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PawanPawanFollow10 Jul 2024, 12:02 pm
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राजस्थान हाईकोर्ट ने औद्योगिक कचरे के डंप पर नमूनों की जाँच के निर्देश दिए

Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर। बड़ी सादड़ी तहसील क्षेत्र में औद्योगिक अपशिष्ट डंप किए जाने के आरोपों पर राजस्थान हाईकोर्ट ने संबंधित भूमि की जांच के निर्देश दिए हैं। जनहित याचिका में आरोप लगाया गया कि दरीबा माइंस/स्मेल्टिंग यूनिट से निकलने वाले औद्योगिक कचरे को स्कूलों के खेल मैदानों, कृषि भूमि, खुली जमीन और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर डंप किया गया। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा एवं न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने रणजीत सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले में नोटिस जारी किए। कोर्ट ने तहसीलदार एवं संबंधित अधिकारी को प्रभावित भूमि से मिट्टी के नमूने लेने के निर्देश दिए। नमूनों को राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के समक्ष परीक्षण के लिए प्रस्तुत किया जाएगा। हाईकोर्ट ने प्रदूषण नियंत्रण मंडल को नमूनों की जांच कर अगली सुनवाई से पहले रिपोर्ट अदालत में पेश करने को कहा है। याचिका में कहा गया कि अपशिष्ट हटाने के बावजूद उसके अवशेष मिट्टी और भूजल को प्रभावित कर सकते हैं। याचिकाकर्ता ने प्रभावित क्षेत्रों की वैज्ञानिक जांच और पर्यावरणीय बहाली की मांग की है।कोर्ट ने शेष प्रतिवादियों को भी नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर 2026 को होगी। याची की ओर से अधिवक्ता अदिति मोड़ ने पैरवी की।
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झारखंड हाई कोर्ट के आदेश के बाद पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का विरोध

Noida, Uttar Pradesh:रांची: झारखंड हाई कोर्ट द्वारा राज्य सरकार के 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने के आदेश पर रोक लगाने के बाद, छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने कहा, "...मैं हाई कोर्ट के आदेश का सम्मान करता हूं। मुझे भरोसा है कि हाई कोर्ट उस मुद्दे पर न्याय करेगा जिसके लिए हम पेपर लीक और झारखंड में हो रही गड़बड़ियों के खिलाफ विरोध कर रहे थे; ये चीजें लाखों छात्रों का भविष्य बर्बाद कर रही हैं। जब हाई कोर्ट ने सरकार को मौका दिया था, तो एडवोकेट जनरल कोर्ट क्यों नहीं पहुंचे? सरकार की तरफ से पेश वकील ने CID जांच रिपोर्ट को ठीक से क्यों नहीं रखा? इससे ऐसा लगता है कि सरकार मामले को दबाना चाहती है...अगर सरकार धोखा देती है या मामले को दबाने की कोशिश करती है, तो छात्रों का शांतिपूर्ण विरोध जारी रहेगा...हम धोखा बर्दाश्त नहीं करेंगे..."
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जोधपुर पोक्सो केस: सात वर्षीय बच्ची के दुष्कर्म पर आरोपी को 20 वर्ष कारावास

Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर। विशेष न्यायालय पोक्सो कोर्ट जोधपुर महानगर की न्यायाधीश स्वाती शर्मा ने सात वर्षीय बालिका से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 26 हजार रुपए के जुर्माने से दंडित किया है। न्यायालय ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 342 के तहत भी एक वर्ष के कारावास और एक हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई। विशिष्ट लोक अभियोजक वीणा चौहान ने बताया कि वर्ष 2021 में पुलिस आयुक्तालय क्षेत्र के एक थाने में पीड़िता की मां ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि पड़ोस में रहने वाला आरोपी सात वर्षीय बालिका को अपने पास बुलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की और अनुसंधान के बाद आरोपी के खिलाफ आईपीसी की धारा 342, 376(ए), 376(बी) तथा पोक्सो एक्ट की संबंधित धाराओं में आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दस्तावेजी साक्ष्य और गवाह न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए। लोक अभियोजक ने बालिका की कम उम्र और अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को कठोरतम दंड दिए जाने की मांग की। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद न्यायालय ने आरोपी को पोक्सो एक्ट की धारा 5(एम)/6 के तहत 20 वर्ष के कठोर कारावास और 25 हजार रुपए के जुर्माने तथा धारा 342 आईपीसी में एक वर्ष के कारावास व एक हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया。
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जोधपुर कोर्ट ने एडवोकेट क्लर्क व लॉ इंटर्न के प्रवेश पहचान नियम कड़े किये

Jodhpur, Rajasthan:जोղपुर। राजस्थान हाईकोकोर्ट ने कोर्ट परिसर की सुरक्षा और गरिमा को लेकर एडवोकेट क्लर्कों और लॉ इंटर्न के लिए प्रवेश, पहचान और आचरण के नियम सख्त कर दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना पंजीकरण या वैध अस्थायी पहचान-पत्र के किसी व्यक्ति को एडवोकेट क्लर्क के रूप में काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। जस्टिस रवि चिरानिया ने निर्देश दिया कि वर्तमान में कार्यरत पात्र अपंजीकृत एडवोकेट क्लर्क 10 दिन के भीतर आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन जमा करें। रजिस्ट्रार प्रशासन को रजिस्ट्रार न्यायिक के समन्वय से 45 दिन में पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करने का प्रयास करना होगा। आवेदकों का पुलिस सत्यापन भी अनिवार्य किया गया है। कोर्ट के समक्ष बताया गया कि जोधपुर में करीब 163 एडवोकेट क्लर्क पंजीकृत हैं, जबकि 330 से अधिक लोग क्लर्क के रूप में कार्य कर रहे हैं। वर्ष 2019 के बाद नया पंजीकरण नहीं हुआ था। कोर्ट ने कहा कि बिना वैध आईडी के काम करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। स्थायी पहचान-पत्र में क्यूआर कोड होगा। क्लर्कों के लिए निर्धारित वर्दी अनिवार्य रहेगी तथा कोर्ट रूम में ईयरफोन, अनुचित मोबाइल इस्तेमाल और अनुशासनहीन व्यवहार पर रोक होगी। लॉ इंटर्न के लिए भी निर्धारित ड्रेस कोड, कॉलेज आईडी और हाईकोर्ट पास अनिवार्य किया गया है। आदेश की अनुपालना पर अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी।
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