icon-pinewzicon-zee
PINEWZ
become creator
न्यूज़ क्रिएटर बनें

आपकी स्थानीय कहानियाँ, आपकी आवाज़

Follow us on
Download App fromplay-storeapp-store
Advertisement
Back
Pinewz
450331
Raju Sursingh RathodRaju Sursingh RathodFollow12 Oct 2024, 06:42 pm
0
0
Report

हमें फेसबुक पर लाइक करें, ट्विटर पर फॉलो और यूट्यूब पर सब्सक्राइब्ड करें ताकि आप ताजा खबरें और लाइव अपडेट्स प्राप्त कर सकें| और यदि आप विस्तार से पढ़ना चाहते हैं तो https://pinewz.com/hindi से जुड़े और पाए अपने इलाके की हर छोटी सी छोटी खबर|

तेजस्वी यादव का बड़ा हमला: शराबबंदी की असफलता बिहार में साफ़ सामने

Patna, Bihar:नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर साधा निशाना सोशल मीडिया पर किया पोस्ट लिखा शराबबंदी की विफलता का दोषी कौन? मेरे सवालों, तर्कों और तथ्यों का जवाब दे शराबबंदी क़ानून को लागू किए कल 10 वर्ष पूर्ण हुए लेकिन यह शासन-प्रशासन और शराब माफिया के नापाक मजबूत गठजोड़ की बदौलत यह क़ानून अपने उद्देश्य की पूर्ति में एकदम विफल रहा। शराबबंदी नीतीश कुमार का सबसे बड़ा सांस्थानिक भ्रष्टाचार साबित हुआ। इसके कारण बिहार में 40 हज़ार करोड़ की अवैध समानांतर अर्थव्यवस्था खड़ी हो गई है। शराबबंदी क़ानून के क्रियान्वयन की देखरेख वाले गृह और मद्य निषेध विभाग भी अधिकांश इनके पास ही रहे है। शराबबंदी लागू होने के बाद बिहार में 11 लाख केस दर्ज कर 16 लाख से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अब तक 5 करोड़ लीटर से अधिक शराब बरामद की गई है। विगत 5 साल में 2 करोड़ लीटर से अधिक शराब जब्त की गई है यानि प्रतिदिन औसतन 11 हजार लीटर से अधिक! बिहार पुलिस के अपने आंकड़ों के अनुसार 2026 में औसतन 3 लाख 70 हजार 684 लीटर प्रति महीने अवैध शराब बरामद की गई है यानि 12,356 लीटर प्रतिदिन। यह तो सिर्फ दिखावटी जब्त शराब है लेकिन जमीनी सच्चाई के अनुसार बिहार में प्रतिदिन शराब की खपत 1 लाख 70 लाख लीटर से अधिक की है। बिहार सरकार के मुताबिक़ 2026 में 18 प्रतिशत अधिक शराब बरामद की गई यानि शराबबंदी और पुलिस के दकियानुसी आंकड़ों के बावजूद भी बरामदगी में 18% का उछाल है। अवैध शराब के अलावा इस कानून की विफलता के कारण बिहार में सूखा और अन्य प्रकार के नशे की सामग्री का कारोबार 40 फ़ीसदी बढ़ा है। युवा गांजा, ब्राउन शुगर व नशीली दवाओं का सेवन कर रहे हैं। अब आप कल्पना करिए कि वास्तविकता में बिहार में शराब की उपलब्धता कितनी सहज और सरल है? सरकार यह क्यों नहीं बताती कि बिहार की सीमा में करोड़о लीटर शराब कब, कैसे, क्यों और किसके सहयोग से आ रही है? कोई पैराशूट से तो गिराकर जाता है नहीं? सरकार जब्त की बजाय खपत के भी आंकड़े सार्वजनिक करे। आपको जानकर हैरानी होगी कि 2002-05 में संपूर्ण बिहार के ग्रामीण इलाकों में 500 से भी कम शराब की दुकानें थीं। 2005 में पूरे बिहार में लगभग 3000 हज़ार शराब की दुकाने थी जो मात्र 2015 तक नीतीश कुमार के 10 वर्षों में बढ़कर 6000 से अधिक हो गयी। और इनमें से अधिकांश दुकाने नीतीश कुमार ने ग्रामीण क्षेत्रों-पंचायतों में खुलवाई ताकि हर घर शराब पहुँचाई जा सके। आज आज़ादी के बाद 1947 से लेकर 2005 में यानि 58 वर्षों में बिहार में केवल 300 दुकाने ही खोली गयी लेकिन नीतीश कुमार ने 10 वर्षों में ही इसे बढ़ाकर दुगुना यानि 6000 कर दिया। 58 वर्षों में औसतन बिहार में प्रति वर्ष संपूर्ण बिहार में मात्र 51 दुकाने ही खुलती रही लेकिन इनके 2005-15 के 10 वर्षों में प्रतिवर्ष औसतन 300 शराब की दुकाने खोली गयी। आज ये शराबबंदी के नाम पर सुधारक बनने का स्वांग कर रहे है लेकिन यथार्थ यह है कि इसके नाम पर इन्होंने संस्थागत भ्रष्टाचार को बढ़ावा देकर अफसरशाही को बेलगाम, भ्रष्ट, आरामपरस्त और तानाशाह बनाया है। बिहार में शराबबंदी कानून अब मजाक बन गया है। इस कानून की आड़ में केवल गरीबों को निशाना बनाया जा रहा है। शराबबंदी कानून के तहत करीब 16 लाख से अधिक जिन लोगों की गिरफ्तारियां हुई हैं इनमें सबसे अधिक गरीब, दलित, पिछड़े और अति पिछड़े वर्ग के लोग हैं। बिहार में शराबबंदी को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि पुलिस के कारण ही शराब की तस्करी हो रही है और पुलिस का एकमात्र काम रह गया है भ्रष्टाचार, उगाही और कानून का दुरुपयोग करने वालों को संरक्षण देना। 16 लाखों लोगों की गिरफ्तारी के बावजूद भी सप्लायर और तस्करों को गिरफ्तार नहीं किया गया, किसी भी जिले के एसपी, डीएसपी या बड़े अधिकारी पर कार्रवाई नहीं की गई है. उन्होंने यहां तक कहा कि सरकार जिसको चाहती है, उसी पर कार्रवाई होती है, चयनात्मक कार्रवाई होती है। सरकार उन अधिकारियों और प्रशासनिक लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं करती जो भ्रष्टाचार के माध्यम से शराबबंदी को विफल करना चाहते हैं?
0
0
Report

