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Shashank MishraShashank MishraFollow4 Sept 2024, 08:59 am

गणेश चतुर्थी पर्व की तैयारियां जारी, मूर्तियों को अंतिम रूप देने में जुटे कलाकार

Seoni Malwa, Madhya Pradesh:सिवनी मालवा नगरीय क्षेत्र सहित ग्रामीण क्षेत्रोँ में आगामी गणेश चतुर्थी पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा। पर्व को लेकर स्थानीय मूर्तिकार भगवान गणेश प्रतिमा तैयार कर रहे है। 7 सितंबर को चतुर्थी पर गणेशजी शहर के विभिन्न पंडाल में विराजमान होंगे। इसे लेकर नगर के मूर्तिकार पहली बार भक्तों की डिमांड के अनुसार प्रतिमाओं का निर्माण कर रहे है। शहर के वार्ड क्रमांक 04 में मूर्तियों का निर्माण कर रहे मूर्तिकार मोहनलाल बर्मन ने बताया कि नगर में कई स्थानों पर प्रतिमाओं का निर्माण किया जाता है।
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छत्तीसगढ़ में बस किरायों में बढ़ोतरी आज से लागू, यात्रियों पर बोझ बढ़ा

Kusu, Chhattisgarh:सरगुजा सालाना आय में आम लोगों की आमदनी में इजाफा तो नहीं हुआ, लेकिन छत्तीसगढ़ में बसों के किराया में इजाफा देखने को मिला है। छत्तीसगढ़ में परिवाहन विभाग ने किराया में बढ़ोतरी करते हुए साधारण बसों में 1.75 पैसे प्रति किलोमीटर के हिसाब से, तो वही डीलक्स बसों में दो रुपए प्रति किलोमीटर के हिसाब से नई दरे आज रात से लागू हो गई है। एंकर -सालाना आय में आम लोगों की आमदनी में इजाफा तो नहीं हुआ, लेकिन छत्तीसगढ़ में बसों के किराया में इजाफा देखने को मिला है। छत्तीसगढ़ में परिवाहन विभाग ने किराया में बढ़ोतरी करते हुए साधारण बसों में 1.75 पैसे प्रति किलोमीटर के हिसाब से, तो वही डीलक्स बसों में दो रुपए प्रति किलोमीटर के हिसाब से नई दरे आज रात से लागू हो गई है। जी मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ की टीम ने ग्राउंड जीरो से अंतरराज्यीय बस स्टैंड का जायजा लिया किराया बढ़ोतरी के बाद कंडक्टर और यात्रियों में विवाद की स्थिति भी बन रही है। लेकिन यात्रियों का कहना है कि सरकार को आम जनता के बारे में सोचना चाहिए ना कि इस तरीके से किराया में बढ़ोतरी करके अतिरिक्त भार आम जनता पर डालना चाहिए। वही कंडक्टरों ने भी बताया कि आने वाले एक महीना तक यात्रियों से बहस(विवाद) की स्थिति भी देखने को मिलती रहेगी। बहरहाल छत्तीसगढ़ में बसों के किराया में बढ़ोतरी से अतिरिक्त बोझ जनता पर जरुर पड़ेगा। जिसका नतीजा आज ही से यात्रियों में कमी से पता चल रहा है। अब देखना होगा कि सरकार आम जनता के लिए क्या राहत लेकर आती है..? वन टू वन_01_सुशील कुमार बखला वन टू वन_01_सुशील कुमार बखला
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रायगंज के बाहिन जमिदारबাড়ी दुर्गोत्सव: इतिहास आज भी गांवों के दिलों में जीवित

