछताछ की, तो उसने खुलासा किया कि इस पूरी साजिश के पीछे उसका बहनोई इसरार अहमद है, जिसने AI की मदद से उसकी फोटो को हथियारों के साथ एडिट कर गैंगस्टर जैसा रूप दिया और उसी फोटो के जरिए रंगदारी मांगी। आबिद की निशानदेही पर पुलिस ने चायल कस्बे से इसरार अहमद को भी गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपी पेशे से ऑटो चालक हैं और इनके खिलाफ पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला है। फिलहाल पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि आखिर दोनों ने इस तरह की वारदात को अंजाम देने का प्लान क्यों बनाया। फिलहाल पुलिस मामले की गहराई से जांच में जुटी है। इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि अब अपराधी AI तकनीक का भी सहारा लेने लगे हैं, जिससे पुलिस के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही0
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असम: गोसाईंगांव में JMM उम्मीदवार Fedriction Hansda के लिए जनसभा
Ranchi, Jharkhand:*असम विधानसभा चुनाव में गोसाईंगांव विधानसभा से झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) प्रत्याशी श्री फैड्रिक्शन हांसदा के पक्ष में आयोजित चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए गांडेय विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन। विधायक श्रीमती कल्पना सोरेन ने कहा कि असम के आदिवासियों के हितों की रक्षा अब जेएमएम करेगी। असम विधानसभा चुनाव कोई सामान्य चुनाव नहीं, बल्कि इतिहास बनाने का चुनाव है। यहां की जनता बदलाव का मन बना चुकी है। श्रीमती कल्पना सोरेन ने कहा कि असम के चाय बागान में काम करने वाले मजदूरों को उनका हक-अधिकार दिलाने के लिए झामुमो प्रतिबद्ध है और आने वाले समय भी प्रतिबद्ध रहेगा। आपका एक-एक वोट बहुमूल्य है। आपका एक वोट असम में रहने वाले आदिवासी समुदाय को मजबूती प्रदान करेगा। इस अवसर पर सांसद श्रीमती जोबा माझी एवं विधायक श्री सोमेश चंद्र सोरेन ने भी लोगों से जेएमएम प्रत्याशी श्री फैड्रिक्शन हांसदा को वोट देकर अधिक से अधिक मतों से विजयी बनाने की अपील की।*0
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IIT Bombay ने सूखे पत्तों से गैसिफायर बनाकर LPG खर्च में बड़ी बचत करायी
Mumbai, Maharashtra:इस वक़्त अगर कोई आपस कहे कि आपको खाना बनाने के लिए LPG गैस की ज़रुरत नहीं है बल्कि आपके आसपास बिखरे पेड़ पौधों के पत्तो से ही गए बनाई जा सकती है वो भी कीमत में LPG गैस की तुलना में आधी तो आपको लगेगा की शायद कोई आपसे मज़ाक कर रहा है लेकिन इसी बात को सच कर दिखाया है IIT Bombay ने इस समय ईंधन की बढ़ती कीमतें और LPG की संभावित कमी चिंता का एक बढ़ता कारण बन रही हैं, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) बॉम्बे के पास इसका समाधान मौजूद है, जिसकी मदद से गैस संकट के दौरान भी उसके कैंपस की रसोई बिना किसी रुकावट के चल रही हैं। अपनी खुद की पेटेंटेड बायोमास गैसीफिकेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए, इस संस्थान ने अपने कैंपस में गिरे हुए पत्तों, शाखाओं, टहनियों को खाना पकाने के एक भरोसेमंद ईंधन में बदल दिया है। यह इनोवेशन केमिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रोफिसर संजय महाजनी के 2014 में शुरू हुए दस साल के रिसर्च का नतीजा है। ग्रीन