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Rupesh MansureRupesh MansureFollow22 Jul 2024, 06:17 pm

बैतूल में सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों के निराकरणके चलते जिला प्रदेश में आया प्रथम

Betul, Madhya Pradesh:मध्य प्रदेश में आम लोगों को बेहतर सरकारी सुविधा मुहैया करवाने और लोगों की शिकायतों के निराकरण करने को लेकर चलाई जा रही सीएम हेल्पलाइन के सकारात्मक रिजल्ट देखने को मिल रहे हैं। बैतूल जिले में कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी के मार्गदर्शन में सीएम हेल्पलाइन में दर्ज हुई शिकायतों का 83% निराकरण करने पर बैतूल जिले ने पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल किया है जिसको लेकर कलेक्टर ने सभी विभागों के अधिकारी और कर्मचारियों को बधाई भी दी है और आने वाले समय में इसे और बेहतर बनाने का आश्वासन भी कलेक्टर ने दिया है।
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कपासण में एक पेड़ माँ के नाम: पर्यावरण प्रेम जगाने वाला भव्य कार्यक्रम

Begun, Rajasthan:चित्तौड़गढ़ जिले के कपासन में हरियालो राजस्थान अभियान के तहत नगर पालिका द्वारा जशमा रोड स्थित गोवर्धन पुरी गौशाला में 'एक पेड़ माँ के नाम' कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ विधायक अर्जुन लाल जीनगर ने पौधारोपण कर किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है और प्रत्येक व्यक्ति को अपनी माता के सम्मान में कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल का संकल्प लेना चाहिए। कार्यक्रम नगर पालिका अधिशासी अधिकारी खेमराज सिंह गुर्जर के निर्देशन में आयोजित हुआ, जिसमें जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, नगर पालिका कार्मिकों और नरेगा श्रमिकों ने उत्साहपूर्वक पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
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SC की बड़ी राहत: बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले छात्र प्रदर्शनकारियों की तुरंत रिहाई का आदेश

