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Santosh TiwariSantosh TiwariFollow30 Jul 2024, 05:24 pm
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आज़ाद बिंद हत्याकांड: कलेक्ट्रेट में धरना, परिवार ने न्याय की मांग तेज कर दी

Jaunpur, Uttar Pradesh:आज़ाद बिंद हत्याकांड में अब तक आरोपियों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई न होने का आरोप लगाते हुए पीड़ित परिवार ने आंदोलन का रास्ता अपना लिया है। मृतक की बहन सौम्या बिंद अपने समर्थकों के साथ मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर पहुंचीं और न्याय की मांग को लेकर धरना पर बैठ गईं। धरना स्थल पर सौम्या बिंद ने कहा कि घटना को एक महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन पुलिस की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई है। उनका आरोप है कि परिवार लगातार न्याय की मांग कर रहा है, इसके बावजूद मामले में प्रगति दिखाई नहीं दे रही है। उन्होंने यह भी कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उनके घर पहुंचकर शीघ्र कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। इससे परिवार में निराशा और नाराजगी बढ़ी है। सौम्या बिंद ने कहा कि अब उनका परिवार केवल आश्वासनों पर भरोसा नहीं करेगा और आरोपियों की गिरफ्तारी तथा कड़ी कार्रवाई होने तक धरना जारी रहेगा। धरने के दौरान पीड़ित पक्ष की ओर से तीखी नाराजगी भी देखने को मिली। वहीं, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन सतर्क हो गया है। कलेक्ट्रेट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उनकी मांगों को सुना और मामले में नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। फिलहाल धरना जारी है और पूरे घटनाक्रम पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। वही एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी के साथ वारयल हो रहा है जिसमें दूल्हा आज़ाद बिंद का वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें वो अवैध तमंचा चलाते हुए नजर आ रहा है। ये सवाल पूछने पर मृत दूल्हे आज़ाद बिंद की बहन भड़ग गई। उसने कहा कि उसके भाई को अपराधी बनाया गया। भाई का वीडियो देखने के बाद सौम्या तमतमा गयी। उसने बोला की अब न्याय के लिए उसको भी असलहा उठाना पड़ेगा। बाइट सौम्या विंद आज़ाद विंद की बहन
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फर्रुखाबाद: डॉक्टर के निजी अस्पताल के फैसले से मरीज पर भारी आर्थिक संकट

ASARUN SINGHJust now
Farrukhabad, Uttar Pradesh:फर्रुखाबाद में भगवान कहे जाने वाले डॉक्टर का एक बेहतरीन कारनामा आखिर किस विद्यालय से लाते हैं डिग्री के पेशेंट की हालात तक नहीं देखते और उसके ऊपर चला देते हैं सीजर एक घायल, उधार की 50 हजार और गंभीर सवाल — क्या सरकारी अस्पताल का भरोसा मरीज के साथ धोखा कर गया? फर्रुखाबाद के गंगा नगर से आई यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल पर तीखे सवाल खड़े कर रही है। 29 मई को छत से गिरकर घायल हुए महेश शर्मा को उनकी पत्नी आरती शर्मा ने लोहिया अस्पताल पहुंचाया। पर अस्पताल में तैनात संविदा हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. आयुष्मान सिंह ने कहा कि यहाँ ऑपरेशन नहीं होगा और मरीज को अपने निजी अस्पताल में भर्ती करा लिया। परिवार ने इलाज के लिए मजबूरी में 50 हजार रुपये उधार दिए। ऑपरेशन के बाद खुलासा हुआ कि जो कूल्हा टूटा था, उसकी जगह स्वस्थ कूल्हे का ऑपरेशन कर दिया गया। परिजनों ने विरोध किया तो डॉक्टर ने गलती स्वीकार कर बाद में टूटे कूल्हे का भी ऑपरेशन किया। आरती का कहना है कि ऑपरेशन से जुड़े दस्तावेज और एक्स-रे उन्हें अब तक नहीं दिए गए। यह मामूली पारिवारिक विवाद नहीं—यह उस प्रणाली का मुद्दा है जो सार्वजनिक संसाधनों (डॉक्टर की तैनाती और मरीजों के इलाज के लिये खर्च होने वाले सरकारी पैसे) पर निर्भर है। अगर संविदा अधिकारी मरीजों को निजी व्यवस्था की ओर ले जाते हैं, तो न सिर्फ परिवारों की आर्थिक और शारीरिक सुरक्षा खतरे में आती है, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की साख और सार्वजनिक धन की पारदर्शिता भी सवालों के घेरे में आ जाती है। परिवार ने जिलाधिकारी और स्वास्थ्य विभाग से त्वरित और निष्पक्ष जांच तथा सख्त कार्रवाई की मांग की है। अब इंतज़ार प्रशासन की जांच रिपोर्ट और यह देखने का है कि स्वास्थ्य प्रणाली और सार्वजनिक पैसे की रक्षा के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। बाइट -- महेश शर्मा घायल और पीड़ित बाइट -- श्रीमती आरती घायल महेश की पत्नी बाइट -- डॉ दीपक कटारिया ए सीएमओ
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महाराष्ट्र: उद्धव गुट के 6 सांसदों की सुरक्षा बढ़ी; इंटेलिजेंस के निर्देश

