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दिल्ली के जनकपुरी में दसवें दिन मनीष सिसोदिया ने निकाली पदयात्रा
Delhi, Delhi:दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की पदयात्रा आज देर शाम जनकपुरी पहुंची। सिसोदिया ने बुधवार को पदयात्रा के दौरान जनकपुरी में जनता से सीधा संवाद किया और उनकी समस्याओं को सुना। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने सिसोदिया को जमानत दी है और जेल से बाहर आने के बाद से वे राजनीति में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं।
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कोटा में KDA की अतिक्रमण हटाओ कार्रवाई एयरपोर्ट सर्किल से विज्ञान नगर पुलिया तक
Kota, Rajasthan:कोटा कोटा में अतिक्रमण के खिलाफ KDA ने बड़ी कार्रवाई शुरू की है। एयरपोर्ट के सामने एरोड्रम सर्किल से लेकर विज्ञान नगर पुलिया तक अतिक्रमण हटाया जा रहा है। KDA की टीम और पुलिस बल मौके पर मौजूद है। सड़क और फुटपाथ पर किए गए अवैध निर्माण और दुकानों को जेसीबी से हटाया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि यातायात को सुगम बनाने और शहर को सुंदर बनाने के लिए यह अभियान लगातार जारी रहेगा कोटा में KDA की बड़ी कार्रवाई। एयरपोर्ट के सामने एरोड्रम सर्किल से विज्ञान नगर पुलिया तक अतिक्रमण हटाया जा रहा। जेसीबी चलाकर अवैध निर्माण ध्वस्त, पुलिस बल तैनात。0
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सरयू नदी से मासूम का शव बरामद, कपकोट में दुखद अंत
Bageshwar, Uttarakhand:एंकर:बागेश्वर के कपकोट में सरयू नदी में बहे मासूम की तलाश आखिरकार दर्दनाक अंत पर पहुंची। चार दिन से चल रहे सर्च ऑपरेशन के बाद एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों ने शुक्रवार दोपहर उतरौड़ा के सामने सरयू नदी से बच्चे का शव बरामद कर लिया। शव मिलने की खबर से पूरे जिले में शोक की लहर दौड़ गई। सोमवार को कपकोट के शिवालय के पास सरयू नदी में बहा मासूम शुक्रवार को असूं डिग्री कॉलेज से करीब 500 मीटर दूर उतरौड़ा के सामने नदी में मिला। पुलिस प्रशासन के निर्देशन में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार गोताखोरों और ड्रोन की मदद से खोज अभियान चला रही थीं।तभी टीम को नदी में शव दिखाई दिया, जिसे बाहर निकाल लिया गया。0
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यूपी में AIMIM के शौकत अली का बड़ा बयान: दलित- मुस्लिम जुड़ाव पर चर्चा
Ayodhya, Uttar Pradesh:सीताराम दास महंत अयोध्या की बाइट शौकत अली पर Aimim के यूपी अध्यक्ष शौकत अली का बड़ा बयान। -- बोले मुसलमान सपा का बंधुआ मजदूर नहीं है, पहले बीजेपी और जनसंघ को रोकने का ऑप्शन नहीं था आज AIMIM से दलित और मुस्लिम जुड़ रहे। -- वंदे मातरम् बिल को लेकर भड़के शौकत अली....हम सम्मान करते हैं लेकिन आप किसी पर थोप नहीं सकते, आप मुझसे जबरजस्ती गवाएंगे क्या?... मैं आपसे कहूं भैंस का गोश खाए तो आप खाएंगे क्या, ये कौनसी बात है आप जबरजस्ती थोड़ी ना गवा देंगे मुझसे -- कावड़ और मस्जिदों पर.....शौकत अली का एलान......सरकार बनी तो यूपी में सड़क से अलग बनेंगे कावड़ मार्ग, सड़के किनारे मस्जिदे बनेंगी ताकि लोग सड़क न पढ़कर मस्जिदों में नमाज पढ़ें।0
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दिल्ली के वसंत कुंज में नाले में गिरी कार, युवक की मौत, जांच जारी
New Delhi, Delhi:दिल्ली वसंत कुंज नांगल देवत के नाले मे गिरी कार नाले मे डूबने युवक की मौत पुलिस जांच मे जुटी दिल्ली मे खुला नाला फिर बना बडे हादसे का सवाल दिल्ली के साउथ वेस्ट डिस्ट्रिक्ट के इलाके वसंत कुंज के नांगल देवत के नाले मे गिरी कार नाले मे डूबने युवक की मौत पुलिस जांच मे जुटी पुलिस द्वारा दी गईं जानकारी अनुसार 24.07.2026 को, वसंत कुंज साउथ थाने इलाके में एक जानलेवा सड़क एक्सीडेंट के बारे में एक PCR कॉल मिली। मौके पर पहुंचने पर पता चला कि यशवेंद्र (उम्र लगभग 20 साल) दिल्ली की अपनी एक महिला दोस्त के साथ कार चला रहा था। वे पिछली रात अपने दोस्त के घर रुके थे और सुबह उसके घर जा रहे थे। नांगल देवत रेड लाइट के पास, एक तेज़ मोड़ लेते समय, ड्राइवर ने कथित तौर पर फिसलन भरी सड़क की वजह से गाड़ी पर से कंट्रोल खो दिया। कार एक नाले में गिर गई और पलट गई। यशवेंद्र को चोटें आईं और बाद में उसकी मौत हो गई। कार को-पैसेंजर की थी लेकिन एक्सीडेंट के समय उसे यशवेंद्र चला रहा था मृतक यशवेंद्र और महिला को-पैसेंजर USA में एक ही इंस्टीट्यूशन में हायर एजुकेशन कर रहे स्टूडेंट हैं, जहाँ वे दोस्त बन गए। यशवेंद्र एक इंडियन आर्मी ऑफिसर का बेटे है। महिला को-पैसेंजर वसंत कुंज की रहने वाली है। उसके पिता ओखला में एक प्राइवेट फर्म में साइबर सिक्योरिटी सेक्टर में काम करते हैं, जबकि उसकी माँ होममेकर हैं। लड़की के बताए गये के बयान के अनुसार, एक्सीडेंट फिसलन भरी सड़क की वजह से हुआ। पुलिस आगे जांच मे जुटी आखिर गाड़ी गिरी कैसे0
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उज्जैन में सावन सोमवार के अवसर पर विद्यालय अवकाश पर चर्चा; प्रशासन निर्णय करेगा