Dinajpur, Rangpur Division:ভগ্নপ্রায় জমিদারবাড়ির ঠাকুরদালানে আজও জাগ্রত ঐতিহ্য, বাহিনের দুর্গাপুজো এখন সর্বজনীন চারশো বছরের ইতিহাস, নাগর নদীর তীরে সাবেকিয়ানা আর সম্প্রীতির মেলবন্ধন—রায়গঞ্জের বাহিন জমিদারবাড়ির পুজোয় আজও মেলে গ্রামবাংলার হারিয়ে যাওয়া দুর্গোৎসবের স্বাদ। সময়ের সঙ্গে বদলেছে সমাজ, বদলেছে মানুষের জীবনযাত্রা। কালের নিয়মে হারিয়ে গিয়েছে জমিদারি প্রথা, প্রাসাদোপম অট্টালিকায় থিতু হয়েছে ভাঙনের ক্ষত। কিন্তু ইতিহাসের সাক্ষী হয়ে আজও দাঁড়িয়ে রয়েছে উত্তর দিনাজপুরের রায়গঞ্জের বাহিন জমিদারবাড়ি। সেই ভগ্নপ্রায় অট্টালিকার ঠাকুরদালানেই প্রতিবছর শারদোৎসবে ফিরে আসেন সিংহবাহিনী দেবী। একসময়ের জমিদারদের পারিবারিক পুজো আজ পরিণত হয়েছে সর্বজনীন উৎসবে। আর সেই পুজোকে ঘিরেই জেগে রয়েছে কয়েকশো বছরের ঐতিহ্য, স্মৃতি ও গ্রামবাংলার সম্প্রীতির ছবি। উত্তর দিনাজপুরের প্রাচীন জমিদারবাড়ির পুজোগুলির মধ্যে অন্যতম এই বাহিন জমিদারবাড়ির দুর্গোৎসব। অবিভক্ত বাংলাদেশের দিনাজপুরের জমিদার রুদ্রপ্রতাপ চৌধুরীর জমিদারি বিস্তৃত ছিল বাহিন, কুমারজল, মাকড়া, মধুপুর, লহুজগ্রাম-সহ বিস্তীর্ণ এলাক। নাগর নদীর তীর ঘেঁষে বাহিনে গড়ে উঠেছিল তাঁদের বিশাল প্রাসাদোপম অট্টালিকা। স্থানীয় ইতিহাস ও প্রচলিত জনশ্রুতি অনুযায়ী, চারশো বছরেরও বেশি সময়ের ইতিহাস বুকে নিয়ে আজও কোনওরকমে দাঁড়িয়ে রয়েছে তার অবশিষ্টাংশ। চুন-সুরকির দেওয়াল, ভাঙাচোরা স্থাপত্য আর গাছপালায় ঢাকা জরাজীর্ণ প্রাসাদ যেন অতীতের এক নীরব দলিল। একসময় ছিল জমিদারদের জৌলুষ, আজ মানুষের পুজো একসময় বাহিন জমিদারবাড়ির দুর্গাপুজো ছিল আভিজাত্য ও জাঁকজমকের প্রতীক। তবে সেই পুজোয় গ্রামের সাধারণ মানুষেরob অধিকার ছিল না। প্রচলিত রীতি অনুযায়ী, ঘণ্টাধ্বনি শোনার পর প্রসাদ নিতে যাওয়াই ছিল তাঁদের কাছে পুজোর সঙ্গে যুক্ত হওয়ার অন্যতম সুযোগ। জমিদারবাড়ির মাতৃআরাধনার জৌলুষের পাশাপাশি পুজোকে কেন্দ্র করে সাত দিন ধরে বসত যাত্রাপালার আসর। সাত দিনই দুস্থ গ্রামবাসীদের জন্য দু’বেলা পাত পেড়ে প্রসাদ খাওয়ানোর ব্যবস্থাও থাকত। ধর্মীয় আচার, বিনোদন ও দানধ্যানের মধ্য দিয়ে জমিদারবাড়ির পুজো হয়ে উঠত area's অন্যতম আকর্ষণ। কিন্তু সময়ের সঙ্গে সেই ছবিতে এসেছে আমূল পরিবর্তন। জমিদার বংশের উত্তরাধিকারীরা বহু বছর আগেই প্রাসাদোপম বাড়ি ছেড়ে চলে গিয়েছে। হারিয়ে গিয়েছে আগের জাঁকজমক, বন্ধ হয়েছে সেই পুরনো আয়োজনের অনেক কিছুই। তবু হারিয়ে যায়নি পুজো। বরং বদলে গিয়েছে তার চরিত্র। যে পুজোয় একসময় সাধারণ মানুষের প্রবেশ ছিল সীমিত, আজ সেই পুজোতেই গ্রামের সর্বস্তরের মানুষের সম্মিলিত উদ্যোগে মাতৃবন্দনার আয়োজন হয়। ভগ্নপ্রায় ঠাকুরদালানেই সম্প্রীতির উৎসব জমিদাররা গ্রাম ছেড়ে গেলেও তাঁদের কুলদেবী সিংহবাহিনী আজও রয়ে গিয়েছেন বাহিনে। স্থানীয় বাসিন্দারাই চাঁদা তুলে এবং সরকারি আর্থিক সহায়তায় পুরনো ঠাকুরদালানে পুজোর আয়োজন করে চলেছেন বছরের পর বছর। জমিদারদের আমলের নিয়মনীতি ও সাবেকি রীতির ধারাকে যতটা সম্ভব অক্ষুণ্ণ রেখেই চলে আরাধনা। এখানে পুজো শুধু ধর্মীয় অনুষ্ঠান নয়, বরং গ্রামের মানুষের শিকড়ের সঙ্গে জড়িয়ে থাকার এক আবেগ। জরাজীর্ণ জমিদারবাড়িটিকে ঘিরে রয়েছে বহু স্মৃতি, বহু গল্প। স্থানীয় প্রবীণদের মুখে সেই ইতিহাস শুনলে চোখের