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यूपी के गांवों में ग्रामीण पर्यटन से रोजगार और आय बढ़ेगी

Lucknow, Uttar Pradesh:लखनऊ उत्तर प्रदेश में पर्यटन अब अयोध्या, काशी और मथुरा की धार्मिक आस्था से आगे गांवों तक पहुंच रहा है। प्रदेश के गांव पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित किए जा रहे हैं। गांवों में पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति, लोक परंपराओं, हस्तशिल्प, खानपान और ग्रामीण जीवन से रूबरू कराने की तैयारी है। इससे ग्रामीणों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी तैयार हो रहे हैं। एग्री-रूरल एवं गंगे रूरल टूरिज्म परियोजना के तहत प्रदेश के 234 गांवों को ग्रामीण पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। ग्रामीण पर्यटन के जरिए गांवों की संस्कृति और परंपराओं को पर्यटकों से जोड़ने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है。 52 गांवों का विकास पूरा ग्रामीण पर्यटन योजना के तहत अब तक 52 ग्रामीण पर्यटन गांवों का विकास पूरा हो चुका है। पर्यटकों को गांवों में पहुंचने और विभिन्न स्थलों की जानकारी देने के लिए 1060 साइनेज बोर्ड लगाए गए हैं। वहीं 1920 होमस्टे चिन्हित किए गए हैं。 सरकार का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में होमस्टे की संख्या बढ़ाकर स्थानीय लोगों को पर्यटन से सीधे जोड़ना है। योजना के तहत करीब एक हजार होमस्टे विकसित किए जा रहे हैं。 970 होमस्टे पंजीकृत एनआईडीएएचआई पोर्टल पर अब तक 970 होमस्टे पंजीकृत हैं, जिनमें से 920 संचालित हो रहे हैं। करीब 1000 होमस्टे अभी विकास के चरण में हैं। इसके अलावा पर्यटन विभाग के नए पोर्टल पर भी 195 होमस्टे पंजीकृत किए गए हैं। पर्यटन विभाग का लक्ष्य जल्द ही उत्तर प्रदेश को ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करना है。 महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर ग्रामीण पर्यटन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के मुताबिक ग्रामीण पर्यटन से महिलाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं。 अब तक करीब 2200 महिलाओं को मूंज, जरी-जरदोजी, चिकनकारी, पिटकरी कला, बांस शिल्प, मिट्टी के बर्तन, हस्तकला और कालीना निर्माण जैसी पारंपरिक कलाओं का प्रशिक्षण दिया गया है। करीब 300 महिलाओं को स्थानीय पाक कला में प्रशिक्षित किया गया है। गांवों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पहचान ग्रामीण पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। वाराणसी के कुसीना (रामेश्वर) गांव को वर्ष 2023 में भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय से सम्मान मिला था। वहीं बहराइच के कतरनीघाट गांव को इंडियन सबकॉन्टिनेंट अवॉर्ड्स-2025 में सिल्वर श्रेणी में सम्मानित किया गया। प्रयागराज के बायोवेड एग्री फार्म को इनोवेटिव एग्री टूरिज्म बिजनेस मॉडल के रूप में मान्यता मिली है। होमस्टे से बढ़ेगा ग्रामीण रोजगार ग्रामीण पर्यटन मॉडल में होमस्टे को प्रमुख आधार बनाया गया है। पर्यटकों को होटल की बजाय गांव के घरों में ठहराकर उन्हें स्थानीय जीवन, खानपान, संस्कृति और परंपराओं का अनुभव कराने की योजना है। इससे गांवों में पर्यटन खर्च का सीधा लाभ स्थानीय परिवारों और छोटे कारोबारियों को मिल सकता है। राष्ट्रीय स्तर पर भी ग्रामीण पर्यटन और ग्रामीण होमस्टे को बढ़ावा देने की नीति पर जोर दिया जा रहा है。 मुख्य आंकड़े: 234 गांव ग्रामीण पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किए जा रहे 52 गांवों का विकास पूरा 1060 साइनेज बोर्ड लगाए गए 1920 होमस्टे चिन्हित 970 होमस्टे पंजीकृत 920 होमस्टे संचालित करीब 1000 होमस्टे विकास के चरण में 195 होमस्टे नए पर्यटन विभाग के पोर्टल पर पंजीकृत