Ujjain, Madhya Pradesh:हर वर्ष शहर के विद्यालयों में सोमवार को रहता है अवकाश, बदले में रविवार को लगती हैं कक्षाएं उज्जैन में सावन माह की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। 30 जुलाई से सावन की शुरुआत होगी, जबकि 3 अगस्त को भगवान महाकाल की पहली सवारी निकलेगी। इसी बीच सावन के सोमवार को शहर के समस्त विद्यालयों में अवकाश को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया कि सावन के सोमवार पर विद्यालयों के संबंध में विभिन्न स्तरों से मांगें प्राप्त हो रही हैं। शहर में महाकाल की सवारी और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण व्यापक ट्रैफिक व्यवस्था लागू रहती है। इसे देखते हुए विद्यालयों के संबंध में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है, लेकिन प्रशासन जल्द ही इस पर फैसला करेगा। उन्होंने बताया कि महाकाल की सवारी मार्ग की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं और अगले दो-तीन दिनों में शेष कार्य भी पूर्ण कर लिया जाएगा। वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सवारी मार्ग का निरीक्षण भी किया जा चुका है तथा आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्षों में सावन के प्रत्येक सोमवार को उज्जैन शहर के शासकीय विद्यालयों में अवकाश घोषित किया जाता रहा है, जबकि इसकी भरपाई के लिए रविवार को विद्यालय संचालित किए जाते हैं। ऐसे में इस वर्ष भी प्रशासन के निर्णय का इंतजार किया जा रहा है। बाइट -कलेक्टर रोशन कुमार सिंह0
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14 साल बाद भी गुलाब सागर सिंचाई परियोजना पानी नहीं पहुंचा, किसान मायूस
Sidhi, Madhya Pradesh:सबहेड: 2012-13 में शुरू हुई परियोजना का उद्देश्य 80 गांवों की 7,500 हेक्टेयर भूमि तक सिंचाई पहुंचाना था। सात बार समय-सीमा बढ़ने के बाद भी काम अधूरा, जांच की तैयारी。 सीधी: मध्य प्रदेश के सीधी जिले की बहुप्रतीक्षित गुलाब सागर सिंचाई परियोजना अब सवालों के घेरे में है। वर्ष 2012-13 में शुरू हुई इस परियोजना पर अब तक ₹486.67 करोड़ से अधिक खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन करीब 14 साल बाद भी बहरी क्षेत्र के लगभग 80 गांवों के किसान नहर के पानी का इंतजार कर रहे हैं। खेत आज भी बारिश के भरोसे हैं, जबकि परियोजना का उद्देश्य 7,500 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना था। 67 किलोमीटर मुख्य नहर, 110 से ज्यादा माइनर नहरें... फिर भी खेतों तक नहीं पहुंचा पानी परियोजना के तहत करीब 67 किलोमीटर मुख्य नहर और 110 से अधिक माइनर नहरों का निर्माण प्रस्तावित था। बहरी परियोजना क्षेत्र में लगभग 25 किलोमीटर नहर निर्माण पर 84 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए। हालांकि, कई स्थानों पर नहर अधूरी है, कहीं निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं और जहां निर्माण पूरा हो चुका है, वहां भी किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंच पा रहा। ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना के कुछ हिस्से 2018 में विभाग को सौंप दिए गए थे, लेकिन आज तक नियमित जलापूर्ति शुरू नहीं हो सकी। इसके अलावा नहर किनारे बनने वाली सर्विस रोड भी कई जगह अधूरी पड़ी है, जिससे ग्रामीणों को आवागमन में भी परेशानी हो रही है。 सात बार बढ़ी समय-सीमा, फिर भी अधूरी परियोजना परियोजना का दूसरा चरण वर्ष 2023 तक पूरा होना था, लेकिन निर्माण एजेंसी तय समय में काम पूरा नहीं कर सकी। जल संसाधन विभाग ने कंपनी को सात बार समय-सीमा बढ़ाकर दी, इसके बावजूद जुलाई 2026 तक परियोजना पूरी नहीं हो सकी। लगातार देरी के बाद अब जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई की मांग तेज हो गई है。 किसानों ने लगाए गंभीर आरोप स्थानीय किसानों का आरोप है कि कागजों में नहर चालू दिखाई जाती है, लेकिन हकीकत में खेतों तक एक बूंद पानी नहीं पहुंचता। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद उन्हें सिंचाई का लाभ नहीं मिला और वे आज भी मानसून पर निर्भर हैं。 सांसद ने उठाया मुद्दा, उच्च स्तरीय जांच की मांग सीधी सांसद डॉ. राजेश मिश्रा ने मुख्यमंत्री और जल संसाधन मंत्री को पत्र लिखकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने और परियोजना का निर्माण कार्य जल्द पूरा कराने की मांग की है। उनका कहना है कि किसानों को सिंचाई का लाभ जल्द से जल्द मिलना चाहिए。 कलेक्टर बोले- तकनीकी खामियां सामने आईं सीधी कलेक्टर विकास मिश्रा के अनुसार परियोजना में कई तकनीकी और निर्माण संबंधी खामियां सामने आई हैं। पूरे मामले में जिम्मेदारी तय करने के लिए शासन को उच्च स्तरीय जांच का प्रस्ताव भेजा गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी。 प्रभारी मंत्री ने नहीं दिया जवाब वहीं, जब जिले के प्रभारी मंत्री दिलीप जायसवाल से परियोजना और प्रस्तावित जांच को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने मीडिया के सवालों का जवाब नहीं दिया। इसे लेकर विपक्ष सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठा रहा है。 सबसे बड़ा सवाल करीब 14 साल, ₹486 करोड़ से अधिक खर्च, सात बार बढ़ी समय-सीमा और फिर भी किसानों के खेत सूखे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस देरी और लापरवाही की जिम्मेदारी किसकी तय होगी और जिन किसानों के नाम पर यह परियोजना बनाई गई, उन्हें नहर का पानी आखिर कब मिलेगा?0
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रायसेन में ट्यूबवेल चोरी गिरोह का पर्दाफाश, पुष्पराज शुकला गिरफ्तार
