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जयपुर: पत्रकार कॉलोनी थाना पुलिस ने स्टंटबाजी कर रहे चार बदमाश गिरफ्तार

Jaipur, Rajasthan:जयपुर पुलिस कमिश्नरेट के साउथ जिले के पत्रकार कॉलोनी थाना पुलिस ने सड़क पर तेज रफ्तार और स्टंटबाजी कर आमजन की जान जोखिम में डालने वाले four बदमाशों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल की गई दो कारें भी जब्त की गई है।डीसीपी साउथ राजर्षि राज के निर्देश पर ये कार्रवाई की गई है। पुलिस के मुताबिक 24 मई 2026 की रात पत्रकार कॉलोनी थाना क्षेत्र में हुड़दंगियों द्वारा सड़क पर खतरनाक तरीके से वाहन दौड़ाने, टक्कर मारने और राहगीरों पर जानलेवा खतरा पैदा करने की सूचना मिली थी। इसके बाद थाना पुलिस और डीएसटी टीम को आरोपियों की तलाश के निर्देश दिए गए।जांच में सामने आया कि नीमड़ी वाले बालाजी, पत्रकार कॉलोनी के पास करीब 20 से 30 युवक इकट्ठा होकर सड़क पर तेज रफ्तार में कारें दौड़ा रहे थे। आरोपी वाहन एक-दूसरे से टकरा रहे थे, सड़क पर स्टंट कर रहे थे तथा राह चलते लोगों की जान को खतरे में डाल रहे थे। इस दौरान कई वाहन क्षतिग्रस्त भी हुए। सूचना पर पहुंची पुलिस को देखकर आरोपी मौके से फरार हो गए।मामले में पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर तकनीकी और मुखबिर तंत्र की मदद से दबिश देकर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में विकास, महेश, लक्ष्या उर्फ गिर्राज और लोकेश शामिल हैं। सभी आरोपी टोंक जिले के निवासी बताए गए हैं।पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से एक थार कार, एक लग्जरी कार और एक अन्य कार जब्त की है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की जांच की जा रही है.
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नीट पेपर लीक के शिकार प्रदीप माहिच के परिवार को मिली भारी मदद

Jhunjhunu, Rajasthan:झुंझुनूं नीट पेपर लीक मामले में सुसाइड करने का मामला दिवंगत छात्र प्रदीप माहिच के परिवार को दी सहायता युवा समाजसेवी मनोज घुमरिया ने 1 लाख की मदद दी घुमरिया ने सरकार से पीड़ित परिवारों के लिए आर्थिक पैकेज की मांग की बोले- प्रदीप का डॉक्टर बनने का सपना पेपर लीक ने तोड़ दिया परिवार ने जमीन बेचकर और लोन लेकर कराई थी पढ़ाई इससे पहले एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने दी थी सहायता राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने 11 लाख रूपए की दी सहायता तो वहीं पूर्व मंत्री डॉ. राजकुमार शर्मा 2 लाख की दी थी सहायता नीट परीक्षा पेपर लीक मामले के बाद अवसाद में आकर आत्महत्या करने वाले झुंझुनूं जिले के गुढ़ा बावनी पंचायत स्थित कनिका की ढाणी निवासी नीट अभ्यर्थी प्रदीप माहिच के परिवार की मदद के लिए अब समाज के लोग लगातार आगे आ रहे हैं। प्रदीप माहिच पिछले तीन साल से सीकर में रहकर नीट की तैयारी कर रहा था और इस बार उसके करीब 650 अंक आने की उम्मीद थी। अब युवा समाजसेवी मनोज घुमरिया ने भी प्रदीप माहिच के परिवार के आंसू पोंछते हुए 1 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी है। इस दौरान मनोज घुमरिया ने कहा कि नीट पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के कारण कई मेधावी छात्र मानसिक तनाव में आए हैं। प्रदीप माहिच भी डॉक्टर बनने का सपना लेकर दिन-रात मेहनत कर रहा था। लेकिन पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के बाद वह अवसाद में चला गया और उसने आत्महत्या कर ली। मनोज