Noida, Uttar Pradesh:*SC की बड़ी राहत: छात्र प्रदर्शनकारियों पर नहीं होगी कार्रवाई, बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले गिरफ्तार लोगों की तुरंत रिहाई का आदेश* जंतर मंतर और देश के दूसरे हिस्सों में विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए छात्रों के लिए सुप्रीम कोर्ट से राहत की खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि ऐसे सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा किया जाए, जिनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ गिरफ्तारी जैसी कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी *डिजिटल डेटा और सबूत सुरक्षित रखे जाए* सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्रदर्शनकारियों का डिजिटल डेटा सुरक्षित रखा जाए और उसे सार्वजनिक न किया जाए। कोर्ट ने प्रदर्शन स्थल से जुड़े सभी सबूत भी सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस सभी CCTV फुटेज, ड्रोन वीडियो, वायरलेस संचार और PCR कॉल रिकॉर्ड सुरक्षित रखें, ताकि जांच में उनका इस्तेमाल किया जा सके। *याचिकाओं में पुलिस पर बेहद गम्भीर आरोप* चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस पर ज्यादती के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन और इलेक्ट्रिक बैटन का इस्तेमाल किया। पुलिस ने कील लगी लाठियों का भी इस्तेमाल किया, जिससे प्रदर्शनकारियों को गंभीर और जानलेवा चोटें आईं। कोर्ट ने कहा कि आरोप है कि पैलेट गन चलाने से 19 वर्षीय एक युवक की आंखों की रोशनी चली गई। वकीलों की ओर से बिहार में एक पुलिसकर्मी द्वारा प्रदर्शनकारियों पर AK-47 से गोली चलाने का मामला भी उठाया गया है *स्वतंत्र जांच के लिए कमेटी बनाने पर विचार करेगा SC* चीफ जस्टिस ने कहा कि पहली नजर में यह छात्रों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन था, जिसमें वे संविधान से मिले अधिकार के तहत अपनी मांगें उठा रहे थे। कोर्ट ने कहा कि इस मामले की पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि किसी ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया है, तो कानून उसके खिलाफ कार्रवाई करेगा। चीफ जस्टिस ने यह भी कहा कि अगर जांच के बाद किसी की जवाबदेही तय नहीं होती, तो ऐसी जांच का कोई मतलब नहीं रह जाता। कोर्ट ने कहा कि वह हर आरोप की तह में नहीं जा सकता। इसलिए वह इस मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए हाई-पावर्ड कमेटी बनाने के पक्ष में है। हालांकि, उससे पहले कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और जिन राज्यों में हिंसा हुई है, उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है। कोर्ट ने दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, केरल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई में इन राज्यों के मुख्य सचिव ऑनलाइन पेश होंगे। *छात्रों के लिए Government का नरम रुख* सुनवाई के दौरान इस मामले में छात्र प्रदर्शनकारियों के प्रति सरकार का अपेक्षाकृत नरम रुख नजर आया। केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार छात्रों के साथ है। उन्होंने कहा कि अगर छात्रों के साथ पुलिस ने ज्यादती या बर्बरता की है, तो यह बेहद गंभीर बात है और सरकार भी इसे हल्के में नहीं लेती। तुषार मेहता ने कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार है। लेकिन अगर किसी ने कानून तोड़ा है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और उसे सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शन के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों के परिवार वाले भी कोर्ट पहुंचे हैं। इसलिए कोर्ट को यह भी देखना चाहिए कि पुलिस का मनोबल बना रहे। तुषार मेहता ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि असली छात्र ऐसी हिंसा में शामिल होंगे। उनके मुताबिक, कुछ असामाजिक और उपद्रवी तत्व छात्रों के आंदोलन में घुस गए होंगे, जिन्होंने आंदोलन की आड़ में हिंसा को अंजाम दिया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में कुछ ऐसे लोग भी मौजूद थे, जिन पर पहले से बलात्कार और NDPS कानून के तहत मामले दर्ज हैं। तुषार मेहता ने कहा कि जांच के लिए एक समिति बनाई जा सकती है, लेकिन उससे पहले सरकार को अपने सभी तथ्य और सबूत कोर्ट के सामने रखने का समय दिया जाए। *याचिकाकर्ताओं की दलील* याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी, श्याम दीवान, गोपाल शंकरनारायणन, प्रशांत भूषण और हरिहरन पेश हुए। वकीलों ने दलील दी कि यह मामला सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है। देश के कई हिस्सों, जैसे मध्य प्रदेश, नागपुर और बिहार आदि में भी विरोध प्रदर्शनों के दौरान ऐसी घटनाएं हुई हैं। वकीलों ने दलील दी कि निहत्थे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और पैलेट गन तथा आंसू गैस का इस्तेमाल किया। वकीलों ने यह भी दावा किया कि मुंबई में एक पुलिसकर्मी का ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसमें वह छात्रों को फर्जी नारकोटिक्स केस में फंसाने की बात करता दिखाई दे रहा है। बिहार से जुड़े मामले में वकील शादान फरासत ने कहा कि बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि वह एफआईआर वापस ले रही है, लेकिन इसके बावजूद 150 से अधिक नाबालिग अब भी हिरासत में हैं। उन्होंने कोर्ट से मांग की कि इन बच्चों को तुरंत रिहा किया जाए। वकील प्रशांत भूषण ने सवाल उठाया कि पत्थरों से भरा ट्रक सुबह 4 बजे जंतर मंतर कैसे पहुंच गया। उन्होंने पूछा कि सैकड़ों पुलिसकर्मियों की मौजूदगी के बावजूद यह ट्रक वहां तक कैसे पहुंचा। वकीलों ने दलील दी कि राज्य के पुलिस विभाग से अपनी कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि अदालत की निगरानी में एक एसआइटी का गठन किया जाए।
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SC ने विरोध प्रदर्शन के लिए स्वतंत्र जांच के लिए घोषणा कर दी