Raisen, Madhya Pradesh:रायसेन में लंबे समय से खेतों पर लगी ट्यूबवेल की मोटरें बिजली के वायर चोरी होने की घटनाएं हो रही हैं। ऐसे मामले पुलिस के पास प्रकरण भी दर्ज हैं आज जिले के देवनगर थाना के तहत ग्राम मुगालिया में ऐसे ही तीन लोगों को चोरी करते हुए गांव के लोगों ने पकड़ा। दो लोग छूट कर भाग गए एक को मोटर की वायर सहित पड़कर देवनगर पुलिस के हवाले किया है। देव नगर पुलिस कार्रवाई कर रही है। चोर का नाम पुष्पराज शुकला है। इनका एक बड़ा गिरोह है जो लगभग दो-तीन साल से क्षेत्र में किसानों के नलकूपों से मोटर एवं वायर चोरी कर रहा है। जिससे क्षेत्र के लोग बहुत परेशान थे।0
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RML अस्पताल में 21 साल की महिला की हालत सुधर, 72 घंटे बाद वेंटिलेटर हटाया
Noida, Uttar Pradesh:RML हॉस्पिटल (दिल्ली) ने हेल्थ अपडेट जारी किया है | विरोध-प्रदर्शन से जुड़ी एक घटना के बाद गंभीर हालत में नई दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया (RML) हॉस्पिटल में भर्ती कराई गई 21 साल की महिला मरीज़ की हालत में लगातार सुधार हो रहा है। लगभग 72 घंटे पहले उन्हें सफलतापूर्वक एक्सट्यूबेट (वेंटिलेटर सपोर्ट से हटाना) किया गया था और वह खुद से ठीक तरह से सांस ले पा रही हैं। मरीज़ होश में और सतर्क हैं, और निर्देशों का सही जवाब दे रही हैं। पिछले 24 घंटों में उन्हें मुंह से खाना (ओरल फ़ीड) देना भी शुरू कर दिया गया है, जिसे वह अच्छी तरह से ले पा रही हैं। फिलहाल उनकी मेडिकल हालत स्थिर है। हालांकि, उनकी रिकवरी जारी रखने के लिए उन्हें कड़ी निगरानी में रखा गया है और स्पेशलिस्ट्स की एक मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम की देखरेख में उन्हें पूरी देखभाल दी जा रही है।0
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नीट विवाद भाजपा ने विपक्ष पर तीखा हमला, छात्रों के भविष्य पर राजनीति रोकें
Dungarpur, Rajasthan:एंकर इंट्रो- नीट परीक्षा विवाद को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच डूंगरपुर जिले में भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया है। सीमलवाड़ा में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा नेताओं ने विपक्ष पर छात्रों के भविष्य और उनकी वास्तविक चिंताओं की आड़ में राजनीति चमकाने और देश का माहौल खराब करने का गंभीर आरोप लगाया है | बॉडी- सीमलवाडा में आयोजित पत्रकार वार्ता में भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य दीनदयाल सिंह चौहान, चौरासी विधानसभा प्रत्याशी रहे व निवर्तमान प्रधान कारीलाल ननोमा, जिला महामंत्री ईश्वरलाल लबाना और जिला प्रवक्ता राजेश पाटीदार ने कहा कि यदि परीक्षा में किसी भी अभ्यर्थी के साथ अन्याय हुआ है, तो उसकी निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। नेताओं ने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। दोषियों के खिलाफ जांच प्रक्रिया जारी है, लेकिन इसके बावजूद विपक्ष लगातार भ्रम फैलाकर आंदोलन को सामाजिक व साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहा है। भाजपा पदाधिकारी ने केंद्रीय शिक्षा मन्त्री और प्रधानमन्त्री के खिलाफ विपक्ष द्वारा की जा रही अमर्यादित टिप्पणियों की कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के प्रति भाषा की मर्यादा बनी रहनी चाहिए। विपक्ष को तथ्यों के आधार पर बात करनी चाहिए, न कि व्यक्तिगत हमले करने चाहिए। प्रेस वार्ता में स्थानीय सांसद राजकुमार रोत को भी आड़े हाथों लिया गया। भाजपा नेताओं ने सवाल उठाया कि राजस्थान की पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल में जब एक के बाद एक कई पेपर लीक हुए, तब सांसद रोत ने उस मुखरता से आवाज क्यों नहीं उठाई, जैसी वे आज केंद्र सरकार के खिलाफ उठा रहे हैं? नेताओं ने कहा कि यदि वास्तव में विद्यार्थियों की चिंता है, तो हर शासनकाल में निष्पक्ष आवाज उठानी चाहिए। भाजपा नेताओं ने अपील की कि विपक्ष छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने और धार्मिक या सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश बंद करे। उन्होंने कहा कि देश का युवा सब समझता है और विपक्ष को राजनीति छोड़कर समाधान की दिशा में सरकार का रचनात्मक सहयोग करना चाहिए।0
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देवसर अस्पताल में झाड़फूंक VIDEO से हड़कंप, सर्पदंश के मरीजों की हालत स्थिर
Singrauli, Madhya Pradesh:सिंगरौली ब्रेकिंग... अस्पताल बना अंधविश्वास का अखाड़ा! देवसर अस्पताल के वार्ड में सर्पदंश मरीज पर कथित झाड़फूंक का VIDEO वायरल... देवसर क्षेत्र में सर्पदंश की दो अलग-अलग घटनाएं आई सामने, दोनों घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र देवसर में कराया गया भर्ती... पहली घटना हर्राबीर्ती गांव निवासी कौशल्या यादव 16 वर्ष पिता मानिक राम यादव को सर्प ने डसा... गंभीर हालत में परिजन उन्हें तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे... दूसरी घटना में जियावन बहेरा निवासी मोहम्मद इमरान 17 वर्ष पिता मोहम्मद इदरीश भी सर्पदंश के हुए शिकार... उन्हें भी उपचार के लिए CHC देवसर में कराया गया भर्ती... दोनों घायलो का इलाज है जारी और हालत है दोनो की स्थिर... इलाज के बीच झाड़फूंक की तस्वीरें सामने आने से मचा हड़कंप.... CMHO बोले- एंटी स्नेक वेनम दिया गया, मरीज खतरे से बाहर... सरकारी अस्पताल में अंधविश्वास की एंट्री पर उठे बड़े सवाल.... VIDEO वायरल, अब स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर नजर... एंकर.......मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के देवसर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सर्पदंश के मरीजों के इलाज के दौरान अस्पताल के वार्ड में कथित झाड़फूंक किए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली चर्चा में है। जानकारी के मुताबिक हर्राबिर्ती गांव की 16 वर्षीय कौशल्या यादव को सांप काटने के बाद गंभीर हालत में देवसर अस्पताल लाया गया था। डॉक्टरों द्वारा इलाज शुरू किया गया, लेकिन इसी दौरान वार्ड के अंदर कथित झाड़फूंक किए जाने का वीडियो रिकॉर्ड हो गया। वीडियो में मरीज के पास कुछ लोग पारंपरिक तरीके से उपचार करते दिखाई दे रहे हैं। वहीं जियावन बहरा निवासी 17 वर्षीय मोहम्मद इमरान को भी सर्पदंश के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है। दोनों मरीजों का इलाज जारी है और अस्पताल प्रबंधन के अनुसार उनकी हालत फिलहाल स्थिर बनी हुई है। वहीं पूरे मामले को लेकर सीएमएचओ पुष्पराज सिंह का कहना है कि मरीजों को समय पर एंटी स्नेक वेनम सहित जरूरी दवाएं दी गई हैं। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता के बावजूद कई बार परिजन झाड़फूंक करने वालों को अस्पताल तक साथ लेकर पहुंच जाते हैं। हालांकि वायरल वीडियो के बाद अस्पताल परिसर में ऐसी गतिविधियों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।... अस्पताल के वार्ड में इलाज और झाड़फूंक की यह तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर बहस का विषय बनी हुई हैं। बड़ा सवाल यह है कि आखिर सरकारी अस्पताल के भीतर ऐसी गतिविधियां कैसे हुईं और क्या स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले की जांच कर कोई कार्रवाई करेगा? फिलहाल सभी की निगाहें विभागीय कदम पर टिकी हुई हैं。0
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युवती के घर पर चाकू दिखाकर धमकाने वाले आरोपी गिरफ्तार; इलाके में डर फैलाने वाला मामला पटाक्षेप
Durg, Chhattisgarh:एंकर-दुर्ग के कैंप 2, श्याम नगर में पुरानी रंजिश को लेकर एक युवती के घर में घुसकर चाकू दिखाकर धमकाने का मामला सामने आया, जिसके बाद पीड़िता ने फौरन इसकी लिखित शिकायत छावनी थाने में की. शिकायत मिलते ही पुलिस ने त्वरित और सख्त कार्रवाई करते हुए आरोपियों को धर दबोचा. पूछताछ के दौरान IOYO ने पहले पुलिस को गुमराह किया, लेकिन जब पुलिस ने सख्ती बरती तो आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल करते हुए पूरी घटना बताई. इसके बाद पुलिस ने न केवल आरोपियों को गिरफ्तार किया बल्कि जिस इलाके में उन्होंने दादागिरी दिखाई थी, वहीं उनका जुलूस भी निकाला. फिलहाल पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया पूरी कर सभी आरोपियों को जेल भेज दिया है.0
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हिसार: समाजसेवी नंदकिशोर गोयनका पर श्रद्धांजलि, गौसेवा और जनकल्याण के प्रतीक
Gurugram, Haryana:हिसार - नंदकिशोर गोयनका बहुत सरल सभाव के थे. समाज के लिए उन्होंने बहुत काम किया है - अरुण कुमार. हिसार के गोयनका सदन में आज आरएसएस के जॉइंट जनरल सेक्रेटरी अरुण कुमार स्वर्गीय नंदकिशोर गोयनका को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। उन्होंने कहा कि हमारे बीच से एक ऐसे समाज सेवक दूर चले गए हैं जिन्हें हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने समाज में तमाम जनकल्याण कार्य कर कर भी कभी अपने आप को कर्ता नहीं दर्शाया। ऐसे लोग धरती पर कम ही होते हैं जो मानव सेवा के साथ-साथ गौ सेवा को सबसे बड़ा कार्य मानते थे。0
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जिम कॉर्बेट की 151वीं जयंती: जंगल बचाने के लिए जिम्मेदार पर्यटन चाहिए
Noida, Uttar Pradesh:आज 25 जुलाई है.एक ऐसा दिन, जो उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के वन्यजीव प्रेमियों के लिए बेहद खास है,आज महान शिकारी प्रकृति प्रेमी और वन्यजीव संरक्षण के अग्रदूत एडवर्ड जेम्स जिम कॉर्बेट की 151वीं जयंती है,वही जिम कॉर्बेट जिनका नाम कभी आदमखोर बाघों और तेंदुओं के खात्मे से जुड़ा था,लेकिन समय के साथ यही शिकारी वन्यजीव संरक्षण का ऐसा चेहरा बन गया, जिसकी सोच आज भी जंगल और इंसान के बीच संतुलन बनाने की प्रेरणा देती है.जिम कॉर्बेट की जयंती पर कॉर्बेट टाइगर रिजर्व और कालाढूंगी की छोटी हल्द्वानी में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. लेकिन इस जयंती पर सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस सोच के साथ जिम कॉर्बेट ने जंगल, वन्यजीव और स्थानीय समाज के बीच संबंधों को समझा था...क्या आज हम उसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.क्योंकि एक तरफ कॉर्बेट लैंडस्केप बाघ संरक्षण की सफलता की दुनिया में मिसाल बन चुका है...तो दूसरी तरफ बढ़ता मानव-वन्यजीव संघर्ष, जंगलों पर बढ़ता दबाव और तेजी से बढ़ता मास टूरिज्म संरक्षण के सामने नई चुनौती बनकर खड़ा है,ऐसे में जिम कॉर्बेट की 151वीं जयंती सिर्फ उत्सव मनाने का मौका नहीं...