সামনে ভেসে ওঠে অতীতের জমিদারি, পুরনো উৎসব আর হারিয়ে যাওয়া গ্রামবাংলার জীবনচিত্র। প্রজন্মের পর প্রজন্ম ধরে বয়ে চলা সেই স্মৃতিই আজও বাহিন জমিদারবাড়ির পুজোর অন্যতম সম্পদ। দশমীতে পুজোকে কেন্দ্র করে বসে মেলা। মহালয়া থেকেই দূরদূরান্তের মানুষের আনাগোনা শুরু হয়। শারদোৎসবের দিনগুলিতে ঠাকুরদালান হয়ে ওঠে মিলনক্ষেত্র। জমিদারি প্রথার বিভাজন পেরিয়ে আজ সেখানে একসঙ্গে শামিল হন গ্রামের নানা শ্রেণির মানুষ। অতীতের জমিদারবাড়ির পুজো এভাবেই নতুন অর্থে হয়ে উঠেছে সম্প্রীতির উৎসব। সপ্তমী থেকে নবমী, ঘুরে আসুন অন্যরকম পুজোয় রায়গঞ্জ শহর থেকে প্রায় আট কিলোমিটার দূরে বাহিন। ১২ নম্বর জাতীয় সড়ক থেকে দূরত্ব প্রায় সাত কিলোমিটার। গাড়ি নিয়ে যাতায়াতের জন্য রয়েছে পাকা রাস্তা। ফলে রায়গঞ্জ কিংবা আশপাশের জেলা থেকে দুর্গাপুজো দেখতে আসা মানুষের কাছে বাহিন হতে পারে এক অন্যরকম গন্তব্য。
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गुरदासपुर में नवरात्रि पर लड़कियों के लिए जूडो सेंटर का आधार पत्थर रखा गया

Gurdaspur, Punjab:Gurdaspur ਨਵਰਾਤਰਿਆਂ ਮੌਕੇ ਧੀਆਂ ਨੂੰ ਵੱਡਾ ਤੋਹਫ਼ਾ, ਗੁਰਦਾਸਪੁਰ ਵਿੱਚ ਲੜਕੀਆਂ ਲਈ ਬਣੇਗਾ ਜੂਡੋ ਸੈਂਟਰ ਛੋਟੀ ਜੂਡੋ ਖਿਡਾਰਨ ਅਤੇ ਕੰਜਕ ਦੇ ਹੱਥੋਂ ਰਖਵਾਇਆ ਗਿਆ ਨੀਂਹ ਪੱਥਰ ਪੂਰੇ ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਇਨ੍ਹੀਂ ਦਿਨੀਂ ਨਵਰਾਤਰਿਆਂ ਦੇ ਸ਼ੁਭ ਦਿਨ ਚੱਲ ਰਹੇ ਹਨ। ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਿਨਾਂ ਦੌਰਾਨ ਮਾਤਾ ਰਾਣੀ ਦੀ ਪੂਜਾ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਕੰਜਕਾਂ ਦੀ ਪੂਜਾ ਕਰਕੇ ਧੀਆਂ ਦਾ ਸਨਮਾਨ ਕੀਤਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ。 ਇਨ੍ਹਾਂ ਸ਼ੁਭ ਦਿਨਾਂ ਮੌਕੇ ਗੁਰਦਾਸਪੁਰ ਵਿੱਚ ਧੀਆਂ ਨੂੰ ਇੱਕ ਵੱਡਾ ਤੋਹਫ਼ਾ ਦਿੱਤਾ ਗਿਆ ਹੈ। ਇੰਪਰੂਵਮੈਂਟ ਟਰੱਸਟ ਦੇ ਚੇਅਰਮੈਨ ਰਜੀਵ ਸ਼ਰਮਾ ਵੱਲੋਂ ਲੜਕੀਆਂ ਲਈ ਜੂਡੋ ਸੈਂਟਰ ਬਣਾਉਣ ਦਾ ਐਲਾਨ ਪੂਰਾ ਕਰਦਿਆਂ ਅੱਜ ਨਵੇਂ ਬੱਸ ਸਟੈਂਡ ਦੇ ਨੇੜੇ ਬਣਾਏ ਜਾ ਰਹੇ ਜੂਡੋ ਹਾਲ ਦਾ ਨੀਂਹ ਪੱਥਰ ਰੱਖਿਆ ਗਿਆ。 ਖਾਸ ਗੱਲ ਇਹ ਰਹੀ ਕਿ ਨੀਂਹ ਪੱਥਰ ਇੱਕ ਛੋਟੀ ਕੰਜਕ ਅਤੇ ਜੂਡੋ ਖਿਓਾਰਨ ਦੇ ਹੱਥੋਂ ਰਖਵਾਇਆ ਗਿਆ। ਇਸ ਮੌਕੇ ਜੂਡੋ ਕੋਚ ਅਮਰਜੀਤ ਸ਼ਾਸਤਰੀ ਸਮੇਤ ਵੱਡੀ ਗਿਣਤੀ ਵਿੱਚ ਜੂਡੋ ਖਿਡਾਰਨਾਂ ਵੀ ਮੌਜੂਦ ਰਹੀਆਂ。
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घुमारवीं में पहला नगरपालिका शेयर्ड सर्विस सेंटर शुरू, नगर निकायों को मिलेगी तकनीकी सहायता

Bilaspur, Chhattisgarh:घुमारवीं में जिला का एकमात्र म्यूनिसिपल शेयर्ड सर्विस सेंटर स्थापित किया जा रहा है। केंद्र सरकार के 15वें वित्त आयोग के तहत तैयार किए जा रहे इस सेंटर से जिले की सभी नगर परिषदों और नगर पंचायतों को लाभ मिलेगा। प्रदेशभर में ऐसे कुल 15 सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य आम जनता को विभिन्न सेवाएं आसानी से उपलब्ध करवाने के साथ-साथ नगर निकायों के कामकाज को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाना है। म्यूनिसिपल शेयर्ड सर्विस सेंटर में प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन, Carpenter, Mechanic इत्यादि क्षेत्रों के कारीगरों और सेवा प्रदाताओं का पंजीकरण किया