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सवाई माधोपुर में रोबोटिक घुटना प्रत्यारोपण: रणथंभौर का पहला सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल

Sawai Madhopur, Rajasthan:सवाई माधोपुर में भी अब घुटनो के मरीजों को बड़े शहरों की तरह ही रोबोटिक तकनीक से घुटना प्रत्यारोपण का लाभ मिल सकेगा। जिला मुख्यालय का अपेक्स रणथंभौर सेविका हॉस्पिटल ऐसा करने वाला पहला अस्पताल होगा ,रणथंभौर सेविका अस्पताल रोबोटिक तकनीक से घुटना प्रत्यारोपण करने वाला जिले का पहला सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल बन गया है। इसे लेकर आज अपेक्स रणथंभौर सेविका अस्पताल परिसर में कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें रोबोटिक तकनीक से घुटना प्रत्यारोपण का औपचारिक शुभारंभ किया गया । कार्यक्रम के दौरान रणथंभौर टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर एसपी सिंह मुख्य अतिथि रहे। कार्यक्रम के दौरान रोबोटिक तकनीक के स्पेशलिस्ट डॉ हिमांशु और सर्जन डॉ. कांता प्रसाद मौजूद रहे। जिन्होंने बताया कि रोबोटिक घुटना प्रत्यारोपण में सर्जन ही सर्जरी करते हैं, लेकिन रोबोट एक अत्यधिक सटीक टूल की तरह उनकी मदद करता है। यह खराब हड्डी को बहुत बारीकी से काटने और कृत्रिम जोड़ (आर्टिफिशियल इंप्लांट) को एकदम सही जगह लगाने में सहायक होता है। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। इस दौरान विशेषज्ञ डॉक्टर्स ने घुटनो के मरीजों बताया कि पुराने समय में घुटना प्रत्यारोपण किस तरह किया जाता था और अब रोबोटिक्स तकनीक से किस तरह घुटना प्रत्यारोपण किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान मंच संचालन अपेक्स रणथंभौर सेविका के यूनिट हैड अभिमन्यु सिंह द्वारा किया। कार्यक्रम के दौरान शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ मनीष शर्मा, फिजिशियन डॉ भानुप्रताप सिंह, फिजियोथैरेपिस्ट डॉ गणपत लाल वर्मा, सेविका के नर्सिंग सुप्रीटेंडेंट नावेद खान मौजूद रहे। बाईट-1-डॉ हिमांशु ,स्पेशलिस्ट ,रोबोटिक तकनीक से घुटना प्रत्यारोपण
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सवाई माधोपुर में बाढ़ आपातकाल के लिए संयुक्त मॉक ड्रिल; सेना–SDRF–पुलिस ने तालमेल मजबूत किया

Sawai Madhopur, Rajasthan:सवाई माधोपुर जिले में आगामी मानसून के दौरान संभावित बाढ़ एंव आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की तैयारियों को मजबूत करने के उद्देश्य से भारतीय सेना, राजस्थान राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), सिविल डिफेंस एंव पुलिस के संयुक्त तत्वावधान में आज मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। मॉक ड्रिल में जयपुर स्थित भारतीय सेना की इकाइयों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। मॉक ड्रिल के दौरान बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य, लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने, आपातकालीन प्रतिक्रिया और विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय का अभ्यास किया गया। मॉक ड्रिल के समग्र प्रभारी मेजर अंकित रहे। पुलिस व्यवस्थाओं एवं समन्वय की जिम्मेदारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं उप कमांडेंट SDRF जयपुर नरेश शर्मा ने संभाली। SDRF दल का नेतृत्व उप निरीक्षक पुष्पेंद्र सिंह ने किया, जबकि पुलिस बल के कंपनी कमांडर के रूप में उप निरीक्षक ओम प्रकाश ने अपनी भूमिका निभाई। अभ्यास का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच तालमेल को और अधिक मजबूत बनाना, बचाव एवं राहत कार्यों की दक्षता बढ़ाना तथा बाढ़ जैसी किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित, समन्वित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना रहा। इस संयुक्त मॉक ड्रिल के माध्यम से आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी दलों ने अपनी तैयारियों का व्यावहारिक परीक्षण किया。
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ओंकारेश्वर की प्रतिमा नहीं झुकी: मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी का बड़ा बयान