बल्कि उनकी सोच को समझने और आज के दौर में उसे लागू करने पर मंथन करने का भी समय है.नैनीताल की पहाड़ियों में जन्मे जिम कॉर्बेट ने जंगल और पहाड़ के जीवन को बेहद करीब से देखा और समझा,उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों की समस्याओं को जाना...उनकी भाषा, संस्कृति और भावनाओं को समझा, यही वजह है कि जिम कॉर्बेट की कहानी सिर्फ एक शिकारी की कहानी नहीं है...बल्कि यह उस व्यक्ति की कहानी है. जिसने इंसान और वन्यजीवों के बीच संघर्ष को समझने और उसे कम करने का प्रयास किया.आज जब उत्तराखंड के पहाड़ों से लेकर मैदानी इलाकों तक गुलदार, हाथी, भालू और बाघ के साथ इंसानों के संघर्ष की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं...तब जिम कॉर्बेट की कार्यशैली को याद करना और उससे सीख लेना बेहद जरूरी हो जाता है.इस मामले में वन्यजीव प्रेमी एवं पक्षी विशेषज्ञ सुमंता घोष कहते है सबसे पहले तो हम सभी के लिए यह गर्व की बात है कि भारत ही नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया का पहला नेशनल पार्क कॉर्बेट लैंडस्केप में स्थापित हुआ,बाद में इसका नाम जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क रखा गया,जिम कॉर्बेट नैनीताल में जन्मे थे और स्थानीय लोगों तथा पहाड़ की संस्कृति को बहुत करीब से समझते थे,यही वजह है कि कॉर्बेट हमारे लिए आज भी बेहद महत्वपूर्ण हैं,अगर आज के परिप्रेक्ष्य में देखें तो मानव और वन्यजीव संघर्ष अपने चरम पर है,कॉर्बेट के समय भी यह संघर्ष काफी गंभीर था, कई आदमखोर बाघ और तेंदुए लोगों की जान ले रहे थे, ऐसे समय में जिम कॉर्बेट स्थानीय लोगों के बीच गए, उनकी समस्याओं को समझा और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.सुमंता घोष मानते हैं कि जिम कॉर्बेट की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि उन्होंने स्थानीय समुदाय को संरक्षण की प्रक्रिया से अलग नहीं किया, वह ग्रामीणों के साथ बैठते थे...उनकी बात सुनते थे...और जंगल तथा वन्यजीवों के संरक्षण में स्थानीय लोगों की भूमिका को समझते थे.आज जब मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं, तब यही सवाल उठता है कि क्या संरक्षण की रणनीति बनाने से पहले हम उन लोगों के बीच जा रहे हैं, जो सीधे जंगल के किनारे रहते हैं?सुमंता घोष कहते है कॉर्बेट साहब स्थानीय लोगों के साथ काम करते थे, ग्रामीणों की भाषा, उनकी संस्कृति, उनके देवी-देवताओं और उनकी भावनाओं को समझते थे, लोगों के साथ उनका उठना-बैठना था,आज जब हम मानव-वन्यजीव संघर्ष की बात करते हैं, तो हमें भी ग्रामीणों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझना होगा,उनके साथ बैठना होगा और उनकी परेशानियों का समाधान तलाशना होगा.लेकिन आज संरक्षण के सामने सिर्फ मानव-वन्यजीव संघर्ष ही चुनौती नहीं है,पर्यटन भी एक बड़ा सवाल बनकर सामने आया है,कॉर्बेट लैंडस्केप में हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं,पर्यटन से हजारों लोगों की आजीविका जुड़ी है...स्थानीय होटल, रिसॉर्ट, होमस्टे, जिप्सी चालक, नेचर गाइड और छोटे कारोबारी इससे रोजगार पाते हैं,लेकिन सवाल यह है कि पर्यटन कितना हो...और किस तरीके से हो?सुमंता घोष कहते है क्योंकि जब पर्यटन संरक्षण से ऊपर हो जाए...जब जंगल में वाहनों की संख्या बढ़ जाए...जब तेज आवाज, डीजे और अनियंत्रित गतिविधियां वन्यजीवों के प्राकृतिक जीवन में दखल देने लगें...तो यही पर्यटन जंगल के लिए खतरा भी बन सकता है.सुमंता घोष कहते है आज एक गैप दिखाई देता है,पर्यटन संरक्षण क्षेत्रों में एक बहुत बड़ा रोल निभा रहा है,इसलिए सरकार, वन विभाग, स्थानीय समुदाय और पर्यटन से जुड़े लोगों को एक साथ बैठकर इस पर गंभीरता से चर्चा करनी चाहिए,जब मानव-वन्यजीव संघर्ष की कोई घटना होती है, तब सिर्फ विभाग ही नहीं, बल्कि समाज और स्थानीय लोगों को भी प्रभावित परिवारों के साथ खड़ा होना चाहिए.आज के पर्यटन मॉडल पर हमें विचार करना चाहिए,जिस तरह का मास टूरिज्म बढ़ रहा है, वह न तो जंगल के लिए अच्छा है और न ही स्थानीय समुदाय के लिए, हमें ऐसी पर्यटन नीति बनानी होगी, जिसमें स्थानीय लोगों की भागीदारी हो, समुदाय अपनी जमीनें बेचकर विस्थापित न हो, बल्कि पर्यटन से होने वाले लाभ में उनकी हिस्सेदारी सुनिश्चित हो.यानी जिम कॉर्बेट की जयंती पर एक बड़ा संदेश साफ है...मास टूरिज्म नहीं, बल्कि जिम्मेदार और नियंत्रित पर्यटन.ऐसा पर्यटन, जिसमें जंगल की क्षमता का ध्यान रखा जाए...स्थानीय समुदाय को आर्थिक लाभ मिले...और वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार से कोई समझौता न हो.वहीं जिम की 151 वी जयंती पर वन्यजीव प्रेमी और जानकार संजय छिम्वाल का मानना है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए आज वन विभाग को जिम कॉर्बेट की कार्यशैली से सीख लेने की जरूरत है, संजय छिम्वाल कहते है 25 जुलाई का दिन वन्यजीव प्रेमियों और कॉर्बेट से जुड़े लोगों के लिए बेहद खास और हर्ष का दिन है,जिम कॉर्बेट ने वर्ष 1930 के दशक में ही यह सोच विकसित कर ली थी कि बाघ और अन्य वन्यजीवों का संरक्षण बेहद जरूरी है, खुद शिकारी होने के बावजूद उन्होंने बाद में शिकार छोड़कर वन्यजीव संरक्षण का संकल्प लिया.आज कॉर्बेट सहित पूरे उत्तराखंड में मानव-वन्यजीव संघर्ष एक बड़ी चुनौती बन चुका है, पहाड़ से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक गुलदार, भालू, हाथी और बाघ के साथ इंसानों के संघर्ष की घटनाएं सामने आ रही हैं.