कैंपस में बड़ी मात्रा में सूखे पत्तों के कचरे को ठिकाने लगाने की चुनौती का सामना करते हुए, उनकी टीम ने इसे इस्तेमाल करने लायक एनर्जी में बदलने के तरीके खोजे। ये कैंपस करीब 500 एकड़ में फैला हुआ हैl यहाँ गिरने वाले कचरे को ठिकाने लगाना एक चुनौती थी क्योकि अंदाज़े के मुताबिक इस इलाके में हर दिन 2-3 टन पेड़ पौधों की सूखी पत्तियां और टहनियां गिरती है जिनका पहले कोई उपयोग नहीं था। उलटे इस सूखे कचरे को उठाने के लिए है साल IIT बॉम्बे को 50 लाख रूपये खर्च करने पड़ते थे इसलिए इन्होने सूखे कचरे को बदलने पर काम करना शुरू किया और एक गैासीफायर बनाया गया शुरूआती ट्रायल में बहुत ज़्यादा धुआँ, और क्लिंकर का बनना—यानी ठोस अवशेष जो आम सिस्टम को जाम कर देते थे जैसी मुसीबते सामने आयी। इन रुकावटों के बावजूद, टीम ने इस टेक्नोलॉजी को बेहतर बनाने का काम जारी रखा। और फिर कई सालो की मेहनत के बाद इनहोंने एक पेटेंटेड गैसिफायर तैयार कर लिया था, जिससे क्लिंकर बनने की समस्या काफ़ी हद तक कम हो गई और यह सिस्टम ज़्यादा व्यावहारिक और असरदार बन गया। आज IIT बॉम्बे की कैंटीन 30% से 40% कम LPG का इस्तेमाल करके चलती है, और लगभग 60% थर्मल एफिशिएंसी हासिल करती है, साथ ही इससे बहुत कम उत्सर्जन होता है। इस टेक्नोलॉजी ने न सिर्फ़ ईंधन की लागत कम की है, बल्कि यह भी पक्का किया है कि अगर LPG की सप्लाई में कोई रुकावट भी आ जाए, तो भी खाना बनाने का काम बिना किसी रुकावट के चलता रहे। इस सिस्टम से हर साल लगभग आठ टन कार्बन-डाइऑक्साइड का उत्सर्जन कम होता है। इसकी सफलता के बाद अब हॉस्टल के मेस में बड़ी यूनिट लगाने की योजना पर काम चल रहा है, जिससे LPG की खपत में काफ़ी कमी आ सकती है और हर साल ₹50 लाख तक की बचत हो सकती है, साथ ही सैकड़ों टन कार्बन उत्सर्जन भी कम होगा। यानि पहले तो सूखे कचरे के निपटारन में खर्च होने वाले 50 लाख रूपये बचाये गए और अब बनने वाली गैस के इस्तेमाल से एक साल में करीब 50 लाख रूपये की LPG गैस का इस्तेमाल बचाया जा रहा है यानि IIT Bombay को इस नायाब टेक्नोलॉजी से हर साल 1 करोड़ रूपये की बचत हो रही हैl यह सिस्टम बहुत लचीला है और इसमें अलग-अलग तरह के सूखे कचरे का इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसमें ऐसी चीज़ें भी शामिल हैं जिन्हें रीसायकल नहीं किया जा सकता। टीम ने गैसीफायर और बर्नर, दोनों को खुद ही डिज़ाइन किया है और इसकी पहुँच कैंपस से आगे बढ़ाकर उद्योगों और बड़े पैमाने पर खाना पकाने तक ले जाने की योजना बना रही है। इसका मकसद LPG पर निर्भरता कम करना और ऊर्जा की ज़रूरतों के लिए एक ज़्यादा साफ़-सुथरा और किफ़ायती विकल्प देना है。0
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IIT बॉम्बे की बायोमास गैसीफिकेशन से LPG खपत 40% कम, कैंटीन की रसोई सस्ती
Mumbai, Maharashtra:इस वक़्त अगर कोई आपस कहे कि आपको खाना बनाने के लिए LPG गैस की ज़रूरत नहीं है बल्कि आपके आसपास बिखरे पेड़ पौधों के पत्तों से ही गई बनाई जा सकती है वो भी कीमत में LPG गैस की तुलना में आधी तो आपको लगेगा कि शायद कोई आपसे मजाक कर रहा है लेकिन इसी बात को सच कर दिखाया है IIT बॉम्बे ने। ऐसे समय में जब ईंधन की बढ़ती कीमतें और LPG की संभावित कमी चिंता का एक बढ़ता कारण बन रही हैं, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) बॉम्बे के पास इसका समाधान मौजूद