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गोरखपुर जलभराव पर सांसद रवि किशन और पार्षद के बीच फोन बहस वायरल

Gorakhpur, Uttar Pradesh:गोरखपुर में भारी बारिश के बाद जलभराव की समस्या अब जनप्रतिनिधियों के बीच तकरार की वजह बन गई है। जलनिकासी को लेकर भाजपा सांसद रवि किशन और भाजपा पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी के बीच फोन पर तीखी बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। बातचीत के दौरान सांसद की ओर से पार्षद से पूछा गया—“सपा ज्वाइन कर लिए क्या?” तो पार्षद ने पलटवार करते हुए कहा—“सांसद जी, आप बसपा ज्वाइन कर लिए क्या?” इसके बाद दोनों के बीच काफी देर तक आरोप-प्रत्यारोप और तीखी नोकझोंक होती रही। वहीं इस बहसबाजी ने बारिश की ठंड को गर्मी में बदल दिया है। हालांकि जी मीडिया वायरल वीडियो में लगाए जा रहे आरोप प्रत्यारोपों व अन्य दावों की पुष्टि नहीं करता है। एक अन्य हिस्से में गोरखपुर में लगातार हो रही बारिश ने शहर की जलनिकासी व्यवस्था की पोल खोल दी है। बेतियाहाता समेत कई इलाकों में जलभराव को लेकर लोग परेशान हैं। वार्ड नंबर 26 बेतियाहाता के भाजपा पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी ने सांसद रवि किशन से फोन पर बात की और पंपिंग सेट व रेगुलेटर चलाए जाने को लेकर सवाल उठाए। बातचीत का रुख जलनिकासी की समस्या से राजनीतिक तंज की तरफ मुड़ गया। वायरल वीडियो में सांसद की ओर से पार्षद से “सपा ज्वाइन कर लिए क्या?” कहते सुनाई देने का दावा किया जा रहा है।_paraphrase_ पार्षद ने कहा—“आप बसपा ज्वाइन कर लिए क्या?” इसके बाद बहस जारी रही और पार्षद सांसद से मिलने के लिए नौका विहार पहुंचे। वीडियो में पार्षद ने जनप्रतिनिधियों से भी कथित तौर पर गलत जानकारी देने का आरोप लगाया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के पूरे संदर्भ और उसमें कही गई सभी बातों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं हो सकी है। इधर, सांसद ने देर रात तक गोरखपुर के जलभराव वाले इलाकों का निरीक्षण किया और जलनिकासी की स्थिति का जायजा लिया तथा अधिकारियों को निर्देश दिए। नदी-जलभराव की समस्या के बीच जनप्रतिनिधियों के बीच हुई यह फोन बहस सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी है और अब सवाल यह है कि जमीन पर राहत पहुंचाने की कार्रवाई पर इसका कितना प्रभाव पड़ेगा।
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झांसी लौटे राजकुमार ने हिंदू धर्म में वापसी की, पत्नी सहित पुनः सनातन जीवन शुरू

Jhansi, Uttar Pradesh:पश्चिम बंगाल गए झांसी के एक शख्स ने अपना नाम राजकुमार से बदलकर रफीक कर लिया और एक मुस्लिम लड़की से शादी कर ली थी। अब वापस पहुंचे राजकुमार पटेरिया ने झांसी के सिद्धेश्वर मंदिर में फिर से हिंदू धर्म में वापसी की। इस दौरान राजकुमार की मुस्लिम पत्नी अफसरी ने भी हिंदू धर्म ग्रहण कर लिया और अनीता नाम रख लिया। दंपत्ति को इन बीस वर्षों में चार बच्चे भी हुए हैं। राजकुमार ने बताया कि वह झांसी के ग्राम राजापुर का रहने वाला है; पश्चिम बंगाल में काम धंधे के चक्कर में वहां रफीक नाम का कागज बन गया था। इसके बाद वहीं कलमा पढ़कर अफसरी खातून से निकाह कर लिया। सबके साथ वहाँ उठना बैठना होता था। अब फिर से झांसी आकर राजकुमार नाम से कागज बनवा लिया है। तीन बेटियां और एक बेटा है। आज सिद्धेश्वर मंदिर में शुद्धिकरण और हवन हुआ है।