संजय छिम्वाल कहते हैं कि जिम कॉर्बेट जब किसी आदमखोर या समस्या पैदा करने वाले वन्यजीव को नियंत्रित करने निकलते थे, तो वह पूरी तरह सुनिश्चित करते थे कि कार्रवाई उसी वन्यजीव के खिलाफ हो, जिसने वास्तव में घटना को अंजाम दिया है आज यही सोच को वैज्ञानिक तरीके से अपनाने की जरूरत है.संजय कहते है जिम कॉर्बेट की सोच यह थी कि किसी निर्दोष वन्यजीव को दूसरे की गलती की सजा नहीं मिलनी चाहिए,आज वन विभाग को भी मानव-वन्यजीव संघर्ष के मामलों में इसी तरह की डिटेक्टिव अप्रोच अपनाने की जरूरत है,किसी घटना के बाद जल्दबाजी में किसी भी वन्यजीव को पकड़ने या कार्रवाई करने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से यह पता लगाया जाना चाहिए कि घटना के लिए वास्तव में कौन सा जानवर जिम्मेदार है.यानी इंसानों की सुरक्षा भी जरूरी है...और निर्दोष वन्यजीवों की सुरक्षा भी.इसी संतुलन को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाने की कोशिश वन्यजीव रेस्क्यू टीम भी कर रही है.वहीं कॉर्बेट टाइगर रिज़र्व के वरिष्ठ वन्यजीव चिकित्सा अधिकारी डॉ दुष्यंत शर्मा कहते है जिम कॉर्बेट ने बाघों के व्यवहार को समझने और उसे दस्तावेज के रूप में दर्ज करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया, उस समय संसाधन सीमित थे और उन्हें कठिन परिस्थितियों में पैदल चलकर अपनी रणनीति तैयार करनी पड़ती थी. आज वन्यजीव रेस्क्यू में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है,किसी बाघ या तेंदुए को ट्रैंक्विलाइज करने से पहले ड्रोन से निगरानी, कैमरा ट्रैप और जरूरत पड़ने पर डीएनए जांच जैसी तकनीकों की मदद ली जाती है, ताकि सही वन्यजीव की पहचान सुनिश्चित की जा सके।तकनीक भले ही आधुनिक हो गई हो, लेकिन वन्यजीव के व्यवहार को समझकर रणनीति बनाने का मूल तरीका आज भी वही है,वह कहते है बाघ या तेंदुए की गतिविधियों, उसके रूटीन और मूवमेंट को समझने के बाद ही रेस्क्यू ऑपरेशन की रणनीति तैयार की जाती है.बता दें कि लेकिन संरक्षण सिर्फ तकनीक से नहीं होगा...इसके लिए जंगल के प्रति संवेदनशील सोच भी जरूरी है।वहीं प्रसिद्ध वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर दीप रजवार कहते है. कि जिम कॉर्बेट की जयंती मनाना अच्छी बात है...लेकिन उनकी सोच को सिर्फ एक दिन तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए.दीप रजवार कहते है जिम कॉर्बेट की जयंती मनाना अच्छी बात है. लेकिन उनकी सोच और उनके संरक्षण के विचारों को सिर्फ जयंती तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए,वे कहते है पिछले 10-15 वर्षों में जंगल और उसके आसपास के प्राकृतिक परिवेश में काफी बदलाव आया है,जंगल में और आबादी के आसपास कभी पक्षियों की आवाज और प्राकृतिक वातावरण सुनाई देता था, लेकिन अब बढ़ते शोर और अनियंत्रित पर्यटन के कारण वन्यजीवों और पक्षियों के प्राकृतिक जीवन में खलल पड़ रहा है. खुले में तेज आवाज में डीजे बजाना भी वन्यजीवों के लिए चिंता का विषय है.दीप रजवार का कहना है कि अनियंत्रित पर्यटन वन्यजीवों के व्यवहार और उनके प्राकृतिक जीवन चक्र पर असर डाल सकता है.जिम कॉर्बेट की परिकल्पना मूल रूप से संरक्षण पर आधारित थी, लेकिन आज कहीं न कहीं पर्यटन संरक्षण पर हावी होता दिखाई दे रहा है. इसका असर वन्यजीवों के व्यवहार और उनके प्राकृतिक जीवन पर भी देखने को मिल रहा है.आज हमें संरक्षण और पर्यटन के बीच संतुलन बनाना होगा,मास टूरिज्म किसी भी कीमत पर जंगल और वन्यजीवों के हित में नहीं है.यानी जिम कॉर्बेट की 151वीं जयंती पर सबसे बड़ा सवाल यही है...क्या हम जंगल को सिर्फ पर्यटन का केंद्र बना रहे हैं?या फिर जंगल को उसकी प्राकृतिक पहचान के साथ बचाने की कोशिश भी कर रहे हैं?क्योंकि कॉर्बेट की असली विरासत सिर्फ एक नेशनल पार्क नहीं...बल्कि जंगल और इंसान के बीच संतुलन की वह सोच है. जिसमें स्थानीय समुदाय भी शामिल है...वन्यजीव भी सुरक्षित हैं...और पर्यटन भी प्रकृति के नियमों के भीतर है.वहीं जिम की जयंती में इस पूरी चर्चा के बीच एक सात साल के बच्चे का संदेश भी बेहद खास है,कक्षा दो में पढ़ने वाले प्रणय शर्मा के लिए जिम कॉर्बेट की कहानी का मतलब बहुत सरल है...जंगल बचाओ...पेड़ बचाओ...जानवरों का सम्मान करो।नन्हा 7 बर्षीय बालक प्रणय शर्मा कहता है मेरा नाम प्रणय शर्मा है और मैं कक्षा दो का छात्र हूँ, अगर मैं जिम कॉर्बेट होता, तो सबसे पहले पेड़ों की कटाई बिल्कुल बंद कर देता,अगर हम पेड़ काटते जाएंगे, तो जानवरों की कई प्रजातियां खत्म हो जाएंगी, पेड़ों के कटने से पशु-पक्षियों का घर भी खत्म हो जाएगा,इसलिए मेरा सभी से यही संदेश है कि हमें जानवरों का सम्मान करना चाहिए और पेड़ों की कटाई बिल्कुल बंद करनी चाहिए.शायद यही वह सोच है. जिसे जिम कॉर्बेट की 151वीं जयंती पर आगे बढ़ाने की जरूरत है.इधर कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में जिम कॉर्बेट की जयंती के मौके पर दो स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए।कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक राहुल मिश्रा ने बताया कि हर वर्ष जिम कॉर्बेट की जयंती को उत्साहपूर्वक मनाया जाता है,इस बार भी दो स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए,पहला धनगढ़ी में और दूसरा कालाढूंगी के छोटी हल्द्वानी स्थित जिम कॉर्बेट संग्रहालय में आयोजित किया गया.