है, जिसकी मदद से गैस संकट के दौरान भी उसके कैंपस की रसोई बिना किसी रुकावट के चल रही है। अपनी खुद की पेटेंटेड बायोमास गैसीफिकेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए, इस संस्थान ने अपने कैंपस में गिरे हुए पत्तों, शाखाओं, टहनियों को खाना पकाने के एक भरोसेमंद ईंधन में बदल दिया है। यह इनोवेशन केमिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के प्रोफेसर संजय महाजनी के 2014 में शुरू हुए दस साल के रिसर्च का नतीजा है। ग्रीन कैंपस में बड़ी मात्रा में सूखे पत्तों के कचरे को ठिकाने लगाने की चुनौती का सामना करते हुए, उनकी टीम ने इसे इस्तेमाल करने लायक एनर्जी में बदलने के तरीके खोजे। ये कैंपस करीब 500 एकड़ में फैला हुआ है। यहाँ गिरने वाले कचरे को ठिकाने लगाना एक चुनौती थी क्योंकि अंदाज़े के मुताबिक इस इलाके में हर दिन 2-3 टन पेड़ पौधों की सूखी पत्तियाँ और टहनियां गिरती है जिनका पहले कोई उपयोग नहीं था। उलटे इस सूखे कचरे को उठाने के लिए IIT बॉम्बे को पहले 50 लाख रूपये खर्च करने पड़ते थे; इसलिए इन्होने सूखे कचरे को बदलने पर काम करना शुरू किया और एक गैसीफायर बनाया गया। शुरुआती ट्रायल में बहुत ज़्यादा धुआँ और क्लिंकर जैसी समस्या सामने आयी, लेकिन टीम ने इसे बेहतर बनाने का काम जारी रखा। कई सालों की मेहनत के बाद पेटेंटेड गैसिफ़ायर तैयार हुआ जिससे क्लिंकर बनने की समस्या कम हो गई और सिस्टम ज़्यादा व्यावहारिक बन गया। आज IIT बॉम्बे की कैंटीन 30-40% कम LPG का इस्तेमाल करके चलती है, लगभग 60% थर्मल एफिशिएंसी हासिल करती है, तथा इससे उत्सर्जन कम होता है। इससे ईंधन की लागत कम होने के साथ LPG सप्लाई में कमी आने पर भी खाना बनाने का काम बिना रुकावट चलता रहे। इस सिस्टम से हर साल लगभग आठ टन CO2 का उत्सर्जन कम होता है और अब हॉस्टल के मेस में बड़ी यूनिट लगाने की योजना है जो LPG की खपत को और घटाएगी और हर साल करीब 50 लाख रूपये तक बचत होगी, साथ ही सैकड़ों टन CO2 उत्सर्जन भी कम होगा। इसका मकसद LPG पर निर्भरता घटाना और ऊर्जा की ज़रूरतों के लिए साफ़-सुथरा और किफ़ायती विकल्प देना है।0
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जेसल पार्क-आरएनपी पार्क में पाइप गैस दो साल बाद भी शुरू नहीं
Mumbai, Maharashtra:मुंबई से सटे मीरा-भायंदर शहर के जेसल पार्क और आरएनपी पार्क समेत 200 से अधिक रिहायशी इमारतों में गैस पाइपलाइन तो बिछा दी गई है, लेकिन डेढ़ से दो साल बीत जाने के बाद भी घरों तक गैस की सप्लाई शुरू नहीं हो सकी है। पाइपलाइन लगने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि जल्द ही उन्हें पाइप गैस की सुविधा मिलेगी और सिलेंडर के झंझट से राहत मिलेगी, लेकिन लंबे समय से सप्लाई शुरू न होने के कारण स्थानीय लोगों में नाराज़गी और परेशानी दोनों बढ़ती जा रही है।स्थानीय रहवासियों का कहना है कि पाइपलाइन बिछाने के बाद उन्हें कई बार भरोसा दिलाया गया कि जल्द ही गैस सप्लाई शुरू हो जाएगी। लेकिन समय बीतता गया और स्थिति जस की तस बनी हुई है। कई परिवार अब भी एलपीजी सिलेंडर पर निर्भर हैं, जबकि उन्हें उम्मीद थी कि पाइप गैस मिलने से उनकी रोजमर्रा की जिंदगी आसान हो जाएगी। लगातार देरी के कारण लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है. इलाके की महिलाओं का कहना है कि फ्लैट में लकड़ी या कोयले का चूल्हा जलाना संभव नहीं