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देवरिया में तेज बारिश से जलभराव और यातायात प्रभावित; ट्रेनें विलম্বित

Deoria, Uttar Pradesh:उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद में शनिवार की रात तेज बारिश के चलते शहरों की सड़कों व घरों में जल जमाव के बाद DM माधुसदन हुलगे निरीक्षण करने निकल पड़े. स्वयं पानी में पैदल चल जायजा लिया और नगर पालिका ईओ को जल्द से जल्द जल निकासी के निर्देश दिए जिसका VIDEO सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इसके अलावा दिन में तेज आंधी के चलते कई जगह रेलवे ट्रैक व सड़कों पर पेड़ गिर जाने से यातायात प्रभावित रहा तो कई ट्रेनें घंटों विलंब रही. बैतालपुर में पेड़ के टूट कर गिर जाने से 25 हजार के ओवरहेड तार से चिंगारी निकलने लगी जिसका वीडियो वायरल हो रहा है. सूचना पर रेलवे के अधिकारी व टेक्नीशियन पहुंचे और मरम्मत कार्य में जुट गए इसे ठीक करने में घंटों लग गए ट्रेने विलंब से रवाना हुई. वैशाली एक्सप्रेस, गोरखपुर पुणे एक्सप्रेस, मुंबई लोकमान्य तिलक टर्मिनस समेत कई ट्रेनों को अलग-अलग स्टेशनों पर रोकना पड़ा तो कई ट्रेनों का रूट बदलना पड़ा. गौरतलब है कि देवरिया जनपद में पिछले दो दिनों से हो रही रुक-रुककर बारिश व तेज आंधी के चलते धान की फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है. जनपद में एक कच्चे मकान के गिरने की खबर भी आई है फिलहाल इसमें कोई जनहानि नहीं हुई है. तीन दिनों की बारिश और तूफान के बाद फिलहाल आज मौसम सुहाना हुआ है और धूप निकली हुई है.
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जालंधर के निजी विश्वविद्यालय में स्टूडेंट्स का प्रोटेस्ट, गीता गाकर हंगामा और तोड़फोड़

Noida, Uttar Pradesh:जालंधर में स्टूडेंट्स ने प्रोटेस्ट किया प्रोटेस्ट के दौरान स्टूडेंट्स ने गीता गाकर एक निजी यूनिवर्सिटी के अंदर हंगामा किया और तोड़फोड़ की निजी यूनिवर्सिटी, जालंधर में कल रात एक बड़ा प्रोटेस्ट हुआ जिसमें निजी यूनिवर्सिटी के सभी स्टूडेंट्स ने इस प्रोटेस्ट में हिस्सा लिया और चिल्लाना शुरू कर दिया और उसके बाद निजी यूनिवर्सिटी के अंदर काफी तोड़फोड़ की गई, हालांकि अभी तक पूरे मामले का पता नहीं चल पाया है कि यह प्रोटेस्ट क्यों हुआ। मौके पर पुलिस वाले भी पहुंचे और उन्होंने बाद में इस प्रोटेस्ट को शांत कराया
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महानदी जलस्तर तेज बढ़ा, शिवरीनारायण डूबा; गंगरेल के सभी गेट खुले

