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ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे पर डंपर से बजरी-पत्थर गिरने से ट्रैफिक बाधित

Greater Noida, Uttar Pradesh:ग्रेटर नोएडा के दादरी थाना क्षेत्र के चकसेनपुर के पास ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे पर एक चलते डंपर से अचानक बजरी और पत्थर गिर गए। इससे हाईवे पर काफी दूर तक लाल रंग के पत्थर फैल गए, जिससे वाहनों की गति धीमी हो गई और दुर्घटना का खतरा बढ़ गया।बताया जा रहा है कि सुबह के समय कुछ डंपर पेरीफेरल हाईवे से गुजर रहे थे। इसी दौरान एक डंपर का जैक अचानक ऊपर उठ गया, जिससे बजरी और पत्थर सड़क पर बिखर गए।सूचना मिलते ही दादरी थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे। उन्होंने देखा कि पत्थरों के कारण किसी वाहन के फिसलने से हादसा हो सकता है।पुलिसकर्मियों ने जेसीबी की मदद से और फावड़े तथा हाथों से बजरी को इकट्ठा करना शुरू कर दिया। इस कार्रवाई का एक वीडियो भी सामने आया है।एहतियात के तौर पर थाना प्रभारी ने मौके पर पंचर लगाने वाली गाड़ी को भी बुला लिया। इसका उद्देश्य था कि यदि बजरी पर चढ़ने से किसी गाड़ी का टायर पंचर होता है, तो उसे तुरंत ठीक करके आगे रवाना किया जा सके।दादरी थाना प्रभारी ने बताया कि उन्हें सुबह ईस्टर्न पेरीफेरल हाईवे पर चकसेनपुर के पास डंपर से लाल बजरी और पत्थर फैलने की सूचना मिली थी। उन्होंने तुरंत अपनी पुलिस फोर्स के साथ पहुंचकर कोई हादसा न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए बजरी को तत्काल हटाने का आदेश दिया।जेसीबी और पुलिसकर्मियों की मदद से बजरी को तीव्र गति से हटाया गया, ताकि यातायात बाधित न हो और जाम की स्थिति उत्पन्न न हो।
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पंचायती राज मंत्रालयिक कर्मचारियों ने 8 सूत्री मांगों के समर्थन में आंदोलन शुरू किया

Dungarpur, Rajasthan:पंचायती राज मंत्रालयिक कर्मचारियो का 8 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन, ब्लॉक स्तर पर किया गया सद्बुद्धि यज्ञ पंचायती राज के मंत्रालयिक कर्मचारी एक जून से अपनी 8 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे है। इधर आंदोलन के तहत आज डूंगरपुर पंचायत समिति सहित सभी पंचायत समितियों के बाद कर्मचारियों की ओर से सरकार के लिए सद्बुद्धि यज्ञ किया गया। उन्होंने राज्य सरकार और संबंधित विभाग से मंत्रालयिक संवर्ग के हितों की रक्षा करने और उनकी लंबे समय से चली आ रही जायज मांगों को जल्द से जल्द पूरा करने की पुरजोर वकालत की है। उन्होंने सरकार से ग्राम पंचायतों में कार्यरत कनिष्ठ/वरिष्ठ सहायकों का जॉब-चार्ट ग्राम विकास अधिकारी के समान अधिकारों सहित जारी किया जाए। साथ ही, वित्तीय पारदर्शिता के लिए सिंगल ओटीपी की व्यवस्था समाप्त कर ''मेकर, चेकर और अप्रूवर'' की व्यवस्था लागू करने, पंचायत स्तरीय कर्मचारियों के लिए उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश राज्य की तर्ज पर संपूर्ण व्यवस्था लागू की जाए, जिससे पदनाम और मंत्रालयिक संवर्ग के पदों पर निर्णय लेकर उत्तराखंड पैटर्न को अपनाने, वित्त विभाग के नवीनतम निर्देशों के अनुसार पंचायती राज संस्थाओं में मंत्रालयिक संवर्ग का कैडर पुनर्गठन कर कैडर के 56.01 प्रतिशत पदों पर पदोन्नति (प्रमोशन) की व्यवस्था करने, अंतरजिला स्थानांतरण की व्यवस्था करने सहित अन्य मांगो को जल्द पूरा करने की मांग की है।
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कुएँ में महिला शव: लूट के लिए हत्या, 8 दिन बाद पहचान