Noida, Uttar Pradesh:जंतर मंतर और देश के दूसरे हिस्सों में विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए छात्रों के लिए सुप्रीम कोर्ट से राहत की खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया है कि ऐसे सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा किया जाए, जिनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ गिरफ्तारी जैसी कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी डिजिटल डेटा और सबूत सुरक्षित रखे जाए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्रदर्शनकारियों का डिजिटल डेटा सुरक्षित रखा जाए और उसे सार्वजनिक न किया जाए। कोर्ट ने प्रदर्शन स्थल से जुड़े सभी सबूत भी सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस सभी CCTV फुटेज, ड्रोन वीडियो, वायरलेस संचार और PCR कॉल रिकॉर्ड सुरक्षित रखे, ताकि जांच में उनका इस्तेमाल किया जा सके। याचिकाओं में पुलिस पर बेहद गम्भीर आरोप चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों का हवाला देते हुए कहा कि पुलिस पर ज्यादती के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन और इलेक्ट्रिक बैटन का इस्तेमाल किया। पुलिस ने कील लगी लाठियों का भी इस्तेमाल किया, जिससे प्रदर्शनकारियों को गंभीर और जानलेवा चोटें आईं। कोर्ट ने कहा कि आरोप है कि पैलेट गन चलाने से 19 वर्षीय एक युवक की आंखों की रोशनी चली गई। वकीलों की ओर से बिहार में एक पुलिसकर्मी द्वारा प्रदर्शनकारियों पर AK-47 से गोली चलाने का मामला भी उठाया गया है स्वतंत्र जांच के लिए कमेटी बनाने पर विचार करेगा SC चीफ जस्टिस ने कहा कि पहली नजर में यह छात्रों का शांतिपूर्ण प्रदर्शन था, जिसमें वे संविधान से मिले अधिकार के तहत अपनी मांगें उठा रहे थे। कोर्ट ने कहा कि इस मामले की पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि किसी ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया है, तो कानून उसके खिलाफ कार्रवाई करेगा। चीफ जस्टिस ने यह भी कहा कि अगर जांच के बाद किसी की जवाबदेही तय नहीं होती, तो ऐसी जांच का कोई मतलब नहीं रह जाता। कोर्ट ने कहा कि वह हर आरोप की तह में नहीं जा सकता। इसलिए वह इस मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए हाई-पावर्ड कमेटी बनाने के पक्ष में है। हालांकि, उससे पहले कोर्ट ने केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और जिन राज्यों में हिंसा हुई है, उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है। कोर्ट ने दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, केरल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई में इन राज्यों के मुख्य सचिव ऑनलाइन पेश होंगे। छात्रों के लिए सरकार का नरम रुख सुनवाई के दौरान इस मामले में छात्र प्रदर्शनकारियों के प्रति सरकार का अपेक्षाकृत नरम रुख नजर आया। केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार छात्रों के साथ है। उन्होंने कहा कि अगर छात्रों के साथ पुलिस ने ज्यादती या बर्बरता की है, तो यह बेहद गंभीर बात है और सरकार भी इसे हल्के में नहीं लेती। उन्होंने कहा कि छात्रों को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने का पूरा अधिकार है। लेकिन अगर किसी ने कानून तोड़ा है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और उसे सजा मिलनी चाहिए। तुषार मेहता ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान घायल हुए पुलिसकर्मियों के परिवार वाले भी कोर्ट पहुंचे हैं। इसलिए कोर्ट को यह भी देखना चाहिए कि पुलिस का मनोबल बना रहे। तुषार मेहता ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि असली छात्र ऐसी हिंसा में शामिल होंगे। उनके मुताबिक, कुछ असामाजिक और उपद्रवी तत्व छात्रों के आंदोलन में घुस गए होंगे, जिन्होंने आंदोलन की आड़ में हिंसा को अंजाम दिया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन में कुछ ऐसे लोग भी मौजूद थे, जिन पर पहले से बलात्कार और NDPS कानून के तहत मामले दर्ज हैं। तुषार मेहता ने कहा कि जांच के लिए एक समिति बनाई जा सकती है, लेकिन उससे पहले सरकार को अपने सभी तथ्य और सबूत कोर्ट के सामने रखने का समय दिया जाए。 याचिकाकर्ताओं की दलील याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी, श्याम दीवान, गोपाल शंकरनारायणन, प्रशांत भूषण और हरिहरन पेश हुए। वकीलों ने दलील दी कि यह मामला सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है। देश के कई हिस्सों, जैसे मध्य प्रदेश, नागपुर और बिहार आदि में भी विरोध प्रदर्शनों के दौरान ऐसी घटनाएं हुई हैं। वकीलों ने दलील दी कि निहत्थे छात्रों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया और पैलेट गन तथा आंसू गैस का इस्तेमाल किया। वकीलों ने यह भी दावा किया कि मुंबई में एक पुलिसकर्मी का ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसमें वह छात्रों को फर्जी नारकोटिक्स केस में फंसाने की बात करता दिखाई दे रहा है। बिहार से जुड़े मामले में वकील शादान फरासत ने कहा कि बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि वह एफआईआर वापस ले रही है, लेकिन इसके बावजूद 150 से अधिक नाबालिग अब भी हिरासत में हैं। उन्होंने कोर्ट से मांग की कि इन बच्चों को तुरंत रिहा किया जाए। वकील प्रशांत भूषण ने सवाल उठाया कि पत्थरों से भरा ट्रक सुबह 4 बजे जंतर मंतर कैसे पहुंच गया। उन्होंने पूछा कि सैकड़ों पुलिसकर्मियों की मौजूदगी के बावजूद यह ट्रक वहां तक कैसे पहुंचा。 वकीलों ने दलील दी कि राज्य के पुलिस विभाग से अपनी कार्रवाई की निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि अदालत की निगरानी में एक एसआइटी का गठन किया जाए。
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कौशांबी में सात नाबालिगों की बाइक रील से जानलेवा खतरा, वीडियो वायरल

