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गांधीसागर अभ्यारण्य: गिद्धों की संख्या 1084 पहुँची, पर्यावरण के लिए नया रिकॉर्ड
MPManish Purohit
Feb 22, 2026 14:46:49
Mandsaur, Madhya Pradesh
मन्दसौर : मध्य प्रदेश के मंदसौर का गांधी सागर अभ्यारण गिद्धों के लिए एक सुरक्षित ठिकाना सिद्ध हो रहा है, यहां पर हाल ही में गिद्धों की गणना संपन्न हुई,, इस गणना में गिद्धों की संख्या 1084 पहुंच गई है गिद्धों की संख्या में हुई वृद्धि यह बताती है कि गांधी सागर अभ्यारण्य सभी तरह से गिद्धों के रहने के लिए श्रेष्ठ हैं
गाँधीसागर अभयारण्य में ना सिर्फ स्थानीय गिद्ध है, बल्कि विदेशी प्रजातियों का भी यह पसंदीदा स्थान है।गणना के दौरान यहां हिमालयन ग्रिफन, यूरेशियन ग्रिफन और सिनेरियस जैसे गिद्ध लंबी दूरी तय कर पहुँचते हैं। ये मुख्य रूप से तिब्बत, मध्य एशिया, और हिमालय की ऊँचाइयों से शीतकाल के दौरान प्रवास करते हैं।
उज्जैन रेंज के ccf आलोक पाठक ने जनकारी दी कि प्रवासी गिद्ध आमतौर पर अक्टूबर-नवंबर के महीने में गाँधीसागर पहुँचते हैं और मार्च-अप्रैल तक यहाँ रुकते हैं।
ये गिद्ध वर्ष भर अभयारण्य में रहते हैं और यहीं प्रजनन करते हैं:
• भारतीय गिद्ध (Long-billed Vulture): चंबल की ऊँची चट्टानों पर घोंसले बनाने वाली मुख्य प्रजाति。
• सफेद पीठ वाला गिद्ध (White-rumped Vulture): पेड़ों पर बसेरा करने वाले ये गिद्ध पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं。
• राज गिद्ध (Red-headed Vulture): अत्यंत दुर्लभ और विशिष्ट लाल सिर वाली प्रजाति。
• मिस्र का गिद्ध (Egyptian Vulture): आकार में छोटे और सफेद रंग के स्थानीय गिद्ध。
विदेशी मेहमान/प्रवासी (3 प्रजातियाँ):
ये प्रजातियाँ शीतकाल (अक्टूबर-नवंबर से मार्च-अप्रैल) के दौरान तिब्बत, मध्य एशिया और हिमालय की ऊँचाइयों से प्रवास कर यहाँ पहुँचती हैं:
• हिमालयन ग्रिफन (Himalayan Griffon): हिमालय के ठंडे क्षेत्रों से आने वाले विशालकाय गिद्ध。
• यूरेशियन ग्रिफन (Eurasian Griffon): लंबी दूरी तय कर आने वाले अंतरराष्ट्रीय प्रवासी。
• सिनेरियस गिद्ध (Cinereous Vulture): दुनिया के सबसे भारी और बड़े गिद्धों में शुमार。
गाँधीसागर ही क्यों है 'गिद्धों की पसंद,,
सुरक्षित चट्टानें (Nesting Sites): चंबल नदी के किनारे स्थित ऊँची और दुर्गम चट्टानें गिद्धों को सुरक्षित घोंसले बनाने और प्रजनन के लिए आदर्श स्थान प्रदान करती हैं。
प्रचुर भोजन और जल: अभयारण्य में वन्यजीवों की अच्छी संख्या और आस-पास के क्षेत्रों में पशुधन की उपलब्धता के कारण इन्हें पर्याप्त भोजन मिलता है। चंबल का पानी इनके लिए बारहमासी जल स्रोत है。
मानवीय हस्तक्षेप मुक्त: अभयारण्य का शांत वातावरण और सुरक्षित कॉरिडोर इनके फलने-फूलने में मदद करता है。
संरक्षण के प्रयास
सीसीएफ आलोक पाठक ने बताया कि गाँधीसागर में 120 सक्रिय घोंसलों का मिलना इस बात का प्रमाण है कि यहाँ का ईकोसिस्टम बेहद मजबूत है। हम इन प्रकृति के सफाईकर्मियों के संरक्षण के लिए लगातार काम कर रहे हैं।
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