घुमरिया ने सरकार से मांग की कि पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के कारण जान गंवाने वाले सभी विद्यार्थियों के परिवारों के लिए विशेष आर्थिक पैकेज घोषित किया जाए। ताकि पीड़ित परिवारों को सहारा मिल सके। उन्होंने कहा कि प्रदीप का परिवार जमीन बेचकर और लोन लेकर उसे पढ़ा रहा था और इस बार उसका मेडिकल कॉलेज में चयन लगभग तय माना जा रहा था। घुमरिया ने कहा कि वे आगे भी प्रदीप माहिच के परिवार की हरसंभव मदद के लिए हमेशा तैयार रहेंगे। बीते दिन एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने परिवार को 11 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी थी। वहीं उनके साथ गांव पहुंचे डॉ. राजकुमार शर्मा ने भी अपनी ओर से 2 लाख रुपए का सहयोग प्रदान किया। बाइट : मनोज घुमरिया, युवा समाजसेवी
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चित्तौड़गढ़ में तृतीय नेत्र विकास शिविर: आंखों पर पट्टी बांधकर रंग पहचान

Begun, Rajasthan:चित्तौड़गढ़ - एंकर - चित्तौड़गढ़ के श्री गुरुकुल में इन दिनों ऐसे दृश्य देखने को मिल रहे हैं जिन्हें देखकर हर कोई आश्चर्य में पड़ जाता है। बच्चों की आंखों पर पट्टी बंधी है... सामने अलग-अलग रंगों के कार्ड रखे हैं... और बच्चे बिना देखे बता रहे हैं कि कार्ड का रंग क्या है, उस पर क्या लिखा है और सामने बनाई गई आकृति सर्कल है, स्क्वायर है या ट्रायंगल। इतना ही नहीं, कुछ बच्चे आंखों पर पट्टी बांधकर ड्राइंग भी बना रहे हैं और ध्वनि के आधार पर रंगों की पहचान कर रहे हैं। यह कोई जादू का मंच नहीं, बल्कि आर्यवीर दल राजस्थान का 10 दिवसीय प्रांतीय शिविर है, जहां “तृतीय नेत्र विकास” यानी थर्ड आई डेवलपमेंट पर विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रदेशभर से पहुंचे सैकड़ों बच्चे यहां योग, मेडिटेशन, ब्रेन जिम और आत्मरक्षा के साथ मानसिक एकाग्रता का अभ्यास कर रहे हैं। श्री गुरुकुल का माहौल इन दिनों अनुशासन, साधना और आश्चर्यजनक गतिविधियों से भरा हुआ है। आखिर कैसे हो रहा है यह प्रशिक्षण और किस तरह बच्चे आंखों पर पट्टी बांधकर यह सब कर पा रहे हैं... देखिए हमारी ये खास रिपोर्ट।
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फतेहपुर सीकर में भीषण गर्मी, तापमान 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा

Sikar, Rajasthan:जिला सीकर फतेहपुर सीकर फतेहपुर, कस्बे एवं क्षेत्र में भीषण गर्मी का दौर जारी रहने से आमजन बेबस से नजर आ रहे हैं। बुधवार को अधिकतम तापमान 45.0 डिग्री सेल्सियास दर्ज किया गया है। इस गर्मी में पहली बार अधिकतम तापमान 45.0 डिग्री पर मापा गया है। नोपा के तीसरे क्षेत्र में प्रचण्ड गर्मी का असर देखने को मिला। सूर्यदेव की प्रचण्डता के कहर के चलते दिन उगने के साथ ही रुद्र रूप में प्रकट हो कर आमजन को तपन भरे वातावरण में दैनिक कार्य करने पड़ रहे हैं। सूर्यदेव दोपहर तक पूरी तरह से अपने रुद्र रूप में हो कर वातावरण को गर्म हवाओं में तब्दील कर देने की वजह से लू के थपेडों में परिवर्तन हो कर परेशानी का सबब बने हुए हैं। लू के थपेडों की वजह से वाहन चालकों को भी परेशानी के साथ ही वाहनों का संचालन करते हैं वही बसों में बैठने वाले यात्रियों को तपन भरे माहौल में ही यात्रा करनी पड़ती है। कस्बे में भीषण गर्मी के चलते दोपहर 12 बजे बाद से बाजार सहित मुख्य रास्तों और गली मोहल्लों में सन्नाटा सा पसरा हुआ नजर आता है। बुधवार को कृषि अनुसंधान केंद्र से प्राप्त जानकारी के अनुसार अधिकतम तापमान 45.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