है। ऐसे में अगर घर का गैस सिलेंडर अचानक खत्म हो जाए तो बड़ी परेशानी खड़ी हो जाती है। उनका कहना है कि जब पाइपलाइन पहले से बिछी हुई है, तब भी गैस सप्लाई न मिलना समझ से परे है और इससे घर का कामकाज प्रभावित हो रहा है. जब ज़ी न्यूज़ की टीम महानगर गैस लिमिटेड के मीरा रोड स्थित कार्यालय पहुँची तो वहां पहले से ही बड़ी संख्या में लोग अपनी शिकायत लेकर मौजूद थे। कुछ लोगों ने बताया कि वे कई वर्षों से अपनी सोसाइटी में गैस पाइपलाइन लाने के लिए आवेदन कर रहे थे, लेकिन अलग-अलग कारण बताकर उन्हें कनेक्शन नहीं दिया गया। अब जब सरकार की ओर से पाइप गैस को बढ़ावा दिया जा रहा है, तो कंपनी की तरफ से यह कहकर देरी बताई जा रही है कि पर्याप्त वर्कर उपलब्ध नहीं हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने कई बार गैस सप्लाई कंपनी से शिकायत की, लेकिन वहां से जवाब मिलता है कि देरी के लिए नगर निगम जिम्मेदार है। वहीं नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि मामला गैस कंपनी के स्तर पर लंबित है। दोनों विभागों के बीच जिम्मेदारी तय नहीं हो पाने का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है. इस मामले में महानगर गैस लिमिटेड का कहना है कि कंपनी अपने अधिकृत क्षेत्रों में पाइप्ड नेचुरल गैस नेटवर्क का तेजी से विस्तार कर रही है और मार्च 2026 में घरेलू कनेक्शनों की संख्या में फरवरी की तुलना में 200 प्रतिशत से ज्यादा वृद्धि हुई है। कंपनी के मुताबिक कई इलाकों में पाइपलाइन बिछाने और कनेक्शन शुरू करने में तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियां सामने आती हैं, जैसे नालों की मौजूदगी, अन्य एजेंसियों के इंफ्रास्ट्रक्चर कार्य, संकरी गलियां, ट्रैफिक समस्या और जमीन के नीचे पहले से मौजूद केबल व अन्य यूटिलिटी लाइनों की वजह से काम में देरी होती है। कंपनी का दावा है कि इन सभी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए चरणबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है और आने वाले तीन महीनों में अधिकतम घरों तक पाइप गैस पहुंचाने का प्रयास किया गया है। تاہم इलाके के रहवासी इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि पाइपलाइन बिछे दो साल से ज्यादा समय हो चुका है, इसलिए अब जल्द से जल्द गैस सप्लाई शुरू की जानी चाहिए। जेसल पार्क और आरएनपी पार्क के सैकड़ों परिवार फिलहाल इसी इंतजार में हैं कि आखिर कब उनके घरों तक पाइप गैस पहुंचेगी और उन्हें सिलेंडर के झंझट से मुक्ति मिलेगी।0
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ईरान-यूएस-इज़राइल युद्ध का क Kashmir हस्तशिल्प उद्योग पर बड़ा असर, लाखों कारीगर प्रभावित
Chaka, कश्मीर घाटी भी ईरान पर US-इज़राइल युद्ध के असर से अछूती नहीं है। तीन बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियाँ रद्द कर दी गई हैं। 