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Umang WaliaUmang WaliaFollow19 Jul 2024, 12:30 pm

22 जुलाई को नूंह में होने वाली जलाभिषेक यात्रा को लेकर पलवल एसपी ने की पीस कमेटी के साथ बैठक

Palwal, Haryana:

22 जुलाई को नूंह के नल्हड नलेश्वर मंदिर से निकलने वाली जलाभिषेक यात्रा को लेकर पलवल पुलिस पूरी तरह से अलर्ट है। जिला पुलिस कार्यालय में एसपी चंद्रमोहन ने पीस कमेटी और प्रबुद्ध जनों के साथ बैठक की और यात्रा को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराने की अपील की। एसपी चंद्रमोहन ने दोनों पक्षों से शांति और भाईचारे को बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान पुलिस प्रशासन पूरी तरह से सतर्क रहेगा और किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न करने वाले के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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आगर मालवा में सावन के पहले दिन भारी बारिश, जलभराव से यातायात भारी प्रभावित

Agar, Madhya Pradesh: सावन शुरू होते ही पहले ही दिन लंबे इंतजार के बाद आगर मालवा जिले में हवा के साथ झमाझम बारिश हुई। बारिश ने लोगों को उमस और गर्मी से राहत तो दी, लेकिन शहर की सड़कों पर कई जगह जलभराव ने नगर की व्यवस्थाओं की पोल भी खोल दी। आगर शहर के बड़ौद रोड चौराहा, कम्पनी गार्डन के समीप सहित कई स्थानों पर सड़कें पानी से भरी नजर आईं, जिससे वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ा。 वीओ- तेज बारिश के चलते शहर के बड़ौद रोड चौराहा, कम्पनी गार्डन के पास और अन्य प्रमुख मार्गों पर जलभराव होने से यातायात प्रभावित रहा। दोपहिया वाहन चालक पानी के बीच से सावधानीपूर्वक निकलते दिखाई दिए, जबकि कई चारपहिया वाहन भी धीमी गति से चलते नजर आए।
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दतिया उपचुनाव में 71.44% मतदान, स्ट्रॉन्ग रूम में सभी ईवीएम सुरक्षित

Datia, Madhya Pradesh:दतिया विधानसभा उपचुनाव: 71.44 प्रतिशत मतदान, सभी ईवीएम स्ट्रॉंग रूम में सुरक्षित जमा मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में गुरुवार को 71.44 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। मतदान पूरे जिले में शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ और कहीं से भी किसी अप्रिय घटना की सूचना प्राप्त नहीं हुई। मतदान समाप्त होने के बाद सभी मतदान दलों ने अपनी-अपनी ईवीएम और वीवीपैट मशीनें शासकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज, दतिया स्थित स्ट्रॉंग रूम में कड़ी सुरक्षा के बीच सुरक्षित जमा करा दी हैं। दतिया कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी स्वप्निल वानखेड़े ने बताया कि मतदान प्रक्रिया पूरी तरह शांतिपूर्ण रही। जिन मतदान केंद्रों पर ईवीएम में तकनीकी खराबी आई थी, वहां तत्काल मशीनें बदलकर मतदान सुचारु रूप से कराया गया। सभी ईवीएम अब स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रखी गई हैं। उन्होंने बताया कि 3 अगस्त को मतगणना होगी, जिसके लिए जिला प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा और आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की हैं。
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मैनपुरी-करहल सराहनीय पहल,जैन कॉलेज के सामने जानलेवा गड्ढा भरवाया,राहगीरों ने ली राहत की सांस।

Ajay KumarAjay KumarFollow33m ago
Kanakpur, Uttar Pradesh:करहल/मैनपुरी करहल में प्रशासन की एक सराहनीय पहल स्थानीय लोगों की शिकायत और Pinewz/Zee Media में खबर चलने के बाद PWD और प्रशासन हरकत में आया और गड्ढे को गिट्टी और डामर डालकर भरवा दिया गया। जैन इंटर कॉलेज तिराहा करहल का व्यस्ततम चौराहा है,यहां सड़क के बीच गहरा गड्ढा होने से आए दिन बाइक सवार गिरकर घायल हो रहे थे, स्कूली बच्चों और राहगीरों की सुरक्षा को लेकर खतरा बना हुआ था। गड्ढा भरने के बाद राहगीरों और अभिभावकों ने प्रशासन की इस पहल की सराहना की है,लोगों का कहना है कि समय पर कार्रवाई से एक बड़े हादसे को टाल दिया गया। सराहनीय पहल जैन कॉलेज के सामने गड्ढा भरवाया,राहगीरों ने प्रशासन की त्वरित कार्रवाई की सराहना की ।
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जोधपुर हाईकोर्ट ने निवेशकों के हित के लिए समिति गठित करने का आदेश दिया

Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर। आदर्श क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड के कथित हजारों करोड़ रुपए के घोटाले में राजस्थान हाईकोर्ट ने निवेशकों को राहत दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। जस्टिस समीर जैन की बेंच ने मामले की जटिलता और करीब 20 लाख निवेशकों की जमा पूंजी से जुड़े सार्वजनिक हित को देखते हुए भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस (रिटायर्ड) संजीव खन्ना की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने का आदेश दिया है। समिति का मुख्य उद्देश्य परिसमापन प्रक्रिया की निगरानी करना और निवेशकों को उनकी राशि जल्द से जल्द वापस दिलाने की दिशा में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना होगा। कोर्ट के समक्ष निवेशकों की ओर से बताया गया कि सोसायटी और उसके प्रबंधन पर शेल कंपनियों के जरिए जनता की जमा राशि को कथित रूप से इधर-उधर करने के आरोप हैं। निवेशकों के अनुसार मूलधन करीब 10 हजार करोड़ रुपए और ब्याज सहित कुल दावा करीब 25 हजार करोड़ रुपए का है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मामला बड़े पैमाने पर व्यवस्थित व्हाइट कॉलर अपराध से जुड़ा बताया गया है, जिसमें ऊंची ब्याज दरों का लालच देकर निवेश जुटाने, बिचौलियों को भारी कमीशन देने और धन को शेल कंपनियों के माध्यम से रियल एस्टेट में लगाने के आरोप सामने आए हैं। सुनवाई के दौरान ऑफिशियल लिक्विडेटर एचएस पटेल ने बेंच को बताया कि वर्ष 2018 में घोटाला सामने आने के बाद से निवेशकों को अब तक कोई रिटर्न नहीं मिला है। उन्होंने यह भी बताया कि सीमित स्टाफ और संसाधनों के कारण परिसमापन प्रक्रिया को आगे बढ़ाना मुश्किल हो रहा है। विभिन्न एजेंसियों की कार्रवाई और अलग-अलग कोर्ट के स्टे के कारण कुर्क संपत्तियों की बिक्री और नीलामी की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई है। कोर्ट के समक्ष यह भी बताया गया कि करीब 2000 करोड़ रुपए की संपत्तियों पर प्रोविजनल अटैचमेंट है, जबकि उनका अनुमानित बाजार मूल्य करीब 5000 करोड़ रुपए बताया गया है। हाईकोर्ट ने कहा कि निवेशकों में बड़ी संख्या गरीब लोगों, पेंशनर्स और ऐसे लोगों की है जिन्होंने अपनी जीवनभर की बचत और सेवानिवृत्ति की राशि निवेश की थी। कई निवेशक चिकित्सा, विवाह और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए धन की तत्काल आवश्यकता में हैं। कोर्ट ने इस मामले की व्यापकता को देखते हुए नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी जोधपुर और गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी गांधीनगर से भी समिति को अकादमिक और शोध सहयोग देने को कहा है। दोनों विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने इस प्रस्ताव पर सहमति जताई है। आदेश के अनुसार ऑफिशियल लिक्विडेटर को 5 अगस्त 2026 को सुबह 11 बजे समिति के अध्यक्ष के समक्ष उपस्थित होकर प्रारंभिक जानकारी उपलब्ध करानी होगी। समिति अपने काम के लिए विशेषज्ञों, चार्टर्ड अकाउंटेंट और अधिवक्ताओं की सेवाएं लेने का प्रस्ताव हाईकोर्ट के समक्ष दो सप्ताह में रख सकेगी। प्रवर्तन निदेशालय, पुलिस और एसआईटी सहित संबंधित एजेंसियों से भी आवश्यक सहयोग लिया जा सकेगा। केंद्र सरकार को समिति के लिए कार्यालय, लॉजिस्टिक और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में याचिकाकर्ताओं, पूर्व प्रबंधन और शेल कंपनियों के पक्ष में दिए गए सभी अंतरिम आदेश अब समाप्त माने जाएंगे। समिति की पहली बैठक 5 अगस्त को होगी। समिति के अध्यक्ष को शुरुआती बैठक के लिए पांच लाख रुपए फीस और अन्य खर्च के तौर पर ऑफिशियल लिक्विडेटर द्वारा भुगतान किया जाएगा। हाईकोर्ट ने मामले को आगे आवेदन पेश होने पर सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है, अन्यथा अगली सुनवाई 24 अगस्त 2026 को होगी.
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उदयपुर की पहाड़ियों, झीलों के खिलाफ तेज निर्माण पर राजस्थान हाईकोर्ट की गम्भीर टिप्पणी

