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JSSC आयु सीमा विवाद पर झारखंड में उबाल, JLKM ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा
UMUJJWAL MISHRA
Jan 09, 2026 09:48:02
Ranchi, Jharkhand
आयु सीमा और JPSC सिलेबस विवाद पर गरमाई राजनीति, JLKM नेता देवेंद्रनाथ महतो ने राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन
रांची: झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा कच्छपाल पद के लिए जारी नियुक्ति विज्ञापन संख्या–07/2025 को लेकर राज्य में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। अभ्यर्थियों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि झारखंड सरकार के संकल्प संख्या–440 के प्रावधानों की अनदेखी की गई है। संकल्प के अनुसार आयु की कट-ऑफ तिथि 01 अगस्त 2019 निर्धारित होनी चाहिए थी, जबकि विज्ञापन में 01 अगस्त 2025 को कट-ऑफ तिथि रखा गया है। इससे राज्य के छात्रों और अभिभावकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
इसी मुद्दे को लेकर झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष एवं नेता देवेंद्रनाथ महतो ने आज झारखंड के महामहिम राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में उन्होंने JSSC कच्छपाल नियुक्ति विज्ञापन में आयु सीमा में आवश्यक छूट देने की मांग की और इसे राज्य के आदिवासी, मूलवासी और स्थानीय अभ्यर्थियों के हितों के खिलाफ बताया।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि वर्तमान में लागू झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की सिविल सेवा परीक्षा का सिलेबस पूर्व मुख्य सचिव वी.एस. दुबे की अध्यक्षता में गठित समिति की अनुशंसा पर लागू किया गया था। इसी समिति की सिफारिश पर प्रारंभिक परीक्षा में CSAT प्रणाली लागू की गई थी, जिसका आदिवासी और मूलवासी छात्रों द्वारा व्यापक विरोध हुआ। विरोध के बाद CSAT को हटा दिया गया, लेकिन मुख्य परीक्षा का सिलेबस अब तक स्थानीय, आदिवासी और मूलवासी अभ्यर्थियों के अनुकूल संशोधित नहीं किया गया है।
JLKM ने अपने ज्ञापन में यह भी रेखांकित किया कि देश की प्रतिष्ठित कोचिंग संस्था ‘दृष्टि IAS’ के निदेशक विकास दिव्यकृति सार्वजनिक मंचों से यह स्वीकार कर चुके हैं कि वर्तमान JPSC सिविल सेवा परीक्षा का सिलेबस संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) से भी अधिक जटिल और विस्तृत है। इसका सीधा असर झारखंड के स्थानीय, आदिवासी और ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले अभ्यर्थیوں पर पड़ रहा है, जिन्हें शैक्षणिक, भाषायी और प्रतिस्पर्धात्मक स्तर पर गंभीर असमानता, मानसिक दबाव और संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
देवेंद्रनाथ महतो ने राज्यपाल से आग्रह किया कि पूर्ण बहुमत वाली अबुआ सरकार से आदिवासी समाज की ऐतिहासिक अपेक्षाओं को ध्यान में रखते हुए जल-जंगल-जमीन, भाषा-संस्कृति और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जाए। साथ ही नीति-निर्माण और प्रशासनिक ढांचे में स्थानीय हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की मांग की गई।
उन्होंने JPSC सिलेबस को सरल, संतुलित और स्थानीय अभ्यर्थियों के अनुकूल बनाने तथा कच्छपाल नियुक्ति विज्ञापन में आयु सीमा से जुड़ी त्रुटों को शीघ्र सुधारने की भी मांग की।
JLKM ने चेतावनी दी है कि यदि इन मांगों पर जल्द सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो राज्यव्यापी आंदोलन किया जाएगा।
बाइट: देवेंद्र नाथ महतो (JLKM नेता)
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