छोटी हल्द्वानी में स्थानीय लोगों के सहयोग से बच्चों के लिए पेंटिंग प्रतियोगिता आयोजित की गई है. वहीं धनगढ़ी में वेस्ट वॉरियर्स के सहयोग से क्लीनिंग ड्राइव का आयोजन किया गया है,बच्चों के लिए विभिन्न गतिविधियां भी आयोजित की जा रही है. और इंटरप्रिटेशन सेंटर के माध्यम से उन्हें जिम कॉर्बेट के जीवन, उनके संरक्षण कार्यों और वन्यजीवों के प्रति उनके योगदान की जानकारी दी जा रही है.जिम कॉर्बेट की जयंती केवल एक आयोजन तक सीमित नहीं है. बल्कि यह लोगों तक उनके संरक्षण के संदेश को पहुंचाने का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है. बच्चों, स्कूलों और आम लोगों को जागरूक करना जरूरी है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में समाज के हर व्यक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण है.गौर हो कि जिम कॉर्बेट का जीवन भी अपने आप में एक बड़ी कहानी है,एक समय आदमखोर बाघों और तेंदुओं के खात्मे के लिए प्रसिद्ध जिम कॉर्बेट बाद में वन्यजीव संरक्षण के सबसे बड़े प्रेरणास्रोतों में शामिल हो गए,उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा उत्तराखंड के कालाढूंगी क्षेत्र में बिताया, छोटी हल्द्वानी की धरती से ही उन्होंने जंगल और वन्यजीवों के संरक्षण की सोच को मजबूत किया.भारत की आजादी के बाद जिम कॉर्बेट केन्या चले गए, छोटी हल्द्वानी स्थित उनका ऐतिहासिक आवास बाद में वन विभाग के अधीन आया और आज यह जिम कॉर्बेट संग्रहालय के रूप में उनकी जीवन यात्रा और संरक्षण की सोच को लोगों तक पहुंचा रहा है.जिम कॉर्बेट की 151वीं जयंती पर आज कॉर्बेट लैंडस्केप में कई कार्यक्रम हो रहे हैं...लेकिन इस जयंती का असली संदेश शायद इससे कहीं बड़ा है।एक तरफ बढ़ती बाघों की संख्या संरक्षण की सफलता की कहानी कहती है...तो दूसरी तरफ मानव-वन्यजीव संघर्ष हमें नई चुनौती की याद दिलाता है.एक तरफ पर्यटन स्थानीय लोगों के लिए रोजगार का बड़ा जरिया है...तो दूसरी तरफ अनियंत्रित मास टूरिज्म जंगल के प्राकृतिक संतुलन पर सवाल खड़े करता है.ऐसे में जरूरत है...जिम कॉर्बेट की उस सोच को फिर से समझने की...जिसमें जंगल सिर्फ पर्यटकों के लिए नहीं था...वन्यजीव सिर्फ देखने के लिए नहीं थे...और स्थानीय समुदाय संरक्षण से अलग नहीं था.शायद जिम कॉर्बेट को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम जंगल को बचाएं...वन्यजीवों को सुरक्षित रखें...स्थानीय लोगों को संरक्षण का भागीदार बनाएं...और पर्यटन को प्रकृति की सीमाओं के भीतर रखें.क्योंकि जिम कॉर्बेट की कहानी सिर्फ एक शिकारी की कहानी नहीं है...यह एक ऐसे इंसान की कहानी है, जिसने बदलते समय के साथ अपनी सोच बदली...और हमें यह सिखाया कि जंगल बचेंगे...तो वन्यजीव बचेंगे...वन्यजीव बचेंगे...तो प्रकृति बचेगी...और प्रकृति बचेगी...तब इंसान का भविष्य भी सुरक्षित रहेगा.जिम कॉर्बेट की 151वीं जयंती पर यही सबसे बड़ा सवाल भी है...और यही सबसे बड़ी जिम्मेदारी भी.0
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झुंझुनूं के गुढ़ागौड़जी में आधी रात बदमाशों का तांडव, CCTV से राज खुला
Jhunjhunu, Rajasthan:झुंझुनूं के गुढ़ागौड़जी से बड़ी खबर गुढ़ागौड़जी में आधी रात बदमाशों का तांडव पहले जानकार की स्कॉर्पियो ले गए, फिर बस तोड़ी बड़ागांव शराब ठेके तक गए गाड़ी, CCTV से खुला राज पौने दो मिनट में बस के लगभग सभी शीशे तोड़े वारदात के बाद स्कार्पियो फिर गार्डन में खड़ी कर गए गार्डन मालिक और वाहन मालिक को नहीं थी भनक CCTV से आरोपियों की पहचान, पुलिस जांच में जुटी झुंझुनूं जिले के गुढ़ागौड़जी कस्बे में आधी रात को बदमाशों ने फिल्मी अंदाज में वारदात को अंजाम दिया। आरोपियों ने पहले एक मैरिज गार्डन से अपने ही जानकार की स्कॉर्पियो बिना किसी की जानकारी के निकाल ली। इसके बाद वे बड़ागांव स्थित एक शराब ठेके तक गए और लौटने के बाद पेट्रोल पंप पर खड़ी एक लोक परिवहन बस को निशाना बनाते हुए महज पौने दो मिनट में उसके लगभग सभी शीशे लाठियों और सरियों से तोड़ डाले। वारदात के बाद आरोपी उसी स्कॉर्पियो को वापस मैरिज गार्डन में खड़ी कर फरार हो गए। पूरी घटना अलग-अलग स्थानों पर लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई। जानकारी के अनुसार भोड़की गांव निवासी शिशुपाल गोदारा की लोक परिवहन बस झुंझुनूं से वाया श्रीमाधोपुर होकर जयपुर तक संचालित होती है। रोजाना की तरह बस जयपुर से लौटने के बाद गुढ़ागौड़जी के हुकूमपुरा बस स्टैंड स्थित एक पेट्रोल पंप पर खड़ी थी। पीड़ित बस मालिक और चालक द्वारा सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर घटनाक्रम की पूरी कड़ी सामने आई। फुटेज के अनुसार आरोपी पहले गुढ़ागौड़जी के एक मैरिज गार्डन पहुंचे। जहां खड़ी अपने ही जानकार की स्कॉर्पियो गाड़ी उठा ले गए। इसके बाद वे बड़ागांव स्थित एक शराब ठेके तक गए। वहां से लौटकर सीधे पेट्रोल पंप पहुंचे और बस पर हमला कर दिया। रात करीब 12.15 बजे स्कॉर्पियो में सवार युवक बस के पास पहुंचे और लाठियों व लोहे की सरियों से ताबड़तोड़ हमला शुरू कर दिया। करीब पौने दो मिनट में बस के लगभग सभी शीशे तोड़ दिए। पेट्रोल पंप कर्मचारी कुछ समझ पाते, उससे पहले ही आरोपी वहां से फरार हो गए। तोड़फोड़ करने के बाद आरोपी