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लाल किला के पास ई-रिक्शा चालक जुम्मन की मौत, सिर-हाथ-पैर गायब
RKRakesh Kumar
Nov 13, 2025 01:00:30
Delhi, Delhi
उत्तर-पूर्वी दिल्ली के शास्त्री पार्क में रहने वाले ई-रिक्शा चालक जुम्मन की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है. धमाके के बाद जब उनका शव मिला तो उसमें सिर, हाथ और पैर नहीं थे. केवल शरीर पर बचे कपड़ों से ही उनकी पहचान हो सकी. इस दर्दनाक हादसे ने जुम्मन के परिवार को पूरी तरह तोड़ दिया है., जुम्मन की बहन नजमा ने बताया कि उनका भाई रोज की तरह सोमवार शाम लाल किला के पास ई-रिक्शा चलाने गया था. जब शाम को बम ब्लास्ट की खबर मिली तो उन्होंने तुरंत अपनी भाभी को फोन किया. भाभी ने बताया कि जुम्मन लाल किला के पास ही गए हैं. जब उन्होंने जुम्मन के मोबाइल पर फोन किया तो मोबाइल स्विच ऑफ मिला. घबराहट में वह और उनके परिवार के लोग तुरंत लाल किला पहुंचे, जहां का मंजर बेहद भयानक था, चारों तरफ अफरा-तफरी, घायल और शव बिखरे पड़े थे. मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने बताया कि सभी घायलों को एलएनजेपी अस्पताल भेजा गया है. परिवार वहां पहुंचा, लेकिन जुम्मन का कोई सुराग नहीं मिला. रात भर अस्पताल के चक्कर लगाने के बावजूद कोई जानकारी नहीं मिली. इसके बाद वे फिर लाल किला लौटे, लेकिन वहां घटनास्थल पर जाने की अनुमति नहीं दी गई. मजबूर होकर उन्होंने पुलिस कंट्रोल रूम को फोन किया. सूचना के बाद पुलिस की टीम पहुंची और उन्हें चांदनी चौक थाने ले जाया गया. वहां उन्होंने जुम्मन के ई-रिक्शा का पूरा विवरण दिया, लेकिन पुलिस ने बताया कि ऐसा कोई ई-रिक्शा बरामद नहीं हुआ है. फिर उन्हें मोर्चरी भेजा गया, जहां दिखाई गई डेड बॉडी में उनका भाई नहीं था. निराश होकर वे घर लौट आए और शास्त्री पार्क थाने में शिकायत दर्ज कराई. जुम्मन के ई-रिक्शा में जीपीआरएस लगा था, जिसकी लास्ट लोकेशन लाल किला के पास की पाई गई. इसी बीच चांदनी चौक पुलिस स्टेशन से सूचना मिली कि एक और शव अस्पताल पहुंचा है. जब परिवार वहां गया तो शव देखकर सबके होश उड़ गए — सिर, हाथ और पैर गायब थे. लेकिन कपड़ों से यह साफ हो गया कि वह जुम्मन का ही शव था. नजमा ने बताया कि जुम्मन की बूढ़ी मां, विकलांग पत्नी और तीन छोटे बच्चे हैं — बड़ा बेटा केवल 12 साल का है। वह परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था। अब परिवार के सामने रोटी और बच्चों के पालन-पोषण का संकट खड़ा हो गया है. नजमा का कहना है कि इतने बड़े हादसे के बाद भी अब तक किसी जनप्रतिनिधि या अधिकारी ने उनके घर आकर हालात जानने या कोई सहायता देने की ज़रूरत नहीं समझी। परिवार सदमे में है और न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है.
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