Khandwa, Madhya Pradesh:खंडवा पहुंचे धर्म, संस्कृति, अध्यात्म मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी बोले - ओंकारेश्वर में शंकराचार्य की प्रतिमा नहीं झुकी, दुष्प्रचार किया जा रहा है। खंडवा जिले के ओंकारेश्वर में स्थापित आदि गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा के झुकने की खबरों को लेकर प्रदेश के धर्म, संस्कृति एवं अध्यात्म मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने बड़ा बयान दिया है। खंडवा पहुंचे मंत्री लोधी ने कहा कि प्रतिमा के झुकने की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है , इसे लेकर दुष्प्रचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रतिमा का निर्माण देश की अग्रणी इंजीनियरिंग कंपनी एलएंडटी ने अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार किया है। मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने बताया कि ओंकारेश्वर में स्थापित आदि गुरु शंकराचार्य की प्रतिमा का निर्माण उसी कंपनी ( एलएंडटी) ने किया है, जिसने विश्व की सबसे ऊंची स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का निर्माण किया है। उन्होंने कहा कि प्रतिमा को अंतरराष्ट्रीय इंजीनियरिंग मानकों और सभी सुरक्षा मापदंडों के अनुरूप तैयार किया गया है। जब उनसे पूछा गया कि इसी प्रोजेक्ट में काम करने वालों ने तकनीकी पहलुओं पर सवाल उठाए हैं, तो उन्होंने कहा कि कुछ लोग होते हैं जो निकाल दिए जाते हैं तो इस तरह की शिकायतें करते हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में पहले ही प्रेस ब्रीफ के माध्यम से बताया जा चुका है कि प्रतिमा को 170 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक रफ्तार की हवाओं को सहने के हिसाब से डिजाइन किया गया है। इसके साथ ही भूकंप सुरक्षा के सभी मानकों का भी निर्माण के दौरान पालन किया गया है। क्षेत्र में औसतन 140 किलोमीटर प्रति घंटे की हवा की संभावना के बावजूद प्रतिमा का परीक्षण 179 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाओं के दबाव को ध्यान में रखकर किया गया। आईआईटी दिल्ली और आईआईटी मद्रास के तकनीकी मानकों के अनुसार प्रतिमा लगभग 500 वर्षों तक सुरक्षित रहने में सक्षम है। साथ ही अभी प्रतिमा का अंतिम हैंडओवर एलएंडटी से नहीं हुआ है और वर्तमान में निरीक्षण, तकनीकी परीक्षण एवं रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी भी कंपनी के पास ही है।
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महेंद्र चौधरी के जन्मदिन पर रक्तदान शिविर, युवाओं ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया

Jaipur, Rajasthan:चौमूं जयपुर अमरसर नायन में रक्तदान शिविर का आयोजन जिला परिषद सदस्य महेंद्र चौधरी के जन्मदिन पर हुआ आयोजन जन्मदिन के अवसर पर रक्तदान शिविर का हुआ आयोजन युवाओं ने बढ़ चढ़कर रक्तदान शिविर में लिया हिस्सा इलाके के कई प्रतिनिधियों की शिरकत एंकर-अमरसर-नायन क्षेत्र में जिला परिषद सदस्य महेंद्र चौधरी के जन्मदिन के अवसर पर रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में बड़ी संख्या में युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए रक्तदान कर मानव सेवा का संदेश दिया। रक्तदाताओं ने जरूरतमंद मरीजों की सहायता के लिए स्वेच्छा से रक्तदान किया, जिसकी सभी ने सराहना की। इस अवसर पर क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं गणमान्य नागरिकों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए महेंद्र चौधरी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। वक्ताओं ने कहा कि जन्मदिन जैसे विशेष अवसर पर रक्तदान शिविर का आयोजन समाज के प्रति सकारात्मक सोच और सेवा भावना का प्रतीक है।
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Nashik में नकली आयकर अधिकारी बनाकर चोरी: चार गिरफ्तार, 70 लाख लूट