Dudu, Rajasthan:चाकसू (जयपुर) कुएँ में महिला का शव मिलने का मामला, पुलिस और सिविल डिफेंस ने शव को कुएं से निकाला बाहर, बीना देवी बैरवा निवासी बल्लूपुरा के रूप में मृतका की पहचान। महिला 8 दिन से थी लापता, शिवदासपुरा थाने में दर्ज है गुमशुदगी। पुलिस और FSL टीम ने जुटाए साक्ष्य, महिला के पैर भी कटे हुए है, पैरों से चांदी के कड़े गायब, प्रारम्भिक जाँच में चांदी के कड़ों की लूट के लिए महिला की हत्या करना आया सामने। शव के पत्थर बांधकर कुएं में डाला गया, शिवदासपुरा एसएचओ राजेंद्र मीणा ने दी जानकारी। शिवदासपुरा थाना इलाका हनुमानपुरा पावरग्रिड के पीछे ढूढ़ नदी क्षेत्र के कुएं में मिला था शव। ग्रामीणों की सूचना पर पहुंची थी शिवदासपुरा पुलिस मौके पर। बीना देवी के पुत्र ने बताया कि उसकी माँ कड़ों सहित अन्य गहने भी पहने हुई थी।
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लखनऊ के चौक सराफा बाजार में ताजिया-आलम बनावट की धूम, कीमतें 1000 से लाखों

Lucknow, Uttar Pradesh:लखनऊ में चांदी की ताजिया का बाजार यूपी की राजधानी लखनऊ अपनी तहज़ीब अदब और पारंपरिक बाज़ारों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है लेकिन पुराने लखनऊ का चौक सराफा बाजार इन दिनों एक अनोखी वजह से चर्चा में है यहां सोने और चांदी से सिर्फ गहने ही नहीं, बल्कि मोहर्रम के लिए ताजिया और आलम भी तैयार किए जाते हैं खास बात ये है कि इनकी कीमत 1000 रुपये से लेकर लाखों रुपये तक होती है मोहर्रम का महीना शुरू होते ही पुराने लखनऊ के चौक सराफा बाजार की रौनक बढ़ जाती है यहाँ कारीगर चांदी और सोने से बेहद खूबसूरत ताजिया और आलम तैयार करते हैं, जो अपनी बारीक नक्काशी और बेहतरीन कारीगरी के लिए जाने जाते हैं बाज़ार में मिलने वाले चांदी के ताजिया लोगों के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं इनकी कीमत 1000 रुपये से शुरू होकर लाखों रुपये तक पहुंचती है ताजिया बेचने वाली दुकानदार विनोद महेश्वरी के मुताबिक, इन खास ताजियों और आलम को बनाने के लिए ग्राहकों से एक साल पहले ही ऑर्डर ले लिए जाते हैं ओर हर इंसान की अपनी एक मन्नत होती है उसी के हिसाब से लोग चांदी और सोने की ताजिया बनवाते हैं कागज की ताजिया को दफनाया जाता है, लेकिन चांदी और सोने की ताजिया को लोग अपने घरों और इमामबाड़ों में रखते उन्होंने बताया कि चांदी की ताजिया बनाना कोई आसान काम नहीं है सबसे पहले चांदी को गलाकर उसे पतली चादरों में ढाला जाता है इसके बाद महीन कारीगरी के जरिए ताजिया और आलम को अंतिम रूप दिया जाता है एक ताजिया को तैयार करने में करीब 20 कारीगरों की मेहनत लगती है यही वजह है कि इसकी कीमत उसकी डिजाइन और कारीगरी के हिसाब से तय होती है पुराने लखनऊ की यह अनोखी परंपरा न सिर्फ शहर की गंगा-जमुनी तहज़ीब को दर्शाती है, बल्कि यहां के हुनरमंद कारीगरों की कला को भी नई पहचान दे रही TT..विनोद माहेश्वरी, दुकानदार आपको बता दे कि लखनऊ का चौक सराफा बाजार सिर्फ कारोबार का केंद्र नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपराओं और बेमिसाल कारीगरी की जीवंत मिसाल भी है मोहर्रम के मौके पर यहां तैयार होने वाले सोने और चांदी के ताजिया और आलम शहर की सांस्कृतिक विरासत को खास पहचान देते हैं
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कुलगाम में भारी ओलों से सेब उद्योग हार, किसान कर्ज माफी की मांग