Gohara Marufpur, Uttar Pradesh:कौशांबी में सोशल मीडिया पर वायरल होने की होड़ अब जानलेवा साबित होती दिख रही है। मंझनपुर थाना क्षेत्र का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक ही बाइक पर सात नाबालिग सवार होकर सड़क पर खतरनाक तरीके से रील बनाते नजर आ रहे हैं। इस दौरान यातायात नियमों की खुलेआम अनदेखी की गई। हालांकि वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि एक बाइक पर सात नाबालिग युवक सवार हैं। सभी बिना सुरक्षा के सड़क पर सफर करते हुए रील बना रहे हैं। थोड़ी सी चूक किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती थी, लेकिन इसके बावजूद युवाओं ने अपनी और दूसरों की जान की परवाह नहीं की। बताया जा रहा है कि यह वीडियो मंझनपुर थाना क्षेत्र का है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद लोग ऐसे खतरनाक स्टंट पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। एक बाइक पर सात लोगों का बैठना न सिर्फ मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन है, बल्कि सड़क सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है। अब देखना होगा कि वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर पुलिस संबंधित बाइक और उसमें सवार युवकों की पहचान कर उनके खिलाफ क्या कार्रवाई करती है। पुलिस लगातार लोगों से यातायात नियमों का पालन करने और सोशल मीडिया पर लोकप्रियता के लिए जान जोखिम में न डालने की अपील करती रही है।
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6 से 8 घंटे: सरकार-विपक्ष ने चर्चा बढ़ाने पर सहमति, 10 घंटे तक संभव

Noida, Uttar Pradesh:संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक पर कहा, "... मैंने सभी पार्टियों के नेताओं, कांग्रेस के चीफ व्हिप, समाजवादी पार्टी के चीफ व्हिप, DMK और NCP से बात की और सभी इस बात पर सहमत हुए कि 6 घंटे की चर्चा को 2 घंटे और बढ़ाकर 8 घंटे कर दिया जाए। हम सब इस बात पर सहमत हुए... मैं सदन में यह बात कह रहा हूं कि वेणुगोपाल जी, अगर आपको अतिरिक्त 2 घंटे चाहिए, तो सरकार को कोई आपत्ति नहीं है। हम मिलकर इस पर फैसला कर सकते हैं। स्पीकर ने अभी कहा है कि इसे एक घंटा और बढ़ाने में हमें कोई आपत्ति नहीं है...अगर 8 घंटे से भी ज़्यादा समय की ज़रूरत पड़ी, तो हम 10 घंटे की चर्चा के लिए भी तैयार हैं...
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पनागर पुलिस ने पिस्तौल-कारतूस सहित रमन पटेल गिरफ्तार, जित्तू महोबिया की तलाश जारी