जाएगा। इसके बाद आम लोग अपनी जरूरत के अनुसार फोन कॉल या ऑनलाइन माध्यम से सेवा बुक कर सकेंगे। बुकिंग मिलने पर संबंधित कारीगर घर पहुंचकर काम करेगा। इससे लोगों को भरोसेमंद कारीगर तलाशने में होने वाली परेशानी से राहत मिलेगी। साथ ही, विभिन्न सेवाओं के लिए निर्धारित दरें तय की जाएंगी, जिससे लोगों को उचित कीमत पर सेवाएं उपलब्ध करवाने में मदद मिलेगी। वहीं इस सेंटर का लाभ केवल आम जनता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जिले की सभी नगर परिषदों और नगर पंचायतों को भी साझा सेवाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। जिन नगर निकायों में तकनीकी विशेषज्ञों या कर्मचारियों की कमी होगी, उन्हें सेंटर के माध्यम से जरूरत के अनुसार मैनपावर, तकनीकी सहायता और कंसल्टेंसी सेवाएं प्रदान की जा सकेंगी। इससे नगर निकायों को अपने कार्यों के लिए आवश्यक विशेषज्ञता और संसाधन उपलब्ध करवाने में मदद मिलेगी तथा सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। म्यूनिसिपल शेयर्ड सर्विस सेंटर के माध्यम से प्रॉपर्टी टैक्स, गारबेज मैनेजमेंट यानी कचरा प्रबंधन और नगर निकायों से जुड़े अन्य कार्यों में भी आवश्यक सहयोग उपलब्ध करवाया जाएगा। इसके अलावा आम लोगों को नगर निकायों की विभिन्न सेवाओं, प्रक्रियाओं और सुविधाओं की जानकारी देने में भी यह सेंटर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। एक ही प्लेटफॉर्म पर विभिन्न सेवाएं उपलब्ध होने से लोगों को सुविधाएं प्राप्त करने में आसानी होगी। वहीं नगर परिषदों और नगर पंचायतों को तकनीकी विशेषज्ञता और जरूरी संसाधनों के लिए अलग-अलग व्यवस्था करने की आवश्यकता भी कम होगी। यह पहल जिले में शहरी सेवाओं को अधिक सुलभ, व्यवस्थित और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
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लोकमंथन यात्रा डूंगरपुर पहुंची, लोक संस्कृति की जागरूकता फैलाने लगी

Dungarpur, Rajasthan:जिला डूंगरपुर विधानसभा डूंगरपुर अखिलेश शर्मा लोकेशन डूंगरपुर लोक संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण के लिए निकाली जा रही 'लोकमंथन यात्रा' डूंगरपुर पहुंची, हुआ स्वागत राजस्थान में प्रज्ञा प्रवाह संगठन की ओर से लोक संस्कृति एवं परंपराओं के संरक्षण के लिए निकाली जा रही 'लोकमंथन यात्रा' डूंगरपुर पहुंची। जहा तीजवड़ पर विद्या भारती सहित अन्य हिंदू संगठनों ने यात्रा का स्वागत किया। इसके बाद यात्रा वीर बाला कालीबाई पेनोरमा पहुंची जहा शहीद कालीबाई की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। वही मौजूद लोगों को लोकमंथन यात्रा को लेकर जागरूक किया। यात्रा के संयोजक डॉ सत्य नारायण कुमावत ने बताया कि राजस्थान की प्राचीन लोक संस्कृति, पारंपरिक विरासत, लोक संगीत, रीति-रिवाज, लोक व्यंजन एवं स्वास्थ्य पद्धतियों को पुनर्जीवित करने तथा युवा पीढ़ी को इससे जोड़ने के उद्देश्य से प्रदेशभर में 'लोकमंथन यात्रा' निकाली जा रही है। इस रथ यात्रा का शुभारंभ 2 सितंबर को रामदेवरा (जैसलमेर) से हुआ था। वर्तमान में यह यात्रा अपने 32वें जिले डूंगरपुर में प्रवेश कर चुकी है। अब तक यह यात्रा लगभग 9,000 किलोमीटर का सफर तय कर चुकी है। यात्रा का समापन 21 अक्टूबर को झालावाड़ में होगा। 