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ओरछा में रामराजा सरकार: राजा के रूप में राम की पूजा, गार्ड ऑफ ऑनर जारी
SPSATYENDRA PARMAR
Jan 31, 2026 15:46:29
Niwari, Madhya Pradesh
एंकर- मध्य प्रदेश में राम राजा सरकार का आज भी रूतवा बरकरार है, यहां भगवान राजा के रूप में विराजमान है, अयोध्या में भले ही रामलला का जन्म हुआ हो लेकिन उनकी असली सरकार तो यहां चलती है, यहां हर आमजन प्रजा होता है चाहे वह प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति क्यो न हो, और यही कारण है की यहां किसी भी वीवीआईपी को गार्ड ऑफ ऑनर नहीं दिया जाता, जी हां हम बात कर रहे है निवाड़ी जिले के ओरछा के राम राजा सरकार की, जहां उनकी मर्जी के बगैर आज भी पत्ता नहीं खडकता है, यह विश्व का एक मात्र ऐसा मंदिर है जहां मर्यादा पुरूषोत्तम राम की पूजा भगवान के रूप में नहीं बल्कि मानव स्वरूप में राजा के रूप में की जाती है, यहां मंदिर में नहीं महल में विराजमान है राजाराम, जहां श्रीराम को एक राजा की तरह चारों पहर सरकारी पुलिस जवानों द्वारा दी जाती है सशस्त्र सलामी, यह परंपरा आज की नहीं बल्कि करीब साढे चार सौ वर्षो से लगातार चली आ रही है, वही अगर मंदिर से जुडी अन्य परंपराओं एवं नियमों की बात करे तो आज भी मंदिर के अंदर वीडियो ग्राफी एवं फोटो खींचने पर सख्त मनाही है, इसके अलावा अगर हम मंदिर और मंदिर से जुडी कुछ खासियतों की बात करे तो यहां पर भगवान राम धनुषधारी के रूप में नहीं बल्कि ढाल और तलवार लिए विराजमान है, जबकि देश के अन्य मंदिरों में रामलला की प्रतिमाए खड़े रूप में देखने को मिलेंगी, यहां मंदिर का समय भी आज से नही बल्कि पिछले करीब साढ़े 400 वर्षों से निर्धारित है जिसमें त्रतु परिवर्तन अनुसार साल में दो बार बदलता है, समय अनुसार रामराजा के पट बंद होने के उपरांत किसी भी वीआईपी या वीवीआईपी तक को दर्शन होना नामुमकिन है, इसके लिये दर्शनार्थी को समयानुसार पट खुलने का इंतजार करना पडता है।
ओरछा का इतिहास अत्यंत प्राचीन है, ओरछा का रामराजा मंदिर अत्यंत प्राचीन है और यहां स्थापित मूर्ति के बारे में प्रचलित मान्यता के अनुसार 1631 में ओरछा की महारानी गणेश कुंवर पुष्य नक्षत्र में इस मूर्ति को अयोध्या से नंगे पैर चलकर गोद में लेकर ओरछा लायी थी, ज्ञात जानकारी अनुसार ओरछा नरेश मधुकार शाह जू देव कृष्ण भक्त थे जबकि उनकी रानी गणेश कुंवर राम भक्त थी जनश्रुति के अनुसार एक दिन राजा रानी के बीच अपने-अपने आराध्य की श्रेष्ठता को लेकर विवाद हो गया राजा की चुनौती देने पर गणेश कुंवर ने राजाराम को अयोध्या से ओरछा लाने का संकल्प लिया, इसके बाद रानी अयोध्या पहुंची तथा उन्होंने वहां अपने आराध्य भगवान श्रीराम को पाने कठोर तपस्या की, तपस्या के बावजूद भी जब भगवान राम प्रकट नहीं हुये तब दुःखी रानी ने सरयू नदी में प्राण त्यागने के उददेश्य से छलाग लगा दी, तत्क्षण राम की बालरूप में सुन्दर मूर्ति रानी की गोद में प्रकट हो गई और रानी ने भगवान श्रीराम से ओरछा चलने का आग्रह किया। यह यात्रा और भगवान की स्थापना इसी क्षेत्र के अनुसार राजा के रूप में हुई और ओरछा के रामराजा के प्रमाण के रूप में मंदिर-राजतिलक की परंपरा चली। रामराजा के दर्शन काल के साथ-साथ मंदिर-नियमों में बदलाव आते रहे, पर यह परंपरा आज भी कायम है कि रामराजा प्रतिदिन पुलिस के जवानों द्वारा चारों पहर गार्ड ऑफ ऑनर पेश करते हैं और सूर्यास्त के बाद भी जारी रहता है।
यहां की खास विशेषताएँ- विश्व का एकमात्र स्थान जहाँ सदियों से भगवान राम की पूजा राजा के रूप में की जाती है, विश्व का एक मात्र स्थान जहां भगवान को सरकार की ओर से सशस्त्र सलामी दी जाती है, भगवान के लिये बना भव्य चर्तुभुज मंदिर आज भी खाली खड़ा है क्योंकि भगवान स्वयं महल में विराजमान हैं, एक मात्र स्थान जहां राम राजा के रूप में राज काज निपटाते हैं और जनता को दर्शन देते हैं, जबकि Pray प्रतिष्ठा की मूर्ति को स्थापत्य स्थान से हटाया नहीं जाता है।
सत्येन्द्र परमार (जी मीडिया निवाड़ी)
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