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शासन सचिव शुचि त्यागी की अध्यक्षता में बजट घोषणाओं की एजेन्सीवार प्रगति समीक्षा

Jaipur, Rajasthan:समस्त बजट घोषणाओं की प्रगति की एजेन्सीवार समीक्षा बैठक सचिवालय में शासन सचिव शुचि त्यागी की अध्यक्षता में बैठक हुई वर्ष 2024-25, 2025-26 और 2026-27 की समस्त बजट घोषणाओं की प्रगति समीक्षा बैठक पर्यटन विभाग, देवस्थान विभाग एवं कला, साहित्य, संस्कृति और पुरातत्व विभाग से संबंधित बजट घोषणाओं की प्रगति पर चर्चा की गई शासन सचिव शुचि त्यागी ने विभागों से संबंधित बजट घोषणाओं की बिंदुवार समीक्षा करते हुए निर्देश दिए कि सभी बजट घोषणाओं को शीघ्रता से समय पर पूरा किए जाएं और कार्यों की गुणवत्ता पर दिशा निर्देश दिए उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक सोमवार को केंद्रीय प्रवर्तित प्रायोजित योजनाओं की समीक्षा की जाएगी इसके साथ ही निर्देश दिए कि जिन कार्यों को एक से अधिक एजेंसियों द्वारा संपादित किया जा रहा है, एजेंसियां आपसी समन्वय से गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध संपादन करें उन्होंने निर्देश दिए कि दोहराव वाली बजट घोषणाओं का औचित्यपूर्ण परिक्षण करवाकर निस्तारण किया जाए शासन सचिव ने सभी कार्यकारी एजेंसीज और देवस्थान, पर्यटन, कला साहित्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि चल रहे विकास कार्यों का मौके पर जाकर निरीक्षण करें
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SARTHAK-PDS योजना से NFSA लाभार्थियों तक पहुंच और पारदर्शिता में बड़ा सुधार

Noida, Uttar Pradesh:2705ZUP_DEL_PDS_INFO_D SARTHAK-PDS योजना प्रधानमंत्री Narendra Modi की अध्यक्षता में हुई Cabinet Committee on Economic Affairs (CCEA) की बैठक में SARTHAK-PDS योजना को मंजूरी दी गई। केंद्र सरकार अगले 5 वर्षों में 25,530 करोड़ रुपये खर्च करेगी। यह योजना 31 मार्च 2031 तक लागू रहेगी。 SARTHAK-PDS के तहत दो योजनाओं को एक साथ जोड़ा गया है: 1. NFSA के तहत खाद्यान्न के राज्य के भीतर परिवहन और FPS डीलरों के मार्जिन सहायता योजना 2. SMART PDS योजना योजना का उद्देश्य पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) को आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाना है। सरकार का लक्ष्य 81.35 करोड़ NFSA लाभार्थियों तक खाद्यान्न की बेहतर और अंतिम छोर तक डिलीवरी सुनिश्चित करना है। राशन दुकानदारों (FPS Dealers) को अधिक कमीशन और राज्यों को परिवहन व हैंडलिंग के लिए वित्तीय सहायता जारी रहेगी। योजना में AI, Machine Learning, NLP और Blockchain जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। इससे रियल टाइम मॉनिटरिंग, डेटा आधारित निगरानी और शिकायत निवारण प्रणाली मजबूत होगी। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में e-PoS मशीन, आधार सीडिंग और डिजिटल राशन कार्ड व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा। “मेरा राशन”, “अन्न मित्र”, “अन्न सहायता” और “राइटफुल टार्गेटिंग डैशबोर्ड” जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म को भी बढ़ावा मिलेगा। योजना का मुख्य उद्देश्य लीकेज रोकना, पारदर्शिता बढ़ाना और खाद्य सुरक्षा को मजबूत करना है।
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राजस्थान में CETP के लिए 150 करोड़ रुपये का अनुदान, जल पुनः उपयोग योजना