41 जिलों के आदर्श गांवों तक पहुंचेगी यात्रा 'लोकमंथन यात्रा' का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के सभी 41 सरकारी जिलों के आदर्श गांवों तक पहुंचकर आमजन में जागरूकता फैलाना है। यात्रा के दौरान लगभग 60 विभिन्न विषयों और लोक परंपराओं जैसे- लोक खेल, लोक क्रीड़ा, लोक औषधियां, लोक व्यंजन आदि पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जिन्हें नई पीढ़ी धीरे-धीरे भूलती जा रही है। पुरानी पीढ़ी के ज्ञान को नई पीढ़ी तक पहुंचाना और जन-जागरण करना इस यात्रा का प्रमुख लक्ष्य है। बाइट डॉ सत्यनारायण कुमावत यात्रा संयोजक अखिलेश शर्मा जी मीडिया डूंगरपुर
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सिंहस्थ-2028 के लिए पंचक्रोशी मार्ग पर 50 हजार पौधे, विश्राम शेड तैयार

Ujjain, Madhya Pradesh:उज्जैन। सिंहस्थ-2028 की तैयारियों के बीच पंचक्रोशी मार्ग को हरा-भरा बनाने के लिए पौधारोपण किया जा रहा है। इस मार्ग पर करीब 50 हजार पौधे लगाए जा रहे हैं। इनमें छायादार और फलदार पौधे शामिल हैं। इसके साथ ही श्रद्धालुओं के आराम के लिए 12 उपवन और विश्राम शेड भी तैयार किए जा रहे हैं। मंगलवार को जिला पंचायत के सीईओ श्रेयांश कुमाठ और डीएफओ अनुराग तिवारी ने पंचक्रोशी मार्ग पर चल रहे कार्यों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने राघवपिपलीय, करोहन, राणाबाड़, बामोरा, नलवा, जैथल, ढावला, रहेवाड़ी, धतरावदा और सोदांग सहित कई गांवों में पहुंचकर पौधारोपण की स्थिति देखी。 निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने निर्देश दिए कि मार्ग पर जहां-जहां पौधे लगाने का काम बाकी है, वहां जल्द पौधे लगाए जाएं। रास्ते के दोनों ओर छायादार पेड़ लगाने के साथ पौधों की सुरक्षा का भी ध्यान रखा जाए। इसके लिए जरूरत के अनुसार ट्री गार्ड लगाए जाएंगे और पौधों की नियमित देखभाल की व्यवस्था की जाएगी。 पंचक्रोशी यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को आराम करने के लिए बेहतर जगह मिल सके, इसके लिए बनाए जा रहे विश्राम शेड का भी निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने निर्माण कार्य में गुणवत्ता का ध्यान रखने और तय समय में काम पूरा करने के निर्देश दिए। वहीं, मार्ग पर विकसित किए जा रहे उपवनों में फलदार पौधे लगाने को कहा गया। गांवों की भागीदारी से होगी पौधों की देखभाल पंचक्रोशी मार्ग के आसपास के गांवों में भी पौधारोपण किया जा रहा है। इसके तहत शांति वन विकसित किए जा रहे हैं। इस काम में सरकारी विभागों के साथ स्थानीय लोगों की भागीदारी भी ली जा रही है। लगाए गए पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी संबंधित ग्राम पंचायतों, समितियों और गांव के वरिष्ठ नागरिकों को सौंपी जा रही है। पौधों की सुरक्षा के लिए लगाए जाने