Kulgam, کولگام ۔۔۔ کل ایک بار پھر سب ڈویژن نورآباد کے بنگواڈ درد پارین کے ساتھ ساتھ متعدد علاقوں میں ژالہ باری ہوئی جس کی وجہ سے یہاں کے سیب صنعت کو شدید نقصان ہوا کل اس طرح شدید ژالہ باری ہوئی کہ لوگوں میں خوف پیدا ہوا کشمر میں سب سے بڑی صنعت سیب صنعت جو پچھلے کہی سال سے متاثر ہورہی ہے اور یہاں کے کسان قرضوں میں دب چکے ہیں کیونکہ کہ جب مسلسل اس صنعت کو موسم کی مار سے شدید نقصان ہوتا ہے تو ظاہر سی بات ہے یہاں کے گروور کو قرضہ لینا پڑتا ہے ہر سال لاکھوں روپے کا خرچہ ان سیب کے باغات پر خرچ کرنا پڑتا مگر موسیقی قہر کے سامنے سب بے بس ہیں بنگواڈ کے لوگوں سرکار سے اپیل کرتے ہیں کہ جو کے سی سی قرضہ لوگوں نے بنکوں سے لیا ہے وہ معاف کیا جائے اور اس صنعت کو زندہ رکھنے کے لئے اینٹی ہیل نیٹ کا انتظام کیا جائے تاکہ آنے والے وقت میں ہمیں ایسی حالت دیکھنا نا پڑے
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अमरनाथ यात्रा के तुरंत बाद जम्मू-कश्मीर में पंचायत-निकाय चुनाव का ऐलान संभव?

Srinagar, Uttarakhand:जम्मू कश्मीर में अमरनाथ यात्रा के बाद हो सकता है पंचायत-निकाय चुनाव का ऐलान l जम्मू कश्मीर में निकट भविष्य में संभावित पंचायत चुनाव के दाैरान मतपत्र द्विभाषीय हो सकते हैं। प्रदेश चुनाव आयोग(SEC) मतपत्रों के के द्विभाषीय प्रकाशन पर गंभीरता से विचार कर रहा है। इस बीच,एसईसी जल्द ही प्रदेश के चुनाव अधिकारियों का एक दल हिमाचल प्रदेश और पंजाब में पंचायत एवं नगर निकायों की प्रक्रिया और व्यवस्था के अध्ययन के लिए भेजेगा। jammu-and-kashmir पंचायत एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल शर्मा का कहना हैं कि वह कई समय से घाटी में पंचायती चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं उन्होंने कहा पंचायती लावेल पर दूर दराज इलाकों में पंच सरपंच ना होने से निवासियों को कयी तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा हैं l उन्होंने केन्द्र सर्कार को अनुरोध किया कि जम्मू कश्मीर में तुरंत पंचायती चुनाव कराए जाए l सामाजिक कार्यकर्ता अश्वनी हांडा ने भी पंचायती चुनाव ना होने पर चिंता जतायी "जम्मू-कश्मीर में पंचायत और लोकल बॉडी इलेक्शन के बारे में बहुत बातें हो रही हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल इलेक्शन के बारे में नहीं है—यह पावर के बारे में है। क्या लोगों के चुने हुए रिप्रेजेंटेटिव को डेवलपमेंट संभालने, फंड मैनेज करने और फैसले लेने का अधिकार मिलेगा, या सारी पावर पहले की तरह ब्यूरोक्रेट्स के हाथों में ही रहेगी? अश्वनी हांडा ने कहा l उल्लेखनीय है कि जम्मू कश्मीर में पंचायत और नगर निकायों के चुनाव एक लंबे समय से लंबित पड़े हुए है। नगर निकायों के चुनाव नवंबर 2023 से लंबित पड़े हैं जबकि पंचायतों और ब्लाक विकास परिषदों का कार्यकाल जनवरी 2024 में पूरा हो गया था। जिला विकास परिषदों का कार्यकाल इसी वर्ष फरवरी में संपन्न हुआ है। प्रदेश चुनाव आयोग ने पंचायतों और नगर निकायों के चुनाव कराने की दिशा में कदम बढा़ते हुए गत माह मतदाता सूचियों को प्रकाशन करने के अलावा चुनावों की मैनुअल बुक व अन्य विषयों को भी अंतिम रूप देना शुरु कर दिया है। मौजूदा समय में जम्‍मू कश्मीर में पंचायत मतदाताओं की संख्या 72.24 लाख है। हालांकि पंचायत और नगर निकाय चुनावों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हैं,लेकिन उम्मीद की जा रही है कि श्री अमरनाथ जी की गुफा की वार्षिक तीर्थयात्रा-2026 के संपन्न् होने के बाद सितंबर में या फिर उसके बाद किसी भी समय इन चुनावों का एलान किया जा सकता है। फारूक वानी श्रीनगर
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श्रीनगर में हरभजन सिंह सागर की याद में पंजाबी साहित्य कार्यक्रम का आयोजन