Jodhpur, Rajasthan:जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने उदयपुर की पहाड़ियों, झीलों, वन्यजीव अभयारण्यों और संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र में तेजी से हो रहे निर्माण पर गंभीर चिंता जताई है। होटल निर्माण से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस समीर जैन ने कोर्ट कमिश्नर की निरीक्षण रिपोर्ट और एरियल फोटोग्राफी का अवलोकन करते हुए कहा कि उदयपुर की पहाड़ियों को बेरहमी से काटकर उन पर निर्माण किए जा रहे हैं और ऐसा लगता है कि पहाड़ियों की जगह होटल ले रहे हैं। कोर्ट ने इस पूरे मामले को शहर के पारिस्थितिक अस्तित्व से जुड़ा गंभीर विषय माना है। मामला बंसत होटल्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। कोर्ट के निर्देश पर कोर्ट कमिश्नर अधिवक्ता कामिनी जोशी और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी राजेंद्र भणावत ने मौके का निरीक्षण कर अंतरिम रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में याचिकाकर्ता की संपत्ति के साथ आसपास के क्षेत्र की एरियल तस्वीरें भी शामिल हैं। सुनवाई के दौरान कमिश्नर ने बताया कि संबंधित पहाड़ियों पर कई होटल बन चुके हैं और संचालित हो रहे हैं। याचिकाकर्ता की संपत्ति की खास बात केवल यह है कि वह अपेक्षाकृत अधिक ढलान पर स्थित है। हाईकोर्ट ने कहा कि निरीक्षण रिपोर्ट से सामने आया है कि पहाड़ियों और पर्वतों को काटकर बड़े पैमाने पर निर्माण किया गया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि 2018 की हिल पॉलिसी और हिल बायलॉज तैयार करने में निजी बाहरी एजेंसियों की भूमिका रही, लेकिन जलवायु, वन्यजीव, प्रदूषण और पर्यावरण से जुड़े संबंधित वैधानिक विभागों और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से उचित सलाह या परामर्श नहीं लिया गया। कोर्ट ने उदयपुर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों की जानकारी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि निरीक्षण के दौरान यह सामने आया कि अधिकारियों को पहाड़ी निर्माण से संबंधित नीति और मौजूदा कानूनों की पर्याप्त जानकारी नहीं थी। हाईकोर्ट ने कहा कि झीलों, पहाड़ियों और वन्यजीव अभयारण्यों के लिए प्रसिद्ध उदयपुर में सतत विकास के नाम पर होटल, रिसॉर्ट और व्यावसायिक निर्माण तेजी से बढ़े हैं। कोर्ट ने सार्वजनिक न्यास सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण जीवन का अधिकार है और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा राज्य की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने संकेत दिया कि अगली सुनवाई में इस मामले को व्यापक जनहित के दृष्टिकोण से देखते हुए स्वत: संज्ञान लेकर जनहित याचिका दर्ज करने पर भी विचार किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने और आसपास स्वीकृत सभी निर्माण एवं व्यावसायिक अनुमतियों का पूरा रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही 2018 और 2024 की हिल पॉलिसी के लेखकों के नाम, इनके निर्माण से जुड़े मूल दस्तावेज, नीतियों के औचित्य और निजी एजेंसी की रिपोर्ट भी पेश करने को कहा है.
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