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छतरपुर मंदिर की दीवार पर राज्यों के नंबर; नई गाड़ी के लिए मान्यता तेज
HGHarish Gupta
Nov 30, 2025 12:31:00
Chhatarpur, Madhya Pradesh
जी نيوز नेशनल की आसाईन स्टोरी
एकंर -आपने मंदिरों की दीवारों पर मन्नत, नाम या मोबाइल नंबर लिखे तो आपने बहुत बार देखे होंगे, लेकिन मध्यप्रदेश के छतरपुर में एक ऐसा मंदिर है जहां लोग दर्शन के बाद अपनी गाड़ियों का नंबर लिख देते हैं. यहां दीवार पर एक नहीं, बल्कि कई राज्यों के वाहनों के नंबर लिखे हैं. गाड़ियों के नंबर लिखने के पीछे एक अनोखी मान्यता है. लोग आज भी इस पर विश्वास करते हैं.जिला मुख्यालय से 24 किलोमीटर दूर महाराजपुर नगर से सटे कुसमा गांव में स्थित मंदिर की दीवार पर कई राज्यों के वाहनों के नंबर अंकित हैं. इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि जो व्यक्ति अपनी नई गाड़ी का नंबर यहां लिख कर जाता है.पहले तो उसकी गाड़ी सुरक्षित रहती है और उसे दूसरी गाड़ी लेने का भी सौभाग्य जल्द प्राप्त हो जाता है.
इस मंदिर की मान्यता सुनकर दूर-दूर से लोग यहां आते हैं. बताया गया कि यहां दर्शनों के बाद लोगों के अनेक प्रकार के कामकाज भी सफल होने लगे हैं. अधिकतर गाड़ियों को लेकर लोगों ने अपनी अर्जियां लगाईं, जो पूरी भी हुईं. यही कारण है कि इस मंदिर की दीवारों पर सैकड़ों नंबर आज भी अंकित हैं.,यह मंदिर गौड़ राजाओ द्वारा बनाये तालाब के बगल मे लोग सती माता मंदिर के नाम से जानते है. और इतिहास भी काफी रोचक है. बताया जाता है कि 1955 में कुसमा गांव के निवासी बलदेव रैकवार ने 8 दिन पहले ही अपनी मृत्यु की घोषणा कर दी थी. यह भी कहा था कि, मृत्यु के बाद उनकी पत्नी सती के रूप में अपने तन को जलाएंगी. उनकी भविष्यवाणी के अनुसार शुक्रवार की सुबह 10 बजे बलदेव रैकवार की मृत्यु हो गई. उसके बाद उनकी पत्नी भी पति की अर्थी के साथ सती हो गईं. तब से लेकर अब तक यहां पर अनेकों मान्यताएं प्रचलित हैं. बताया जाता है कि यहां पर लोगों की मनोकामनाएं पूर्ण हुई और तभी से यहां गाड़ियों के नंबर अंकित करने का क्रम जारी है.
इस मंदिर में कई राज्यों के लोग यहां दर्शन करने आते हैं और अपनी गाड़ियों के नंबर मंदिर की दीवार पर लिखकर चले जाते हैं. इस मंदिर की दीवारों पर महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान सहित दिल्ली, हरियाणा के वाहनों के नंबर अंकित हैं. जो साफ गवाही देते हैं कि यहां पर दूर-दूर से लोग आते हैं.
स्थानीय रैकवार समाज के लोगो ने बताया कि जो यहां सती हुई थी. वह उनकी दादी थी और उनके दादा ने ही अपनी मृत्यु की भविष्यवाणी की थी. इसके बाद से उनकी स्मृति में मंदिर बना दिया गया. इस मंदिर में अनेकों ऐसे चमत्कार जिससे लोगों की आस्था बढ़ती गई. आज वाहनों को लेकर तो यहां की एक अलग ही मान्यता है. जो अनेकों प्रदेशों में प्रसिद्ध है. इसी कारण यहां पर दूर-दूर से लोग दर्शन के लिए आते हैं.
बाईट- गोकुल प्रसाद रैकवार -मंदिर का सेवादार
बाईट- सरजू प्रसाद रैकवार-मंदिर के परिजन
बाईट-कालीचरण -स्थानीय नागरिक
बाईट-दयाराम रैकवार -मंदिर के परिजन
Ptoc
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