Jaipur, Rajasthan:सीईटीपी स्थापना के लिए 150 करोड़ रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा। क्लस्टर-स्तर के सीईटीपी की स्थापना के दौरान ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ तकनीक वाले प्लांट लगाए जाएंगे। योजना के अनुसार 80 प्रतिशत तक अनुदान या अधिकतम 150 करोड़ रुपये दिया जाएगा, 60 प्रतिशत अनुदान तीन किस्तों में 20-20-20 वर्षों में उपलब्ध कराया जाएगा। नॉन-रीको औद्योगिक क्षेत्रों में भी वित्तीय सहायता दी जाएगी। रीको और नॉन रीको दोनों क्षेत्रों में एसपीवी बनाकर परियोजना लागत का 80 प्रतिशत या अधिकतम 150 करोड़ रुपये का अनुदान मिलेगा। शर्तें पुरानी योजना का दायरा बढ़ाकर 100 करोड़ का अनुदान और नॉन रीको क्षेत्र को भी शामिल कर दी गई।
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SC ruling clarifies SIR process and voter list reforms, keeping the commission impartial

Noida, Uttar Pradesh:सुप्रीम कोर्ट के लिखित फैसले में निष्कर्ष और दिशानिर्देश:-1 SIR की प्रकिया जनप्रतिनिधत्व कानून के खिलाफ नहीं है।यह संविधान के अनुच्छेद 324 और RP एक्ट के सेक्शन 21 के तहत के तहत चुनाव आयोग की अधिकार क्षेत्र ने आती है। SIR का मकसद निष्पक्ष और सही चुनाव सुनिश्चित करना है। 2 SIR प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग जो कदम उठाए , वे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के मुताबिक पूरी तरह और संतुलित हैं।इसका मुख्य मकसद मतदाता सूची को सही और अपडेट करना है।जिन लोगों के नाम गलत तरीके से हटे है, उनके लिए भी इसमें राहत और अपील का मौका दिया है。 3 अगर किसी का नाम पहले से मतदाता सूची में है तो यह माना जा सकता है कि वो वैध मतदाता है। लेकिन वोटर लिस्ट में नाम होना अंतिम प्रमाण नहीं है।उसे जांचकर बदला जा सकता है।चुनाव आयोग को पूरी मतदाता सूची की जांच करने का अधिकार है。 4 मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के नियम 21A के खिलाफ नहीं है। जिन लोगों के नाम हटाए गए, उनकी प्रक्रिया कानून के अनुसार ही की गई है। उन्हे नोटिस दिया गया और उन्हें अपनी बात रखने का मौक़ा भी दिया गया। 5 चुनाव आयोग ने यह तय किया कि वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने/ जांचने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज मान्य होंगे। वह उसका सोच-समझकर लिया गया प्रशासनिक फैसला है। आधार कार्ड को शामिल करने का आदेश भी इस कोर्ट ने 8 सितंबर 2025 को दिया गया था।इसलिए उसे भी दस्तावेजों शामिल किया गया है।दस्तावेजों को चयन मनमाने तरीके से नहीं किया गया है। इसके पीछे वाजिब आधार है। 6 चुनाव आयोग अपने संवैधानिक अधिकार के तहत यह सीमित जांच कर सकता है कि कोई व्यक्ति नागरिक है या नहीं लेकिन सिर्फ यह तय करने के लिए कि उसे वोटर लिस्ट में शामिल किया जाए या नहीं। चुनाव आयोग की जांच केवल मतदाता सूची के लिए होती है।इसका मतलब यह नहीं है कि चुनाव आयोग किसी व्यक्ति की नागरिकता का अंतिम और कानूनी फैसला कर रहा हो। अगर किसी व्यक्ति को नागरिक न मानकर वोटर लिस्ट से हटाया जाता है, तो इसका असर सिर्फ इतना है कि वह वोट नहीं दे पाएगा।लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उसकी नागरिकता खत्म हो गई है।