Srinagar, Uttarakhand:श्रीनगर, 18 जून: मशहूर पंजाबी कवि और लेखक हरभजन सिंह सागर की याद में श्रीनगर में एक पंजाबी लिटरेरी प्रोग्राम ऑर्गनाइज़ किया गया। यह इवेंट साहित्य अकादमी दिल्ली और कल्चरल अकादमी श्रीनगर ने मिलकर ऑर्गनाइज़ किया था। इस प्रोग्राम में समाज के अलग-अलग हिस्सों के लेखकों, कवियों और लिटरेरी के शौकीनों ने हिस्सा लिया, जिसमें जाने-माने सिख लेखक और कवि भी शामिल थे, जिन्होंने पंजाबी लिटरेचर और समाज में उनके शानदार योगदान के लिए दिवंगत लिटरेचर को श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर बोलते हुए, उपेंद्र सिंह पारस ने हरभजन सिंह सागर की ज़िंदगी और कामयाबियों के बारे में बताया और कहा कि वह असल में कश्मीर के रहने वाले थे। उन्होंने कहा कि लिटरेचर और समाज के लिए सागर का योगदान अनोखा था और उनकी लिखाई आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी। स्पीकर्स ने हरभजन सिंह सागर को एक मशहूर लिटरेरी हस्ती बताया जिनकी रचनाओं में सामाजिक मूल्य, कल्चरल मेलजोल और इंसानी भावनाएं झलकती थीं। उन्होंने कहा कि उनकी विरासत उनकी लिटरेरी रचनाओं और आने वाली पीढ़ियों को दी गई प्रेरणा के ज़रिए ज़िंदा रहेगी।
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मुहर्रम पर कश्मीर के इमाम बारगाहों में धार्मिक कार्यक्रमों की धूम

Srinagar, Uttarakhand:श्रीनगर, 18 जून: मुहर्रम के पवित्र महीने की शुरुआत के साथ, कश्मीर में अलग-अलग इमाम बारगाहों और धार्मिक केंद्रों पर कई धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस सिलसिले में, श्रीनगर के टैगोर हॉल में एक हुसैनी मुशायरा आयोजित किया गया, जिसमें जाने-माने शिया कवियों, लेखकों और धार्मिक विद्वानों ने हिस्सा लिया। वक्ताओं ने हज़रत इमाम हुसैन (AS) की शहादत और शिक्षाओं पर रोशनी डाली और कहा कि यह मुशायरा हज़रत अली (AS) और हज़रत इमाम हुसैन (AS) की यादों को समर्पित है। उन्होंने इमाम हुसैन के जीवन, बलिदान और मूल्यों पर रोशनी डाली, और सच्चाई, न्याय और मानवता के लिए उनके रुख को पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बताया। भाग लेने वालों ने कहा कि मुहर्रम के दिन इमाम हुसैन (AS) और उनके साथियों द्वारा कर्बला में दी गई कुर्बानियों को याद करने के लिए मनाए जाते हैं, और कहा कि हिम्मत, सब्र और नेकी का उनका संदेश पूरी मुस्लिम उम्मा को रास्ता दिखाता है। यह इवेंट कर्बला के शहीदों की कुर्बानी को श्रद्धांजलि देते हुए शोकगीत और कविताएं पढ़कर खत्म हुआ।
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गंभीर नदी बचाने के लिए पांचना बांध से पानी छोड़ने की महापंचायत, प्रशासन अलर्ट