Taga, Chhattisgarh:ब्रेकिंग जांजगीर-चांपा महानदी में सैलाब, शिवरीनारायण जलमग्न, शबरी पुल डूबा, कई मार्गों से संपर्क टूटा, भारी बारिश और गंगरेल बांध के गेट खोले जाने के बाद महानदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा, शिवरीनारायण का मेला मैदान और मंदिर के आसपास का इलाका महानदी के पानी में डूबा, शबरी पुल पूरी तरह पानी में डूबा, आवागमन पूरी तरह बंद, बलौदाबाजार, सारंगढ़ और रायपुर जाने वाले मार्गों से संपर्क बाधित, गंगरेल बांध के सभी 14 गेट खोले जाने के बाद महानदी में पानी का बहाव बढ़ा, कलेक्टर जन्मेजय महोबे और एसपी विजय कुमार पांडेय ने शिवरीनारायण के तटीय और संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण किया, प्रशासन ने घाटों और पुलों पर बैरिकेडिंग कर पुलिस बल तैनात किया है, जलस्तर और बहाव पर लगातार निगरानी जारी है, नदी किनारे बसे गांवों में अलर्ट जारी, ग्रामीणों को सतर्क किया जा रहा है, प्रशासन ने लोगों से महानदी, पुल और तेज बहाव वाले इलाकों से दूर रहने की अपील की है,
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चैनपुर के जमीन रजिस्ट्र्री घोटाला: असली रैयत रजिस्ट्री रद्द करने की मांग

Gumla, Jharkhand:चैनपुर में जमीन की कथित हेराफेरी का सनसनीखेज मामला, असली रैयतों की जमीन दूसरे के नाम कराए जाने का आरोप जिसके नाम से हुई रजिस्ट्री, उसी ने शपथ पत्र देकर कहा—“जमीन से मेरा कोई संबंध नहीं, नशे की हालत में कराए गए हस्ताक्षर” रौतिया समाज ने दी आंदोलन की चेतावनी, असली रैयतों ने रजिस्ट्री रद्द कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गुमला जिले में जमीन की कथित हेराफेरी और फर्जी तरीके से रजिस्ट्री कराए जाने के आरोपों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। खासकर चैनपुर प्रखंड में रौतिया समाज से जुड़े लोगों की जमीनों को लेकर समय-समय पर विवाद और शिकायतें सामने आती रही हैं। कई मामलों में प्राथमिकी भी दर्ज होने की बात सामने आई है। अब चैनपुर के मौजा छतरपुर की एक जमीन को लेकर ऐसा ही गंभीर मामला सामने आया है, जिसने जमीन की रजिस्ट्री प्रक्रिया और भू-अभिलेखों की जांच पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला मौजा छतरपुर, थाना चैनपुर, थाना नंबर 159, खाता नंबर 45 से जुड़ा है। जमीन की वास्तविक रैयत जिरामुनी देवी और उनके तीन पुत्र कुलदीप रौतिया, कमलेश रौतिया एवं लखन रौतिया हैं। आरोप है कि इस जमीन को ऐसे व्यक्ति के नाम से रजिस्ट्री करा दी गई, जिसका उक्त खाता और जमीन से कोई संबंध ही नहीं है। “जिसके नाम से रजिस्ट्री, उसी ने कोर्ट में किया खुलासा” मामले में नया मोड़ तब आया, जब वीरेंद्र कुमार रौतिया ने चैनपुर थाना में लिखित शिकायत देने के साथ गुमला न्यायालय में शपथ पत्र दाखिल कर पूरी घटना का खुलासा किया। शपथ पत्र में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि खाता नंबर 45 की जमीन से उनका कोई संबंध नहीं है और वे उक्त जमीन के मालिक या रैयत नहीं हैं। वीरेंद्र रौतिया के अनुसार, 24 अगस्त 2026 को चैनपुर के कुछ लोग उन्हें लाल रंग की कार से गुमला लेकर आए। आरोप है कि उन्हें एक होटल में ले जाकर भोजन कराया गया और शराब पिलाई गई। इसके बाद उनका आधार कार्ड और फोटो यह कहकर लिया गया कि उन्हें सरकारी राशि दिलाई जाएगी। उन्होंने शपथ पत्र में आरोप लगाया है कि होटल में ही किसी राजकुमार नामक व्यक्ति के माध्यम से उन्हें कुछ रुपये दिए गए। वहां मौजूद लोगों ने रुपये लेते हुए उनकी तस्वीर भी खींची और बाद में यह कहकर राशि वापस लेने की बात कही कि वे नशे में हैं तथा चैनपुर पहुंचने पर पैसे दे दिए जाएंगे। कई कागजात पर हस्ताक्षर कराने और रजिस्ट्री कार्यालय ले जाने का आरोप वीरेंद्र रौतिया का आरोप है कि इसके बाद उनसे कई कागजातों पर हस्ताक्षर कराए गए। फिर उन्हें निबंधन कार्यालय ले जाया गया, जहां उनकी