4.5 लाख कारीगर और शिल्पकार, खाड़ी देशों में काम करने वाले लगभग 2 लाख कश्मीरी लोग प्रभावित हुए हैं; 600 ऑर्डर रद्द हो गए हैं और लगभग 400 करोड़ रुपये मध्य पूर्व में अटक गए हैं। ईरान पर US-इज़राइल युद्ध निर्यातकों, कारीगरों, शिल्पकारों और यहाँ तक कि मध्य पूर्व में काम करने वाले कश्मीरी सेल्समैनों को भी एक गंभीर और तत्काल झटका दे रहा है। कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (CEPC) और कश्मीर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (KCCI) ने कश्मीर की अर्थव्यवस्था में स्पष्ट गिरावट का संकेत दिया है; उन्होंने कहा कि हज़ारों करोड़ रुपये का स्टॉक जमा हो गया है और लगभग 4.5 लाख कारीगर और शिल्पकार प्रभावित होकर खाली बैठे हैं। हैंडलूम और हस्तशिल्प क्षेत्र सीधे तौर पर 4.5 लाख कारीगरों और शिल्पकारों को सहारा देता है, जिनमें से कई आर्थिक रूप से कमज़ोर ग्रामीण परिवारों से आते हैं। वैश्विक ऑर्डर रुक जाने और प्रदर्शनियाँ रद्द होने के कारण, तैयार माल—जैसे पश्मीना शॉल, कालीन, पेपर-मेशे और अखरोट की लकड़ी का काम—पूरी घाटी में गोदामों और घरों में फँसा हुआ है। उत्पादन के कोई नए ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं, जिससे दिहाड़ी पर काम करने वाले कारीगर बिना काम के खाली बैठे हैं। कैश फ्लो पूरी तरह से रुक गया है, क्योंकि निर्यातक बुनकरों, रंगरेज़ों और कारीगरों का बकाया चुकाने में असमर्थ हैं; ऐसा इसलिए है क्योंकि उन्होंने मध्य पूर्व में जो माल निर्यात किया था, उसका भुगतान अभी तक नहीं मिला है और वह पैसा वहीं अटक गया है। हाल के वर्षों में, कश्मीर के कालीन और हस्तशिल्प का निर्यात आमतौर पर सालाना ₹600–700 करोड़ के बीच रहा है। इस साल, युद्ध शुरू होने से पहले रमज़ान और ईद के त्योहारों के दौरान ₹410 करोड़ का व्यापार हुआ था, लेकिन वह सारा पैसा वहीं अटक गया है। अब तक लगभग 600 ऑर्डर रद्द हो चुके हैं। खाड़ी देशों, यूरोप और पूर्वी एशिया के बाज़ारों से—जहाँ पारंपरिक रूप से कश्मीर के बेहतरीन हस्तनिर्मित उत्पादों की सबसे ज़्यादा खपत होती है—व्यापार के कोई भी नए अवसर (leads) नहीं मिल रहे हैं। तीन बड़ी अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियाँ भी रद्द कर दी गई हैं। डील/एक्सपोर्टर तारिक घोनी ने कहा, “पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष का असर अब साफ दिखाई दे रहा है। हमारी तीन प्रदर्शनियाँ रद्द हो गईं - एक डेनमार्क में, दूसरी UAE में और तीसरी बीजिंग में।” वसंत का यह समयकालीन-कालीनीन है, क्योंकि कारीगर सर्दियों के दौरान माल (स्टॉक) तैयार करते हैं और अब हम इसे अलग-अलग देशों में प्रदर्शित करते हैं। लगभग 600 ऑर्डर रद्द हो गए हैं, और अगर युद्ध नहीं रुका तो और भी ऑर्डर रद्द हो सकते हैं; इसके अलावा 50 हजार से ज़्यादा लोग जो वहां नौकरी कर रहे हैं, वे भी प्रभावित हुए हैं; अगर युद्ध और बढ़ा तो उनकी नौकरियां भी जा सकती हैं। इसलिए, प्रधानमंत्री मोदी से अनुरोध किया गया है कि वे पश्चिम एशिया के इस संघर्ष में हस्तक्षेप करें और इसे रुकवाएं। इस संकट का असर न केवल बड़े निर्यातकों पर पड़ा है, बल्कि मध्य-पूर्व में काम कर रहे 2 लाख से ज़्यादा कश्मीरी लोगों की नौकरियां भी खतरे में हैं। कश्मीर के खाड़ी देशों (Gulf) के साथ नौकरियों के मामले में गहरे संबंध हैं, खासकर UAE, सऊदी अरब और कतर में। इस समय, कश्मीर में 4.45 लाख कारीगरों, शिल्पकारों और उनके परिवारों के लिए यह सीधे तौर पर आजीविका का संकट बन गया है। अगर युद्ध लंबा खिंचता है तो हजारों लोगों की नौकरियां जा सकती हैं; व्यापारियों ने इस बारे में खुलकर चेतावनी दी है। कश्मीर के डिविज़नल कमिश्नर अंशुल गर्ग ने कहा, सरकार ने स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत की है और विदेश मंत्रालय से संपर्क किया गया है ताकि स्थिति के अनुसार कदम उठाए जा