Nashik, Maharashtra:अँकर बॉलिवूडमधील स्पेशल 26 चित्रपटाप्रमाणेच एक धक्कादायक बनावट आयकर छाप्याचे प्रकरण नाशिकमध्ये उघडकीस आले आहे. आयकर विभागाचे अधिकारी असल्याचे भासवत एका व्यापाऱ्याची तब्बल 70 लाख रुपयांची लूट करण्यात आली. मात्र, नाशिक गुन्हे शाखेने अवघ्या चार दिवसांत या टोळीचा पर्दाफाश करत चार आरोपींना अटक केली आहे. या कारवाईत बनावट आयकारीड, शासकीय शिक्के, पिस्तौल आणि लाखो रुपयांची रोकड जप्त करण्यात आली आहे. पाहूया हा विशेष रिपोर्ट... नाशिकच्या दिंडोरी नाका परिसरात काही जणांनी स्वतःला आयकर विभागाचे अधिकारी असल्याचे सांगत एका व्यापाऱ्यावर बनावट छापा टाकला. व्यापाऱ्याला धाकदपटशा दाखवत तब्बल 70 लाख रुपयांची रोकड लुटून आरोपी पसार झाले. या प्रकरणी पंचवटी पोलीस ठाण्यात गुन्हा दाखल होताच तपास गुन्हे शाखेकडे वर्ग करण्यात आला.गुन्हे शाखेने अवघ्या चार दिवसांत या प्रकरणाचा छडा लावत तीन पुरुष आणि एका महिलेसह तीन आरोपींना अटक केली. आरोपींकडून तब्बल 55 लाख रुपयांची रोकड, एम-50 पिस्तूल, धारदार शस्त्र, आयकर विभागाची बनावट ओळखपत्रे, शासकीय शिक्के आणि अन्य साहित्य जप्त करण्यात आले. तपासादरम्यान आणखी धक्कादायक माहिती समोर आली आहे. मुख्य आरोपीहा उत्तराखंड मधील असून तो अनेकांना सरकारी नोकरीचे आमिष दाखवून फसवत असल्याचे उघड झाले आहे. नाशिकच्या कोणार्क नगरमधील एका महिलेलाही त्याने नोकरीचे आमिष दाखवले. पुढे या दोघांमध्ये प्रेमसंबंध निर्माण झाले आणि ती महिला देखील या टोळीचा भाग बनल्याचे पोलिस तपासात समोर आले आहे....आरोपींकडून जप्त करण्यात आलेले विविध शासकीय शिक्के आणि बनावट कागदपत्रांमुळे या रॅकेटला कोणत्याही शासकीय अधिकारी किंवा कर्मचाऱ्याची मदत होती का, याचाही तपास पोलीस करत आहेत. या टोळीने यापूर्वीही अशाच प्रकारचे गुन्हे केले आहेत का, याचाही शोध सुरू आहे.....बॉलिवूडमधील स्पेशल 26 चित्रपटात जशा पद्धतीने बनावट सरकारी अधिकारी बनून छापे टाकले जात होते, त्याच पद्धतीने नाशिकमध्ये ही टोळी सक्रिय असल्याचे प्राथमिक तपासातून समोर आले आहे. त्यामुळे या प्रकरणाची राज्यभर चर्चा सुरू झाली असून तपासात आणखी मोठे खुलासे होण्याची शक्यता पोलिसांनी व्यक्त केली आहे. बनावट आयकर अधिकाऱ्यांच्या नावाखाली झालेल्या या धाडसी लुटीने व्यापाऱ्यांमध्ये भीतीचे वातावरण निर्माण झाले आहे. या प्रकरणात आणखी काही आरोपी किंवा इतर धागेदोरे समोर येतात का, याकडे आता सर्वांचे लक्ष लागले आहे.
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NTPC गेट के पास क्लीनिक में फर्जी फिटनेस सर्टिफिकेट का खुलासा, स्वास्थ्य विभाग चौंका

Narsinghpur, Madhya Pradesh:एंकर नरसिंहपुर के गाडरवारा नगर में NTPC गेट नंबर-1 के पास संचालित एक निजी जांच क्लीनिक पर नियमों को ताक पर रखकर चिकित्सा सेवाएं टीन सेट में संचालित की जा रही हैं, जहां पर आम आदमी की ब्लड जांच से लेकर ECG, एक्सरे और आंखों की जांच बिना विशेषज्ञों के धड़ल्ले से की जा रही है और निजी कंपनियों में कार्य करने के लिए कर्मचारियों को फिटनेस सर्टिफिकेट दिए जा रहे हैं. इस संबंध में जब ZEE मीडिया की टीम मौके पर जाकर जानकारी जुटाई तो पता चला कि NTPC पावर प्लांट के अंतर्गत आने वाली LNT सहित अन्य कंपनियों में कार्यरत मजदूरों के फिटनेस सर्टिफिकेट 810 रुपये लेकर बनाए जा रहे हैं. इसे ZEE मीडिया में प्राथमिकता से उठाया गया और दिखाते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कम्प मच गया और 10 घंटे के भीतर स्वास्थ्य विभाग का अमला BMO चीचली मौके पर पहुंचा और बताया इस पैथोलॉजी के पास कोई भी धाराप्रवाह दस्तावेज नहीं पाए गए. जांच प्रतिवेदन बनाकर उच्च अधिकारियों को प्रेषित किया गया है और ZEE मीडिया का आभार व्यक्त किया गया. बाइट डॉक्टर अनिल पटेल BMO चीचली (गले में स्टेचू)
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गुरुचरण जमीन पर अतिक्रमण के खिलाफ सांसद सुरेश म्हात्रे ने कार्रवाई कर रस्ता साफ कराया