Karauli, Rajasthan:पांचना बांध से गंभीर नदी में पानी छोड़ने की मांग को लेकर आज महापंचायत देवलेन मोड़ पर सर्वसमाज की महापंचायत का आयोजन हो रहा है। गंभीर नदी बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित इस महापंचायत में स्थानीय किसान, ग्रामीण और विभिन्न संगठन शामिल हो रहे हैं। हिंडौन के महवा मार्ग स्थित देवलेन मोड़ पर हो रही इस महापंचायत को लेकर प्रशासन और पुलिस भी अलर्ट मोड पर है। महापंचायत स्थल पर सुबह से ही लोगों की भीड़ जुटने लगी है। स्थानीय नेता मौके पर पहुंचकर लोगों को संबोधित कर रहे हैं। महापंचायत कुछ देर में औपचारिक रूप से शुरू होने वाली है। गंभीर नदी बचाओ संघर्ष समिति ने विभिन्न गांवों में पीले चावल बांटकर लोगों को महापंचायत के लिए आमंत्रित किया था। समिति का कहना है कि गंभीर नदी सूखी पड़ी है, जिससे आसपास के गांवों में सिंचाई, पशुपालन और पीने के पानी को लेकर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। लंबे समय से चले आ रहे इस विवाद को लेकर अब ग्रामीणों ने महापंचायत के माध्यम से प्रशासन पर दबाव बनाने का फैसला किया है। महापंचायत में गुर्जर नेता विजय बैसला भी शामिल होने वाले हैं। प्रशासन ने शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात कर दिए हैं। दूसरी ओर हाई कोर्ट के निर्देश के बाद कमांड एरिया के किसान भी पांचना बांध से नहरों में पानी छोड़ने की मांग कर रहे हैं। वहीं कमांड एरिया की नहरों में पानी छोड़ने के विरोध पांचना के आसपास के किसान बांध पर पानी की पहरेदारी कर रहे हैं।
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भूपौली पम्प कैनाल की नहर सूखीं,धान की नर्सरी डालने को लेकर किसान परेशान

Manoj KumarManoj KumarFollow12m ago
Bbrasi, Uttar Pradesh:भूपौली पम्प कैनाल में पानी न आने से किसान परेशान, नहीं पड़ पा रही धान की नर्सरी चहनियाँ । स्थानीय क्षेत्र की मुख्य भूपौली पम्प कैनाल में समय से पानी न छोड़े जाने के कारण इससे जुड़े सैकड़ो गांवों के किसान परेशान है । धान की खेती के लिए यह समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन नहर में पानी नहीं आने से किसान धान की नर्सरी तैयार नहीं कर पा रहे हैं। कुछ किसानों ने निजी साधनों से पानी की व्यवस्था कर किसी तरह नर्सरी डाल दी है, लेकिन खेतों की सिंचाई को लेकर उनकी चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। भूपौली पम्प कैनाल से जुड़ी सहायक नहरों में भी पानी नहीं पहुंचने से क्षेत्र के किसानों में रोष व्याप्त है। यह नहर भुपौली होते हुए मथेला से होकर कमालपुर तक चला गया है । बीच मे प्रभुपुर से होकर रामगढ़ सहित कई गांवो में गया है । किसानों का कहना है कि हर वर्ष धान की रोपाई के समय पानी की आवश्यकता होती है, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण नहरें सूखी पड़ी हैं। इससे खेती की लागत बढ़ रही है और समय पर रोपाई प्रभावित होने की आशंका है। वहीं, नहरों और तालाबों में पानी न होने का असर वन्य जीवों और पक्षियों पर भी पड़ रहा है। मथेला-लोलपुर निवासी दिनेश तिवारी का कहना है कि यदि नहर में समय से पानी छोड़ा जाता तो गांवों के तालाब और सरोवर सूखते नहीं तथा पशु-पक्षियों को भी राहत मिलती। किसान जुलुम तिवारी ने कहा कि किसानों के हित को देखते हुए विभाग को समय रहते नहरों का रखरखाव पूरा कर पानी छोड़ना चाहिए, जिससे किसानों के साथ-साथ वन्य जीवों को भी राहत मिल सके। इस समस्या को लेकर भूपौली नहर से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों एवं जेई से कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। क्षेत्रीय किसानों ने मांग की है कि नहरों की मरम्मत कर जल्द से जल्द पूरी क्षमता के साथ टेल तक पानी पहुंचाया जाय ।किसान नेता श्रवण कुशवाहा ने कहा कि जब किसानों को सबसे अधिक पानी की आवश्यकता होती है, उसी समय नहरों में पानी उपलब्ध नहीं हो पाता। किसानों ने देते हुए कहा कि किसानों की उपेक्षा लंबे समय तक नहीं चलेगी और आने वाले समय में किसान इसका जवाब देने का काम करेंगे। क्षेत्रीय किसानों ने शासन और सिंचाई विभाग से तत्काल हस्तक्षेप कर भूपौली पम्प कैनाल में पानी छोड़ने तथा नहर व्यवस्था को सुचारु करने की मांग की है, ताकि धान की खेती प्रभावित न हो और किसानों को राहत मिल सके।
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