सकें। हस्तशिल्प क्षेत्र इस समय बहुत ज़्यादा दबाव में है; कारीगर खाली बैठे हैं, और उनके परिवार रोज़ाना की मज़दूरी पर निर्भर हैं। KCCI, FCIK और CEPC लगातार सरकार पर ज़ोर डाल रहे हैं कि वह तेज़ी से कार्रवाई करे—जैसे कि ब्याज़-मुक्त लोन देना, कारीगरों को सीधे मदद पहुंचाना और बाज़ार का विस्तार करना। यदि यह संघर्ष जल्द शांत हो जाता है, तो कुछ हफ़्तों या महीनों में हालात सामान्य हो सकते हैं। जम्मू-कश्मीर विधानसभा में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया है कि वे अमेरिका, इज़रायल और दूसरे देशों के साथ भारत के कूटनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करें ताकि मानवीय और आर्थिक आधार पर इस संघर्ष को शांत किया जा सके और खत्म किया जा सके।0
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US-Israel युद्ध से कश्मीर के शिल्पकार-निर्यातकों को भारी नुकसान
Chaka, Kashmir Valley is not of the immune of US-Israel war on Iran. Major three international exhibitions cancelled. 4.5 lakh artisans and craftsmen, around 2 lakh Kashmiri working in gulf affected, 600 orders cancelled, around 400 crore money blocked in Middle East. US-Israel war on Iran delivering a severe, immediate blow to exporters, artisans, craftsmen, and other even Kashmiri salesmen working in Middle East. The Carpet Export Promotion Council (CEPC), and Kashmir Chamber of Commerce0
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मीरजापुर के निजी स्कूलों की किताबें महंगी, अभिभावक RTI से पारदर्शिता मांग रहे
Ukhdand, Uttar Pradesh:निजी स्कूलों की किताबों पर अभिभावकों की जेब पर बोझ, सूचना के अधिकार में भी टालमटोल मीरजापुर। शहर और आसपास के क्षेत्रों में निजी स्कूलों द्वारा निर्धारित किताबों की ऊंची कीमतों को लेकर अभिभावकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। आरोप है कि स्कूल प्रबंधन हर वर्ष नई किताबों की सूची जारी कर अभिभावकों को विशेष दुकानों से ही खरीदारी के लिए बाध्य करते हैं, ताकि किताबों के दाम बाजार की तुलना में कहीं अधिक वसूले जाते हैं। अभिभावकों का कहना है कि एक ही कक्षा की किताबें हर साल बदल दी जाती हैं, जिससे पुरानी किताबों का उपयोग संभव नहीं हो पाता। इससे मध्यमवर्गीय परिवारों पर आर्थिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। कई अभिभावकों ने यह भी आरोप लगाया कि स्कूलों और कुछ बुक डिपो के बीच मिलीभगत है, जिसके चलते मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं। पारदर्शिता की मांग को लेकर अभिभावकों ने सूचना के अधिकार (RTI) के तहत संबंधित स्कूलों और शिक्षा विभाग से जानकारी मांगी, लेकिन शिकायत है कि या तो समय पर सूचना नहीं दी जाती या फिर अधूरी जानकारी देकर मामले को टाल दिया जाता है। इससे अभिभावकों में असंतोष और बढ़ गया है। शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी स्कूल द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है, तो उसकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि किताबों की कीमतों पर नियंत्रण और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए, ताकि शिक्षा के नाम पर हो रही इस ‘लूट’ पर प्रभावी रोक लगाई जा सके। अभिभावकों ने सरकार से यह भी