आदिवासी क्षेत्र में सफेदपोश की तानाशाही: सूदखोरी से हजारों किसान कर्ज जाल में फंसे

Baran, Rajasthan:आदिवासी क्षेत्र में सफेदपोश का आतंक सूदखोरी के जाल में फंसा आदिवासी क्षेत्र के किसान ​ बारां जिले की शाहाबाद तहसील से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने मानवता और कानून व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आदिवासी बहुल इस क्षेत्र में एक रसूखदार व्यापारी की ‘तानाशाही’ और ‘सूदखोरी’ के चलते हजारों गरीबों का जीना दुश्वार हो गया है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि व्यापारी अनुराग जैन टिंकल अपने रसूख और पैसों के दम पर न केवल गरीबों का शोषण कर रहा है, बल्कि प्रशासन भी इस जुल्म में मूकदर्शक बना हुआ है。 ​व्यापारी लंबे समय से आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों को गैर-कानूनी तरीके से अत्यधिक ब्याज दर पर पैसा उधार देता है। खेल यहीं खत्म नहीं होता; उधारी के नाम पर धोखाधड़ी कर खाली कागजों पर हस्ताक्षर करवाना और फिर मनमाने ढंग से भारी-भरकम राशि लिखकर लोगों को कर्ज के दलदल में धकेलना इसके जीवन को नरक बना रहे हैं ​पीड़ितों का कहना है कि पैसा वसूलने के लिए व्यापारी ने बाकायदा बाहरी गुंडे पाल रखे हैं। जो लोग पैसा नहीं चुका पाते, उन्हें डराया-धमकाया जाता है, उनके साथ मारपीट की जाती है और बलपूर्वक उनकी जमीन-जायदाद के कागजात लिखवा लिए जाते हैं。 ​क्षेत्र के किसानों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि अनुराग जैन अपने वेयरहाउस पर किसानों की फसल को जबरन खाली करवा लेता है。 ​हरिओम मेहता किसान ने बताया कि इनकी 800 क्विंटल से अधिक सरसों की फसल को व्यापारी ने वेयरहाउस पर कांटा कराकर हड़प लिया। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी गई。 ​अन्य पीड़ित नारायण लाल मेहता, रामदास बैरागी और बाबूलाल सहारिया सहित हजारों लोग इस शोषण का शिकार हैं。 बाइट- पीड़ित का किसान
0
0
Report