उसी स्कॉर्पियो को वापस उसी मैरिज गार्डन में ले जाकर खड़ी कर गए। हैरानी की बात यह रही कि स्कॉर्पियो ले जाने की जानकारी न तो मैरिज गार्डन के मालिक को थी और न ही वाहन मालिक को। गाड़ी की चाबी गार्डन में ही रखी हुई थी। उस समय न तो गार्डन मालिक मौके पर मौजूद था और न ही स्कॉर्पियो का मालिक। बस मालिक शिशुपाल गोदारा ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान केसरीपुरा और बामलास गांव के युवकों के रूप में हुई है। उनके खिलाफ गुढ़ागौड़जी थाने में रिपोर्ट दी जा रही है। उन्होंने बताया कि वह आरोपियों को जानते हैं, लेकिन उनका कभी किसी से कोई विवाद नहीं हुआ। ऐसे में बस को निशाना क्यों बनाया गया, यह अब भी रहस्य बना हुआ है। घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की तलाश में जुटी हुई है।0
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दिल्ली-NCR में अंतरराज्यीय ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़: 19.7 लाख ट्रामाडोल-अल्प्राजोलम बरामद
New Delhi, Delhi:दिल्ली पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 19.70 लाख ट्रामाडोल और अल्प्राजोलम टैबलेट/कैप्सूल बरामद, अंतरराज्यीय ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़ जमनापार के उत्तर-पूर्वी जिला पुलिस की नार्कोटिक्स स्क्वॉड ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अंतरराज्यीय स्तर पर साइकोट्रॉपिक दवाओं की तस्करी करने वाले संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में अब तक पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है और उनके कब्जे से 19,70,040 ट्रामाडोल और अल्प्राजोलम की टैबलेट/कैप्सूल (करीब 470.686 किलोग्राम) तथा एक टाटा सफारी एसयूवी बरामद की है। यह उत्तर-पूर्वी जिला पुलिस की अब तक की सबसे बड़ी बरामदगियों में से एक मानी जा रही है। पहले गिरफ्तार हुए थे पिता-पुत्र यह कार्रवाई 20 जून 2026 को थाना ज्योति नगर में दर्ज एफआईआर संख्या 279/2026 के तहत गिरफ्तार किए गए पिता-पुत्र शिवम गुप्ता और वीरपाल गुप्ता से पूछताछ के बाद सामने आई। दोनों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने पूरे नेटवर्क की परत-दर-परत जांच शुरू की。 दिल्ली से यूपी तक फैला था नेटवर्क जांच के दौरान पुलिस ने नदीम (30) निवासी मंडोली, दिल्ली को गिरफ्तार किया, जो भगीरथ पैलेस, चांदनी चौक से इस कारोबार को संचालित कर रहा था। उसके पास से ट्रामाडोल और अल्प्राजोलम की कुछ मात्रा भी बरामद हुई。 नदीम की निशानदेही पर पुलिस ने उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में छापा मारकर नवनीत (35) को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने बताया कि साइकोट्रॉपिक दवाओं का बड़ा स्टॉक नोएडा के अंबेडकर सिटी स्थित एक गोदाम में रखा गया है। पुलिस ने वहां से 29 कार्टन दवाएं और ट्रामाडोल कैप्सूल बरामद किए। हालांकि गोदाम के किरायेदार मौके से फरार मिले。 इसके बाद जांच में आशीष और फिर आशीष सिन्हा (46) का नाम सामने आया, जिन्हें भी गिरफ्तार कर लिया गया। आशीष सिन्हा के कब्जे से एक मारुति बलेनो कार भी बरामद की गई। मुख्य आरोपी भी गिरफ्तार लगातार जांच के दौरान 23 जुलाई 2026 को पुलिस ने गिरोह के मुख्य आरोपी शिव नारायण झा (45) को नोएडा के अंबेडकर सिटी से गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने अपने सहयोगी अमन शर्मा (34) का नाम बताया, जिसे भी गिरफ्तार कर लिया गया。 जांच में यह भी सामने आया कि शिव नारायण झा नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के वर्ष 2025 के एक मामले में घोषित अपराधी (Proclaimed Offender) भी है。 470 किलो से अधिक साइकोट्रॉपिक दवाएं बरामद शिव नारायण झा की निशानदेही पर नोएडा के सेक्टर-122 स्थित एक मकान में छापा मारकर पुलिस ने भारी मात्रा में साइकोट्रॉपिक दवाएं बरामद कीं। बरामदगी में शामिल हैं— अल्प्राजोलम 0.25 टैबलेट – 11,66,400 (151.632 किलोग्राम) अल्प्राजोलम 0.5 टैबलेट – 18,600 (1.860 किलोग्राम) थ्रोमासेट (ट्रामाडोल) टैबलेट – 1,31,400 (55.188 किलोग्राम) ट्रामाडोल रेड कैप्सूल – 80,640 (49.996 किलोग्राम) ट्रामाडोल ग्रीन कैप्सूल – 5,73,000 (212.010 किलोग्राम) इसके अलावा एक टाटा सफारी एसयूवी भी जब्त की गई। सभी मादक दवाओं को एनडीपीएस एक्ट के तहत विधिवत जब्त कर लिया गया है。 गिरफ्तार आरोपी 1. नदीम (30), निवासी मंडोली, दिल्ली 2. नवनीत (35), निवासी आजमगढ़, उत्तर प्रदेश 3. आशीष सिन्हा (46), निवासी गाजियाबाद 4. शिव नारायण झा (45), निवासी ग्रेटर नोएडा एक्सटेंशन 5. अमन शर्मा (34), निवासी ग्रेटर नोएडा वेस्ट पुलिस का दावा उत्तर-पूर्वी जिला पुलिस के अनुसार जांच में एक संगठित अंतरराज्यीय सिंडिकेट का खुलासा हुआ है, जो कई राज्यों में साइकोट्रॉपिक दवाओं की अवैध खरीद, भंडारण और सप्लाई का काम कर रहा था। पुलिस अब इस गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश, वित्तीय लेन-देन की जांच, दवाओं के स्रोत और पूरे वितरण नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई से अवैध साइकोट्रॉपिक दवाओं की तस्करी करने वाले एक बड़े नेटवर्क को करारा झटका लगा है और आगे भी एनडीपीएस एक्ट के तहत ऐसे गिरोहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी。0
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