अपील की है कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाने की व्यवस्था लागू की जाए, जिससे सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार हो और आम जनता का भरोसा मजबूत हो सके। बाइट— राम बाबू पांडेय (स्थानीय): “हर साल नई किताबें खरीदने की मजबूरी बना दी जाती है। बाजार में सस्ती किताबें उपलब्ध होने के बावजूद स्कूल एक ही दुकान से खरीदने का दबाव बनाते हैं, जो गलत है।” योगी एमपी सिंह: “सूचना के अधिकार के तहत भी सही जानकारी नहीं दी जा रही है। प्रशासन को इस पर सख्ती से कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि अभिभावकों का शोषण बंद हो।”0
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अमरोहा में जगह-जगह केक काटकर मनाया गया हनुमान जन्मोत्सव
Dhanaura, Uttar Pradesh:अमरोहा: मंडी धनोरा के अख्तियारपुर भूड़ नर्मदेश्वर बालाजी आश्रम में महंत चंद्र किरण महाराज के नेतृत्व में केक काटकर हनुमान जयंती मनाई गई साथ ही भंडारे का भी आयोजन किया गया हनुमान भक्तों ने केक काटते समय की पुष्प वर्षा दरअसल आपको बता दें जनपद में अलग-अलग हनुमान जन्मोत्सव मनाया गया कहीं पर भक्ति में लोग झूमते नजर आए तो कहीं केक काटते समय भक्ति पुष्प वर्षा करते नजर आए आज ही के दिन केसरी नंदन मां अंजनी ने मारुति व हनुमान जी को जन्म दिया था जिसका उत्सव पूरे जिले भर में देखने को मिला।0
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बदायूं: दबंगों से परेशान पीड़ित महिला ने विष खाकर न्याय की भीख मांगी
Budaun, Uttar Pradesh:बदायूं जिले के मूसाझाग थाना पुलिस पर फिर उठे कई गम्भीर सवाल。 गांव के ही दबंग लोगों से परेशान पीड़ित परिवार लगभग दो साल से है परेशान。 आज भी दबंगों ने पीड़ित परिवार को धमकाया और जान से मारने की धमकी दी。 दबंगों से परेशान होकर महिला ने एसएसपी ऑफिस के पास खाया विषाक्त पदार्थ。 पीड़ित के परिजनों ने बताया कि गांव के ही दबंग लगातार दो सालों से करते आ रहे हैं परेशान。 पीड़ित परिवार में कई बार मुसजत थाना पुलिस से लेकर बदायूं एसपी तक से की थी शिकायत। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने डराया धमकाया और मामले में कार्रवाई नहीं की。 पीड़ित परिवार लगातार थाना पुलिस और एसएसपी से लग रहा था न्याय की गुहार。 जब न्याय नहीं मिला तो आहत होकर पीड़ित महिला ने एसपी ऑफिस के पास खाया अभिशाप पदार्थ। विषाक्त पदार्थ खाने वाली महिला सुनीता (40) पत्नी हरीश कुमार निवासी गुलड़िया थाना मूसाझाग की निवासी है。 विशाख पदार्थ खाने की सूचना मिलते ही पुलिस के हाथ-पांव फूल तत्काल इलाज को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। बदायूं के मूसाझाग थाना क्षेत्र के गुलड़िया गांव का रहने बाला है पीड़ित परिवार。0
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उमरिया में तेज बारिश-आंधी: किसानों की फसल भारी नुकसान, मुआवजे की मांग
Umaria, Madhya Pradesh:उमरिया जिले में मंगलवार बुधवार की देर रात तेज बारिश और आंधी तूफान ने किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया. तेज बारिश से खेतों में खड़ी गेहूं पककर प्रभावित हुई. दलहन, तिलहन के साथ फल और सब्जियों में भी बारिश का असर देखा गया. खेतों में पकने की कगार पर टमाटर टूटकर गिर गए, लहसुन-प्याज के साथ खीरा और ककड़ी भी नष्ट हुए. असमय बारिश ने किसानों के ऊपर कहर बरसाने का काम किया है. प्रभावित किसानों ने प्रशासन से शीघ्र मुआवजे की मांग की. जिला प्रशासन ने राजस्व अधिकारियों को बारिश से प्रभावित फसलों के आकलन के निर्देश दिए.0