उन्नाव: बीएसए ने निजी स्कूलों की फीस-कालाबाज़ारी रोकने को पत्र जारी

Unnao, Uttar Pradesh:स्लग - Zee news की मुहिम का बड़ा असर, निजी स्कूलों की फीस, किताबों के दाम की मॉनिटरिंग के लिए बीएसए ने जारी किया पत्र उन्नाव में बड़ा असर देखने को मिला है। BSA शैलेश कुमार पांडेय ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजा है, निर्देश दिए हैं कि निजी स्कूलों में फीस के नाम पर मनमानी वसूली पर रोक लगाई जाए, कॉपी किताबें और यूनिफॉर्म के नाम पर कालाबाज़ारी ना हो Zee media के कैमरे के सामने बीएसए ने कहा कि वह एक टीम भी बना रहे हैं जो निजी विद्यालयों में छापेमारी करेगी, साथी अगर कोई विद्यालय कापी किताबें यूनिफार्म के नाम पर कालाबाज़ारी करते हुए या अधिक फीस वसूलते हुए पाया गया तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बाइट : शैलेंद्र कुमार पांडेय BSA उन्नाव
0
0
Report
Advertisement

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में NC-PDP के नेताओं की तीखी बयानबाजी, राज्यhood पर उथल-पुथल

Srinagar, Political tensions escalated in Jammu and Kashmir after a heated war of words between National Conference (NC) minister Sakeena Itoo and Peoples Democratic Party (PDP) leader Waheed Para triggered uproar in the J&K Assembly. The situation turned tense when Sakeena Itoo blamed the PDP for the prevailing political and administrative situation in the Union Territory. She remarked that the “lack of power and delay in restoration of statehood is because of PDP,” drawing strong protests from opposition benches. Reacting sharply, PDP Youth President Srinagar tahir lone slammed the National Conference and Minister Sakeena Itoo for what he termed as “misleading and baseless statements.” He said the NC is trying to shift blame instead of addressing real public issues. Tahir lone further alleged that the National Conference is not serious about resolving key concerns of the people. He also criticized the party’s stand on the liquor policy, claiming that the NC is unwilling to take a clear and firm position on the controversial liquor bill, which has sparked widespread public debate across Jammu and Kashmir. He added that instead of indulging in blame games, political parties should focus on restoring statehood, improving governance, and addressing people’s hardships.
0
0
Report

पुंछ में भाजपा का 47वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया

Chikri Ban, एंकर: पुंछ में आज भारतीय जनता पार्टी का 47वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर पार्टी कार्यालय में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और नेताओं ने हिस्सा लिया। वीओ: भारतीय जनता पार्टी की ओर से आज पुंछ में पार्टी का 47वां स्थापना दिवस उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं और नेताओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत पार्टी के संस्थापकों और वरिष्ठ नेताओं को याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित कर की गई। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने पार्टी के सिद्धांतों और उपलब्धियों पर प्रकाश डाला और संगठन को और मजबूत करने का संकल्प लिया। इस मौके पर मौजूद नेताओं ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी देश के विकास और जनता की सेवा के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे पार्टी की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाएं और संगठन को और सशक्त बनाएं। कार्यक्रम के अंत में मिठाइयां वितरित की गईं और सभी ने एकजुट होकर पार्टी को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया। शॉट्स और बाईट
0
0
Report
Advertisement