नागरिकता का असली और अंतिम फैसला केंद्र सरकार के सक्षम ऑथरिटी करती है 7 चुनाव आयोग केवल यह देखता है कि व्यक्ति वोटर लिस्ट में रहने योग्य है या नहीं। लेकिन वह नागरिकता पर अंतिम फैसला नहीं दे सकता। अगर चुनाव आयोग को यह लगता है कि कोई व्यक्ति वोटर लिस्ट में शामिल होने की कानूनी शर्तें पूरी नहीं करता, तो आयोग को उस व्यक्ति का मामला केंद्र सरकार के सक्षम ऑथरिटी के पास भेजना होगा। वही नागरिकता तय कर सकता है 8 1SIR की प्रकिया जनप्रतिनिधत्व कानून के खिलाफ नहीं है।यह संविधान के अनुच्छेद 324 और RP एक्ट के सेक्शन 21 के तहत के तहत चुनाव आयोग की अधिकार क्षेत्र ने आती है। SIR का मकसद निष्पक्ष और सही चुनाव सुनिश्चित करना है。 2 SIR प्रक्रिया के दौरान चुनाव आयोग जो कदम उठाए , वे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के मुताबिक पूरी तरह और संतुलित हैं।इसका मुख्य मकसद मतदाता सूची को सही और अपडेट करना है।जिन लोगों के नाम गलत तरीके से हटे है, उनके लिए भी इसमें राहत और अपील का मौका दिया है। 3 अगर किसी का नाम पहले से मतदाता सूची में है तो यह माना जा सकता है कि वो वैध मतदाता है। लेकिन वोटर लिस्ट में नाम होना अंतिम प्रमाण नहीं है।उसे जांचकर बदला जा सकता है।चुनाव आयोग को पूरी मतदाता सूची की जांच करने का अधिकार है। 4 मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के नियम 21A के खिलाफ नहीं है। जिन लोगों के नाम हटाए गए, उनकी प्रक्रिया कानून के अनुसार ही की गई है। उन्हे नोटिस दिया गया और उन्हें अपनी बात रखने का मौक़ा भी दिया गया。 5 आयोग ने यह तय किया कि वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने/ जांचने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज मान्य होंगे। वह उसका सोच-समझकर लिया गया प्रशासनिक फैसला है। आधार कार्ड को शामिल करने का आदेश भी इस कोर्ट ने 8 सितंबर 2025 को दिया गया था।इसलिए उसे भी दस्तावेजों शामिल किया गया है।दस्तावेजों को चयन मनमाने तरीके से नहीं किया गया है। इसके पीछे वाजिब आधार है। 6चुनाव आयोग अपने संवैधानिक अधिकार के तहत यह सीमित जांच कर सकता है कि कोई व्यक्ति नागरिक है या नहीं लेकिन सिर्फ यह तय करने के लिए कि उसे वोटर लिस्ट में शामिल किया जाए या नहीं। चुनाव आयोग की जांच केवल मतदाता सूची के लिए होती है।इसका मतलब यह नहीं है कि चुनाव आयोग किसी व्यक्ति की नागरिकता का अंतिम और कानूनी फैसला कर रहा हो। अगर किसी व्यक्ति को नागरिक न मानकर वोटर लिस्ट से हटाया जाता है, तो इसका असर सिर्फ इतना है कि वह वोट नहीं दे पाएगा।लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि उसकी नागरिकता खत्म हो गई है। नागरििता का असली और अंतिम फैसला केंद्र सरकार के सक्षम ऑथरिटी करती गया 7 चुनाव आयोग केवल यह देखता है कि व्यक्ति वोटर लिस्ट में रहने योग्य है या नहीं। लेकिन वह नागरिकता पर अंतिम फैसला नहीं दे सकता। अगर चुनाव आयोग को यह लगता है कि कोई व्यक्ति वोटर लिस्ट में शामिल होने की कानूनी शर्तें पूरी नहीं करता, तो आयोग को उस व्यक्ति का मामला केंद्र सरकार के सक्षम ऑथरिटी के पास भेजना होगा। वही नागरिकता तय कर सकता है 8 चुनाव आयोग ने जिन लोगों के नाम 2003 की वोटर लिस्ट में होने के बावजूद उन्हें भारतीय नागरिक नहीं मानते हुए हटाए है, उनके मामलों को आयोग को 4 हफ्तों में नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत बनी सक्षम ऑथिरिटी को भेजेगा।ऑथरिटी कानून के अनुसार यह तय करेगी कि व्यक्ति वास्तव में भारतीय नागरिक है या नहीं।। यह फैसला अगली चुनाव प्रक्रिया (लोकसभा, विधानसभा या स्थानीय निकाय चुनाव) से पहले करने की कोशिश की जाएगी।जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें भी ऑथरिटी की ओर से नोटिस दिया जाएगा उन्हें अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा। अगर कोई अथॉरिटी केस नतीजे पर पहुँचती है कि वह व्यक्ति भारतीय नागरिक है, तो उसका नाम फिर से वोटर लिस्ट में जोड़ दिया जाएगा। 9 अगर बिहार में रहने वाले किसी व्यक्ति का नाम गलती से काटा गया है ।तो वह व्यक्ति चुनाव आयोग के फैसले को अदालत में चुनौती दे सकता है। चुनाव आयोग ने जिन लोगों के नाम 2003 की वोटर लिस्ट में होने के बावजूद उन्हें भारतीय नागरिक नहीं मानते हुए हटाए है, उनके मामलों को आयोग को 4 हफ्तों में नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत बनी सक्षम ऑथिरिटी को भेजेगा।ऑथरिटी कानून के अनुसार यह तय करेगी कि व्यक्ति वास्तव में भारतीय नागरिक है या नहीं।। यह फैसला अगली चुनाव प्रक्रिया (लोकसभा, विधानसभा या स्थानीय निकाय चुनाव) से पहले करने की कोशिश की जाएगीजिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, उन्हें भी ऑथरिटी की ओर से नोटिस दिया जाएगा उन्हें अपनी बात रखने का मौका दिया जाएगा। अगर कोई अथॉरिटी केस नतीजे पर पहुँचती है कि वह व्यक्ति भारतीय नागरिक है, तो उसका नाम फिर से वोटर लिस्ट में जोड़ दिया जाएगा। * *अगर बिहार में रहने वाले किसी व्यक्ति का नाम गलती से काटा गया है ।तो वह व्यक्ति चुनाव आयोग के फैसले को अदालत में चुनौती दे सकता है।
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SIR फैसले से चुनाव आयोग को राहत, गहलोत-मेघवाल के तेवर चर्चा में

Jaipur, Rajasthan:सुप्रीम कोर्ट ने स्पेशल इंटेंसिव रीविजन (SIR) प्रक्रिया को वैध ठहराते हुए चुनाव आयोग को बड़ी राहत दी है। अदालत ने कहा कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची की विशेष समीक्षा करने का पूरा अधिकार है। SIR पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सियासत शुरू हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने SIR के सवाल पर कहा कि देश को बर्बाद कर रहे हैं ये लोग... डेमोक्रेसी को खत्म कर रहे हैं। बंगाल की तरह देशभर में चुनाव होने लग गए तो डेमोक्रेसी बर्बाद होगी। बंगाल में IPS ने लोगों को धमकाया। युवा पीढ़ी नहीं चेतेगी तो भुगतेगी। 27 लाख वोट बंगाल में कटे। वोट का अधिकार छीना जा रहा है... मैंने कहा था चुनाव पोस्टमैन होने चाहिए थे। 27 लाख का जब तक फैसला नहीं होता, तब तक चुनाव नहीं होना चाहिए था। चुनाव आयोग बीजेपी और NDA का डिपार्टमेंट बन गया है। आज ज्यूडिशरी दबाव में है। क्या हो रहा है देश में... पूरा देश चुप है। जो हो रहा है धर्म के नाम पर हो रहा है। समय आ गया है, नौजवानों को समझना चाहिए। वहीं SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल का भी बयान सामने आया। मेघवाल ने कहा कि SIR का जब मुद्दा आया था तो विपक्ष ने चर्चा की डिमांड की थी। जब चर्चा हुई तो हमने कहा कि ये इलेक्शन कमीशन का काम है। वोटर लिस्ट से नाम हटाना और जोड़ना SIR की प्रक्रिया है। सुप्रीम कोर्ट ने भी आज इस संबंध में फैसला सुनाया है। मेघवाल ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि पांच राज्यों के चुनाव में चुनाव आयोग ने अपनी निष्पक्षता सिद्ध की। ये लोग केरल में कैसे जीत गए। संवैधानिक संस्थाओं पर राहुल गांधी अनाप-शनाप बयान दे रहे हैं। राहुल गांधी को संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करना चाहिए और भाषा पर संयम रखना चाहिए।
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