तस्वीर खिंचवाई गई। इसके बाद उन्हें चैनपुर लाकर मात्र तीन हजार रुपये दिए गए और दोबारा शराब पिलाकर घर छोड़ दिया गया। वीरेंद्र के अनुसार, बाद में जब उन्हें पूरे मामले की जानकारी हुई तो वे यह जानकर हैरान रह गए कि खाता नंबर 45 की जमीन में उनके नाम का इस्तेमाल करते हुए रांची की सुनीता देवी के नाम लगभग एक एकड़ दस डिसमिल जमीन का बिक्री-पट्टा/रजिस्ट्री दस्तावेज तैयार कराया गया है। “मैं जमीन का मालिक नहीं, सुनीता देवी को भी नहीं जानता” अपने शपथ पत्र में वीरेंद्र रौतिया ने कहा है कि उक्त जमीन के वास्तविक मालिक जिरामुनी देवी और उनके पुत्र हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि वह सुनीता देवी को नहीं जानते और न ही उन्होंने अपनी जानकारी एवं इच्छा से उक्त जमीन की बिक्री के लिए कोई दस्तावेज तैयार कराया है। उन्होंने न्यायालय में अपनी पत्नी सविता देवी के साथ उपस्थित होकर होशो-हवास में शपथ पत्र निष्पादित करते हुए कहा है कि उक्त जमीन की रजिस्ट्री कराने में उनकी कोई भूमिका नहीं है। थाने में शिकायत, कार्रवाई का इंतजार वीरेंद्र रौतिया ने इस संबंध में चैनपुर थाना में लिखित शिकायत भी दी है। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक मामले में पुलिस की ओर से किसी कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। अब यह जांच का विषय है कि आखिर जमीन की रजिस्ट्री किस आधार पर हुई, दस्तावेजों में किसके नाम और किस क्षमता में हस्ताक्षर कराए गए तथा निबंधन के दौरान प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों का सत्यापन किस प्रकार किया गया असली रैयतों ने रजिस्ट्री रद्द करने की मांग की इधर, जमीन की वास्तविक रैयत जिरामुनी देवी और उनके पुत्र कुलदीप रौतिया, कमलेश रौतिया एवं लखन रौतिया ने कथित रूप से गलत तरीके से कराई गई रजिस्ट्री को तत्काल रद्द करने की मांग की है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर इसमें शामिल सभी लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करने की मांग प्रशासन से की है。 रौतिया समाज ने दी आंदोलन की चेतावनी मामले को लेकर रौतिया समाज में भी आक्रोश है। समाज के लोगों का कहना है कि यदि किसी की जमीन को गलत तरीके से दूसरे व्यक्ति के नाम हस्तांतरित करने का प्रयास हुआ है तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वाले लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। समाज ने चेतावनी दी है कि यदि कथित गलत रजिस्ट्री को रद्द नहीं किया गया और मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। अब इस पूरे मामले में प्रशासन, पुलिस और निबंधन विभाग की जांच से यह स्पष्ट होगा कि खाता नंबर 45 की जमीन की रजिस्ट्री किन दस्तावेजों और परिस्थितियों में हुई तथा वीरेंद्र रौतिया के नाम का इस्तेमाल किस प्रकार किया गया। मामला गंभीर होने के कारण स्थानीय लोगों की नजर अब प्रशासनिक जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी है।
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दमोह के सिमरी चिंता गांव में दो किलोमीटर सड़क नहीं, बारिश में दलदल