रामपुर में सड़क हादसे का नहीं हत्या का सच, पति-देवर ने रची खौफनाक योजना

Rampur, Uttar Pradesh:रामपुर के गंज थाना क्षेत्र के काशीपुर-आंगा रोड पर 25 फरवरी 2026 की रात 23 वर्षीय महिला कांस्टेबल लता सिंह और उसके 2 साल के बेटे लड्डू की कार में जलकर मौत हो गई थी। शुरुआती जांच इसे सड़क हादसा बताती थी, पर पुलिस की गहन विवेचना के दौरान यह एक सुनियोजित हत्या निकली। मृतका के पति दानसिंह और देवर रवि ने मिलकर इसे अंजाम दिया। बताया गया कि पहले लता को नशे की गोलियां दी गईं ताकि वह बेसुध हो जाए, फिर कार में पेट्रोल डालकर आग लगाने की योजना बनाई गई। जब वह बचने की कोशिश कर रही थी, तो हथौड़े से हमला कर दिया गया। फिर कार को सड़क पर ले जाकर डंपर की टक्कर कर दी गई और आग तेजी से भड़की, मां-बेटे कार में ही फंस गए। आरोपी पक्ष मौके से भाग निकल गए और खुद को भी झुलसा लिया ताकि शक न हो। जांच में यह भी सामने आया कि पैसों के लालच में यह कृत्य किया गया; बीमा और क्लेम की रकम पाने के लिए यह घटना अंजाम दी गई। इस मामले में पति दानसिंह, नूरहसन और सलमान को गिरफ्तार किया गया है, जबकि देवर रवि और प्रदीप फरार हैं; उनकी गिरफ्तारी के लिए टीम दबिश दे रही है। पुलिस अधीक्षक सोमेंद्र मीणा ने बताया कि 25 फरवरी की रात्रि दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद विवेचना शुरू की गई और गहन जाँच के दौरान अन्य तथ्य प्रकाश में आए थे।
0
0
Report

अयोध्या Ram मंदिर के पास 203 मोबाइल लौटे; कुल कीमत 30 लाख

Ayodhya, Uttar Pradesh:अयोध्या में राम मंदिर बनने के बाद जहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है, वहीं मोबाइल चोरी और गुम होने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। इसी बीच अयोध्या पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए खोए हुए मोबाइल फोन बरामद किए हैं।पुलिस के सीईआईआर पोर्टल पर दर्ज शिकायतों के आधार पर कार्रवाई करते हुए कुल 203 मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं। इन मोबाइलों की कुल कीमत लगभग 30 लाख 45 हजार रुपये बताई जा रही है। पुलिस की इस कार्रवाई से श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिली है।आज एसपी सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी ने मीडिया की मौजूदगी में बरामद मोबाइल उनके मालिकों को वापस सौंपे। इस दौरान जिन श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के मोबाइल मिले, वे मौके पर मौजूद रहे और अपना सामान पाकर काफी खुश नजर आए।एसपी सिटी चक्रपाणि त्रिपाठी ने बताया कि सर्विलांस टीम और थानों के सहयोग से सीईआईआर पोर्टल के माध्यम से यह अभियान चलाया गया। विभिन्न जनपदों और प्रदेशों से अयोध्या आए श्रद्धालुओं के मोबाइल ट्रेस कर बरामद किए गए हैं।पुलिस ने अपील की है कि श्रद्धालु भीड़भाड़ वाले स्थानों पर अपने सामान की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें और मोबाइल गुम होने पर तुरंत सीईआईआर पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
0
0
Report
Advertisement