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आगरा के मंदिर में चोरों का आतंक, CCTV से पुलिस चोर की तलाश
Noida, Uttar Pradesh:आगरा में चोरों का आतंक बढ़ता जा रहा है...आलम ये है कि चोर अब भगवान के मंदिर में भी चोरी करने से बाज नहीं आ रहे वहीं सीसीटीवी के आधार पर पुलिस आरोपी चोर की तलाश में जुटी है0
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द्वारका के सीएनजी पंप पर सिलेंडर फटने से चार घायल
Delhi, Delhi:द्वारका जिले में नजफगढ़-मित्राऊं रोड स्थित सीएनजी पंप पर गैस भरते समय एक ट्रक के सिलेंडर में धमाका होने से चार लोग घायल हो गए. घायलों को तत्काल राव तुलाराम मेमोरियल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां एक व्यक्ति की हालत गंभीर बनी हुई है. प्राप्त जानकारी के अनुसार, ट्रक नंबर HR 63C 4424 में सीएनजी भरी जा रही थी, तभी अचानक एक सिलेंडर फट गया. धमाके की चपेट में आकर मौके पर मौजूद चार लोग घायल हो गए. इनमें से तीन की पहचान पंप कर्मचारियों के रूप में हुई है, जिनमें दीपक, विकास कुमार और नीरज शामिल हैं. एक अन्य घायल की पहचान अभी नहीं हो पाई है और उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है. घटना के बाद मौके को घेेरकर सुरक्षित कर दिया गया है. फॉरेंसिक साइंस लैबोरेरी और क्राइम टीम द्वारा घटनास्थल का निरीक्षण किया जा रहा है. वहीं, इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड के तकनीशियन और अधिकारी भी मौके पर मौजूद हैं और तकनीकी जांच में जुटे हैं. पुलिस द्वारा मामले में आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है. घटना के कारणों की जांच जारी है.0
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हेमंत सोरेन असम चुनावी सभा में आदिवासी-दलित के अधिकारों की सुरक्षा का वादा
Ranchi, Jharkhand:रांची आसाम की चुनावी सभा में सीएम का बयान सीएम हेमंत सोरेन आसाम के सारुपथर विधानसभा में चुनाव प्रचार किया। अपनी सभा ने सीएम हेमन्त सोरेन ने कहा यहां का प्रत्याशी एक सिपाही बन कर आप लोगों के बीच रहेगें। आदिवासी ,पिछड़ा ,दलित और अल्पसंख्यक के हक अधिकार की रक्षा होगी। यहां डबल इंजन की सरकार में कैसे भाजपा शासित राज्यों में आदिवासियों और दलितों पर अत्याचार होता था , कैसे दलितों को पेशाब पिलाया जाता था, कैसे सड़को पर बांध कर घसीटा जाता था , कैसे अल्पसंख्यकों के साथ मॉब लांचिंग होता था, जब झारखंड में हमारी सरकार बनी न कोई मॉब लांचिंग होता है न किसी के ऊपर अन्याय होता है। हां बीजेपी बीच बीच में आग लगाने का काम करती है, अब देखिए इन लोगों ने रामनवमी में इतना बड़ा कांड कर दिया और राज्य सरकार को पानी पी पी कर कोस रहा है। उनका आह्वान था पूरा झारखंड बंद करेंगे , जब उनको उनका चेहरा दिखाया तो उनको भागते हुए रास्ता नहीं मिल रहा है। बीजेपी वाले व्यापारी हैं देंगें नहीं बल्कि आपके शरीर से सिरिंच लगा कर खून निकाल लेंगे। हम लोग ऐसे समूह के लोग हैं जो रास्ता भी देते हैं और मंजिल तक पहचाने का ताकत रखते हैं। आपको एक जुट होगें तो आपकी लड़ाई बड़ी जल्दी मंजिल तक पहुंचेगी0
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