Thane, Maharashtra:भिवंडी कल्याण सीमेवरील कोनगावात अतिक्रमणाचा मुद्दा पुन्हा पेटला आहे. विकासक मयूर सूचक यांनी खाजगी एमआयडीसी विकसित करताना गावच्या गुरुचरण जमिनीवर अतिक्रमण केल्याचा आरोप ग्रामस्थांनी केला आहे. आरोपानुसार, विकासकाने स्थानिक आदिवासी वस्तीकडे जाणारा रस्ता आणि पाणी घेण्यासाठीची विहीर बंद केली होती. याबाबत ग्रामस्थांनी वेळोवेळी आंदोलन केले, मात्र विकासक यंत्रणांच्या बळावर ते दडपण्यात आले. यासंदर्भात तक्रारी मिळाल्यानंतर खासदार सुरेश म्हात्रे उर्फ बाळ्या मामा यांनी आज स्वतः गुरुचरण जागेला भेट दिली. त्यांनी जागेवरच तहसीलदार अभिजित खोले आणि गटविकास अधिकारी गोविंद खामकर यांना बोलावून तात्काळ कारवाईचे आदेश दिले. खासदारांच्या उपस्थितीत ग्रामस्थांनी ग्रामपंचायतीच्या जेसीबीच्या मदतीने रस्त्यावर लावलेला पत्र्याचा अडसर तोडून रस्ता मोकळा केला. प्रशासनाने आता याप्रकरणी काय कारवाई केली याकडे सर्वांचे लक्ष लागले आहे. कोनगावात झपाट्याने नागरीकरण होत आहे. गुरुचरण जागेवर अतिक्रमण करून आदिवासींचा रस्ता आणि विहिरीकडे जाणारा मार्ग बंद करणे चुकीचे आहे. तालुक्यात भूमी वर्ल्ड नंतर आता मयूर सूचक हे बिल्डरही असेच करत आहेत. हे तात्काळ थांबवले पाहिजे. अन्यथा आम्ही आमच्या स्टाइलने याचा बंदोबस्त करू" असा इशारा खासदारांनी दिला.
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हाथरस पुलिस का एक्शन: विशेष चेकिंग अभियान में 150 वाहनों के कटे चालान, 16 वाहन सीज

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Hathras, Uttar Pradesh:जनपद हाथरस में सड़क सुरक्षा को सुनिश्चित करने और यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराने के उद्देश्य से आज पुलिस अधीक्षक चिरंजीव नाथ सिन्हा के निर्देशन में एक विशेष चेकिंग अभियान चलाया गया। इस अभियान का मुख्य फोकस शहर के संवेदनशील स्थानों, बार्डर एरिया और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों पर रहा। थाना कोतवाली नगर और थाना हाथरस गेट क्षेत्र में बैरियर लगाकर संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की बारीकी से जांच की गई। यातायात नियमों की धज्जियाँ उड़ाने वाले वाहन चालकों पर पुलिस ने सख्त रुख अपनाया। अभियान के दौरान कुल 150 वाहनों का चालान किया गया और नियम उल्लंघन के आरोप में 16 वाहनों को सीज कर दिया गया। चालान मुख्य रूप से बिना हेलमेट, बिना सीट बेल्ट, ट्रिपल राइडिंग, फॉल्टी नंबर प्लेट और ओवरलोडिंग जैसे मामलों में किए गए। चेकिंग के दौरान पुलिस टीम ने वाहन चालकों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक भी किया। पुलिस ने स्पष्ट निर्देश दिए कि वाहन चलाते समय मोबाइल का उपयोग न करें, शराब पीकर गाड़ी न चलाएं और चार पहिया वाहन में सीट बेल्ट का अनिवार्य रूप से प्रयोग करें। साथ ही, वाहनों में काली फिल्म, हूटर, प्रेशर हॉर्न और मॉडिफाइड साइलेंसर का प्रयोग न करने की हिदायत दी गई। हाथरस पुलिस ने आम जनमानस से अपील की है कि यातायात नियमों का पालन करना केवल कानूनी मजबूरी नहीं, बल्कि स्वयं की और दूसरों की सुरक्षा के लिए जरूरी है। नियमों के पालन से सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी और यात्रा सुरक्षित होगी।
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कुरुक्षेत्र के इलेक्ट्रॉनिक शोरूम में भीषण आग, करोड़ों का सामान जलकर राख

Kurukshetra, Haryana:कुरुक्षेत्र: अगर पिता रात 11 बजे बाथरूम जाने के लिए नहीं उठते तो शायद उनकी जान भी नहीं बचती। लेकिन उनकी जान तो बच गई, आंखों के सामने करीब 1 करोड़ रुपए का इलेक्ट्रॉनिक सामान, 17 लाख रुपए कैश, 4 तोले सोना और नया घर का सामान आग में स्वाहा हो गया। पिता और बेटा पूरी रात जलते शोरूम को देखते रहे, लेकिन कुछ भी नहीं बचा सके। कुरुक्षेत्र जिले के लाडवा के बन रोड पर बीती रात करीब 11 बजे इलेक्ट्रॉनिक शोरूम में भीषण आग लग गई। हादसे के समय शोरूम के अंदर संचालक तरुण कुमार के पिता बिशन लाल सो रहे थे। वह बाथरूम जाने के लिए उठे तो शोरूम में धुआं और आग की लपटें दिखाई दीं। उन्होंने तुरंत आग बुझाने की कोशिश की और बेटे तरुण व फायर ब्रिगेड को सूचना दी। लेकिन कुछ ही मिनटों में आग ने पूरे शोरूम को अपनी चपेट में ले लिया। हालात बिगड़ते देख बिशन लाल किसी तरह बाहर निकल आए और उनकी जान बच गई, लेकिन आग इतनी तेजी से फैली कि अंदर रखा कोई भी सामान नहीं बचाया जा सका। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की 2 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। आसपास के ग्रामीण भी बाल्टीयों और पाइपों से पानी डालकर आग बुझाने में जुट गए। कई घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। आग इतनी भीषण थी कि सुबह करीब 7 बजे तक दमकल कर्मी मौके पर आग बुझाने में लगे रहे। शोरूम में रखे थे 17 लाख कैश और गोल्ड शोरूम संचालक तरुण ने बताया कि वह शोरूम के पास ही अपना नया घर बनवा रहे हैं। बुधवार सुबह टाइल-पत्थर के ठेकेदार को भुगतान करना था। इसी वजह से करीब 17 लाख रुपए नकद शोरूम में रखे हुए थे। इसके अलावा करीब 4 तोले सोना, घर का सामान और बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक सामान भी वहीं रखा था। एक करोड़ का सामान जल गया उन्होंने दावा करते हुए बताया कि आग में करीब 1 करोड़ रुपए का इलेक्ट्रॉनिक सामान, कैश, सोना और नया घर का सामान पूरी तरह जल गया। उनके परिवार के सामने वर्षों की मेहनत कुछ घंटों में राख हो गई। करीब 7 साल पहले उन्होंने यह इलेक्ट्रॉनिक शोरूम शुरू किया था। परिवार की पूरी मेहनत और कारोबार इसी शोरूम से जुड़ा था। पिता शोरूम में सो रहे थे तरुण ने बताया कि रात करीब साढ़े 8 बजे शोरूम बंद करके वापस आए थे। वे अपना नया घर बना रहे हैं। इसलिए अभी किराए पर मकान लिया हुआ था। बाकी घर का ज्यादातर सामान शोरूम में रखा था। रात को खाना खाकर उनके पिता बिशन लाल शोरूम में सोने के लिए चले गए थे। उन्होंने ही आग लगने की सूचना दी। शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका शुरुआती जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। हालांकि पुलिस और संबंधित विभाग मौके का निरीक्षण कर रहे हैं। आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच जारी है। गनीमत रही कि बिशन लाल मौका देखकर शोरूम से बाहर आ गए और उनकी जान बच गई।
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AIIMS ने चार महीने के शिशु की दुर्लभ लंग-सेविंग सर्जरी सफल

New Delhi, Delhi:AIIMS ने रचा इतिहास: 4 महीने के मासूम की दुर्लभ 'लंग-सेविंग' सर्जरी, दो दिन में मिली अस्पताल से छुट्टी देश में पहली बार हुई इतने छोटे बच्चे ली लैंग सेविंग सर्जरी देश में अनोखी उपलब्धि: AIIMS के डॉक्टरों ने 4 महीने के शिशु की बचाई दोनों फेफड़ों की क्षमता, की दुर्लभ सर्जरी यह सर्जरी प्रोफेसर डॉ. विशेश जैन के नेतृत्व में पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की टीम ने की, जबकि एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. अभिषेक ने ऑपरेशन के दौरान विशेष तकनीक से शिशु की सांसों का सफल प्रबंधन किया। विभागाध्यक्ष डॉ. संदीप अग्रवाल ने बताया कि इतनी कम उम्र के बच्चे में फेफड़े के सबसे जटिल हिस्से की कीहोल सर्जरी करना बेहद चुनौतीपूर्ण था। सफल ऑपरेशन के बाद शिशु की हालत तेजी से सुधरी और उसे मात्र दो दिन में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। AIIMS के अनुसार कुछ महीनों बाद बच्चे के दूसरे फेफड़े की भी सर्जरी की जाएगी, जिससे उसके सामान्य जीवन जीने की उम्मीद और मजबूत हुई है। Rare Lung-Sparing Surgery on One of the Youngest Reported Patients, a 4-Month-Old, at AIIMS New Delhi Doctors at AIIMS New Delhi have successfully performed a rare and technically demanding lung surgery on a four-month-old infant born with a congenital lung malformation affecting both lungs, with the child discharged just two days after the operation — a remarkably quick recovery for a surgery of this complexity. This procedure — a segment-level lung resection in an infant just four months old — is among the youngest and rarest cases of its kind reported anywhere, reflecting the highly specialized, lung-preserving surgical care now possible at AIIMS. The Condition The baby was diagnosed before birth with a Congenital Pulmonary Airway Malformation (CPAM), a condition in which part of the lung develops abnormally in the womb, forming cyst-like tissue that cannot function like normal lung. In this case, the malformation was present in both lungs, a rarer and more complex