Mumbai, Maharashtra:महाराष्ट्र की राजनीति से जुड़ी बड़ी खबर संभावित सुरक्षा खतरे के इनपुट के बाद उद्धव गुट के 6 बागी सांसदों की सुरक्षा बढ़ाई गई। इससे पहले महाराष्ट्र इंटेलिजेंस विभाग ने 6 सांसदों की सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश जारी किए थे। इंटेलिजेंस डिपार्टमेंट ने जारी किए अर्जेंट वायरलेस मैसेज में हालिया संभावित खतरों के मद्देनज़र इन सांसदों को तत्काल प्रभाव से ‘Y ’ श्रेणी के समकक्ष स्थानीय सुरक्षा देने को कहा गया। जिन सांसदों की सुरक्षा बढ़ाई गई उनमें शामिल हैं – * संजय देशमुख (यवतमाल) * संजय जाधव (परभणी) * संजय दिना पाटिल (मुंबई उत्तर-पूर्व) * नागेश पाटिल अष्टीकर (हिंगोली) * ओमराजे निंबालकर (धाराशिव) * भाऊसाहेब वाघचौरे (शिर्डी) स्थानीय पुलिस इकाइयों को सांसदों के दौरे और प्रवास के दौरान विशेष एहतियाती कदम उठाने के निर्देश। संबंधित जिला/कमिश्ननरेट स्तरीय समितियों को सुरक्षा बढ़ाने, घटाने या जारी रखने पर आगे निर्णय लेने को कहा गया।
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JDA ने चौमूं में अवैध निर्माण पर पीला पंजा चलाकर 6 दुकाने ध्वस्त

Jaipur, Rajasthan:जयपुर के चौमूं शहर में अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) ने पीला पंजा चलाया. कार्रवाई के دوران JDA की भूमि पर अवैध रूप से निर्मित 6 दुकानों को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त किया गया. रींगस रोड पर रतन विहार कॉलोनी में सरकारी भूमि पर कब्जा कर बनाए गए 6 दुकानों को ध्वस्त किया गया. JCB चलाकर दुकानों को ध्वस्त किया गया. मंदिर माफी की भूमि पर बसाई गई अवैध कॉलोनी को भी JDA ने ध्वस्त कर दिया. इस कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल और JDA अधिकारी मौके पर मौजूद थे. अधिकारियों ने बताया कि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी ऐसी कार्रवाइयों का क्रम जारी रहेगा. यह पूरी कार्रवाई JDA के DIG आनंद शर्मा के निर्देश पर की गई. अचानक हुई कार्रवाई से अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मच गया.
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झालनावाऱ में शिक्षकों ने TET 2010 के प्रावधानों के विरोध में प्रदर्शन किया

Jhalawar, Rajasthan:झालावाड़ झालावाड़ मिनी सचिवालय पर आज अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पहुंचे शिक्षकों ने जोरदार प्रदर्शन किया और प्रधानमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। यह प्रदर्शन 23 अगस्त 2010 की राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) संबंधी अधिसूचना और माननीय सर्वोच्च न्यायालय के 29 मई 2026 के निर्णय के संदर्भ में किया गया। शिक्षकों ने 2010 से पहले नियुक्त हुए शिक्षकों के लिए विधायी और नीतिगत संरक्षण की मांग की। ज्ञापन में कहा गया है कि देशभर के लाखों शिक्षकों में वर्तमान में गहरी चिंता और असुरक्षा की भावना है। इसका कारण NCTE की 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना और सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णय से उत्पन्न परिस्थितियाँ हैं। इन परिस्थितियों के कारण वर्ष 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों के सेवा हितों और भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। शिक्षकों ने भारतीय विधिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था के स्थापित सिद्धांत का हवाला दिया। इसके अनुसार, कोई भी नियम, अधिसूचना या नीति सामान्यतः उसके प्रवर्तन की तिथि से प्रभावी होती है। पूर्व में विधिवत संपन्न नियुक्तियों और अर्जित सेवा अधिकारों पर बाद में निर्मित पात्रता मानदंडों को लागू करना प्राकृतिक न्याय, समानता और विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं माना जाता। NCTE ने 23 अगस्त 2010 को शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को न्यूनतम अर्हता के रूप में अधिसूचित किया था। इससे पहले, देश के विभिन्न राज्यों में लाखों शिक्षकों की नियुक्तियाँ उस समय लागू नियमों, योग्यता मानदंडों और चयन प्रक्रियाओं के अनुसार विधिवत रूप से की जा चुकी थीं। ऐसे में 2010 से पूर्व के नियुक्त शिक्षकों से शिक्षक पात्रता परीक्षा को अनिवार्य रूप से उत्तीर्ण करवाना न्याय संगत नहीं। इसके विरोध में आज महासंघ के नेतृत्व में शिक्षकों द्वारा प्रदर्शन किया जा रहा। यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो केंद्र व राज्य सरकार शिक्षकों के देशव्यापी आंदोलन के लिए तैयार रहे।
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तबादलों पर रोक जारी, सरकारी शिविरों के बावजूद कर्मचारियों का इंतजार जारी