BJP स्थापना दिवस पर बिहार में उत्साह और नेतागणों का जोश

Patna, Bihar:पटना भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश कार्यालय में स्थापना दिवस कार्यक्रम मनाया.... प्रदेश अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री ने के काटकर कार्यक्रम की शुरुआत की... उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सभी भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को सबको बधाई देता हूं 47 साल का भाजपा हुआ है अगले 4700 साल तक बिहार और देश में भारतीय जनता पार्टी रहे... सांसद रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि ऐतिहासिक दिन है 47 साल के हमारी पार्टी हुई 80 के बाद से लगातार हम लोगों ने उतार-चढ़ाव देखा है आज पार्टी कहां से कहां पहुंची है देशभक्ति देश सेवा समर्पण आज पूरी पार्टी दुनिया में अपना नाम कर रही है... आज कार्यकर्ताओं का उत्साह देखा आपने बिहार में भी अच्छी खबर आएगी... पांच राज्यों में चुनाव को लेकर रविशंकर प्रसाद ने कहा कि हर जगह हमारी सरकार बनने जा रही है.... बिहार सरकार के मंत्री लखेन्दर पासवान ने स्थापना दिवस पर कहाँ की भारतीय जनता पार्टी के करोड़ों कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है स्वाभिमान का दिन है हम लोग 47 व स्थापना दिवस मना रहे हैं आज भाजपा के उन आत्माओं को प्रणाम करते हैं जिनके कारण हम सब लोगों को इतनी बड़ी पार्टी मिली है... प्रधानमंत्री जी लगातार काम करते रहते हैं उन्हीं के कार्य करने के आधार पर भाजपा के करोड़ों कार्यकर्ता को आशीर्वाद प्राप्त होते रहता है...
0
0
Report

इंदौर क्राइम ब्रांच ने MD ड्रग्स के साथ चार आरोपी गिरफ्तार

Indore, Madhya Pradesh:इंदौर में क्राइम ब्रांच पुलिस ने अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक महिला सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लगभग 24.1 ग्राम एमडी ड्रग्स बरामद की है, जिसकी अंतरराष्ट्रीय कीमत करीब 2 लाख 40 हजाए रुपये बताई जा रही है। इसके अलावा एक ह्युंडई वरना कार और चार मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं, जिसकी कीमत लगभग 5 लाख रुपये आंकी गई है। पुलिस के अनुसार, शहर में मादक पदार्थों की तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस आयुक्त के निर्देश पर लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में क्राइम ब्रांच टीम संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखते हुए विभिन्न क्षेत्रों में गश्त कर रही थी। इस दौरान टीम को मंगल परिसर गार्डन के पीछे कनकेश्वरी क्षेत्र के एक सुनसान मैदान में खड़ी सफेद रंग की कार में एक महिला और तीन पुरुष संदिग्ध अवस्था में बैठे दिखाई दिए। पुलिस द्वारा पूछताछ करने पर आरोपी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए, जिसके बाद उनकी तलाशी ली गई। तलाशी के दौरान वाहन से एमडी ड्रग्स बरामद हुई। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रिजवान खोकर, फैजान मंसूरी, समीर लकारा और काजल उपाध्याय के रूप में हुई है। प्रारम्भिक पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे सस्ते दामों पर मादक पदार्थ खरीदकर इंदौर में नशे के आदी लोगों को महंगे दामों पर बेचते थे। पुलिस ने बताया कि आरोपी रिजवान के खिलाफ रतलाम में पहले से मारपीट का एक मामला दर्ज है, जबकि महिला आरोपी इवेंट मैनेजमेंट का कार्य करती है, फिलहाल आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/22 के तहत अपराध दर्ज कर आगे की जांच जारी है।
0
0
Report
Advertisement

शराबबंदी फेल: क्या बिहार में प्रशासनिक भ्रष्टाचार ने कानून की आधारशिला हिला दी?

