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North Bastar Kanker494334

जिला कांकेर में इनामी 3 महिला नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण

Jul 24, 2024 12:28:12
Kanker, Chhattisgarh

छत्तीसगढ़ में इन दिनों सुरक्षा बलों द्वारा नक्सलियो पर लगातार कारवाई के चलते नक्सली दहशत में है। जिसके तहत आए दिन नक्सली आत्मसमर्पण का राह अपना रहा है। इसी क्रम में आज कांकेर में, गडचिरोली डिवीज़न अंतर्गत सक्रिय तीन महिला नक्सलियो ने आत्मसमर्पण किया। मोती पोयाम गट्टा (ईनाम 5 लाख) एल.ओ.एस. में एरिया कमेटी सदस्य (डिप्टी कमांडर) एवं दूसरी संचिला मंडावी (ईनाम 1 लाख) टेलर टीम सदस्य के रूप में सक्रिय थी I तीसरी लखमी पददा (ईनाम 1 लाख) नक्सली मेढ़की एलओएस सदस्य थी।

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HSHITESH SHARMA
Mar 04, 2026 06:01:44
Durg, Chhattisgarh:एंकर-दुर्ग से रायपुर नेशनल हाई वे 53 में खारुन नदी के पुल पर देर रात रायपुर कि तरफ़ एक टैंकर के पलट जाने से दुर्ग से रायपुर की ओर जाने वाले रास्ते पर लंबा जाम लग गया यह टैंकर पुल के बीचो बीच अनियंत्रित होकर पलट गया जिससे टैंकर में मौजूद आइल सड़क पर फैलने लगा इस घटना की सूचना मिलते ही दुर्ग और रायपुर की यातायात पुलिस मौके पर पहुंची लेकिन पुल के ऊपर फैले हुए तेल और टैंकर की स्थिति को देख पुलिस ने तत्काल एसडीआरएफ और फायर ब्रिगेड की टीम को बुलाया लंबे जाम को देखते हुए पुलिस ने रूट को भी डायवर्ट किया और इधर पुल के ऊपर रेस्क्यू शुरू किया क्रेन के आने के बाद एसडीआरएफ और पुलिस की टीम ने टैंकर को बड़ी मशक्कत के बाद वहां से हटाया तो वही पुल पर ऑइल पूरी तरह फैल जाने की वजह से फायर ब्रिगेड की टीम ने केमिकल छिड़क कर 2 घण्टे की कड़ी मशक्कत के बाद रात 2 बजे टैंकर हटला लिया गया तो वही अल सुबह तक ट्रैफिक वन वे ही चलता रहा.
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ASANIMESH SINGH
Mar 04, 2026 06:01:00
Ujjain, Madhya Pradesh:उज्जैन。 धार्मिक नगरी उज्जैन में होली का उत्सव पूरे उल्लास और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। जैसे-जैसे दिन चढ़ रहा है, वैसे-वैसे शहर रंगों में सराबोर होता नजर आ रहा है। सुबह से ही लोग अपने घरों से बाहर निकलकर एक-दूसरे को रंग और गुलाल लगाते हुए होली की शुभकामनाएं दे रहे हैं。 इसी कड़ी में मालीपुरा स्थित विश्वकर्मा समाज के लोगों ने सामूहिक रूप से होली उत्सव की शुरुआत की। समाजजन एकत्रित होकर पहले पारंपरिक तरीके से होली खेलते दिखाई दिए, इसके बाद वे समाज के अन्य घरों की ओर रवाना हुए。 विश्वकर्मा समाज में वर्षों पुरानी एक मान्यता का पालन आज भी किया जा रहा है। परंपरा के अनुसार जिन परिवारों में बीते समय में गमी (शोक) हुई हो, उनके घर समाज के लोग स्वयं पहुंचकर रंग लगाते हैं। इसका उद्देश्य यह होता है कि शोक की छाया से बाहर निकलकर वह परिवार भी आने वाले त्योहारों को खुशियों और सामाजिक अपनत्व के साथ मना सके। समाज के बुजुर्गों का कहना है कि यह परंपरा केवल रंग खेलने की नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, संवेदना और साथ निभाने का प्रतीक है। होली जैसे पावन पर्व पर यह संदेश दिया जाता है कि दुख की घड़ी में समाज साथ खड़ा है और खुशियों में भी सबको सहभागी बनाना ही सच्ची होली है। शहर में दिन चढ़ने के साथ होली की रौनक और बढ़ने की संभावना है, वहीं विभिन्न मोहल्लों और समाजों में पारंपरिक ढंग से रंगोत्सव मनाया जा रहा है।
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AYAmit Yadav
Mar 04, 2026 06:00:38
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