Jaipur, Rajasthan:एंकर तबादलों को लेकर कर्मचारियों की बेचैनी बढती जा रही है जून में तबादले होने की आस पूरी होती नजर नहीं आ रही है सरकार ग्रामीण और शहरी सेवा शिविरों में व्यस्त है इसलिए कर्मचारियों का इंतजार और बढने की संभावना है विपिन शर्मा शिक्षक नेता की इस बाइट से शुरू करें वीओ प्रदेश में तबादलों का इंतजार बढता ही जा रहा है जून में तबादलों की आस थी पर अब ये पूरी होती फिलहाल तो नजर नहीं आ रही है मंत्रियों के बंगलों पर कर्मचारियों की भीड़ पहुंच रही है पर उम्मीद कि किरण कहीं नजर नहीं आ रही सरकार शहरी और ग्रामीण सेवा शिविरों में व्यस्त है इसलिए ट्रांसफर से बैन हटता कहीं दिखाई नहीं दे रहा बाइट झाबर सिंह खर्रा यूडीएच मंत्री वीओ प्रदेश भर में इन दिनों 'शहरी सेवा और 'ग्रामीण सेवा शिविर चल रहे हैं सरकार गांव गांव में शिविर आयोजित कर आम जनता को राहत दे रही है तो शहरों में भी शिविरों के जरिये जनता को अपने ही घर के पास सरकारी सुविधायें पहुंचाईं जा रही हैं सीएम भजनलाल शर्मा से लेकर सरकार के अधिकांश मंत्री इन शिविरों का दौरा कर चुके हैं हजारों कर्मचारियों की शिविरों में डयूटी लगाई गई है जहां कर्मचारी विभागीय अधिकारियों के साथ सरकार की योजनाओं का लाभ दिलाने में जुटे हैं शहरों में पट्टे, नामांतरण, लीज फ्री-होल्ड, और बकाया लीज राशि के एकमुश्त भुगतान पर ब्याज की छूट के जरिये सरकार गुड गवर्नेंस के उदाहरण पेश कर रही है इन सबके बीच बरसों से दूर दराज के इलाकों में पदस्थापित कर्मचारियों की घर के नजदीक पोस्टिंग की आस अधूरी है सरकार की मजबूरी ये है कि उसके अभियानों का क्रियान्वयन कराने का जिम्मा कर्मचारियों के कंधे पर है इसलिए सरकार चाहकर भी तबादलों से बैन हटाने का जोखिम उठाने से कतरा रही है कर्मचारियों की बड़ी तादाद को जनगणना के पहले चरण के काम से थोड़ी राहत तो मिली है पर अब उनके कंधों पर हरियालो राजस्थान में करोड़ों पेड़ लगाने की जिम्मेदारी भी है इसलिए सरकार की प्राथमिकता पहले अभियानों के तय लक्ष्य हासिल करने पर है न कि तबादलों से प्रतिबंध हटाने पर बाइट कन्हैयालाल चौधरी पीएचईडी मंत्री बाइट जोगाराम पटेल संसदीय कार्यमंत्री वीओ भजनलाल सरकार अपने कार्यकाल के ढाई साल पूरे कर चुकी है सरकार ने कर्मचारियों के कल्याण के लिए कई बड़े एलान किये हैं पर अभी तक सीमित मात्रा में हुए तबादलों से अधिकांश राज्य कर्मचारियों की मुराद पूरी नहीं हो पाई है विधायकों से लेकर मंत्री तक सब बेकरार है पर इंतजार है कि खत्म् होने का नाम ले ही नहीं रहा
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