वाले ट्री गार्ड पर भगवान श्री महाकालेश्वर मंदिर और पंचक्रोशी मार्ग से जुड़े चित्र भी बनाए जा रहे हैं। इससे पौधों की सुरक्षा के साथ मार्ग को सुंदर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। सिंहस्थ-2028 में पंचक्रोशी यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचेंगे। ऐसे में मार्ग पर हरियाली बढ़ाने, विश्राम की सुविधा विकसित करने और पौधों को सुरक्षित रखने के इन प्रयासों का उद्देश्य श्रद्धालुओं की यात्रा को अधिक सुविधाजनक बनाना है。 निरीक्षण के दौरान जनपद पंचायत के सीईओ संदीप यादव सहित जनपद पंचायत और वन विभाग के अधिकारी मौजूद रहे。
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राजसमंद के घमासान में नाथद्वारा भाजपा उम्मीदवारों के नामांकन विवाद

Rajsamand, Rajasthan:राजसमंद से बड़ी ख़बर राजसमंद में पंचायत चुनाव- 2026 को लेकर नाथद्वारा में भाजपा का बड़ा घमासान जिला परिषद के वार्ड 7 से नाथद्वारा विधायक के क़रीबी कोठारिया मंडल अध्यक्ष को टिकट नहीं मिला तो खमनोर पंचायत समिति सदस्यों ने नामांकन भरने से किया इंकार खमनोर पंचायत समिति के वार्ड 5,17,18 से भाजपा के किसी ने नहीं किया नामांकन वार्ड 5 में सिर्फ काँग्रेस का एक नामांकन खमनोर पंचायत समिति के क़रीब 8 से 10 लोगों ने किया नामांकन भरने से इनकार नामांकन के अंतिम समय भाजपा के जिला अध्यक्ष में पहुंचकर कुछ प्रत्याशियों के करवाये नामांकन काँग्रेस का आरोप उम्मीदवारों की ग़ैरमौजूदगी में भाजपा के 3 उम्मीदवारों के नामांकन भरे गये, निर्वाचन अधिकारी को भेजी शिकायत निकाय चुनावों के दौरान भी विधायक के क़रीबी को नगरपालिका अध्यक्ष पद नामांकन नहीं भरने देने पर हुआ था विवाद
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बागेश्वर के कोट भ्रामरी माता मंदिर में नवरात्रि में भक्तों की भारी भीड़

Bageshwar, Uttarakhand:बागेश्वर के प्राचीन कोट भ्रामरी माता मंदिर में शारदीय नवरात्रि के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की जा रही है। दूर-दराज के क्षेत्रों से भक्त मां के दर्शन के लिए मंदिर पहुंच रहे हैं। मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ माहौल भक्तिमय बना हुआ है। शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की आराधना की जा रही है। बागेश्वर के प्रसिद्ध कोट भ्रामरी माता मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी है। भक्त विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना कर रहे हैं। नवरात्रि को लेकर मंदिर में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। प्राचीन कोट भ्रामरी माता मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी स्थान पर मां ने असंख्य भंवरों का रूप धारण कर अरुण नामक दैत्य का संहार किया था। नवरात्रि के दौरान यहां दूर-दूर से श्रद्धालु माता के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मंदिर परिसर में भक्तिमय माहौल बना हुआ है।
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