presentation than the usual single-sided case. Because both lungs were affected, the surgical team could not simply remove a whole lobe, the larger, more commonly removed lung unit, as doing so could leave the child without enough healthy lung tissue for the future. Instead, they chose the more delicate route of removing only the specific diseased portion, starting with the right side. Understanding "Segments" Each lung is made up of smaller functional units called segments, similar to the natural sections of an orange, each with its own dedicated blood supply and airway. Removing an entire lobe is technically simpler, but removing just one or two individual segments, known as a segmentectomy, is far more demanding, since the surgeon must carefully isolate blood vessels and airways buried deep within the lung without disturbing the healthy segments around them. The right lung is made up of three lobes — the upper, middle, and lower lobe. The upper lobe is divided into three segments, the middle lobe into two segments, and the lower lobe into five segments. In this case, the team operated on the lower lobe of the right lung, removing segments 9 and 10, widely regarded as the most challenging segments to remove because their blood supply lies so deep within the lung tissue. “Segments 9 and 10 are among the most difficult to remove in the entire lung, since their vessels and airway are buried deep within the tissue, far from the surface. Performing this safely through keyhole surgery in an infant just four months old is a significant technical achievement. Outcomes like this are only possible because of teamwork, and because of the dedicated healthcare workers at AIIMS, whose infrastructure and facilities are well suited to conducting this kind of complex, lung-preserving pediatric surgery,” — Dr. Sandeep Agarwala, Head, Department of Pediatric Surgery, AIIMS New Delhi The Team The procedure was led by Professor Vishesh Jain, Department of Pediatric Surgery. A key part of the operation's success was selective lung ventilation, a technique in which the anaesthesia team isolates and ventilates one lung at a time so the surgeon can operate on a still lung while the other continues supporting the child's breathing, a difficult task given the small size of an infant's airway. This was skilfully managed by Dr. Abhishek, Department of Anaesthesia, and was central to the operation going smoothly. The surgery itself proceeded uneventfully, with no complications, and the child was stable and ready for discharge just two days later. What's Next Since the malformation affects both lungs, this operation addressed only the right side. The child will require a second surgery to address the affected segment on the left lung, which is being planned for a few months from now, once the child has recovered further and grown a little. The team will continue to follow up closely in the interim, with hopes for good long-term lung function on both sides. For parents facing a similar diagnosis in their child, cases like this are a reminder that removing only the diseased portion of the lung, rather than an entire lobe, is now a feasible option with current surgical techniques — including in very young infants — where the anatomy and clinical picture allow for it. Such lung-preserving approaches, along with the specialized facilities required to safely support infants through them, are available at centres such as AIIMS.
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