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सगाई के बाद बालोद सेन समाज ने निजी फोन कॉल पर रोक लगा दी
DSDanvir Sahu
Feb 19, 2026 06:01:49
Raipur, Chhattisgarh
बालोद
आजकल सगाई के बाद मंगेतरों के बीच घंटों मोबाइल पर बातचीत करना एक आम बात है। लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि मोबाइल की यही मीठी बातें, जन्मों-जन्मों के रिश्तों में कड़वाहट घोल रही हैं? छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में सेन समाज ने ऐसा चौंकाने वाला फैसला लिया है, जो आधुनिक दौर के युवाओं के लिए किसी झटके से कम नहीं है। अब सगाई के बाद मंगेतर एक-दूसरे से फोन पर 'प्राइवेट' बात नहीं कर पाएंगे।
VO : बदलते दौर में मोबाइल अब रिश्तों को जोड़ने के बजाय तोड़ने का जरिया बन रहा है। कम से कम छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के 'सेन समाज' का तो यही मानना है। समाज की बैठक में सर्वसम्मति से यह ऐतिहासिक और कड़ा निर्णय लिया गया है कि सगाई के बाद और शादी से पहले लड़का-लड़की एक-दूसरे से निजी तौर पर फोन पर बात नहीं करेंगे।
बाइट : संतोष कौशिक, जिलाध्यक्ष, सेन समाज
हमने गहराई से मंथन किया और पाया कि सगाई के बाद घंटों मोबाइल पर बात करने से कई रिश्ते शादी की दहलीज तक पहुँचने से पहले ही टूट रहे हैं। निजी बातें विवाद का कारण बनती हैं, इसलिए हमने तय किया है कि अब बातचीत केवल परिवार के बीच ही होगी।
बाइट : उमेश कुमार सेन, सेन समाज पदाधिकारी
इतना ही नहीं, सेन समाज ने आधुनिकता की चकाचौंध को छोड़ अपनी जड़ों की ओर लौटने का भी संकल्प लिया है। अब शादियों में प्लास्टिक का पूर्ण बहिष्कार होगा और पुरानी परंपरा के अनुसार पत्तों वाली थालियों यानी 'पत्तल' में ही भोजन परोसा जाएगा। साथ ही, धर्मांतरण को लेकर भी सख्त रुख अपनाते हुए समाज ने साफ कर दिया है कि हिंदू धर्म छोड़ने वालों से कोई पारिवारिक रिश्ता नहीं रखा जाएगा।
बाइट : सीमा कौशिक, सचिव, सेन समाज
हम बच्चों को मोबाइल तो थमा देते हैं, लेकिन उसी मोबाइल पर होने वाली बातों से मर्यादाएं खत्म हो रही हैं। रिश्ते बचाने के लिए यह कड़ाई जरूरी है।
बाइट : दीक्षा सेन, युवा प्रतिनिधि
अक्सर बात करते-करते हम अतीत की या परिवार की ऐसी बातें शेयर कर देते हैं जो नहीं करनी चाहिए। इससे तनाव पैदा होता है। समाज का यह निर्णय रिश्तों को मजबूती देगा।
समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि यह 'सोशल रिफॉर्म' यानी सामाजिक सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम है। जहाँ एक तरफ दुनिया डिजिटल हो रही है, वहीं बालोद का सेन समाज मर्यादा और परंपरा की नई लकीर खींच रहा है। अब देखना होगा कि इस फैसले का असर प्रदेश के दूसरे समाजों पर क्या पड़ता है।रिश्तों को बचाने के लिए मोबाइल पर पाबंदी... सुनने में थोड़ा अजीब जरूर लगता है, लेकिन समाज के अनुभव इसे समय की मांग बता रहे हैं। क्या मोबाइल वाकई रिश्तों का दुश्मन बन गया है? यह एक बड़ा सवाल है।
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