Damoh, Madhya Pradesh:विकसित भारत की कल्पना के बीच खाट पर जीवन, दलदल में रहने मजबूर लोग.. एंकर/ देश विकसित होने की दिशा में कदम बड़ा है जोर शोर से ये दलील देश वासियों को दी जा रही है और हर तरफ इन दिनों यही बातें हो रही है लेकिन जिन जगहों से भारत बनता है मतलब गांव देहात उनकी जमीनी हकीकत यही है कि जमीन दलदल है और बीमार लोग इस दलदल को पार करने खाट पर लेटने मजबूर है। ये पहेली नहीं बल्कि आप खुद देखिए कि लोग कैसे जीवन काट रहे है जहां बीमार शख्स एंबुलेंस पर नहीं बल्कि खाट पर लेटकर लोगों के कंधों पर सवार होकर जाते है, जहां स्कूल के बच्चे पीठ पर बैग तो टांगते है लेकिन उनके पैर में चप्पल जूते नहीं होते क्योंकि जिस सड़क से उन्हें गुजरना है वो सड़क उन्हें जूते चप्पल पहनने की इजाजत नहीं देती। महिलाएं सर पर बर्तन रखकर एक किलोमीटर दूर पीने का पानी भरने जाती है और वो भी ऐसी ही कीचड़ भरी सड़क से। खाट पर मरीज को लिटा कर ले जा रहे लोग ऐसा करने के आदि हो चुके है और अक्सर इन्हें ये सब करना पड़ता है। ये तस्वीरें है दमोह जिले के बटियागढ़ ब्लाक के सिमरी चिंता गांव की, गांव के नाम के साथ ही चिंता शब्द जुड़ा है और शायद इस शब्द से इस गांव के लोगों का गहरा नाता है और आजादी के बाद से आज तक यहां के लोगों को बारिश शुरू होते ही चिंता सताने लगती है कि अब जीवन थम सा जाएगा या उनके जीवन में चार से पांच महीनों तक सिर्फ परेशानी ही आने वाली है। सिमरी चिंता गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली करीब दो किलोमीटर की सड़क आज तक नहीं बनी और ऐसे में ही कई पीढ़ियां अपना जीवन काट चुकी है, बरसात के शुरू होते ही लोगों की चिंता बढ़ जाती है क्योंकि पहली बारिश में ही ये सड़क दलदल बन जाती है और फिर बारिश भले खत्म हो जाए लेकिन उसके बाद भी महीने भर बाद तक यानि कुल मिलाकर पांच महीनों तक लोगों को ऐसे ही परेशानियों में रहना पड़ता है। न सिर्फ बीमार लोगों को खाट पर ले जाना पड़ता है बल्कि स्कूली बच्चों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, मासूम बच्चे जब ऐसी सड़क से निकलेंगे तो आप खुद अंदाजा लगाये कि हालत क्या होती होगी वहीं आम लोगों की जिंदगी जैसे थम सी जाती है। गांव के लोगों के बीच कोई भी जाता है तो उन्हें उम्मीद होती है कि शायद उन्हें इस समस्या से निजात मिल जाएगी लेकिन उनके हिस्से में सिर्फ आश्वासन ही आते हैं। स्थानीय लोग अपनी परेशानियों को बताते हुए कहते है कि उनके गांव में भी नेता आते हैं वोट मांगते है वो लोग वोट करते भी है लेकिन उन्हें कोई दो किलोमीटर की सड़क नहीं दे पाया। इस गांव के लोग कई बार प्रदर्शन भी कर चुके लेकिन कोई फायदा नहीं मिला हालात जस के तस बने हुए है। एक बार फिर यहां के लोगों ने इलाके के एसडीएम को गुहार लगाई तो अब एसडीएम कह रहे है कि गांव में टीम को भेजा जा रहा है और यहां बुनियादी सुविधाओं के साथ सड़क निर्माण की प्रक्रिया भी होगी। सिमरी चिंता गांव के लोगों को फिर उम्मीद जागी है कि शायद अगली बारिश यानी अगले साल उन्हें परेशानी नहीं होगी ।
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पुरुलिया में मुख्यमंत्री के शून्य-सहनशीलता नीति के तहत टीएमटी बार रॉड कारखाने पर छापा