Jabalpur, Madhya Pradesh:पनागर पुलिस ने उर्दूआ खुर्द के रहने वाले रमन पटेल को गिरफ्तार किया है और उसके पास से एक पिस्तौल और चार कारतूस बरामद किए हैं। आरोपी ने बताया कि उसने बरेला की रहने वाली जित्तु महोबिया से पिस्तौल और कारतूस खरीदे थे जिसके बाद जित्तू महोबिया की तलाश चल रही है; हालांकि रमन पटेल का कोई अपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। साथ ही पुलिस अब उसे इस बात की पूछताछ कर रही है कि पिस्तौल और कारतूस लेकर किसी वारदात को अंजाम देने की फिराक में तो नहीं था। फिलहाल पनागर पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और जित्तू महोबिया की तलाश की जा रही है।
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कानपुर में बिच्छू गैंग के सरगना गौरव जैन का 3 किमी पैदल जुलूस, पुलिस ने क्या कहा?

Kanpur, Uttar Pradesh:कानपुर में बिच्छू गैंग के सरगना का पुलिस ने निकाला जुलूस – मुठभेड़ में गोली लगने के बाद पुलिस ने लालबंगला क्षेत्र में 3 किमी पैदल घुमाया – जिस इलाके में था खौफ, वहीं हाथ जोड़कर बोला गौरव जैन- अब अपराध नहीं करूंगा चकेरी थाना क्षेत्र में पुलिस ने 12 मुकदमों में वांछित और बिच्छू गैंग के सरगना गौरव जैन का लगभग तीन किलोमीटर लंबा पैदल जुलूस निकाला। सोमवार रात मुठभेड़ के दौरान पुलिस की जवाबी कार्रवाई में पैर में गोली लगने के बाद आरोपी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मंगलवार दोपहर पुलिस उसे लालबंगला क्षेत्र में वारदात के री-क्रिएशन और सत्यापन के लिए पैदल लेकर गुजरी। जिस इलाके में कभी गौरव जैन का खौफ हुआ करता था, वहीं वह लंगड़ाते हुए और हाथ जोड़कर स्थानीय लोगों के सामने अब अपराध नहीं करूंगा की गुहार लगाता दिखा। हत्या के प्रयास के मामले में महीने भर से फरार चल रहे इस हिस्ट्रीशीटर को देखने के लिए छतों और दुकानों के बाहर लोगों की भारी भीड़ जुट गई। पुलिस ने घटनास्थल का सत्यापन कराने के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
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ललितपुर में नकाबपोश बदमाशों का JCB चालक और परिजनों पर हमला, भर्ती

Lalitpur, Uttar Pradesh:उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में सदर कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत आईटीआई कॉलेज के पास उस समय सनसनी फैल गई जब दो कार में भरकर आये हथियारबंद नकाबपोशों ने एक जेसीबी ड्राइवर और उसके माता पिता को दौड़ा- दौड़ाकर पीटना शुरू कर दिया। पीड़ित युवक अपने आपको बचाने के लिये सड़क पर दौड़कर एक दुकान में भी घुस गया लेकिन बेखौफ दबंगों ने युवक को दुकान से बाहर खींचकर धारदार हथियारों से बेरहमी के साथ पीटा, आरोपियों तीनों के साथ इस कदर मारपीट की कि युवक और उसके पिता की जगह जगह से हड्डियाँ टूट गईं। बताया जा रहा है कि नकाबपोश बदमाशों ने पुरानी रंजिश के चलते JCB चालक और उसके माता पिता के साथ बेरहमी से मारपीट की गई, गंभीर रूप से घायल तीनों को जिला मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। जहां से उन्हें झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया, वहीं मामले में पुलिस आरोपियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकद्दमा दर्ज कर आगे की कार्यवाही में जुट गई है।
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