Noida, Uttar Pradesh:शराबबंदी की विफलता का दोषी कौन? मेरे सवालों, तर्कों और तथ्यों का जवाब दें। शराबबंदी क़ानून को लागू किए कल 10 वर्ष पूर्ण हुए लेकिन यह शासन-प्रशासन और शराब माफिया के नापाक मजबूत गठजोड़ की बदौलत यह क़ानून अपने उद्देश्य की पूर्ति में एकदम विफल रहा। शराबबंदी नीतीश कुमार का सबसे बड़ा सांस्थानिक भ्रष्टाचार साबित हुआ। इसके कारण बिहार में 40 हज़ार करोड़ की अवैध समानांतर अर्थव्यवस्था खड़ी हो गई है। शराबबंदी क़ानून के क्रियान्वयन की देखरेख वाले गृह और मद्य निषेध विभाग भी अधिकांश इनके पास ही रहे है। शराबबंदी लागू होने के बाद बिहार में 11 लाख केस दर्ज कर 16 लाख से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अब तक 5 करोड़ लीटर से अधिक शराब बरामद की गई है। विगत 5 साल में 2 करोड़ लीटर से अधिक शराब जब्त की गई है यानि प्रतिदिन औसतन 11 हजार लीटर से अधिक! बिहार पुलिस के अपने आंकड़ों के अनुसार 2026 में औसतन 3 लाख 70 हजार 684 लीटर प्रति महीने अवैध शराब बरामद की गई है यानि 12,356 लीटर प्रतिदिन। यह तो सिर्फ दिखावटी जब्त शराब है लेकिन जमीनी सच्चाई के अनुसार बिहार में प्रतिदिन शराब की खपत 1 लाख 70 लाख लीटर से अधिक की है। बिहार सरकार के मुताबिक़ 2026 में 18 प्रतिशत अधिक शराब बरामद की गई यानि शराबबंदी और पुलिस के दकियानुसी आंकड़ों के बावजूद भी बरामदगी में 18% का उछाल है। अवैध शराब के अलावा इस कानून की विफलता के कारण बिहार में सूखा और अन्य प्रकार के नशे की सामग्री का कारोबार 40 फ़ीसदी बढ़ा है। युवा गांजा, ब्राउन शुगर व नशीली दवाओं का सेवन कर रहे हैं। अब आप कल्पना करिए कि वास्तविकता में बिहार में शराब की उपलब्धता कितनी सहज और सरल है? सरकार यह क्यों नहीं बताती कि बिहार की सीमा में करोड़ो लीटर शराब कब, कैसे, क्यों और किसके सहयोग से आ रही है? कोई पैराशूट से तो गिराकर जाता है नहीं? सरकार जब्त की बजाय खपत के भी आंकड़े सार्वजनिक करे। आपको जानकर हैरानी होगी कि 2004-05 में संपूर्ण बिहार के ग्रामीण इलाकों में 500 से भी कम शराब की दुकानें थीं। 2005 में पूरे बिहार में लगभग 3000 हज़ार शराब की दुकाने थी जो मात्र 2015 तक नीतीश कुमार के 10 वर्षों में बढ़कर 6000 से अधिक हो गयी। और इनमें से अधिकांश दुकाने नीतीश कुमार ने ग्रामीण क्षेत्रों-पंचायतों में खुलवाई ताकि हर घर शराब पहुँचाई जा सके। आज ये शराबबंदी के नाम पर सुधारक बनने का स्वांग कर रहे है लेकिन यथार्थ यह है कि इसके नाम पर इन्होंने संस्थागत भ्रष्टाचार को बढ़ावा देकर अफसरशाही को बेलगाम, भ्रष्ट, आरामपरस्त और तानाशाह बनाया है। बिहार में शराबबंदी कानून अब मजाक बन गया है। इस कानून की आड़ में केवल गरीबों को निशाना बनाया जा रहा है। शराबबंदी कानून के तहत करीब 16 लाख से अधिक जिन लोगों की गिरफ्तारियां हुई हैं इनमें सबसे अधिक गरीब, दलित, पिछड़े और अति पिछड़े वर्ग के लोग हैं। बिहार में शराबबंदी को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि पुलिस के कारण ही शराब की तस्करी हो रही है और पुलिस का एकमात्र काम रह गया है भ्रष्टाचार, उगाही और कानून का दुरुपयोग करने वालों को संरक्षण देना। 16 लाखों लोगों की गिरफ्तारी के बावजूद भी सप्लायर और तस्करों को गिरफ्तार नहीं किया गया, किसी भी जिले के एसपी, डीएसपी या बड़े अधिकारी पर कार्रवाई नहीं की गई है. उन्होंने यहां तक कहा कि सरकार जिसको चाहती है, उसी पर कार्रवाई होती है, चयनात्मक कार्रवाई होती है। सरकार उन अधिकारियों और प्रशासनिक लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं करती जो भ्रष्टाचार के माध्यम से शराबबंदी को विफल करना चाहते हैं?
0
0
Report