Purulia, West Bengal:পুরুলিয়া: মুখ্যমন্ত্রীর শুভেন্দু অধিকারীর জিরো টলারেন্স নীতি এবার শুরু হলো পুরুলিয়ায়। তৃনমূল আমল থেকে পুরুলিয়ার বুকে অবৈধভাবে রমরমিয়ে চলছিল নামিদামি ব্র্যান্ডের নামে কোটি কোটি টাকার নকল টিএমটি বার র Rod তৈরির কারখানা। সরকার বদলাতেই অভিযোগ জমা পড়তেই রাতারাতি অভিযানে নামে পুরুলিয়া জেলা পুলিশের গোয়েন্দা ও তদন্তকারী শাখা ডিইবি । দুদিন ধরে লাগাতার চলছে অভিযান । অভিযানে অবৈধ কারখানা থেকে বাজেয়াপ্ত করা হয় বিপুল পরিমাণে নকল টিএমটি বার র Rod। গত ২৫ সেপ্টেম্বর পুরুলিয়ার নিতুড়িয়া থানায় লিখিত অভিযোগ দায়ের করেন আইপি লিগ্যাল অ্যান্ড সার্ভেল্যান্স সার্ভিসেস প্রাইভেট লিমিটেডের জোনাল প্রধান টোটন চক্রবর্তী। সুপার এক্সটি ৬০০ নামে নকল টিএমটি বারের রড মজুত করা ও বাজারে সরবরাহের অভিযোগ উঠেছে পুরুলিয়া ইস্পাত অ্যালয় প্রাইভেট লিমিটেডের বিরুদ্ধে। ঘটনার তদন্তভার নেয় পুরুলিয়া জেলা পুলিশের গোয়েন্দা ও তদন্তকারী শাখা ডিইবি। গতকাল মাঝরাতে অভিযান চালিয়ে ওই কারখানা থেকে বাজেয়াপ্ত করা হয় ২৫ টন নকল টিএমটি বার রড। বাজেয়াপ্ত টিএমটি বারগুলি কোথা থেকে এসেছে, কোথায় তৈরি হয়েছে এবং কীভাবে সেগুলি বাজারে সরবরাহ করা হচ্ছিল, তা খতিয়ে দেখছে পুলিশ। এর পাশাপাশি এই ঘটনার পিছনে আরও কোনও ব্যক্তি বা বড়সড় উৎপাদন ও সরবরাহ চক্র জড়িত রয়েছে কি না, সেই বিষয়েও তদন্ত চালাচ্ছে পুলিশ।
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घाघरा में भारी बारिश से मकान ढह, कई परिवार बेघर, राहत-पुनर्वास की मांग

Gumla, Jharkhand:घाघरा में मूसलाधार बारिश बनी आफत, कई मकान धराशायी मलबे में दबा परिवार, ग्रामीणों ने रेस्क्यू कर बचाई जान; कई परिवार बेघर गुमला। जिले के घाघरा प्रखंड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने तबाही मचा दी है। बारिश के कारण कई गांवों में कच्चे और एस्बेस्टस की छत वाले मकान ढह गए। कई परिवारों के घर और घरेलू सामान मलबे में दबकर बर्बाद हो गए हैं। सबसे बड़ा हादसा गोया गांव में हुआ, जहां रफीक खान के घर की दीवार अचानक ढह गई। दीवार की चपेट में बगल स्थित जियाउल खान के मकान की दीवार और एस्बेस्टस की छत भी आ गई। देखते ही देखते मकान का मलबा परिवार के ऊपर जा गिरा और परिवार के सदस्य उसमें दब गए। हादसे के बाद ग्रामीणों ने तत्काल राहत-बचाव शुरू कर सभी को मलबे से बाहर निकाला। घायलों को इलाज के लिए सदर अस्पताल, गुमला भेजा गया। कहीं दीवार गिरी, कहीं छत ढही बारिश का असर घाघरा के कई गांवों में देखने को मिला। सरांगो नवाटोली में शंकर उरांव के मकान की दीवार गिरने से एस्बेस्टस की छत क्षतिग्रस्त हो गई और घर का सामान बर्बाद हो गया। मलगो गांव में लक्ष्मण राम के मकान की दीवार गिरने से छत का काठ और एस्बेस्टस नीचे आ गिरा। मलबे में करीब 10 बोरी चावल-गेहूं, लहसुन, प्याज और दो साइकिलें दबकर नष्ट हो गईं। वहीं, घाघरा छठ मोहल्ला निवासी ललिता देवी का मकान भी छप्पर और एस्बेस्टस टूटने से बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। सलगी गांव में जलजमाव के कारण जगमोहन लोहरा का मकान भी धराशायी हो गया। परिजनों का आरोप है कि सड़क किनारे बने नए छोटे पुल के ऊपर से पानी बहकर घर में घुस गया, जिससे मकान को नुकसान पहुंचा। बारिश ने छीना आशियाना, मदद की आस लगातार बारिश के कारण कई प्रभावित परिवारों के सामने रहने और घरेलू सामान बचाने का संकट खड़ा हो गया है। पीड़ित परिवारों ने प्रशासन से क्षतिग्रस्त मकानों का स्थल निरीक्षण कराने, राहत सामग्री उपलब्ध कराने और उचित मुआवजा व आवास देने की मांग की है। बारिश के बीच घाघरा में हुए नुकसान ने ग्रामीण इलाकों में आपदा प्रबंधन और राहत-बचाव की तैयारियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब प्रभावित परिवारों को प्रशासनिक मदद का इंतजार है।
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