ग्वालियर हाई कोर्ट ने 19 वर्षीय पत्नी को प्रेमी के साथ रहने की अनुमति दी

Morena, Madhya Pradesh:एंकर- ग्वालियर हाई कोर्ट ने 19 साल की पत्नी और 40 साल के पति से जुड़ी हुई महत्वपूर्ण बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई की, हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान 19 साल की पत्नी ने कहा कि 21 साल बड़े पति के साथ उसका वैवाहिक जीवन सुखमय नहीं चल पा रहा है, साथ ही उसके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है, ऐसे में पत्नी की इच्छा पर हाईकोर्ट ने उसे अपने प्रेमी के साथ रहने की अनुमति दी। वीओ- दरअसल युवती की शादी एक साल पहले ही हुई थी। उसके कुछ समय बाद युवती के पति अवधेश ने ग्वालियर हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी, याचिका के जरिए आरोप लगाया गया था कि उसकी पत्नी को अनुज कुमार नाम के व्यक्ति ने अवैध रूप से अपने पास रखा हुआ है। याचिका दायर होने के बाद कोर्ट के निर्देश पर पुलिस ने युवती को खोजने के बाद वन स्टॉप सेंटर में रखा था। ऐसे में हाई कोर्ट में जब इस मामले की आगे सुनवाई शुरू हुई तो कोर्ट के निर्देश पर युवती को वन स्टॉप सेंटर से कोर्ट में पेश किया गया। इस दौरान युवती के माता-पिता, उसका पति अवधेश और प्रेमी अनुज भी कोर्ट में मौजूद रहे, हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान 19 साल की युवती ने कहा कि उसकी शादी जिस व्यक्ति से हुई वह उससे 21 साल बढ़ा है, ऐसे में 40 साल उम्र के पति के साथ उसका वैवाहिक जीवन सुखमय नहीं चल पा रहा है, वह अपनी मर्जी से प्रेमी अनुज कुमार के साथ रहना चाहती है, कोर्ट में उसने यह भी बताया कि दोनों पति-पत्नी की काउंसलिंग भी हो चुकी है लेकिन वह अपने प्रेमी के साथ ही रहना चाहती है। ऐसे में ग्वालियर हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने 19 साल की पत्नी की इच्छा को प्राथमिकता देते हुए प्रेमी के साथ रहने का फैसला सुनाया। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने यह भी निर्देश दिए हैं कि 6 महीने के लिए शौर्या दीदी के रूप में निगरानी की व्यवस्था की जाए। और सभी औपचारिकताएं पूरी करते हुए युवती को वन स्टॉप सेंटर से मुक्त किया जाए।
0
0
Report

डबरा जेल रोड पर जमीन विवाद: दबंगों की फायरिंग से इलाके में दहशत

Morena, Madhya Pradesh:डबरा जेल रोड पर जमीन विवाद को लेकर दबंगों ने जमकर बघेल समाज के लोगों के घर के बाहर फायरिंग कर दी 9 सेकेंड की फायरिंग का वीडियो अब सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहा है। जिसमें बेखौफ दबंग एक के बाद एक लगातार फायर कर रहे हैं बताया जा रहा है कि 3 अप्रैल की रात जमीन के विवाद को लेकर योगेश दुबे, ओम दुबे और अन्नू चौहान सहित अन्य लोगों द्वारा फरियादी साहब सिंह बघेल के घर के बाहर ये फायरिंग की गई। वीडियो वायरल होने के तीन दिन बाद एसडीओपी सौरभ कुमार पुलिस टीम के साथ घटना स्थल पर पहुंचे और राउंड कब्जा किया साथ ही आगे की कार्यवाही शुरू की गई। फरियादी साहब सिंह का आरोप है कि घटना के तुरंत बाद पुलिस को सूचना दी गई पर पुलिस कार्यवाही के लिए तैयार नहीं थी। अब वायरल होने के बाद मामले में कार्रवाई शुरू की गई है। इसके साथ ही जिस जमीन को लेकर विवाद था वहाँ पुलिस टीम पहुँची और जमीन पर चल रहे निर्माण के काम को भी रुकवा दिया।
0
0
Report
Advertisement
Advertisement
Back to top